With our mantra of ‘Sabka Saath, Sabka Vikas’ we continuously worked towards enhancing the quality of life of our citizens: PM Modi
While I have my performance record of having served the people of this country tirelessly, the ‘Mahamilawati’ leaders have nothing but their falsehood campaigns to rely on: PM Modi in M.P.
The Congress government here has given a free pass to hooligans and anti-social elements and hence crime is rapidly rising in M.P. : Prime Minister Modi

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

मां क्षिप्रा और मां अहिल्याबाई की इस पवित्र नगरी को यहां के लोगों को सादर प्रणाम। मैं एयरपोर्ट पर तो समय पर आ गया था। लेकिन यहां पहुंचने में विलंब हुआ, और विलंब इसलिए हुआ कि आज इंदौर ने जो अभूतपूर्व प्रेम दिखाया। जो आशीर्वाद दिए, एयरपोर्ट से यहां तक दोनों तरफ ह्यूमन वॉल था। शायद मैं भाषण न करता और इतना रोड शो कर के चल जाता तो भी पूरे मध्य प्रदेश के अखबार भरे रहते कि मोदी का रोड शो जबरदस्त हुआ। इतना प्यार, आज इंदौर ने मेरे दिल को छू लिया है। पुरातन भारत की आस्था अध्यात्म से लेकर नए हिंदुस्तान के नए अंदाज नए एटीट्यूड का अगर कोई शहर प्रतीक है तो उस शहर का नाम इंदौर है। इंदौर ने अहिल्याबाई होल्कर के रुप में काशी सहित पूरे भारत में अध्यात्म और मानवता की भलाई के लिए प्रेरणादायक नेतृत्व दिया तो बीते पांच वर्षों में स्वच्छ भारत अभियान के लिए भारत की अगुवाई की। मां अहिल्याबाई ने काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर के लिए जो सपना देखा था उसको बाबा के आशीर्वाद से पूरा करने की कोशिश आज मेरे काशीवासी कर रहे हैं। बनारस का एक सांसद होने के नाते मुझे इस बात का विशेष गर्व है। इंदौर से मेरा विशेष स्नेह इसलिए भी रहा है कि ये सुमित्रा ताई का शहर है। इस शहर ने उन्हें चुनकर के देश की सेवा करने के लिए भेजा। संसद में भेजा। और स्पीकर के तौर पर सुमित्रा ताई की उन्होंने जो कुशलता से संयम से कार्य किया, उससे न सिर्फ मैं जो भी पार्लियामेंट चल रही उस समय अगर टीवी देखने के आदी थे उन सबके मन पे ताई ने एक अमीट छाप छोड़ी है, और बहुत कम लोगों को मालूम होगा आपको इतना लगेगा कि मोदी जी प्रधानमंत्री हैं। लेकिन हमारी पार्टी में मोदीजी को भी अगर कोई डांट सकता है तो ताई डांट सकती हैं।

सुमित्रा ताई इस बार इस पूरे मध्य प्रदेश के चुनाव को लड़ा रही है और एक नया इतिहास बना रही है। लेकिन सथियो, मुझे ताई जी के साथ संगठन में काम करने का मौका मिला, हमने एक साथी के रुप में काम किया है। उनका कार्य के प्रति समर्पण सामान्य मानवी की जिंदगी के लिए कुछ कर गुजरने के उनके इरादे इन सबको ध्यान में रखते हुए मैं इंदौर को विश्वास दिलाता हूं कि शहर के विकास में ताई जी की कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहेगी। मैं कभी कमी नहीं आने दूंगा। ये विश्वास देने के लिए मैं आज इंदौर वासियों के पास आया हूं। साथियो, इंदौर और मध्य प्रदेश का मैं एक और बात के लिए आभारी हूं। आपने मेरे एक आग्रह को बहुत गंभीरता से सफल बनाया और वो स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छ भारत अभियान अगर भारत के सामान्य मानवी की सोच तक पहुंचा है तो इसके हकदार इंदौर के मेरे सभी भाई-बहन हैं। साथियो, हमने अक्सर देश में सत्तारूढ़ सरकार को हटाने के लिए जनता को खड़े होते देखा है। लेकिन इस बार कश्मीर से कन्याकुमारी, कच्छ से कामरूप, इस बार इस सरकार को दोबारा चुनने के लिए देश खड़ा हो गया है। अक्सर ये भी कहा जाता है कि देश का वोटर बहुत साइलेंट होता है। लेकिन इस बार जनता बोल रही है। जोर जोर से बोल रही है। और यही कारण है कि बहुत सारे नेता जिनकी नींद हराम हो गई है। अब उन्होंने बोलने में संतुलन भी खो दिया है। बौखलाएं हैं, साथियो, 2014 का चुनाव एंटी इनकंबेंसी का था, 2019 का चुनाव प्रो इनकंबेंसी का है। 2014 में भ्रष्टाचार, वंशवाद और पॉलिसी पैरालिसिस के खिलाफ आक्रोश चरम पर था। 2019 में जनता का विश्वास चरम पर है। 2014 में देश ने मोदी और मोदी के काम के बारे में सिर्फ सुना था।

2019 में देश मोदी के काम को जानने लगा है। 2019 का चुनाव केवल भारतीय जनता पार्टी नहीं लड़ रही है। बल्कि 2019 का चुनाव भारतीय जनता लड़ रही है। 130 करोड़ देशवासी इस चुनाव का नेतृत्व कर रहे हैं। साथियो, मेरी निष्ठा, मेरी नीयत और मेरी नीति का आकलन कम ज्यादा हो सकता है। लेकिन मेरे इरादों में कोई खोट नहीं निकाल सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं जनता के बीच में रहता हूं, जनता से निरंतर संवाद करता हूं। मैंने कभी भी एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर के मौज-मस्ती नहीं मारी है। नीति निर्माण पर मैंने बाबूगिरी की दुनिया छोड़ कर के जनभागीदारी से देश में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। भाइयो-बहनो, बीते पांच वर्ष में हमने टेक्नोलॉजी और ट्रॉंसपरेंसी इस पर विशेष ध्यान दिया है। आज आप देखिए टेक्नोलॉजी के मामले में भारत की ग्लोबल स्टैंडिग कहां पहुंची है। देखते ही देखते भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्ट सिस्टम बन गया है। हमारे युवा साथियों को भरपूर अवसर मिल सके इसके लिए आने वाले पांच वर्षों में हम इस इको सिस्टम को स्टार्ट अप की फंडिग को और सशक्त करने वाले हैं। भाइयो-बहनो, जो अगली औद्योगिक क्रांति है वो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टैंलेट पर ही आधारित होगी। इसके लिए हम देश को तैयार कर रहे हैं। आज देश भर के स्कूलों में हम 6th क्लास के बच्चों को ही अटल टिंकरिंग लैब उपलब्ध कर रहे हैं। ये भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक व्यापक सुधार है। भविष्य में यही से स्टार्ट अप और टेक्नोलॉजी के लिए हमारा टेंपारमेंट विकसित होने वाला है। भाइयो-बहनो, यही नए संस्थान नए भारत की नई पहचान बनने वाले हैं। हमारे युवा साथियों की आकांक्षाओं को उड़ान देने वाले हैं। डिजिटल टेक्नोलॉजी को जिस प्रकार हमने गवर्नेंस का हिस्सा बनाया है। उससे मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस उस सपने  साकार ककरने में बहुत मदद मिली है। बीते पांच वर्षों में फैसले लेने की प्रकिया तेज हुई है। सर्विसेस की डिलीवरी सटीक और फास्ट हुई है। और सबसे बड़ी बात जनता की पहुंच सिस्टम तक बढ़ी है। और सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी आई है। साथियो, जन धन, आधार और मोबाइल यानी JAM जैम की ट्रिनिटी से बीते पांच वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक, इंदौर वालों ये सुनकर के पको आश्चर्य होगा।

पांच वर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हिंदुस्तान का खजाना, जिस पर आपका अधिकार है। हिंदुस्तान के खजाने के मालिक आप है। लेकिन पहले ऐसी सरकारें चलती थी 1 लाख करोड़ रुपया, ये आंकड़ा मामूली नहीं है। सरकारी तिजोरी में से आया हुआ रुपया गलत हाथों में चला जाता था। मोदी ने उसे रोक लिया है दोस्तों। वही पांच वर्ष में करीब 6 लाख करोड़ रुपया का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, सीधे लाभार्थियों के खाते में गया है। यानी बिचौलिए भी गायब और देश के ईमानदार टैक्स पेयर के लिए उनके जो पैसे की लूट होती थी उस लूट को भी मैंने बचा लिया है। साथियो, ये पहली सरकार है जिसने ईमानदार टैक्स पेयर को इतना सम्मान दिया है। ये पहली सरकार है जिसने मिडिल क्लास की जरूरतों को उसकी आशाओं, आकाक्षाओं को इतना मान और सम्मान दिया है। आज देश में पांच लाख रुपये की आय पर कोई टैक्स नहीं है। ये मांग देश का मिडिल क्लास सालों से कर रहा था ये काम भी इस चौकीदार ने कर दिया। हमने महंगाई कम की है, घर की EMI कम की है। भाइयो-बहनो, बढ़ाने के लिए हम देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल बढ़ा रहे हैं। भाइयो-बहनो, आज मेक इन इंडिया एक बहुत बड़ा ब्रांड बनकर उभर रहा है। यहां इंदौर में ही सुपर कॉरिडोर सहित आईटी पार्क और बिजनेस पार्क है। करीब पांच हजार छोटे-बडे उद्योग चल रहे हैं। आज भारत ऑटो, रेल कोट, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में बहुत तरक्की कर रहा है। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में हम दुनिया के दूसरे नंबर के देश हो गए हैं।

आप सभी को याद होगा कि विधानसभा चुनाव के दौरान एक नामदार यहां आकर कह गए थे कि मेक इन इंदौर और मेक इन मंदसौर मोबाइल फोन बनाउंगा, ऐसा कहा था न, कहा था कि नहीं कहा था? इंदौर वाले भूल जाते हैं। कहा था? किसने कहा था? लेकिन इतना गाजे बाजे से कहा और यहां की मीडिया ने बहुत आन बान शान से ये छापा भी। जरा विशेष कृपा रहती है उन पर, लेकिन कांग्रेस के पूरे मेनिफेस्टो में ये वादा भूला दिया गया है उल्लेख तक नहीं है। कोई अखबार वाला लिखेगा नहीं। फिर सरकार बदल गई है न। खैर कांग्रेस के लिए ये कोई नई बात नहीं है। उनका तो अहंकार तीन शब्दों में प्रकट होता है। ये तीन शब्द कांग्रेस के अहंकार की पहचान है। ये तीन शब्द कांग्रेस देश के लोगों की तरफ कैसे देखती है उसका जीता जागता सबूत है। ये तीन शब्द ये ऐसे शब्द है जिसको सुनने के बाद हिदुतान के सार्वजनिक जीवन में कांग्रेस को और उसके महामिलावटी साथियों को एक दिन भी सार्वजनिक जीवन में रहने का अधिकार नहीं है। ये तीन शब्द कौन से हैं? कौन से हैं? कौन से हैं? कौन से हैं? पहले तो इंदौर वालों को सलाम क्योंकि आपको मालूम है, आप जागरूक हैं। अभी नामदार के गुरु ने और ये कोई व्यक्ति नहीं बोल रहा, ये कांग्रेस पार्टी का अहंकार बोल रहा है, कांग्रेस पार्टी की सोच बोल रही है। और क्या बोला? हुआ तो हुआ। हुआ तो हुआ। हुआ तो हुआ। हुआ तो हुआ। किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ होना था किसानों के घर आज पुलिस आ रही है।

बैंक किसानों को कर्ज नहीं दे रहे और ये कहते हैं हुआ तो हुआ। ये कहते हैं पूरी ताकत से बोलो उनको सुनाई दें। ये कहते हैं हुआ तो हुआ। ये कहते हैं हुआ तो हुआ। ये कहते हैं हुआ तो हुआ। ये कहते हैं हुआ तो हुआ। और इंदौर की जनता कहती है इनफ इज इनफ बहुत हो गया। मध्य प्रदेश की जनता पूछ रही है कि बिजली के बिल की बजाय बिजली की सप्लाई हाफ क्यों हुई? कांग्रेसी कहते हैं हुआ तो हुआ। कांग्रेसी कहते हैं हुआ तो हुआ। कांग्रेसी कहते हैं हुआ तो हुआ। यहां का कर्मचारी पूछ रहा है कि बेवजह मेरा ट्रांसफर क्यों हुआ? ये कहते हैं हुआ तो हुआ। ये कहते हैं कि हुआ तो हुआ। इतना अहंकार इनमें भरा हुआ है। ये सोचते हैं कि कुछ भी अनाप-शनाप बोलेंगे और लोग मान लेंगे। कांग्रेस वाले समझ लो ये 20वीं शताब्दी नहीं है। ये 21वीं शताब्दी है चार साल का बच्चा भी जानता है आप कौन हो। इंदौर के मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, वंशवाद के पेड़ पर चढ़कर इन लोगों को पार्टी की कमान तो मिल सकती है लेकिन, सोच और विजन नहीं मिल सकता है। जव विजन नहीं होता, जब ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं होता तो सिर्फ और सिर्फ झूठ का सहारा लेना पड़ता है, झूठ फैलाना पड़ता है। यही कारण है कि आज कांग्रेस देश की डिफेंस पॉलिसी हमारी रक्षा नीति ये डिस्कस ही नहीं करना चाहती। कांग्रेस कहती है कि मोदी आतंकवाद का मुद्दा क्यों उठाता है। आप मुझे बताइए उठाना चाहिए कि नहीं चाहिए? ऐसे जवाब नहीं चलता इंदौर वाले तो दिल खोलकर के बोलते हैं। पोहा खिलाते हैं तो प्यार से खिलाते हैं। आप मुझे बताइए इस देश में आतंकवाद की चर्चा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? ये इंदौर महानगरपालिका का चुनाव है क्या? ये हिंदुस्तान का चुनाव है, इंदौर महानगरपालिका के चुनाव में खम्बे, बिजली, पाइप, बगीचा, सफाई, गट्टर, पानी ये तो मैं समझ सकता हूं। लेकिन क्या हिदुस्तान का चुनाव होगा, जिस हिंदुस्तान की सरकार रक्षा बजट बनाती है। जो हिंदुस्तान की सरकार को सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी होती है। जिसे देश में आय दिन 2014 के पहले बम धमाके होते थे। बम धमाके होते थे। बम धमाके होते थे कि नहीं होते थे? पुणे में हुआ कि नहीं हुआ ? बनारस में हुआ कि नहीं हुआ? अयोध्या में हुआ कि नहीं हुआ ? दिल्ली में हुआ कि नहीं हुआ? मैं इतनी बड़ी लिस्ट बता सकता हूं। 2014 के बाद बंद क्यों हो गया भाई? क्यों बंद हो गया? क्यों बंद हो गया? क्या कारण है? क्यों बंद हो गया? अरे आप इंदौर वालों ने गलत जवाब दे दिया। इंदौर वाले गलती नहीं कर सकते जी। इंदौर वालों ने गलत जवाब दे दिया, आप कहते हैं मोदी ने किया आपका जवाब गलत है ये आपके एक वोट ने किया है। ये आपके वोट की ताकत है जो देश आज मजबूती से घर में घुसकर के मारता है। कांग्रेस के लिए सिर्फ एक ही मुद्दा है मोदी हटाओ, मोदी हटाओ।

भाइयो-बहनो, ये वही कांग्रेस है जिसकी गलत नीतियों के चलते देश में आतंकवाद और नक्सलवाद को बल मिला। इनकी सुरक्षा नीति इतनी कमजोर थी कि सैकड़ों लोग बम धमाकों में मारे जाते थे। लेकिन इनके मुंह से आवाज नहीं निकलती, दुनिया इनकी बात मानने को तैयार नहीं थी। पाकिस्तान ने पूरी दुनिया में ये फैला दिया कि भारत में आतंकवाद तो भारत की अंदुरुनी समस्या है। आय दिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का कश्मीर-कश्मीर-कश्मीर का राग गाया जाता था। साथियो, बीते पांच वर्ष से सब कुछ बंद हो गया। अब पाकिस्तान को हर जगह पर जाकर के जवाब देना पड़ता है कि वो आतंकवाद करेंगे कि नहीं करेगा। भाइयो-बहनो, और ये मोदी है आप इंदौर वाले मुझे जानते हो न। भाइयो-बहनो, ये नया हिंदुस्तान है, अब भारत घर में घुसकर के मारता है। और उसके बावजूद भी पूरी दुनिया हमारे साथ खड़ी रहती है। पाकिस्तान की कोई सुनने को तैयार नहीं है। आप मुझे बताइए मैं सही कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं? मुझे यही करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? घर में घुसकर मारना चाहिए कि नहीं मारना चाहिए? क्या रोते बैठना चाहिए क्या?  मेरे जवान मारे जाए मैं चुप रहूं क्या? आप मुझे बताइए आज इस लोकसभा के चुनाव में प्रधानमंत्री बनने की बहुत बड़ी लाइन लगी हुई है। मालूम है न? बहुत लोग कतार में खड़े हैं प्रधानमंत्री बनने के लिए। बहुत लोग हैं। कर्नाटक में तो आठ सीट लड़ने वाले भी ये सोचते हैं कि इस बार उनका नंबर लग जाएगा। 20 सीट वाले भी सोचते हैं कि वो प्रधानंमत्री बन जाएंगे। 30 सीट लड़ने वाले भी बोल रहे हैं, अरे सुनो भाई, आपका प्यार मेरी सर आंखों पर, मैं बोलना शुरू करूं? अरे इंदौर वालों इतना प्यार कर रहे हो, फिर ताई को मुझे खाना खिलाना पड़ेगा।

भाइयो-बहनो, आज प्रधानमंत्री बनने की बहुत बड़ी कतार लगी हुई है। आठ सीट वाला भी सोचता है उसका नंबर लगेगा। 20 सीट लड़ रहा है वो भी सोच रहा है। 30 सीट लड़ रहा है वो भी सोच रहा है। कुछ लोगों ने तो दर्जी के पास से कपड़े भी बनवा लिए। मैं जरा आपसे पूछना चाहता हूं कि जितने चेहरे दिखाई देते हैं कौन है ? कौन है? जो आतंकवाद से लड़ सकता है? ये मुझे खुश करने के लिए मत बोलो, ये मीडिया वालों को खुश करने के लिए मत बोलो। सच बताओ, आतंकवाद से कौन लड़ सकता है? आतंकवाद से कौन मुकाबला कर सकता है? देश की रक्षा कौन कर सकता है? आपको पुन भरोसा है, मैं आपका बहुत आभारी हूं। कांग्रेस और उसके महामिलावटी देश की सुरक्षा पर बहस करने की हिम्मत नहीं कर रहे जी। क्योंकि बहस करेंगे तो उनको 70 साल के उनके पापों का हिसाब देना पड़ेगा। इसलिए भाग जाते हैं, साथियो याद करिए इन्हीं महामिलावटी लोगों के कार्यकाल में जब देश में एक साथ दो बड़े आयोजन करने में सरकार की नींद उड़ जाती थी, और इसी वजह से जब 2009 के चुनाव चल रहे थे, और 2014 के चुनाव चल रहे थे। दोनों चुनाव मई महीने में हुए और मई महीने में आईपीएल का मैच होता है। देश का नौजवान मैच देखना चाहता है। एन्जॉय करना चाहता है। आप हैरान हो जाओगे दोस्तो, याद करो, ये ऐसी सरकार बैठी थी कि 2009 और 2014 में उन्होंने कह दिया चुनाव है हम आईपीएल नहीं करवा सकते और आईपीएल चुनाव के बाहर हुआ था। जो लोग एक आईपीएल नहीं करवा सकते, और आज क्या है, देखिए सरकार बदलती है सरकार बदलती है तो क्या क्या बदलता है। आप देखिए, ये मीडिया वाले नहीं बताएंगे आपको मुझे आकर बताना पड़ रहा है। देखिए चुनाव भी हो रहा है, हो रहा है कि नहीं हो रहा? आईपीएल हो रहा है कि नहीं हो रहा है? एक तरफ देश में लोग लोकतंत्र का पर्व मना रहे हैं तो वही इसी दौरान अभी अभी नवरात्री का उत्सव गया, चैत्र नवरात्र चल रही थी, अभी-अभी रामनवमी का उत्सव गया, देश ने आन बान शान के साथ मनाया। अभी अभी हनुमान जयंती गई देश ने आन-बान-शान के साथ मनाया। अभी अभी ईस्टर का पर्व गया, पूरे देश ने ईस्टर को मनाया और अभी रमजान भी पूरी धूमधाम से मना रहा है और चुनाव भी चल रहा है।

इतना ही नहीं कुछ दिन पहले आपने ये भी देखा होगा कि बहुत बड़ा फेनी, ये फोनी चक्रवात तूफान आ गया, हिंदुस्तान के पूर्वी इलाके में और बहुत तेज गति से आया। उसको भी हमने इस प्रकार से हैंडल किया, 12 लाख लोगों को एक जगह से उठाकर के दूसरी जगह पर बसाया, हजारों लोगों के मरने की संभावना थी बचा लिया और यूनाइटेड नेशन ने कहा कि भारत ने अद्भुत काम कर के दिखाया। ये भी चुनाव के दौरान किया दोस्तो। चुनाव चले, आईपीएल चले, नवरात्री चले, रमनवमी चले, हनुमान जयंती चले, ईस्टर चले, रमजान चले और तूफान का भी मुकाबला करे ये हिंदुस्तान नया हिंदुस्तान है। लोग वहीं हैं अफसर भी वहीं दफ्तर भी वहीं ब्यूरोक्रेसी वहीं हैं, बाबू वहीं हैं, सरकारी मशीन वहीं, टेबल वहीं, फाइल वहीं, एजेंसिया भी वहीं। फिर बदला क्या? क्या बदला? लोग तो वहीं हैं। बदली है सरकार की इच्छशक्ति, कार्य संस्कृति और सरकार की नीयत। हर फैसला जब सिर्फ और सिर्फ देशहित को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है तो ऐसे ही नतीजे मिलते हैं। भाइयो-बहनो, कांग्रेस की हर चीज वंशवाद और वोट बैंक से से डिसाइड होती है। तीन तलाक का मुद्दा लीजिए, कांगेस सिर्फ वोट बैंक के लिए मुस्लिम बहनों के साथ जुल्म का विरोध कर रही है। अभी अलवर में जो बेटी से गैंगरेप हुआ, दलित बेटी से हुआ उसको भी दबाया गया ताकी चुनाव के पहले खबर न फैल जाए। वरना दलित नाराज हो जाएंगे।

मैंने आज मायावती को चुनौती दी है। मैंने कहा बहनजी आपकी पार्टी राजस्थान में सरकार में भागीदार है, अगर दलितों की इतनी चिंता है तो समर्थन वापस करो वो तो पूर्ण बहुमत वाली सरकार नहीं है। बयान देते हैं, हिम्मत नहीं है नीयत नहीं है दोस्तों। साथियो, सबका साथ सबका विकास ये हमारा मंत्र है, और सबको सुरक्षा सबका सम्मान ये हमारा प्रण है। इसी भावना को मजबूत करने के लिए इस बार पूरी शक्ति से कमल खिलाना है। देश मजबूत बनाना है? देश मजबूत बनाना है? और बनाना है? ताकतवर बनाना है? तो सरकार मजबूत चाहिए कि नही चाहिए? सरकार मजबूत चाहिए कि नहीं चाहिए? तो ये चौकादार भी तो मजबूत होना चाहिए?   चौकीदार को मजबूत बनाना है तो अपना बूथ मजबूत बनाओगे? 19 तारीख को मतदान है घर घर जाओगे? हर किसी को मिलोगे? देश के लिए समझाओगे? वोट देने के लिए निकालोगे? पूरी मेहनत करोगे? पूरे मध्य प्रदेश का रिकॉर्ड तोड़ने वाला मतदान इंदौर कर सकता है क्या? कर सकता है क्या? भाइयो-बहनो, कमल के निशान पर बटन दबाइए आपका वोट सीधा सीधा मोदी के खाते में जाएगा। आप इतनी बड़ी मात्रा में आशीर्वाद देने आए, मैं इंदौर का बहुत बहुत आभारी हूं। आप सबका बहुत आभारी और ताई जी के आशीर्वाद के लिए ताई जी का भी बहुत बहुत आभारी हूं।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद कर के बोलिए

बारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

बहुत-बहुत धन्यवाद           

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Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।