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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की तीन परियोजनाओं- किसान सूर्योदय योजना, गिरनार रोपवे और देश के बड़े और आधुनिक कार्डियाक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया।
किसानों की आय दोगुनी करने, लागत कम करने और उनकी परेशानी कम करने के लिए हमें अपने प्रयास बढ़ाने ही होंगे : प्रधानमंत्री मोदी
बीते 6 सालों में देश सोलर उत्पादन के मामले में दुनिया में पांचवे स्थान पर पहुंच चुका है और लगातार आगे बढ़ रहा है : प्रधानमंत्री मोदी
आयुष्मान भारत योजना के तहत गुजरात के 21 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। सस्ती दवाइयां देने वाले सवा 5 सौ से ज्यादा जनऔषधि केंद्र गुजरात में खुल चुके हैं: पीएम मोदी

नमस्कार!

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी जी, उपमुख्यमंत्री श्री नितिन पटेल जी, गुजरात भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सांसद, श्री सी. आर. पाटिल जी, अन्य सभी मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण, मेरे किसान साथियों, गुजरात के सभी भाइयों और बहनों !

मां अंबे के आशीर्वाद से आज गुजरात के विकास से जुड़े तीन अहम प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हो रही है। आज किसान सूर्योदय योजना, गिरनार रोपवे और देश के बड़े और आधुनिक कार्डिएक हॉस्पिटल गुजरात को मिल रहे हैं। ये तीनों एक प्रकार से गुजरात की शक्ति, भक्ति और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। इन सभी के लिए गुजरात के लोगों को बहुत-बहुत बधाई !

भाइयों और बहनों, गुजरात हमेशा से असाधारण सामर्थ्य वाले लोगों की भूमि रही है। पूज्य बापू और सरदार पटेल से लेकर गुजरात के अनेक सपूतों ने देश को सामाजिक और आर्थिक नेतृत्व दिया है। मुझे खुशी है कि किसान सूर्योदय योजना के माध्यम से गुजरात फिर एक नई पहल के साथ सामने आया है। सुजलाम-सुफलाम और साउनी योजना के बाद अब सूर्योदय योजना गुजरात के किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

किसान सूर्योदय योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता गुजरात के किसानों की आवश्यकता को दी गई है। बिजली के क्षेत्र में बरसों से गुजरात में जो काम हो रहे थे, वो इस योजना का बहुत बड़ा आधार बने हैं। एक समय था जब गुजरात में बिजली की बहुत किल्लत रहती थी, 24 घंटे बिजली देना बहुत बड़ी चुनौती थी। बच्चों की पढ़ाई हो, किसानों के लिए सिंचाई हो, उद्योगों के लिए कमाई हो, ये सबकुछ प्रभावित होता था। ऐस में बिजली के उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन तक, हर प्रकार की कैपेसिटी तैयार करने के लिए मिशन मोड पर काम किया गया।

भाइयों और बहनों,

जो गांवों से नहीं जुड़े हैं, खेती से नहीं जुड़े हैं, उनमें से बहुत कम को ही पता होगा कि किसानों को सिंचाई के लिए ज्यादातर रात में ही बिजली मिलती है। ऐसे में खेत में सिंचाई के समय किसानों को रात-रात भर जागना पड़ता है। जूनागढ़ और गीर सोमनाथ जैसे इलाकों में, जहां से किसान सूर्योदय योजना शुरु हो रही है, वहां तो जंगली जानवरों का भी बहुत ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए किसान सर्वोदय योजना, न सिर्फ राज्य के किसानों को सुरक्षा देगी बल्कि उनके जीवन में नया सवेरा भी लाएगी। किसानों को रात के बजाय जब सुबह सूर्योदय से लेकर रात नौ बजे के दौरान Three Phase बिजली मिलेगी, तो ये नया सवेरा ही तो है।

मैं गुजरात सरकार को इस बात के लिए भी बधाई दूंगा कि बाकी व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बिना, ट्रांसमिशन की बिल्कुल नई कैपेसिटी तैयार करके ये काम किया जा रहा है। इस योजना के तहत अगले 2-3 वर्षों में लगभग साढ़े 3 हज़ार सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों को बिछाने का काम किया जाएगा। मुझे बताया गया है कि आने वाले कुछ दिनों तक हज़ार से ज्यादा गांवों में ये योजना लागू भी हो जाएगी। इनमें भी ज्यादा गांव आदिवासी बाहुल्य इलाकों में हैं। जब इस योजना का पूरे गुजरात में विस्तार हो जाएगा, तो ये लाखों किसानों के जीवन को, उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदल देगी।

साथियों,

किसान की आय दोगुनी करने के लिए, लागत कम करने के लिए, उनकी परेशानी कम करने के लिए बदलते समय के साथ हमें अपने प्रयास बढ़ाने ही होंगे। किसानों को कहीं पर भी अपनी उपज बेचने की आजादी देना हो या फिर हजारों किसान उत्पादक संघों का निर्माण, सिंचाई की अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने का काम हो या फिर फसल बीमा योजना में सुधार, यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग हो या फिर देश भर के करोड़ों किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, इसका लक्ष्य यही है कि देश का एग्रीकल्चर सेक्टर मजबूत हो, किसान को खेती करने में मुश्किल न हो। इसके लिए निरंतर नई-नई पहल की जा रही है।

देश में आज अन्नदाता को ऊर्जादाता भी बनाने के लिए काम किया जा रहा है। कुसुम योजना के तहत किसानों, किसान उत्पादक संघ- FPOs, Co-operatives, पंचायतों, ऐसे हर संस्थानों को बंजर ज़मीन पर छोटे-छोटे सोलर प्लांट लगाने में सहायता दी जा रही है। देशभर के लाखो किसानों के सोलर पंपों को भी ग्रिड से जोड़ा जा रहा है। इससे जो बिजली पैदा होगी उसको किसान ज़रूरत के हिसाब से अपनी सिंचाई के लिए उपयोग कर पाएंगे और अतिरिक्त बिजली को बेच भी पाएंगे। देशभर में करीब साढ़े 17 लाख किसान परिवारों को सोलर पंप लगाने में मदद की जा रही है। इससे किसानों को सिंचाई की सहूलियत भी मिलेगी और उन्हें अतिरिक्त आय भी हो जाएगी।

साथियों,

गुजरात ने तो बिजली के साथ-साथ सिंचाई और पीने के पानी के क्षेत्र में भी शानदार काम किया है। इस कार्यक्रम में जुड़े हम सभी जानते हैं कि गुजरात में पानी की क्या स्थिति थी। बजट का बहुत बड़ा खर्चा सालों तक पानी के पीछे ही खर्चना पड़ा है। यह बहुत लोगो को अंदाज़ नहीं होगा कि गुजरात पर पानी के पीछे आर्थिक बोज बहुत बड़ा रहता था। बीते दो दशकों के प्रयासों से आज गुजरात के उन जिलों, उन गांवों तक भी पानी पहुंच गया है, जहां कोई पहले सोच भी नहीं सकता था।

आज जब हम सरदार सरोवर को देखते हैं, नर्मदा जी के जल को गुजरात के सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचा रही नहरों के नेटवर्क को देखते हैं, वॉटर ग्रिड्स को देखते हैं तो गुजरात के लोगों के प्रयासों पर गर्व होता है। गुजरात के करीब 80 प्रतिशत घरों में आज नल से जल पहुंच चुका है। बहुत जल्द गुजरात देश के उन राज्यों में होगा जिसके हर घर में पाइप से जल पहुंचेगा। ऐसे में जब आज गुजरात में किसान सर्वोदय योजना शुरू हो रही है तो सभी को अपना एक प्रण, एक मंत्र फिर दोहराना है। ये मंत्र है- Per Drop, More Crop का। जब किसानों को दिन में बिजली मिलेगी, तो हमें ज्यादा से ज्यादा पानी बचाने पर भी उतना ही जोर देना है। वरना ऐसा न हो चलो कि भाई बिजली आ रही है, पानी बह रहा है हम आराम से भैठे हैं फिर तो गुजरात बर्बाद हो जायेगा, पानी ख़तम हो जायेगा, ज़िन्दगी मुष्किल हो जाएगी। दिन में बिजली मिलने की वजह से किसानों के लिए भी माइक्रो-इरिगेशन की व्यवस्थाएं करना आसान होगा। गुजरात ने माइक्रो-इरिगेशन के क्षेत्र में काफी प्रगति की है- टपक सिंचाई हो या स्प्रिंकलर हो, किसान सर्वोदय योजना से इसके और विस्तार में मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

गुजरात में आज "सर्वोदय" के साथ ही "आरोग्योदय" भी हो रहा है। यह "आरोग्योदय" अपने आप में एक नया नज़राना है। आज भारत के सबसे बड़े कार्डिएक अस्पताल के रूप में, यूएन मेहता इन्स्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रीसर्च सेन्टर का लोकार्पण किया गया है। ये देश के उन चुनिंदा अस्पतालों में से है जिसमें वर्ल्डक्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर भी है और उतनी ही आधुनिक हेल्थ फैसिलिटी भी। बदलती लाइफ स्टाइल के कारण हार्ट से जुड़ी समस्याएं हम देख रहे हैं, दिनों-दिन बढ़ती चली जा रही हैं, छोटे बच्चो में हो रही हैं। ऐसे में ये अस्पताल गुजरात ही नहीं, देशभर के लोगों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है।

भाइयों और बहनों,

बीते दो दशकों में गुजरात ने आरोग्य के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व काम किया है। चाहे वो आधुनिक अस्पतालों का नेटवर्क हो, मेडिकल कॉलेज हों या हेल्थ सेंटर्स हों, गांव-गांव को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का बहुत बड़ा काम किया गया है। बीते 6 सालों में देश में स्वास्थ सेवा से जुड़ी योजनाएं शुरू हुई हैं, उनका भी लाभ गुजरात को मिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत गुजरात के 21 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। सस्ती दवाइयां देने वाले सवा 5 सौ से ज्यादा जनऔषधि केंद्र गुजरात में खुल चुके हैं। इसमें से लगभग 100 करोड़ रुपए की बचत गुजरात के सामान्य मरीज़ों को हुई है।

भाइयों और बहनों,

आज गुजरात को जो तीसरा उपहार मिला है, उससे आस्था और पर्यटन दोनों ही आपस में जुड़े हुए हैं। गिरनार पर्वत पर मां अंबे भी विराजती हैं, गोरखनाथ शिखर भी है, गुरु दत्तात्रेय का शिखर है और जैन मंदिर भी है। यहां की हज़ारों सीढ़ियां चढ़कर जो शिखर पर पहुंचता है, वो अद्भुत शक्ति और शांति का अनुभव करता है। अब यहां विश्व स्तरीय रोप-वे बनने से सबको सुविधा मिलेगी, सबको दर्शनों का अवसर मिलेगा। अभी तक मंदिर तक जाने में जो 5-7 घंटों का समय लगता था वो दूरी अब रोपवे से 7-8 मिनट में ही तय हो जाएगी। रोपवे की सवारी एडवेंचर को भी बढ़ाएगी, उत्सुकता भी बढ़ाएगी। इस नई सुविधा के बाद यहां ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु आएंगे, ज्यादा पर्यटक आएंगे।

साथियों, आज जिस रोप-वे की शुरुआत हुई है, वो गुजरात का चौथा रोप-वे है। बनासकांठा में मां अंबा के दर्शन के लिए, पावागढ़ में, सतपूड़ा में तीन और रोप-वे पहले से काम कर रहे हैं। अगर गिरनार रोप-वे में रोड़े न अटकाए होते तो यह इतने वर्षों तक अटका नहीं होता, लोगों को, टूरिस्टों को इसका लाभ बहुत पहले ही मिलने लग गया होता। एक राष्ट्र के रूप में हमें भी सोचना होगा कि जब लोगों को इतनी बड़ी सुविधा पहुंचाने वाली व्यवस्थाओं का निर्माण, इतने लंबे समय तक अटका रहेगा, तो लोगों का कितना नुकसान होता है। देश का कितना नुकसान होता है। अब जब ये गिरनार रोप-वे शुरू हो रहा है, तो मुझे खुशी है कि यहां लोगों को तो सुविधा मिलेगी ही स्थानीय युवाओं को रोज़गार के भी अधिक अवसर मिलेंगे।

साथियों,

दुनिया के बड़े-बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशन, आस्था से जुड़े केंद्र इस बात को स्वीकार कर चलते हैं कि हमारे यहां ज्यादा लोग तभी आएंगे जब हम टूरिस्टों को आधुनिक सुविधाएं देंगे। आज जब टूरिस्ट जब कहीं जाता है, अपने परिवार के साथ जाता है, तो उसे Ease of Living भी चाहिए होती है और Ease of Travelling भी। गुजरात में अनेकों जगहें हैं जिनमें भारत ही नहीं दुनिया का बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की क्षमता है। अगर माता के ही मंदिरों की बात करें तो भक्तों के लिए गुजरात में पूरा सर्किट है। मैं सब माताओं के स्थानों का उल्लेख नहीं कर रहा हूँ... और गुजरात के सभी कोने में यह शक्ति रूपेण माताएं गुजरात को निरंतर आशीर्वाद देती हैं। अंबा जी हैं, पावागढ़ तो है हीं चोटिला चामुंडा माता जी हैं, उमिया माताजी हैं, कच्छ में माता नो मढ, कितने ही, यानि हम अनुभव कर सकते हैं कि गुजरात में एक प्रकार के शक्ति का वास है। कई प्रसिद्ध मंदिर हैं।

आस्था के स्थलों के अलावा भी गुजरात में अनेक जगहे हैं जिनकी क्षमताएं अद्भुत हैं। अभी आपने भी देखा है द्वारका के शिवराजपुर समुद्री बीच को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, Blue Flag certification मिला है। ऐसे स्थलों को विकसित करने पर वहां ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आएंगे और अपने साथ रोजगार के नए अवसर भी लाएंगे। आप देखिए, सरदार साहेब को समर्पित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, अब कितना बड़ा टूरिस्ट अट्रेक्शन बन रही है।

जब ये कोरोना शुरू हुआ, उससे पहले ही करीब 45 लाख से ज्यादा लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने जा चुके थे। इतने कम समय में 45 लाख लोग बहुत बड़ी बात होती है। अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को फिर से खोला गया है तो ये संख्या फिर तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह छोटा सा उदाहरण देता हूँ मैं- अहमदाबाद की कांकरिया झील। एक ज़माना था वहां से कोई गुजरता नहीं था, दूसरा रास्ता लेता था। उसका थोड़ा सा रेनोवेशन किया, थोड़ा टूरिस्ट को ध्यान में रखकर व्यवस्थाएं खड़ी करी और आज स्तिथि क्या है- वहां पर पहुंचने वालों की संख्या अब सालाना 75 लाख तक पहुंच रही है। अकेले अहमदाबाद शहर के मध्य में 75 लाख, मध्यम वर्ग निम्न वर्ग के परिवारों के लिए यह जगह बहुत आकर्षण का कारण बन चुकी है और अनेक लोगो के रोटी-रोजी का कारण भी बनी है। ये सारे परिवर्तन टूरिस्टो की बढ़ती हुई संख्या और स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में भी बहुत मदद करती है। और टूरिज्म एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कम से कम पूंजी लगती है और ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को रोज़गार मिलता है ।

हमारे जो गुजराती साथी...और मैं चाहूंगा विश्‍व भर में फैले हुए गुजराती बंधु-भगिनी को मैं आज आग्रह से कहना चाहता हूं, गुजरात के Brand Ambassador बनकर आज पूरी दुनिया में गुजरात के लोग छाए हुए हैं। जब गुजरात अपने यहां नए-नए आकर्षण का केंद्र बना रहा है, भविष्‍य में भी बनने वाला है तो दुनियाभर में फैले हुए हमारे गुज्‍जु बंधुओं से मैं कहूंगा, वो हमारे सभी साथी, उनकी बातों को पूरी दुनिया में अपने-आप ही ले करके चले जाएं, दुनिया को आकर्षित करें। गुजरात के टूरिस्ट डेस्टिनेशन से परिचित कराएं। हमें इसी को लेकर आगे चला है, आगे बढ़ना है।

एक बार फिर सभी गुजरात के मेरे भाइयों, बहनों को इन आधुनिक सुविधाओं के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मां अंबे के आशीर्वाद से गुजरात विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचे, मेरी यही प्रार्थना है। गुजरात स्वस्थ रहे, गुजरात सशक्त बने। इन्‍हीं शुभकामनाओं के साथ आपका आभार। बहुत-बहुत बधाई।

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संसद सत्र को कार्यों और चर्चाओं के आधार पर तौला जाए, न कि व्यवधानों के आधार पर : पीएम
November 29, 2021
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नमस्कार साथियों,

संसद का यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हिन्दुस्तान में चारों दिशाओं में से इस आज़ादी के अमृत महोत्सव के नीमित रचनात्मक, सकारात्मक, जनहित के लिए, राष्ट्रहित के लिए, सामान्य नागरिक अनेक कार्यक्रम कर रहे हैं, कदम उठा रहे हैं, और आजादी के दिवानों ने जो सपने देखे थे उन सपनों को पूरा करने के लिए सामान्य नागरिक भी इस देश का अपना कोई न कोई दायित्व निभाने का प्रयास कर रहा है। यह खबरे अपने आप में भारत के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

कल हमने देखा है। पिछले दिनों संविधान दिवस भी, नए संकल्प के साथ संविधान के spirit को चरित्रार्थ करने के लिए हर किसी के दायित्व के संबंध में पूरे देश ने एक संकल्प किया है इन सबके परिपेक्ष में हम चाहेगें, देश भी चाहेगा, देश का हर सामान्य नागरिक चाहेगा कि भारत का यह संसद का यह सत्र और आगे आने वाला भी सत्र आजादी के दीवानों की जो भावनाएं थी, जो spirit था, आजादी के अमृत महोत्सव का जो spirit है, उस spirit के अनुकूल संसद भी देश हित में चर्चा करे, देश की प्रगृति के लिये रास्ते खोजे, देश की प्रगृति के लिए नये उपाय खोजें और इसके लिए यह सत्र बहुत ही विचारों की समृद्धि वाला, दूरगामी प्रभाव पैदा करने वाले सकारात्मक निर्णय करने वाला बने। मैं आशा करता हूँ कि भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा contribution किया उस तराजू पर तौला जाएं, ना कि किसने किताना जोर लगाकर के संसद के सत्र को रोक दिया यह मानदंड़ नहीं हो सकता। मानदंड यह होगा कि संसद में कितने घंटे काम हुआ, कितना सकारात्मक काम हुआ। हम चाहते हैं, सरकार हर विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है, खुली चर्चा करने के लिए तैयार है। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और आजादी के अमृत महोत्सव में हम यह भी चाहेंगे कि संसद में सवाल भी हो, संसद में शंति भी हो।

हम चाहते हैं, संसद में सरकार के खिलाफ, सरकार की नीतियों के खिलाफ जितनी आवाज़ प्रखर होनी चाहिए, लेकिन संसद की गरिमा, स्पीकर की गरिमा, चेयर की गरिमा इन सबके विषय में हम वो आचरण करें जो आने वाले दिनों में देश की युवा पीढ़ी के काम आए। पिछले सत्र के बाद करोना की एक विकट परिस्थिति में भी देश ने 100 करोड़ से अधिक डोज़ेज, करोना वैक्सीन और अब हम 150 करोड़ की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नए वैरिएंट की खबरें भी हमें और भी सर्तक करती हैं, और सजग करती है। मैं संसद के सभी साथियों को भी सतर्क रहने की प्रार्थना करता हूँ। आप सभी साथियों को भी सतर्क रहने के लिए प्रार्थना करता हूँ। क्योंकि आप सबका उत्तम स्वास्थ्य, देशवासियों का उत्तम स्वास्थ्य ऐसी संकट की घड़ी में हमारी प्राथमिकता है।

देश की 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को इस करोनाकाल के संकट में और अधिक तकलीफ न हो इसलिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से अनाज मुफ्त में देने की योजना चल रही है। अब इसे मार्च 2022 तक समय आगे कर दिया गया है। करीब दो लाख साठ हजार करोड़ रुपये की लागत से, अस्सी करोड़ से अधिक देशवासियों को गरीब के घर का चूल्हा जलता रहे इसकी चिंता की गई है। मैं आशा करता हूँ कि इस सत्र में देश हित के निर्णय हम तेजी से करे, मिलजुल करके करें। सामान्य मानव की आश- अपेक्षाओं को पूर्ण करने वाले करें। ऐसी मेरी अपेक्षा है।... बहुत- बहुत धन्यवाद।