PM speaks at launch of Speaker's Research Initiative
The world is today looking at India, our decisions: PM
People of the Nation expect a lot from us. We must deliver our promises: Shri Modi

सभी वरिष्ठ महानुभाव

मैं ह्रदय से ताई जी का अभिनन्‍दन करता हूँ कि आपने SRI की शुरूआत की हैं, वैसे अब पहले जैसा वक्‍त नहीं रहा है कि जब सांसद को किसी विषय पर बोलना हो तो ढेर सारी चीजें ढूंढनी पड़े, इकट्ठी करनी पड़े वो स्थिति नहीं रही है technology ने इतना बड़ा role play किया है और अगर आप भी Google गुरू के विद्यार्थी हो जाएं तो मिनटों के अंदर आपको जिन विषयों की जानकारी चाहिए, मिल जाती है। लेकिन जब जानकारियों का भरमार हो, तब कठिनाई पैदा होती है कि सूचना चुनें कौन-सी, किसे उठाएंगे हर चीज उपयोगी लगती है लेकिन कब करें, कैसे करें, priority कैसे करेंगे और इसिलए सिर्फ जानकारियों के द्वारा हम संसद में गरिमामय योगदान दे पाएंगे इसकी गारंटी नहीं है। जब तक कि हमें उसके reference मालूम न हों, कोई विषय अचानक नहीं आते हैं लम्‍बे अर्सें से ये विषय चलते रहते हैं। राष्‍ट्र की अपनी एक सोच बन जाती है उन विषयों पर दलों की अपनी सोच बनती है। और वो परम्‍पराओं का एक बहुत बड़ा इतिहास होता है। इन सब में से तब जा करके हम अमृत पा सकते हैं जबकि इसी विषय के लिए dedicated लोगों के साथ बैठें, विचार-विमर्श करें। और तब जाकर के विचार की धार निकलती है। अब जब तक विचार की धार नहीं निकलती है, तब तक हम प्रभावी योगदान नहीं दे पाते हैं। पहले का भी समय होगा कि जब सांसद के लिए सदन में वो क्‍या करते थे, शायद उनके क्षेत्र को भी दूसरे चुनाव में जाते थे तब पता चलता था। एक बार चुनाव जीत गया आ गये फिर तो । आज से 25-30 साल पहले तो किसी को लगता ही नहीं था, हां ठीक है कि वो जीत कर के गए हैं और कर रहे हैं कुछ देश के लिए। आज तो ऐसा नहीं है, वो सदन में आता है लेकिन सोचता है Friday को कैसे इलाके में वापस पहुंचु। उसके मन पर एक बहुत बड़ा pressure अपने क्षेत्र का रहता है। जो शायद 25-30 साल, 40 साल पहले नहीं था। और उस pressure को उसको handle करना होता है क्योंकि कभी-कभार वहां की समस्‍याओं का समाधान करें या न करें लेकिन वहां होना बहुत जरूरी होता है। वहां उनकी उपिस्‍थिति होना बहुत जरूरी होता है।

दूसरी तरफ सदन में भी अपनी बात रखते समय, समय की सीमा रहती है। राजनीतिक विषयों पर बोलना हो तो यहां बैठे हुए किसी को कोई दिक्‍कत नहीं होती। उनके DNA में होता है और बहुत बढिया ढंग से हर कोई प्रस्‍तुत कर सकता है। लेकिन जब विषयों पर प्रस्‍तुतिकरण करना होता है कुछ लोग आपने देखा होगा कि जिनका development सदन की कानूनी गतिवधि से ज्‍यादा रहता है। उनका इतनी mastery होती है कुछ भी होता है तुरन्‍त उनको पता चलता है कि सदन के नियम के विरुद्ध हो रहा है। और वे बहुत quick होते हैं। हमारे दादा बैठे हैं उनको तुरन्‍त ध्‍यान में आता है कि ये नियम के बाहर हो रहा है, ये नियम के अंतर्गत ऐसा होना चाहिए। कुछ लोगों कि ऐसी विधा विकसित होती है और वो सदन को बराबर दिशा में चलाए रखने में बहुत बड़ा role play करते हैं। और मैं मानता हूं मैं इसे बुरा नहीं मानता हूं, अच्‍छा और आवश्‍यक मानता हूं। उसी प्रकार से ज्‍यादातर कितना ही बड़ा issue क्‍यों न हो लेकिन ज्‍यादातर हम हमारे दल की सोच या हमारे क्षेत्र की स्थिति उसी के संदर्भ में ही उसका आंकलन करके बात को रख पाते हैं। क्योंकि रोजमर्रा का हमारा अनुभव वही है। वो भी आवश्‍यक है पर भारत जैसे देश का आज जो स्‍थान बना है, विश्‍व जिस रूप से भारत की तरफ देखता है तब हमारी गतिविधियां हमारे निर्णय, हमारी दिशा उसको पूरा विश्‍व भी बड़ी बारीकी से देखता है। हम कैसे निर्णय कर रहे हैं कि जो वैश्विक परिवेश में इसका क्‍या impact होने वाला है। आज हम कोई भी काम अलग-थलग रह करके अकेले रह करके नहीं कर सकते हैं। वैश्विक परिवेश में ही होना है और तब जा करके हमारे लिए बहुत आवश्‍यक होगा और दुनिया इतनी dynamic है अचानक एक दिन सोने का भाव गिर जाए, अचानक एक दिन Greece के अंदर तकलीफ पैदा हो जाए तो हम ये तो नहीं कह सकते कि यार वहां हुआ होगा ठीक है ऐसा नहीं रहा है, तो हमारे यहां चिन्‍तन में, हमारे निर्णयों में भी इसका impact आता है और इसलिए ये बहुत आवश्‍यक हो गया है कि हम एक बहुत बड़े दायरे में भी अपने क्षेत्र की जो आवश्‍यकता है दोनों को जोड़ करके संसद को एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम बना करके अपनी चीजों को कैसे हम कार्यान्वित करा पायें। हम जो कानून बनाएं, जो नियम बनाएं, जो दिशा-निर्देश तय करवाएं उसमें ये दो margin की आवश्‍यकता रहती है और तब मैं जानता हूं कि कितना कठिन काम होता जा रहा है संसद के अंदर सांसद की बात का कितना महत्‍व बढ़ता जा रहा है इसका अंदाजा आ रहा है।

मैं समझता हूं कि SRI का ये जो प्रयास है, ये प्रयास, ये बात हम मानकर चलें कि अगर हमें नींद नहीं आती है तो five star hotel का कमरा book कर करके जाने से नींद आएगी तो उसकी कोई गारंटी नहीं है। हमारे अपने साथ जुड़ा हुआ विषय है उसको हमने ही तैयार करना पड़ेगा। उसी प्रकार से ताई जी कितनी ही व्‍यवस्‍था क्‍यों न करें, कितने विद्वान लोगों को यहां क्‍यों न ले आए, कितने ही घंटे क्‍यों न बीतें, लेकिन जब तक हम उस मिजाज में अपने-आपको सज्ज करने के लिए अपने-आपको तैयार नहीं होंगे तो ये तो व्‍यवस्‍थाएं तो होंगी हम उससे लाभान्वित नहीं होंगे। और अगर खुले मन से हम चले जाएं अपने सारे विचार जो हैं जब उस कार्यक्रम के अंदर हिस्‍सा लें पल भर के लिए भूल जाएं कि मैं इस विषय को zero से शुरू करता हूं। तो आप देखना कि हम चीजों को नए तरीके से देखना शुरू करेंगे। लेकिन हमारे पहले से बने-बनाए विचारों का सम्‍पुट होगा। फिर कितनी ही बारिश आए साहब हम भीगेंगे नहीं कभी। raincoat पहन करके कैसे भीग पाओगे भाई। और इसलिए खुले मन से विचारों को सुनना, विचारों को जानना और उसे समझने का प्रयास करना यही विचार की धार को पनपाता है। सिर्फ information का doze मिलता रहे इससे विचारों की धार नहीं निकलती। ये भी एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।

दूसरी बात है जिस प्रकार से विषय की बारीकी की आवश्‍यकता है मैं समझता हूं कि SRI के माध्‍यम से उन विषयों का...जिन बातों कि चर्चा होती है उसका पिछले 50-60 साल का इतिहास क्या रहा है, हमारी संसद का या देश का? आखिरकार किस background में ये चीज आई है, दूसरा, आज ये निर्णय का वैश्विक परिवेश में क्या संदर्भ है? और तीसरा ये आवश्यक है तो क्यों है? आवश्यक नहीं है तो क्यों है? दोनों पहलू उतने ही सटीक तरीके से अगर आते हैं, तब जो सदस्य हैं, उन सदस्यों का confidence level बहुत बढ़ जायेगा। उसको लगेगा हाँ जी.. मुझे ये ये ये लाभ होने वाला है। इसके कारण मेरा ये फायदा होने वाला है। और मैं मेरे देश को ये contribute करूँगा। बोलने के लिए अच्छा material, ये संसद के काम के लिए enough नहीं है। एक अच्छे वक्ता बन सकते हैं, धारदार बोल सकते हैं, बढ़िया भाषण की तालियाँ भी बज सकतीं हैं, लेकिन contribution नहीं होता है।

मुझे, मेरी उत्सुकता से ही इन चीजों में थोड़ी रुचि थी। मेरे जीवन में मुझे कभी इस क्षेत्र में आना पड़ेगा ऐसा कभी सोचा न था और न ही ऐसी मेरी कोई योजना थी। संगठन के नाते राजनीति में काम करता था। लेकिन जब आजादी के 50 साल मनाये जा रहे थे, तो यहाँ तीन दिवसीय एक विशेष सत्र बुलाया गया था, तो मैं उस समय specially दिल्ली आया था। और हमारे पार्टी के सांसदों से pass निकलवा करके, मैं संसद में जा कर बैठता था। सुनने के लिए जाता था। तो करीब-करीब मैं पूरा समय बैठा था। और मन बड़ी एक जिज्ञासा थी कि देश जो लोग चलाते हैं, इनके एक–एक शब्द की कितनी ताकत होती है, कितनी पीड़ा भी होती है, कितनी अपेक्षाएं होती हैं, कितना आक्रोश होता है, ये सारी चीजें मैं उस समय अनुभव करता था। एक जिज्ञासु के रूप में आता था, एक विद्यार्थी के रूप में आता था।

आज मैं भी कल्पना कर सकता हूँ कि देश हमसे भी उसी प्रकार कि अपेक्षा करता है। उन अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए SRI के माध्यम से, वैसे श्री(SRI) अपने आप में ज्ञान का स्त्रोत है, तो वो उपलब्ध होता रहेगा।

मैं ताई जी को बहुत बधाई देता हूँ। और जैसा कहा... आप में से बहुत कम लोगों ने Oxford Debate के विषय में जाना होगा, Oxford Debate...उस चर्चा का वैसे बड़ा महत्व है वहां Oxford Debate की चर्चा का एक महत्व है, इस बार हमारे शशि जी वहां थे और Oxford Debate में जो बोला है, इन दिनों YouTube पर बड़ा viral हुआ है। उसमे भारत के नागरिक का जो भाव है, उसकी अभिव्यक्ति बहुत है। उसके कारण लोगों का भाव उसमे जुड़ा हुआ है। यही दिखता है कि सही जगह पर हम क्या छोड़ कर आते हैं, वो एक दम उसकी ताकत बन जाती है। मौके का भी महत्व होता है। वरना वही बात कही और जा कर कहें तो, बैठता नहीं है... उस समय हम किस प्रकार चीज को कैसे लाते हैं और वहां जो लोग हैं उस समय उसको receive करने के लिए उनका दिमाग कैसा होगा, तब जा कर वो चीज turning point बन जाती है। जिस समय लोकमान्य तिलक जी ने कहा होगा “स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है” मैं नहीं मानता हूँ कि copywriter ने ऐसा sentence बना कर दिया होगा और न ही उन्होंने सोचा होगा कि मैं क्या कह रहा हूँ...भीतर से आवाज निकली होगी, जो आज भी गूंजती रहती है।

और इसलिए ये ज्ञान का सागर भी, जब हम अकेले में हों तब, अगर हमें मंथन करने के लिए मजबूर नहीं करता है, भीतर एक विचारों का तूफ़ान नहीं चलता रहता, और निरंतर नहीं चलता रहता..अमृत बिंदू के निकलने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। और इसलिए ये जो ज्ञान का सागर उपलब्ध होने वाला है, उसमे से उन मोतियों को पकड़ना और मोतियों को पकड़ कर के उसको माला के रूप में पिरो कर के ले आना और फिर भारत माँ के चरणों में उन शब्दों कि माला को जोड़ना, आप देखिये कैसे भारत माता एक दम से दैदीप्यमान हो जाती हैं, इस भाव को लेकर हम चलते हैं, तो ये व्यवस्था अपने आप में उपकारक होगी।

फिर एक बार मैं ताई जी को हृदय से अभिनन्दन करता हूं और मुझे विश्वास है कि न सिर्फ नए लोग एक और मेरा सुझाव है पुराने जो सांसद रहे है उनका भी कभी लाभ लेना चाहिये, दल कोई भी हो। उनका भी लाभ लेना चाहिये कि उस समय क्या था कैसे था, अब आयु बड़ी हो गयी होगी लेकिन उनके पास बहुत सारी ऐसी चीज़ें होंगी, हो सकता है कि इसमें वो क्योंकि background information बहुत बड़ा काम करती है तो उनको जोड़ना चाहिये और कभी कभार सदन के बाहर इस SRI के माध्यम से, आपके जो regular student बने हैं उनकी बात है ये उनका भी कभी वक्तव्य स्पर्धा का कार्यक्रम हो सकता है विषय पर बोलने कि स्पर्धा का काम हो सकता है और सीमित समय में, 60 मिनट में बोलना कठिन नहीं होता है लेकिन 6 मिनट बोलना काफी कठिन होता है विनोबा जी हमेशा कहते थे कि उपवास रखना मुश्किल नहीं है लेकिन संयमित भोजन करना बड़ा मुश्किल होता है वैसे ही 60 मिनट बोलना कठिन काम नहीं है लेकिन 6 मिनट बोलना मुश्किल होता है ये अगर उसका हिस्सा बने तो हो सकता है उसका बहुत बड़ा उपकार होगा। दूसरा उन को सचमुच में trained करना trained करना मतलब बहुत सी चीज़ें आती है, information देना, चर्चा करना, विषय को समझाना ये एक पहलू है लेकिन हमे उसको इस प्रकार से तैयार करना है तो हो सकता है कि एक प्रकार से उनकी बातों को एक बार दुबारा उनको देखने कि आदत डाली जाये कभी कभार हमे लगता है, हम भाषण दे कर के बैठते हैं तो लगता है कि वाह क्या बढ़िया बोला है लेकिन जब हम ही हमारा भाषण पढ़ते हैं एक हफ्ते के बाद तो ध्यान में आता है कि यार एक ही चीज़ को मैं कितनी बार गुनगुनाता रहता हूँ, ये फालतू मैं क्यों बोल रहा था, ये बेकार में टाइम खराब कर रहा था हम ही देखेंगे तो हम ही अपना भाषण 20 – 30% खुद ही काट देंगे कि यार मैं क्या बेकार में बोल रहा था बहुत कम लोगों को आदत होती है कि वो अपने आपको परीक्षित करते हैं। मैं समझता हूँ कि अगर ये आदतें लगती है तो बहुत सी चीज़ें हमारी एक दम तप करके बाहर निकलती है।

बहुत बहुत धन्यवाद।

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देवियो और सज्जनों,

आज का दिन आप सभी ने मेरे लिए बहुत यादगार बना दिया है। मैं अभिभूत हूं। कृतज्ञ हूं। चैरेवेति-चैरेवेति के मंत्र का जाप करते हुए इस राजनीतिक यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखते हुए एक दिन यह पड़ाव भी आएगा। मैंने कभी सोचा नहीं था। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सबसे लंबी अवधि तक सेवा करने का अवसर, इसे मैं अपना परम सौभाग्य मानता हूं। आपने इस अवसर पर मुझे सम्मानित किया। इतना मान दिया। इसके लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत आभारी हूं।

साथियों,

इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा का सौभाग्य मिलना, ये ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव हो सकता है। और मेरे लिए तो जनता-जनार्दन ही ईश्वर का रूप है। और इसलिए मैंने इस सेवा कार्य को हमेशा एक साधना के रूप में ही देखा है। और ये साधना भी एकाकी नहीं रही है। ये एक सामूहिक यज्ञ है, जिसमें आप सब ने और अनेकों साथियों ने कर्त्तव्य भाव से अपना योदगान दिया है। मैं आज इस यात्रा के ऐसे सभी साथियों के प्रति भी अपना आभार प्रकट करता हूं।

साथियों,

इस अवसर पर एनडीए परिवार के सदस्यों ने एक resolution भी पेश किया है। ये आप सबकी आत्मीयता और उदारता है। क्योंकि, मैं इस यात्रा को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता हूँ। ये हर दृष्टिकोण से, हम सबकी सामूहिक उपलब्धि है। ये NDA के हर घटक दल की एक समान उपलब्धि है। इसलिए, मैं इस प्रस्ताव को आप सभी को, भाजपा समेत हमारे NDA परिवार के सभी कार्यकर्ताओं को समर्पित करता हूँ।

साथियों,

भारत की जनता का नीर-क्षीर विवेक हमेशा अद्भुत रहा है। देश की जनता ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्थिरता का महत्व समझा है।
ये जनता-जनार्दन की परिपक्वता ही है...कि उसने लंबे समय तक मुझे इस तरह जनता की सेवा का अवसर दिया। 2014 के पहले के कई दशक...बहुत अस्थिरता और उथल-पुथल से भरे हुए थे। इसका देश को बहुत नुकसान भी उठाना पड़ा। लेकिन अब देश की जनता...एक स्थिर सरकार का काम भी देख रही है और उसकी निर्णायक क्षमताओं की प्रशंसक भी है। मैं आज देश की महान जनता को भी नमन करता हूं...जनता-जनार्दन का आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

साल 2014 में जब NDA की जीत हुई थी... तब मैंने कहा था कि आज देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ है। इस आशा का, इस उम्मीद का संरक्षण...हम सभी का बहुत बड़ा दायित्व था। देश के लोगों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद...अपना भरोसा हमें सौपा था। मुझे आज संतोष है...गर्व है...की एनडीए परिवार के तौर पर हमने देश के विश्वास को हमेशा और मजबूत किया है। 2014 में आशा का उदय होता सूरज..आज नए आत्मविश्वास के प्रकाशपुंज में बदल गया है। भारत के लोगों ने पहली बार ये देखा है कि जब सही नीयत से सरकार चलती है...तो तेज गति से विकास भी होता है। एनडीए सरकार के इन 12 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों का गरीबी से बाहर निकलना...ये दिखाता है कि हमारी नीतियां सही हैं, हमारी दिशा सही है। ये सफलता आज देश के हर उस व्यक्ति को एक भरोसा देती है... कि एक दिन उसका संघर्ष भी खत्म होगा...एक दिन उसके सपने भी पूरे होंगे। और मैं मानता हूं...कल जो गरीब था...आज जो नियो मिडिल क्लास बना है...उसे अब हमें पीछे नहीं होने देना है। इसलिए सरकार के नाते जनप्रतिनिधि के नाते...हमें दिन रात काम करना है, परिश्रम की पराकाष्ठा करनी है। इस संकल्प के साथ...कि 140 करोड़ का ये देश हमसे जो उम्मीदें लगाए बैठा है...वो जरूर पूरी हों। भारत का युवा...भारत की नारीशक्ति...भारत का मध्यम वर्ग...भारत के किसान...सबकी आकांक्षाएं..उनकी Aspirations हमें पूरी करनी हैं। आज देश का हर नागरिक विकसित भारत के सपने से भरा हुआ है। विकसित भारत का सपना अब किसी एक व्यक्ति का नहीं रहा। किसी सरकार का नहीं रहा। किसी दल का नहीं रहा। देश के जन-जन का सपना बन चुका है। संकल्प बन चुका है। और इस सपने की पूर्ति के लिए हमें अपना हर पल समर्पित करना है।

साथियों,

NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश काँग्रेस के कुचक्र से आज़ाद हुआ है। काँग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीनभावना के गर्त में गिरा दिया था। देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है...भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है। और बड़ी ही चतुराई से, इस धीमी विकास को एक नाम दिया था- हिंदू ग्रोथ रेट! यानी, कार्यशैली काँग्रेस की...दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की...लेकिन, कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया। जबकि, असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था- कांग्रेस ग्रोथ रेट! इस कांग्रेस ग्रोथ रेट में ना गवर्नेंस थी...ना नीति...ना नीयत और ना ही निर्णय!

साथियों,

जब पहली बार अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार आई... तब जाकर हमें एक झलक दिखी कि विकास में गति कैसे आती है... लेकिन, दुर्भाग्य से 2004 में देश फिर से अस्थिरता के बवंडर में...और कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया। विकास तो दूर की बात है...देश को कांग्रेस ने एक के बाद एक हजारों करोड़ रुपए के घोटालों में घसीट दिया।

साथियों,

देश का भाग्य फिर तब बदला... जब 2014 में NDA की सरकार बनी। देश ने देखा कि...जब नीयत, नीति और निर्णय तीनों एक साथ काम करते हैं...तो विकास की गति कैसी होती है। देश ने देखा कि जो काम दशकों में होते थे, वो काम महीनों में होने लगे हैं। 2014 में 74 एयरपोर्ट थे... 2026 में 160 से अधिक एयरपोर्ट तक...2014 में एक हजार किलोमीटर एक्सप्रेसवे से...2026 में छह हजार सात सौ किलोमीटर एक्सप्रेसवे तक...2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो से... 2026 में 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो तक। 2014 में 700 करोड़ रुपये डिफेंस एक्सपोर्ट से...2026 में 23 हजार करोड़ रुपये के डिफेंस एक्सपोर्ट तक...देश ने बहुत लंबी यात्रा तय की है।

साथियों,

2014 में देश में केवल 25 करोड़ इंटरनेट यूज़र थे। आज 100 करोड़ से अधिक यूज़र इंटरनेट से जुड़े हैं। 2014 में डिजिटल पेमेंट्स ना के बराबर थे। आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में नंबर 1 देश है। 2014 में भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर मोबाइल बाहर से मंगाता था। आज भारत 33 करोड़ से अधिक मोबाइल हैंडसेट खुद बनाता है। 2014 में सोलर क्षमता केवल ढाई गीगावॉट थी। आज यह 150 गीगावॉट से अधिक है। 2014 में एथेनॉल ब्लेंडिंग केवल डेढ़ प्रतिशत थी। आज यह 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 2014 में देश में एक भी सेमीकंडक्टर यूनिट नहीं थी। आज देश में बन रही 10 से ज्यादा सेमीकंडक्टर यूनिट्स...भारत को आधुनिकता की तरफ ले जा रही हैं।

साथियों,

हमने देश की जरूरतों को अपनी नीतियों और निर्णयों का आधार बनाया। नई सोच से नए फैसले लिए। हमने युवाओं के लिए skill development ministry बनाई। सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने के लिए अलग cooperative ministry बनाई। हमारे मछुवारे भाई-बहनों के लिए अलग फिशरीज मिनिस्ट्री बनाई... हमारा फोकस क्लियर था- विकास की इस दौड़ में कोई पीछे ना छूटे..।

साथियों,

हमने दिव्यांगजनों के लिए कानून बनाया। आदिवासियों के लिए जनमन जैसी योजनाएं शुरू कीं। पशुपालकों और मछुवारों को पहले किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ नहीं मिलता था। हमने उन्हें भी इस सुविधा से जोड़ा। और इतना ही नहीं....हमारी सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी।

साथियों,

सवाल यह है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है…तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये कांग्रेस ग्रोथ रेट और NDA ग्रोथ रेट का अंतर है। एक व्यवस्था लोगों को इंतज़ार कराती थी। आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है। एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी। आज की व्यवस्था कहती है… काम अभी होगा...समय पर होगा, और बड़े पैमाने पर होगा।

और इसलिए साथियों,

2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना शुरू किया है। वो भारत...जो अब बड़े लक्ष्य तय कर रहा है... और उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है।


साथियों,

NDA के 12 वर्षों की उपलब्धियां की एक और विशेषता है। हमें ये उपलब्धियां... वैश्विक अस्थिरता और अशांति के दौर में हासिल हुई हैं। एक स्थिर सरकार होने का लाभ क्या होता है ये बार-बार इस दौर ने साबित किया है। कोरोना के समय को हम कभी नहीं भूल सकते... जब हर तरफ हाहाकार मचा था। लेकिन भारत उस हालात का मुकाबला करते हुए भी सफलता से आगे बढ़ा।

साथियों,
आज दुनिया के बड़े-बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं। तब भी, 2025-26 में भारत ने “सेवन प्वाइंट सेवन परसेंट” की ग्रोथ रेट हासिल की है। और पिछला क्वार्टर तो..जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ “सेवन प्वाइंट एट परसेंट” रही है। ये सफलता इतनी आसान नहीं है दोस्तो। हम फ्रैजाइल फाइव के कठघरे के बाहर निकलकर...आज दुनिया की तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुके हैं।

साथियों,

कल के विकसित भारत की गारंटी है- आज का आकांक्षी भारत! आकांक्षी भारत के गर्भ में विकसित भारत पल रहा है। आज के भारत की आकांक्षाएँ बड़ी हैं, सपने बड़े हैं। इसीलिए, उसके संकल्प और लक्ष्य भी उतने ही बड़े हैं। देश की इन आकांक्षाओं का वाहक हमारा मिडिल क्लास है...नियो मिडिल क्लास है। इसीलिए, हमारी सरकार मध्यम वर्ग की aspirations को पूरा करने में लगी है। मिडिल क्लास की ease of living… उसकी quality of life... उसके लिए नए अवसर, और नई संभावनाएं...हमने हर फ्रंट पर काम किया है।

साथियों,

2014 से पहले, मिडिल क्लास कानून की उलझनों का सबसे बड़ा शिकार था। जटिल टैक्स सिस्टम...आमदनी के सीमित स्रोत और टैक्स का बड़ा बोझ... खराब गवर्नेंस की मार....ये सब सामान्य मानवी के लिए डेली लाइफ की चुनौतियाँ होती थीं। लेकिन, हमने मिडिल क्लास की परेशानियों को समझा...हमने मिडिल क्लास की आकांक्षाओं को समझा। और इसलिए...आज 12 लाख रुपए तक की आमदनी पूरी तरह से टैक्स फ्री है। आज देश में सरल और फेसलेस टैक्स सिस्टम है। अच्छे इनफ्रास्ट्रक्चर से उनका जीवन आसान हुआ है।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में मिडिल क्लास परिवार के बच्चों के लिए हर क्षेत्र में नए अवसर बने हैं। मध्यम वर्ग के घर का सपना पूरा हो सके, सरकार इसमें भी मदद कर रही है। घर में इलाज के खर्च का बोझ कम हो... इसके लिए आयुष्मान भारत योजना में, बिना आय सीमा के, बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है। GST reform का भी बहुत बड़ा लाभ देश के मध्यम वर्ग को हुआ है। उसके लिए हेल्थ insurance सस्ता हुआ है। उसके सपनों से जुड़ी चीजें सस्ती हुई हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज देश का मिडिल क्लास अनिश्चितताओं से मुक्त हो रहा है। वो भरपूर आत्मविश्वास के साथ देश की विकास यात्रा को गति दे रहा है।

साथियों,

हमारे लिए दल से हमेशा, अगर बड़ा कुछ है तो हमारा देश है। दल से बड़ा देश है। और जब नेशन फर्स्ट, देश प्रथम की भावना से काम होता है...तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। इसलिए, ऐसे फैसले जिन्हें पहले असंभव समझा जाता था...जो देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे...हमने बहुत ही सधे हुए तरीके से उन फैसलों को भी लिया। पहले सरकारें आर्टिकल 370 की बात तक करने से डरती थीं। हमने उसे खत्म करके पूरे देश में एक संविधान लागू किया। पहले नॉर्थ ईस्ट से बम-बंदूक और ब्लॉकेड जाने का नाम नहीं लेते थे। हमने नॉर्थ ईस्ट में शांति भी लौटाई, और स्थिरता भी लेकर आए। पहले भारत आतंकी हमलों के बाद चुपचाप दर्द सहता रहता था। हमने आतंकवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक की...एयर स्ट्राइक की। ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा।

साथियों,

पहले ये मान लिया गया था कि नक्सलवाद-माओवाद अब कभी नहीं खत्म होने वाले। कभी खत्म हो ही नहीं सकते। हमने देश को नक्सलवाद-माओवाद के उस जहर से मुक्त करके दिखाया है।

साथियों,

महिलाओं को आरक्षण...तीन तलाक के खिलाफ कानून...CAA का कानून...भारतीय न्याय संहिता...सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन...NDA सरकार राष्ट्रहित में कोई भी काम करने से पीछे नहीं रही। और हम सभी को इस बात पर गर्व है। मैं आज देश को फिर आश्वस्त करूंगा...देशहित के बड़े फैसलों का ये सिलसिला और भी तेज होगा। तेजज गति से आगे बढ़ेगा।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में देश ने जो कुछ हासिल किया, वो दुनिया देख रही है। लेकिन अब हमें अपनी दृष्टि आगे की ओर रखनी है। हमें 2047 के लक्ष्य को देखते हुए, उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी स्पीड को और बढ़ानी होगी। हमारा बेंचमार्क अब ये होना चाहिए...कि बीते 12 वर्षों में जो स्पीड और स्केल हमारी रही है...उसको हम और अधिक बड़ा और व्यापक कैसे बना सकते हैं। आज ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसलिए, भारत को अब ग्लोबल पैरामीटर्स, ग्लोबल कंपीटिशन और ग्लोबल परस्पेक्टिव देखना है। दुनिया भारत से सोल्यूशन चाहती है...दुनिया, भारत में वैश्विक सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद पार्टनर देख रही है। और हमें दुनिया की इन अपेक्षाओं पर खरा उतरकर दिखाना है। हमें ये समय गंवाना नहीं है। और मैं बार-बार कहता हूं, यही समय है-सही समय है।

साथियों,

हमें फ्यूचरिस्टिक टेक्नॉलॉजी में खुद को श्रेष्ठ रखना है। हमें सिर्फ दुनिया जैसा नहीं करना, हमें दुनिया से एक कदम आगे रहना है। अब जैसे एनर्जी सिक्योरिटी है...बीते 12 वर्षों में हमने ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के लिए अभूतपूर्व काम किया। मैंने लाल किले से समुद्र मंथन अभियान की घोषणा की थी। ये बहुत ही महत्वकांक्षी मिशन है। बीते दिनों में ऑयल एंड गैस के एक्सप्लोरेशन को लेकर काफी पॉजिटिव खबरें आ रही हैं। यानि आने वाला समय अनेक संभावनाओं से भरा हुआ है। और हमें हर संभावना का पूरा फायदा उठाना है।

साथियों,

अब हमें 500 गीगावॉट, रीन्युएबल एनर्जी के टारगेट को जल्द से जल्द पूरा करना है। सोलर एनर्जी को लेकर तो काम तेज़ी से चल रहा है...लेकिन अब हमें...न्यूक्लियर एनर्जी के लक्ष्यों को भी तेज़ी से हासिल करना है। अभी हमने दुनिया को दिखाया है...कि भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर टेक्नॉलॉजी में कितना आगे पहुंच गया है। ये टेक्नॉलॉजी, हमें न्यूक्लियर एनर्जी में आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाएगी। इसी तरह...ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के मामले में, भारत बहुत तेज़ी से काम कर रहा है। आने वाले समय में ये टेक्नॉलॉजी...भारत को ग्लोबल ग्रीन एनर्जी मैप में सबसे प्रमुख नाम बना पाएगी। और ये नाम बनना पक्का है।

साथियों,

आज बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स का अनुभव है...कि जिन देशों ने मैन्युफेक्चरिंग के पूरे इकोसिस्टम पर 80-90 के दशक में काम किया...उन्हें उसका फायदा, इस सदी में मिलना शुरु हुआ। भारत ने 10-12 वर्ष पहले जिस इकोसिस्टम पर काम करना शुरु किया...उसका लाभ अब देश को मिलना शुरू हो गया है। 2014-15-16 के कालखंड में जो बात नींव डाली गई थी, उसके फल अब दिखाई देने लगे हैं। भारत तेजी से दुनिया का मैन्युफेक्चरिंग पावरहाउस बनने की ओर आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

एनर्जी, मिनरल्स, चिप, बैटरी स्टोरेज, स्पेस...ड्रोन...डेटा सेंटर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस......ऐसे हर सेक्टर, हर टेक्नॉलॉजी एक दूसरे से जुड़ी हुई है...य़े एक दूसरे की पूरक हैं। भारत इनके लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता। क्योंकि ये भारत की आर्थिक और स्ट्रीटिजिक, हर प्रकार की सिक्योरिटी से जुड़े विषय हैं। तभी भारत, सेमीकंडक्टर इकोसिट्म पर इतना फोकस कर रहा है। तभी, क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर मिशन मोड पर काम चल रहा है...

साथियों,

शिपिंग सेक्टर में भारत आत्मनिर्भरता के नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा है। हम एक ऐसे फ्यूचर की तरफ बढ़ रहे हैं...जहां हम मेड इन इंडिया शिप्स पर ट्रेड करेंगे...और कंटेनर भी मेड इन इंडिया होंगे...शिप मैंटेनेस और रिपेयर से लेकर स्क्रैपिंग तक की सर्विसेज भी भारत देगा। यही विजन हमारा एविएशन सेक्टर के लिए है। आज हम मेड इन इंडिया ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बना रहे हैं...वो दिन दूर नहीं...जब भारत मेड इन इंडिया सिविल एयरक्राफ्ट भी बनाएगा। देशवासी मेड इन इंडिया विमान में ही यात्रा करेंगे। वो दिन में देख रहा हूं दोस्तो।

साथियों,

ये सदी, टेक्नॉलॉजी की है, डेटा की है। आज विश्व के सबसे बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर्स में एक सेंटर्स भारत में बन रहे हैं। यही भारत को ग्लोबल सप्लाई और वैल्यू चेन का मजबूत पिलर बनाएगी। हमने UPI के माध्यम से दुनिया को दिखाया है...कि भारत कम से कम और कम से कम समय में टेक्नॉलॉजी का इतना विस्तार कर सकता है...हमने दिखाया है कि हमारे युवाओं का सामर्थ्य क्या है। अब AI, Deep Tech और Advanced Technologies में हमारे युवा नया दमखम दिखाने के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

आने वाले समय में दो और सेक्टर्स में भारत का सामर्थ्य पूरी दुनिया देखेगी। ये सेक्टर हैं, टूरिज्म और स्पोर्ट्स। ये दोनों भारत की इकॉनॉमी के भी मजबूत पिलर बनेंगे। विशेष रूप से कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन और कॉन्सर्ट के मामले में भारत, एक ग्लोबल डेस्टिनेशन बनने के लिए अब पूरी तरह सज रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से इस सेक्टर को बहुत पुश मिलेगा। और स्पोर्ट्स में तो भारत के युवा कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। और हर दिन, उनकी परफॉर्मेंस निखरती ही जा रही हैं। भारत, दुनिया की biggest sports लीग की धरती बनता जा रहा है। आने वाले सालों में हमारी ये ख्याति और बुलंद होगी। ओलंपिक्स के लिए हमारी तैयारियां भी...भारत की एस्पिरेशन का ही प्रतिबिंब है। हमें छोटा नहीं सोचना है...हमें लक्ष्य ऊंचे रखने हैं...और उन्हें प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत लगा देनी है।

साथियों,

आज भारत रिफॉर्म एकेसप्रेस पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे लिए Reform कोई Compulsion नहीं है। Reform हमारा Conviction है। और देश भी निरंतर रिफॉर्म्स को सपोर्ट कर रहा है।

साथियों,

देशवासियों की सहभागिता भी हमारी बहुत बड़ी शक्ति है। ये 12 वर्ष सरकार और समाज की सहभागिता का उत्सव मनाने वाले रहे हैं। बीते 12 वर्षों में मैंने जो भी सहयोग देश से मांगा...देशवासियों ने दिल खोलकर के साथ दिया है। मैंने स्वच्छता का आग्रह किया...तो पूरा देश निकल पड़ा। मैंने देश से डिजिटल पेमेंट अपनाने का आवाहन किया। तो भारत रियल टाइम ट्रांजैक्शन में दुनिया में सबसे आगे निकल गया। मैंने कोरोना महामारी के दौरान एकजुटता का...संयम का आग्रह किया... तो देश ने एकजुट होकर उस महामारी का सामना किया। जनता ने कभी हमें निराश नहीं किया।

साथियों,

आनेवाले समय में भी इसी जन-विश्वास और जनभागीदारी के साथ हमें आगे बढ़ना है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास ये हमारा मंत्र रहा है। सबका प्रयास ही विकसित भारत के निर्माण की असली ऊर्जा है। हमें हर राज्य, हर शहर, हर गांव को जोड़ना है। अब समय आ गया है कि राज्यों के बीच नई प्रकार की तंदुरुस्त स्पर्धा, स्वस्थ स्पर्धा हो। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा राज्य सबसे तेज़ी से ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनता है। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा शहर इनोवेशन का सबसे बड़ा केंद्र बनता है। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा क्षेत्र रोजगार सृजन में सबसे आगे निकलता है। भारत की प्रगति... राज्यों की ऐसी प्रगति से ही होने वाली है। आइए, अगले दशक को उपलब्धियों के साथ-साथ, श्रेष्ठता का भी दशक बनाएं। आइए, राजनीति की स्पर्धा से ऊपर उठकर विकास की स्पर्धा को राष्ट्रीय संस्कार बनाएं। 12 वर्षों की यात्रा उपलब्धियों की रही है। आने वाले वर्ष और भी नई सिद्धियों के होंगे...और भी बड़ी सिद्धियों के होंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का मैं फिर से अंत:करणपूर्वक आपके साथ सहयोग, समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूं। मैं सिर झुका करके देश के कोटि-कोटि नागरिकों को नमन करता हूं। उनके आशीर्वाद ने हमें ऊर्जा दी है। शक्ति दी है। प्रेरणा दी है। प्रोत्साहन दिया है। ये जनता-जनार्दन के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करते हुए आइए, एक नए विश्वास के साथ, हर संकल्प को पूरा करने के सामर्थ्य को जुटाते हुए हम चल पड़ें। देशवासियों के सपनों को हमारे संकल्प बनाएं। हमारा पल-पल देशवासियों के संकल्पों को साकार करने की यात्रा का अहम पड़ाव बनता चले। इसी भावना के साथ देशवासियों के ऊपर पूरा भरोसा करते हुए आओ निकल पड़ें। बहुत-बहुत धन्यवाद!