प्रधानमंत्री ने भोपाल में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम हमें श्रद्धा से भर देता है, उनके महान व्यक्तित्व के बारे में बोलने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं: प्रधानमंत्री
देवी अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षिका थीं: प्रधानमंत्री
माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में हमारी नारी शक्ति के अमूल्य योगदान का प्रतीक हैं: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार महिला-नेतृत्व वाले विकास की परिकल्पना को विकास की धुरी बना रही है: प्रधानमंत्री
नमो ड्रोन दीदी अभियान ग्रामीण महिलाओं को प्रोत्साहित कर रहा है, उनकी आय बढ़ा रहा है: प्रधानमंत्री
आज हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक काम कर रही हैं: प्रधानमंत्री
ऑपरेशन सिंदूर भी हमारी नारी शक्ति की ताकत का प्रतीक बन गया है: प्रधानमंत्री

लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भोपाल, मध्य प्रदेश में लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने भोपाल में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने ‘मां भारती’ को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की नारी शक्ति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस कार्यक्रम को आशीर्वाद देने के लिए बड़ी संख्या में आई बहनों और बेटियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे उनकी उपस्थिति से सम्मानित महसूस कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती है। यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा का अवसर है और राष्ट्र निर्माण के महान प्रयासों में योगदान देने का क्षण है। देवी अहिल्याबाई को उद्धृत करते हुए उन्होंने दोहराया कि सच्चे शासन का मतलब लोगों की सेवा करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम उनकी दूरदर्शिता का प्रतीक है और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाता है। प्रधानमंत्री ने इंदौर मेट्रो के शुभारंभ के साथ-साथ दतिया और सतना के लिए हवाई संपर्क सुविधा के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में बुनियादी ढांचे में वृद्धि होगी, विकास में तेजी आएगी और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को बधाई दी।

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम सुनकर गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उनके असाधारण व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देवी अहिल्याबाई दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं, जो दर्शाती हैं कि चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां क्यों न हों, परिवर्तनकारी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने इस कहा कि ढाई सौ से तीन सौ साल पहले, जब देश उत्पीड़न की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, ऐसे असाधारण कार्य करना - इतने बड़े कि पीढ़ियां आज भी उनको याद करती हैं - कोई आसान काम नहीं था।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कभी भी ईश्वर की सेवा और लोगों की सेवा के बीच अंतर नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे हमेशा अपने साथ शिवलिंग रखती थीं। यह उनकी गहरी भक्ति को दर्शाता है। उस समय की चुनौतियों पर विचार करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे युग में राज्य का नेतृत्व करना कांटों का ताज पहनने के समान था। फिर भी, लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृद्धि को एक नई दिशा प्रदान की, स्वयं को सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा, "लोकमाता अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षक थीं", उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसे समय में जब देश की संस्कृति, मंदिर और तीर्थ स्थलों पर हमला हो रहा था, उन्होंने उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देश भर में कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने उसी शहर वाराणसी में सेवा करने का अवसर मिलने पर अपना सौभाग्य व्यक्त किया, जहां लोकमाता अहिल्याबाई ने अनेक विकास कार्य किए थे।

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि माता अहिल्याबाई ने एक अनुकरणीय शासन मॉडल लागू किया जिसमें गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की। उन्होंने कृषि, वन उपज पर आधारित कुटीर उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए, उन्होंने छोटी नहरें बनवाई और लगभग 250-300 साल पहले कई तालाबों का निर्माण करवाकर जल संरक्षण के प्रयास किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधता को बढ़ावा देने के लिए कपास और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने आदिवासी समुदायों और खानाबदोश समूहों के लिए उनके दूरदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने इन समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त भूमि पर कृषि में सहयोग दिया। श्री मोदी ने कहा कि भारत की आदिवासी महिला राष्ट्रपति- श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के निर्देशन में काम करना उनका सौभाग्य है। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध माहेश्वरी साड़ियों के लिए नए उद्योग स्थापित करके वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में देवी अहिल्याबाई के योगदान को याद किया। इससे देश के बुनकरों को बहुत लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि लगभग 250-300 वर्ष पहले देवी अहिल्याबाई ने गुजरात के जूनागढ़ से कुछ साड़ी बुनने वाले परिवारों को आमंत्रित कर यह काम शुरू किया था।

श्री मोदी ने कहा, "देवी अहिल्याबाई होल्कर को हमेशा लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने, महिलाओं के संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित करने और विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करने जैसे उनके महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर उनके समय में चर्चा करना भी मुश्किल था।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, देवी अहिल्याबाई ने इन प्रगतिशील सुधारों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने मालवा सेना में एक विशेष महिला यूनिट भी बनाई और गांवों में महिला सुरक्षा समूह स्थापित किए जिससे सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित हुआ। श्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए और सभी पर उनके आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा, ‘’माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के अमूल्य योगदान का प्रतीक हैं’’।

देवी अहिल्याबाई होल्कर के एक प्रेरक कथन को याद करते हुए, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि जो कुछ भी प्राप्त हुआ है वह लोगों का ऋण है, जिसे चुकाना होगा, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उनकी सरकार उनके मूल्यों के अनुरूप काम कर रही है और 'नागरिक देवो भव' के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के दृष्टिकोण को राष्ट्र की प्रगति के मूल में रखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार की हर बड़ी पहल माताओं, बहनों और बेटियों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वंचितों के लिए चार करोड़ घर बनाए गए हैं जिनमें से अधिकांश महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है कि उनका नाम संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ा है। यह एक ऐतिहासिक बदलाव को दर्शाता है जहां देश भर में करोड़ों महिलाएं पहली बार घर की मालकिन बनी हैं।

इस बात पर जोर देते हुए कि सरकार हर घर में नल कनेक्शन के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है जिससे महिलाओं को होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा रहा है, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहले करोड़ों महिलाओं को बिजली, एलपीजी गैस और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित थी। सरकार ने ये महत्वपूर्ण सुविधाएं अब प्रदान की हैं जिससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से वंचित परिवारों की माताओं और बहनों के जीवन में काफी सुधार हुआ है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पहले कई महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, अक्सर वित्तीय परेशानी के कारण गर्भावस्था के दौरान अस्पताल जाने से बचती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुष्मान भारत योजना ने इस समस्या को समाप्त कर दिया है। आयुष्मान भारत योजना से महिलाओं को अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ वित्तीय स्वतंत्रता भी महिला सशक्तीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब एक महिला के पास अपनी आय होती है तो उसका आत्म-सम्मान बढ़ता है और घर के निर्णय लेने में उसकी भागीदारी बढ़ती है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए पिछले 11 वर्षों में सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले 30 करोड़ से अधिक महिलाओं के पास बैंक खाता नहीं था। सरकार ने उनके लिए जन धन खाते खोलने की सुविधा प्रदान की जिनमें अब विभिन्न योजनाओं से धन सीधे हस्तांतरित किया जा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं मुद्रा योजना द्वारा समर्थित काम और स्वरोजगार में तेजी से शामिल हो रही हैं। यह योजना बिना किसी जमानत के ऋण प्रदान करती है। प्रधानमंत्री ने वित्तीय समावेशन पर इस पहल के प्रभाव को बताते हुए कहा, "मुद्रा के 75 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।"

इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में 10 करोड़ महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं। ये समूह सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता से आय के नए स्रोत बना रहे हैं, श्री मोदी ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और संतोष व्यक्त किया कि 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएं पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बैंक सखियों की भूमिका का उल्लेख किया जो गांवों में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ रही हैं, और बीमा सखियों की स्थापना के लिए सरकार की पहल पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं और बेटियां अब देश भर में बीमा कवरेज का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक समय था जब महिलाओं को उभरती हुई तकनीकों से दूर रखा जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश उस युग से आगे निकल चुका है, यह सुनिश्चित करते हुए कि महिलाएं तकनीकी प्रगति में सक्रिय रूप से भाग लें और उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बेटियों को आधुनिक तकनीक में नेतृत्व की भूमिका निभाने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि में ड्रोन क्रांति की ओर इशारा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण महिलाएं इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "नमो ड्रोन दीदी पहल ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा रही है और उनकी आय के अवसरों को बढ़ा रही है और उनके लिए एक विशिष्ट पहचान बना रही है।"

इस बात पर जोर देते हुए कि देश भर में बड़ी संख्या में बेटियां वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट के रूप में अपना करियर बना रही हैं, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और गणित की शिक्षा में लड़कियों का नामांकन लगातार बढ़ रहा है। श्री मोदी ने कहा, “आज, हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक काम कर रही हैं”, उन्होंने उल्लेख किया कि चंद्रयान-3 अभियान में 100 से अधिक महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने योगदान दिया। उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं के उल्लेखनीय योगदान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पिछले दशक में उठाए गए प्रगतिशील कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पहली बार भारत को एक पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री और एक महिला वित्त मंत्री मिली हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ा है। वर्तमान में 75 महिलाएं संसद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस भागीदारी को और बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया, उन्होंने रेखांकित किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने टिप्पणी की कि हालांकि इस कानून में वर्षों का विलंब हुआ लेकिन सरकार ने इसे सफलतापूर्वक पारित किया, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण को मजबूत किया। उन्होंने फिर से दोहराया कि उनकी सरकार हर स्तर पर और हर क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बना रही है।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "भारत प्राचीन संस्कृति और परंपराओं वाला देश है जहां सिंदूर स्त्री शक्ति का प्रतीक है।" उन्होंने बताया कि भगवान राम की भक्ति में लीन हनुमान ने भी सिंदूर से श्रृंगार किया था और शक्ति पूजा अनुष्ठानों में इसे चढ़ाया जाता है। श्री मोदी ने कहा, "सिंदूर अब भारत की वीरता का प्रतीक बन गया है।"

पहलगाम में हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने न केवल भारतीयों का खून बहाया बल्कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं पर भी प्रहार किया और समाज को बांटने का प्रयास किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने भारत की नारी शक्ति को चुनौती दी और यह चुनौती आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए घातक साबित हुई। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "ऑपरेशन सिंदूर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे सफल आतंकवाद विरोधी अभियान है", उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जिन स्थानों पर पाकिस्तान की सेना ने कभी कार्रवाई की उम्मीद नहीं की थी, वहां भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद के माध्यम से छद्म युद्ध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत न केवल अपने क्षेत्र के भीतर खतरों को खत्म करेगा बल्कि आतंकवादियों का समर्थन करने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। श्री मोदी ने कहा, "हर भारतीय की अब एक ही भावना है, कि ईंट से जवाब पत्थर से दिया जाएगा। "

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "ऑपरेशन सिंदूर भारत की नारी शक्ति की ताकत और वीरता का प्रमाण है।" उन्होंने इस ऑपरेशन में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि जम्मू से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक, बड़ी संख्या में बीएसएफ की महिला कर्मी अग्रिम मोर्चे पर थी। उन्होंने सीमा पार से होने वाली गोलीबारी का डटकर सामना करने और कमांड और कंट्रोल सेंटरों में उनकी सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ दुश्मन के ठिकानों को खत्म करने में उनकी भूमिका की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया राष्ट्र की सुरक्षा में भारत की बेटियों की क्षमता को देख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने सुरक्षा बलों में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करने के लिए कई उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूलों के दरवाजे लड़कियों के लिए खोले गए हैं यह एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि 2014 में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में केवल 25 प्रतिशत कैडेट महिलाएं थीं जबकि आज उनकी भागीदारी 50 प्रतिशत हो रही है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से महिला कैडेटों के पहले बैच के पास आउट होने को एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महिलाएं अब सेना, नौसेना और वायु सेना में अग्रिम मोर्चों पर सेवा दे रही हैं। उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि महिला अधिकारी लड़ाकू विमानों से लेकर आईएनएस विक्रांत युद्धपोत तक अपने साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन कर रही हैं। यह भारत के रक्षा बलों में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

भारतीय नौसेना की महिलाओं द्वारा हाल ही में प्रदर्शित साहस का उल्लेख करते हुए, नाविका सागर परिक्रमा का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि दो बहादुर महिला अधिकारियों ने लगभग 250 दिनों की समुद्री यात्रा पूरी की, और पूरी दुनिया का चक्कर लगाया। उन्होंने केवल हवा से चलने वाली एक नाव का उपयोग करके लंबे समय तक बिना जमीन के समुद्र में हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने की उल्लेखनीय उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने उन प्रतिकूल परिस्थितियों और तूफानों को स्वीकार किया जिनसे उन्होंने पार पाया। यह उनके प्रतिरोध को दर्शाता है। श्री मोदी ने कहा कि उनकी उपलब्धि भारत की बेटियों की सबसे कठिन चुनौतियों पर भी विजय पाने की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा में उनकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया, चाहे वह नक्सल विरोधी अभियान हो या सीमा पार से खतरों का मुकाबला करना। देवी अहिल्याबाई की धरती से, उन्होंने एक बार फिर भारत की नारी शक्ति की ताकत और दृढ़ संकल्प को नमन किया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अपने शासनकाल में देवी अहिल्याबाई ने न केवल विकास को आगे बढ़ाया बल्कि भारत की विरासत का भी संरक्षण किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक भारत भी उसी रास्ते पर चल रहा है। प्रगति का सांस्कृतिक संरक्षण के साथ संतुलन बना रहा है। उन्होंने आज के कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। यह उल्लेख करते हुए कि मध्य प्रदेश को अपनी पहली मेट्रो सेवा मिली है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, प्रधानमंत्री ने कहा की कि विश्व स्तर पर पहले से ही अपनी सफाई के लिए पहचान बनाने वाला इंदौर अब अपनी मेट्रो से भी पहचाना जाएगा। उन्होंने कहा कि भोपाल में भी मेट्रो निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में रतलाम-नागदा मार्ग को चार लाइनों का करने को मंजूरी दी है जिससे ट्रेनों की आवाजाही बढ़ेगी और भीड़भाड़ कम होगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने इंदौर-मनमाड रेल परियोजना को सरकार की मंजूरी के बारे में बताया। इससे इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में और वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि दतिया और सतना अब देश के हवाई यात्रा नेटवर्क से जुड़ गए हैं। इससे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस विकास से मां पीताम्बरा, मां शारदा देवी और श्रद्धेय चित्रकूट धाम जैसे पवित्र स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

श्री मोदी ने कहा, “भारत इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां राष्ट्र को अपनी सुरक्षा, शक्ति और सांस्कृतिक विरासत पर एक साथ काम करना चाहिए।” उन्होंने बढ़ते प्रयासों के महत्व पर बल दिया और देश के भविष्य को आकार देने में मातृशक्ति - भारत की माताओं, बहनों और बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रानी कमलापति, अवंतीबाई लोधी, कित्तूर रानी चेन्नम्मा, रानी गाइडिन्ल्यू, वेलु नचियार और सावित्रीबाई फुले जैसी महान महिला नेताओं की विरासत के साथ-साथ लोकमाता अहिल्याबाई की प्रेरणा का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को इन सभी पर गर्व है। यह आशा व्यक्त करते हुए कि लोकमाता अहिल्याबाई की 300वीं जन्म जयंती पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, श्री मोदी ने राष्ट्र से आने वाली शताब्दियों के लिए सशक्त भारत की नींव को मजबूत करने का आग्रह करते हुए समापन किया।

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगूभाई छगनभाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में भाग लिया और लोकमाता देवी अहिल्याबाई को समर्पित एक स्मारक डाक टिकट और एक विशेष सिक्का जारी किया। 300 रुपये के सिक्के पर अहिल्याबाई होल्कर का चित्र होगा। उन्होंने आदिवासी, लोक और पारंपरिक कलाओं में योगदान के लिए एक महिला कलाकार को राष्ट्रीय देवी अहिल्याबाई पुरस्कार भी प्रदान किया।

अंतिम छोर तक हवाई सम्पर्क को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने दतिया और सतना हवाई अड्डों का उद्घाटन किया। इससे विंध्य क्षेत्र में उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए नए अवसर खुलेंगे।

शहरों में यात्रा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर यात्री सेवाओं का उद्घाटन किया। इससे यातायात और प्रदूषण में कमी आने के साथ ही यात्रियों को आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने 1,271 अटल ग्राम सुशासन भवनों के निर्माण के लिए 480 करोड़ रुपये से अधिक की पहली किस्त हस्तांतरित की। ये भवन ग्राम पंचायतों को स्थायी बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे जिससे उन्हें प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करने, बैठकें आयोजित करने और रिकॉर्ड को अधिक कुशलता से बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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Prime Minister Condoles the Passing of Shri Maroof Raza Ji
February 26, 2026

Prime Minister Narendra Modi has expressed grief over the passing of Shri Maroof Raza Ji, honoring his legacy in the fields of journalism.

The Prime Minister stated that Shri Maroof Raza Ji made a rich contribution to the world of journalism. He noted that Shri Raza enriched public discourse through his nuanced understanding of defence, national security, and strategic affairs.

Expressing his sorrow, the Prime Minister said he is pained by his passing and extended his condolences to his family and friends.
The Prime Minister shared on X:

“Shri Maroof Raza Ji made a rich contribution to the world of journalism. He enriched public discourse with his nuanced understanding of defence, national security as well as strategic affairs. Pained by his passing. Condolences to his family and friends”