नवोन्‍मेषी विचारों, ऊर्जा और उद्देश्य के साथ, युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री
स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को निरंतर प्रेरित करते रहे हैं: प्रधानमंत्री
युवाओं पर स्पष्ट फोकस के साथ हमने कई योजनाएं आरंभ कीं; यहीं से भारत में स्टार्टअप क्रांति ने सही मायने में गति पकड़ी: प्रधानमंत्री
संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर आधारित ऑरेंज इकोनॉमी में भारत उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, हमने जो सुधारों की श्रृंखला शुरू की थी, वह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस में बदल गई है; इन सुधारों के केंद्र में हमारी युवा शक्ति है: प्रधानमंत्री
युवाओं को राष्ट्र को दासता की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया। श्री मोदी ने इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब आज के कई युवा नागरिक पैदा भी नहीं हुए थे और जब उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभाला, उनमें से अधिकांश तब भी बच्चे ही थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतना समय बीत जाने के बावजूद, युवा पीढ़ी पर उनका विश्वास अटल और अटूट बना हुआ है। श्री मोदी ने कहा, “मैंने हमेशा आपकी क्षमता, आपकी प्रतिभा, आपकी ऊर्जा से प्रेरणा ली है। और आज देखिए, आप सभी लोगों के हाथों में विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर है।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि 2047 तक का समय, जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, देश और युवाओं दोनों के लिए निर्णायक दौर है। उन्होंने कहा कि युवा भारतीयों की शक्ति और क्षमताएं भारत की शक्ति को आकार देंगी और उनकी सफलता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के प्रतिभागियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने एक विकसित भारत के सपने को साकार करने में युवा नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि यह आयोजन स्वामी विवेकानंद की जयंती के साथ-साथ हो रहा है। श्री मोदी ने कहा, “स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए हम प्रति वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर ही 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हम सभी के लिए एक महान मार्गदर्शक है।”

श्री मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की तीव्र प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे भारत के विकास एजेंडे को आकार देने में युवाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम बनाने वाला एक शक्तिशाली मंच बताया। श्री मोदी ने कहा, “करोड़ों युवाओं का इस पहल से जुड़ना, 5 मिलियन से अधिक पंजीकरण, विकसित भारत चैलेंज में 3 मिलियन लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी और राष्ट्र के विकास के लिए उनके विचारों का आदान-प्रदान, युवा शक्ति की इतनी व्यापक भागीदारी अभूतपूर्व है।”

प्रधानमंत्री ने इनपुट की गुणवत्‍ता की सराहना करते हुए, विशेष रूप से महिला नेतृत्व विकास और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे प्रमुख विषयों पर प्रस्तुत किए गए विचारशील सुझावों की प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए सुझावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये भारत के अमृत पीठी के एक विकसित राष्ट्र के निर्माण के दृढ़ संकल्प को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री ने भारत की युवा पीढ़ी की रचनात्मकता और नवाचार की भावना को भी रेखांकित किया और डायलॉग के सफल संचालन के लिए सभी युवा प्रतिभागियों और मेरा युवा भारत संगठन के सदस्यों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले के दौर को याद करते हुए उसे नीतिगत गतिरोध, अत्यधिक नौकरशाही और युवाओं के लिए सीमित अवसरों का युग बताया। उन्होंने कहा कि उस समय युवाओं को रोजगार, परीक्षा और व्यवसाय शुरू करने के लिए जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था, साथ ही निर्णय लेने में देरी होती थी और नीतियों का क्रियान्वयन भी निम्‍न था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो आज असामान्य लगता है, वह एक दशक पहले सामान्य बात थी। उन्‍होंने रेखांकित किया कि शासन सुधारों ने भारत के युवाओं के अनुभव को किस प्रकार बदल दिया है।

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को बदलाव के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि दशकों से वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप संस्कृति में वृद्धि के बावजूद, 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप पर बहुत कम ध्यान दिया गया था। श्री मोदी ने क‍हा, “2014 तक देश में 500 से भी कम पंजीकृत स्टार्टअप थे। स्टार्टअप संस्कृति के अभाव में, हर सेक्‍टर में सरकारी हस्तक्षेप हावी रहा। हमारे युवा प्रतिभाओं और उनकी क्षमताओं को अपने सपनों को साकार करने का अवसर नहीं मिला।”

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की क्षमताओं पर अपना विश्वास जताते हुए कहा कि इसी विश्वास ने युवा नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक नए विकास दृष्टिकोण को जन्म दिया है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, व्यापार करने में सुगमता और कर एवं अनुपालन को सरल बनाने जैसी प्रमुख सुधारों और पहलों का उल्लेख किया, जिन्होंने पहले सरकार के प्रभुत्व वाले सेक्‍टरों को उद्यमिता के लिए खोलकर भारत की स्टार्टअप क्रांति को गति प्रदान की है।

श्री मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा, “पांच-छह वर्ष पहले तक अंतरिक्ष क्षेत्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से इसरो पर थी। हमने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोल दिया, सहायक ढांचे और संस्थान बनाए।” श्री मोदी ने बताया कि निजी भागीदारी के लिए इसे खोलने से 300 से अधिक स्टार्टअप का उदय हुआ है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कॉस्मॉस की उपलब्धियों को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि कैसे युवा नेतृत्व वाला नवोन्‍मेषक भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि किस प्रकार प्रतिबंधात्मक नियमों में ढील देने से ड्रोन सेक्‍टर में बदलाव आया है, जो पहले जटिल कानूनों और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं से बोझिल था। उन्होंने कहा, “सरलीकृत नियमों ने ड्रोन प्रौद्योगिकी में युवा-केन्द्रित विकास को सक्षम बनाया है, जिससे भारत में निर्मित ड्रोनों और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा और कृषि को लाभ हुआ है।”

उन्होंने रक्षा सेक्‍टर में हुए बड़े सुधारों का भी उल्‍लेख किया, जिस पर कभी सार्वजनिक उद्यमों का दबदबा था। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “आज भारत में 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप काम कर रहे हैं। कोई युवा ड्रोन बना रहा है, कोई ड्रोन रोधी प्रणालियां विकसित कर रहा है, कोई एआई-संचालित कैमरे बना रहा है, जबकि अन्य रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया पहल के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पहल रचनाकारों की एक नई पीढ़ी को पोषित कर रही है और संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर केंद्रित भारत की 'ऑरेंज इकोनॉमी' के विकास को गति दे रही है। श्री मोदी ने कहा, “भारत 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानी संस्कृति, सामग्री और रचनात्मकता में अभूतपूर्व वृद्धि देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, संगीत, डिजिटल सामग्री और वीआर-एक्सआर जैसे क्षेत्रों में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है।” उन्होंने कहा, “'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' (वेव्‍स) युवा रचनाकारों के लिए एक प्रमुख मंच बन गया है। दूसरे शब्दों में, चाहे कोई भी सेक्‍टर हो, आज भारत में असीमित अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।” उन्होंने युवाओं से अपने विचारों को साहसपूर्वक आगे बढ़ाने का आग्रह किया और उन्हें सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में शुरू किए गए सुधार एजेंडा में युवाओं को केंद्र में रखते हुए तेजी आई है। उन्होंने युवा पेशेवरों और उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बचत बढ़ाने वाले उपायों के रूप में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और 12 लाख रुपये तक की कर राहत को रेखांकित किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विनिर्माण द्वारा संचालित ऊर्जा की बढ़ती मांग पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि नागरिक परमाणु ऊर्जा में सुधार, शांति अधिनियम का उद्देश्य सुनिश्चित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, व्‍यापक स्‍तर पर रोजगार सृजित करना और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव पैदा करना है।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक कार्यबल की कमी को रेखांकित किया और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए भारत के युवाओं को तैयार करने की रणनीति पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारत के युवा विश्व भर में उभर रहे अवसरों के लिए तैयार रहें। इसलिए, कौशल विकास से संबंधित क्षेत्रों में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।” उन्होंने दोहराया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद, उच्च शिक्षा से संबंधित नियमों में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत में अपने परिसर खोल रहे हैं। हाल ही में, हजारों करोड़ रुपये के निवेश से पीएम सेतु कार्यक्रम आरंभ किया गया है। इसके तहत, हजारों आईटीआई को उन्नत बनाया जाएगा ताकि युवाओं को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की आवश्‍यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भर और विकसित होने के लिए आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक है। मैकाले की औपनिवेशिक काल की शिक्षा नीतियों का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने भारतीयों में अपनी विरासत, उत्पादों और क्षमताओं के प्रति हीन भावना पैदा की। भारत के युवाओं से इस मानसिकता को दूर करने का सामूहिक संकल्प लेते हुए श्री मोदी ने कहा, “दस वर्षों में मैकाले की इन दु:साहसी नीतियों के 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे, इसलिए देश के प्रत्येक युवा को भारत को इस मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने भारत की विरासत को महत्व देते हुए वैश्विक ज्ञान के प्रति दिमाग खुला रखने के महत्व पर बल दिया और वैदिक वाक्य “आनो भद्राः कृतवो यन्तु विश्वतः” को संदर्भित किया, जिसका अर्थ है कि शुभ, लाभकारी और उत्तम विचार सभी दिशाओं से हमारे पास आएं। श्री मोदी ने कहा, “आपको विश्व भर की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों से सीखना चाहिए, लेकिन अपनी विरासत और विचारों को कम आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना चाहिए।”

श्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण दिया, जिन्होंने वैश्विक विचारों को अपनाया लेकिन भारत के बारे में फैली भ्रांतियों को चुनौती दी और एक बेहतर राष्ट्र के लिए प्रेरणा दी। उन्होंने युवाओं को ऊर्जा से आगे बढ़ने, स्वस्थ रहने और आनंद को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी क्षमता पर अटूट विश्वास व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “मुझे आप सभी पर, आपकी क्षमताओं और ऊर्जा पर पूरा भरोसा है। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।”

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Prime Minister condoles the passing of His Majesty King Harald V of Norway
August 28, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi condoled the passing of His Majesty King Harald V of the Kingdom of Norway. Recalling his meeting with His Majesty during his visit to Norway earlier this year, Shri Modi remembered his warmth and profound sense of service to the people and nation of Norway.

The Prime Minister posted on X;

“Deeply saddened by the passing of His Majesty King Harald V of the Kingdom of Norway.

I fondly recall meeting His Majesty during my visit to Norway earlier this year and was deeply touched by his warmth and profound sense of service to his nation.

My heartfelt condolences to the Royal Family and the people of Norway.