प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति श्री निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के साथ आधिकारिक वार्ता की। राष्ट्रपति भवन पहुंचने पर राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस ने प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया। कल साइप्रस पहुंचने पर राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस ने प्रधानमंत्री का हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और स्थायी मित्रता को दर्शाता है।

दोनों नेताओं ने भारत-साइप्रस संबंधों को रेखांकित करने वाले साझा मूल्यों को लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए समर्थन दोहराया। प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एकजुटता व समर्थन के लिए साइप्रस को धन्यवाद दिया। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए यह दोनों देशों की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री ने साइप्रस की एकता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, अंतर्राष्ट्रीय कानून और यूरोपीय संघ के अधिग्रहण के आधार पर साइप्रस से जुड़े मामलों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के समर्थन को भी दोहराया।

दोनों नेताओं ने व्यापार व निवेश, विज्ञान एवं अनुसंधान, सांस्कृतिक सहयोग तथा दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सहयोग का जायजा लिया तथा फिनटेक, स्टार्ट-अप, रक्षा उद्योग, कनेक्टिविटी, नवाचार, डिजिटलीकरण, एआई और गतिशीलता के नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों की खोज की। दोनों पक्षों ने रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए पांच साल का रोडमैप तैयार करने पर सहमति व्यक्त की। वे साइबर व समुद्री सुरक्षा संवाद और आतंकवाद, ड्रग्स तथा हथियारों की तस्करी के मुद्दों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक तंत्र स्थापित करने पर भी सहमत हुए। नेताओं ने जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम की सराहना की जो दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को ठोस आकार देगा। उन्होंने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत-ग्रीस-साइप्रस (आईजीसी) व्यापार और निवेश परिषद की स्थापना का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने व्यापार, पर्यटन, ज्ञान और नवाचार संबंधों को मजबूत करने के लिए हवाई संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा [आईएमईसी] क्षेत्र में शांति और समृद्धि में योगदान देगा।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार सहित वैश्विक शासन संस्थाओं के सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए साइप्रस के समर्थन को दोहराने के लिए राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस को धन्यवाद दिया। उन्होंने पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्षों सहित वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस को भारत आने का निमंत्रण दिया। इस यात्रा के दौरान निकोसिया विश्वविद्यालय में ‘भारत अध्ययन आईसीसीआर चेयर’ स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस बैठक के बाद भारत-साइप्रस साझेदारी पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया। [लिंक]

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।