PM speaks at launch of Speaker's Research Initiative
The world is today looking at India, our decisions: PM
People of the Nation expect a lot from us. We must deliver our promises: Shri Modi

सभी वरिष्ठ महानुभाव

मैं ह्रदय से ताई जी का अभिनन्‍दन करता हूँ कि आपने SRI की शुरूआत की हैं, वैसे अब पहले जैसा वक्‍त नहीं रहा है कि जब सांसद को किसी विषय पर बोलना हो तो ढेर सारी चीजें ढूंढनी पड़े, इकट्ठी करनी पड़े वो स्थिति नहीं रही है technology ने इतना बड़ा role play किया है और अगर आप भी Google गुरू के विद्यार्थी हो जाएं तो मिनटों के अंदर आपको जिन विषयों की जानकारी चाहिए, मिल जाती है। लेकिन जब जानकारियों का भरमार हो, तब कठिनाई पैदा होती है कि सूचना चुनें कौन-सी, किसे उठाएंगे हर चीज उपयोगी लगती है लेकिन कब करें, कैसे करें, priority कैसे करेंगे और इसिलए सिर्फ जानकारियों के द्वारा हम संसद में गरिमामय योगदान दे पाएंगे इसकी गारंटी नहीं है। जब तक कि हमें उसके reference मालूम न हों, कोई विषय अचानक नहीं आते हैं लम्‍बे अर्सें से ये विषय चलते रहते हैं। राष्‍ट्र की अपनी एक सोच बन जाती है उन विषयों पर दलों की अपनी सोच बनती है। और वो परम्‍पराओं का एक बहुत बड़ा इतिहास होता है। इन सब में से तब जा करके हम अमृत पा सकते हैं जबकि इसी विषय के लिए dedicated लोगों के साथ बैठें, विचार-विमर्श करें। और तब जाकर के विचार की धार निकलती है। अब जब तक विचार की धार नहीं निकलती है, तब तक हम प्रभावी योगदान नहीं दे पाते हैं। पहले का भी समय होगा कि जब सांसद के लिए सदन में वो क्‍या करते थे, शायद उनके क्षेत्र को भी दूसरे चुनाव में जाते थे तब पता चलता था। एक बार चुनाव जीत गया आ गये फिर तो । आज से 25-30 साल पहले तो किसी को लगता ही नहीं था, हां ठीक है कि वो जीत कर के गए हैं और कर रहे हैं कुछ देश के लिए। आज तो ऐसा नहीं है, वो सदन में आता है लेकिन सोचता है Friday को कैसे इलाके में वापस पहुंचु। उसके मन पर एक बहुत बड़ा pressure अपने क्षेत्र का रहता है। जो शायद 25-30 साल, 40 साल पहले नहीं था। और उस pressure को उसको handle करना होता है क्योंकि कभी-कभार वहां की समस्‍याओं का समाधान करें या न करें लेकिन वहां होना बहुत जरूरी होता है। वहां उनकी उपिस्‍थिति होना बहुत जरूरी होता है।

दूसरी तरफ सदन में भी अपनी बात रखते समय, समय की सीमा रहती है। राजनीतिक विषयों पर बोलना हो तो यहां बैठे हुए किसी को कोई दिक्‍कत नहीं होती। उनके DNA में होता है और बहुत बढिया ढंग से हर कोई प्रस्‍तुत कर सकता है। लेकिन जब विषयों पर प्रस्‍तुतिकरण करना होता है कुछ लोग आपने देखा होगा कि जिनका development सदन की कानूनी गतिवधि से ज्‍यादा रहता है। उनका इतनी mastery होती है कुछ भी होता है तुरन्‍त उनको पता चलता है कि सदन के नियम के विरुद्ध हो रहा है। और वे बहुत quick होते हैं। हमारे दादा बैठे हैं उनको तुरन्‍त ध्‍यान में आता है कि ये नियम के बाहर हो रहा है, ये नियम के अंतर्गत ऐसा होना चाहिए। कुछ लोगों कि ऐसी विधा विकसित होती है और वो सदन को बराबर दिशा में चलाए रखने में बहुत बड़ा role play करते हैं। और मैं मानता हूं मैं इसे बुरा नहीं मानता हूं, अच्‍छा और आवश्‍यक मानता हूं। उसी प्रकार से ज्‍यादातर कितना ही बड़ा issue क्‍यों न हो लेकिन ज्‍यादातर हम हमारे दल की सोच या हमारे क्षेत्र की स्थिति उसी के संदर्भ में ही उसका आंकलन करके बात को रख पाते हैं। क्योंकि रोजमर्रा का हमारा अनुभव वही है। वो भी आवश्‍यक है पर भारत जैसे देश का आज जो स्‍थान बना है, विश्‍व जिस रूप से भारत की तरफ देखता है तब हमारी गतिविधियां हमारे निर्णय, हमारी दिशा उसको पूरा विश्‍व भी बड़ी बारीकी से देखता है। हम कैसे निर्णय कर रहे हैं कि जो वैश्विक परिवेश में इसका क्‍या impact होने वाला है। आज हम कोई भी काम अलग-थलग रह करके अकेले रह करके नहीं कर सकते हैं। वैश्विक परिवेश में ही होना है और तब जा करके हमारे लिए बहुत आवश्‍यक होगा और दुनिया इतनी dynamic है अचानक एक दिन सोने का भाव गिर जाए, अचानक एक दिन Greece के अंदर तकलीफ पैदा हो जाए तो हम ये तो नहीं कह सकते कि यार वहां हुआ होगा ठीक है ऐसा नहीं रहा है, तो हमारे यहां चिन्‍तन में, हमारे निर्णयों में भी इसका impact आता है और इसलिए ये बहुत आवश्‍यक हो गया है कि हम एक बहुत बड़े दायरे में भी अपने क्षेत्र की जो आवश्‍यकता है दोनों को जोड़ करके संसद को एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम बना करके अपनी चीजों को कैसे हम कार्यान्वित करा पायें। हम जो कानून बनाएं, जो नियम बनाएं, जो दिशा-निर्देश तय करवाएं उसमें ये दो margin की आवश्‍यकता रहती है और तब मैं जानता हूं कि कितना कठिन काम होता जा रहा है संसद के अंदर सांसद की बात का कितना महत्‍व बढ़ता जा रहा है इसका अंदाजा आ रहा है।

मैं समझता हूं कि SRI का ये जो प्रयास है, ये प्रयास, ये बात हम मानकर चलें कि अगर हमें नींद नहीं आती है तो five star hotel का कमरा book कर करके जाने से नींद आएगी तो उसकी कोई गारंटी नहीं है। हमारे अपने साथ जुड़ा हुआ विषय है उसको हमने ही तैयार करना पड़ेगा। उसी प्रकार से ताई जी कितनी ही व्‍यवस्‍था क्‍यों न करें, कितने विद्वान लोगों को यहां क्‍यों न ले आए, कितने ही घंटे क्‍यों न बीतें, लेकिन जब तक हम उस मिजाज में अपने-आपको सज्ज करने के लिए अपने-आपको तैयार नहीं होंगे तो ये तो व्‍यवस्‍थाएं तो होंगी हम उससे लाभान्वित नहीं होंगे। और अगर खुले मन से हम चले जाएं अपने सारे विचार जो हैं जब उस कार्यक्रम के अंदर हिस्‍सा लें पल भर के लिए भूल जाएं कि मैं इस विषय को zero से शुरू करता हूं। तो आप देखना कि हम चीजों को नए तरीके से देखना शुरू करेंगे। लेकिन हमारे पहले से बने-बनाए विचारों का सम्‍पुट होगा। फिर कितनी ही बारिश आए साहब हम भीगेंगे नहीं कभी। raincoat पहन करके कैसे भीग पाओगे भाई। और इसलिए खुले मन से विचारों को सुनना, विचारों को जानना और उसे समझने का प्रयास करना यही विचार की धार को पनपाता है। सिर्फ information का doze मिलता रहे इससे विचारों की धार नहीं निकलती। ये भी एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।

दूसरी बात है जिस प्रकार से विषय की बारीकी की आवश्‍यकता है मैं समझता हूं कि SRI के माध्‍यम से उन विषयों का...जिन बातों कि चर्चा होती है उसका पिछले 50-60 साल का इतिहास क्या रहा है, हमारी संसद का या देश का? आखिरकार किस background में ये चीज आई है, दूसरा, आज ये निर्णय का वैश्विक परिवेश में क्या संदर्भ है? और तीसरा ये आवश्यक है तो क्यों है? आवश्यक नहीं है तो क्यों है? दोनों पहलू उतने ही सटीक तरीके से अगर आते हैं, तब जो सदस्य हैं, उन सदस्यों का confidence level बहुत बढ़ जायेगा। उसको लगेगा हाँ जी.. मुझे ये ये ये लाभ होने वाला है। इसके कारण मेरा ये फायदा होने वाला है। और मैं मेरे देश को ये contribute करूँगा। बोलने के लिए अच्छा material, ये संसद के काम के लिए enough नहीं है। एक अच्छे वक्ता बन सकते हैं, धारदार बोल सकते हैं, बढ़िया भाषण की तालियाँ भी बज सकतीं हैं, लेकिन contribution नहीं होता है।

मुझे, मेरी उत्सुकता से ही इन चीजों में थोड़ी रुचि थी। मेरे जीवन में मुझे कभी इस क्षेत्र में आना पड़ेगा ऐसा कभी सोचा न था और न ही ऐसी मेरी कोई योजना थी। संगठन के नाते राजनीति में काम करता था। लेकिन जब आजादी के 50 साल मनाये जा रहे थे, तो यहाँ तीन दिवसीय एक विशेष सत्र बुलाया गया था, तो मैं उस समय specially दिल्ली आया था। और हमारे पार्टी के सांसदों से pass निकलवा करके, मैं संसद में जा कर बैठता था। सुनने के लिए जाता था। तो करीब-करीब मैं पूरा समय बैठा था। और मन बड़ी एक जिज्ञासा थी कि देश जो लोग चलाते हैं, इनके एक–एक शब्द की कितनी ताकत होती है, कितनी पीड़ा भी होती है, कितनी अपेक्षाएं होती हैं, कितना आक्रोश होता है, ये सारी चीजें मैं उस समय अनुभव करता था। एक जिज्ञासु के रूप में आता था, एक विद्यार्थी के रूप में आता था।

आज मैं भी कल्पना कर सकता हूँ कि देश हमसे भी उसी प्रकार कि अपेक्षा करता है। उन अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए SRI के माध्यम से, वैसे श्री(SRI) अपने आप में ज्ञान का स्त्रोत है, तो वो उपलब्ध होता रहेगा।

मैं ताई जी को बहुत बधाई देता हूँ। और जैसा कहा... आप में से बहुत कम लोगों ने Oxford Debate के विषय में जाना होगा, Oxford Debate...उस चर्चा का वैसे बड़ा महत्व है वहां Oxford Debate की चर्चा का एक महत्व है, इस बार हमारे शशि जी वहां थे और Oxford Debate में जो बोला है, इन दिनों YouTube पर बड़ा viral हुआ है। उसमे भारत के नागरिक का जो भाव है, उसकी अभिव्यक्ति बहुत है। उसके कारण लोगों का भाव उसमे जुड़ा हुआ है। यही दिखता है कि सही जगह पर हम क्या छोड़ कर आते हैं, वो एक दम उसकी ताकत बन जाती है। मौके का भी महत्व होता है। वरना वही बात कही और जा कर कहें तो, बैठता नहीं है... उस समय हम किस प्रकार चीज को कैसे लाते हैं और वहां जो लोग हैं उस समय उसको receive करने के लिए उनका दिमाग कैसा होगा, तब जा कर वो चीज turning point बन जाती है। जिस समय लोकमान्य तिलक जी ने कहा होगा “स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है” मैं नहीं मानता हूँ कि copywriter ने ऐसा sentence बना कर दिया होगा और न ही उन्होंने सोचा होगा कि मैं क्या कह रहा हूँ...भीतर से आवाज निकली होगी, जो आज भी गूंजती रहती है।

और इसलिए ये ज्ञान का सागर भी, जब हम अकेले में हों तब, अगर हमें मंथन करने के लिए मजबूर नहीं करता है, भीतर एक विचारों का तूफ़ान नहीं चलता रहता, और निरंतर नहीं चलता रहता..अमृत बिंदू के निकलने की संभावनाएं बहुत कम होती हैं। और इसलिए ये जो ज्ञान का सागर उपलब्ध होने वाला है, उसमे से उन मोतियों को पकड़ना और मोतियों को पकड़ कर के उसको माला के रूप में पिरो कर के ले आना और फिर भारत माँ के चरणों में उन शब्दों कि माला को जोड़ना, आप देखिये कैसे भारत माता एक दम से दैदीप्यमान हो जाती हैं, इस भाव को लेकर हम चलते हैं, तो ये व्यवस्था अपने आप में उपकारक होगी।

फिर एक बार मैं ताई जी को हृदय से अभिनन्दन करता हूं और मुझे विश्वास है कि न सिर्फ नए लोग एक और मेरा सुझाव है पुराने जो सांसद रहे है उनका भी कभी लाभ लेना चाहिये, दल कोई भी हो। उनका भी लाभ लेना चाहिये कि उस समय क्या था कैसे था, अब आयु बड़ी हो गयी होगी लेकिन उनके पास बहुत सारी ऐसी चीज़ें होंगी, हो सकता है कि इसमें वो क्योंकि background information बहुत बड़ा काम करती है तो उनको जोड़ना चाहिये और कभी कभार सदन के बाहर इस SRI के माध्यम से, आपके जो regular student बने हैं उनकी बात है ये उनका भी कभी वक्तव्य स्पर्धा का कार्यक्रम हो सकता है विषय पर बोलने कि स्पर्धा का काम हो सकता है और सीमित समय में, 60 मिनट में बोलना कठिन नहीं होता है लेकिन 6 मिनट बोलना काफी कठिन होता है विनोबा जी हमेशा कहते थे कि उपवास रखना मुश्किल नहीं है लेकिन संयमित भोजन करना बड़ा मुश्किल होता है वैसे ही 60 मिनट बोलना कठिन काम नहीं है लेकिन 6 मिनट बोलना मुश्किल होता है ये अगर उसका हिस्सा बने तो हो सकता है उसका बहुत बड़ा उपकार होगा। दूसरा उन को सचमुच में trained करना trained करना मतलब बहुत सी चीज़ें आती है, information देना, चर्चा करना, विषय को समझाना ये एक पहलू है लेकिन हमे उसको इस प्रकार से तैयार करना है तो हो सकता है कि एक प्रकार से उनकी बातों को एक बार दुबारा उनको देखने कि आदत डाली जाये कभी कभार हमे लगता है, हम भाषण दे कर के बैठते हैं तो लगता है कि वाह क्या बढ़िया बोला है लेकिन जब हम ही हमारा भाषण पढ़ते हैं एक हफ्ते के बाद तो ध्यान में आता है कि यार एक ही चीज़ को मैं कितनी बार गुनगुनाता रहता हूँ, ये फालतू मैं क्यों बोल रहा था, ये बेकार में टाइम खराब कर रहा था हम ही देखेंगे तो हम ही अपना भाषण 20 – 30% खुद ही काट देंगे कि यार मैं क्या बेकार में बोल रहा था बहुत कम लोगों को आदत होती है कि वो अपने आपको परीक्षित करते हैं। मैं समझता हूँ कि अगर ये आदतें लगती है तो बहुत सी चीज़ें हमारी एक दम तप करके बाहर निकलती है।

बहुत बहुत धन्यवाद।

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April 19, 2024
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भारत माता की… भारत माता की… भारत माता की…
सबई जनों खों हमाई तरफ से राम-राम पोंचे!

साथियों,
इस समय मध्य प्रदेश सहित देशभर की अनेक सीटों पर पहले चरण की वोटिंग जारी है। सबसे पहले तो मैं यही आग्रह करूंगा कि जिन साथियों ने अब तक वोट नहीं डाला है, वो जरूर अपने कर्तव्य पालन करें। साथियों, मैं यहां बांदकपुर के जागेश्वर महादेव और कुंडलपुर तीर्थ को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं स्वतंत्रता सेनानी राजा किशोर सिंह जी और वीर योद्धाओं आल्हा-ऊदल को भी नमन करता हूं। यहां जैन मुनि पूज्य विद्यासागर जी महाराज के चरण पड़े थे। मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं।

भाइयों और बहनों,
2024 का ये चुनाव सिर्फ एक सांसद चुनने का चुनाव नहीं है, ये चुनाव देश का है। देश के भविष्य को सुनिश्चित करने का चुनाव है। आपकी आने वाली पीढ़ी के भाग्य को सुनिश्चित करने वाला ये चुनाव है। ये चुनाव आने वाले 5 साल में भारत को दुनिया की बड़ी शक्ति बनाने का चुनाव है। आप देख रहे हैं कि दुनिया में कैसे युद्ध के बादल छाए हैं। जब दुनिया में युद्ध का माहौल हो, घटनाएं घट रही हो तो भारत में युद्धस्तर पर काम करने वाली सरकार बहुत जरूरी है। आप मेरी बात से सहमत हैं। आप मेरी बात से सहमत हैं। ऐसे समय मजबूत सरकार होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? किसी भी परिस्थिति में भारत की रक्षा करें, ऐसी सरकार होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? और ये काम पूर्ण बहुमत वाली मजबूत भाजपा सरकार ही कर सकती है। (जरा एसपीजी वो बच्चा फोटो लेकर आया है, और लंबे समय से हिला रहा है, उसको कलेक्ट...उसके पीछे पता लिख देना बेटा, मेरी चिट्ठी आएगी तुझे। तुम अपना नाम पता लिख देना। उस पर नाम पता लिख देना और कैमरामैन को दे दो। दे दो उनको...हां। और फिर आराम बैठो। कब से हाथ ऊपर करके...थक जाओगे।) बोलिए...भारत माता की, भारत माता की।

साथियों
स्थिर सरकार कैसे देश और देशवासियों के हित में काम करती है, ये हमने बीते वर्षों में देखा है। कोरोना का इतना बड़ा संकट आया...पूरी दुनिया में हाहाकार मचा...मजबूत भाजपा सरकार पूरी दुनिया से हर भारतीय को सुरक्षित भारत वापस ले आई। भाजपा ने करोड़ों परिवारों को मुफ्त राशन की सुविधा दी। भाजपा सरकार ने करोड़ों भारतीयों को मुफ्त वैक्सीन लगाई। आज देश में वो भाजपा सरकार है, जो ना किसी से दबती है और ना ही किसी के सामने झुकती है। हमारा सिद्धांत है- राष्ट्र प्रथम। भारत को सस्ता तेल मिले, इसलिए हमें देशहित में फैसला लिया। भारत के किसानों को पर्याप्त खाद मिले, इसके लिए हमने देशहित में फैसला लिया। (भाई एक और सज्जन भी बेचारे मेहनत कर रहे हैं, जरा उनकी तरफ भी देखिए। ये आपलोगों का प्यार ऐसा है कि मैं आपको मना नहीं कर सकता हूं। वो तो मेरी माता जी की फोटो बनाकर ले आए हैं। बहुत सुंदर बनाया है भई। बहुत सुंदर बनाया आपने। अपना नाम पता लिखकर दे देना मुझे।) आज दुनिया के कितने ही देशों की स्थिति बहुत खराब है, कई देश दीवालिया हो रहे हैं...हमारा एक पड़ोसी जो आतंक का सप्लायर था, वो अब आटे की सप्लाई के लिए तरस रहा है..।(यहां के मतदाता बड़े समझदार हैं, मैंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन आप तक बात पहुंच गई।) ऐसे हालातों में हमारा भारत, दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। मुझे बताइए आज जो भारत आगे बढ़ रहा है इससे आपको गर्व होता है या नहीं? हाथ ऊपर करके सब के सब बताएं, आपको गर्व होता है या नहीं? आज दुनिया में हिंदुस्तान का डंका बज रहा है, आपको गर्व हो रहा है। आज अमेरिका में भी भारत की वाहवाही हो रही है, आपको गर्व हो रहा है। आज विश्व के हर देश में भारत का जय-जयकार हो रहा है। आपको गर्व हो रहा है। ये किसने किया? अरे आपका जवाब गलत है। ये मोदी ने नहीं किया, ये जो हुआ है न आपके एक वोट की ताकत के कारण हुआ है। ये आपने किया है। आपके एक वोट ने करके दिखाया है। आपका ये उत्साह साफ-साफ कह रहा रहा है- फिर एक बार... मोदी सरकार ! आवाज जोर से आनी चाहिए... फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार !

साथियों,
ये धरती शूरवीरों की धरती है, योद्धाओं की धरती है। मैं इस धरती के लोगों को इंडी गठबंधन की सच्चाई बताना चाहता हूं। दशकों तक, कांग्रेस ने भारत के डिफेंस सेक्टर को कमजोर बनाए रखा। ये लोग सेनाओं के लिए हथियार खरीदने में भी अपना स्वार्थ देखते थे। पूरे देश ने देखा है कि कैसे इन लोगों ने पूरी ताकत लगा दी कि हमारी वायुसेना सशक्त न हो, देश में रफायल लड़ाकू विमान ना आए और देश की वायुसेना मुसीबतों को झेलती रहे। कांग्रेस की सरकार रही होती तो भारत में बना तेजस फाइटर प्लेन भी आसमान की बुलंदियां नहीं देख पाता। ये भाजपा सरकार है जो हमारी सेनाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। भारत की पहचान अब दूसरे देशों को हथियार निर्यात करने वाले देश की बन रही है। इस साल ही भारत ने 21 हजार करोड़ रुपए के हथियार दूसरे देशों को बेचे हैं। अब हम ब्रह्मोस मिसाइल को भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। और आज जब मैं भाषण कर रहा हूं, इसी समय हमारा ब्रह्मोस मिसाइल विदेश जाने के लिए सप्लाई के लिए डिलीवरी के लिए थोड़ी देर में चल पड़ेगा। इस मिसाइल का पहला बैच आज फिलिपींस जा रहा है। मैं सभी देशवासियों को इसकी बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

भाइयों और बहनों,
आप जरा याद कीजिए, 2014 से पहले देश में चारों तरफ निराशा का माहौल था। 2014 में मोदी आपके बीच एक उम्मीद लेकर आया था और आपने आशीर्वाद दिया। 2019 में मैं दोबारा आपके पाया तो एक विश्वास लेकर आया था। और आज 2024 में मोदी आपके पास गारंटी लेकर आया है। मोदी की गारंटी यानी, गारंटी पूरा होने की गारंटी! मोदी की गारंटी है कि गरीब, किसान, नौजवान और माताएं-बहनें, हर लाभार्थी को शत-प्रतिशत सुविधाएं मिलेंगी। पिछले 10 वर्षों में MP के 40 लाख से ज्यादा परिवारों को पक्का घर मिला है। लेकिन जिनको अब भी पीएम आवास योजना के घर नहीं मिले है, उनका भी बीजेपी ने ख्याल रखा है। हमने संकल्प लिया है कि देश में 3 करोड़ नए आवाल हम बनाएंगे और उसमें से जिनको घर नहीं मिला है, उनका घर पक्का हो जाएगा। अच्छा मेरा एक काम करोगे आपलोग। ऐसे नहीं, हाथ ऊपर करके बताइए, करोगे। गर्मी बहुत है, मैं जानता हूं, करोगे। पक्का करोगे। आप जब अभी चुनाव अभियान के लिए जाएंगे तो बहुत लोगों से मिलना होगा। गांव-गांव जाएंगे, इलाके अलग-अलग जाएंगे। अगर वहां कोई आपको ऐसा कोई परिवार दिखाई दे, जिसको अभी पक्का घर नहीं मिला है। जिसको शायद अभी नल से जल नहीं पहुंचा है। उसको शायद गैस का कनेक्शन नहीं पहुंचा है। तो मेरी तरफ से उनको एक गारंटी दे देना। उनको कह देना, बहुत लोगों का काम हो चुका, अगर आपका बाकी है, तो आने वाले पांच साल जब मोदी जी फिर से आएंगे न, वो काम भी पूरा हो जाएगा। कह देंगे, कह देंगे? आप जब कहेंगे न, तब लोग ये नहीं कहेंगे कौन कह रहा, वो ये मानेंगे कि जो सामने खड़ा है न वो मोदी खड़ा है। मेरे लिए तो आप ही मोदी हैं। और मुझे पूरा विश्वास है कि घर दिलवाने के काम में हमारे यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान मोहन यादव जी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

साथियों,
हर परिवार के लिए राशन और इलाज का खर्च मायने रखता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, मोदी ने आने वाले 5 वर्ष तक मुफ्त राशन की सुविधा बढ़ा दी है। इन परिवारों को मुफ्त राशन इसलिए ताकि गरीब के घर का चूल्हा जलता रहे। ये मुफ्त राशन इसलिए कि गरीब का बच्चा भूखे पेट सोने के लिए मजबूर न हो जाए। आयुष्मान योजना ने भी गरीबों के लाखों रुपए खर्च होने से बचाए हैं। अब मोदी ने गारंटी दी है कि गरीबों के साथ-साथ हमारे देश के कोई भी व्यक्ति जो 70 साल से ऊपर का है, मध्यम वर्ग का हो, उच्च मध्यम वर्ग का हो, घर में गाड़ी हो, कुछ भी हो, ऐसे 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को भी ये मोदी की तरफ से मुफ्त इलाज की योजना का लाभ मिलेगा।

साथियों,
हर घर जल और हर खेत में पानी, ये भी भाजपा का संकल्प है। बुंदेलखंड में पानी की समस्याओं का समाधान करने के लिए मोदी पूरी ईमानदारी से जुटा है। और इस काम में हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और उनकी पूरी टीम प्रतिबद्धता से जुटे हुए हैं। पंचम नगर परियोजना से सिंचाई की ज़रूरतें पूरी हो रही हैं। हम 45 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करके केन-बेतवा लिंक नहर को तेज़ी से पूरा कर रहे हैं। हर घर जल अभियान के तहत, मध्य प्रदेश में करीब 70 लाख घरों तक पाइप से पानी पहुंचाया जा चुका है।

साथियों,
मोदी की गारंटी, मुफ्त बिजली और बिजली से कमाई की भी है। पीएम सूर्यघर – मुफ्त बिजली योजना से जो इस योजना का लाभ लेगा उसका बिजली का बिल ज़ीरो हो जाएगा जीरो। और इसके लिए भाजपा सरकार बहुत मदद दे रही है। भाइयों और बहनों, जिनके पास गारंटी देने के लिए कुछ नहीं है, उनकी गारंटी मोदी ने ली है। गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी परिवार के युवा पहले कोई बिजनेस कर ही नहीं पाते थे। क्योंकि उनके पास बैंक को देने के लिए गारंटी नहीं होती थी। ब्याज से पैसे लाएं तो बाल ही न बचे ये हाल हो जाती थी। मोदी ने मुद्रा योजना के तहत ऐसे युवाओं को लाखों करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराया है। अब भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में घोषणा की है कि मुद्रा योजना के तहत मदद को बढ़ाकर अब 20 लाख कर दिया जाएगा। पहले रेहड़ी-ठेले-फुटपाथ पर काम करने वालों को भी कोई नहीं पूछता था। स्वनिधि योजना से ऐसे लाखों साथियों को पहली बार बैंक से मदद मिली है। अब गांव और कस्बों में फेरीवाले साथियों को भी स्वनिधि के दायरे में लाया जाएगा।

साथियों,
दमोह के तो नाम में ही रानी दमयंती जी की प्रेरणा है। ये धरती रानी दुर्गावती और रानी अवंती बाई की कर्मस्थली रही है। वीरांगनाओं की अपनी इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हम विकसित भारत के निर्माण के लिए नारीशक्ति को सशक्त कर रहे हैं। उज्जवला योजना की गैस हो...घर घर बने शौचालय हों...घर-घर पहुंची बिजली हो...जनधन योजना के बैंक खाते हों...इन सबका सबसे ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों-बेटियों को ही हुआ है। पहले हमारे देश में महिलाओं के नाम एक भी संपत्ति नहीं होती थी। दुकान खरीदी तो पुरुष के नाम...जमीन खरीदी तो पुरुष के नाम...गाड़ी खरीदी तो पुरुष के नाम...महिलाओं के नाम कोई संपत्ति नहीं होती थी। पहले पति के नाम होती थी और बाद में बेटे के नाम होती थी। महिला के नाम कुछ नहीं होता था मोदी ने तय किया कि पीएम आवास योजना की वजह से अब करोड़ों बहनों के नाम पहली बार कोई प्रॉपर्टी दर्ज हुई है। माताओं -बहनों के नाम संपत्ति आई है। पिछले 10 साल में 10 करोड़ बहनें सहायता समूहों से, वनधन केंद्रों से जुड़ी हैं। अभी तक 1 करोड़ बहनें ऐसी हैं जिनकी वार्षिक आय 1 लाख से अधिक हो चुकी है। अब मोदी ने 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की गारंटी दी है।

भाइयों और बहनों,
मोदी ये सबकुछ आपके लिए कर रहा है, आप ही मेरे परिवारजन हैं। मेरा भारत, मेरा परिवार है। इसलिए जो कुछ भी कर रहा हूं, आपके लिए कर रहा हूं। लेकिन परिवारवादी और भ्रष्टाचारी नेताओं को मोदी की गारंटी बेचैन कर रही है। वो कहते हैं कि तीसरी बार भाजपा सरकार बनी तो देश में आग लग जाएगी। इंडी-गठबंधन के लोग मोदी को आए दिन धमकियां दे रहे हैं। लेकिन मोदी इन धमकियों से ना पहले डरा है और ना कभी डर सकता है।

साथियों,
बुंदेलखंड की ये भूमि राष्ट्रभक्ति और रामराज्य से प्रेरणा से भरी हुई है। ओरछा में हमारे प्रभु राम राजा के रूप में विराजमान हैं। यही बुंदेलखंड की धरती देख रही है कि कैसे कांग्रेस और इंडी-गठबंधन वाले हमारी आस्था का अपमान करने में जुटे हैं। ये लोग कहते हैं कि हमारा सनातन डेंगू है, मलेरिया है। आपके आशीर्वाद से अयोध्या में जो राममंदिर बना है, उसके भी ये घोर विरोधी हैं। ये लोग भगवान श्रीराम की पूजा को पाखंड बताते हैं। और ये बयान तब दिया जाता है, जब अयोध्या में रामनवमी पर रामलला का सूर्यतिलक हो रहा था। यही लोग हैं, जो बुलाने के बाद भी अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में नहीं गए, इतना ही नहीं उन्होंने निमंत्रण को ठुकरा दिया। और ये सारा वोट बैंक पालिटिक्स के लिए करते हैं। अब आप सोचिए, आपने नाम सुना होगा अयोध्या में। एक अंसारी परिवार है, दो-दो पीढ़ी से ये अंसारी परिवार हिंदुओं के खिलाफ अदालत में जंग लड़ रहे थे। बाबरी मस्जिद के पक्ष में जंग लड़ रहे थे। ये इकबाल अंसारी और उनके पिता जी पूरे परिवार कितने ही दशकों से लड़ाई लड़ रहा था लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय किया ये हिंदुओं के पक्ष में जाएगा। तो इतने साल लड़ाई लड़ने के बावजूद भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। जीवनभर लड़ाई लड़े थे। इतना ही नहीं जिस समय राम मंदिर के शिलान्यास का कर्यक्रम था। तो ये जो राम मंदिर के ट्रस्टी हैं। उन्होंने हरेक का गुनाह गलतियां माफ करके सबको प्यार से निमंत्रण दिया। और आपको जानकर खुशी होगी ये अंसारी स्वयं शिलान्यास के कार्यक्रम में मौजूद रहे। जीवन भर लड़ाई लड़े थे, मौजूद रहे। इतना ही नहीं अभी जब प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम था तो ट्रस्टियों ने उन्हें भी निमंत्रण दिया जैसे कांग्रेस के नेताओं को दिया था, सपा के नेताओं को दिया था, इंडी गठबंधन वाले सभी नेताओं को दिया था, अंसारी को भी दिया। जीवनभर हिंदुओं के खिलाफ कोर्ट में लड़ते रहे, बाबरी मस्जिद के लिए लड़ते रहे, राम मंदिर के विरुद्ध लड़ते रहे, लेकिन जब प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिला तो वो हंसी खुशी के साथ आकर के सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए इसके हिस्सेदार बने। एक तरफ एक छोटा सा व्यक्ति भाई अंसारी, सामान्य परिवार का है उसका व्यवहार देखिए और दूसरी तरफ ये कांग्रेस के नेताओं का व्यवहार देखिए, उन्होंने प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को ठुकरा दिया। वोट बैंक के खातिर ये क्या करते हैं।

साथियों,
बीजेपी-एनडीए को दिया आपका वोट केंद्र में सरकार तो बनाएगा ही। BJP-NDA को दिया आपका वोट विकसित भारत बनाएगा। हमें दमोह से राहुल लोधी जी को...और खजुराहो से विष्णु दत्त शर्मा जी दिखते पतले-दुबले हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में भाजपा ने इस बार नया इतिहास रच दिया है। साथियों, ये चुनाव जीतना है लेकिन मुझे तो पोलिंग बूथ जीतना है। बताइए आप मेरी मदद करेंगे। घर-घर जाएंगे, पहले से ज्यादा मतदान कराएंगे। पोलिंग बूथ जीतेंगे। अपनी पूरी ताकत पोलिंग बूथ पर लगाएंगे। पोलिंग बूथ में सबसे ज्यादा वोट लाने का काम करेंगे। अच्छा मेरा एक दूसरा काम करेंगे। करेंगे। सबलोग बताएं तो मैं बताऊं। अच्छा आप इस चुनाव अभियान के दौरान जब घर-घर जाएंगे, हर घर जाना और कहना कि अपने मोदी भाई आए थे। और मोदी भाई ने हम सबको राम-राम भेजा है। मेरा राम-राम पहुंचा दोगे। पक्का पहुंचा दोगे।
मेरे साथ बोलिए... भारत माता की… भारत माता की… भारत माता की….
बहुत-बहुत धन्यवाद।