पिछले 4 वर्षों से 21वीं शताब्दी की आवश्यकताओं के अनुसार काशी को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
नया बनारस जो आध्यात्मिकता और आधुनिकता का मेल है, एक नए भारत के लिए विकसित किया जा रहा है: पीएम मोदी
काशी पर्यटन के अंतर्राष्‍ट्रीय मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रहा है: प्रधानमंत्री
इन्टिग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटर पर तेजी से काम चल रहा है, जिससे वाराणसी स्मार्ट सिटी बनेगी: प्रधानमंत्री मोदी
स्मार्ट सिटी पहल सिर्फ शहरों में आधारभूत संरचना में सुधार करने का एक मिशन नहीं है बल्कि भारत को एक नई पहचान देने का भी एक मिशन है: पीएम मोदी

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमान राम नायक जी, यहां के ओजस्वी, तेजस्वी, परिश्रमी, यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, केंद्र में मंत्री परिषद् के मेरे साथी श्रीमान मनोज सिन्हा जी, संसद में मेरे साथी और मेरे बहुत पुराने मित्र और प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्रीमान महेंद्र नाथ पांडेय जी, जापान दूतावास के चार्ज द अफेयर श्री हिरेका असारी  जी और बनारस के मेरे भाइयो और बहनो। 

मैं सबसे पहले हमारे देश का गौरव बढ़ाने वाली एक बेटी का गौरव गान करना चाहता हूं। आप लोगों ने देखा होगा असम के नवगांव जिले के डीनगाम की एक छोटी सी बेटी हिमा दास उसने कमाल कर दिया। और जिन्‍होंने टीवी पर देखा होगा.. मैंने आज विशेष रूप से एक ट्वीट किया था। उस स्‍टेडियम में जो commentator थे, उनके लिए भी अजूबा  था कि विश्‍व चैम्पियनों को पछाड़ करके हिन्‍दुस्‍तान की एक बेटी हर सेकण्‍ड आगे से आगे बढ़ रही है और वो commentator जिस excitement से बोल रहे थे, किसी भी हिन्‍दुस्‍तानी का सीना चौड़ा हो जाए। और बाद में आपने देखा होगा कि हिमा दास एक बहुत बड़ा काम कर दिया था, भारत का नाम रोशन कर दिया था और यह तय हुआ कि वो जीत गई है तो अपना हाथ उठा करके वो तीरंगे झंडे की प्रतीक्षा करते हुए दौड़ रही थी और जैसे ही तिरंगा झंडा आए उसके लिए वो बेसबरी से इंतजार कर रही थी। और दूसरा वो मन में जीत ले करके बैठी थी। विजय के साथ जैसे ही उसने तिरंगा झंडा लहराया साथ-साथ अपना असमिया गमछा भी गले में डालना नहीं भूली। और जब उसको मेडल मिल रहा था, जब वो खड़ी थी, हिन्‍दुस्‍तान का तिरंगा झंडा लहरा रहा था और जन-मन-गण शुरू हुआ। आपने देखा होगा 18 साल की हिमा दास की आंखों में से गंगा-जमना बह रही थी। वो मां भारती को समर्पित थी। यह दृश्‍य अपने आप में सवा सौ करोड़ हिन्‍दुस्‍तानियों को एक नई प्रेरणा और ऊर्जा देता है। छोटे से गांव की चावल की खेती करने वाले किसान परिवार की बेटी 18 महीने पहले जिले में खेलती थी, कभी राज्‍य में भी खेला नहीं था, वो आज 18 महीने के भीतर-भीतर दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान का नाम रोशन करके आ गई। मैं हिमा दास को अनेक-अनेक बधाईयां देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और आपसे भी कहता हूं तालियां बजा करके हिमा दास का गौरवगान कीजिए। गौरवगान कीजिए हमारी इस बेटी का, असम की इस बेटी ने पूरे देश के नाम को रोशन किया है। बहुत-बहुत बधाई।

भाईयों-बहनों, बाबा भोलेनाथ का प्रिय सावन मास आरंभ होने को है। कुछ ही दिनों में काशी में देश और दुनियाभर से शिव भक्‍तों का मेला लगने वाला है। इस उत्‍सव की तैयारियां जोर-शोर से हो रही है। भाईयों-बहनों आज जब हम उत्‍सव की तैयारी में जुटे हैं तब सबसे पहले मैं उन परिवारों की पीड़ा भी सांझा करना चाहता हूं, जिन्‍होंने बीते दिनों हुए हादसे में अपनों को खोया है। बनारस में जो हादसा हुआ, अमूल्‍य जीवन की जो क्षति हुई वह बहुत ही दुखद है। सभी प्रभावित परिवारों के प्रति मेरी पूरी संवेदना है। दूसरों की पीड़ा को सांझा करना, सहयोग और सौहार्द की भावना ही तो काशी की विशेष पहचान है। भोले बाबा के जैसा भोलापन हर किसी के दुख-दर्द को अपने में समाहित करने वाला मां गंगा जैसा स्‍वभाव ही बनारस की पहचान है। देश और दुनिया में बनारसी कहीं भी रहे, वो इन संस्कारो को कभी भूलता नहीं है| साथियों  सदियों से बनारस यूँ ही बना हुआ है, परम्पराओं  में रचा बसा हुआ है| इसकी पौराणिक पहचान को नै ऊंचाइयां देने, काशी को इक्कीसवी सदी की आवश्यक्ता के हिसाब से विकसित करने का प्रयास बीते  चार वर्षो से निरंतर जारी है|  न्‍यू इंडिया के लिए एक नये बनारस का निर्माण हो रहा है, जिसकी आत्‍मा तो पुरातन ही होगी, लेकिन काया नवीनतम बनेगी। जहां के कण-कण में संस्‍कृति और संस्‍कार होंगे, लेकिन व्‍यवस्‍थाएं स्‍मार्ट सिस्‍टम से भरी होगी। बदलते हुए बनारस की यह तस्‍वीर अब चौतरफा दिखने लगी है।

आज मीडिया में, सोशल मीडिया में काशी की सड़के, चौराहों, चौपालों, गलियां, घाटों और तालाबों की तस्‍वीर जो भी देखता है, उसका मन प्रफुलित हो जाता है। सिर के ऊपर लटकते बिजली के तार अब गायब हो गए हैं। सड़के रोशनी से नहा रही है। रंग-बिरंगी रोशनी के बीच फव्‍वारों का दृश्‍य मन छू लेने वाला होता है। साथियों बीते चार वर्षों के दौरान बनारस में दसियों हजार करोड़ का निवेश हो चुका है और यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा। 2014 के बाद के दिनों में हमारे सामने कई चुनौतियां थी। पहले की सरकार से काशी के विकास के लिए बहुत सहयोग भी नहीं था, सहयोग छोडि़ये रूकावटें थी, लेकिन जब से आपने भारी बहुमत से लखनऊ में भाजपा की सरकार को समर्थन दिया, तब से पूरे उत्‍तर प्रदेश में काशी के विकास की गति भी तेज हो गई है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए अभी-अभी मैंने करीब-करीब एक हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया है। केंद्र और राज्‍य के ये तीस से अधिक  प्रोजेक्‍ट यहां की सड़कों, ट्रांसपोर्ट, पानी की सप्‍लाई, सीवेज, रसोई गैस, स्‍वच्‍छता और इस शहर का सुंदरीकरण इससे यह जुड़े हैं। इसके अलावा Income Tax tribunal की Circuit Bench और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए CGHS wellness centre की सुविधा से भी यहां के लोगों को बड़ी सहूलियत मिलने जा रही है।

भाईयों और बहनों, बनारस में जो भी बदलाव आ रहा है, उसका लाभ आस-पास के गांवों को मिल रहा है। इन गांवों में पीने के पानी से जुड़ी अनेक योजनाओं का भी आज यहां लोकार्पण किया गया। यहां जो किसान भाई-बहन जुटे हैं, मैं आपको विशेष बधाई देना चाहता हूं। इस सभास्‍थल के पास ही perishable cargo केंद्र है, जो अब बन करके तैयार है। यह मेरा सौभाग्‍य था कि मुझे उसका शिलान्‍यास करने का मौका मिला था और आज लोकार्पणस करने का भी मौका मिल गया। साथियों कार्गों सेंटर यहां के किसानों के लिए बड़ा वरदान साबित होने वाला है। आलू, मटर, टमाटर जैसी सब्जियां जो बहुत कम समय में खराब हो जाती थी, उनके भंडारण की उचित व्‍यवस्‍था यहां तैयार की गई है। अब आपको फल-सब्जियों के सड़ने-गलने से नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। रेलवे स्‍टेशन भी बहुत दूर नहीं है। इससे अब सब्जियों और फलों को दूसरे शहरों में भेजने में भी आपको और आसान होगी।

भाईयों-बहनों, Transportation से Transformation यानि परिवहन से परिवर्तन यह रास्‍ते पर यह सरकार तेज गति से आगे बढ़ रही है। विशेष तौर पर देश के इस पूर्वी हिस्‍से पर हमारा सबसे अधिक फोकस है। थोड़ी देर पहले आजमगढ़ में हुआ देश के सबसे लम्‍बे एक्‍सप्रेस-वे का शिलान्‍यास भी इसी विजन का हिस्‍सा है।

साथियों, काशी नगरी हमेशा से मोक्षदायिनी रही है और जीवन की तलाश में यहां आने वालों की भी कोई कमी नहीं है। लेकिन अब जीवन में आने वाले संकटों को मेडिकल साइंस के माध्‍यम से कम करने का केंद्र भी बनती जा रही है। आपके सहयोग से बनारस पूर्वी भारत के एक Health Hub के रूप में उभरने लगा है। शिक्षा के क्षेत्र में जाना-मना हमारा BHU आज चिकित्‍सा के क्षेत्र में भी पहचाना जाने लगा है। आपको जान करके खुशी होगी कि अभी हाल ही मैं BHU ने एम्‍स के साथ एक world class health institute बनाने के लिए समझौता किया है। इस प्रकार यह शुरू हो गया है और जल्‍द ही इसके परिणाम आपको दिखने लगेंगे। ऐसे में बनारस में रहने वालों के साथ ही यहां आने-जाने वालों के लिए भी connectivity बहुत अहम है। इसलिए रोड़ हो, या रेल अनेक नई सुविधाएं आज काशी को मिल रही है। इसी दिशा में यहां केंट रेलवे स्‍टेशन को नया रंग-रूप  देने का काम चल रहा है। वाराणसी को इलाहबाद और छपरा से जोड़ने वाले ट्रेक की ड‍बलिंग का काम तेज गति से चल रहा है। वाराणसी से लेकर बलिया तक विद्युतीकरण का काम भी पूरा हो चुका है और आज से इस section पर मेमो ट्रेन भी चल पड़ी है।  अभी मैंने हरी झंडी दिखा करके उस ट्रेन को विदा किया है। अब सुबह इस ट्रेन से बलिया और गाजीपुर के लोग यहां आ पाएंगे और फिर अपना काम करके शाम को वापस भी इसी ट्रेन से लौट पाएंगे। अब लम्‍बी दूरी की ट्रेनों की भीड़भाड़ से यहां के लोगों को राहत मिलने वाली है।

साथियों यहां काशी में भक्‍तों को, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास भी जारी है। देश और दुनिया से बाबा भोले के जो भक्‍त हैं यहां काशी आते हैं, उनको आने-जाने में असुविधा न हो इसकी व्‍यवस्‍था की जा रही हे। पंचकोशी मार्ग के चौड़ीकरण का काम भी आज से आरंभ हो चुका है। इसके साथ-साथ आस्‍था और सांस्‍कृतिक महत्‍व के जितने भी स्‍थान काशी में हैं उनको जोड़ने वाली दो दर्जन सड़कों को या तो सुधारा गया है या फिर नये सिरे से निर्माण किया गया है। इन सड़कों का भी थोड़ी देर पहले लोकार्पण किया गया है।

भाईयों और बहनों काशी पर्यटन के अंतर्राष्‍ट्रीय मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रहा है। आज यहां International Conversion Centre रूद्राक्ष का शिलान्‍यास किया गया है। दो साल पहले जापान के प्रधानमंत्री और मेरे परम मित्र श्रीमान शिंजो आबे जी जब मेरे साथ काशी आए थे, तब उन्‍होंने यह उपहार भारत को, काशीवासियों को दिया था। अगले डेढ़-दो साल में यह प्रोजेक्‍ट पूरा किया जाना है। आप सभी काशीवासियों की तरफ से, देशवासियों की तरफ से मैं इस उपहार के लिए जापान के प्रधानमंत्री श्रीमान शिंजो आबे जी का हृदय पूर्वक आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

साथियों मुझे प्रसन्‍ता है कि काशी ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी में पर्यटन को योगी जी और उनकी टीम बढ़ावा दे रही है। इसके लिए स्‍वच्‍छता और धरोहरों के सुंदरीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। विशेषतौर पर स्‍वच्‍छता ,स्‍वच्‍छ भारत अभियान को जिस तरह आप सभी ने यूपी की जनता ने आगे बढ़ाया है, यह प्रशसनीय है। स्‍वच्‍छ, सुंदर और स्‍वस्‍थ भारत के लिए आपका यह योगदान प्रशसनीय है। साथियों काशी की महानता, उसकी ऐतिहासिकता को बनाए रखने के लिए आप जो कर रहे हैं वो अतुलनीय है।

 लेकिन हमें चार वर्ष से पहले का वो समय भी नहीं भूलना चाहिए, जब वाराणसी की व्‍यवस्‍थाएं संकट में थी। हर तरफ कचरा, गंदगी, खस्‍ता हॉल-पार्क, खराब सड़के, ओवरफ्लो होता सीवर, खम्‍भों से लटकतें बिजली के तार, जाम से परेशान पूरा शहर, बाबदपुरा एयरपोर्ट से शहर को जोड़ने वाली उस सड़क को आप भूल नहीं गए होंगे, जिस पर आप निर्भर रहते थे। न जाने कितने लोगों को परेशानी हुई होगी, कितनों की फ्लाइट छुट्टी होगी। हालत यह थी कि परेशानी से बचने के लिए लोग एयरपोर्ट की बजाय केंट रेलवे स्‍टेशन का रूख करते थे।  गंगाजी का, घाटों का क्‍या हाल था, वो भी किसी से छिपा नहीं। किस प्रकार पूरे शहर और गांवों की गंदगी, कूड़ा-कचरा सब गंगा जी में प्रभावित हो रहा था और पहले की सरकार की सारी व्‍यवस्‍थाएं इससे बेपरवाह थी। गंगा जी के नाम पर कितना पैसा पानी में बह गया इसका कोई हिसाब नहीं। एक तरफ गंगा जी के प्रवाह पर संकट था, गंगा जल की शुद्धता पर संकट था, वहीं दूसरी तरफ लोगों की तिजौरियां लबालब भरी रहती थी। ऐसी स्थिति में गंगा जी को स्‍वच्‍छ करने का बीड़ा उठाया गया। आज मां गंगा को निर्मल करने का अभियान तेज गति से आगे बढ़ रहा है। सिर्फ बनारस ही नहीं, बल्कि गंगोत्री से ले करके गंगा सागर तक एक साथ प्रयास चल रहे हैं। सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि शहरों की गंदगी गंगा में न गिरे, इसका भी प्रबंध किया जा रहा है। इसके लिए अब तक लगभग 21 हजार करोड़ की दो सौ से अधिक परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी जा चुकी है। थोड़ी देर पहले सीवेज से जुड़े कई प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास और लोकार्पण यहां भी किया गया है। साथियों सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि जो सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाए जाए वो ठीक से चले, सुचारू रूप से चले, क्‍योंकि पहले की सरकारों की यह कार्य संस्‍कृति रही है कि ट्रीटमेंट प्‍लांट तो बनाए जाते थे, लेकिन न तो वो अपनी क्षमता से काम करते हैं और न ही लम्‍बे समय तक चल पाते थे । अब जो भी प्‍लांट बनाए जा रहे हैं उसके साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वो 15 साल तक कम से कम तक चलने चाहिए। यानि हमारा जोर सिर्फ सीवजे ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाने पर ही नहीं, बल्कि उन्‍हें चलाने पर भी है। इसमें समय और श्रम अधिक लगता है लेकिन एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था खड़ी की जा रही है। आने वाले समय में इसका परिणाम बनारस के लोगों को भी दिखने लगेगा।

भाईयों और बहनों, यह जो भी काम आज हो रहा है, वो बनारस को 'स्‍मार्ट सिटी' में बदलने वाला है। यहां integrated कमांड और control centre पर तेजी से काम चल रहा है। पूरे देश के प्रशासन का, पब्लिक सुविधाओं का नियंत्रण यही से होने वाला है। ऐसे लगभग 10 प्रोजेक्‍ट पर आज काम चल रहा है। साथियों 'स्‍मार्ट सिटी' सिर्फ शहरों के infrastructre को सुधारने का अभियान नहीं है, बल्कि यह देश को एक नयी पहचान देने का मिशन है। यह यंग इंडिया, न्‍यू इंडिया का प्रतीक है। इसी तरह मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियान सामान्‍य जन के जीवन को सुगम और सरल बनाने का काम कर रहे हैं। इसमें हमारे उत्‍तर प्रदेश भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मैं योगी जी और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं कि आपने जो उद्योग नीति बनाई है, निवेश के लिए जो माहौल बनाया है उसके परिणाम आज सामने आने लगे हैं। कुछ दिन पहले नोएडा में Samsung की फोन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी फैक्‍ट्री का लोकार्पण करने का अवसर मुझे मिला। इससे रोजगार के हजारों अवसर बनेंगे। आपको यह जानकर गर्व होगा कि बीते चार वर्षों में मोबाइल फैक्ट्रियां, मोबाइल फोन बनाने वाली फैक्ट्रियों की संख्‍या दो से बढ़ करके 120 हो गई है, जिसमें से 50 से अधिक फैक्ट्रियां यह हमारे उत्‍तर प्रदेश में हैं। यह फैक्‍ट्रियां चार लाख से अधिक नौजवनों को आज रोजगार दे रही है।

साथियों, 'मेक इन इंडिया' के साथ-साथ डिजिटल इंडिया भी रोजगार का प्रतापी माध्‍यम सिद्ध हो रहा है। इसी कड़ी में आज यहां पर Tata Consultancy Services यनि TCS के BPO की शुरूआत हुई है। यह केंद्र बनारस के युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर ले कर आएगा। भाईयों और बहनों, रोजगार की जब बात आती है, तो यहां  भी माताएं-बहनों पर सरकार विशेष ध्‍यान दे रही हैं। स्‍वरोजगार के लिए मुद्रा योजना के माध्‍यम से बिना बिना गारंटी का ऋण या फिर एलपीजी का मुफ्त सिलेंडर हो। गरीब माताओं और बहनों के जीवन में बदलाव आ रहा है। साफ-सुथरा ईंधन सभी तक पहुंचे इसके लिए यहां काशी में बहुत बड़ा प्रोजेक्‍ट चल रहा है। आज city gas distributin system का लोकार्पण इसी का हिस्‍सा है। इसके लिए इलाहबाद से बनारस तक पाइप लाइन बिछाई गई है। मुझे खुशी है कि अब तक बनारस में आठ हजार घरों में पाइप वाली गैस का कनेक्‍शन पहुंच चुका है और भविष्‍य में इसे 40 हजार से ज्‍यादा घरों तक पहुंचाने के लिए काम चल रहा है। साथियों यह सिर्फ ईंधन से जुड़ी हुई एक व्‍यवस्‍था नहीं है, बल्कि शहर के पूरे इको सिस्‍टम को बदलने का एक अभियान है। पीएनजी हो या सीएनजी यह Infrastructure  शहर के प्रदूशणस में भी कमी लाने वाला है। आप सोचिए जब बनारस की बसें, कारें और ऑटो सीएनजी से चलेंगे तो इससे जुड़े कितने नये रोजगारों का सृजन होगा।

साथियों, जब भी मैं जापान के प्रधानमंत्री से मिलता हूं या कोई भी हिन्‍दुस्‍तानी जब जापान के प्रधानमंत्री से मिलता है और जहां भी उनको मौका मिलता है, मैं लगातार देख रहा हूं कि जापान के प्रधानमंत्री मेरे मित्र जो भी मिलता है उसको काशी के जो अनुभव हुआ, काशी के लोगों ने जो स्‍वागत किया, वो बार-बार दोहराते रहते हैं। काशी का गौरवगान करते हैं। पिछले दिनों फ्रांस के राष्‍ट्रपति मेरे साथ यहां आए थे और अब काशीवासियों ने पलक पावड़े बिछा करके फ्रांस के राष्‍ट्रपति का जो सम्‍मान किया, गौरवगान किया, पूरा फ्रांस आज गौरव के साथ उस बात का जिक्र करता है। फ्रांस के राष्‍ट्रपति इसका जिक्र करते हैं। यह काशी की परंपरा है, यह काशी का अपनापन है। यह काशी ने दुनिया में अपनी सुगंध फैलाई है। यह काशी का दुलार, यह स्‍नेह अद्भूत है। मेरे काशी के भाईयों-बहनों, आपको फिर एक बार एक बहुत बड़ा मौका यह काशी के दुलार को, काशी के प्रेम को काशी के अपनेपन को काशी की मेहमान नवाजी को दुनिया को दिखाने का अवसर आने वाला है। आप पूरी तैयारी करेंगे? शानदार स्‍वागत करेंगे? काशी का नाम रोशन करेंगे? एक-एक मेहमान का गौरवगान करेंगे? पक्‍का करेंगे? पक्‍का, promise. देखिए जनवरी महीने में 21 जनवरी से 23 जनवरी काशी में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हुआ है। दुनियाभर से भारतीय लोग इस प्रवासी भारतीय दिवस में आने वाले हैं। दुनियाभर में जहां भारतीय लोग उद्योगपति है, राजनीति में हैं, सरकारें चलाते हैं, ये सब लोग पूरी दुनिया से एक साथ 21 से 23 जनवरी को काशी में आने वाले हैं। कुछ लोग तो ऐसे आएंगे, जिनके पूर्वज तीन या चार या पांच पीढ़ी पहले विदेश चले गए, उसके बाद कभी लौट करके नहीं आए, ऐसे लोगों की संतान भी पहली बार इस मिट्टी के दर्शन करने के लिए आने वाले हैं। मुझे बताइये कि इतनी बड़ी घटना काशी के लिए गौरवपूर्ण है कि नहीं है? इन लोगों के स्‍वागत की हमें तैयारी करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए? हरेक मोहल्‍ले में इन दुनिया में आने वाले लोगों की मेहमान नवाजी का माहौल बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए? पूरी दुनिया में काशी की वाह-वाही होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। अभी से तैयारी में लग जाइये और 21 से 23 यहां रहेंगे और यह दुनिया से यहां आए सारे मेहमान 24 तारीख को प्रयागराज कुंभ के दर्शन के लिए जाएंगे और 26 जनवरी को दिल्‍ली पहुंचेंगे।  मेरा, मेरे काशीवासियों से मेहमान नवाजी के लिए बड़ा आग्रह है। और मैं भी एक काशीवासी के रूप में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उस 21 तारीख को आपके बीच में रहूंगा। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूरे विश्‍व से भारत के लोग आ रहे हैं। बहुत बड़ी महत्‍वूर्ण घटना है और इसलिए आप सबको मैं उनके स्‍वागत की तैयारी करने के लिए निमंत्रण देता हूं।

मेरे काशी के भाईयों-बहनों आज मुझे आपके बीच आने का मौका मिला। आप सभी को अनेक-अनेक योजनाएं आज समर्पित करने का, शिलान्‍यास करने का मौका यहां मिला। आपके सांसद के रूप में यह मेरा दायित्‍व बनता हूं कि मैं आपको जितना काम आ सकूं, जितनी मेहनत आपके लिए कर सकूं, मैं करता रहा हूं, करता रहूंगा। मैं फिर एक बार मेरे काशीवासियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। मेरे साथ जोर से बोलिये - हर हर महादेव। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।