देश की आत्मनिर्भरता और किसानों के कल्याण के लिए ‘पीएम धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ शुरू किए गए हैं: पीएम
हमने किसानों के हित में बीज से लेकर बाज़ार तक, सभी क्षेत्रों में सुधार किए हैं: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री धन धान्य योजना के लिए 100 जिलों का चयन तीन मानदंडों पर आधारित है: प्रधानमंत्री मोदी
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन केवल दलहन उत्पादन बढ़ाने का मिशन नहीं है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने का अभियान भी है: प्रधानमंत्री
पिछले 11 वर्षों से, सरकार का निरंतर प्रयास किसानों को सशक्त बनाना और कृषि में निवेश बढ़ाना रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
पशुपालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन ने छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों को सशक्त बनाया है: प्रधानमंत्री
आज गाँवों में, नमो ड्रोन दीदीयाँ उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के आधुनिक तरीकों का नेतृत्व कर रही हैं: प्रधानमंत्री मोदी
एक ओर, हमें आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है और दूसरी ओर, हमें वैश्विक बाजार के लिए भी उत्पादन करने की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में एक विशेष कृषि कार्यक्रम में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम में भाग लेने से पहले किसानों से बातचीत भी की।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में 35,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने 24,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना का शुभारंभ किया। श्री मोदी ने 11,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन का भी शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने लगभग 815 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, "आज एक ऐतिहासिक दिन है जो माँ भारती के दो महान सपूतों की जयंती का प्रतीक है जिन्होंने भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने और ग्रामीण विकास को नई परिभाषा दी। जयप्रकाश नारायण जी और नानाजी देशमुख जी ग्रामीण भारत की आवाज़ थे और उन्होंने अपना जीवन किसानों और वंचितों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया।"

प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (पल्स सेल्फ रिलायंस मिशन) आत्मनिर्भरता, ग्रामीण सशक्तिकरण और कृषि नवाचार के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इससे देश भर के करोड़ों किसानों को सीधे लाभ होगा। श्री मोदी ने कहा, "भारत सरकार इन पहलों में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी, जो किसानों की आय दोगुनी करने और देश के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा हासिल करने की उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"

प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा में कृषि और खेती की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए पिछली सरकारों के दौरान कृषि क्षेत्र की लंबे समय से की गई उपेक्षा को याद किया और भारत के किसानों को सशक्त बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तेज़ी से विकसित हो रहे 21वीं सदी के भारत को एक मज़बूत और सुधरी हुई कृषि प्रणाली की आवश्यकता है, और यह परिवर्तन 2014 के बाद उनकी सरकार के आने के बाद शुरू हुआ। श्री मोदी ने कहा, "हमने अतीत की उदासीनता को तोड़ा। बीज से लेकर बाज़ार तक, हमने अपने किसानों के हित में व्यापक सुधार लागू किए। ये सुधार केवल नीतिगत बदलाव नहीं थे। ये संरचनात्मक हस्तक्षेप थे जिनका उद्देश्य भारतीय कृषि को आधुनिक, टिकाऊ और सुगम बनाना था।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 9 करोड़ मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। श्री मोदी ने बताया कि फल और सब्जियों के उत्पादन में 6.4 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत आज दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है और वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। श्री मोदी ने कहा कि शहद उत्पादन 2014 की तुलना में दोगुना हो गया है और इसी अवधि में अंडा उत्पादन भी दोगुना हो गया है।

उन्होंने बताया कि इस दौरान देश में छह प्रमुख उर्वरक संयंत्र स्थापित किए गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि किसानों को 25 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई सुविधाएँ 100 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक पहुँच गई हैं। श्री मोदी ने कहा कि फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को 2 लाख करोड़ रुपये के बीमा दावे वितरित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में, किसानों के सहयोग और बाजार पहुँच को बढ़ाने के लिए 10,000 से अधिक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने किसानों, मछुआरों और कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के साथ बातचीत की है। उन्होंने उनके अनुभवों और सुझावों को सुना और कहा कि इस तरह की बातचीत भारतीय कृषि में हो रहे वास्तविक परिवर्तन को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की वर्तमान भावना अब सीमित उपलब्धियों से संतुष्ट नहीं होती। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अगर भारत को एक विकसित देश बनना है, तो हर क्षेत्र में निरंतर सुधार और प्रगति आवश्यक है। श्री मोदी ने कहा कि इसी दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शुरू की गई है।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि यह नई कृषि पहल आकांक्षी जिला कार्यक्रम की सफलता से प्रेरित है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पिछली सरकारों ने देश के सौ से ज़्यादा ज़िलों को "पिछड़ा" घोषित कर दिया था और उसके बाद उनकी काफी उपेक्षा की। श्री मोदी ने कहा कि इसके विपरीत, हमारी सरकार ने इन ज़िलों पर लक्षित और गतिशील दृष्टिकोण के साथ ध्यान केंद्रित करने का विकल्प चुना और उन्हें "आकांक्षी ज़िले" के रूप में पुनः नामित किया।

उन्होंने इन ज़िलों में बदलाव के लिए अनुकूलन, सहयोग और प्रतिस्पर्धा की रणनीति को रेखांकित किया। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, "सभी प्रयास "सबका प्रयास" की भावना के अंतर्गत एकजुट थे और तेज़ विकास के लिए ज़िलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के एक मॉडल को प्रोत्साहित किया गया।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन 100 से अधिक जिलों में, लगभग 20 प्रतिशत गांवों ने आजादी के बाद से कभी सड़क नहीं देखी थी। श्री मोदी ने कहा, “आज, आकांक्षी जिला कार्यक्रम के केंद्रित कार्यान्वयन के कारण, इनमें से अधिकांश गांव बारहमासी सड़कों से जुड़ गए हैं।” उन्होंने स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत में, इन जिलों में 17 प्रतिशत बच्चे बुनियादी टीकाकरण के दायरे से बाहर थे। अब, इनमें से अधिकांश बच्चों को पूर्ण टीकाकरण के दायरे में लाया गया है। श्री मोदी ने कहा, “इन जिलों के 15 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में बिजली की कमी थी। आज, लगभग हर ऐसे स्कूल में बिजली कनेक्शन उपलब्ध है, जिससे बच्चों के लिए अधिक अनुकूल शिक्षण वातावरण सुनिश्चित हो रहा है।” उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां अनुकूलन, सहयोग और प्रतिस्पर्धा पर आधारित विकास मॉडल का प्रत्यक्ष परिणाम हैं, जहां विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने ठोस परिणाम दिए हैं।

श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के पीछे की प्रेरणा सीधे तौर पर आकांक्षी ज़िला मॉडल की सफलता से आती है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इन 100 ज़िलों का चयन सोच-समझकर और तीन प्रमुख मानदंडों के आधार पर किया गया है: पहला, प्रति इकाई भूमि पर कृषि उत्पादन का स्तर। दूसरा, एक वर्ष में एक ही भूमि पर कितनी बार फ़सलें उगाई जाती हैं। तीसरा, किसानों के लिए संस्थागत ऋण या निवेश सुविधाओं की उपलब्धता और सीमा।” श्री मोदी ने कहा, “हमने अक्सर "36 का आंकड़ा" मुहावरा सुना है, जिसका अर्थ है कि दो पक्ष एक-दूसरे से पूरी तरह असहमत हैं। लेकिन एक सरकार के रूप में, हम ऐसी धारणाओं को चुनौती देते हैं और उन्हें उलट देते हैं।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत, हम 36 विभिन्न सरकारी योजनाओं को एकीकृत और समन्वित तरीके से एक साथ ला रहे हैं। चाहे वह राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन हो, कुशल सिंचाई के लिए 'प्रति बूंद अधिक फसल' अभियान हो, या तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तिलहन मिशन हो। पशुधन विकास पर विशेष ध्यान देने सहित कई ऐसी पहलों को एक छतरी के नीचे एकीकृत किया जा रहा है। श्री मोदी ने कहा, "प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत, जमीनी स्तर पर निरंतर देखभाल और रोग निवारण सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पशुधन स्वास्थ्य अभियान भी शुरू किए जाएँगे।"

प्रधानमंत्री ने फिर कहा कि आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तरह, पीएम धन-धान्य कृषि योजना न केवल किसानों पर, बल्कि स्थानीय सरकारी अधिकारियों, विशेष रूप से प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी या कलेक्टर पर भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डालती है। इस योजना का डिज़ाइन सुगमता प्रदान करता है ताकि योजना को प्रत्येक जिले की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सके। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, "इसलिए, मैं किसानों और जिलाधिकारियों नसे आग्रह करता हूँ कि वे जिला स्तरीय कार्य योजनाएँ तैयार करें जो स्थानीय मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों।"

श्री मोदी ने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का उद्देश्य केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि देश की भावी पीढ़ियों को मजबूत बनाना भी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के किसानों ने हाल ही में गेहूँ और चावल जैसे खाद्यान्नों का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष उत्पादकों में शामिल हो गया है। श्री मोदी ने कहा, "हालांकि, पोषण के लिए सिर्फ़ आटे और चावल से आगे देखने की ज़रूरत है। हालाँकि ये मुख्य खाद्य पदार्थ भूख मिटा सकते हैं, लेकिन उचित पोषण के लिए ज़्यादा विविध आहार की आवश्यकता होती है। प्रोटीन, विशेषरूप से भारत की ज़्यादातर शाकाहारी आबादी के लिए, शारीरिक और मानसिक विकास दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालें पादप-आधारित प्रोटीन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई हैं।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "दल्हन आत्मनिर्भरता मिशन घरेलू दलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर इस चुनौती का समाधान करने का प्रयास करता है, जिससे पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला दलहन आत्मनिर्भरता मिशन किसानों को पर्याप्त सहायता प्रदान करेगा।" श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दलहन की खेती का रकबा 35 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस मिशन के तहत अरहर, उड़द और मसूर दालों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा और दालों की खरीद की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे देश भर के लगभग दो करोड़ दलहन उत्पादक किसानों को सीधा लाभ होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और उन्हें विकसित भारत के चार आधारभूत स्तंभों में से एक बताया, जैसा कि लाल किले से उनके संबोधन में रेखांकित किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने और कृषि में निवेश बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इस अवधि के दौरान कृषि बजट में लगभग छह गुना वृद्धि में यह प्राथमिकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि इस विस्तारित बजट से मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों को लाभ हुआ है, जो भारतीय कृषि का आधार हैं। एक उदाहरण देते हुए, उन्होंने देश को याद दिलाया कि भारत अपने किसानों का समर्थन करने और उनकी निवेश लागत कम करने के लिए पर्याप्त उर्वरक सब्सिडी प्रदान करता है। यह नीति यह सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है कि कृषि सभी के लिए टिकाऊ, उत्पादक और लाभदायक बनी रहे।

पारंपरिक कृषि से परे अवसरों का विस्तार करके किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए, श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने शहद उत्पादन क्षेत्र को एक सफलता की कहानी बताते हुए कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत का शहद उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है। उन्होंने बताया कि छह-सात साल पहले जहाँ शहद का निर्यात लगभग 450 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि निर्यात में यह नाटकीय वृद्धि, किसानों को सीधे मिलने वाली तीन गुना अधिक आय को दर्शाती है, जो कृषि विविधीकरण और मूल्य संवर्धन के ठोस लाभों को प्रदर्शित करती है।

प्रधानमंत्री ने नवाचार, निवेश और बाजार पहुंच के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का प्रमुख वाहक बनाने पर सरकार के ध्यान देने की बात कही।

श्री मोदी ने भारतीय कृषि और ग्रामीण समृद्धि में बदलाव लाने में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चाहे फसल की खेती हो, पशुपालन हो या प्राकृतिक खेती, महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रमुख नेता के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने तीन करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के सरकार के चल रहे अभियान को एक शक्तिशाली पहल बताया जो सीधे कृषि क्षेत्र को भी समर्थन दे रही है। श्री मोदी ने कहा, "एक उल्लेखनीय उदाहरण भारत के गांवों में नमो ड्रोन दीदी का उदय है, जो अब उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इस नवाचार ने न केवल कृषि दक्षता में सुधार किया है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के महत्वपूर्ण नए स्रोत भी प्रदान किए हैं।"

प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, "इस स्थायी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए 17,000 से ज़्यादा समर्पित क्लस्टर स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 70,000 प्रशिक्षित 'कृषि सखियाँ' किसानों को प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिए सक्रिय रूप से मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।"

उन्होंने फिर कहा कि कृषि में महिलाओं को सशक्त बनाना केवल सामाजिक न्याय का मामला नहीं है, बल्कि एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे हाल के वस्तु और सेवाकर (जीएसटी) सुधारों ने कृषि उपकरणों और आवश्यक वस्तुओं को अधिक किफायती बनाकर भारत के किसानों और ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत प्रदान की है। उन्होंने कहा कि नई जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत ट्रैक्टर अब 40,000 रुपये सस्ता है, जिससे इस त्योहारी सीजन में किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली, स्प्रिंकलर उपकरण और कटाई के औजारों पर अतिरिक्त मूल्य कटौती के साथ महत्वपूर्ण बचत हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती में उपयोग किए जाने वाले जैविक उर्वरकों और जैव-कीटनाशकों की लागत कम जीएसटी दरों के कारण कम हो गई है, जिससे टिकाऊ कृषि को और बढ़ावा मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि इन सुधारों के परिणामस्वरूप ग्रामीण परिवारों के लिए दोगुनी बचत हुई है और दैनिक उपयोग की वस्तुओं और कृषि उपकरणों, दोनों की लागत कम हुई है।

प्रधानमंत्री ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भारतीय किसानों के ऐतिहासिक योगदान को दोहराते हुए उनसे अब एक विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। अपने संबोधन के समापन पर, श्री मोदी ने किसानों से न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में काम करने, बल्कि निर्यात अनुकूल फसलें उगाकर वैश्विक बाजार को लक्षित करने का भी आग्रह किया, जिससे आयात कम हो सके और भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रधानमंत्री ने देश भर के किसानों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:30 बजे नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में एक विशेष कृषि कार्यक्रम में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने किसानों के साथ बातचीत भी की और उसके बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

यह कार्यक्रम किसान कल्याण, कृषि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने के प्रति प्रधानमंत्री की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह कार्यक्रम आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों का समर्थन करने और किसान-केंद्रित पहलों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जश्न मनाने पर केंद्रित था।

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में 35,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने 24,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना का शुभारंभ भी किया। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर कटाई के बाद भंडारण क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और चयनित 100 जिलों में दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है।

प्रधानमंत्री ने 11,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन का भी शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य दलहन की उत्पादकता में सुधार, दलहन की खेती के क्षेत्र का विस्तार, मूल्य श्रृंखला - खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण - को मजबूत करना और नुकसान को कम करना सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जबकि लगभग 815 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।

प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन की जाने वाली परियोजनाओं में बेंगलुरु और जम्मू-कश्मीर में कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केंद्र; अमरेली और बनास में उत्कृष्टता केंद्र; राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत असम में कृत्रिम गर्भाधान प्रयोगशाला की स्थापना; मेहसाणा, इंदौर और भीलवाड़ा में दूध पाउडर संयंत्र; असम के तेजपुर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मछली चारा संयंत्र; कृषि प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए बुनियादी ढांचा, एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्यवर्धन बुनियादी ढांचा, आदि शामिल हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई उनमें आंध्र प्रदेश के कृष्णा में एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्यवर्धन बुनियादी ढांचा (विकिरण); तथा ओडिशा के हीराकुड में अत्याधुनिक एकीकृत एक्वापार्क आदि शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रमाणित किसानों, मैत्री तकनीशियनों और प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (पीएसीएस) को क्रमशः प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) और सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) में परिवर्तित प्रमाण पत्र वितरित किए।

यह कार्यक्रम सरकारी पहलों के अंतर्गत हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी चिह्नित करता है, जिसमें 10,000 एफपीओ में 50 लाख किसान सदस्यता शामिल है, जिनमें से 1,100 एफपीओ ने 2024-25 में 1 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक कारोबार दर्ज किया। अन्य उपलब्धियों में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 50,000 किसानों का प्रमाणन; 38,000 मैत्री (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय एआई तकनीशियन) का प्रमाणन; कम्प्यूटरीकरण के लिए 10,000 से अधिक बहुउद्देशीय और ई-पीएसीएस की मंजूरी और संचालन; और पीएसीएस, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का गठन और सुदृढ़ीकरण शामिल हैं। 10,000 से अधिक पैक्स ने अपने कार्यों में विविधता लाकर उन्हें प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) और सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत की, जिन्हें कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन में मूल्य-श्रृंखला आधारित दृष्टिकोण स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। इन किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सदस्यता और कृषि अवसंरचना कोष के तहत सहायता भी मिली है।

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।