यह बजट 2047 तक विकसित भारत की हमारी यात्रा की नींव है: प्रधानमंत्री
इस वर्ष का बजट भारत के सुधार एक्सप्रेस को नई ऊर्जा और गति प्रदान करेगा: प्रधानमंत्री
भारत केवल सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर संतुष्ट नहीं है; भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहता है: प्रधानमंत्री
इस वर्ष का बजट मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों को नई गति देने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत करता है: प्रधानमंत्री
इस वर्ष के बजट में सुक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को जो सहायता मिली है, वह इन उद्यमों को स्थानीय से वैश्विक स्तर तक विकास की नई शक्ति प्रदान करेगा: प्रधानमंत्री
इस वर्ष का बजट युवा शक्ति के लिए है, बजट में किए गए प्रावधान विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणियों, नवप्रवर्तकों और निर्माताओं को सहायता प्रदान करेंगे: प्रधानमंत्री
इस वर्ष का बजट महिलाओं द्वारा निर्मित और संचालित स्वयं सहायता समूहों के एक आधुनिक तंत्र को प्राथमिकता देता है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समृद्धि प्रत्येक घर तक पहुंचे: प्रधानमंत्री
"यह बजट महत्वाकांक्षी है और देश की आकांक्षाओं को पूरा करता है": प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज वीडियो संदेश के माध्यम से केंद्रीय बजट 2026 पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का बजट ऐतिहासिक है और देश की सशक्त महिलाओं की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने महिला वित्त मंत्री के रूप में लगातार नौवीं बार देश का बजट प्रस्‍तुत करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बजट अपार अवसरों का द्वार है, जो वर्तमान सपनों को साकार करता है और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह बजट 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की उच्च उड़ान का आधार है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत जिस सुधार की रफ्तार पर चल रहा है, उसे इस बजट से नई ऊर्जा और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि किए गए अभूतपूर्व सुधारों ने भारत के महत्वाकांक्षी, साहसी और प्रतिभाशाली युवाओं को अपार संभावनाएं प्रदान की हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह बजट विश्वास आधारित शासन और मानव-केंद्रित आर्थिक ढांचे की परिकल्पना को साकार करता है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि यह एक विशेष बजट है, जो राजकोषीय घाटे को कम करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर केंद्रित है, साथ ही साथ यह उच्च पूंजीगत व्यय और उच्च विकास दर सुनिश्चित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह बजट भारत की वैश्विक भूमिका को फिर से मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि भारत के 140 करोड़ नागरिक केवल सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने से संतुष्ट नहीं हैं, और देश जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि यह लाखों भारतीयों का सामूहिक संकल्प है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक विश्वसनीय लोकतांत्रिक साझेदार और विश्वसनीय गुणवत्तापूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भारत द्वारा हाल ही में किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों का उद्देश्य देश के युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है, और इस बजट में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि बजट 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति देने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि बायोफार्मा शक्ति मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, रेयर अर्थ कॉरिडोर का निर्माण, महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को मजबूत करना, वस्त्र क्षेत्र में नई योजनाएं, उच्च तकनीक उपकरण निर्माण को प्रोत्साहन देना और अग्रणी लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को तैयार करना जैसे उभरते क्षेत्रों को दिया गया अभूतपूर्व समर्थन दूरदर्शी है और राष्ट्र की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरा करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लघु एवं कुटीर उद्योगों सहित एमएसएमई को दिया गया समर्थन उन्हें स्थानीय स्तर से वैश्विक स्तर तक विकसित होने में सक्षम बनाएगा।

श्री मोदी ने आगे बताया कि बजट में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनमें एक समर्पित माल ढुलाई गलियारा, देश भर में जलमार्गों का विस्तार, एक हाई-स्पीड रेल गलियारा, दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों के विकास पर विशेष ध्यान देना और शहरों को मजबूत आर्थिक आधार प्रदान करने के लिए नगर निगम बांडों को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने जोर दिया कि ये सभी उपाय विकसित भारत की यात्रा को गति प्रदान करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसके नागरिक होते हैं, और हाल के वर्षों में सरकार ने उनकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अभूतपूर्व निवेश किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कौशल, व्यापकता और स्थिरता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के इस कथन को दोहराते हुए कि यह युवा शक्ति का बजट है, श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि बजट में किए गए प्रावधान विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणियों, नवप्रवर्तकों और निर्माताओं को तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केंद्रों की स्थापना, संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती, ऑडियो-विजुअल सहित ऑरेंज अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, गेमिंग, पर्यटन और खेलो इंडिया मिशन को प्रोत्साहन देने से युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व का डेटा सेंटर हब बनाने के लिए एक बड़ी कर छूट की घोषणा की गई है। युवाओं को विशेष बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इस बजट से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि पर्यटन को विशेष रूप से उत्तर पूर्व में बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं और विभिन्न राज्यों को सशक्त बनाकर संतुलित विकास की नींव को मजबूत किया गया है।

श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि बजट में महिलाओं के नेतृत्व और संचालन वाले स्वयं सहायता समूहों के लिए एक आधुनिक तंत्र के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है, ताकि प्रत्येक परिवार में समृद्धि आए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए नए छात्रावासों के निर्माण का अभियान शिक्षा को अधिक सुलभ बनाएगा।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन को सरकार ने हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि इस बजट में नारियल, काजू, कोको और चंदन के उत्पादन में लगे किसानों के लिए महत्वपूर्ण उपाय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत विस्तार एआई टूल किसानों को उनकी अपनी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराकर उनकी बहुत मदद करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्य पालन और पशुपालन में उद्यमिता को बढ़ावा देने से गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए अपना संबोधन समाप्त किया कि यह बजट महत्वाकांक्षी है और राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करता है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और उनकी टीम को भविष्योन्मुखी, संवेदनशील बजट और गांवों, गरीबों और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित बजट प्रस्तुत करने के लिए एक बार फिर बधाई दी।

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आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है: G7 समिट में पीएम मोदी
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।