Text of PM’s address at the 87th ICAR Foundation Day Celebrations at Patna

Published By : Admin | July 25, 2015 | 17:25 IST
PM Modi speaks at 87th ICAR Foundation Day Celebrations in Patna
The country now needs a second Green Revolution which must come from eastern India: PM
Scientific innovations in agriculture sector should move from lab to land for benefit of farmers: PM
India must aim to become totally self-sufficient in the agriculture sector, says PM Modi

उपस्थित सभी महानुभाव

सभी महानुभाव, आज जिनका मुझे सम्‍मान करने का अवसर मिला है। जिन्‍होंने अपने-अपने क्षेत्रों के द्वारा देश के कृषि जगत को कुछ न कुछ मात्रा में सकारात्‍मक योगदान किया है। ऐसे पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाले सभी महानुभावों को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। बहुत-बहुत बधाई देता हूं।



ये समारोह हर वर्ष होता है और बड़े लंबे अरसे से होता है लेकिन दिल्‍ली में ही होता है। तो पिछली बार जब मैं गया था पहली बार तो मैंने कहा था भई हम जरा दिल्‍ली से बाहर निकलें और उसका आरंभ आज बिहार में पटना की धरती से हो रहा है। मैं राज्‍य सरकार का भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि उन्‍होंने इस समारोह को सफल बनाने में योगदान दिया और मैं विभाग के मित्रों का भी आभारी हूं कि उन्‍होंने एक पहल की है। तो उसके कारण उस राज्‍य के अंदर भी कुछ दिन चर्चा चलती है, अनेक लोगों के सामने नई-नई बातें आती है। देशभर से ये कृषि वैज्ञानिक यहां आते है उनको भी स्‍थानीय लोगों से बातचीत करने के कारण अपने विषय में क्‍या-क्‍या नया चल रहा है, उसकी जानकारियां मिलती है। तो एक प्रकार से ये अलग-अलग स्‍थान पर जाने से हमें स्‍वाभाविक रूप से हमें अतिरिक्‍त लाभ होता है और उसका प्रारंभ आज यहां से हुआ है और मुझे ये भी खुशी है कि ये बिहार से प्रारंभ हो रहा है। क्‍योंकि पूसा का जन्‍म इसी धरती पर हुआ और एक विदेशी व्‍यक्ति ने गुलामी के कालखंड में भारत के कृषि सामर्थ्‍य को भांपा होगा, उसको अंदाज आया होगा और Phillip USA के द्वारा बनी हुई ये कामगिरी पूसा के नाम से प्रचलित हो गई। लेकिन उन्होंने बिहार क्‍यों चुना होगा, कोई अचानक तो हुआ नहीं होगा। जब वो सोचा गया होगा तब उनको ध्‍यान आया होगा ये सबसे ऊर्वरा जगह होगी, यहां के लोग प्रयोगशील होगें, प्रगतिशील होगें, कृषि क्षेत्र में नया करने की सोच रखते होगें। हिन्‍दुस्‍तान के अन्‍य भू-भागों से यहां की कृषि की कोई न कोई extra शक्ति होगी तभी जा करके उन्‍होंने उस काम को यहां प्रारंभ करना सोचा होगा, ऐसा मैं अनुमान करता हूं। अब करीब-करीब 100 साल होने जा रहे है। इसलिए मैं पूरे record न देखूं तब तक तो मैं कह नहीं सकता कि वो क्‍या है लेकिन मैं अनुमान करता हूं। इसका मतलब ये हुआ कि ये भू-भाग और यहां के नागरिक दोनों में कृषि क्षेत्र में नई सिद्धियां प्राप्‍त कराने का सामर्थ्‍य पड़ा हुआ है।

हम कभी-कभी अपनी चीजों को भूल जाते है। चीजें कोई अचानक शुरू नहीं होती होगी किसी-न-किसी कारण विशेष कारण से शुरू हुई होगी। उसके मूल में अगर जाते है तो ध्‍यान आता है और मैं राधामोहन सिंह जी को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि आपदा ग्रस्‍त कारणों के साथ कारण पूछा यहां से दिल्‍ली चला गया। अब दिल्ली में तो खेती होती नहीं है लेकिन पूसा वहां है और जहां खेती होती थी जो देश का पेट भरता था वहां से पूसा चला गया। तो हमने वापिस लाने की कोशिश की है और मुझे विश्‍वास है कि भले 90 साल पहले किसी को विचार आया होगा उसमें जरूर कोई न कोई दम होगा, कोई ताकत होगी। मुझे फिर से एक बार उसको तलाशना है, देखना है और देश के वैज्ञानिक मेरी इस बात से सहमत होगें कि हम इन नए क्षेत्रों में पदार्पण कैसे करें। कुछ बातें आप लोगों ने आज अच्‍छी शुरूआत कर रहे है। मैं नहीं जानता हूं कि हमारे वैज्ञानिक मित्रों को कितना पसंद आया होगा या कितनी सुविधा होगी। क्‍योंकि वैज्ञानिक अपने काम में इतना खोया हुआ होता है। करीब जिदंगी का महत्‍वपूर्ण समय उसका lab में ही चला जाता है। न वो अपने परिवार को काम आता है, न वो खुद को काम आता है। वो उसमें डूब जाता है, पागल की तरह लगा रहता है और तभी जा करके आने वाली पीढि़यों का भला होता है। एक जब अपने सपनों को खपा देता है तब औरों के सपने बन पाते हैं और इसलिए वैज्ञानिकों का जितना मान-सम्‍मान होना चाहिए, वैज्ञानिकों के योगदान की जितनी सराहना होनी चाहिए, उसको जितना बल मिलेगा, उतनी भावी पीढि़यों का कल्‍याण होगा।

दुर्भाग्‍य से हमारे देश में, हमारी अपनी कठिनाइयां हैं देश की, गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ना है और इसलिए इन क्षेत्रों में जितना बजट देना चाहिए उतना दे नहीं पाते हैं। उसके बावजूद भी छोटी-छोटी lab में बैठ करके भी हमारे scientist लगातार काम करते रहते हैं और कोई न कोई नई चीजें देते रहते हैं।

लेकिन एक और कदम की ओर जाने का मैंने पिछली बार बात कही थी आपने उसको योजना के रूप में रखा, Lab To Land. laboratory में कितना ही yield आए, laboratory में चीकू नारियल जैसा बन जाए, लेकिन अगर धरती पर नहीं होता है तो वो काम नहीं आता है। इसलिए हमारी सच्‍ची कसौटी ये है कि ये जो हम सफलता पाई है lab में, उसको हमें धरती पर भी कसना चाहिए और किसानों के द्वारा कसना चाहिए। एक प्रकार से एक scientist का fellow traveler हमारा किसान बनना चाहिए। extension of the mind of the scientist should be a farmer. ये हमें व्‍यवस्‍था खड़ी करनी चाहिए और इसलिए इस योजना के तहत देश के जितने agriculture scientist है, उनकी टोली बनाकर के उनको एक-एक block गोद लेने की योजना है। उसकी lab कहीं पर भी होगी, लेकिन उसको लगेगा भई मैं जो research कर रहा हूं, उस इलाके के किसानों में उस प्रकार की रुचि है तो वो वहां उनके साथ जुड़ेगा, progressive farmer के साथ जुड़ेगा, किसानों के साथ जुड़ेगा और उसमें जो ज्ञान की संपदा है वो जमीन पर किसानों के माध्‍यम से।

और किसान का एक स्‍वभाव है, उसको भाषण-भाषण काम नहीं आते। वो तो जब तक अपनी आंख से देखता नहीं है, वो किसी चीज को मानता नहीं है। और एक बार उसने अपनी आंख से देखा तो वो फिर अपना risk लेने के लिए तैयार हो जाता है, वो संकट उठाने के लिए तैयार हो जाता है। और इसलिए आवश्‍यकता होती है कि हमने हमारी हर lab को, हर farm को lab में कैसे convert करना है, हर किसान को scientist के रूप में कैसे convert करना है। और उस यात्रा को मैं जानता हूं, आप जिस साधना को कर रहे हैं, जिस तपस्‍या को कर रहे हैं वहां से बाहर जाना थोड़ा कठिन है, लेकिन जिस दिन आप जाओगे। कोई scientist अच्‍छे से अच्‍छी दवाई की 100-100 खोज करे और परिवार को भी पता नहीं होता है कि इसने कहां काम किया है। उनको लगता है हां यार, रात देर से आते हैं अब खाना खाएंगे, सो जाएंगे। लेकिन जब पता चलता है कि फलां व्‍यक्‍ति जिंदगी से जूझ रहा था और उसकी दवाई काम आ गई, उसकी जिन्‍दगी बच गई और जब पता चलता है इस दवाई से आने वाले दिनों में ऐसे लाखों लोगों की भी जिन्‍दगी बचने वाली है तो वो परिवार भी सीना तान करके, हां हमारे उन लोगों ने किया है, मेरे पति ने किया है, मेरे भाई ने किया है। कब होता है, जब बाहर कोई उसका achievement दिखता है। आपको भी अपने lab में किया हुआ संतोष जब तक खेत में नहीं दिखता और किसान के हाथ में नहीं दिखता है, आपको संतोष नहीं हो सकता है। और वो व्‍यवस्‍था करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं।

भारत ने first green revolution किया, उसका फायदा हमें मिला है। लेकिन अब देश second green revolution के लिए ज्‍यादा इंतजार नहीं कर सकता है। वैसे भी late हो चुके हैं। second green revolution के लिए हमें अपने आपको सज्‍ज करना होगा। किस क्षेत्र में जाना है, कैसे जाना है। first green revolution की पहली आवश्‍यकता थी कि देश को अन्‍न बाहर से लाना न पड़े, देश का पेट भरे। second green revolution का इतना मतलब नहीं हो सकता, उसका मकसद कुछ और भी हो सकता है। क्‍यों न हमारे देश के agro-economists, हमारे देश के agro-technicians, हमारे देश के agro-scientist, food security से जुड़े हुए scientist, ये सब मिलकर के workshop करें, हर level पर workshop करें। और design workout करें कि भई हां, second green revolution का model क्‍या है, priorities क्‍या हो, हमें किन चीजों के उत्‍पादन पर जाना चाहिए। उत्‍पादकता बढ़ानी है तो किस चीजों की बढ़नी चाहिए। सारे global परिवेश में, आज विश्‍व में क्‍या-क्‍या चीजों की आवश्‍यकता है और दुनिया के बहुत देश है, जिनको आर्थिक रूप से वो कुछ चीजें करना मुश्‍किल है तो वो कहते हैं कि बाहर से ले आओ भई, यहां नहीं करो। तो ऐसे कितने देश हैं जिनको ढूंढेंगे और हम बाहर से भेजेंगे।हमें एक विस्‍तृत सोच के साथ हमारे second green revolution को इस रूप में तैयार करना चाहिए।

हमारे architecture college बहुत कुछ पढ़ाती है। building के लिए तो काफी कुछ होता है, road कैसे बने उस पर भी होता है। मैं मानता हूं कि कभी इस agro scientists ने, progressive farmers ने, government ने, architecture colleges के साथ बैठकर के उनका भी syllabus बनाने की आवश्‍यकता है कि हमारे agriculture, infrastructure का architecture क्‍या हो? हमारी canal बनती हो तो कैसी आधुनिक canal बने, किस material से बने। road बनाने के लिए तो काफी research होते हैं लेकिन canal बनाने के लिए research बहुत कम होते हैं। ये मुझे पूरा paradigm shift करना है। एक मूलभूत चीजों में बदलाव लाना है और इसलिए हमारे जो architecture colleges है, उनका भी जिम्‍मा बनता है कि agro related हमारे infrastructure कैसे हो।

पुराने जमाने में, घर में हमारे गांव के अंदर, किसान परिवारों में मिट्टी की बड़ी-बड़ी कोठियां तैयार होती थीं और उसमें क्‍या material डालना है उसकी बड़ी विशेषता रहती थी। specific प्रकार का material डाल करके वो कोठी बनाई जाती थी और उस कोठी में अन्‍न भरा जाता था। वो सालों तक खराब नहीं होता था और निकालने की technique भी ऐसी होती थी, वो ऊपर से नहीं निकालते थे, नीचे से निकालते थे ताकि पुराना माल पहले निकलता था, नया माल ऊपर आता जाता था। देखिए सामान्‍य लोगों की बुद्धि कितनी कमाल की रहती थी। ये जो कोठार बनते थे या कोठी बनती थी जिसमें सामान भरा जाता था वो कौन सी चीजों का, उनको ज्ञान था कि जिसके कारण हमारे agro-product को इतने लंबे समय तक संभाल पाते थे। preservation के संबंध में हमारे यहां technically कितना काम हुआ है। हमारे यहां अचार, अचार की जो परंपरा है। उस समय ये technology कहां थी जी। गांव की गरीब महिला भी अचार इस प्रकार से preserve करती थी कि साल भर अचार खराब नहीं होता था। मतलब कि विज्ञान उस घर की गली तक पहुंचा हुआ था। हम बदले हुए युग में, इन चीजों को और अधिक अच्‍छे तरीके से कैसे करें, ताकि हमारे agriculture sector में।



क्योंकि आज wastage एक बहुत बड़ी चिन्‍ता का विषय है। value addition पर हमें जाना पड़ेगा। किसान इतनी मेहनत करे और उसकी पकाई हुई चीजें अगर बर्बाद होती है तो कितना बड़ा नुकसान होता है। मैं agro scientists से आग्रह करता हूं कि आप एक काम करके research कीजिए और मुझे छ महीने में एक report दे सकते हैं क्‍या ? मैं एक दिशा में आगे बढ़ना चाहता हूं।

हमारे किसान फल पैदा करते हैं लेकिन फल की उम्र बहुत कम होती है। बहुत ही कम समय में खराब हो जाते हैं। उसका packaging भी बड़ा महंगा होता है क्‍योंकि एक-एक चीज को संभालना पड़ता है। अगर दब गए तो और खराब हो जाते हैं। वो फल जिसमें से juice निकलता है। ये जितने aerated water बाजार में बिकते हैं। भांति-भांति का taste होता है। मुझे तो नाम भी पूरे याद नहीं है लेकिन कई प्रकार की bottles में लोग पीते रहते हैं। coca-cola और fanta और क्‍या-क्‍या नहीं, thums-up. क्‍या हम natural fruit, उसका 1 percent, 2 percent, 5 percent natural juice उसमें mix कर सकते हैं क्‍या। अगर ने natural fruit का juice उसमें mix होता है इस aerated water में। उसका market बहुत बड़ा है। मैं विश्‍वास से कहता हूं हिन्‍दुस्‍तान में जो किसान फल पैदा करता है उसको कभी wastage की नौबत नहीं आएगी, उसका माल खेत से ही बिक जाएगा और 5 percent अगर उसमें mix हो गया। उसका माल खेत से ही बिक जाएगा और 5% उसमें अगर mix हो मेरे फल पैदा करने वाला किसान कभी दु:खी नहीं होगा। लेकिन ये साइंटिस्‍ट जब तक खोज करके नहीं बताएंगे वो कंपनियों को मनवाना जरा कठिन हो जाता है। क्‍या हम इस प्रकार की research कर सकते है, हम समझा सकते है कि these are the results । आप अगर 5% उसके अंदर natural fruit juice डालते है तो आपके market को कोई तकलीफ नहीं होगी, आपकी चीज के test में कोई तकलीफ नहीं होगी आपकी product और अच्‍छी बनेगी और उसमें आपका nutrition value भी जाएगा, जो ultimately आपके business को benefit करेगा। हम किस प्रकार से नई चीजों को करें उस पर हमें सोचने की आवश्‍यकता है।

हमने जो initiatives लिए है कुछ चीजों पर हम ये मान के चले के दुनिया में, बहुत बड़ी मात्रा में उत्‍पादकता पर बल दिया जाता है। हमें भी जमीन कम होती जा रही है, परिवार विस्‍तृत होते जा रहे हैं, एक-एक परिवार में जमीन के टुकड़े बंटते चले जा रहे हैं। हमें पर एकड़ उत्‍पादकता कैसे बड़े, उस पर बल दिए बिना हमारा किसान सुखी नहीं हो सकता है। हमें वो देना पड़ेगा।

पिछली बार मैंने मेरे मन की बात में कहा था किसानों से कि देश को pulses और oil seeds की बड़ी आवश्‍यकता है। तिलहन और दलहन... देखिए मैं इस देश के किसानों को जितना नमन करूं उतना कम है। उस बात को उन्‍होंने माना और इस बार अभी तक जो खबर आई हैं कि record-break showing दलहन और तिलहन का हमारे किसानों ने दिया है। वरना वो crop change करने को तैयार नहीं था लेकिन उसने माना कि भई देश को जरूरत है चलिए हम बाकि छोड़ देते है इस बार दलहन और तिलहन में चले जाते है और बहुत बड़ी मात्रा में शायद मुझे लगता है डेढ़ गुना हो जाएगा, दो गुना अब ये-ये मैं समझता हूं कि अपने-आप में और भारत को import करना पड़ता है।

हमारे agriculture साइंटिस्‍टों ने और progressive farmers ने और government ने बैठ करके तय करना चाहिए। भारत चूंकि कृषि प्रधान देश है। हम तय करें कि agriculture sector की कितनी चीजें अभी भी हम import करते है और हम तय करें कि फलाने-फलाने वर्ष के बाद हमें agriculture sector में कम से कम कुछ भी import नहीं करना पड़ेगा। हम स्‍वयं आत्‍मनिर्भर बनेंगे, हमारे किसान को इस काम के लिए प्रेरित करना पडेगा। हमें targeted काम करना पड़ेगा जी तब जा करके हमारे किसान को आर्थिक रूप से लाभ होगा। अगर वो नहीं करेगे तो लाभ नहीं होगा। आज भी अगर कृषि प्रधान देश को five star होटलों में कुछ सब्जियां विदेश से मंगवानी पड़ती है। हमारा किसान भी तो तैयार कर सकता है, उसको जरा ज्ञान मिल जाए, पद्धति मिल जाए वो कर सकता है। देश की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता किसान में है, आवश्‍यकता है कि ज्ञान का भंडार और किसान का सामर्थ्‍य इसको जोड़ना और उसको जोड़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। कुछ चीजें बड़ी सरल है जिसको हम कर सकते है और करना चाहिए।

कभी-कभार हमारे किसान को जीवन में ज्‍यादातर हमारे यहां कोई उतना irrigation network तो है नहीं ज्‍यादातर हमारा किसान परमात्‍मा की कृपा पर निर्भर है, बारिश हुई तो अच्‍छी बात ,है नहीं हुई तो मुसीबत है। उसकी extra income के जो रास्‍ते है। उसमें पशुपालन हो, poultry farm हो, मतस्‍य उद्योग हो ये थोड़ा बहुत प्रचलित है। लेकिन हमारा एक बात पर ध्‍यान नहीं गया है और वो है शहद पर.. honey bee.. globally बहुत बड़ा market है और कम-से-कम मेहनत वाला काम है और उसमें बिगड़ने का कोई chance नहीं है और उत्‍पादन भी बिकेगा अगर शहद bottle में भर दिया तो 2-5-10 साल तक तो उसको कुछ नहीं होता है। आज देश में, मुझे बताया गया शायद 5 लाख किसान शहद की activity से जुड़े हैं। ये हम target करके 5 करोड़ पर पहुंचा सकते हैं। एक साल, दो साल, तीन साल में। उसकी income कितनी बढ़ेंगी आप कल्‍पना नहीं कर सकते और दुनिया में market है। ऐसा नहीं कि market नहीं है। हमारे किसान को हम इस प्रकार से नई-नई चीजों के साथ कैसे.. और उसके खेत में वैसे ही होने वाला है।

मैं नहीं जानता हूं कि हमारे scientist मित्र मेरी इन बातों को स्‍वीकार करेंगे कि नहीं करेंगे क्‍योंकि मैं न तो ऐसे ही किसानों के साथ बैठते-उठते सुनी हुए बातें मैंने जो भी ज्ञान अर्जित किया है, उसी की बात मैं कर रहा हूं।

हमारे जिस इलाके में elephants, हाथियों के कारण खेती को बड़ा नुकसान होता है जिन-जिन इलाकों में हाथी है। मैंने सुना भी है, पढ़ा भी है और मेरा मानना है कि उसमें सच्‍चाई भी है। ऐसे खेतों में अगर honey bee हो तो honey bee की आवाज़ से हाथी भाग जाता है। वो आता नहीं है। अब मुझे बताइए farmer का protection होगा कि नहीं होगा। अब ये इसको कौन समझाएगा, उससे बात कौन करेगा और कम से कम investment से इतनी बड़ी चीज को बचाता है और international science magazine इस बात को स्‍वीकार कर चुके है कि हाथी उस आवाज़ को सहन नहीं कर सकता है तो वहीं से आते ही चला जाता है पीछे। हमारे कई इलाके ऐसे हैं जहां हाथियों के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। हम ऐसे व्‍यवहार्य चीजें और उसके साथ-साथ उसको शहद का व्‍यापार भी मिल जाएगा, उसकी आर्थिक संपदा को भी फायदा होगा।

दूसरा काम है, जो मेरे स्‍वच्‍छ भारत मिशन से भी जुड़ा हुआ है और organic farming से भी जुड़ा हुआ है। अब ये मान के चलिए कि दुनिया में organic चीजों का एक बहुत बड़ा बाजार खुल गया है। holistic health care ये by and large समाज का स्‍वभाव बना है।

अभी हमने देखा योगा दिवस पर दुनिया ने क्‍या इसको महत्‍व दिया है। वो इसी बात का परिचायक है कि holistic health care की तरफ पूरी दुनिया जागरूक हुई, उसमें युवा पीढ़ी ज्‍यादा जागृत है। कुछ लोग तो यहां तक exchange ला रहे हैं कि वो chemical से color किए हुए कपड़े पहनने के बजाए colored cotton से बना हुआ कपड़ा ही पसंद करते हैं और अब तो cotton भी कई colors में आना शुरू हुआ है। natural grow हो रहा है, genetic engineering के कारण। लेकिन organic requirement दुनिया में बहुत बढ़ रही है। हमारा किसान जिस पैदावार से एक रुपया कमाता है अगर वो organic है तो उसका एक डॉलर मिल जाता है। economically बहुत viable हो रहा है। लेकिन, उसके कुछ नियम है, कुछ आवश्‍यकताएं हैं। लेकिन एक काम हम कर सकते हैं क्‍या? आज मान लीजिए देश में vermin-composting . मान लीजिए आज 50 मिलियन टन होता है।

मैं आपको अनुमान कहता हूं। क्‍या vermin-composting हम 500 मिलियन टन कर सकते हैं क्‍या? आज अगर केंचुएं, earth warms . ये मान लीजिए देश में 10 मिलियन टन है। ये 100 मिलियन टन हो सकते हैं क्‍या। आपको कुछ नहीं करना है। सिर्फ लोगों को ज्ञान देना है, बाकी काम तो वो केंचुएं खुद कर लेंगे। और कोई भी छोटे नगर के बगल में ये काम चलता है, तो उस शहर आधा कूड़ा-कचरा वो ही साफ कर देंगे। स्वच्‍छता का काम भी चल जाएगा, composed fertilizer भी तैयार हो जाएगा और जो केंचुए का काम करते हैं उनके केंचुएं भी बिकते हैं। बहुत बड़ी मात्रा में केंचुएं बिकते हैं। एक ऐसा क्षेत्र है कि जो organic farming को बढ़ावा दे सकता है, हमारा कूड़ा-कचरा साफ हो सकता है, हमारे chemical fertilizer की requirement कम होती है, किसान की खेती सस्‍ती हो सकती है। इन चीजों को साथ लेकर के हम सब वैज्ञानिक जगत के लोग। क्‍योंकि ये बात आपके level पर आएगी तो गले उतरेगी और उसको स्‍वीकार करेगा। आप प्रयोग करके कहीं लगाओगे वो करेगा। कुछ लोग कर रहे हैं। स्‍वच्‍छता अभियान का सबसे बड़ा दूत केंचुआ बन सकता है और हमारा बहुत बड़ा काम वो कर सकता है और उससे organic farming को एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। हमारी जमीन बर्बाद हो रही है। chemical के कारण उसकी उर्वरा ताकत कम होती रही है, उसकी हमें चिन्‍ता करने की आवश्‍यकता है। ये काम हो सकता है सहज रूप से। ये चीजें प्राकृतिक व्‍यवस्‍थाओं का उपयोग करते हुए की जा सकती हैं। मैं आग्रह करता हूं कि हम हमारे कृषि जीवन में जो second green revolution की ओर जा रहे है। उसको एक नए दायरे पर ले जा सकते है।

कई वर्षों से pulses में yield में भी बढ़ावा नहीं हो पा रहा है और pulses में सबसे बड़ी challenge है कि उसके protein content कैसे बढ़े? क्‍योंकि भारत जैसा देश जहां दलहन से ही protein प्राप्‍त होता है गरीब को, protein content ज्‍यादा हो इस प्रकार का दलहन का निर्माण कैसे हो? ये हमारे scientist lab के अंदर mission के रूप में काम करें। हम उसमें achieve कर सकते है परिणाम मिल सकता है।

हमारे देश का तिरंगा झंडा और उसमें blue colour का चक्र। मैं मानता हूं देश में चर्तुर क्रांति की आवश्‍यकता है। तिरंगें झंडे के तीन रंग जो है और blue colour का चक्र है उन चार रंगों की चर्तुर क्रांति की आवश्‍यकता है।



एक तो saffron revolution, अब saffron revolution का अर्थ पता है भांति-भांति के लोग अलग-अलग करेंगे। ऊर्जा का रंग है saffron और कहने का मेरा तात्‍पर्य है ऊर्जा क्रांति। ऊर्जा क्रांति बहुत आवश्‍यक है। अब आप देखिए बिहार इतना बड़ा प्रदेश। सिर्फ 250-300 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन का होता है। अभी मैं भूटान गया, भूटान के अंदर hydropower project का मैंने काम शुरू किया है, उसकी maximum बिजली बिहार को मिलने वाली है...Maximum बिजली।

बिहार को आगे ले जाने के लिए आज मैंने अभी एक पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना का आरंभ किया गांव में 24 घंटे बिजली। हमारे किसानों को भी अगर value addition के लिए जाना है तो उसको इस प्रकार की बिजली की सुविधा सबसे पहले चाहिए तब जा करके वो technology introduce करेगा और इसलिए हम भूटान से नेपाल से ऊर्जा के द्वारा कैसे बिजली बिहार को पहुंचे, बहुत बड़ी मात्रा में बिजली कैसे मिलें उस दिशा में काम में लगे है आज बिहार की अपनी बिजली है उसे तीन गुना का काम मैंने भूटान में जा करके कर दिया है। लेकिन उससे काम होने वाला नहीं है उसकी और जरूरत है।

दूसरा है green revolution जिसकी मैंने चर्चा की, हरा रंग है, तीसरा है white colour, white revolution और white revolution में हम जानते है। हमारा दूध उत्‍पादन, हमारे पशुओं की तुलना में दूध की quantity बहुत कम है। ये हमारी quantity कैसे बढ़े, पशुओं की संख्‍या बढ़ने से काम होना नहीं है। पशु के द्वारा ज्‍यादा दूध उत्‍पादन..... और हमारे पशुपालन को भी आधुनिक बनाना पड़ेगा। हमारे यहां जो sheeps है...भेड़े। मैंने एक छोटा प्रयोग किया था जब गुजरात में था। हमारा जो भेड़ पालने वाला होता है वो जब उसका ऊन निकालता है, उसके बाल निकालता है तो उसके पास एक कैंची होती है । उसके टुकड़े हो जाते है। टुकड़े होने के कारण जो income होती है वो इतनी income होती नहीं है। दाम कम हो जाता है। मैंने क्या किया ऐसे जितने भेड़ वाले थे उनको जो five star hotel में और नीतिश कुमार जी जिस मशीन का उपयोग करते है trimming का। मैंने सभी जो भेड़ पालक है उनको मशीन दिया और battery वाला दिया। तो आज वो क्‍या करता है साल में दो बार उस मशीन से उसके बाल निकालता है। उसकी लंबाई ज्‍यादा होने के कारण उसकी income बढ़ गई। छोटी-छोटी चीजे होती हैं जी, लेकिन सामन्‍य प्रयोगों से भी हम कितना बड़ा बदलाव ला सकते है।

हम हैरान है जी, हमारा देश इतनी सारी हम आज भी मैं नहीं मानता हूं कि हमारे यहां पशुओं के hospital में dentist की व्‍यवस्‍था नहीं होगी पशुओं के लिए। अगर हमारे दांत खराब होते हैं तो पशुओं के होते नहीं है। पशु खाता नहीं है या loose motion कर देता है। कोई पूछने को तैयार नहीं, देखने को तैयार नहीं कि उसका dental problem है। मैं जब गुजरात में था मैंने एक बड़ा अभियान चलाया था पशुओं की dental treatment का। हमारा मोतीबिंदु होता है पशु का मोतिबिंदु होता था मैं पशुओं का मोतिबिंदु का ऑपरेशन करता था बहुत बड़ी मात्रा में। मैंने अमेरिका हमारे कुछ डॉक्‍टरों को भेजा था lager technology सीखने के लिए और पशुओं का bloodless surgery कैसे हो और मैं पशुओं के bloodless surgery में सफलतापूर्वक हमारे यहां लोगों को काम पर लगाया था। हमारे पशुपालन को वैज्ञानिक तरीकों में हमें लाना पड़ेगा। उसकी भी पीड़ा को हमें समझना होगा और मैं मानता हूं, तब जा करके हम white revolution की ओर आगे बढ़ सकते हैं।

और मैंने चौथा कहा वो, blue revolution. आज भी बिहार में इतना पानी है, लेकिन बिहार, आंध्र से 400 करोड़ रुपए की मछली लाकर के खाता है। अगर हम blue revolution करें। गरीब से गरीब किसान, जहां छोटे-मोटे तालाब हैं। अगर हम उसको मत्‍स्‍य उद्योग और उसमें भी कई अब तो विशेषताएं हैं। even ornamental fish का revolution इतना बढ़ आया है। बहुत बड़ा market है, global market है, ornamental fish का। हम अगर इस blue revolution की ओर भी उतना ही ध्‍यान दें और ये सारी चीजें हैं जो ultimately गांव-गरीब किसान का भला करती है और इसलिए हम इन बातों को लेकर के हमारे वैज्ञानिक तौर-तरीकों के साथ ये जो हमारा तिरंगे झंडे का तीनों रंग है और चौथा हमारा blue अशोक चक्र है, उन चतुर्थ क्रान्‍ति की दिशा में कैसे आगे बढ़े और हमारे किसान भाइयों के भलाई के लिए और एक सुरक्षित आर्थिक व्‍यवस्‍था किसानों को मिले, उस दिशा में कैसे काम करे।

मैं फिर एक बार राधामोहन सिंह जी का अभिनन्‍दन करता हूं कि आज पटना में। क्‍योंकि मुझे लगता है जी हिन्‍दुस्‍तान का green revolution, second green revolution को पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, बिहार, पश्‍चिम बंगाल, असम से ही आने वाला है। ये मैं साफ देख पा रहा हूं। और यही बिहार की धरती हिन्‍दुस्‍तान में कृषि क्रान्‍ति लाकर रहेगी और जिसका प्रारंभ आज इस कार्यक्रम से हो रहा है।

मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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August 08, 2026
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Keep your curiosity alive in life, keep your learning instinct : PM
Question things that are accepted without a thought, but don't just stop at questioning; have the courage to also find their solutions: PM
Today, India is working towards self-reliance in economic, technological and industrial sectors, forming a strong foundation for Viksit Bharat: PM
Today, new sectors are emerging in the country for our youth: PM

ইজুকেসন মিনিষ্টর প্রাহলাদ জোসি জি, ঐগী মরুপ হরিস সালভে জি, প্রোফেসার অভয় করান্দিকার, আই.আই.তি দিল্লি দিরেক্তর প্রোফেসার রঙ্গন বেনর্জি, প্রোফেসারশিং, শক্নাইরবা অতিথিশিং অমসুং মহৈরোয়শিং।

ঙসিদগী লৈবাক অসিগী হৈথোই-শিংথোইরবা নহারোলশিংগী পুন্সিদা অনৌবা খোঙচৎ অমা হৌরে। হৌজিক অদোম অদোমগী পুন্সিদা তশেংনা নিংশিংদুনা লৈহৌরগদবা তাঙ্কক অমগী খুৎথাংদা হিংলি। হরাওবা, থৱায় য়াওবা, মঙলানশিং অমসুং নুংশিবনা থল্লবা তাঞ্জা অসিগী শরুক অমা ওইরি- অমসুং অদোমগা লোয়ননা মসিগী নুংঙাইবা অসি শরুক য়ানবা আই.আই.তি দিল্লি কেম্পসতা লাকপা অসি ঐখোয়গী ওইনা য়াম্না অখন্নবনি। মমাঙদা ঐনা কনভোকেসন অমা শরুক য়াখিবা মতমদা, লৈবাক শীনবা থুংনা কোবিদ লাইচৎ মায়োক্নখি। মতম অদুদা, ঐ ভর্চুএল ওইনা শরুক য়াখি, অদুবু ঙসিদি অদোম ময়ামগী মরক্ত ঐ শরুক য়ারে। মসিগীদমক ঐ য়াম্না হরাওই।

মরুপশিং,

ঙসি অদোমগী ইমুংশিংনা চাউথোকচবগুম্না, অদোম ময়ামগীদমক ঐসু চাউথোকচৈ। মসি অদোম্না দিগ্রি অমা ফংবগী খক নত্তে; লৈবাক্কীদমক অচৌবা থবকশিং পাংথোক্নবা মঙলানশিংগা লোয়ননা অদোম মাঙলোমদা থোক্লকপগীনি। মখোয়গী মাইপাকপশিংগীদমক ঙসি মহৈরোয় কয়াসু মেদলশিং ফংলে; মসিগীদমক অদোম ময়ামদা ঐনা হরাওবা ফোঙদোকচরি। মনা ফংলিবশিংগীদমক মরক্ত নুপীমচাশিং মশিং খর হেন্না য়াওরম্লবদি হেন্না ফরমগনি। ঙসি আই.আই.তি দিল্লিদা এ.আইগা মরী লৈনবা অনৌবা থবকশিং হৌদোক্লে অমসুং মসিদা শরুক য়ারিবা মীওই খুদিংমক ঐনা য়াইফ পাউজেল পীজরি।

মরুপশিং,

থৌরম অসিদা শরুক য়ারিবা মহৈরোয় ময়ামগী ৱাখলদা করিগুম্বা খর খল্লমগনি- ঐ ‘বাবা বাগেশ্বর’ ওইরোই, মসিগী মনুংদা করিগুম্বা খর লৈরি হায়বা ঐ খঙই। মহৈরোয় খুদিংমক মখোয়গী ৱাখলদা তুংগী পান্দম অমা লৈরি। খরনা খৌরাংনা মখোয়গী অহানবা তোলোব ঙাইরমগনি। খরনা অনৌবা সহর অমদা অনৌবা পুন্সি অমা হৌনবা শেম-শারমগনি। খরনা মখোয়গী অহানবা ষ্টার্দঅপশিং হৌদোক্নবা মঙ মঙলমগনি, খরনা লাক্লিবা কম্পেতিতিপ একজামশিংগী থৌরাং তৌরমগনি। মীওই খুদিংমক্কী লম্বী তোঙাল্লি অমসুং মীওই খুদিংমক্কী মঙলান তোপ-তোপ্পনি; অদুবু, ময়াম অসিগী মরক্ত, অদোম ময়ামগী মরক্ত মান্নবা ৱাখল্লোন অমা লৈরি। অদোম্না আই.আই.তি দিল্লিদা অহানবা থুংলখিবা নুমিৎ অদু নিংশিংউ অমসুং মদু ঙসিগা চাংদম্নৌ। মদু ঙরাং খক ওইরবোই খল্লি অমসু হৌজিক কনভোকেসনগী মতম য়ৌরক্লে; ওরিয়েন্তেসন্দগী কনভোকেসন ফাওবগী খোঙচৎ অসিদা অদোম অপেনবা অমা ফাওরমগনি। মতম অসিদা, পুন্সিগী অনৌবা তাঙ্কক অমা হৌনবনা অদোম হরাওবনা পীক থল্লমগনি। মরম অদুনা, মসিগী তাঞ্জা অসিদা মপুংফানা নুংঙাইনবা ঐনা অদোমদা হায়রি। তুংদা, অদোম্না মরুওইবা থৌদাং কয়া লৌরকপা মতমদা, মফম অসিগী নিংশিংবশিংনা অদোম হৌখ্রবা মতমশিংদা পুগনি অমসুং অদোমগী থৌনা হাপকনি। হোষ্টেলশিং-কুমাউন, অরা, কারা, ৱিন্দি, নিল, কাইলাস অমসুং হিমাদ্রিগা লোয়ননা- ইন্তর-হোষ্টেল চাংদম্নবশিংগা মরী লৈনবা নিংশিবা কয়া লৈরি; অরোইবা ওইনা অদোম্না থাদোক্ত্রিঙৈদা হৌখ্রবা থৌদোকশিং অদুনা অদোম অমুক হন্না নিংশিংহনগনি।

মরুপশিং,

মসি লাইরিক-লাইশু তম্বা খক্তগী নত্তে; জিয়া সরাইদা পোহা না হৌজিক নখোয়গী মরক্ত খর কৌরম্বা য়াই। মতম অসিদা অদোম সাতপুরাদা মেসতা পারাথাশিং চারমগনি। নখোয় ময়াম ‘ৱিন্দ তি’ দা মতম খর কুইনা লৈনিংলমগনি-অমসুং করিগুম্বা অদোম্না মফম অদুদা চৎপদা, ঐ নিংশিংবিয়ু। খরনা অরোইবা ওইনা মখোয়গী দিপার্তমেন্ত চৎনিংলমগনি, অদুগা খরনা মখোয়না পামজবা পুনফমশিংদা খর কুইনা লৈনিংলমগনি।

মরুপশিং,

পুক্নিং নুংশিরবা থৌদোকশিং অসিদা, ঐনা অদোমদা করিগুম্বা অমা ফোঙদোকপা পাম্মী: অদোম্না নিংশিংলকপা মতমদা, অদোম্না কেম্পসকী পুন্সি-অদোমগী মরুপশিং, ওজাশিং, লমজিং-লমতাকখিবশিং অমসুং অদোমগী ইমুং-মনুং ওইরবা ষ্টাফশিং; অদোম শেম্বদা থৌদাং লৌখিবা অদোমগী প্রোফেসারশিং; অমসুং তপ্না তপ্না অদোমগী য়ুম ওইরকখিবা অদোমগী ইন্সতিতুসন অসি অদোম্না নিংশিংগনি। অদোমগী মাইপাকপা খুদিংগী মখোয় অদোম্না নিংশিংগনি অমসুং মখোয়দা তৌবীমল খঙবা উৎকনি। মরম অদুনা, অদোমগী মমল য়াম্লবা পোৎশক অমা ওইনা মখোয় পুখিবা অদোম্না কাউরোইদবনি; মখোয় হুন্দোক্লম্লোইদবনি-মখোয় পুদুনা চৎখিগদবনি। অদোম মফম অসি থাদোক্তুনা চৎত্রিঙৈদা ঐনা হায়নিংবদদি, মফম অসিগী মীওই খুদিংমক উনরম্মু অমসুং নহাক্না চৎপা মফম খুদিংমক্ত, মরী অসি নৌথোকহল্লু অমসুং মতম পুম্নমক্ত হিংহল্লু।

মরুপশিং,

মালেম অসি য়াংনা হোংলক্লিবা মতম অমদা ইন্সতিতুৎ অসিদগী অদোম গ্রেজুয়েদ লোইরে। ঙসিদি, মালেমগী লাল্লোংশিং য়াংনা হোংলি অমসুং মালেমগী শক্তিগী খল অসি মিকুপ খুদিংগী অওনবা লৈরি। মসিগী তুংদা লৈরিবা শক্তি অসি তেক্নোলোজিগী খোঙজেলনি। মথং চহি ২০ দগী ৩০ ফাওবদা মালেম অসি করি ওইগনি হায়বা কনাগুম্বা অমতনা হায়বা ঙম্লোই।

মরুপশিং,

অহোংবগী যুগ অমা লাকপা মতমদা, মসিনা অৱাবশিং অমসুং অনৌবা খুদোংচাবশিং অনিমক পুরকই। মালেম, তেক্নোলোজি, উদ্যোগশিং অমসুং শীনফমশিং অহোংবা লৈগনি। পুম্নমক অসিগী মরক্ত, পোৎশক অমা নিংশিংউ; লাইরিক তম্লিবশিংনা, মাইপাকপা। অনৌবা খুদোংচাদবশিংগীদমক অনৌবা পাম্বৈশিং থিরিবশিংগী থৌনাগীদমক, অৱাবশিং খুদোংচাবশিং ওন্থোক্লিবশিংগীদমক। মসিনি অদোম্না আই.আই.তি দিল্লিদা তম্লিবা অদুনি। পুম্নমক অসিগী মথক্ত, অদোমগী দিগ্রিনা করি তাক্লিবগে? মসি ইচম চম্না অদোম একজামশিং পাস তৌরে, সি.জি.পি.এ ফজরে নত্ত্রগা অচৌবা থবক অমা ফংলে হায়বগী খুদম্লা? কমদৌনা অরুবা ৱাথোকশিং কোকহনগদগে হায়বা অদোম খঙলে হায়বা অদোমগী দিগ্রিশিংনা মালেমদা তাক্কনি হায়না ঐনা থাজৈ। আই.আই.তি দিল্লিদা অদোমগী খোঙচৎকী মমি তাহল্লু; মফম অসি ফাওবা য়ৌরকপা অরাইবা নত্তে অমসুং লাইরিক-লাইশুগী থবক য়াম্না দরকার ওইরি। কৈদৌঙৈদা অদোম তোক্কনু। দিগ্রি অসি অদোম্না নোংমদা ফংবা নত্তে; মসি অদোম মফম অসিদা পুরকখিবা অপীকপা খোঙথাংশিং, লনাই সবজেক্তশিং, প্রোজেকশিং, মিদ-সেমিষ্টর অমসুং এন্দ-সেমিষ্টর একজামশিংগী মাইপাকপশিংনি। চপ মান্নবা অচুম্বা ফিদম অসিদা পুন্সি হিংলিবনি। অৱাবা অমা মায়োক্নবা মতমদা, পাখৎকনু; মদু মায়োক্নবা ঙম্বা চাংদা পীক্না পীক্না খায়দোকউ। মসিনা অদোম্না অহানবা ওইনা থেংনবনি-লেবতা খুদোংচাদবা অমা থেংনবদা নত্ত্রগা পাম্বৈ অমা থিবদা পুং কয়া অমসুং নুমিৎ কয়া চঙবা য়াওরি। অদুবু অদোম্না অৱাবশিং কোকহল্লে অমসুং অনৌবা থবকশিং পায়খৎলে। পুন্সিদা অৱাবশিং থেংনগনি অদুবু খুদোংথিবগী মওং অসি নাইতোম ওইরোই; অৱাবা অমা লাকপা মতমদা, মসিগা লোয়ননা খুদোংচাবশিং লোইনরকই। কনাগুম্ব অমনা মথৌ তারিবদি মিকুপ নাহুম শিংবা অমসুং মহৈলোয়শঙ অসিদগী তমখিবা পারা লেপ্তনা নিংশিংবনি।

 

মরুপশিং,

ঐনা অদোমদা পুন্সিগী মরমদা থবক ওইনা পাংথোকপা য়াবা লৌশিং খর খঙহনবা পাম্মী। কেম্পসকী পুন্সি অমসুং কেম্পস মপানগী পুন্সি অনিগী মরক্ত খেন্নবা য়াম্না লৈরি। আই.আই.তি একজামদি অকক্নবা সেল্লেবসনি, অদুগা পুন্সিগী একজামদি “সেল্লবসগী ৱাংমানি”। কেম্পসকী পুন্সি মনুংদা, করি পাগনি, কম্বা এসাইমেন্তশিং লোইশিনগনি অমসুং করম্বা একজাম ফমগনি; খুদিংমক মাঙজৌননা খঙবা ঙাক্তনি। অদুবু পুন্সিদি তোঙাল্লি; চপ চাবা কোর্স নত্ত্রগা ক্বেসন পেপর লৈতে। অশেংবা ক্বেসন করিনো হায়বা কনা অমতনা হায়বা ঙমদে; অদোম ইশানা অদোমগী ক্বেসন মশক খঙজগদবনি। আই.আই.তি এলুম্নাই কয়াগী খোঙচৎশিং ঐ উরে। অচুম্বা পাউখুমশিং খুম্বা খক্তনা মখোয় মাইপাকপা নত্তে, মালেম্না ৱাহংশিং ওইনা উদ্রিবা ৱাহংশিং মশক খঙবদগী মাইপাকপা ঙমখিবনি। অতোপ্পশিংনা থাদোক্লম্লবা খুদোংথিবশিংগী পাম্বৈশিং মখোয়না ফংখি। মরম অদুনা, পুন্সিদা অদোমগী খৌরাংবা লেংদনা লৈহল্লু; অদোমগী তম্নিংবগী অপাম্বা হিংহল্লু অমসুং হৈশিংনা লৈয়ু। ৱাহংশিং খক হংলগা তোক্কনু-পাম্বৈশিং পুথোক্নবা থৌনা লৈয়ু। মসিগী ৱাখল্লোন অসিনা অদোমগী তোঙানবা মশক অমা তাক্কনি।

মরুপশিং,

অদোম ময়াম্না খঙলে, মীরোল খুদিংমক্না মখোয়গী মতমদা অকক্নবা খুদোংচাদবশিং মায়োক্নৈ অমসুং মীরোল অসিনা মখোয় মশাগী জাতিগী থৌদাং লৌই। ঐখোয়গী লৈবাক্না নমথবগী যুগ অমা লৈখি, মতম অদুগী মীরোলগী অমতা ঙাইরবা পান্দমদি ভারতকী নিংতম্বনি। নিংতম্বা ফংনবা মখোয়না থৱায় কৎখি অমসুং মতম শাংলবা লান্থেং অমা মায়োক্নখি। মীরোল অদুগী অৱাবা খাংবা, থাজবা অমসুং কৎথোকপনা মরম ওইদুনা নিংতম্লবা ভারত অমদা ঐখোয়না নিংতম্না শ্বর হোল্লিবনি।

 

মরুপশিং,

ঙসিগী যুগ অসিদা, ঐখোয়গী মাংদা তারিবা খুদোংচাদবশিং তোঙাল্লি অমসুং মখা তারকপদা, ঐখোয়গী থৌদাংসু তোঙাল্লি। অদোমগী পুন্সিগী মথং চহি ৩০ দগী চহি ৩৫ ফাওবদা অদোম্না পাংথোকপা থবকশিংনা বিকসিত ভারত অমগী মাইকৈদা চঙশিল্লিবা ঐখোয়গী খোঙচৎ লেপকনি। মরম অদুনা অদোম্না লৌবা ৱারেপ খুদিংমক্কী য়ুম্ফম মসিনা ওইগনি: মসিনা কমদৌনা লৈবাক্ত কান্নবা পীগনি? করম্বা লৈবাক্কী দরকার ওইবা মসিনা মেনখৎপা ঙমগনি? ঙসি, হিরম খুদিংমক্ত- মসি শেন-থুম, তেক্নোলোজি নত্ত্রগা উদ্যোগ ওইবা য়াই, অত্মনির্ভরগী মাইকৈদা ভারতনা থবক পায়খৎলি। মসিনা বিকসিত ভারত অমগী অকনবা য়ুম্ফমগী খুদম ওইনা থবক তৌরি। অকনবা য়ুম্ফম অসিগী মথক্ত অদোম্না চিংলেম্লবা অমসুং ফজরবা বিকসিত ভারত অমা শেমগৎকনি।

মরুপশিং,

বিকসিত ভারতকী মাইকৈদা চঙশিল্লিবা খোঙচৎ অসিদা অদোমগী থৌদাং য়াম্না মরুওই। লৈবাক অসিগী নহারোলশিংগী ফিবম হেন্না ফগৎলিবমখৈ, লৈবাক অসিগী হেন্না ফগৎকনি। পান্দম অসি ৱাখলদা থমদুনা, মমাংদা, নহারোলশিং চঙবদা অথিংবা থম্লম্বা হিরম কয়া ঐখোয়না য়াহল্লে। সরকারগী অনৌবা মতমগী থৌশিলশিংগীদমক থাগৎপা ফোঙদোক্লি, ঙসিদি লৈবাক শীনবা থুংবগী নহারোলশিংগীদমক অনৌবা হিরম কয়া লৈরে।

মরুপশিং,

মমাঙদা ঐনা অদোমগী সেনিয়ারশিংগী কনভোকেসন ভর্চুএল ওইনা শরুক য়াখি, স্পেস সেক্তরদা নহারোলশিংগীদমক অওনবা পুরক্লিবশিংগী মতাংদা ঐনা ৱা ঙাংখি। মতম অদু ফাওবদা, হিরম অসিদা সরকারনা থবক খুদিংমক পাংথোকখি। অদুবু ঙসিদি, হায়রিবা স্পেস সেক্তর অদু নহারোল লিশিং কয়াগী অনৌবা খুদোংচাবশিংগী পাক্লবা পনখৈ অমা ওইরে। ঙসিদি, ঐখোয়গী নহারোলশিংনা মখোয় মশাগী লঞ্চ ভেহিকলশিং শারে, রোক্কেতশিং থাগৎলে অমসুং মালেমদা লৈবাক খর খক্তনা পাংথোকপা থবকশিং মাইপাক্না পাংথোক্লে। ঙসিদি লৈবাক অসিগী নহা ওইরিবা ইঞ্জিনিয়ার অমনা চাউথোক্না হায়রি, “ ঐগী ইমুং-মনুংদা অহানবা ওইনা রোক্কেত অমা শারগনি”। ঐখোয়গী মাঙদা সেমিকন্দক্তরগী খুদম লৈরে। মাইকৈ অসিদা ঐখোয়না খোঙ থাংজিনবা মতমদা, মীওই খরনা ৱাহংশিং হংলকখি; মসি ভারতনা পাংথোকপা ঙম্লোই। অদুবু ঙসিদি, অহানবা সেমিকন্দক্তর য়ুনিতশিংদা পোৎথোক পুথোকপা হৌখ্রে। অদোমগী খুৎশিংনা মফম অসিদা চিপশিংদগী হৌরগা জহাজশিং ফাওবা শাগনি হায়না ঐনা থাজৈ। মফম অমদা, নহা অমনা হায়গনি, “ঐগী ইমুংদা অহানবা ওইনা ভারত্ত চিপ শাগনি”।

মরুপশিং,

ঙসি ঐখোয়গী দ্রোন সেক্তরদা য়েংউ; মসিদা নহারোলশিংনা অনৌবা থবক কয়া পাংথোক্লে। লৌউ-শিংউগী থবকশিং, হিদাক ফংহনবা অমসুং লৈবাক্কী ঙাক-শেন্দা দ্রোনশিং শীজিন্নরে। ঙসিদি, মফম অমদা, নহারোল অমনা হায়রি, “ ঐগী ইমুংদা অহানবা ওইনা ঐনা দ্রোন শাগনি”।

মরুপশিং,

ভারতকী ষ্টার্দঅপগী অওনবা পুরক্লিবা অসি অদোমগুম্বা নহারোলশিংগী মীরোলন্নি। ইন্সতিতুৎ অসিদগী ফাউন্দর কয়া পুথোকখ্রে। করিগুম্বা মহৈলোয়শঙ অমা খক্তনা অসুক য়াম্না থবক পাংথোক্লবদি, লৈবাক শীনবা থুংনা অকনবা মপাঙ্গল অদু খন্দুনা য়েংউ। য়ুনিকোর্নশিং, দিজিতেল পেমেন্তশিং অমসুং ফিনতেক রিভোলুসন্না অনৌবা থবক পায়খৎনবা অমসুং অহানবা ওইনা করিগুম্ব অনৌবা খর পাংথোক্নবা ভারতকী নহারোল লাখ কয়াদা খুদোংচাবা পীরে।

মরুপশিং,

অনৌবা খোঙচৎ অমদা ভারতনা খোঙশানবা হৌরবা হিরম কয়া লৈরি অমসুং মরুওইবা থৌদাংশিং লৌগনি হায়বগী অচৌবা থাজবশিংগা লোয়ননা অদোমগুম্বা নহারোলশিংদা লৈবাক অসিনা য়েংলি। আর্তিফিসিএল ইন্তিলিজেন্স, দেতা সেন্তরশিং, ক্রিতিকেল মিনরেলশিং, সমুদ্রগী অরুবা ইরোন্নুংদা থিজিনবা, বেত্তরিশিং, পৱার ষ্টোরেজ, ইনর্জি সেকুরিতি, ইলেক্ত্রিক গারি অমসুং ক্বান্তম কম্পুতিং য়াওনা হিরম কয়াদা অদোমগী লৌশিং, অদোমগী অনৌবা থবক অমসুং অদোমগী লুচিংবা ঙাইরি অমসুং ঐসু ঙাইরি।

মরুপশিং,

অদোম ময়ামগী মাঙদা তাদুনা লৈরিবা অতোপ্পা খুদোংচাবা অমদি থিজিনবনি। ঙসিদি, লৈবাক অসি অনৌবা থিজিনবগী মথৌ য়াম্না তারে অমসুং ঐখোয়না মসিদা অকনবা মীৎয়েং চঙলি। প্রাইম মিনিষ্টরস রিছার্স ফেল্লোসিপনা থিজিন্নবা ঐখোয়গী নহারোলশিংদা খুদোংচাবা পীরে। অনৌবা ৱাখল্লোন মপুং-মরৈ ফাবা ঙম্নবা, রিছার্স, দিবলপমেন্ত অমসুং ইন্নোবেসন স্কিম হৌদোক্লে। লৈবাক অসিদা সাইন্স অমসুং থিজিনবদা অনৌবা ইনোৎ পীনবা নেসনেল রিছার্স ফাউন্দেসন লিংখৎলে। থিজিনবগী হিরম অসিগী লুপা করোর লাখ ১ কাইথোক্লে। ঐনা পল্লিবা মশিং অসি অখন্ননা অদোমগীদমক্নি।

মরুপশিং,

লাইরি-লাইশু তম্বগী মচাকশিং ফংহনবা লাইথোকহল্লে। ‘ৱান নেসন, ৱান সবস্ক্রিপসন’ থবক্কী খুৎথাংদা, অহেনবা শেনফম অমতা তিংদনা লৈবাক অসিগী খ্বাইদগী পীকপা সহরশিং ফাওবদা মমিং চৎলবা মালেমগী রিছার্স জর্নেলশিং হৌজিক ফংলে।

মরুপশিং,

মাইকৈ অসিদা ঐখোয় চৎকদবা য়াম্না ৱাৎলি হায়বা ঐ খঙই অমসুং অদোমগী থিজিনবগী থবকশিং খক্তনা মসি মাইপাকপা ঙমগনি। লৈবাক অসিনা অদোমদগী থাজবা কয়া থম্লি অমসুং পুম্নমক অসিগী মথক্ত, লৈবাক অসিনা মসিগী থাজবা অদোমদা থম্লি।

মরুপশিং,

হৌজিক, নিংহনবা পোকহনবগী মতাংদা ঐ তেন্তক্না হায়খে। অচৌবা পান্দমশিং ফংনবা ঐখোয়না হোৎনরকপা মতমদা, ঐখোয়না তোইনা মরুওইবা পুক্নিং চোইথোকহনবা অমা থেংনৈ: ঐখোয় ইশামক্কা অতোপ্পশিংগা চাংদম্নবগী মওং অমা- কনানা করি পেকেজ ফংলবগে, করম্বা কম্পেনিদা কনা শরুক য়াখ্রবগে, করম্বা সহর নত্ত্রগা লৈবাক্ত মখোয় চৎখ্রবগে, নত্ত্রগা কনানা ষ্টার্দঅপ অমা লিংখৎখ্রবগে। ঙসিগী সোসিএল মেদিয়াগী যুগ অসিদা, মসিগী চাংদম্নবা অসি লোইবা নাইদে। অদুবু নিংশিংগদবদি, পুন্সি অসি লিদরবোর্দ অমা নত্তে; অদোমগী অশেংবা লমজেল অসি অতোপ্পশিংগী মায়োক্ত নত্তে, অদোম ইশামক্কী মায়োক্তনি। ঙরাং ওইখিবা অদোমদগী হেন্না ফগৎনবা হোৎনৌ। অদোমগী হকচাং অমসুং পুক্নিং-ৱাখলগী হকশেলগী চেকশিল্লু।

মরুপশিং,

মহৈরোয় পুম্নমক ঐনা অমুক হন্না থাগৎপা ফোঙদোকচরি। অদোমগী ইমা-ইপাশিং অমসুং ইমুং-মনুংগী মীওইশিংদা ঐনা অখন্নবা ওইনা থাগৎচরি অমসুং অদোমগী ওজাশিং অমসুং খোঙচৎ অসিগী খোঙথাং খুদিংমক্ত অদোমগীদমক লেপখিবা মীওই খুদিংমক ঐনা ঐগী য়াইফ পাউজেল পীজরি। অফবা অফবা তুংলমচৎ অমা লৈনবা অমসুং মখা তানা অনৌবা থাকশিং য়ৌনবা য়াইফ পাউজেলশিংগা লোয়ননা অদোম থাগৎচরি।

খুরুমজরি।