“মরম অসিনা ঐখোয়না মখোয়গী অনিংবা, অপাম্বশিং থুংহন্নবা নেক্স জেনরেসন ইনফ্রাস্ত্রকচর শেমগৎতুনা খ্বাইদগী লায়রবা অমসুং খ্বাইদগী শোত্থরবশিংগী তঙাইফদবশিং থুংহন্নবা অচেৎপা ফিরেপ অমা অদুমক লৌরি”
“ইনফ্রাস্ত্রকচর অমা হেক্তা শেমগৎপা মতমদা মীয়ামবু মরু ওইনা লৌগদবনি। অমসুং ঐখোয়না ভারত্তা তৌরিবা অসি মসিমক্নি”
“করিগুম্বা ঐখোয়না ইনফ্রাস্ত্রকচর অসি মপাঙ্গল কনহল্লবদি, ঐখোয়না খুদোংথিবশিং অসি ঐখোয় খক্তগী নত্তনা তুংগী মীরোল কয়াগীসু ঙকথোকপা ঙমগনি”

এক্সেলেন্সীশিং,

এক্সপর্তশিং, একাদেমিকশিং, বিজনেস লীদরশিং, পোলিসী মেকরশিং, আমসুং মালামগী মফম কয়াদগী লাক্লিবা ঐগী নুংশিরবা মরুপশিং,

খুরুমজরি!

ইন্তর্নেস্নেল কনফরেন্স ওন দিজাস্তর রেজিলিয়েন্ত ইনফ্রাস্ত্রকচরগী মরিশুবা এদিশন অসিদা নখোয় ময়ামগী মরক্তা য়াওবা ফংবা অসিদা ঐহাক্না য়াম্না নুংঙাইবা ফাওই। অহানবদা ঐখোয়না নিংশিংগদবা অমনা সস্তেন্নেবল দেবেলপমেন্ত গোলশিংগী অচেৎপা ৱাশক্তি কনাগুম্বা অমত্তা শোত্থদুনা লৈহন্দবা হায়বসিনি। মরম অদুনা, ঐখোয়না মখোয়গী অনিংবা, অপাম্বশিং অদু মনিং থুংহন্নবা  নেক্স জেনরেশনগী ইনফ্রাস্ত্রকচর শাদুনা খ্বাইদগী হেন্না লাইরবা অমসুং শোত্থরবশিং অদুগী তঙাইফদবশিং অদুবু মনিং থুংহন্নবা অচেৎপা ফিরেপ অমা অদুমক লৌরি।  অমসুং ইনফ্রাস্ত্রকচর অসি কেপিতল এসেতশিং শেমগৎপা অমসুং ইনভেস্তমেন্ততা তুং কোইনগী ওইবা রিতর্নশিং ফংনবা খক্কি নত্তে। মসি মশিংগীদমক্তা নত্তে। মসি শেলগীদমক্তা নত্তে। মসি মীশিংগীদমক্তনি। মসি মখোয়দা ক্বালিতী লৈবা, থাজবা য়াবা অমসুং সস্তেনবেল সর্ভিসশিং চপ মান্নবা মওং অমদা ফংহনবনি। ইনফ্রাস্ত্রকচর চাউখৎপগী ৱারী অমহেক্তদা মী অসিনা মপুং ওইবা ওইগদবনি। অমসুং অদুমক্নি ঐখোয়না ভারত্তা তৌরিবসি। ভারত্তা ফন্দামেন্তেল সার্বিসশিংগী প্রোভিজন এজুকেশন্দগীনা হকশেল ফাওবা, থক্নবা ঈশিংদগীনা সেনিতেশন ফাওবা, ইলেক্ত্রিসিতীদগীনা ত্রান্সপোর্ত ফাওবা, অমসুং ময়াম অমা  হেনগৎলকপগী লোইন-লোইননা ঐখোয়না মহৌশাগী ওইবা অইং-অশাদা লাক্লিবা অহোংবা অসিসু হকথেংননা য়েংশিল্লি। মরম অদুনা সি.ও.পি.-২৬তা ঐখোয়না চাউখৎ-থৌরাংগী মতাংদা হোৎনরিবশিং অসিগা চপ মান্ননা ২০৭০ ফাওবদা ‘নেত জিরো’ ফংবা ঙম্নবা অচেৎপা ফিরেপ অমা লৌরি।

মরুপশিং,

ইনফ্রাস্ত্রকচর চাউখৎহনবনা য়াম্না শিংথানিংঙাই ওইবা মওদা মীওইবগী মতিক অদু ফুদোকহনবা ঙমগনি। অদুবু ঐখোয়না এখোয়গী ইনফ্রাস্ত্রকচরবুদি লাইনা খক লৌরোইদবনি। মসিগী সীস্তেমশিং অসিদা ক্লাইমেত চেঞ্জ য়াওনা খঙনরবা অমসুং খঙনদবা  শিংনবশিং লৈ। ঐখোয়না ২০১৯দা সি.আর.দি.আই. হৌদোকপা মতমদা, মসি ঐখোয়না ইশানা থেংনরকপশিং অদুদা য়ুমফম ওইখি অমসুং তঙাইফদশিং অদু ফাওখি। ঈশিং-ঈচাউদা থোং য়াওখিবা মতমদা, সাইক্লোনগী অকনবা নুংশিৎনা পাৱর লাইন তৎপা মতমদা, লামৈনা কম্যুনিকেশন তাৱরদা অমাং-অতা থোকহনবা মতমদা, মসিনা হকথেংননা মী লিশিং কয়া অমগী পুনশী অমসুং মখোয়গী হিংননবগী লম্বিদা অকাইবা পী। অসিগুম্বা ইনফ্রাস্ত্রকচরদা অমাং-অতা থোকহনবা অসিনা মরম ওইরগা চহী কবা অমা শোকহনবা য়াই, অমসুং মী মিলিয়ন কয়া অমদা অকাইবা পীরগনি। মরম অদুনা ঐখোয়গী মাংদা লৈরিবা শিংনবা অসি ময়েক শেংলে। মতম অসিগী অনৌবা তেক্নোলোজী ৱাখল-লৌশিং অসিনা তুং কোইনা চৎকদবা অরিংবা ইনফ্রাস্ত্রকচর শেম্বা ঙমগদ্রা? মসিগী শিংনবশিং অসি মশক খঙবনা মরম ওইরগা সি.আর.দি.আই. অসি শেমগৎখিবনিমসিগী কোলিশণ অসিনা চাউথোরক্তুনা অমসুং মালেম শিনবা থুংনদগী পাক শন্না সপোর্ত তৌরকপগী ৱাফম অসিনা মসিবু ঐখোয় পুম্নমক্কা মরী লৈনবা ৱাফম্নি হায়বদু ময়েক শেংনা তাক্লি।     

মরুপশিং,

চহি অনি মখাইগী তেল্লবা মতম অসিদা, সি.দি.আর.আই.না মরু ওইবা অনৌবা খোংথাংশিং লৌখৎখি অমসুং বাম্না মমল য়াম্লবা কন্ত্রিব্যুশনশিং তৌখি। মমাং চহিগী সি.ও.পি.-১৬দা হৌদোকখিবা ‘ইনফ্রাস্ত্রকচর ফোর রেজিলিয়েন্ত আইলেন্দ স্তেতস’কী মতাংদা অনৌবা খোংথাংশিং অসি অপিকপা ঈথৎকী লৈবাকশিংগা লোইননা থবক তৌমিন্ননবা লৌখিবা ঐখোয়গী অচেৎপা ফিরেপ অদুবু ময়েক শেংনা ফোংদোক্লি। পাৱর সীস্তেমগী রেজিলিয়েন্স হেন্না কনখৎহন্নবগী মতাংদা সি.দি.আর.আই.গী থবকশিং অদুনা সাইক্লোন মনুংদা মৈ মুৎপগী মতম হন্থহন্দুনা কোস্তেল ইন্দিয়াদা লৈবা কম্যুনিতীশিংদা কান্নহনখ্রে। মসিগী থবক অসিনা মথংগী ফেজ য়ৌবা মতমদা মসিনা চহি খুদিংগী ত্রোপিকেল সাইক্লোনশিং মায়োক্নরিবা মী মিলিয়ন ১৩০দা কান্নবা পীবা ঙম্লগনি। রেজিলিয়েন্ত এয়রপোর্তশিংগী মতাংদা সি.আর.দি.আই.গী থবক অসি মালেম পুম্বদা লৈরিবা ঐয়রপোর্ত ১৫০বু নৈনবনি। মসিনা গ্লোবল কেনক্তিবিতীগী রেজিলিয়েন্সতা কন্ত্রিব্যুত তৌবগী পোতেন্সিয়েল লৈ। সি.আর.দি.আই.না লুচিংবা ‘গ্লোবল এসেসমেন্ত ওফ দিজাস্তর রেজিলিয়েন্স ওফ ইনফ্রাস্ত্রকচর সীস্তেমস’ অসিনা য়াম্না মরু ওইগদা গ্লোবল নোলেজ অমা শেম্বদা মতেং পাংগনি। মেম্বর স্তেতশিংদগী সি.আর.দি.আই. ফেলোশিংনা হেন্না চাউথোকহনবা য়াবা সোল্যুশনশিং পুথোরক্লি। মখোয়না কমিত্তেদ প্রোফেস্নেলশিংগী গ্লোবল নেতৱার্ক অমা শেম্লি মসিনা ঐখোয়গী ইনফ্রাস্ত্রকচর সীস্তেমশিংগীদমক্তা অরিংবা তুংগী লম্বি অমা শেম্বদা মতেং পাংলি।

মরুপশিং,

ঐখোয়গী তুংগী লম্বিবু রেজিলিয়েন্ত ওইহন্নবা, ঐখোয়না ‘রসজিলিয়েন্ত ইনফ্রাস্ত্রকচর ত্রাঞ্জিশন’গী মাইকৈদা থবক তৌগদবনি, হায়রিবা অসিনা মসিগী কনফরেন্স অসিগী মরু ওইবা ফোকসনি। রেজিলিয়েন্ত ইনফ্রাস্ত্রকচর অসিনা ঐখোয়না পাক শন্না পাংথোরক্লিবা থবকশিং অদুগী মরু ওইবা হীরম অমা ওইবা য়াই। করিগুম্বা ঐখোয়না ইনফ্রাস্ত্রকচর অসি রেজিলিয়েন্ত ওইহল্লবদি, ঐখোয়না ইশাগীদমক্তা  খুদোংথিবদগী কনবদা নত্তনা তুংগী মীরোলশিংগীদমক্তা খুদোংথিবদগী কল্লগনি। মসি ঐখোয়না মঙফাওনহনগদবা পুম্নমক্কী ওইবা মঙলান অমসুং ভিজন্নি। ঐহাক্না লোইশিনদ্রিঙৈগী মমাংদা, মসিগী কনফরেন্স অসিবু শিনমিন্নবগীদমক্তা সি.দি.আর.আই. অমসুং য়ুনাইতেদ স্তেতসকী সরকারবু থাগ৭পা ফোংদোক্লি।

মসিগী থৌরম অসিবু শিনমিন্নখিবা পার্তনর পুম্নমক্তা ঐহাক্না য়াইফ-পাউজেল পীজরি। ঐহাক্না নখোয় পুম্নমক্তা মাইপাকপা অমসুং খন্ন-নৈনবা অসিদগী কান্নবা পুরকপা ওইরসনু হায়না য়াইফ-পাউজেল পীরি।

থাগৎচরি।

য়াম্না থাগৎচরি।

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।