पिछले 4 वर्षों से 21वीं शताब्दी की आवश्यकताओं के अनुसार काशी को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं: प्रधानमंत्री मोदी
नया बनारस जो आध्यात्मिकता और आधुनिकता का मेल है, एक नए भारत के लिए विकसित किया जा रहा है: पीएम मोदी
काशी पर्यटन के अंतर्राष्‍ट्रीय मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रहा है: प्रधानमंत्री
इन्टिग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटर पर तेजी से काम चल रहा है, जिससे वाराणसी स्मार्ट सिटी बनेगी: प्रधानमंत्री मोदी
स्मार्ट सिटी पहल सिर्फ शहरों में आधारभूत संरचना में सुधार करने का एक मिशन नहीं है बल्कि भारत को एक नई पहचान देने का भी एक मिशन है: पीएम मोदी

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमान राम नायक जी, यहां के ओजस्वी, तेजस्वी, परिश्रमी, यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, केंद्र में मंत्री परिषद् के मेरे साथी श्रीमान मनोज सिन्हा जी, संसद में मेरे साथी और मेरे बहुत पुराने मित्र और प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्रीमान महेंद्र नाथ पांडेय जी, जापान दूतावास के चार्ज द अफेयर श्री हिरेका असारी  जी और बनारस के मेरे भाइयो और बहनो। 

मैं सबसे पहले हमारे देश का गौरव बढ़ाने वाली एक बेटी का गौरव गान करना चाहता हूं। आप लोगों ने देखा होगा असम के नवगांव जिले के डीनगाम की एक छोटी सी बेटी हिमा दास उसने कमाल कर दिया। और जिन्‍होंने टीवी पर देखा होगा.. मैंने आज विशेष रूप से एक ट्वीट किया था। उस स्‍टेडियम में जो commentator थे, उनके लिए भी अजूबा  था कि विश्‍व चैम्पियनों को पछाड़ करके हिन्‍दुस्‍तान की एक बेटी हर सेकण्‍ड आगे से आगे बढ़ रही है और वो commentator जिस excitement से बोल रहे थे, किसी भी हिन्‍दुस्‍तानी का सीना चौड़ा हो जाए। और बाद में आपने देखा होगा कि हिमा दास एक बहुत बड़ा काम कर दिया था, भारत का नाम रोशन कर दिया था और यह तय हुआ कि वो जीत गई है तो अपना हाथ उठा करके वो तीरंगे झंडे की प्रतीक्षा करते हुए दौड़ रही थी और जैसे ही तिरंगा झंडा आए उसके लिए वो बेसबरी से इंतजार कर रही थी। और दूसरा वो मन में जीत ले करके बैठी थी। विजय के साथ जैसे ही उसने तिरंगा झंडा लहराया साथ-साथ अपना असमिया गमछा भी गले में डालना नहीं भूली। और जब उसको मेडल मिल रहा था, जब वो खड़ी थी, हिन्‍दुस्‍तान का तिरंगा झंडा लहरा रहा था और जन-मन-गण शुरू हुआ। आपने देखा होगा 18 साल की हिमा दास की आंखों में से गंगा-जमना बह रही थी। वो मां भारती को समर्पित थी। यह दृश्‍य अपने आप में सवा सौ करोड़ हिन्‍दुस्‍तानियों को एक नई प्रेरणा और ऊर्जा देता है। छोटे से गांव की चावल की खेती करने वाले किसान परिवार की बेटी 18 महीने पहले जिले में खेलती थी, कभी राज्‍य में भी खेला नहीं था, वो आज 18 महीने के भीतर-भीतर दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान का नाम रोशन करके आ गई। मैं हिमा दास को अनेक-अनेक बधाईयां देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और आपसे भी कहता हूं तालियां बजा करके हिमा दास का गौरवगान कीजिए। गौरवगान कीजिए हमारी इस बेटी का, असम की इस बेटी ने पूरे देश के नाम को रोशन किया है। बहुत-बहुत बधाई।

भाईयों-बहनों, बाबा भोलेनाथ का प्रिय सावन मास आरंभ होने को है। कुछ ही दिनों में काशी में देश और दुनियाभर से शिव भक्‍तों का मेला लगने वाला है। इस उत्‍सव की तैयारियां जोर-शोर से हो रही है। भाईयों-बहनों आज जब हम उत्‍सव की तैयारी में जुटे हैं तब सबसे पहले मैं उन परिवारों की पीड़ा भी सांझा करना चाहता हूं, जिन्‍होंने बीते दिनों हुए हादसे में अपनों को खोया है। बनारस में जो हादसा हुआ, अमूल्‍य जीवन की जो क्षति हुई वह बहुत ही दुखद है। सभी प्रभावित परिवारों के प्रति मेरी पूरी संवेदना है। दूसरों की पीड़ा को सांझा करना, सहयोग और सौहार्द की भावना ही तो काशी की विशेष पहचान है। भोले बाबा के जैसा भोलापन हर किसी के दुख-दर्द को अपने में समाहित करने वाला मां गंगा जैसा स्‍वभाव ही बनारस की पहचान है। देश और दुनिया में बनारसी कहीं भी रहे, वो इन संस्कारो को कभी भूलता नहीं है| साथियों  सदियों से बनारस यूँ ही बना हुआ है, परम्पराओं  में रचा बसा हुआ है| इसकी पौराणिक पहचान को नै ऊंचाइयां देने, काशी को इक्कीसवी सदी की आवश्यक्ता के हिसाब से विकसित करने का प्रयास बीते  चार वर्षो से निरंतर जारी है|  न्‍यू इंडिया के लिए एक नये बनारस का निर्माण हो रहा है, जिसकी आत्‍मा तो पुरातन ही होगी, लेकिन काया नवीनतम बनेगी। जहां के कण-कण में संस्‍कृति और संस्‍कार होंगे, लेकिन व्‍यवस्‍थाएं स्‍मार्ट सिस्‍टम से भरी होगी। बदलते हुए बनारस की यह तस्‍वीर अब चौतरफा दिखने लगी है।

आज मीडिया में, सोशल मीडिया में काशी की सड़के, चौराहों, चौपालों, गलियां, घाटों और तालाबों की तस्‍वीर जो भी देखता है, उसका मन प्रफुलित हो जाता है। सिर के ऊपर लटकते बिजली के तार अब गायब हो गए हैं। सड़के रोशनी से नहा रही है। रंग-बिरंगी रोशनी के बीच फव्‍वारों का दृश्‍य मन छू लेने वाला होता है। साथियों बीते चार वर्षों के दौरान बनारस में दसियों हजार करोड़ का निवेश हो चुका है और यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा। 2014 के बाद के दिनों में हमारे सामने कई चुनौतियां थी। पहले की सरकार से काशी के विकास के लिए बहुत सहयोग भी नहीं था, सहयोग छोडि़ये रूकावटें थी, लेकिन जब से आपने भारी बहुमत से लखनऊ में भाजपा की सरकार को समर्थन दिया, तब से पूरे उत्‍तर प्रदेश में काशी के विकास की गति भी तेज हो गई है। इसी सिलसिले को जारी रखते हुए अभी-अभी मैंने करीब-करीब एक हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया है। केंद्र और राज्‍य के ये तीस से अधिक  प्रोजेक्‍ट यहां की सड़कों, ट्रांसपोर्ट, पानी की सप्‍लाई, सीवेज, रसोई गैस, स्‍वच्‍छता और इस शहर का सुंदरीकरण इससे यह जुड़े हैं। इसके अलावा Income Tax tribunal की Circuit Bench और केंद्रीय कर्मचारियों के लिए CGHS wellness centre की सुविधा से भी यहां के लोगों को बड़ी सहूलियत मिलने जा रही है।

भाईयों और बहनों, बनारस में जो भी बदलाव आ रहा है, उसका लाभ आस-पास के गांवों को मिल रहा है। इन गांवों में पीने के पानी से जुड़ी अनेक योजनाओं का भी आज यहां लोकार्पण किया गया। यहां जो किसान भाई-बहन जुटे हैं, मैं आपको विशेष बधाई देना चाहता हूं। इस सभास्‍थल के पास ही perishable cargo केंद्र है, जो अब बन करके तैयार है। यह मेरा सौभाग्‍य था कि मुझे उसका शिलान्‍यास करने का मौका मिला था और आज लोकार्पणस करने का भी मौका मिल गया। साथियों कार्गों सेंटर यहां के किसानों के लिए बड़ा वरदान साबित होने वाला है। आलू, मटर, टमाटर जैसी सब्जियां जो बहुत कम समय में खराब हो जाती थी, उनके भंडारण की उचित व्‍यवस्‍था यहां तैयार की गई है। अब आपको फल-सब्जियों के सड़ने-गलने से नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। रेलवे स्‍टेशन भी बहुत दूर नहीं है। इससे अब सब्जियों और फलों को दूसरे शहरों में भेजने में भी आपको और आसान होगी।

भाईयों-बहनों, Transportation से Transformation यानि परिवहन से परिवर्तन यह रास्‍ते पर यह सरकार तेज गति से आगे बढ़ रही है। विशेष तौर पर देश के इस पूर्वी हिस्‍से पर हमारा सबसे अधिक फोकस है। थोड़ी देर पहले आजमगढ़ में हुआ देश के सबसे लम्‍बे एक्‍सप्रेस-वे का शिलान्‍यास भी इसी विजन का हिस्‍सा है।

साथियों, काशी नगरी हमेशा से मोक्षदायिनी रही है और जीवन की तलाश में यहां आने वालों की भी कोई कमी नहीं है। लेकिन अब जीवन में आने वाले संकटों को मेडिकल साइंस के माध्‍यम से कम करने का केंद्र भी बनती जा रही है। आपके सहयोग से बनारस पूर्वी भारत के एक Health Hub के रूप में उभरने लगा है। शिक्षा के क्षेत्र में जाना-मना हमारा BHU आज चिकित्‍सा के क्षेत्र में भी पहचाना जाने लगा है। आपको जान करके खुशी होगी कि अभी हाल ही मैं BHU ने एम्‍स के साथ एक world class health institute बनाने के लिए समझौता किया है। इस प्रकार यह शुरू हो गया है और जल्‍द ही इसके परिणाम आपको दिखने लगेंगे। ऐसे में बनारस में रहने वालों के साथ ही यहां आने-जाने वालों के लिए भी connectivity बहुत अहम है। इसलिए रोड़ हो, या रेल अनेक नई सुविधाएं आज काशी को मिल रही है। इसी दिशा में यहां केंट रेलवे स्‍टेशन को नया रंग-रूप  देने का काम चल रहा है। वाराणसी को इलाहबाद और छपरा से जोड़ने वाले ट्रेक की ड‍बलिंग का काम तेज गति से चल रहा है। वाराणसी से लेकर बलिया तक विद्युतीकरण का काम भी पूरा हो चुका है और आज से इस section पर मेमो ट्रेन भी चल पड़ी है।  अभी मैंने हरी झंडी दिखा करके उस ट्रेन को विदा किया है। अब सुबह इस ट्रेन से बलिया और गाजीपुर के लोग यहां आ पाएंगे और फिर अपना काम करके शाम को वापस भी इसी ट्रेन से लौट पाएंगे। अब लम्‍बी दूरी की ट्रेनों की भीड़भाड़ से यहां के लोगों को राहत मिलने वाली है।

साथियों यहां काशी में भक्‍तों को, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास भी जारी है। देश और दुनिया से बाबा भोले के जो भक्‍त हैं यहां काशी आते हैं, उनको आने-जाने में असुविधा न हो इसकी व्‍यवस्‍था की जा रही हे। पंचकोशी मार्ग के चौड़ीकरण का काम भी आज से आरंभ हो चुका है। इसके साथ-साथ आस्‍था और सांस्‍कृतिक महत्‍व के जितने भी स्‍थान काशी में हैं उनको जोड़ने वाली दो दर्जन सड़कों को या तो सुधारा गया है या फिर नये सिरे से निर्माण किया गया है। इन सड़कों का भी थोड़ी देर पहले लोकार्पण किया गया है।

भाईयों और बहनों काशी पर्यटन के अंतर्राष्‍ट्रीय मानचित्र पर प्रमुखता से उभर रहा है। आज यहां International Conversion Centre रूद्राक्ष का शिलान्‍यास किया गया है। दो साल पहले जापान के प्रधानमंत्री और मेरे परम मित्र श्रीमान शिंजो आबे जी जब मेरे साथ काशी आए थे, तब उन्‍होंने यह उपहार भारत को, काशीवासियों को दिया था। अगले डेढ़-दो साल में यह प्रोजेक्‍ट पूरा किया जाना है। आप सभी काशीवासियों की तरफ से, देशवासियों की तरफ से मैं इस उपहार के लिए जापान के प्रधानमंत्री श्रीमान शिंजो आबे जी का हृदय पूर्वक आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

साथियों मुझे प्रसन्‍ता है कि काशी ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी में पर्यटन को योगी जी और उनकी टीम बढ़ावा दे रही है। इसके लिए स्‍वच्‍छता और धरोहरों के सुंदरीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। विशेषतौर पर स्‍वच्‍छता ,स्‍वच्‍छ भारत अभियान को जिस तरह आप सभी ने यूपी की जनता ने आगे बढ़ाया है, यह प्रशसनीय है। स्‍वच्‍छ, सुंदर और स्‍वस्‍थ भारत के लिए आपका यह योगदान प्रशसनीय है। साथियों काशी की महानता, उसकी ऐतिहासिकता को बनाए रखने के लिए आप जो कर रहे हैं वो अतुलनीय है।

 लेकिन हमें चार वर्ष से पहले का वो समय भी नहीं भूलना चाहिए, जब वाराणसी की व्‍यवस्‍थाएं संकट में थी। हर तरफ कचरा, गंदगी, खस्‍ता हॉल-पार्क, खराब सड़के, ओवरफ्लो होता सीवर, खम्‍भों से लटकतें बिजली के तार, जाम से परेशान पूरा शहर, बाबदपुरा एयरपोर्ट से शहर को जोड़ने वाली उस सड़क को आप भूल नहीं गए होंगे, जिस पर आप निर्भर रहते थे। न जाने कितने लोगों को परेशानी हुई होगी, कितनों की फ्लाइट छुट्टी होगी। हालत यह थी कि परेशानी से बचने के लिए लोग एयरपोर्ट की बजाय केंट रेलवे स्‍टेशन का रूख करते थे।  गंगाजी का, घाटों का क्‍या हाल था, वो भी किसी से छिपा नहीं। किस प्रकार पूरे शहर और गांवों की गंदगी, कूड़ा-कचरा सब गंगा जी में प्रभावित हो रहा था और पहले की सरकार की सारी व्‍यवस्‍थाएं इससे बेपरवाह थी। गंगा जी के नाम पर कितना पैसा पानी में बह गया इसका कोई हिसाब नहीं। एक तरफ गंगा जी के प्रवाह पर संकट था, गंगा जल की शुद्धता पर संकट था, वहीं दूसरी तरफ लोगों की तिजौरियां लबालब भरी रहती थी। ऐसी स्थिति में गंगा जी को स्‍वच्‍छ करने का बीड़ा उठाया गया। आज मां गंगा को निर्मल करने का अभियान तेज गति से आगे बढ़ रहा है। सिर्फ बनारस ही नहीं, बल्कि गंगोत्री से ले करके गंगा सागर तक एक साथ प्रयास चल रहे हैं। सिर्फ साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि शहरों की गंदगी गंगा में न गिरे, इसका भी प्रबंध किया जा रहा है। इसके लिए अब तक लगभग 21 हजार करोड़ की दो सौ से अधिक परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी जा चुकी है। थोड़ी देर पहले सीवेज से जुड़े कई प्रोजेक्‍ट का शिलान्‍यास और लोकार्पण यहां भी किया गया है। साथियों सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि जो सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाए जाए वो ठीक से चले, सुचारू रूप से चले, क्‍योंकि पहले की सरकारों की यह कार्य संस्‍कृति रही है कि ट्रीटमेंट प्‍लांट तो बनाए जाते थे, लेकिन न तो वो अपनी क्षमता से काम करते हैं और न ही लम्‍बे समय तक चल पाते थे । अब जो भी प्‍लांट बनाए जा रहे हैं उसके साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वो 15 साल तक कम से कम तक चलने चाहिए। यानि हमारा जोर सिर्फ सीवजे ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाने पर ही नहीं, बल्कि उन्‍हें चलाने पर भी है। इसमें समय और श्रम अधिक लगता है लेकिन एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था खड़ी की जा रही है। आने वाले समय में इसका परिणाम बनारस के लोगों को भी दिखने लगेगा।

भाईयों और बहनों, यह जो भी काम आज हो रहा है, वो बनारस को 'स्‍मार्ट सिटी' में बदलने वाला है। यहां integrated कमांड और control centre पर तेजी से काम चल रहा है। पूरे देश के प्रशासन का, पब्लिक सुविधाओं का नियंत्रण यही से होने वाला है। ऐसे लगभग 10 प्रोजेक्‍ट पर आज काम चल रहा है। साथियों 'स्‍मार्ट सिटी' सिर्फ शहरों के infrastructre को सुधारने का अभियान नहीं है, बल्कि यह देश को एक नयी पहचान देने का मिशन है। यह यंग इंडिया, न्‍यू इंडिया का प्रतीक है। इसी तरह मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया अभियान सामान्‍य जन के जीवन को सुगम और सरल बनाने का काम कर रहे हैं। इसमें हमारे उत्‍तर प्रदेश भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मैं योगी जी और उनकी पूरी टीम को बधाई देता हूं कि आपने जो उद्योग नीति बनाई है, निवेश के लिए जो माहौल बनाया है उसके परिणाम आज सामने आने लगे हैं। कुछ दिन पहले नोएडा में Samsung की फोन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी फैक्‍ट्री का लोकार्पण करने का अवसर मुझे मिला। इससे रोजगार के हजारों अवसर बनेंगे। आपको यह जानकर गर्व होगा कि बीते चार वर्षों में मोबाइल फैक्ट्रियां, मोबाइल फोन बनाने वाली फैक्ट्रियों की संख्‍या दो से बढ़ करके 120 हो गई है, जिसमें से 50 से अधिक फैक्ट्रियां यह हमारे उत्‍तर प्रदेश में हैं। यह फैक्‍ट्रियां चार लाख से अधिक नौजवनों को आज रोजगार दे रही है।

साथियों, 'मेक इन इंडिया' के साथ-साथ डिजिटल इंडिया भी रोजगार का प्रतापी माध्‍यम सिद्ध हो रहा है। इसी कड़ी में आज यहां पर Tata Consultancy Services यनि TCS के BPO की शुरूआत हुई है। यह केंद्र बनारस के युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर ले कर आएगा। भाईयों और बहनों, रोजगार की जब बात आती है, तो यहां  भी माताएं-बहनों पर सरकार विशेष ध्‍यान दे रही हैं। स्‍वरोजगार के लिए मुद्रा योजना के माध्‍यम से बिना बिना गारंटी का ऋण या फिर एलपीजी का मुफ्त सिलेंडर हो। गरीब माताओं और बहनों के जीवन में बदलाव आ रहा है। साफ-सुथरा ईंधन सभी तक पहुंचे इसके लिए यहां काशी में बहुत बड़ा प्रोजेक्‍ट चल रहा है। आज city gas distributin system का लोकार्पण इसी का हिस्‍सा है। इसके लिए इलाहबाद से बनारस तक पाइप लाइन बिछाई गई है। मुझे खुशी है कि अब तक बनारस में आठ हजार घरों में पाइप वाली गैस का कनेक्‍शन पहुंच चुका है और भविष्‍य में इसे 40 हजार से ज्‍यादा घरों तक पहुंचाने के लिए काम चल रहा है। साथियों यह सिर्फ ईंधन से जुड़ी हुई एक व्‍यवस्‍था नहीं है, बल्कि शहर के पूरे इको सिस्‍टम को बदलने का एक अभियान है। पीएनजी हो या सीएनजी यह Infrastructure  शहर के प्रदूशणस में भी कमी लाने वाला है। आप सोचिए जब बनारस की बसें, कारें और ऑटो सीएनजी से चलेंगे तो इससे जुड़े कितने नये रोजगारों का सृजन होगा।

साथियों, जब भी मैं जापान के प्रधानमंत्री से मिलता हूं या कोई भी हिन्‍दुस्‍तानी जब जापान के प्रधानमंत्री से मिलता है और जहां भी उनको मौका मिलता है, मैं लगातार देख रहा हूं कि जापान के प्रधानमंत्री मेरे मित्र जो भी मिलता है उसको काशी के जो अनुभव हुआ, काशी के लोगों ने जो स्‍वागत किया, वो बार-बार दोहराते रहते हैं। काशी का गौरवगान करते हैं। पिछले दिनों फ्रांस के राष्‍ट्रपति मेरे साथ यहां आए थे और अब काशीवासियों ने पलक पावड़े बिछा करके फ्रांस के राष्‍ट्रपति का जो सम्‍मान किया, गौरवगान किया, पूरा फ्रांस आज गौरव के साथ उस बात का जिक्र करता है। फ्रांस के राष्‍ट्रपति इसका जिक्र करते हैं। यह काशी की परंपरा है, यह काशी का अपनापन है। यह काशी ने दुनिया में अपनी सुगंध फैलाई है। यह काशी का दुलार, यह स्‍नेह अद्भूत है। मेरे काशी के भाईयों-बहनों, आपको फिर एक बार एक बहुत बड़ा मौका यह काशी के दुलार को, काशी के प्रेम को काशी के अपनेपन को काशी की मेहमान नवाजी को दुनिया को दिखाने का अवसर आने वाला है। आप पूरी तैयारी करेंगे? शानदार स्‍वागत करेंगे? काशी का नाम रोशन करेंगे? एक-एक मेहमान का गौरवगान करेंगे? पक्‍का करेंगे? पक्‍का, promise. देखिए जनवरी महीने में 21 जनवरी से 23 जनवरी काशी में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हुआ है। दुनियाभर से भारतीय लोग इस प्रवासी भारतीय दिवस में आने वाले हैं। दुनियाभर में जहां भारतीय लोग उद्योगपति है, राजनीति में हैं, सरकारें चलाते हैं, ये सब लोग पूरी दुनिया से एक साथ 21 से 23 जनवरी को काशी में आने वाले हैं। कुछ लोग तो ऐसे आएंगे, जिनके पूर्वज तीन या चार या पांच पीढ़ी पहले विदेश चले गए, उसके बाद कभी लौट करके नहीं आए, ऐसे लोगों की संतान भी पहली बार इस मिट्टी के दर्शन करने के लिए आने वाले हैं। मुझे बताइये कि इतनी बड़ी घटना काशी के लिए गौरवपूर्ण है कि नहीं है? इन लोगों के स्‍वागत की हमें तैयारी करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए? हरेक मोहल्‍ले में इन दुनिया में आने वाले लोगों की मेहमान नवाजी का माहौल बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए? पूरी दुनिया में काशी की वाह-वाही होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए। अभी से तैयारी में लग जाइये और 21 से 23 यहां रहेंगे और यह दुनिया से यहां आए सारे मेहमान 24 तारीख को प्रयागराज कुंभ के दर्शन के लिए जाएंगे और 26 जनवरी को दिल्‍ली पहुंचेंगे।  मेरा, मेरे काशीवासियों से मेहमान नवाजी के लिए बड़ा आग्रह है। और मैं भी एक काशीवासी के रूप में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उस 21 तारीख को आपके बीच में रहूंगा। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूरे विश्‍व से भारत के लोग आ रहे हैं। बहुत बड़ी महत्‍वूर्ण घटना है और इसलिए आप सबको मैं उनके स्‍वागत की तैयारी करने के लिए निमंत्रण देता हूं।

मेरे काशी के भाईयों-बहनों आज मुझे आपके बीच आने का मौका मिला। आप सभी को अनेक-अनेक योजनाएं आज समर्पित करने का, शिलान्‍यास करने का मौका यहां मिला। आपके सांसद के रूप में यह मेरा दायित्‍व बनता हूं कि मैं आपको जितना काम आ सकूं, जितनी मेहनत आपके लिए कर सकूं, मैं करता रहा हूं, करता रहूंगा। मैं फिर एक बार मेरे काशीवासियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। मेरे साथ जोर से बोलिये - हर हर महादेव। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।