नवोन्‍मेषी विचारों, ऊर्जा और उद्देश्य के साथ, युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री
स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को निरंतर प्रेरित करते रहे हैं: प्रधानमंत्री
युवाओं पर स्पष्ट फोकस के साथ हमने कई योजनाएं आरंभ कीं; यहीं से भारत में स्टार्टअप क्रांति ने सही मायने में गति पकड़ी: प्रधानमंत्री
संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर आधारित ऑरेंज इकोनॉमी में भारत उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, हमने जो सुधारों की श्रृंखला शुरू की थी, वह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस में बदल गई है; इन सुधारों के केंद्र में हमारी युवा शक्ति है: प्रधानमंत्री
युवाओं को राष्ट्र को दासता की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए: प्रधानमंत्री

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी सांसदगण, विकसित भारत यंग लीडर्स चैलेंज के विनर्स, अन्य महानुभाव और देशभर से यहां आए मेरे सभी युवा साथी, विदेशों से जो नौजवान आएं हैं, उनको भी यहां एक नया अनुभव मिला होगा। आप लोग थक नहीं गए? दो दिन से यही कर रहे हैं, तो अब क्या सुन- सुनके थक नहीं जाओगे? वैसे तो बैक सीट में मैंने जितना कहना था, कह दिया था। जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब मैं समझता हूं आप में से बहुत सारे युवा ऐसे होंगे, जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। और जब मैंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आप में से ज्यादातर लोगों को बच्चा कहा जाता होगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री के रूप में और फिर अभी प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे हमेशा युवा पीढ़ी पर बहुत ज्यादा विश्वास रहा है। आपका सामर्थ्य, आपका टैलेंट, मैं हमेशा आपकी एनर्जी से, खुद भी एनर्जी पाता रहा हूं। और आज देखिए, आज आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर थामे हुए हैं।

साथियों,

साल 2047 में, जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए भी अहम है, और यही वो समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है, यानी बड़ी golden opportunity है आपके लिए। आपका सामर्थ्य, भारत का सामर्थ्य बनेगा, आपकी सफलता, भारत की सफलता को नई ऊंचाइयां जरूर देगी। मैं आप सभी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं इस विषय पर आगे विस्तार से बात जरूर करूंगा, लेकिन पहले बात आज के विशेष दिन की।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार, आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, purpose of life क्या है, कैसे हम नेशन फर्स्ट की भावना के साथ अपना जीवन जीएं। हमारे हर प्रयास में समाज का,देश का हित हो, इस दिशा में स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हम सभी के लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक है, प्रेरक है। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए, हर साल 12 जनवरी को हम राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, और उन्हीं की प्रेरणा आज 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश के विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है। करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, 50 लाख से अधिक नौजवानों की रजिस्ट्री, 30 लाख से अधिक युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, इतने बड़े स्केल पर युवाशक्ति का एंगेज होना, अपने आप में अभूतपूर्व है। दुनिया के अनेक देशों में आमतौर पर थिंक टैंक, यह शब्द बहुत प्रचलित है। थिंक टैंक की चर्चा भी होती है। और उस थिंक टैंक का प्रभाव भी बहुत होता है। वे एक प्रकार से ओपिनियन मेकर्स का एक समूह बन जाता है। लेकिन शायद, आज जो मैंने प्रेजेंटेशन देखें और जिस प्रकार से challenging होते-होते आप लोगों ने, यहां तक जो लाए हैं। मैं समझता हूं कि ये अपने आप में, ये इवेंट institutionalized तो हुआ है, एक अपने आप में, दुनिया में अनोखी थिंक टैंक के रूप में उसने अपनी जगह बना ली। एक निश्चित विषय को लेकर, निश्चित लक्ष्य को लेकर के लाखों लोगों का मंथन होना, इससे बड़ा थिंकिंग क्या हो सकता है? और मुझे लगता है कि इसके साथ थिंक टैंक शब्द बैठता नहीं है, क्योंकि टैंक शब्द इसलिए आया होगा, छोटा सा होता है, ये तो विशाल है, सागर से भी विशाल है और समय से भी आगे है, और विचारों में समंदर से भी ज्यादा गहरा है। और इसलिए थिंक टैंक शब्द, टैंक वाले शब्द से भी सीमित नहीं किया जा सकता, ऐसा इसका अनुभव है। और जिन विषयों को आज आपने चर्चा में लिया हैं, जैसे खासतौर पर Women Led Development और Youth Participation in Democracy, ऐसे गंभीर विषयों पर जिस प्रकार से विचार आपने रखें हैं, ये प्रशंसनीय है। थोड़ी देर पहले आपने यहां जो प्रजेंटेशन रखे, अलग-अलग थीम्स को लेकर प्रभावी बात रखी है। ये दिखाता है कि हमारी अमृत पीढ़ी, विकसित भारत के निर्माण के लिए कितनी संकल्पित है। इससे ये भी स्पष्ट होता है कि भारत में जेन-ज़ी का मिज़ाज क्या है। भारत का जेन-ज़ी कितनी creativity से भरा हुआ है। मैं आप सभी युवा साथियों को मेरा युवा भारत संगठन से जुड़े सभी नौजवानों को इस आयोजन के लिए और इसकी सफलता के लिए, मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, आप सबका अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने जब अभी आपसे बातचीत शुरू की तो 2014 का जिक्र किया था। तब यहाँ बैठे ज़्यादातर युवा 8–10 साल के ही रहे होंगे। अखबार पढ़ने की उनकी आदत भी नहीं डेवलप हुई होगी। आपने पॉलिसी पैरालिसिस का वो पुराना दौर नहीं देखा, जब उस समय की सरकार की इसलिए आलोचना होती थी कि वो समय पर फैसले नहीं लेती। और जो फैसले होते भी थे, वो ज़मीन पर ठीक से लागू नहीं होते थे। नियम-कायदे ऐसे थे, जिससे हमारा नौजवान कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। देश का युवा परेशान था कि इतनी बंदिशों में वो जाए तो, जाए कहां।

साथियों,

हालत ये थी कि अगर किसी एग्जाम के लिए, जॉब के लिए अप्लाई करना होता था, तो सर्टिफिकेट अटेस्ट कराने के लिए अफसरों और नेताओं के साइन लेने में ही दम निकल जाता था। फिर फीस का डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंकों और पोस्ट-ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। अपना कोई बिजनेस शुरु करना होता था, तो बैंक कुछ हज़ार रुपए के लोन के लिए 100 गारंटी मांगते थे। आज ये बातें बहुत असामान्य लगती हैं, लेकिन एक दशक पहले तक यही सबकुछ चलता था।

साथियों,

आपने यहां स्टार्ट-अप्स को लेकर प्रेजेंटेशन दिया, मैं आपको स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का ही उदाहरण देता हूं, कि इसमें जो परिवर्तन होता है, वो कैसे हुआ है। दुनिया में 50-60 साल पहले स्टार्ट अप कल्चर शुरु हुआ, धीरे-धीरे वो मेगा-कॉर्पोरेशन्स के युग में बदल गया, लेकिन इस पूरी जर्नी के दौरान भारत में स्टार्ट अप्स के बारे में बहुत कम चर्चा होती थी। साल 2014 तक तो देश में 500 से भी कम रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हुआ करते थे। स्टार्ट अप कल्चर के अभाव में, हर क्षेत्र में सरकार का ही दखल हावी रहा। हमारा युवा टैलेंट, उसका सामर्थ्य, उसे अपने सपने पूरे करने का मौका ही नहीं मिला।

साथियों,

मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी। हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई, यहीं से Startup Revolution ने भारत में असली गति पकड़ी। Ease of Doing Business reforms, Startup India, Digital India, Fund of Funds, Tax और compliance simplification, ऐसे अनेक Initiatives लिए गए। ऐसे सेक्टर,जहां पहले सिर्फ सरकार ही सबकुछ थी, सबकुछ उसी की चलती थी, उनको युवा इनोवेशन, युवा एंटरप्राइज़ के लिए ओपन किया गया। इसका जो प्रभाव हुआ, वो भी एक अलग ही सक्सेस स्टोरी बन चुका है।

साथियों,

आप स्पेस सेक्टर को ही लीजिए, 5-6 साल पहले तक स्पेस सेक्टर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ ISRO पर थी। हमने स्पेस को प्राइवेट एंटरप्राइज के लिए ओपन किया, इससे जुड़ी व्यवस्थाएं बनाईं, संस्थाएं तैयार कीं और आज स्पेस सेक्टर में 300 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। देखते ही देखते हमारे स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने अपना रॉकेट 'विक्रम-S' तैयार कर लिया है। एक और स्टार्ट अप अग्निकुल Cosmos ने दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड इंजन बनाकर सबको चौंका दिया, ये सब स्टार्टअप की कमाल है। भारत के स्पेस स्टार्टअप्स अब लगातार कमाल करके दिखा रहे हैं।

साथियों,

मैं अब आपसे एक सवाल करता हूं। आप कल्पना करिए कि अगर ड्रोन उड़ाने पर चौबीसों घंटे अनेकों तरह की पाबंदी लगी रहती, तो क्या होता? ये थी। पहले हमारे यहां ड्रोन उड़ाना या बनाना, दोनों कानूनों के जाल में फंसा हुआ था। लाइसेंस लेना पहाड़ चढ़ने जैसा काम था और इसे केवल सुरक्षा के नजरिए से ही देखा जाता था। हमने नए नियम बनाए, नियम आसान किए, इसके कारण आज हमारे यहां कितने ही युवाओं को ड्रोन से जुड़े सेक्टर में आगे बढ़ने का मौका मिला है। युद्ध-क्षेत्र में मेड इन इंडिया ड्रोन देश के दुश्मनों को धूल चटा रहे हैं, और कृषि क्षेत्र में हमारी नमो ड्रोन दीदियां खेती में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं।

साथियों,

डिफेंस सेक्टर भी पहले सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था। हमारी सरकार ने इसको भी बदला, भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में स्टार्ट अप्स के लिए दरवाजे खोले। इसका बहुत बड़ा फायदा हमारे युवाओं को ही मिला। आज भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। आज एक युवा ड्रोन बना रहा है, तो दूसरा युवा एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रहा है, कोई AI कैमरा बना रहा है, कोई रोबोटिक्स पर काम कर रहा है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया ने भी भारत में क्रिएटर्स की एक नई कम्युनिटी खड़ी कर दी है। भारत आज 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानि कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक,डिजिटल कंटेंट,VR-XR जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है। अभी यहां पर एक प्रेजेंटेशन में हमारे कल्चर को एक्सपोर्ट करने की बात आई। मैं तो आप नौजवानों से आग्रह करता हूं, हमारी जो कहानियां हैं, कहानी- किस्से हैं, रामायण है, महाभारत है, बहुत कुछ है। क्या हम उसमें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते है, इन चीजों को? पूरी दुनिया में गेमिंग एक बहुत बड़ा मार्केट है, बहुत बड़ी इकोनॉमी है। हम अपनी माइथोलॉजी की कथाओं को लेकर के भी गेमिंग की दुनिया में नए-नए खेल ले जा सकते हैं, हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं। हमारा कल्चर भी एक्सपोर्ट हो जाएगा, आधुनिक रूप में हो जाएगा, टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा। और आजकल भी मैं देख रहा हूं, हमारे देश के इस कई स्टार्टअप है, जो गेमिंग की दुनिया में बहुत बढ़िया भारत की बातें कह रहे हैं, और बच्चों को भी खेलते-खेलते भारत को समझना सरल हो जाता है।

साथियों,

'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' यानि WAVES युवा क्रिएटर्स के लिए एक बहुत बड़ा लॉन्च-पैड बन गई है। यानि सेक्टर कोई भी हो, आपके लिए आज भारत में अनंत संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इसलिए मेरा आज यहां इस आयोजन से जुड़े सभी युवाओं से, देश के युवाओं से आह्वान है, आप अपने आइडिया के साथ आगे बढ़िए, रिस्क लेने से पीछे मत हटिए, सरकार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

साथियों,

बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म्स का जो सिलसिला हमने शुरु किया, वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है। और इन रिफॉर्म्स के केंद्र में आप हैं, हमारी युवाशक्ति है। GST में हुए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स से युवाओं और आंत्रप्रन्योर्स के लिए प्रोसेस और आसान हो गई है। अब 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स ज़ीरो हो गया है, इससे नई नौकरी वालों या नया बिजनेस शुरु करने वाले नौजवानों को, उनके पास बहुत ज्यादा बचत होने की संभावना बढ़ गई है ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, आज बिजली सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं है, आज AI, Data सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, मैन्युफेक्चरिंग, ऐसे हर इकोसिस्टम के लिए ज्यादा बिजली की ज़रूरत है। इसलिए आज भारत Assured Energy सुनिश्चित कर रहा है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा रिफॉर्म यानि शांति एक्ट इसी लक्ष्य के साथ किया गया है। इससे न्यूक्लियर सेक्टर में तो हज़ारों नये जॉब्स पैदा होंगे ही, बाकी सेक्टर्स पर भी इसका मल्टीप्लायर effect होने वाला है।

साथियों,

दुनिया के अलग-अलग देशों की अपनी जरूरतें हैं,अपनी डिमांड है। वहां वर्कफोर्स लगातार घट रही है। हमारा प्रयास है कि भारत के युवा दुनियाभर में बन रहे अवसरों के लिए तैयार हों। इसलिए, स्किल डवलपमेंट से जुड़े सेक्टर्स में भी लगातार रिफॉर्म किया जाना चाहिए, और हम कर रहे हैं। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बाद, अब हायर एजुकेशन से जुड़े रेगुलेशन्स को रिफॉर्म किया जा रहा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज़ भी अब भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं। हाल में ही हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश के साथ पीएम सेतु प्रोग्राम शुरु किया गया है। इससे हमारे हज़ारों ITI अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जा सके। बीते समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत ने ट्रेड डील्स की हैं। ये भी भारत के युवाओं के लिए नए-नए अवसर लेकर आ रही हैं।

साथियों,

कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता,विकसित नहीं हो सकता। और इसलिए,अपने सामर्थ्य,अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है, हमारे पास उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए, गौरव का भाव होना चाहिए। और हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए। आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो। इससे भारत में स्वदेशी के प्रति,अपनी परंपराओं के प्रति,अपने प्रोडक्ट्स,अपने सामर्थ्य के प्रति हीन-भावना पनपी। सिर्फ स्वदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, विदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, इसी को श्रेष्ठता की गारंटी मान लिया, अब ये कोई गले उतरने वाली चीज है क्या? हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को खत्म करना है। दस साल बाद, मैकाले के उस दुस्साहस को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और ये पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि 200 साल पहले का जो पाप है ना, वो धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं हमारे पास। और ये युवा पीढ़ी धोकर के रहेगी, मुझे पूरा भरोसा है। और इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है।

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है, और यहां पर स्टार्टअप, यहां जो प्रेजेंटेशन हुआ, उसमें भी उसका उल्लेख किया गया- आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः यानि हमारे लिए सभी दिशाओं से कल्याणकारी और शुभ और श्रेष्ठ विचार आने दें। आपको भी दुनिया की हर बेस्ट प्रेक्टिस से सीखना है, लेकिन अपनी विरासत, अपने आइडियाज़ को कमतर आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हमें यही तो सिखाता है। उन्होंने दुनियाभर में भ्रमण किया, वहां की अच्छी बातों की प्रशंसा की, लेकिन उन्होंने भारत की विरासत को लेकर फैलाए गए भ्रम को तोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए, कठोरता उन्होंने घाव किए उस पर। उन्होंने विचारों को सिर्फ इसलिए नहीं स्वीकार किया, क्योंकि वे पॉपुलर थे, बल्कि उन्होंने कुरीतियों को चैलेंज किया, स्वामी विवेकानंद जी एक बेहतर भारत बनाना चाहते थे। उसी स्पिरिट के साथ, आज आप युवाशक्ति को आगे बढ़ना है। और यहां, अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है, खेलना है, खिलखिलाना है। मुझे आप सभी पर अटूट भरोसा है। आपका सामर्थ्य,आपकी ऊर्जा पर मेरा विश्वास है। इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को एक बार फिर से युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मैं एक और सुझाव देना चाहता हूं। ये जो हमारा डायलॉग का कार्यक्रम चल रहा है, क्या आप कभी योजना करके अपने स्टेट में, स्टेट को विकसित बनाने के लिए डायलॉग, ये कार्यक्रम शुरू करें। और थोड़े समय के बाद हम डिस्ट्रिक्ट को विकसित बनाने के लिए भी डायलॉग शुरू करें, इस दिशा में जाएंगे। लेकिन हर राज्य में एक कार्यक्रम राज्य के नौजवान मिलकर के ताकि एक थिंक टैंक, जिसको कहा गया, ये थिंक वेब बन जाएगा, ये दिशा में हम करें। मेरी पूरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों।

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India - Republic of Korea Joint Statement on Cooperation in the field of Sustainability
April 20, 2026

The Republic of India and the Republic of Korea, hereafter referred to as "the two sides,” agreed to strengthen bilateral cooperation to address global sustainability challenges through practical collaboration in climate change, maritime and Arctic issues.

As environmentally responsible nations, the two sides reaffirmed their commitment to fulfill the 2030 Agenda for Sustainable Development with respect to environment in an integrated manner. To achieve this, the two sides decided to promote cooperation on environmental matters and climate change, including the sustainable management of natural resources including land, air, water, biodiversity, and wastes.

Climate Change Cooperation

Reaffirming their support for the rules-based international order and their commitment to the Paris Agreement, the two sides recognised the critical importance of enhancing climate action to address the unprecedented climate crisis that threatens sustainability of humanity and nature.

In this context, the two sides welcomed the conclusion of an MOC under Article 6.2 of the Paris Agreement, which establishes a cooperative approach for investment-driven mitigation projects, advances the achievement of their respective Nationally Determined Contributions, and further strengthens their strategic partnership in the area of climate action. The two sides will promote cooperation on climate change issues including carbon market, the Article 6.2 cooperative approach, renewable energy and low-carbon technologies.

Environmental Cooperation and Sustainable Development

As environmentally responsible nations, India and the ROK decided to pursue institutional cooperation through an MOU on Cooperation in the Field of Climate and the Environment. The Indian side welcomed the ROK joining as a member of International Solar Alliance (ISA). The ROK side welcomed India joining as a member of the Global Green Growth Institute (GGGI).

Oceans and Marine Sustainability

Recognising the importance of the oceans for economic development, ecological balance, and food security, the two sides agreed to expand cooperation in marine science, sustainable fisheries, coastal ecosystem protection, and marine pollution prevention.

The two sides will enhance collaboration in the blue economy and promote closer exchanges between scientific institutions and maritime agencies in both countries.

Arctic Research and Polar Cooperation

India and the ROK noted their growing engagement in Arctic research and scientific cooperation. The two sides recognised the Arctic as an important region for advancing understanding of climate change and agreed to expand cooperation in the Arctic, including Arctic science and Arctic shipping.

The two sides will promote closer collaboration between their respective Arctic research institutions and explore opportunities for joint research initiatives, scientific exchanges, and participation in international polar research programmes.

Way Forward

The two sides reaffirmed their commitment to advancing practical cooperation that contributes to sustainable development and climate action.

India and the ROK expressed confidence that the expanded cooperation outlined in this joint statement will contribute to the development of innovative and scalable solutions that can support sustainable development in the Indo-Pacific region and beyond.