बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे राष्ट्र को समर्पित किया
मैसूरु-कुशलनगर 4-लेन राजमार्ग का शिलान्यास किया
"कर्नाटक में आज शुरू की जा रही अत्याधुनिक सड़क अवसंरचना परियोजनाएं पूरे राज्य में परिवहन-संपर्क को बढ़ावा देंगी और आर्थिक विकास को मजबूत करेंगी"
"'भारतमाला' और 'सागरमाला' जैसी पहलें भारत के परिदृश्य को बदल रही हैं"
"देश में अवसंरचना विकास के लिए इस साल के बजट में 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं"
“अच्छी अवसंरचना 'जीवन यापन में आसानी' के लिए सुविधाएँ बढ़ाती है; प्रगति के नए अवसर पैदा करती है”
"पीएम किसान सम्मान निधि के तहत केंद्र सरकार द्वारा मंड्या क्षेत्र के 2.75 लाख से अधिक किसानों को 600 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं"
"देश में दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है"
"इथेनॉल पर विशेष ध्यान देने से गन्ना किसानों को मदद मिलेगी"

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

कर्नाटक-दा, एल्ला, सहोदरा सहोदरी-यारिगे, नन्ना नमस्कारागलु !

ताई भुवनेश्वरी को भी मेरा नमस्कार!

मैं आदि चुनचुनागिरी और मेलुकोटे के गुरुओं के सामने भी नमन करता हूं, उनके आशीर्वाद की कामना करता हूं।

बीते कुछ समय में मुझे कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों में जनता जनार्दन के दर्शन का अवसर मिला है। हर जगह, कर्नाटक की जनता अभूतपूर्व आशीर्वाद दे रही है। और मंड्या के लोगों के तो आशीर्वाद में भी मिठास होती है। सक्करे नगरा मधुर मंड्या, मंड्या के इस प्यार से, इस सत्कार से मै अभिभूत हूं। मैं आप सभी का सर झुकाकर के वंदन करता हूं।

डबल इंजन सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि आपके इस प्यार के, आपका जो ऋण है उसको हम ब्याज़ सहित चुकाएं, तेज़ विकास करके चुकाएं। अभी हज़ारों करोड़ रुपए के जिन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण यहां हुआ है, ये इसी प्रयास का हिस्सा हैं।

बीते कई दिनों से देश में बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस वे की बहुत चर्चा है। सोशल मीडिया पर एक्सप्रेसवे से जुड़ी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। हर देशवासी की, हमारे युवाओं की ये इच्छा रही है कि ऐसे शानदार, आधुनिक एक्सप्रेस वे भारत में हर जगह बनें। आज वो बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस वे को देखकर हमारे देश के युवा गर्व से भरे हुए हैं। इस एक्सप्रेस वे से मैसूर और बेंगलुरु के बीच का समय अब आधे से भी कम रह गया है।

आज मैसूर-कुशलनगर फोरलेन का भी शिलान्यास हुआ है। ये सभी प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र में सबका विकास को और गति देंगे, समृद्धि के रास्ते खोलेंगे। आप सभी को कनेक्टिविटी के इन प्रोजेक्ट्स के लिए आप सबको बहुत-बहुत बधाई।

भारत में जब भी इंफ्रास्ट्रक्चर के विजन से जुड़ी चर्चा होती है, तब दो महान विभूतियों का नाम हमेशा अग्रणी रहता है। कृष्ण राजा वडियार और सर एम विश्वेश्वरैया। ये दोनों महापुरुष इसी धरती की संतान थे और उन्होंने पूरे देश को एक नई दृष्टि दी, ताकत दी। इन महान विभूतियों ने आपदा को अवसर में बदला, इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व समझा और ये आज की पीढ़ियों का सौभाग्य है पूर्वजों की तपस्या का उन्हें आज लाभ मिल रहा है।

ऐसे ही महान व्यक्तित्वों से प्रेरित होकर आज देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। आज भारतमाला और सागरमाला योजना से कर्नाटक बदल रहा है, देश बदल रहा है। जब दुनिया कोरोना की मुश्किलों से जूझ रही थी, तब भी भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर के बजट को कई गुना बढ़ाया है। इस वर्ष के बजट में तो रिकॉर्ड 10 लाख करोड़ रुपए हमने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखे हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर अपने साथ सिर्फ सुविधा नहीं लाता, बल्कि ये रोजगार लाता है, निवेश लाता है, कमाई के साधन लाता है। सिर्फ कर्नाटक में ही बीते वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक हाईवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स में हमने पूंजी निवेश किया है।

बेंगलुरु और मैसूर दोनों कर्नाटक के महत्वपूर्ण शहर हैं। एक शहर को टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है, तो दूसरे को ट्रेडिशन के लिए। इन दोनों शहरों को आधुनिक कनेक्टिविटी से जोड़ना कई अलग-अलग दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।

लंबे समय से, दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले लोग भारी ट्रैफिक की शिकायत करते थे। लेकिन अब, एक्सप्रेस वे की वजह से ये दूरी सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे इस पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास की रफ्तार बहुत तेज होने वाली है।

ये एक्सप्रेस वे रामनगर और मंड्या से गुजर रहा है। यहां भी कई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं। इन शहरों में भी पर्यटन की संभावना बढ़ जाएगी। इससे मैसूर तक पहुंचना आसान तो होगा ही, साथ ही मां कावेरी की जन्मस्थली कोडागु तक पहुंचना भी सरल हो जायेगा। अभी हम देखते हैं कि बरसात में लैंडस्लाइड के कारण वेस्टर्न घाट में बेंगलुरु-मेंगुलुरु का रास्ता अक्सर बंद हो जाता है। इससे इस क्षेत्र की पोर्ट कनेक्टिविटी प्रभावित होती है। मैसूर-कुशलनगर हाईवे के चौड़ीकरण से ये समस्या भी दूर हो जाएगी। अच्छी कनेक्टिविटी के चलते इस क्षेत्र में इंडस्ट्री का भी विस्तार बहुत तेजी से होगा।

साल 2014 से पहले कांग्रेस की जो सरकार केंद्र में थी और मिली जुली सरकार थी। भांति भांति लोगों के समर्थन से चल रही थी, उसने गरीब आदमी को, गरीब परिवारों को तबाह करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। जो पैसा गरीब के विकास के लिए था, उसका हजारों करोड़ रुपए कांग्रेस की सरकार ने लूट लिया था। कांग्रेस को कभी गरीब के दुख-दर्द से कोई फर्क नहीं पड़ा है।

2014 में जब आपने मुझे वोट देकर के सेवा का मौका दिया, तो देश में गरीब की सरकार बनी, गरीब का दुख-दर्द समझने वाली संवेदनशील सरकार बनी। इसके बाद भाजपा की केंद्र सरकार ने पूरी ईमानदारी से गरीब की सेवा करने का प्रयास किया, गरीब के जीवन से मुश्किल कम करने का लगातार प्रयास किया।

गरीब के पास पक्का घर हो, गरीब के घर में नल से जल आए, उज्ज्वला का गैस कनेक्शन हो, बिजली कनेक्शन हो, गांव तक सड़कें बनें, अस्पताल बने, इलाज की चिंता कम हो, इसे भाजपा की सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

बीते 9 वर्षों में भाजपा सरकार की योजनाओं से करोड़ों गरीबों का जीवन आसान हुआ है। कांग्रेस के समय में गरीब को सुविधाओं के लिए सरकार के पास चक्कर लगाने पड़ते थे। अब भाजपा की सरकार, गरीब के पास जाकर उसे सुविधाएं दे रही है। जो लोग अब भी भाजपा सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित हैं, उन तक भी अभियान चलाकर के पहुंचा जा रहा है।

भाजपा सरकार ने हमेशा समस्याओं के स्थाई समाधान को महत्व दिया है। पिछले 9 वर्षों में देश में 3 करोड़ से अधिक गरीबों के घर बने हैं। जिसमें से लाखों घर ये हमारे कर्नाटक में भी बने हैं। जल जीवन मिशन के तहत कर्नाटक में लगभग 40 लाख नए परिवारों को नल से जल मिला है।

हमारे देश में दशकों से सिंचाई के जो प्रोजेक्ट लटके थे, वो भी तेज़ी से पूरे कर रहे हैं। इस साल बजट में केंद्र सरकार ने अपर भद्रा प्रोजेक्ट को 5300 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। इससे भी कर्नाटक के एक बड़े हिस्से में सिंचाई से जुड़ी समस्याओं का स्थाई समाधान होेने वाला है।

किसानों की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करके भी भाजपा सरकार उनकी चिंता का स्थाई समाधान कर रही है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत कर्नाटक के किसानों के बैंक खातों में 12 हजार करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। यहा मंड्या के भी पौने तीन लाख किसानों के बैंक खातों में 600 करोड़ रुपए केंद्र की भाजपा सरकार ने भेजे हैं।

वैसे मैं भाजपा की कर्नाटक की सरकार का एक औऱ बात के लिए भी प्रशंसा करूंगा। पीएम किसान सम्मान निधि में केंद्र सरकार जो 6 हजार रुपए भेजती है, कर्नाटक सरकार उसमें 4 हजार रुपए और जोड़ देती है। यानि डबल इंजन सरकार में किसानों को डबल लाभ हो रहा है, उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है।

कर्नाटक के, सक्करे नगरा मधुर मंड्या के हमारे गन्ना किसानों को दशकों से एक और समस्या का सामना करना पड़ता था। गन्ने की पैदावार ज्यादा हो तो मुसीबत, गन्ना कम पैदा हो तो भी मुसीबत। इस वजह से चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया सालों-साल चलता रहता था।

इस समस्या का कोई ना कोई समाधान करना तो जरूरी था। किसानों के हितों को प्राथमिकता देने वाली भाजपा सरकार ने, एक रास्ता चुना इथेनॉल का। हमने तय किया कि गन्ने से बनने वाले इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाएंगे। यानि गन्ने की ज्यादा पैदावार होने पर, उससे इथेनॉल बनाया जाएगा, इथेनॉल से किसान की आय सुनिश्चित की जाएगी।

पिछले वर्ष ही देश की चीनी मिलों ने 20 हज़ार करोड़ रुपए का इथेनॉल तेल कंपनियों को बेचा है। इससे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने में मदद मिली है। 2013-14 के बाद से लेकर पिछले सीज़न तक 70 हज़ार करोड़ रुपए का इथेनॉल चीनी मिलों से खरीदा गया है। ये पैसा गन्ना किसानों तक पहुंचा है।

इस वर्ष के केंद्र सरकार के बजट में भी किसानों के लिए, विशेष रूप से गन्ना किसानों के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। Sugar cooperatives के लिए 10 हजार करोड़ रुपए की मदद हो, टैक्स में छूट हो, इससे गन्ना किसानों को लाभ होगा।

हमारा देश अवसरों की धरती है। दुनियाभर के लोग भारत में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। 2022 में भारत में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया। इसका सबसे बड़ा लाभ ये हमारे कर्नाटक को हुआ। कोरोना-काल के बावजूद कर्नाटक में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। ये डबल इंजन सरकार की मेहनत दिखाता है।

कर्नाटक में आईटी के अलावा बायो-टेक्नॉलॉजी से लेकर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तक हर सेक्टर का विस्तार हो रहा है। डिफेंस, एयरोस्पेस और स्पेस सेक्टर में अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। अब कर्नाटक इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

डबल इंजन सरकार के इन प्रयासों के बीच, कांग्रेस और उनके साथी क्या कर रहे हैं? कांग्रेस कहती है काम लिया है सर पे, कांग्रेस मोदी की कब्र खोदने का सपना देख रही है। कांग्रेस मोदी की कब्र खोदने में बिजी है और मोदी, बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस वे बनवाने में बिजी है। कांग्रेस मोदी की कब्र खोदने में व्यस्त है और मोदी गरीब का जीवन आसान बनाने में व्यस्त है।

मोदी की कब्र खोदने का सपना देख रहे कांग्रेसियों को पता नहीं है कि देश की करोड़ों माताओं-बहनों-बेटियां, देश के लोगों का आशीर्वाद मोदी का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

कर्नाटक के तेज विकास के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है। मैं फिर मंड्या की जनता का इस भव्य आयोजन के लिए, भव्य सत्कार के लिए, आपके आशीर्वाद के लिए हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूं। आप सभी को विकास के प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।