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I would like to begin by acknowledging the traditional owners of this land on which we stand today and pay my respect to their elders in past and present.

यहां उपस्थित, यहां के सामाजिक, राजनीतिक जीवन के सभी महानुभाव और मेरे प्यायरे देशवासियों,

यह स्वागत, यह सम्मान, यह उत्साह, यह उमंग, इसका हकदार मोदी नहीं हैं। सवा सौ करोड़ देशवासी यह उनके हकदार हैं। यह स्वागत, यह सम्मान, यह प्यार भारत माता के उन सवा सौ करोड़ संतानों के चरणों में समर्पित करता हूं। मैं देख रहा हूं कि बहुत लोग अभी बाहर हैं अंदर आ ही नहीं पाए। यह जो, ये जो नजारा सिडनी में दिखाई दे रहा है। यह नजारा पूरे हिंदुस्तान को आंदोलित कर रहा है।

कभी स्वामी विवेकानंद जी के शब्दों को याद करते हैं, तो हम कल्पना नहीं कर सकते कि हमारे यह महापुरूष कितने दीर्घदृष्टा थे। आजादी के पहले ठीक 50 साल पहले स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि 50 साल के लिए भारत के लोग अपने देवी-देवताओं को भूल जाएं। कोई कल्पना कर सकता है कि एक संन्यासी और जो खुद आध्यात्मिक जीवन को लेकर के चल पड़ा था। जिसने गुरूदेव रामकृष्ण परमहंस को अपना जीवन आहूत कर दिया था, जिसके लिए ईश्वर साक्षात्कार जीवन का मकसद रहा था, वो संन्यासी देश आजादी के 50 साल पहले कह रहा है, 50 साल के लिए आप अपने देवी देवताओं को भूल जाओ और सिर्फ, सिर्फ भारत माता की पूजा करो। दुनिया में फिर एक बार भारत माता की जय करो। उस महापुरूष के शब्दों के ताकत देखिए। ठीक उस 50 साल के बाद भारत आजाद हो गया।

मेरी तरह यहां बहुत लोग ऐसे है जिनका जन्म आजाद हिंदुस्तान में हुआ है और यह मेरा सौभाग्य है कि मैं पहला ऐसा प्रधानमंत्री हूं जो आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुआ है और तब जाकर के मुझे ज्यादा ही जिम्मेदारी का एहसास होता है, क्योंकि मेरे जैसे आप में से बहुत लोग हैं जो आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुए हैं। हमें देश की आजादी के लिए लड़ने का सौभाग्य नहीं मिला है। हमें भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए फांसी के तख्तं पर चढ़ने का नसीब नहीं हुआ है। हमें भारत के सम्मान और गौरव के लिए जेल की सलाखों के पीछे अपनी जवानी खपाने का सौभाग्य नहीं मिला है और हमारे भीतर एक दर्द होना चाहिए, एक कसक होनी चाहिए कि हम आजादी की जंग में नहीं थे। हम देश के लिए मर तो नहीं सके, लेकिन आजादी के बाद पैदा हुए हैं, तो देश के लिए जी तो सकते हैं। हर किसी के नसीब में देश के लिए मरना नहीं होता है। देश के लिए जीना हर किसी के नसीब में होता है और इसलिए हमारा संकल्प रहना चाहिए। हम जीएंगे तो भी देश के लिए, जूझेंगे, तो भी देश के लिए और यही भाव आज सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में जगा है।

आजकल तो हिंदुस्तान से रात को निकले सुबह ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाते हैं लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 28 साल लगे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाने आया हूं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले मेरे देशवासियों अब आप को कभी 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जितना हक हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदुस्तानियों का है, उतना ही हक यहां पर रहने वाले मेरे देशवासियों का है। सिडनी खूबसूरत शहर है, ऑस्ट्रेलिया एक खूबसूरत देश है और न ऑस्ट्रेलिया और न ही इंडिया क्रिकेट के बिना जी सकते हैं; क्रिकेट ने हमें जोड़ा है। लेकिन इससे पहले हमारी ऐसी सांस्कृतिक विरासत रही है, इतिहास की ऐसी घटनाएं रही है जिसने हमें अटूट रूप से जोड़ा हुआ है और ऑस्ट्रेलिया-भारत common value को share करते हैं। लोकतंत्र हम दोनों देशों की धरोहर है और विश्व लोकतांत्रिक शक्तियों को आज गौरव के भाव से देखता है। भारत के दीर्घदृष्टा महापुरूषों का यह बहुत बड़ा योगदान रहा कि आजाद हिंदुस्तान में लोकतंत्र की मजबूत नींव हमारे पूर्व के सभी महापुरूषों ने डाली और उसी का परिणाम है और लोकतंत्र की ताकत देखिए; अगर लोकतंत्र की ऊंचाई न होती, तो क्या मैं यहां होता। भारत के लोकतंत्र की उस ताकत को हम पहचानें तो जहां सामान्यय से सामान्यर इंसान भी अगर सच्ची निष्ठा और श्रद्धा के साथ देश के लोगों के लिए जीना तय करता है तो देश उसके लिए मरना तय करता है। कभी-कभार हम शास्त्रों में पढ़ते थे कि फलाने भगवान सहस्त्रबाहू थे; एक हजार भुजाएं थी; ऐसा तो नहीं यहां लटकाई होगी। इसका मतलब यह था, उनके पास ऐसे 500 लोग थे जो 1000 भुजाओं के कारण ईश्वर भी अपनी सारी इच्छाओं को पूर्ण कर पाते थे, योजनाओं को पूर्ण कर पाते थे। परमात्मा के पास तो सहस्त्रबाहू थे, लेकिन भारत माता के पास ढ़ाई सौ करोड़ भुजाएं हैं, ढ़ाई सौ करोड़। जिस देवी के पास, जिस भारत माता के पास ढ़ाई सौ करोड़ भुजाएं हो और उसमें भी, दो सौ करोड़ भुजाएं तो 35 साल से कम आयु की है। हिंदुस्तांन नौजवान है। युवा शक्ति से भरा हुआ है। युवा के मन में, आंखों में सपने होते हैं, नेक इरादे होते हैं, मजबूत संकल्प शक्ति होती है और वे पत्थर पर लकीर करने का भी सामर्थ्य रखते हैं। और उसी के भरोसे मैं विश्वास दिलाता हूं जो स्वामी विवेकानंद ने दूसरा सपना देखा था, उस महापुरूष ने कहा था कि मैं मेरे आंखों के सामने देख रहा हूं.... जिस महापुरूष ने जीवन के अंतकाल में 50 साल के बाद जो सपना देखा वो चरितार्थ हुआ। उस महापुरूष ने दूसरा सपना देखा था और स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि मेरे आंख के सामने भारत मां का वो रूप देख हूं, उस जगत जननी का रूप देख रहा हूं, फिर एक बार मेरी भारत माता विश्व गुरू के स्थान पर विराजमान हो, वो विश्व का नेतृत्व करती होगी। वो विश्व की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति का सामर्थ्य रखती होगी। मेरी स्वामी विवेकानंद जी की इस दीर्घदृष्टा पर आपार श्रद्धा है और इसलिए मैं भी विश्वास से कहता हूं कि विवेकानंद जी कभी गलत नहीं हो सकते। ऐसी ऊर्जा से भरा हुआ हमारा देश है और मैं छह महीने के मेरे बहुत अल्पकाल के समय का मेरा अनुभव है। इतने बड़े हिंदुस्तान में छह महीने कुछ नहीं होते हैं। लेकिन छह महीने के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि देश के सामान्यन मानव ने जो सपने देखे हैं, उन सपनों को पूरा करने के लिए आशीर्वाद भारत मां दे रही है और वो सपने पूरा होने का सामर्थ्य है। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, जो भरोसा मेरा है, आपका है क्या? आपको विश्वास है यह देश फिर से उठ खड़ा होगा? यह देश ताकतवर बनेगा? हम सामर्थ्य के साथ मानवजाति की सेवा कर पाएंगे। विश्व को संकटों से मुक्ति दिलाने का देश में सामर्थ्य होगा। अगर आपकी वाणी में जो ताकत है, वो सामान्य मानव की ताकत, वो वाणी, कभी ईश्वर की वाणी बन जाती है। वो ईश्वर के आर्शीवाद बन जाते हैं। मुझे कोई कारण नहीं लगता भाई और बहनों, कोई कारण मुझे नहीं लगता है कि हमारा देश अब पीछे रह जाए। मुझे कोई कारण नहीं लगता। नियति ने उसका आगे जाना तय कर लिया है। अब हम ढाई सौ करोड़ भुजाओं ने संकल्प करना है। कि हमारी भुजाओं से हर काम वही होगा, जो भारत मां के कल्यापण के लिए होगा। सवा सौ देशवासियों के कल्याण के लिए होगा। विश्व के दुखियारों के लिए होगा। एक बार उन संकल्पों को लेकर चलते हैं, तो उन संकल्पों की पूर्ति भी अपने आप होती है।

ऑस्ट्रे्लिया के जीवन में कोई भी भारतवासी गर्व करता है। यहां दो सौ साल पहले भारत से कुछ परिवार आए थे, दो सौ साल पहले। और भारतीयों का यहां का जीवन हर हिंदुस्तानी को गर्व करा रहा है, गर्व दे रहा है। अब ऑस्ट्रेंलिया को अपना बना लिया है। आपके वाणी से, वर्तनी से, विचार से, व्यवहार से जिन मूल्यों को लेकर के आप जी रहे हैं उसके कारण ऑस्ट्रेलिया का भी हर नागरिक हमसे अपनापन महसूस करता है और मैं मानता हूं एक भारतीय के नाते यही हमारा सबसे बड़ा दायित्व होता है कि जो हमारी कर्मभूमि हो, उस कर्मभूमि के साथ हमारा लगाव भी इतना होना चाहिए, हमारा समर्पण भी इतना होना चाहिए और जो आज हमारे भारतीय भाई-बहन ऑस्ट्रेलिया की धरती पर कर रहे हैं।

मैं यहां आने से पहले कुछ चीजें देख रहा था मुझे देखकर के इतना आनंद हुआ और मैं आज सबका उल्लेच तो नहीं कर पाऊंगा। जिनका उल्लेख रह जाए, वो मुझे क्षमा करें। वो अगर कमी है, तो मेरी कमी है। उनके पराक्रम की कमी नहीं है। आप देखिए 1964 में जो टोक्यो में ओलंपिक गेम हुआ। उसमें मूल भारतीय Bakhtawar Singh Samrai उन्होंने प्रतिनिधित्व किया था ऑस्ट्रेलिया की तरफ से। Bakhtawar ji का यह उस समय ओलंपिक टाइम में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से एक भारतीय का प्रतिनिधित्व करना, मैं इसे छोटी बात नहीं मानता हूं। इतना ही नहीं यहां पर बहुत बड़ी तादाद में एंग्लो इंडियन रहते हैं। भारत से आए, यहां पर बसे। Julian Pearce जिनका जन्म जबलपुर में हुआ था और ओलंपिक में हॉकी को represent किया था उन्हों ने, ऑस्ट्रेलिया की तरफ से। Rex Sellers, Stuart Clark, ये दोनों एंग्लो इंडियन थे। भारत से आए थे। लेकिन ऑस्ट्रेलिया को क्रिकेट की दुनिया में उन्हों ने अपनी जगह बना दी थी, यह उनका योगदान था। Lisa Sthalekar पुणे में जन्मी और महिलाओं की क्रिकेट की दुनिया में 2013 तक 1000 रन बनाना और 100 विकेट लेने का उसका रिकॉर्ड है। एक भारतीय मूल की बेटी ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेल रही है। अक्षय वैंकटेश भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियन 12 साल की उम्र में international physics Olympiad and international maths Olympiad, उसमें विश्व में अपना डंका बजा दिया था। ऑस्ट्रेहलिया का नाम रोशन किया। यहीं के हमारे, यह सामर्थ्य वान लोग.. Mathai Varghese भारतीय मूल के थे, via अफ्रीका यहां ऑस्ट्रेलिया पहुंचे। mathematician के नाते उन्होंने अपना नाम बनाया था। Tharini Mudaliar साउथ अफ्रीका में जन्मी मूल भारतीय और actor or singer के रूप में पूरे ऑस्ट्रेलिया में जानी जाने लगी। Indira Naidoo मूल भारतीय की ऑस्ट्रेलियन एक लेखिका के रूप में, एक journalist के रूप में और यूएन में सेवाएं देने के रूप में आज भी हर भारतीय के नामों पर गर्व कर सकता है। इसके सिवा भी बहुत सारे नाम होंगे जो भारतीय मूल के लोग हैं। जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपने आप को खपा दिया, ऐसा समर्पित कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के जीवन का भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलिया का नाम रोशन हो, उसमें उनका योगदान रहा है और यही हमारी ताकत है। एक भारतीयता के गौरव के लिए भारतीय होने के नाते विश्व में हम जहां हो, वहां के लोगों का हम प्रेम सम्पादन करें। मिलजुल कर अपने जीवन को बनाने में, हम उनका योगदान करें। हमारे पास जो श्रेष्ठ है, वो जगत को काम आए और उसी के लिए माध्यम बने और भूमिका से जो आप भूमिका अदा कर रहे हैं। इसलिए मैं आप सबको हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

मुझे मालूम है, चुनाव तो हिंदुस्तान में चल रहे थे। आप की उंगली पर तो टीका लगने वाला नहीं था। आपका तो मतदान होना नहीं था। लेकिन मुझे मालूम है वो चुनाव का कोई पल ऐसा नहीं था,जिससे आप जुड़े नहीं थे। कोई परिवार ऐसा नहीं था, जब चुनाव के नतीजे आने वाले थे, उस रात तय करके बैठा था, अब तो सोना नहीं है। यह जो भारत में राजनीतिक परिवर्तन के लिए विश्व भर में फैले हुए भारतीय समुदाय का जो उमंग था। वो उमंग कौन जीते, कौन हारे इसके लिए नहीं था। किसकी सत्ता बने, किसकी न बने, इसके लिए नहीं था। उसके दिल में एक दर्द था, एक आग थी, पीढ़ा थी कि मैं दुनिया में जहां बैठा हूं, मेरा देश कब ऐसा बनेगा। उसके लिए चुनाव उज्जवल भारत के भविष्य के सपनों से जुड़ा हुआ था। उसके लिए चुनाव राजनीतिक उठा-पटक का खेल नहीं था। जय और पराजय का खेल नहीं था। उसके दिल में तो एक ही आवाज थी भारत माता की जय। उसके मन में एक ही भाव था भारत माता की जय और भारत माता की जय का मतलब होता है- भारत के जो कोटि-कोटि लोग जो आज भी गरीबी में जिंदगी गुजार रहे हैं, कितने परिवार है, जिनको आज बिजली तक मुहैया नहीं है। आजादी के इतने सालों के बाद पीने का शुद्ध पानी न मिले, बिजली मुहैया न हो, इतना ही नहीं शौचालय तक नहीं है। कई लोगों के मन में बहुत बड़े-बड़े काम करने के सपने होते हैं। वो सपने उनको मुबारक। मुझे तो छोटे-छोटे काम करने हैं, छोटे-छोटे लोगों के लिए करने है और छोटे लोगों को बड़ा बनाने के लिए करने हैं।

आप कल्पना कर सकते हैं, आज के युग में बैंकिंग सिस्टम से अलग रह करके अर्थ कि, आर्थिक व्य़वस्था की मुख्यधारा के बाहर रहकर के कोई आर्थिक विकास में भागीदार बन सकता है क्या? हर किसी के लिए bank account इतनी सामान्य बात है। हमारे देश में बैंकों राष्ट्रीयकरण हुआ था और यह सपना देखा गया था गरीब से गरीब व्यक्ति बैंक में जा पाएगा। आपने भी किसी गरीब को बैंक में नहीं देखा होगा। जब हिंदुस्तान में थे कभी देखा था।

अब मैंने सपना देखा है कि मैं चाहता हूं, गरीब का बैंक में खाता हो। मैंने प्रधानमंत्री जनधन योजना बनाई, क्योंकि मैं चाहता हूं कि देश भी आर्थिक विकास यात्रा में गरीब से गरीब का हिस्सा जुड़ना चाहिए, वो इस व्यवस्था के साथ परिचित होना चाहिए, उसे कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए। करीब 75 मिलियन लोग जिनका बैंक अकाउंट है उन परिवारों की मैं बात कर रहा हूं। व्यक्ति नहीं परिवार। एक परिवार में पांच लोग गिने तो आप अंदाज कर सकते हैं कि कितनी बड़ी संख्या होगी।

मैंने रिजर्व बैंक से कहा कि यह काम करना है। कर सकते है क्या? रिजर्व बैंक ने कहा कि मोदी जी हो तो सकता है, लेकिन.... अब प्रधानमंत्री को मना तो कोई करता नहीं। लेकिन उनको तरीके मालूम होते हैं। उन्होंने कहा तीन साल लगेंगे। मैंने कहा भाई तीन साल के बाद क्या सूरज कम उगेगा। मैंने हमारे वित्त मंत्रालय को पूछा, मैंने कहा कि भाई यह काम करना है बताओ क्या करोगे, रिजर्व बैंक तो तीन साल कह रही है। बोले नहीं-नहीं दो साल में कर देंगे। उनको लगा अब मोदी जी खुश हो जाएंगे। वो तीन कह रहे थे तो हमने दो कह दिया तो गाड़ी चल पड़ेगी। मैंने मेरे आफिस के लोगों को बुलाया, पीएमओ को। मैंने कहा भाई यह रिजर्व बैंक कह रही है तीन साल, डिपार्टमेंट कह रहा है दो साल.. आप क्या कह रहे हैं। मैंने कहा बोले एक साल तो लगेगा। अब हमने सबको सुन लिया और हमने कहा, 15 अगस्त को लालकिले पर से बोल दिया, मैंने कहा मुझे यह काम डेढ़ सौ दिन में पूरा करना है।

पिछले 68 years में एक साल में औसत एक करोड़ बैंक अकाउंट खुलते थे, 10 मिलियन। हमने ठान ली कि काम करना है। Last Ten week में Ten week में 71 मिलियन account खुल चुके। सरकार वो ही, मुलाजिम वही, दफ्तर वही, फाइल वही, आदत वही, लोग भी वही। काम हुआ कि नहीं हुआ। हो सकता है कि नहीं हो सकता। इतना ही नहीं देश के गरीब लोगों की ईमानदारी देखिए। देश के गरीबों की ईमानदारी देखिए और मैं आज उनका इस धरती से प्रणाम करता हूं। हमने कहा था मुझे गरीबों का Bank account खोलकर के मुख्य धारा में लाना है। अब उसके पास तो बेचारे को बैंक खाता खोलने के लिए पांच रुपये दस रुपया भी नहीं है। तो हम ने नियम बनाया जीरो balance से Bank account खुलेगा। लेकिन आप सब गर्व कर सकते हो। account खोलना था ऐसे गरीब परिवार के लोगों ने, मन में सोचा- नहीं, नहीं मुफ्त में क्यों कर रहे हैं। बोले मोदी जी ने तो कह दिया, ऐसा नहीं करेंगे। हमारा भी कोई जिम्मा होता है और मेरे दोस्तों आपको जानकर के खुशी होगी कि 70 मिलियन जो Bank Account खुले हैं Ten week में खुले हैं। पांच हजार करोड़ रुपये इन्होंने जमा कराए। five thousand crore rupees... किसी ने सौ रूपया, किसी ने दो सौ रूपया, उसको लगता है कि मैं मुख्य धारा से जुड़ रहा हूं।

मेरा कहने का तात्पर्य यह है दोस्तों कि एक बार.. हम हमारे देश के लोगों की ताकत को कम न आंके, हमारे देश की व्यवस्थाओं की ताकत को कम न आंके, हम व्यवस्थाओं पर भरोसा करें, देशवासियों पर भरोसा करें और उनको सही दिशा में ले जाने के लिए अगर उंगली पकड़कर के चलने की कोशिश करें, वो हमसे भी आगे दौड़ने के लिए तैयार होते हैं। मैंने उनको कहा है 26 जनवरी फाइनल डेट। पूरा करना है काम। लगे है। सारे बैंक employee लगे हुए हैं। काम कर रहे हैं।

02 अक्तूरबर से मैंने काम उठाया है – “स्वच्छ भारत” का। आप मुझे बताइये, दुनिया के किसी भी देश में जाते हैं और वहां की स्वच्छता देखते हैं तो सबसे पहले हमारे देश के गली-मोहल्ले याद आते हैं कि नहीं आते। हम यहां आकर के कभी गंदगी करते हैं क्या? लेकिन भारत में जाते ही.. ये सिर्फ व्यावस्थाओं के कारण ही समस्याएं नहीं हैं। मैं जानता हूं कठिन काम है। महात्मा गांधी भी इस काम के लिए बहुत आग्रह करते थे लेकिन क्या बहुत कठिन काम है? क्या बिल्कुल हाथ ही नहीं लगाना चाहिए? दूर भागना चाहिए क्या? आलोचना सहने की तैयारी चाहिए कि नहीं चाहिए? भाईयों-बहनों मैंने एक बहुत बड़ा संकट मोल लिया है, जानबूझ करके मोल लिया।

जो लोग 1857 के स्व़तंत्रता संग्राम में लड़ पड़े थे, शहीद हो गए थे, उनको अपने देश की आजादी जीते जी देखने को नहीं मिली थी, लेकिन वो अगर यह सोचते कि मेरे जीते जी आजादी मिले तभी तो मैं मरने को तैयार होऊं! तो कभी आजादी नहीं मिल सकती। अगर सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें तो दुनिया के सामने हमारी जो यह छवि बिगड़ी हुई है उसको भी बराबर साफ-सुथरा बना सकते हैं और इसलिए मैंने इस काम को उठा लिया। शौचालय बनाने में लगा हूं। बताइये! देश का प्रधानमंत्री यह काम कर रहा है – शौचालय बनाओ ! खास करके हमारी माताओं-बहनों की dignity.. गांव के अंदर आज भी खुले में शौचालय जाना पड़ रहा है, मन में दर्द होता है, शर्मिंदगी महसूस होती है। मैं आपसे भी अनुरोध करता हूं, ईश्वर ने आपको बहुत कुछ दिया होगा। आप पूंजीपति नहीं होंगे, लेकिन दो टाइम अच्छे ढंग से खाना तो जरूर खा सकते होंगे। आप भी अपने गांव में, जहां के आप मूल रहने वाले हैं, इस काम में कुछ योगदान दे सकते हैं तो जरूर दीजिए। मैं आपको निमंत्रण देता हूं। स्वच्छता जो है, वो ऐसा क्षेत्र है..क्योंकि गंदगी है, जो बीमारियों को लाती है और जब बीमारी आती है तो औसत, एवरेज एक गरीब परिवार को करीब-करीब छह से सात हजार रुपये का बोझ आ जाता है, बीमारी के टाइम। अगर हम स्वच्छता अभियान लेते हैं तो गरीबों की इससे बड़ी कोई सेवा नहीं होती है और इसलिए आपके दिल में भारत के लिए सेवा करने का कोई भी भाव आए, उस भाव का प्रकटीकरण इस स्वच्छता अभियान के माध्यम से हो सकता है।

मैं बहुत पहले जब ऑस्ट्रेलिया आया था, तब काफी मेरा मिलना-जुलना हुआ, कई बार आना हुआ है, यहां के लोगों से मिलता था, बात करता था। मुझे कई लोग पूछते थे कि ऑस्ट्रेलिया से आप क्या सीखेंगे? अब क्या कहे कि हमं ऑस्ट्रेलिया से क्या सीखना चाहिए? एक बात मेरे मन को हमेशा छूती थी, और वो थी –dignity of labour; यहां के चरित्र में है, जिस आदर के साथ वो डॉक्टर से बात करता है, उतने ही आदर से वो ड्राइवर के साथ बात करता है। कोई scientist के तौर पर काम करता है तो weekend पर ड्राइविंग करने चला जाता है और टैक्सी चलाता है। यह dignity of labour! यह ऑस्ट्रेलिया से सीखने वाला विषय है। स्वरच्छता के माध्यम से मैं इस बात को गर्व देना चाहता हूं, गौरव देना चाहता हूं, कि सफाई करना, यह कूड़ा-कचरा उठाना, यह below dignity नहीं है, बहुत इज्जत वाला काम है। भारत में हम लोगों का स्वाभाव क्या हो गया है? अगर कोई अपने घर कूड़ा-कचरा उठाने के लिए आ जाए, तो हम क्या कहते हैं, कचरा वाला आया है। हकीकत में वो कचरे वाला नहीं है, वो सफाई वाला है। लेकिन हम.. हमारे सोचने के तरीके में ऐसी गड़बड़ हो गई है, हमारी Terminology इतनी बदल गई है कि जो सचमुच में सफाई का काम करता है, उसको भी हम कचरे वाला कहते हैं। यह स्थिति बदलनी है और इसलिए .. और मैंने देखा है, आज हिंदुस्तान में उद्योग जगत के लोग हों, सिने जगत के लोग हों, शिक्षा जगत के लोग हों, राजनीति जगत के लोग हों, सबने गौरव के साथ इस काम में शरीक होने का बीड़ा उठाया है और मैं सबका अभिनंदन करता हूं। काम कठिन है। दिवाली में भी अगर अपने दो कमरे का घर भी साफ करना है तो हफ्ता निकल जाता है, तो इतना बड़ा हिंदुस्तान साफ करना है तो समय लगता है और इसलिए हमने कहा है 2019.. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आ रही है। महात्मा गांधी ने हमें आजादी दी है, हम गांधी को क्या दें? कम से कम साफ-सुथरा हिंदुस्तान तो उनके चरणों में धरे हम। इतना तो करें। 2019 तक इस बात को मैं आगे बढ़ाना चाहता हूं और यही चीजें हैं!

अगर बीमारी जाती है तो गरीब को फायदा होता है लेकिन स्वच्छता आती है तो Tourism इतनी तेजी से बढ़ेगा, जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। हिंदुस्तान के पास क्या नहीं है, दुनिया को देने के लिए, दिखाने के लिए। पूरे विश्व के पास जितना है, उतना अकेले एक हिंदुस्तान के पास है। हिम्मत के साथ अगर हम जुट जाएं तो लोग आ जाएंगे, लेकिन वो मिजाज भी तो चाहिए, वो दम भी तो चाहिए। अपने आप पर भरोसा भी तो होना चाहिए। इतनी पुरातन चीजें हमारे पास हैं, विश्व को हम आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन शुरूआत ही ऐसी होती है – यार! पता नहीं! .. और बात वहीं अटक जाती हैं।

दुनिया से हम इंवेस्टमेंट चाहते हैं। मेक इंडिया का अभियान लेकर के बैठे हैं। मैं चाहता हूं, विश्व भारत की धरती पर आए, मैन्यूफैक्चैरिंग सेक्टर में आए, क्योंकि हमारा मकसद एक है – हमारे देश के नौजवान को रोजगार मिले। हमारी सारी नीतियों के केंद्र बिंदु में नौजवानों के लिए रोजगार है। job creation कैसे हो? और इसके लिए हम दुनिया को कह रहे हैं – आइये, भारत में पूंजी लगाइये। जिस देश के पास इतने नौजवान हो, वो देश के नौजवान अपने कौशल के द्वारा, अपने सामर्थ्य के द्वारा दुनिया को क्या कुछ नहीं दे सकते हैं। इसलिए मेक इन इंडिया अभियान हमने चलाया है और उसके लिए नियमों में, कानूनों में, व्यवस्थाओं में बदलाव ला रहे हैं। Good Governance सबसे बड़ी आवश्यकता है, लेकिन पूंजी निवेश के लिए भी कोई आएगा तो सबसे पहले उसके साथ जो लोग आते हैं, CEO आएगा, Top Managers लाएगा और Managerial skills वाले पूछते हैं quality of life का क्या है।

मैं जब गुजरात में मुख्यमंत्री था, तो हम चाहते थे कि जापान हम से जुड़े, जापान के लोग हमारे यहां आएं। हमारे ध्यान में आया कि बाकी सब होगा, लेकिन golf नहीं होगा तो जापान नहीं आएगा। अब गुजरात वालों को गिल्ली-डंडा मालूम है, golf मालूम नहीं। आखिरकार हमने प्राइवेट पार्टी को कहा कि भई golf के लिए कोई व्यवस्था करो अब, मुझे investment चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि कोई भी पूंजी निवेश के लिए आता है, तो वो उसके अपने लोगों के लिए, managerial लोगों के लिए quality of life चाहता है। यह भारत की जिम्मेदारी बनती है कि वो उस quality of life के लिए लोगों को ऑफर करे, ताकि पूंजी निवेश के साथ उसके जो लोग आएं, उनके जीवन को भी एक स्तर से रहने का अवसर मिले, अच्छी शिक्षा मिले, अच्छी Health care मिले, अच्छा जीवन जीने का अवसर मिले, यह सारी चीजें जुड़ी हुई है। हम सिर्फ सरकार की नीतियां बनाए और लोगों को कहें कि यह टैक्स, फ्री करेंगे, वो फ्री करेंगे, यह मुफ्त में देंगे, आप आ जाइये, दुनिया आती नहीं है, उसके लिए व्यवस्थाएं विकसित करनी पड़ती है, environment बनाना होता है। मेक इन इंडिया हमने उस दिशा में प्रयास शुरू किया है।

भारत की रेल पर हम सब गर्व कर सकते हैं। लेकिन वहीं अटकी पड़ी है। न नया एक किलोमीटर रेल की पटरी डाली जाती है, न उसकी स्पीड बढ़ती है, न पैसेंजरों के लिए जगह बढ़ती है। पैसेंजर बढ़ रहे हैं, तो अंदर नहीं, तो ऊपर बैठते हैं। क्या इन स्थितियों के उपाय नहीं है क्या? उपाय हैं। बड़ी हिम्मत के साथ हमने निर्णय किया है, रेलवे में 100% Foreign Direct Dnvestment लाएंगे। दुनिया में जो लोग इसके जानकार हैं, मैं निमंत्रित करता हूँ; आएंगे। भारत में रेलवे के विस्तार के लिए इतनी संभावना है, रेलवे के विकास के लिए इतनी संभावना है, रेलवे में Technology upgradation की इतनी संभावना है और सवा सौ करोड़ देशवासियों का मार्केट! छोटी बात नहीं है। दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां रेलवे होगी, passenger नहीं मिलते होंगे जी।

मेरा कहने का तात्पर्य यह है मित्रों कि हम नीतिगत बदलाव ला रहे हैं, जिन बदलावों के कारण भारत के सामान्य मानव, के जीवन में बदलाव के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने के लिए हम आगे बढ़ेंगे। अब इतना बड़ा रेलवे का नेटवर्क है, लेकिन रेलवे में आज तक क्या होता था? जिसको भी नौकरी चाहिए, अखबार में advertisement आता है, वह apply करता था। apply करने के बाद रेलवे वाले उसको छह महीना, एक साल ट्रेनिंग देते थे। आप जानते हैं कि सरकारी स्तर पर training होती है तो फिर क्या। होता है, फिर वो रेलवे में नौकरी पर लग जाता था तो फिर वो रेलवे का क्या हाल होता होगा। हमने कहा कि रेलवे अपनी खुद चार युनिवर्सिटी बनाए, जिसको रेलवे में नौकरी करनी है वो युनिवर्सिटी में पढ़ाई करे और पढ़ाई के दरम्यान ही उसके अंदर वो ताकत आ जाए कि वो उत्तंम से उत्तम रेलवे की सेवा करे, Technology up gradation हो, रेलवे का expansion हो ।

At the same time, Human Resource Development भी होना चाहिए। इस के लिए जो एक और काम हमने उठाया है। दुनिया को बहुत बड़े work force की जरूरत होने वाली है। आज जो दुनिया तेज गति से दौड़ रही है ना, वो बुढ़ापे में आ गई है। आज दुनिया के कई देश है, जिसके पास आर्थिक सामर्थ्य है लेकिन work force नहीं हैं और सिर्फ Technology के माध्यम से जीवन संभव नहीं है। कितनी ही Technology लाएं लेकिन proper work force की जरूरत हरेक को रहने वाली है और हम भाग्यवान हैं। सारी दुनिया को जितनी work force की जरूरत है वो पहुंचाने के लिए हमारे लोगों ने भरपूर काम किया है। लेकिन वो अधूरा है। skill development आवश्यक है, skill development नहीं होगा.. विश्व को जिस प्रकार के work force की जरूरत है उस work force के लिए हम अभी से plan नहीं करते। हम दुनिया का मैपिंग करना चाहते हैं कि 2020 में किस देश में किस प्रकार के लोगों की जरूरत पड़ेगी। नर्सिंग, आज भी दुनिया को जरूरत है, maths and science के Teacher, आज भी दुनिया को जरूरत है। क्या भारत वहां से डायमंड भी export करें क्या? James and jewelry भी export करें क्या? आलू टमाटर भी export करें क्या? अगर हम दुनिया में best quality के टीचर export करते हैं, पूरी दुनिया को हम अपनी बना सकते हैं। सारे विश्व को इसकी जरूरत है। सारे विश्व को best quality teachers की जरूरत है, लेकिन उसके लिए Human Resource Development पर ध्यान भारत में देना पड़ता है। पांच साल लगें, दस साल लगें, 15 साल लगें लेकिन ऐसी मानव ताकत को तैयार करें जो विश्व की जरूरतों की पूर्ति के लिए हो। हमारे नौजवान को रोजगार मिलेगा। विश्वर का कल्याण होगा और भारत की जय-जयकार होगी।

विकास की नई ऊंचाईयों को अगर पार करना है, मेरे नौजवान साथियों भारत में अपना पूरा ध्यान भारत की युवा शक्ति पर केंद्रित करने की जरूरत है। युवा शक्ति के भरोसे, उनके सामर्थ्य के भरोसे, उनके talent के भरोसे दुनिया के अंदर भारत का लोहा मनवाने के लिए सामर्थ्यवान बन सकते हैं।

अब दुनिया जमीनी लड़ाई से चलने वाली नहीं है। हार जीत जमीनी लड़ाईयों से नहीं होने वाली। वो समय बीत चुका है। अब बाहुबल से नहीं, दुनिया बुद्धिबल से चलने वाली है। धनबल से भी ज्याहदा बुद्धिबल काम करने वाला है और उसके लिए सामर्थ्यवान नागरिकों को तैयार करना, सामर्थ्यवान नागरिकों के भरोसे विश्व की आवश्यकताओं को ध्याक में रखते हुए, भारत को अपने आप को सजग करना होगा। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं मेरे भाइयों-बहनों मैं जानता हूं, यह प्यार, यह आशीर्वाद, यह जय जयकार, इसके भीतर अपेक्षाएं पड़ी हैं, आकांक्षाएं पड़ी हैं लेकिन आपका सपना मेरा सपना है। आपकी इच्छाएं-आकांक्षाएं मेरी इच्छाएं-आकांक्षाएं हैं। आप जिस रूप में भारत को देखना चाहते हैं, मैं भी उसी रूप में भारत को बनाना चाहता हूं। फर्क इतना है कि पहले लगता था कि सरकारें देश बनाएंगी, मैं मानता हूं कि सरकारें देश नहीं बना सकती और नहीं बनाना चाहिए। देश बनता है देशवासियों के कारण, देश बनता है देशवासियों की शक्ति के कारण और अगर हम देशवासियों को अपनी शक्ति का भरपूर उपयोग करने का मौका दें, रूकावटें न डाले, सरकार इतना ही करें न.. हट जाए। आपको हैरानी होगी, पहले की सरकारें इस बात का गर्व करती थीं कि हमने यह कानून बनाया, हमने ढिकना कानून बनाया, हमने फलाना कानून बनाया, आपने सुना होगा सब चुनावों में। मेरी गाड़ी उलटी है। उनको कानून बनाने में मजा आता था, मुझे कानून खत्म करने में आनंद आता है। ऐसा बोझ बना दिया, ऐसा बोझ बना दिया है.. अरे जरा खिड़की खोलो भाई! लोगों को जीने दो! खुली हवा मिलने दो, खिलने लगेगा देश। इसलिए मैं कहता हूं कि देश के नागरिकों पर मुझे भरोसा है, नागरिकों के सामर्थ्य पर भरोसा है और उन्हीं के भरोसे देश आगे बढ़ने वाला है, सरकारों के भरोसे देश नहीं चल सकता है और न चलना चाहिए, इस विचार का, मैं इंसान हूं।

आप लोग जब यहां आएं होंगे, आप जब पढ़ते होंगे तो आपको अपनी Mark- sheet को certify कराने के लिए किसी politician के पास मोहर लगवाने जाना पड़ा होगा, किसी गजेटेड ऑफिसर के यहां जाना पड़ा होगा। सुबह कतार लगी होगी उसके घर के सामने और कोई पहचान के बिना काम होता नहीं है। यह सब आपने अनुभव किया होगा। मेरी समझ में नहीं आता है कि जीरोक्स। का जमाना है, क्या वो गजेटेड ऑफिसर या वो कॉरपोरेटर या वो MLA.. क्या वो certify करे तभी हम सच्चे हैं? लेकिन अंग्रेजों के जमाने से यह चल रहा था, मैंने आ करके निकाल दिया। मैंने कहा भई, तुम खुद ही लिख दो कि यह मेरा है, मैं मान लूंगा। अरे! सवा सौ करोड़ देशवासियों पर भरोसा तो करो, भई! अपनों पर हम भरोसा नहीं करेंगे, तो अपने हम पर भरोसा क्यों करेंगे। मैंने उन सारे नियमों को निकाल दिया। हां! जब नौकरी लगेगी तो तुम original certificate ला करके दिखा देना, बात पूरी हो गई।

कहने का तात्पर्य यह है कि हम हमारे देशवासियों पर विश्वास करें। आशंकाएं न करें। अपने आप ही माहौल बदलना शुरू हो जाता है। अगर मैंने गरीबों पर भरोसा न किया होता, तो मेरे गरीब हिंदुस्तान के बैंकों में पांच हजार करोड़ रुपया नहीं लगाते दोस्तो!

इसलिए हम भरोसा कर करके, समाज की शक्ति को जोड़ करके, देशवासियों की ताकत को जोड़ करके, हम देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हमारा किसान सुखी हो, हमारी माताओं-बहनों को सम्मान मिले, गौरव से जीएं, हर क्षेत्र में dignity.. अभी मैंने एक प्रोग्राम लॉन्च किया है – श्रमेव जयते! हम सत्यमेव जयते से तो परिचित थे, मैंने कहा – श्रमेव जयते... dignity of labour , इसको बहुत आगे बढ़ा रहा हूं।

लेकिन मुझे विश्वास है भाइयों कि आपने जो मुझे प्यार दिया है उस प्यार के माध्यम से कुछ जानकारी आपको दे दूं, ताकि.. कुछ बात, आपके लिए भी बात होनी चाहिए न। आपकी भी शिकायत होगी साहब, embassy में कोई पूछता नहीं है, कोई फोन नहीं उठाता, ईमेल करते हैं तो कोई जवाब नहीं देता हैं और फिर.. छोड़ो यार! मोदी जी आए, लेकिन कुछ हुआ नहीं। यही होता है न। निराशा इतनी है, इतने बुरे दिन देखे हैं कि मन में यह होता है कि यार.. लेकिन व्यवस्थाएं बदली जा सकती है। एक निर्णय - मैं जब अमेरिका गया था, तो मैंने कुछ बातें कही थीं, लेकिन उस समय Medison Square में जो बातें कही थीं, वहां जो लोग इक्ट्ठे हुए थे, उनको भरोसा नहीं था, क्यों कि मेरे पहले भी बहुत लोग बोल करके गए होंगे। दूध का जला छांछ फूंक कर पीता है लेकिन भाइयों बहनों मैंने अमेरिका में जो कहा था, मैंने आ करके उसको एक के बाद एक लागू करना शुरू कर दिया। जिनके पास पीआईओ कार्ड है, उन सबको आजीवन वीजा मिल जाएगा। अब, embassy वाले ने फोन उठाया, नहीं उठाया, ईमेल का जवाब दिया, नहीं दिया, हम गए तब मिला, नहीं मिला- सब दूर। एक और काम है, क्योंकि यह झगड़ा चल रहा है कि पीआईओ को वो ले करके चले या ओसीआई उसको ले करके चले.. तो ओसीआई वाला और पीआईओ वाला, दोनों के यहां अलग-अलग treatment होती है। मैंने वहां घोषणा की थी कि हम दोनों को एक कर देंगे।

इस बार प्रवासी भारतीय दिवस अहमदाबाद में होने वाला है। इस बार के प्रवासी भारतीय दिवस का विशेष महत्व होने वाला है। 1915, जनवरी महीने में महात्मा गांधी साउथ अफ्रीका से भारत वापस आए थे। एक प्रवासी भारतीय के रूप में साउथ अफ्रीका से 1915, जनवरी में महात्मा गांधी वापस आए थे। महात्मा गांधी का हिंदुस्तान वापस आने को 2015, जनवरी में 100 साल पूरे हो रहे है। इसलिए प्रवासी भारतीय दिवस में महात्मा गांधी की शताब्दी मनाए जाने का अवसर है और विश्व में रहने वाले हर भारतीय को.. जैसे महात्मा गांधी के दिल में देश के लिए कुछ करने की ललक थी, यह ललक हर हिंदुस्तानी के दिल में, वो दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो, वो जलती रहे, जगती रहे। इस तरह इस योजना को आगे बढ़ाते हुए.. इसलिए यह पीआईओ और ओसीआई को एक करने का तय किया है कि 8-9 जनवरी, 2015 जब प्रवासी भारतीय दिवस होगा, उसके पहले मेरी सरकार इस काम को पूरा कर देगी। तारीख के साथ बता रहा हूं मैं।

पहले हमारे यहां से जो लोग आते थे, आप लोगों को पता होगा, पुलिस थाने जाना पड़ता था कि मैं ‘वही’ हूं और यह पुलिस वाला तय करता था कि अच्छा़, अच्छा ‘वही’ हैं आप। क्या‘–क्या.. मैं हैरान हूं जी! हमने तय कर दिया है किसी को जाना नहीं पड़ेगा। छुट्टी! और इसको लागू कर दिया है। कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसी चीजें बना करके रखी है.. और इस तरह से मैंने मुक्ति का अभियान चलाया है भाईयों। सिडनी में, हमारी embassy का एक हिस्सा यहां भी है, वहां का cultural center, आज ही मैंने सूचना दी है, फरवरी तक मैं उसको functional करना चाहता हूं और यह होगा!

एक मेरी वेबसाइट है, आप में से किसी को interest हो तो mygov.in अगर शिकायत हो तो लिखिए उस पर। सुझाव है तो भी लिखिए और आप देश के लिए कुछ करना चाहते हैं तो भी लिखिए। फरवरी में यह cultural center शुरू हो जाए, इसके लिए मैं आगे बढ़ने वाला हूं।

एक और महत्वपूर्ण निर्णय करना है, जो शायद आपको.. भारत में जो Tourism बढ़ाने के लिए हम चाहते हैं, हम भी ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों को कह सकते हैं –Visa on Arrival. यह सुविधा बहुत जल्द आपको प्राप्त हो जाए, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

मैंने काफी समय ले लिया, मैं समझता हूं। आप लोग special train ले करके आए हैं। कोई कल्पना कर सकता है! आज working day! और यह जमावड़ा! ऊपर तो मेरी नजर भी नहीं पहुंच पा रही है। मैं आपके प्यार के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं और यह आशीर्वाद बने रहें, प्यार बना रहे।

मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, मैं परिश्रम करने में कोई कमी नहीं रखूंगा। ईश्वर ने जितनी बुद्धि, समय, शक्ति दी है वो आपको समर्पित है, देशवासियों को समर्पित है। लेकिन यह निश्चित है कि हम सबको मिलकर देश को बनाना है। देश ने हमें बहुत कुछ दिया है। हमें भी देश को कुछ देना है। आज हम जो कुछ भी है, किसी न किसी गरीब की कृपा है, तब हम यहां है, हमने उसे लौटाना है। ईश्वर भी प्रसन्न होता है, जब हम किसी के काम आते हैं।

मैं फिर एक बार, इतनी बड़ी संख्या में आप आए, सम्मान दिया, प्यार दिया, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। मेरे साथ आज पूरी ताकत से बोलिए और मेरा भी मन करता है कि बोल लूं– भारत माता की जय! भारत माता की जय!

സേവനത്തിന്റെയും സമർപ്പണത്തിന്റെയും 20 വർഷങ്ങൾ നിർവ്വചിക്കുന്ന 20 ചിത്രങ്ങൾ
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വാരാണസിയിൽ പ്രധാനമന്ത്രി ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷന്റെ ഉദ്ഘാടന വേളയിൽ പ്രധാനമന്ത്രിയുടെ പ്രസംഗം
October 25, 2021
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''സ്വാതന്ത്ര്യാനന്തര ഇന്ത്യയില്‍, ഏറെക്കാലമായി ആരോഗ്യ അടിസ്ഥാനസൗകര്യങ്ങള്‍ക്കു മതിയായ ശ്രദ്ധ ലഭിച്ചിരുന്നില്ല. വേണ്ട ചികിത്സയ്ക്കായി ജനങ്ങള്‍ക്കു നെട്ടോട്ടമോടേണ്ടിവന്നു. ഇത് സ്ഥിതി വഷളാക്കുകയും സാമ്പത്തിക ബുദ്ധിമുട്ടു വരുത്തുകയും ചെയ്തു''
''കേന്ദ്രത്തിലെ ഗവണ്‍മെന്റും സംസ്ഥാനവും പാവപ്പെട്ടവരുടെയും പീഡിതരുടെയും അടിച്ചമര്‍ത്തപ്പെട്ടവരുടെയും പിന്നാക്കക്കാരുടെയും ഇടത്തരക്കാരുടെയും വേദന തിരിച്ചറിയുന്നു''
''പിഎം ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് അടിസ്ഥാനസൗകര്യ ദൗത്യത്തിലൂടെ രാജ്യത്തിന്റെ മുക്കിലും മൂലയിലും ചികിത്സ മുതല്‍ നിര്‍ണായക ഗവേഷണങ്ങള്‍ വരെയുള്ള സേവനങ്ങള്‍ക്കായി ഒരു ആവാസവ്യവസ്ഥ സൃഷ്ടിക്കും''
''പിഎം ആയുഷ്മാന്‍ ഭാരത് ആരോഗ്യ അടിസ്ഥാനസൗകര്യ ദൗത്യം, ആരോഗ്യത്തിനായി മാത്രമല്ല, ആത്മനിര്‍ഭരതയ്ക്കായുമുള്ള മാധ്യമം''
''കാശിയുടെ ഹൃദയത്തിനു മാറ്റമില്ല, മനസ്സിനു മാറ്റമില്ല. എന്നാല്‍ ശരീരം മെച്ചപ്പെടുത്താന്‍ നടത്തുന്നത് ആത്മാര്‍ത്ഥമായ ശ്രമങ്ങള്‍''
''ഇന്ന്, സാങ്കേതികവിദ്യയില്‍ മുതല്‍ ആരോഗ്യകാര്യങ്ങളില്‍ വരെ, അഭൂതപൂര്‍വമായ സൗകര്യങ്ങളാണ് ബിഎച്ച്യുവില്‍ ഒരുക്കുന്നത്. നാടിന്റെ നാനാഭാഗത്തുനിന്നും യുവസുഹൃത്തുക്കള്‍ പഠനത്തിനായി ഇവിടെയെത്തുന്നുണ്ട്''

ഹര  ഹര മഹാദേവ്!

നിങ്ങളുടെ അനുമതിയോടെ ഞാൻ ആരംഭിക്കട്ടെ! ഹര  ഹര മഹാദേവിന്റെയും ബാബ വിശ്വനാഥിന്റെയും  അന്നപൂർണ പുണ്യഭൂമിയായ കാശിയിലെ എല്ലാ സഹോദരങ്ങൾക്കും സഹോദരിമാർക്കും ആശംസകൾ! നിങ്ങൾക്കെല്ലാവർക്കും ദീപാവലി, ദേവ് ദീപാവലി, അന്നക്കൂട്ട്, ഭായ് ദൂജ്, പ്രകാശോത്സവ്, ഛത് ആശംസകൾ!

ഉത്തർപ്രദേശ് ഗവർണർ ശ്രീമതി. ആനന്ദിബെൻ പട്ടേൽ ജി, യുപിയിലെ ഊർജ്ജസ്വലനായ മുഖ്യമന്ത്രി യോഗി ആദിത്യനാഥ് ജി, കേന്ദ്ര ആരോഗ്യമന്ത്രി മൻസുഖ് മാണ്ഡവ്യ ജി, യുപി സർക്കാരിലെ മറ്റ് മന്ത്രിമാർ, കേന്ദ്രത്തിലെ ഞങ്ങളുടെ സഹപ്രവർത്തകൻ മഹേന്ദ്ര നാഥ് പാണ്ഡെ ജി, സംസ്ഥാന മന്ത്രിമാരായ അനിൽ രാജ്ഭർ ജി, നീലകണ്ഠ് തിവാരി ജി, രവീന്ദ്ര ജയ്‌സ്വാൾ ജി. , മറ്റ് മന്ത്രിമാർ, പാർലമെന്റിലെ ഞങ്ങളുടെ സഹപ്രവർത്തകർ ശ്രീമതി സീമ ദ്വിവേദി ജി, ബി.പി. സരോജ് ജി, വാരണാസി മേയർ ശ്രീമതി മൃദുല ജയ്‌സ്വാൾ ജി, മറ്റ് ജനപ്രതിനിധികൾ, രാജ്യത്തുടനീളമുള്ള ജില്ലാ ആശുപത്രികളുമായും മെഡിക്കൽ സ്ഥാപനങ്ങളുമായും ബന്ധപ്പെട്ട ആരോഗ്യ വിദഗ്ധർ, ബനാറസിലെ എന്റെ സഹോദരീസഹോദരന്മാരേ !

കൊറോണ മഹാമാരിക്കെതിരായ പോരാട്ടത്തിൽ 100 ​​കോടി വാക്സിൻ ഡോസുകൾ എന്ന വലിയ നാഴികക്കല്ല് രാജ്യം കൈവരിച്ചു. ബാബ വിശ്വനാഥിന്റെ അനുഗ്രഹത്താലും മാ ഗംഗയുടെ അചഞ്ചലമായ മഹത്വത്താലും കാശിയിലെ ജനങ്ങളുടെ അചഞ്ചലമായ വിശ്വാസത്താലും എല്ലാവർക്കും സൗജന്യ വാക്‌സിൻ എന്ന കാമ്പയിൻ വിജയകരമായി മുന്നേറുകയാണ്. ഞാൻ നിങ്ങളെ എല്ലാവരെയും ബഹുമാനപൂർവ്വം അഭിവാദ്യം ചെയ്യുന്നു. ഇന്ന് കുറച്ച് മുമ്പ്, ഒമ്പത് പുതിയ മെഡിക്കൽ കോളേജുകൾ ഉത്തർ പ്രദേശിന് സമർപ്പിക്കാനുള്ള പദവി എനിക്ക് ലഭിച്ചു. പൂർവാഞ്ചലിലെയും യുപിയിലെയും കോടിക്കണക്കിന് പാവപ്പെട്ട, ദലിത്-പിന്നാക്ക-ചൂഷിത-നിർധനരായ ആളുകൾക്ക്, സമൂഹത്തിലെ എല്ലാ വിഭാഗങ്ങൾക്കും ഇത് വളരെയധികം പ്രയോജനം ചെയ്യും, മറ്റ് നഗരങ്ങളിലെ വലിയ ആശുപത്രികൾ സന്ദർശിക്കുന്നതിന്റെ ബുദ്ധിമുട്ടുകളിൽ നിന്ന് അവർ രക്ഷപ്പെടും.

സുഹൃത്തുക്കളേ 

ഒരു പദ്യമുണ്ട് :

मुक्ति जन्म महि जानि,ज्ञान खानिअघ हानि कर।

जहं बस सम्भु भवानि,सो कासी सेइअ कस न।।

അതായത് കാശിയിൽ ശിവനും ശക്തിയും കുടികൊള്ളുന്നു. അറിവിന്റെ ശക്തികേന്ദ്രമായ കാശി നമ്മെ വേദനയിൽ നിന്നും കഷ്ടപ്പാടുകളിൽ നിന്നും മോചിപ്പിക്കുന്നു. അപ്പോൾ ആരോഗ്യവുമായി ബന്ധപ്പെട്ട ഒരു ബൃഹത്തായ പദ്ധതിയും രോഗങ്ങളിൽ നിന്നും കഷ്ടപ്പാടുകളിൽ നിന്നും മുക്തി നേടാനുള്ള ഇത്രയും വലിയ പ്രമേയവും ആരംഭിക്കാൻ കാശിയേക്കാൾ മികച്ച സ്ഥലം മറ്റെന്തുണ്ട്? കാശിയിലെ എന്റെ സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ, രണ്ട് വലിയ പരിപാടികൾ ഈ വേദിയിൽ നിന്നാണ് നടക്കുന്നത്. ആദ്യത്തേതു് രാജ്യത്തിന് ഒട്ടാകെ പ്രയോജനമുള്ള , 64,000 കോടി രൂപയുടെ  ഒരു കേന്ദ്ര ഗവൺമെന്റ്പദ്ധതി   പുണ്യഭൂമിയായ കാശിയിൽ നിന്ന് ഇന്ന് ആരംഭിക്കുന്നു. രണ്ടാമതായി, കാശിയുടെയും പൂർവാഞ്ചലിന്റെയും വികസനത്തിന് ആയിരക്കണക്കിന് കോടി രൂപയുടെ പദ്ധതികൾ ഉദ്ഘാടനം ചെയ്യുന്നു. ഈ രണ്ട് പദ്ധതികളും കൂടി ചേർത്താൽ, ഏകദേശം 75,000 കോടി രൂപയുടെ പദ്ധതികൾ ഒന്നുകിൽ സമാരംഭിക്കുകയോ സമർപ്പിക്കുകയോ ചെയ്യുകയാണെന്ന് എനിക്ക് പറയാൻ കഴിയും. കാശിയിൽ നിന്ന് ആരംഭിക്കുന്ന ഈ പദ്ധതികളിലും മഹാദേവന്റെ അനുഗ്രഹമുണ്ട്. മഹാദേവന്റെ അനുഗ്രഹം ഉള്ളിടത്ത് ക്ഷേമവും വിജയവും ഉറപ്പാണ്. മഹാദേവന്റെ അനുഗ്രഹം ഉള്ളപ്പോൾ, കഷ്ടപ്പാടുകളിൽ നിന്നുള്ള മോചനവും അനിവാര്യമാണ്. 

സുഹൃത്തുക്കളേ 

64000  കോടി രൂപ യ്ക്കുള്ള ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷൻ  രാഷ്ട്രത്തിന് സമർപ്പിക്കാനുള്ള ഭാഗ്യം  എനിക്ക് ലഭിച്ചു. യുപി ഉൾപ്പെടെ രാജ്യത്തിന്റെ മൊത്തത്തിലുള്ള ആരോഗ്യ അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ ശക്തിപ്പെടുത്തുന്നതിനും ഭാവിയിൽ പകർച്ചവ്യാധികൾ തടയുന്നതിനും ഗ്രാമ-ബ്ലോക്ക് തലം വരെ നമ്മുടെ ആരോഗ്യ സംവിധാനത്തിൽ ആത്മവിശ്വാസവും സ്വയം പര്യാപ്തതയും വളർത്തുന്നതിനും കാശിയിൽ  ഇന്ന് ഉദ്‌ഘാടനം ചെയ്യപ്പെട്ടു. . കാശിക്ക് 5000 കോടി രൂപയുടെ അടിസ്ഥാന സൗകര്യ വികസന പദ്ധതികളും ഇന്ന് ഉദ്ഘാടനം ചെയ്തു. ആറ്റുപടിക്കെട്ടുകളുടെ സൗന്ദര്യവൽക്കരണം, ഗംഗ, വരുണ നദികളുടെ ശുചിത്വം, പാലങ്ങൾ, പാർക്കിംഗ് സ്ഥലങ്ങൾ, ബിഎച്ച്‌യുവിലെ മറ്റ് നിരവധി സൗകര്യങ്ങൾ എന്നിവ ഇതിൽ ഉൾപ്പെടുന്നു. ജീവിതം സുഗമവും ആരോഗ്യകരവും ഐശ്വര്യപൂർണവുമാക്കാൻ കാശിയിൽ നിന്നുള്ള ഈ ഉത്സവ സീസണിലെ വികസനത്തിന്റെ ഈ ഉത്സവം രാജ്യത്തിനാകെ പുതിയ ഊർജ്ജവും ശക്തിയും ആത്മവിശ്വാസവും നൽകും. കാശി ഉൾപ്പെടെ ഗ്രാമങ്ങളിലും നഗരങ്ങളിലും താമസിക്കുന്ന 130 കോടി രാജ്യവാസികൾക്കും അഭിനന്ദനങ്ങൾ!

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

നമ്മുടെ രാജ്യത്തെ എല്ലാ പ്രവർത്തനങ്ങളുടെയും  അടിസ്ഥാനം ആരോഗ്യമാണ്. ആരോഗ്യമുള്ള ശരീരത്തിന് വേണ്ടിയുള്ള നിക്ഷേപം എല്ലായ്പ്പോഴും നല്ല നിക്ഷേപമായി കണക്കാക്കപ്പെടുന്നു. എന്നാൽ സ്വാതന്ത്ര്യം ലഭിച്ച് ഏറെക്കാലമായിട്ടും ആരോഗ്യ സൗകര്യങ്ങളിൽ കാര്യമായ ശ്രദ്ധ ചെലുത്തിയിരുന്നില്ല. രാജ്യത്ത് ദീർഘകാലം ഭരിച്ച സർക്കാരുകൾ രാജ്യത്തിന്റെ ആരോഗ്യ സംരക്ഷണ സംവിധാനം വികസിപ്പിക്കുന്നതിനു പകരം അവഗണിച്ചു. ഒന്നുകിൽ ഗ്രാമങ്ങളിൽ ആശുപത്രി ഇല്ലായിരുന്നു, ഉണ്ടെങ്കിൽ ചികിത്സിക്കാൻ ആളില്ലായിരുന്നു. ബ്ലോക്ക് തലത്തിലുള്ള ആശുപത്രികളിൽ പരിശോധനയ്ക്ക് സൗകര്യമില്ല. പരിശോധന നടത്തിയാലും അതിന്റെ കൃത്യതയിൽ സംശയമുണ്ടായിരുന്നു. ജില്ലാ ആശുപത്രിയിൽ എത്തുമ്പോൾ, ഒരാൾക്ക് ശസ്ത്രക്രിയ ആവശ്യമായ ഗുരുതരമായ രോഗം കണ്ടെത്തി. ശസ്‌ത്രക്രിയയ്‌ക്ക്‌ അത്തരം സൗകര്യങ്ങളൊന്നും ഇല്ലാതിരുന്നതിനാൽ, തിരക്കേറിയ ഒരു വലിയ ഹോസ്‌പിറ്റലിലേക്ക്‌ ഒരാൾ ഓടിയെത്തേണ്ടി വന്നു, അവിടെ ഒരു നീണ്ട കാത്തിരിപ്പ്‌ ഉണ്ടായിരുന്നു. രോഗിയും അവന്റെ മുഴുവൻ കുടുംബവും ഒരു പാട് പ്രശ്‌നങ്ങൾ അഭിമുഖീകരിക്കുകയും തൽഫലമായി ഗുരുതരമായ രോഗം വഷളാകുകയും പാവപ്പെട്ടവർക്ക് സാമ്പത്തിക ബാധ്യത വരുത്തുകയും ചെയ്യും എന്നതിന് നാമെല്ലാവരും സാക്ഷികളാണ്.

സുഹൃത്തുക്കളേ 

നമ്മുടെ ആരോഗ്യസംരക്ഷണ സംവിധാനത്തിലെ വലിയ വിടവ് ചികിത്സയെ സംബന്ധിച്ച് ദരിദ്രർക്കും ഇടത്തരക്കാർക്കും ഇടയിൽ നിത്യമായ ഉത്കണ്ഠ സൃഷ്ടിച്ചു. ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷൻ രാജ്യത്തിന്റെ ആരോഗ്യസംരക്ഷണ സംവിധാനത്തിലെ ഈ പിഴവുകൾക്കുള്ള പരിഹാരമാണ്. നമ്മുടെ ആരോഗ്യസംവിധാനം ഇന്ന് ഒരുങ്ങിക്കൊണ്ടിരിക്കുന്നു, അതുവഴി ഭാവിയിൽ ഏത് പകർച്ചവ്യാധിയെയും നേരിടാൻ നാം  തയ്യാറാണ്. രോഗം നേരത്തേ കണ്ടുപിടിക്കാനും അന്വേഷണത്തിൽ കാലതാമസം ഉണ്ടാകാതിരിക്കാനുമുള്ള ശ്രമങ്ങളും നടക്കുന്നുണ്ട്. അടുത്ത നാലോ അഞ്ചോ വർഷത്തിനുള്ളിൽ രാജ്യത്ത് ഗ്രാമം മുതൽ ബ്ലോക്ക്, ജില്ല, പ്രാദേശിക, ദേശീയ തലങ്ങളിലേക്ക് നിർണായക ആരോഗ്യ സംരക്ഷണ ശൃംഖല ശക്തിപ്പെടുത്തുകയാണ് ലക്ഷ്യം. ഗുരുതരമായ ആരോഗ്യ സൗകര്യങ്ങൾ ഇല്ലാത്ത സംസ്ഥാനങ്ങളിൽ , പ്രത്യേകിച്ച് നമ്മുടെ വടക്കുകിഴക്കൻ സംസ്ഥാനങ്ങളിലും ഉത്തരാഖണ്ഡ്, ഹിമാചൽ തുടങ്ങിയ മലയോര സംസ്ഥാനങ്ങളിലും പ്രത്യേക ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിക്കുന്നു, 

സുഹൃത്തുക്കളേ 

ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷന്റെ മൂന്ന് പ്രധാന വശങ്ങൾ രാജ്യത്തിന്റെ ആരോഗ്യമേഖലയിലെ വ്യത്യസ്ത വിടവുകൾ പരിഹരിക്കുന്നു. ആദ്യത്തേത് രോഗനിർണയത്തിനും ചികിത്സയ്ക്കുമായി വിപുലമായ സൗകര്യങ്ങൾ സൃഷ്ടിക്കുന്നതുമായി ബന്ധപ്പെട്ടിരിക്കുന്നു. ഇതിന് കീഴിൽ, ഗ്രാമങ്ങളിലും നഗരങ്ങളിലും ആരോഗ്യ-ക്ഷേമ കേന്ദ്രങ്ങൾ തുറക്കുന്നു, അവിടെ രോഗങ്ങൾ നേരത്തെ കണ്ടെത്തുന്നതിനുള്ള സൗകര്യങ്ങളുണ്ടാകും. സൗജന്യ മെഡിക്കൽ കൺസൾട്ടേഷനുകൾ, സൗജന്യ പരിശോധനകൾ, സൗജന്യ മരുന്നുകൾ തുടങ്ങിയ സൗകര്യങ്ങൾ ഈ കേന്ദ്രങ്ങളിൽ ലഭ്യമാകും. കൃത്യസമയത്ത് രോഗം കണ്ടെത്തിയാൽ, അത് മാരകമാകാനുള്ള സാധ്യത കുറവാണ്. 600-ലധികം ജില്ലകളിലായി ഗുരുതരമായ രോഗങ്ങളുടെ ചികിത്സയ്ക്കായി 35,000-ലധികം പുതിയ കിടക്കകൾ ഒരുക്കും. ബാക്കിയുള്ള 125 ജില്ലകളിലും റഫറൽ സൗകര്യം ഒരുക്കും. ദേശീയ തലത്തിൽ 12 സെൻട്രൽ ഹോസ്പിറ്റലുകളിൽ പരിശീലനത്തിനും മറ്റ് ശേഷി വർധിപ്പിക്കുന്നതിനുമായി ആവശ്യമായ സൗകര്യങ്ങൾ വികസിപ്പിച്ചെടുക്കാൻ പദ്ധതിയുണ്ട്. ഈ പദ്ധതിക്ക് കീഴിൽ, ശസ്ത്രക്രിയാ ശൃംഖല ശക്തിപ്പെടുത്തുന്നതിനായി സംസ്ഥാനങ്ങളിൽ   ആഴ്ചയിൽ മുഴുവൻ സമയവും പ്രവർത്തിക്കുന്ന 15 എമർജൻസി ഓപ്പറേഷൻ സെന്ററുകളും സൃഷ്ടിക്കും.

സുഹൃത്തുക്കളേ 

രോഗനിർണ്ണയത്തിനുള്ള ടെസ്റ്റിംഗ് ശൃംഖലയുമായി ബന്ധപ്പെട്ടതാണ് പദ്ധതിയുടെ രണ്ടാമത്തെ വശം. ഈ ദൗത്യത്തിന് കീഴിൽ, രോഗനിർണയത്തിനും നിരീക്ഷണത്തിനും ആവശ്യമായ അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ വികസിപ്പിക്കും. 730 ജില്ലകളിൽ സംയോജിത പബ്ലിക് ഹെൽത്ത് ലാബുകളും രാജ്യത്ത് കണ്ടെത്തിയ 3,500 ബ്ലോക്കുകളിൽ ബ്ലോക്ക് പബ്ലിക് ഹെൽത്ത് യൂണിറ്റുകളും സ്ഥാപിക്കും. രോഗ നിയന്ത്രണത്തിനുള്ള അഞ്ച് പ്രാദേശിക ദേശീയ കേന്ദ്രങ്ങൾ, 20 മെട്രോപൊളിറ്റൻ യൂണിറ്റുകൾ, 15 ബിഎസ്എൽ ലാബുകൾ എന്നിവ ഈ ശൃംഖലയെ കൂടുതൽ ശക്തിപ്പെടുത്തും.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

ഈ ദൗത്യത്തിന്റെ മൂന്നാമത്തെ വശം പകർച്ചവ്യാധിയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട ഗവേഷണ സ്ഥാപനങ്ങളുടെ വിപുലീകരണവും ശാക്തീകരണവുമാണ്. നിലവിൽ 80 വൈറൽ ഡയഗ്‌നോസ്റ്റിക്‌സ് ആൻഡ് റിസർച്ച് ലാബുകൾ രാജ്യത്തുണ്ട്. ഇവ കൂടുതൽ മെച്ചപ്പെടുത്തും. പകർച്ചവ്യാധികളിൽ ബയോ സേഫ്റ്റി ലെവൽ-3 ലാബുകൾ ആവശ്യമാണ്. അതിനാൽ ഇത്തരത്തിലുള്ള 15 പുതിയ ലാബുകൾ പ്രവർത്തനക്ഷമമാക്കും. ഇതിനുപുറമെ, രാജ്യത്ത് നാല് പുതിയ വൈറോളജി ഇൻസ്റ്റിറ്റ്യൂട്ടുകളും ഒരു ദേശീയ ആരോഗ്യ സ്ഥാപനവും സ്ഥാപിക്കുന്നു. ലോകാരോഗ്യ സംഘടനയുടെ ദക്ഷിണേഷ്യയിലെ റീജിയണൽ റിസർച്ച് പ്ലാറ്റ്‌ഫോം ഈ ഗവേഷണ ശൃംഖലയെ ശക്തിപ്പെടുത്തും. ചുരുക്കത്തിൽ, ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷനിലൂടെ രാജ്യത്തിന്റെ ഓരോ ഭാഗത്തും ചികിത്സ മുതൽ നിർണായക ഗവേഷണം വരെയുള്ള സമ്പൂർണ്ണ ആവാസവ്യവസ്ഥ വികസിപ്പിക്കും.

സുഹൃത്തുക്കളേ 

ശരി, ഇത് പതിറ്റാണ്ടുകൾക്ക് മുമ്പ് ചെയ്യേണ്ടതായിരുന്നു. പക്ഷേ, സാഹചര്യം വിവരിക്കേണ്ടതില്ല. കഴിഞ്ഞ ഏഴ് വർഷമായി ഞങ്ങൾ തുടർച്ചയായി മെച്ചപ്പെടുകയാണ്, എന്നാൽ ഇപ്പോൾ അത് വളരെ വലിയ തോതിലും വളരെ ആക്രമണാത്മക സമീപനത്തോടെയും ചെയ്യേണ്ടതുണ്ട്. കുറച്ച് ദിവസങ്ങൾക്ക് മുമ്പ്, രാജ്യമെമ്പാടുമുള്ള മെഗാ ദേശീയ അടിസ്ഥാന സൗകര്യ പദ്ധതിയായ ഗതിശക്തി ഡൽഹിയിൽ നിന്ന് ഞാൻ ആരംഭിച്ചു. 64,000 കോടി രൂപയുടെ ആരോഗ്യത്തിന് വേണ്ടിയുള്ള ഈ രണ്ടാമത്തെ വലിയ ദൗത്യം രാജ്യത്തെ ഓരോ പൗരനെയും ആരോഗ്യത്തോടെ നിലനിർത്താൻ കാശിയുടെ മണ്ണിൽ നിന്ന് ആരംഭിക്കുകയാണ്.

സുഹൃത്തുക്കളേ 

ഇത്തരമൊരു ആരോഗ്യ അടിസ്ഥാനസൗകര്യം  വികസിപ്പിച്ചെടുക്കുമ്പോൾ, അത് ആരോഗ്യ സേവനം മെച്ചപ്പെടുത്തുക മാത്രമല്ല, സമ്പൂർണ തൊഴിൽ അന്തരീക്ഷം സൃഷ്ടിക്കുകയും ചെയ്യുന്നു. ഡോക്ടർമാർ, പാരാമെഡിക്കുകൾ, ലാബുകൾ, ഫാർമസികൾ, ശുചിത്വം, ഓഫീസുകൾ, യാത്ര, ഗതാഗതം, ഭക്ഷണശാലകൾ, തുടങ്ങിയ തൊഴിലവസരങ്ങൾ ഈ പദ്ധതിയിലൂടെ സൃഷ്ടിക്കാൻ പോകുന്നു. ഒരു വലിയ ആശുപത്രി പണിതാൽ ഒരു നഗരം മുഴുവൻ അതിനു ചുറ്റും താമസമാക്കുന്നത് ആശുപത്രിയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട പ്രവർത്തനങ്ങൾക്ക് ഉപജീവന കേന്ദ്രമായി മാറുന്നത് നാം കണ്ടു. അത് വലിയ സാമ്പത്തിക പ്രവർത്തനങ്ങളുടെ കേന്ദ്രമായി മാറുന്നു. അതിനാൽ, ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷൻ ആരോഗ്യത്തിന്റെയും സാമ്പത്തിക സ്വാശ്രയത്വത്തിന്റെയും ഒരു മാധ്യമമാണ്. സമഗ്രമായ ആരോഗ്യ സംരക്ഷണത്തിനായി നടത്തുന്ന ശ്രമങ്ങളുടെ ഭാഗമാണിത്. ഹോളിസ്റ്റിക് ഹെൽത്ത് കെയർ എന്നതിനർത്ഥം അത് എല്ലാവർക്കും ആക്സസ് ചെയ്യാവുന്നതും താങ്ങാനാവുന്നതുമായിരിക്കണം എന്നാണ്. ഹോളിസ്റ്റിക് ഹെൽത്ത് കെയർ എന്നാൽ ആരോഗ്യത്തിലും ആരോഗ്യത്തിലും ശ്രദ്ധ കേന്ദ്രീകരിക്കുന്നിടത്താണ്. സ്വച്ഛ് ഭാരത് അഭിയാൻ, ജൽ ജീവൻ മിഷൻ, ഉജ്ജ്വല യോജന, പോഷൻ അഭിയാൻ, മിഷൻ ഇന്ദ്രധനുഷ് തുടങ്ങി നിരവധി കാമ്പെയ്‌നുകൾ രാജ്യത്തെ കോടിക്കണക്കിന് പാവപ്പെട്ടവരെ രോഗങ്ങളിൽ നിന്ന് രക്ഷിച്ചു. ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് പദ്ധതിയിലൂടെ രണ്ട് കോടിയിലധികം പാവപ്പെട്ടവർക്ക് ആശുപത്രികളിൽ സൗജന്യ ചികിത്സയും ലഭ്യമാക്കിയിട്ടുണ്ട്. ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഡിജിറ്റൽ മിഷനിലൂടെ ചികിത്സയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട നിരവധി പ്രശ്‌നങ്ങൾ പരിഹരിക്കപ്പെടുന്നുണ്ട്.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

നമുക്ക് മുമ്പ് വളരെക്കാലം ഗവൺമെന്റിൽ ഉണ്ടായിരുന്നവർക്ക്, ആരോഗ്യ സംരക്ഷണം പണം സമ്പാദിക്കാനുള്ള ഒരു മാർഗമായിരുന്നു. പാവപ്പെട്ടവരുടെ കഷ്ടപ്പാടുകളിൽ നിന്ന് അവർ ഓടിക്കൊണ്ടേയിരുന്നു. ദരിദ്രരുടെയും പീഡിതരുടെയും അടിച്ചമർത്തപ്പെട്ടവരുടെയും പിന്നാക്കക്കാരുടെയും ഇടത്തരക്കാരുടെയും എല്ലാവരുടെയും വേദന മനസ്സിലാക്കുന്ന ഒരു സർക്കാരാണ് ഇന്ന് കേന്ദ്രത്തിലും സംസ്ഥാനത്തും ഉള്ളത്. രാജ്യത്തെ ആരോഗ്യ സൗകര്യങ്ങൾ മെച്ചപ്പെടുത്തുന്നതിനായി ഞങ്ങൾ രാപ്പകലില്ലാതെ പ്രവർത്തിക്കുന്നു. മുമ്പ് പൊതുപണം തട്ടിപ്പിനിരയായി പോയിരുന്നു, ഇത്തരക്കാരുടെ നെഞ്ചിലേക്കാണ് ഇന്ന് പണം ചിലവഴിക്കുന്നത് മെഗാ പദ്ധതികൾക്ക്. അതിനാൽ, ഇന്ന് രാജ്യം ചരിത്രത്തിലെ ഏറ്റവും വലിയ മഹാമാരിയെ നേരിടുകയും സ്വാശ്രയ ഇന്ത്യയ്ക്കായി ലക്ഷക്കണക്കിന് കോടി രൂപയുടെ അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ നിർമ്മിക്കുകയും ചെയ്യുന്നു.

സുഹൃത്തുക്കളേ 
ചികിത്സാ സൗകര്യങ്ങൾ വർധിപ്പിക്കുമ്പോൾ, അതേ അനുപാതത്തിൽ ഡോക്ടർമാരുടെയും പാരാമെഡിക്കൽ സ്റ്റാഫുകളുടെയും എണ്ണവും വർധിപ്പിക്കേണ്ടത് ആവശ്യമാണ്. യുപിയിൽ പുതിയ മെഡിക്കൽ കോളേജുകൾ തുറക്കുന്നതിന്റെ വേഗത മെഡിക്കൽ സീറ്റുകളുടെയും ഡോക്ടർമാരുടെയും എണ്ണത്തിൽ വലിയ സ്വാധീനം ചെലുത്തും. സീറ്റുകളുടെ എണ്ണം വർധിച്ചതിനാൽ ഇനി പാവപ്പെട്ട മാതാപിതാക്കളുടെ കുട്ടിക്കും ഡോക്ടറാകാനുള്ള ആഗ്രഹം പൂർത്തീകരിക്കാനാകും.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

സ്വാതന്ത്ര്യത്തിനു ശേഷം 70 വർഷത്തിനുള്ളിൽ രാജ്യത്തുണ്ടായിരുന്ന ഡോക്ടർമാരുടെ എണ്ണത്തേക്കാൾ കൂടുതൽ ഡോക്ടർമാരെ അടുത്ത 10-12 വർഷത്തിനുള്ളിൽ രാജ്യത്തിന് ലഭിക്കാൻ പോകുന്നു. രാജ്യത്ത് മെഡിക്കൽ മേഖലയിൽ നടക്കുന്ന പ്രവർത്തനങ്ങളെക്കുറിച്ച് നിങ്ങൾക്ക് ഊഹിക്കാം. കൂടുതൽ ഡോക്‌ടർമാർ ഉള്ളപ്പോൾ, അവർ രാജ്യത്തിന്റെ എല്ലാ മുക്കിലും മൂലയിലും എളുപ്പത്തിൽ ലഭ്യമാകും. ദൗർലഭ്യങ്ങൾക്കപ്പുറത്തേക്ക് നീങ്ങിയ പുതിയ ഇന്ത്യയാണിത്, എല്ലാ അഭിലാഷങ്ങളും നിറവേറ്റാനുള്ള ശ്രമത്തിലാണ്.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ

രാജ്യത്തോ ഉത്തർപ്രദേശിലോ ജോലിയുടെ വേഗത  പണ്ടത്തെ അതേപടി തുടർന്നിരുന്നെങ്കിൽ ഇന്ന് കാശിയിലെ സ്ഥിതി എന്തായിരിക്കും? ഇന്ത്യയുടെ സാംസ്‌കാരിക പൈതൃകത്തിന്റെ പ്രതീകമായ ലോകത്തിലെ ഏറ്റവും പഴക്കമേറിയ നഗരമായ കാശി അവർ സ്വന്തമായി ഉപേക്ഷിച്ചു. തൂങ്ങിക്കിടക്കുന്ന വൈദ്യുതക്കമ്പികൾ, ചീഞ്ഞളിഞ്ഞ റോഡുകൾ, ഘട്ടങ്ങളുടെയും ഗംഗയുടെയും ദുരവസ്ഥ, ജാമുകൾ, മലിനീകരണം, അരാജകത്വം എന്നിവ സാധാരണമായിരുന്നു. ഇന്ന് കാശിയുടെ ഹൃദയവും ആത്മാവും ഒന്നുതന്നെയാണ്, എന്നാൽ അതിന്റെ ശരീരം മെച്ചപ്പെടുത്താൻ ആത്മാർത്ഥമായ ശ്രമങ്ങൾ നടക്കുന്നു. വാരാണസിയിൽ കഴിഞ്ഞ ഏഴ് വർഷത്തിനിടെ നടത്തിയ പ്രവർത്തനങ്ങളുടെ അളവ് കഴിഞ്ഞ ദശകങ്ങളിൽ നടന്നിട്ടില്ല.


സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

റിംഗ് റോഡിന്റെ അഭാവത്തിൽ വർഷങ്ങളായി കാശിയിൽ നിങ്ങൾ തിരക്ക്  അനുഭവിച്ചിട്ടുണ്ട്. 'നോ എൻട്രി' തുറക്കാൻ കാത്തിരിക്കുന്നത് ബനാറസിലെ ആളുകളുടെ ഒരു ശീലമായി മാറിയിരുന്നു. ഇപ്പോൾ റിംഗ് റോഡ് തുറന്നതോടെ, പ്രയാഗ്‌രാജ്, ലഖ്‌നൗ, സുൽത്താൻപൂർ, അസംഗഡ്, ഗാസിപൂർ, ഗോരഖ്പൂർ, ഡൽഹി, കൊൽക്കത്ത എന്നിങ്ങനെ രാജ്യത്തെവിടെയും യാത്ര ചെയ്യുമ്പോൾ നഗരത്തിലെ ജനങ്ങളെ ബുദ്ധിമുട്ടിക്കേണ്ടതില്ല. മാത്രമല്ല, റിംഗ് റോഡ് ഇപ്പോൾ ഗാസിപൂരിലെ ബിർനോൺ വരെ നാലുവരി ദേശീയ പാതയുമായി ബന്ധിപ്പിച്ചിരിക്കുന്നു. വിവിധ സ്ഥലങ്ങളിൽ സർവീസ് റോഡ് സൗകര്യവുമുണ്ട്. ഇത് പല ഗ്രാമങ്ങളിലും പ്രയാഗ്‌രാജ്, ലഖ്‌നൗ, ഗോരഖ്പൂർ, ബീഹാർ, നേപ്പാൾ എന്നിവിടങ്ങളിലും സഞ്ചാരം സുഗമമാക്കി. ഇത് യാത്ര സുഗമമാക്കുക മാത്രമല്ല, ബിസിനസിന് ഉത്തേജനം ലഭിക്കുകയും ഗതാഗത ചെലവ്  കുറയുകയും ചെയ്യും.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

രാജ്യത്ത് ഒരു സമർപ്പിത അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ ഇല്ലെങ്കിൽ, വികസനത്തിന്റെ വേഗത അപൂർണ്ണമായി തുടരും. വരുണ നദിയിൽ രണ്ട് പുതിയ പാലങ്ങൾ വന്നതോടെ ഡസൻ കണക്കിന് ഗ്രാമങ്ങൾക്ക് നഗരത്തിലേക്കുള്ള യാത്ര എളുപ്പമായി. പ്രയാഗ്‌രാജ്, ഭദോഹി, മിർസാപൂർ എന്നിവിടങ്ങളിലെ ജനങ്ങൾക്ക് വിമാനത്താവളത്തിലേക്കുള്ള യാത്രയ്ക്ക് ഇത് വളരെയധികം സൗകര്യമൊരുക്കും. പരവതാനി വ്യവസായവുമായി ബന്ധപ്പെട്ടവർക്കും നേട്ടമുണ്ടാകും. വിമാനത്താവളത്തിൽ നിന്ന് നേരിട്ട് മിർസാപൂരിലേക്ക് പോയി മാവിന്ധ്യവാസിനി സന്ദർശിക്കാൻ ആഗ്രഹിക്കുന്ന ഭക്തർക്ക് ഇത് സൗകര്യമൊരുക്കും. റോഡുകൾ, പാലങ്ങൾ, പാർക്കിംഗ് സ്ഥലങ്ങൾ എന്നിവയുമായി ബന്ധപ്പെട്ട നിരവധി പദ്ധതികൾ ഇന്ന് കാശി നിവാസികൾക്കായി സമർപ്പിച്ചിരിക്കുന്നു, ഇത് നഗരത്തിലും പരിസരത്തും ജീവിതം എളുപ്പമാക്കും. റെയിൽവേ സ്റ്റേഷനിലെ ആധുനിക എക്‌സിക്യൂട്ടീവ് ലോഞ്ച് യാത്രക്കാരുടെ സൗകര്യം വർധിപ്പിക്കും.

സുഹൃത്തുക്കളേ

ഗംഗാനദിയുടെ ശുദ്ധിക്കും വൃത്തിക്കും വേണ്ടി കഴിഞ്ഞ കുറച്ച് വർഷങ്ങളായി വിപുലമായ പ്രവർത്തനങ്ങൾ നടത്തി, അതിന്റെ ഫലം ഇന്ന് നമ്മുടെ മുന്നിലുണ്ട്. വീടുകളിലെ മലിനജലം ഗംഗയിൽ എത്താതിരിക്കാനുള്ള ശ്രമങ്ങളും നടക്കുന്നുണ്ട്. അഞ്ച് ഡ്രെയിനുകളിൽ നിന്ന് ഒഴുകുന്ന മലിനജലം ശുദ്ധീകരിക്കാൻ ഇപ്പോൾ രാംനഗറിൽ ഒരു ആധുനിക ട്രീറ്റ്‌മെന്റ് പ്ലാന്റ് പ്രവർത്തനം ആരംഭിച്ചു. ഇതുവഴി 50,000-ത്തിലധികം പേർക്ക് നേരിട്ട് ആനുകൂല്യം ലഭിക്കുന്നുണ്ട്. ഗംഗാജിയ്‌ക്കൊപ്പം വരുണയുടെ ശുചിത്വത്തിനും മുൻഗണന നൽകുന്നുണ്ട്. ഏറെ നാളായി അവഗണനയുടെ ഇരയായ വരുണ, അസ്തിത്വത്തിന്റെ വക്കിലായിരുന്നു. വരുണയെ രക്ഷിക്കാൻ ചാനൽ പദ്ധതി രൂപീകരിച്ചു. ഇന്ന് ശുദ്ധജലം വരുണയിൽ എത്തുന്നുണ്ട്, ചെറുതും വലുതുമായ 13 ഓടകളും ശുദ്ധീകരിക്കുന്നുണ്ട്. നടപ്പാതകൾ, റെയിലിംഗുകൾ, ലൈറ്റിംഗ്, പക്കാ ഘട്ടുകൾ, പടവുകൾ തുടങ്ങി നിരവധി സൗകര്യങ്ങൾ വരുണയുടെ ഇരുകരകളിലും പൂർത്തീകരിക്കുന്നുണ്ട്.

സുഹൃത്തുക്കളേ

ആത്മീയവും ഗ്രാമീണവുമായ സമ്പദ്‌വ്യവസ്ഥയുടെ ഒരു പ്രധാന കേന്ദ്രമാണ് കാശി. കാശി ഉൾപ്പെടെ പൂർവാഞ്ചലിലെ മുഴുവൻ കർഷകരുടെയും ഉൽപന്നങ്ങൾ രാജ്യത്തിനകത്തും പുറത്തും ഉള്ള വിപണികളിൽ എത്തിക്കുന്നതിനായി കഴിഞ്ഞ കുറച്ച് വർഷങ്ങളായി നിരവധി സൗകര്യങ്ങൾ വികസിപ്പിച്ചെടുത്തിട്ടുണ്ട്. നശിക്കുന്ന ചരക്ക് കൈകാര്യം ചെയ്യുന്ന കേന്ദ്രങ്ങൾ മുതൽ പാക്കേജിംഗും സംസ്കരണവും വരെയുള്ള ആധുനിക അടിസ്ഥാന സൗകര്യങ്ങൾ ഇവിടെ വികസിപ്പിച്ചെടുത്തിട്ടുണ്ട്. ഇതിന്റെ ഭാഗമായി ലാൽ ബഹദൂർ ശാസ്ത്രി പഴം-പച്ചക്കറി മാർക്കറ്റ് നവീകരിച്ച് നവീകരിച്ചത് കർഷകർക്ക് ഏറെ സഹായകരമാകും. ഷഹൻഷാപൂരിൽ ബയോ-സിഎൻജി പ്ലാന്റ് നിർമിക്കുന്നതോടെ ആയിരക്കണക്കിന് മെട്രിക് ടൺ ജൈവവളത്തിനൊപ്പം ബയോഗ്യാസും കർഷകർക്ക് ലഭ്യമാകും.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

കഴിഞ്ഞ കുറച്ച് വർഷങ്ങളായി കാശിയുടെ ഒരു പ്രധാന നേട്ടം,ബി എച് യു  വീണ്ടും ലോകത്തിലെ മികവിലേക്ക് മുന്നേറിയതാണ്. സാങ്കേതികവിദ്യ മുതൽ ആരോഗ്യം വരെയുള്ള അഭൂതപൂർവമായ സൗകര്യങ്ങളാണ് ബിഎച്ച്‌യുവിൽ വികസിപ്പിച്ചുകൊണ്ടിരിക്കുന്നത്. നാടിന്റെ നാനാഭാഗത്തുനിന്നും യുവാക്കൾ പഠനത്തിനായി ഇവിടെയെത്തുന്നുണ്ട്. നൂറുകണക്കിന് വിദ്യാർത്ഥികൾക്കായി ഇവിടെ നിർമ്മിച്ചിട്ടുള്ള താമസ സൗകര്യങ്ങളും അവർക്ക് സഹായകരമാകും. പ്രത്യേകിച്ച് നൂറുകണക്കിന് പെൺകുട്ടികൾക്കുള്ള ഹോസ്റ്റൽ സൗകര്യങ്ങൾ മാളവ്യ ജിയുടെ കാഴ്ചപ്പാട് സാക്ഷാത്കരിക്കുന്നതിന് കൂടുതൽ പ്രചോദനം നൽകും. പെൺമക്കൾക്ക് ഉന്നതവും ആധുനികവുമായ വിദ്യാഭ്യാസം നൽകാനുള്ള അദ്ദേഹത്തിന്റെ കാഴ്ചപ്പാട് സാക്ഷാത്കരിക്കാൻ ഇത് നമ്മെ സഹായിക്കും.

സഹോദരീ സഹോദരന്മാരേ,

ഈ വികസന പദ്ധതികളെല്ലാം നമ്മുടെ സ്വാശ്രയത്വത്തിന്റെ ദൃഢനിശ്ചയം സാക്ഷാത്കരിക്കാൻ പോകുന്നു. കാശിയും മുഴുവൻ പ്രദേശവും അതിന്റെ അത്ഭുതകരമായ കളിമൺ കലാകാരന്മാർക്കും കരകൗശല വിദഗ്ധർക്കും തുണിയിൽ മാന്ത്രികത സൃഷ്ടിക്കുന്ന നെയ്ത്തുകാരും പേരുകേട്ടതാണ്. സർക്കാരിന്റെ ശ്രമഫലമായി വാരാണസിയിലെ ഖാദിയുടെയും മറ്റ് കുടിൽ വ്യവസായങ്ങളുടെയും ഉൽപ്പാദനം കഴിഞ്ഞ അഞ്ച് വർഷത്തിനിടെ ഏകദേശം 60 ശതമാനവും വിൽപ്പനയിൽ 90 ശതമാനവും വർധിച്ചു. അതിനാൽ, ഈ കൂട്ടാളികളുടെയും ദീപാവലി കരുതാൻ എല്ലാ രാജ്യക്കാരോടും ഞാൻ അഭ്യർത്ഥിക്കുന്നു. നമ്മുടെ വീടുകളുടെ അലങ്കാരം മുതൽ വസ്ത്രങ്ങൾ, ദീപാവലി വിളക്കുകൾ വരെ പ്രാദേശിക അവകാശങ്ങൾക്ക് വേണ്ടി നാം ശബ്ദമുയർത്തേണ്ടതുണ്ട്. ധൻതേരസ് മുതൽ ദീപാവലി വരെ നിങ്ങൾ ധാരാളം പ്രാദേശിക പർച്ചേസുകൾ നടത്തിയാൽ, എല്ലാവരുടെയും ദീപാവലി സന്തോഷത്താൽ നിറയും. പിന്നെ ലോക്കൽ വോക്കലിനെക്കുറിച്ച് പറയുമ്പോൾ നമ്മുടെ ടിവി മാധ്യമങ്ങൾ മൺവിളക്ക് കാണിക്കുന്നത് ഞാൻ കണ്ടിട്ടുണ്ട്. ലോക്കൽ വോക്കൽ വിളക്കുകളിൽ മാത്രം ഒതുങ്ങുന്നില്ല. എന്റെ നാട്ടുകാരുടെ വിയർപ്പുള്ളതും എന്റെ നാടിന്റെ മണ്ണിന്റെ സുഗന്ധമുള്ളതുമായ എല്ലാ ഉൽപ്പന്നങ്ങളും ഇതിൽ ഉൾപ്പെടുന്നു. ഒരിക്കൽ നമ്മുടെ നാട്ടിൽ ഉൽപ്പാദിപ്പിക്കുന്ന ഉൽപ്പന്നങ്ങൾ വാങ്ങുന്നത് നമ്മുടെ ശീലമായാൽ, ഉൽപ്പാദനവും വർദ്ധിക്കും, അതുപോലെ തൊഴിലവസരങ്ങളും പാവപ്പെട്ടവരിൽ പാവപ്പെട്ടവർക്കും ജോലി ലഭിക്കും. നമുക്ക് ഇത് ഒരുമിച്ച് ചെയ്യാൻ കഴിയും, എല്ലാവരുടെയും പരിശ്രമത്തിലൂടെ നമുക്ക് വലിയ മാറ്റം കൊണ്ടുവരാൻ കഴിയും.

സുഹൃത്തുക്കളേ

ഒരിക്കൽ കൂടി, ആയുഷ്മാൻ ഭാരത് ഹെൽത്ത് ഇൻഫ്രാസ്ട്രക്ചർ മിഷനും നിരവധി വികസന പദ്ധതികൾക്കായി കാശിക്കും മുഴുവൻ രാജ്യത്തിനും അഭിനന്ദനങ്ങൾ. വരാനിരിക്കുന്ന എല്ലാ പെരുന്നാളുകളിലും നിങ്ങൾക്കെല്ലാവർക്കും ഒരിക്കൽ കൂടി നിരവധി മുൻകൂർ ആശംസകൾ. വളരെയധികം നന്ദി!