नवोन्‍मेषी विचारों, ऊर्जा और उद्देश्य के साथ, युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री
स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को निरंतर प्रेरित करते रहे हैं: प्रधानमंत्री
युवाओं पर स्पष्ट फोकस के साथ हमने कई योजनाएं आरंभ कीं; यहीं से भारत में स्टार्टअप क्रांति ने सही मायने में गति पकड़ी: प्रधानमंत्री
संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर आधारित ऑरेंज इकोनॉमी में भारत उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, हमने जो सुधारों की श्रृंखला शुरू की थी, वह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस में बदल गई है; इन सुधारों के केंद्र में हमारी युवा शक्ति है: प्रधानमंत्री
युवाओं को राष्ट्र को दासता की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया। श्री मोदी ने इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब आज के कई युवा नागरिक पैदा भी नहीं हुए थे और जब उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभाला, उनमें से अधिकांश तब भी बच्चे ही थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतना समय बीत जाने के बावजूद, युवा पीढ़ी पर उनका विश्वास अटल और अटूट बना हुआ है। श्री मोदी ने कहा, “मैंने हमेशा आपकी क्षमता, आपकी प्रतिभा, आपकी ऊर्जा से प्रेरणा ली है। और आज देखिए, आप सभी लोगों के हाथों में विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर है।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि 2047 तक का समय, जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, देश और युवाओं दोनों के लिए निर्णायक दौर है। उन्होंने कहा कि युवा भारतीयों की शक्ति और क्षमताएं भारत की शक्ति को आकार देंगी और उनकी सफलता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के प्रतिभागियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने एक विकसित भारत के सपने को साकार करने में युवा नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि यह आयोजन स्वामी विवेकानंद की जयंती के साथ-साथ हो रहा है। श्री मोदी ने कहा, “स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए हम प्रति वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर ही 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हम सभी के लिए एक महान मार्गदर्शक है।”

श्री मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की तीव्र प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे भारत के विकास एजेंडे को आकार देने में युवाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाने वाला एक शक्तिशाली मंच बताया। श्री मोदी ने कहा, “करोड़ों युवाओं का इस पहल से जुड़ना, 5 मिलियन से अधिक पंजीकरण, विकसित भारत चैलेंज में 3 मिलियन लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी और राष्ट्र के विकास के लिए उनके विचारों का आदान-प्रदान, युवा शक्ति की इतनी व्यापक भागीदारी अभूतपूर्व है।”

प्रधानमंत्री ने इनपुट की गुणवत्‍ता की सराहना करते हुए, विशेष रूप से महिला नेतृत्व विकास और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे प्रमुख विषयों पर प्रस्तुत किए गए विचारशील सुझावों की प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए सुझावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये भारत के अमृत पीठी के एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री ने भारत की युवा पीढ़ी की रचनात्मकता और नवाचार की भावना को भी रेखांकित किया और डायलॉग के सफल संचालन के लिए सभी युवा प्रतिभागियों और मेरा युवा भारत संगठन के सदस्यों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले के दौर को याद करते हुए उसे नीतिगत गतिरोध, अत्यधिक नौकरशाही और युवाओं के लिए सीमित अवसरों का युग बताया। उन्होंने कहा कि उस समय युवाओं को रोजगार, परीक्षा और व्यवसाय शुरू करने के लिए जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था, साथ ही निर्णय लेने में देरी होती थी और नीतियों का क्रियान्वयन भी निम्‍न था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो आज असामान्य लगता है, वह एक दशक पहले सामान्य बात थी। उन्‍होंने रेखांकित किया कि शासन सुधारों ने भारत के युवाओं के अनुभव को किस प्रकार बदल दिया है।

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को बदलाव के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि दशकों से वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप संस्कृति में वृद्धि के बावजूद, 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप पर बहुत कम ध्यान दिया गया था। श्री मोदी ने क‍हा, “2014 तक देश में 500 से भी कम पंजीकृत स्टार्टअप थे। स्टार्टअप संस्कृति के अभाव में, हर सेक्‍टर में सरकारी हस्तक्षेप हावी रहा। हमारे युवा प्रतिभाओं और उनकी क्षमताओं को अपने सपनों को साकार करने का अवसर नहीं मिला।”

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की क्षमताओं पर अपना विश्वास जताते हुए कहा कि इसी विश्वास ने युवा नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक नए विकास दृष्टिकोण को जन्म दिया है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, व्यापार करने में सुगमता और कर एवं अनुपालन को सरल बनाने जैसी प्रमुख सुधारों और पहलों का उल्लेख किया, जिन्होंने पहले सरकार के प्रभुत्व वाले सेक्‍टरों को उद्यमिता के लिए खोलकर भारत की स्टार्टअप क्रांति को गति प्रदान की है।

श्री मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा, “पांच-छह वर्ष पहले तक अंतरिक्ष क्षेत्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से इसरो पर थी। हमने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोल दिया, सहायक ढांचे और संस्थान बनाए।” श्री मोदी ने बताया कि निजी भागीदारी के लिए इसे खोलने से 300 से अधिक स्टार्टअप का उदय हुआ है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कॉस्मॉस की उपलब्धियों को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि कैसे युवा नेतृत्व वाला नवोन्‍मेषक भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि किस प्रकार प्रतिबंधात्मक नियमों में ढील देने से ड्रोन सेक्‍टर में बदलाव आया है, जो पहले जटिल कानूनों और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं से बोझिल था। उन्होंने कहा, “सरलीकृत नियमों ने ड्रोन प्रौद्योगिकी में युवा-केन्द्रित विकास को सक्षम बनाया है, जिससे भारत में निर्मित ड्रोनों और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा और कृषि को लाभ हुआ है।”

उन्होंने रक्षा सेक्‍टर में हुए बड़े सुधारों का भी उल्‍लेख किया, जिस पर कभी सार्वजनिक उद्यमों का दबदबा था। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “आज भारत में 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप काम कर रहे हैं। कोई युवा ड्रोन बना रहा है, कोई ड्रोन रोधी प्रणालियां विकसित कर रहा है, कोई एआई-संचालित कैमरे बना रहा है, जबकि अन्य रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया पहल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पहल रचनाकारों की एक नई पीढ़ी को पोषित कर रही है और संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर केंद्रित भारत की 'ऑरेंज इकोनॉमी' के विकास को गति दे रही है। श्री मोदी ने कहा, “भारत 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानी संस्कृति, सामग्री और रचनात्मकता में अभूतपूर्व वृद्धि देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, संगीत, डिजिटल सामग्री और वीआर-एक्सआर जैसे क्षेत्रों में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।” उन्होंने कहा, “'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' (वेव्‍स) युवा रचनाकारों के लिए एक प्रमुख मंच बन गया है। दूसरे शब्दों में, चाहे कोई भी सेक्‍टर हो, आज भारत में असीमित अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।” उन्होंने युवाओं से अपने विचारों को साहसपूर्वक आगे बढ़ाने का आग्रह किया और उन्हें सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में शुरू किए गए सुधार एजेंडा में युवाओं को केंद्र में रखते हुए तेजी आई है। उन्होंने युवा पेशेवरों और उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बचत बढ़ाने वाले उपायों के रूप में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और 12 लाख रुपये तक की कर राहत को रेखांकित किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विनिर्माण द्वारा संचालित ऊर्जा की बढ़ती मांग पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि नागरिक परमाणु ऊर्जा में सुधार, शांति अधिनियम का उद्देश्य सुनिश्चित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, व्‍यापक स्‍तर पर रोजगार सृजित करना और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव पैदा करना है।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक कार्यबल की कमी को रेखांकित किया और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए भारत के युवाओं को तैयार करने की रणनीति पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारत के युवा विश्व भर में उभर रहे अवसरों के लिए तैयार रहें। इसलिए, कौशल विकास से संबंधित क्षेत्रों में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।” उन्होंने दोहराया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद, उच्च शिक्षा से संबंधित नियमों में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत में अपने परिसर खोल रहे हैं। हाल ही में, हजारों करोड़ रुपये के निवेश से पीएम सेतु कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इसके तहत, हजारों आईटीआई को उन्नत बनाया जाएगा ताकि युवाओं को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की आवश्‍यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भर और विकसित होने के लिए आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक है। मैकाले की औपनिवेशिक काल की शिक्षा नीतियों का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने भारतीयों में अपनी विरासत, उत्पादों और क्षमताओं के प्रति हीन भावना पैदा की। भारत के युवाओं से इस मानसिकता को दूर करने का सामूहिक संकल्प लेते हुए श्री मोदी ने कहा, “दस वर्षों में मैकाले की इन दु:साहसी नीतियों के 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे, इसलिए देश के प्रत्येक युवा को भारत को इस मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने भारत की विरासत को महत्व देते हुए वैश्विक ज्ञान के प्रति दिमाग खुला रखने के महत्व पर बल दिया और वैदिक वाक्य “आनो भद्राः कृतवो यन्तु विश्वतः” को संदर्भित किया, जिसका अर्थ है कि शुभ, लाभकारी और उत्तम विचार सभी दिशाओं से हमारे पास आएं। श्री मोदी ने कहा, “आपको विश्व भर की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से सीखना चाहिए, लेकिन अपनी विरासत और विचारों को कम आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना चाहिए।”

श्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण दिया, जिन्होंने वैश्विक विचारों को अपनाया लेकिन भारत के बारे में फैली भ्रांतियों को चुनौती दी और एक बेहतर राष्ट्र के लिए प्रेरणा दी। उन्होंने युवाओं को ऊर्जा से आगे बढ़ने, स्वस्थ रहने और आनंद को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी क्षमता पर अटूट विश्वास व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “मुझे आप सभी पर, आपकी क्षमताओं और ऊर्जा पर पूरा भरोसा है। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।”

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।