Immediately remove ban on cotton exports

Published By : Admin | March 5, 2012 | 13:02 IST

Gujarat Chief Minister sends letter to Prime Minister to forthwith lift ban on cotton export

 “Stop conspiring with yarn manufacturers and textile mills”

“Let cotton growers earn foreign exchange for the nation”

  - Narendra Modi asks Centre

Gandhinagar, Monday:Gujarat Chief Minister Narendra Modi has in a letter today urged the Prime Minister to forthwith lift ban, suddenly imposed on cotton exports with a doubly malicious intention of forcing farmers to distress sale and at the same time creating an artificial shortage of the commodity. He demanded that the Central Government should permanently lift ban on export of the superior ‘Shankar’ variety of cotton, looking to its great demand in the international market, and particularly China. Mr. Modi in an angry note strongly protested the Central Government’s annual dubious and deliberate exercise of banning export just before the harvest season inIndiawhen international prices rule high, thereby forcing the farmers to sell cotton at even lower than Minimum Support Price (MSP). And by the time the cotton prices fall in the global market, he said, the Centre lifts the ban, making Indian raw cotton uncompetitive. Since cotton growers inIndiado not have efficient means to stock the commodity, he said, they have to perforce depend on the whims and fancy of the traders. The Chief Minister said that this is done to help the Centre’s nexus with certain textiles mills and cotton yarn manufacturers. These mills should have an outstanding stock of 52-lakh bales of raw cotton at the beginning of the season, but they show it to be just 27-lakh bales, using their proximity to the powers that be to mischievously demand ban on export so that they could buy raw cotton at cheap prices. Even as cotton production is expected to be around 365-lakh bales this year, Gujarat’s production alone is likely to go up to 116-lakh bales against 98 lakhs last year. While Gujarat is the largest cotton producing state in the country, Mr. Modi pointed that the UPA Government’s action smacks of singling out and hitting the farmers ofGujaratthe most. Last year, the cotton growers ofGujarathad to bear a whopping loss of Rs.14,000-crore on account of the Centre’s anti-farmers policy.

मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

कपास निर्यात पर से प्रतिबंध तत्काल हटाने की श्री मोदी की मांग

गुजरात के लाखों कपास उत्पादक किसानों के आर्थिक हितों के साथ खिलवाड़ बंद हो : मुख्यमंत्री

गांधीनगर, सोमवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कपास निर्यात पर भारत सरकार की ओर से एकाएक लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर मांग की है कि कपास के निर्यात पर पाबंदी का यूपीए सरकार के प्रतिवर्ष किए जाने वाले ऐसे मनगढंत निर्णयों से सबसे ज्यादा नुकसान गुजरात के कपास किसानों को होता है और अरबों रुपये का आर्थिक घाटा सहन करना पड़ता है। इसलिए कपास पर से निर्यात का प्रतिबंध तत्काल खत्म किया जाना चाहिए। हर साल केंद्र की विकृत नीति का शिकार देश में सबसे ज्यादा गुजरात के कपास बनते हैं। गुजरात के शंकर कपास की उच्च गुणवत्ता की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। इसलिए इसके निर्यात पर लगे केंद्रीय प्रतिबंध में से स्थायी मुक्ति दी जानी चाहिए। श्री मोदी ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है कि पिछले वर्ष भी कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय कर अचानक गुजरात के किसानों को 14 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक घाटा करवाया गया और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भाव नीचे जाने के बाद कपास के निर्यात की छूट दी गई। इससे भी किसानों को आर्थिक घाटा हुआ। कपास के निर्यात पर प्रतिबंध संबंधी अचानक किए जाने वाले निर्णय पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों और उसके साथ स्थापित हित रखने वाली कई टैक्सटाइल मिलों और कॉटन यार्न उत्पादक के बीच सांठगाठ हो गई है, क्योंकि इन टैक्सटाइल मिलों-यार्न उत्पादकों  के पास 52 लाख कपास गांठों का स्टाक होना चाहिए। लेकिन अभी यह सिर्फ 27 लाख गांठे ही है, इससे साबित होता है कि जान-बूझकर ऐसी साजिश रची जाती है। भारत में कपास की कृत्रिम कमी का षड्यंत्र रचकर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम भाव में किसानों का कपास खरीदा जाता है। यह किसान विरोधी षड्यंत्र ही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुजरात के शंकर कपास की उत्तम गुणवत्ता की वजह से भारी मांग है, ऐसे में कपास निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया गया है। कपास उत्पादक किसानों के पास इसका संग्रह करने की कोई व्यवस्था नहीं होती, इसलिए महंगे कपास को किसानों से निम्नतम भावों पर खरीद लेने की यह चाल है। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात के कपास किसान कपास के अधिकतम उत्पादन और निर्यात द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में भारी योगदान देते हैं, ऐसे में विशाल किसान समाज के हितों की सरेआम उपेक्षा कर राज्य सरकार के साथ परामर्श किए बगैर ऐसा किसान विरोधी निर्णय किस प्रकार लिया जा सकता है? क्या राज्य के कृषि हितों की कोई परवाह नहीं की जाती? श्री मोदी ने पत्र में लिखा है कि इस वर्ष भारत में 365 लाख कपास गांठों का उत्पादन हुआ है और गुजरात के किसानों ने पिछले वर्ष 98 लाख कपास गांठों का उत्पादन किया था। इसकी तुलना में इस वर्ष तो 116 लाख गांठ उत्पादन होने का अनुमान है। गुजरात के किसानों ने उत्तम क्वालिटी के शंकर की गुणवत्ता ऊपर लाने के लिए दस वर्ष से पसीना बहाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुजरात के शंकर कपास की मांग अधिकतम रही है और भाव भी ऊंचे आ रहे हैं। ऐसे में, निर्णयात्मक समय पर गुजरात के लाखों कपास उत्पादकों पर निर्यात पाबंदी का डंडा चलाकर उन्हें कंगाल बनाने की साजिश केंद्र की यूपीए सरकार कर रही है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही षड्यंत्र किया गया था और किसानों का आक्रोश बढऩे पर निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने का नाटक किया गया था। तब, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भाव घट गए थे और स्थानीय बाजारों में भाव नीचे चले गए थे। तब गुजरात के किसान को कपास बेचने के लिए मजबूर किया गया था, जिससे उन्हें 14 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। केंद्र सरकार ने रातोंरात कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है और इसके साथ ही किसानों द्वारा लिए गए निर्यात के रजिस्ट्रेशन लाइसेंस को भी रद्द कर तानाशाही की सीमाएं लांघ दी गई है। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात के कपास की उत्तम गुणवत्ता की वजह से चीन इसका सबसे बड़ा खरीददार है। परन्तु गुजरात का उत्तम कपास ऊंचे भाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचकर चीन लाभ कमाता है। जबकि वास्तव में यह फायदा गुजरात के किसान को मिलना चाहिए। इसके बावजूद केंद्र में स्थापित हित रखने वाले टैक्सटाइल मिलों के मालिकों को लाभ करवाने के लिए गुजरात के लाखों किसानों का आर्थिक नुकसान किया जा रहा है। गुजरात का किसान अब इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कपास के निर्यात पर लगा प्रतिबंध तत्काल हटा लेने और गुजरात के शंकर कपास के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को स्थायी रूप से हटाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि गुजरात के कपास उत्पादक किसानों के  हितों के साथ अन्याय करने की हरकत केंद्र को भारी पड़ेगी।

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राज्यपाल श्रीमान आर एन रवि जी, केंद्र में मेरे सहयोगी शांतनु ठाकुर जी, सुकांता मजूमदार जी, पश्चिम बंगाल के नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी जी, संसद में मेरे साथी शॉमिक भट्टाचार्य जी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, देवियों और सज्जनों,

 आज कोलकाता की धरती से पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। सड़क, रेलवे और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, इनसे जुड़ी 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक, 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। यह प्रोजेक्ट्स पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत को नई रफ्तार देंगे, इनसे व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, लाखों लोगों का जीवन आसान होगा, उन्हें नए अवसर मिलेंगे, खड़गपुर–मोरेग्राम एक्सप्रेसवे के पूरा होने से पश्चिम बंगाल के अनेक हिस्सों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। दुबराजपुर बाईपास, कांग्सावती, शीलावती नदियों पर बनने वाले बड़े पुल और इनसे भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। मैं इन परियोजनाओं के लिए पश्चिम बंगाल समेत पूरे पूर्वी भारत के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 

साथियों,

आज देश में रेलवे को आधुनिक बनाने का तेज अभियान चल रहा है। हमारा यह संकल्प है कि पश्चिम बंगाल इस अभियान में पीछे न रहे! इसलिए, केंद्र सरकार, पश्चिम बंगाल के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का भी तेज विस्तार करने के लिए प्रयास कर रही है। आज कलाईकुंडा और कानिमहुली सेक्शन में ऑटोमेटिक ब्लाक सिग्नलिंग प्रणाली को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। इनसे व्यस्त रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी, यात्रा सुरक्षित होगी, साथ ही, यात्रियों के लिए स्पीड और सुविधा भी बढ़ेगी।

साथियों,

आज कामाख्या गुड़ी, अनारा, तमलुक, हल्दिया, बराभूम और सिउड़ी, इन छह स्टेशनों का अमृत स्टेशन के तौर पर उद्घाटन हुआ है। हमारे बंगाल की महान संस्कृति की झलक अब इन स्टेशनों पर और भी निखर कर आ रही है। अभी यहां कई और स्टेशनों का भी पुनर्विकास किया जा रहा है। पुरुलिया और आनंद विहार टर्मिनल के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई गई है। इस ट्रेन सेवा का लाभ पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लोगों को भी मिलेगा।

साथियों,

सड़क और रेल कनेक्टिविटी जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही अहम भूमिका पोर्ट और वाटर ट्रांसपोर्ट भी निभाते हैं। दशकों तक, पूर्वी भारत के इस सामर्थ्य की बड़ी उपेक्षा हुई है। लेकिन, आज वॉटरवेज व्यापार और औद्योगिक प्रगति के नए रास्ते खोल रहे हैं। इसी दिशा में, आज पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अहम परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ। कोलकाता और हल्दिया जैसे बंदरगाह लंबे समय से पूर्वी भारत में व्यापार के प्रमुख केंद्र रहे हैं। हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स, इसका मशीनीकरण हो रहा है। इससे कार्गो ऑपरेशन और तेज होगा, बंदरगाह की क्षमता बढ़ेगी और व्यापार के लिए नई सुविधाएं तैयार होंगी। कोलकाता डॉक सिस्टम में बास्कुल ब्रिज का रिनोवेशन भी किया जा रहा है। खिदिरपुर डॉक में कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने पर भी हमारा जोर है। इन सभी परियोजनाओं से पूर्वी भारत का लॉजिस्टिक सिस्टम और मजबूत होगा।

साथियों,

सड़क, रेल और पोर्ट से जुड़ी नई-नई परियोजनाएं, यह पश्चिम बंगाल के आधुनिक भविष्य के लिए नया रास्ता खोल रही हैं। इसका फायदा किसान, व्यापारी, उद्यमी, स्टूडेंट्स, हर किसी को मिलेगा। पर्यटन जैसे सेक्टर्स में भी नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय उद्योग और सेवाओं को गति मिलेगी। हमारा संकल्प है, बंगाल ने हमेशा जिस तरह भारत को दिशा दिखाई है, बंगाल एक बार फिर ‘विकसित बंगाल’ बनकर उस गौरव को हासिल करे। मुझे पूरा विश्वास है, मजबूत कनेक्टिविटी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यह विकसित बंगाल की बुनियाद बनेंगे। इसी कामना के साथ, मैं एक बार फिर आप सभी को इन विकास परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। अब यह सरकारी कार्यक्रम पूरा होते ही मैं जरा खुले मैदान में जाऊंगा, वहां पूरा बंगाल आज इकट्ठा हुआ है, मुझे पूरे बंगाल के दर्शन होने वाले हैं और बहुत महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा बंगाल की जनता जनार्दन के बीच में करूंगा। इस कार्यक्रम में इतना काफी है।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

बहुत-बहुत शुभकामनाएं!