'राष्ट्रीय खेल भारत की असाधारण खेल शक्ति का उत्सव है'
'भारत की हर गली, हर कोने में प्रतिभा मौजूद है इसलिए 2014 के बाद हमने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय प्रतिबद्धता जताई'
'गोवा की आभा तुलना से परे है'
'खेल की दुनिया में भारत को मिली हाल की सफलता हर युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी प्रेरणा है'
'खेलो इंडिया के जरिए प्रतिभाओं की खोज, उन्हें आगे बढ़ाना, प्रशिक्षण देना और टॉप्स द्वारा ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने का प्रयास हमारा रोडमैप है
'भारत आज कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और अभूतपूर्व मानक स्थापित कर रहा है'
'भारत की स्पीड और स्केल की बराबरी कर पाना मुश्किल है'
'भारत की युवा शक्ति के विकसित भारत की युवा शक्ति बनने में माई भारत एक माध्यम बनेगा'
'भारत 2030 में यूथ ओलंपिक और 2036 में ओलंपिक का आयोजन करने के लिए तैयार है, ओलंपिक के आयोजन की हमारी आकांक्षा सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसके ठोस कारण हैं'

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मडगांव, गोवा के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 37वें राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन किया। खेलों का आयोजन 26 अक्टूबर से 9 नवंबर तक होगा और इसमें देशभर से 10,000 से ज्यादा एथलीट हिस्सा लेंगे। ये खिलाड़ी 28 स्थानों पर 43 खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खेलों के महाकुंभ की यात्रा गोवा पहुंच गई है और वातावरण रंगों, लहरों, उत्साह और रोमांच से भर गया है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि गोवा की आभा जैसा कुछ और नहीं। उन्होंने गोवा के लोगों को 37वें राष्ट्रीय खेलों के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने देश के खेलों में गोवा के योगदान का जिक्र किया और फुटबॉल के प्रति गोवा के विशेष लगाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वास्तव में खेलों से लगाव रखने वाले गोवा में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन अपने आपमें जोश पैदा कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय खेल ऐसे समय पर हो रहे हैं जब देश खेल की दुनिया में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। उन्होंने एशियाई खेलों में 70 साल पुराने रेकॉर्ड को तोड़ने की सफलता का जिक्र किया। पीएम ने इस समय चल रहे एशियन पैरा गेम्स की भी चर्चा की जहां पदक तालिका में 70 से ज्यादा पदकों के साथ पिछले सभी रेकॉर्ड टूट गए हैं। उन्होंने हाल में संपन्न हुए विश्व विश्वविद्यालय खेलों की भी चर्चा की, जिसमें भारत ने इतिहास रचा है। श्री मोदी ने कहा, 'खेल की दुनिया में भारत की हाल की सफलता हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।’ राष्ट्रीय खेलों को हर युवा एथलीट के लिए एक मजबूत लॉन्चपैड बताते हुए प्रधानमंत्री ने उनके सामने मौजूद विभिन्न अवसरों की बात की और अपना सर्वश्रेष्ठ देने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और देश ने अभाव के बावजूद चैंपियन तैयार किए हैं फिर भी पदक तालिका में खराब प्रदर्शन देशवासियों को व्यथित करता था। इस दिशा में प्रधानमंत्री ने 2014 के बाद खेल संबंधी बुनियादी ढांचे, चयन प्रक्रिया, खिलाड़ियों के लिए वित्तीय सहायता योजनाएं, प्रशिक्षण योजनाओं के साथ-साथ समाज की मानसिकता में हुए बदलाव की चर्चा की, जिससे एक-एक कर खेल पारिस्थितिकी तंत्र में आने वाली अड़चनों को दूर किया जा सका। सरकार ने प्रतिभाओं की तलाश कर उन्हें ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस साल का खेल बजट नौ साल पहले के खेल बजट से तीन गुना ज्यादा है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया और टॉप्स जैसी पहलों वाले नए पारिस्थितिकी तंत्र में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से प्रतिभाशाली एथलीटों को ढूंढा जा रहा है। उन्होंने कहा कि टॉप्स में शीर्ष एथलीटों को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण मिलता है और खेलो इंडिया में 3000 एथलीट प्रशिक्षण ले रहे हैं। खिलाड़ियों को 6 लाख रुपये हर साल छात्रवृत्ति मिल रही है। खेलो इंडिया के तहत ढूंढे गए करीब 125 खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों में हिस्सा लिया और 36 मेडल जीते। उन्होंने आगे कहा, 'खेलो इंडिया के जरिए प्रतिभाओं की खोज करना, उनका पोषण और उन्हें टॉप्स द्वारा ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण देना हमारे रोडमैप में शामिल है।'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'किसी भी देश के खेल क्षेत्र की प्रगति का सीधा संबंध उसकी अर्थव्यवस्था की प्रगति से होता है।' उन्होंने कहा कि देश में नकारात्मक माहौल खेल के मैदान के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी दिखाई देता है जबकि खेलों में भारत की हालिया सफलता इसकी समग्र सफलता की कहानी कहती है। श्री मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत हर क्षेत्र में नए रेकॉर्ड तोड़ रहा है और आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'भारत की स्पीड और स्केल की बराबरी कर पाना मुश्किल है।' पिछले 30 दिनों की भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर देश इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा तो यह मोदी है जो युवा पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य की गारंटी ले सकता है। पीएम ने उदाहरण देते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने, गगनयान के सफल टेस्ट, भारत की पहली रैपिड रेल 'नमो भारत' के उद्घाटन, बेंगलुरु मेट्रो के विस्तार, जम्मू-कश्मीर की पहली विस्टा डोम ट्रेन सेवा, दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, जी20 का सफल आयोजन, ग्लोबल मैरीटाइम समिट जिसमें 6 लाख करोड़ रुपये के समझौते हुए, ऑपरेशन अजय जिसमें इजरायल से भारतीयों को निकाला गया, भारत और श्रीलंका के बीच फेरी सेवाओं की शुरुआत, 5जी यूजर बेस में भारत शीर्ष 3 देशों में शामिल, एपल के बाद हाल में गूगल का स्मार्टफोन बनाने की घोषणा और देश में फल एवं सब्जी उत्पादन में एक नया रेकॉर्ड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह तो अभी आधी सूची है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जो भी काम हो रहे हैं, उसके मूल में देश का युवा ही है। उन्होंने नए प्लेटफॉर्म 'माई भारत' का जिक्र किया, जो युवाओं को आपस में और देश की योजनाओं से जोड़ने के लिए वन-स्टॉप सेंटर होगा ताकि उन्हें अपनी क्षमता का एहसास करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का अधिकतम अवसर मिल सके। उन्होंने कहा, 'यह भारत की युवा शक्ति को विकसित भारत की युवा शक्ति बनाने का एक माध्यम होगा।' प्रधानमंत्री आगामी एकता दिवस पर इस अभियान की शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि उस दिन रन फॉर यूनिटी का भव्य कार्यक्रम हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज जब भारत का संकल्प और प्रयास दोनों इतने विशाल हैं, तो भारत की आकांक्षाएं ऊंची होना स्वाभाविक है। इसीलिए आईओसी सत्र के दौरान मैंने 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षा को सामने रखा। मैंने ओलंपिक की सर्वोच्च समिति को आश्वासन दिया कि भारत 2030 में युवा ओलंपिक और 2036 में ओलंपिक का आयोजन करने के लिए तैयार है। ओलंपिक के आयोजन की हमारी आकांक्षा सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि 2036 में भारत की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा आसानी से ओलंपिक की मेजबानी करने की स्थिति में होगा।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि 'हमारे राष्ट्रीय खेल एक भारत, श्रेष्ठ भारत का भी प्रतीक हैं।' यह भारत के प्रत्येक राज्य के लिए अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का एक बड़ा माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए गोवा सरकार और गोवा के लोगों की तैयारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां खेलों की खातिर तैयार किया गया बुनियादी ढांचा आने वाले कई दशकों तक गोवा के युवाओं के लिए उपयोगी होगा और ये मिट्टी देश के लिए कई नए खिलाड़ी तैयार करेगी, जबकि बुनियादी ढांचे का उपयोग भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में गोवा में कनेक्टिविटी से जुड़ा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया गया है। राष्ट्रीय खेलों से गोवा के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बहुत लाभ होगा।'

गोवा को समारोहों की भूमि बताते हुए प्रधानमंत्री ने गोवा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और शिखर सम्मेलनों के केंद्र के रूप में राज्य के बढ़ते कद का उल्लेख किया। 2016 के ब्रिक्स सम्मेलन और कई जी20 सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि जी20 द्वारा 'सतत पर्यटन के लिए गोवा रोडमैप' को अपनाया गया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने एथलीटों से हर स्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का आग्रह किया, चाहे कोई भी क्षेत्र हो, कैसी भी चुनौती हो। उन्होंने कहा, 'हमें यह अवसर नहीं खोना चाहिए। इस आह्वान के साथ मैं 37वें राष्ट्रीय खेलों की शुरुआत की घोषणा करता हूं। आप सभी एथलीटों को एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। गोवा तैयार है।'

इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल, श्री पी. एस. श्रीधरन पिल्लई, गोवा के मुख्यमंत्री, श्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डा. पी.टी. ऊषा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। लगातार मिल रहे सरकारी सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एथलीटों के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। शीर्ष प्रदर्शन करने वालों की पहचान करने तथा खेलों की लोकप्रियता को और बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट आयोजित करने के महत्व को पहचानते हुए देश में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय खेल गोवा में पहली बार आयोजित हो रहे हैं। ये खेल 26 अक्टूबर से 9 नवंबर तक होंगे। देश भर के 10,000 से अधिक एथलीट 28 स्थानों पर 43 से अधिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।.

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बराक वैली नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब बनेगी: असम के सिलचर में पीएम मोदी
March 14, 2026
Today, North-East India is the center of India’s Act East Policy; It is becoming a bridge that connects India with South-East Asia: PM
बराक वैली के किसानों और चाय बागान श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है; डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है: प्रधानमंत्री
हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं; कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था, इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

प्रानोप्रिय बोराक उपत्यकार, सम्मानित नागरिकवृंद, आपनादेर शोबाई के आमार प्रोणाम जानाई।

राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, उपस्थित राज्य सरकार के मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

संस्कृति, साहस और जीवंतता से भरपूर बराक वैली के आप सभी परिवारजनों के बीच आना बहुत विशेष अनुभव रहता है। सिलचर को तो बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है। ये वो जगह है जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। यहां बांग्ला बोली जाती है, असमिया की गूँज सुनाई देती है और अन्य जनजातीय परंपराएं भी फुलती-फलती हैं। यहां इतनी विविधता को अपनी ताकत बनाकर आप सभी भाईचारे के साथ, सद्भाव के साथ, इस पूरे क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। ये बराक वैली का बहुत बड़ा सामर्थ्य है

साथियों,

बराक नदी के उपजाऊ मैंदानों ने, यहां के चाय बागानों ने, यहां के किसानों को, यहां के ट्रेड रूट्स को, एजुकेशन सेंटर्स को हमेशा प्रोत्साहित किया है। ये क्षेत्र असम ही नहीं, पूरे नॉर्थ ईस्ट और पश्चिम बंगाल को भी कनेक्ट करता है। बराक घाटी के इसी महत्व को 21वीं सदी में और अधिक सशक्त करने के लिए मैं आज आपके बीच आया हूं, आपके आशीर्वाद लेने आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां बराक वैली की कनेक्टिविटी से जुड़े, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी से जुड़े, हजारों करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। रोड़ हो, रेल हो, एग्रीकल्चर कॉलेज हो, ऐसे हर प्रोजेक्ट्स से बराक वैली नॉर्थ ईस्ट का एक बड़ा लॉजिस्टिक और ट्रेड हब बनने जा रहा है। इससे यहां के नौजवानों के लिए रोजगार के, स्वरोजगार के अनगिनत, अनगिनत अवसर बनने जा रहे हैं। मैं आप सभी को इन सभी विकास परियोजाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आजादी के अनेक दशकों तक कांग्रेस की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से, दोनों से ही दूर रखा। कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को एक प्रकार से भुला दिया था। लेकिन बीजेपी की डबल इंजन सरकार ने नॉर्थ ईस्ट को ऐसे कनेक्ट किया है कि आज हर तरफ इसकी चर्चा है। आज नॉर्थ ईस्ट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का केंद्र है, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत को जोड़ने वाला सेतु बन रहा है।

लेकिन साथियों,

जैसे कांग्रेस ने नॉर्थ ईस्ट को अपने हाल पर छोड़ दिया था, ठीक वैसे ही बराक वैली को भी बेहाल करने में कांग्रेस की बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब देश आज़ाद हुआ, तो कांग्रेस ने ऐसी बाउंड्री खींचने दी, जिससे बराक घाटी का समंदर से संपर्क ही कट गया। जो बराक वैली कभी ट्रेड रूट के रूप में, एक औद्योगिक केंद्र के रूप में जानी जाती थी, उस बराक वैली से उसकी ताकत ही छीन ली गई। आज़ादी के बाद भी दशकों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन बराक घाटी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हुआ।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार, इस स्थिति को बदल रही है। हम बराक घाटी को फिर से व्यापार कारोबार का बड़ा हब बनाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। आज इस दिशा में एक बहुत बड़ा और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। आज करीब 24 हजार करोड़ रुपए के शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमि पूजन हुआ है, 24 हजार करोड़ रुपए, कितने? कितने? 24 हजार करोड़ रुपए। कितने? कितने? कितने? ये जरा कांग्रेस वालों को पूछना, जरा कागज पेन देना और उनको कहना कि जरा कागज पर 24 हजार करोड़ लिखो तो, कितने, कितने जीरो लगते हैं, आएगा नहीं उनको। ये कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला जहां बंद हो जाता है ना, वहां हमारा काम शुरू हो जाता है। यह नॉर्थ-ईस्ट का पहला Access Controlled High-Speed Corridor होगा।

साथियों,

ये सिर्फ एक हाईवे प्रोजेक्ट नहीं है, ये नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दशकों पुराने इंतजार का अंत हो रहा है। इस कॉरिडोर से सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा, ये सब राज्य कनेक्ट होने वाले हैं। इन तीनों राज्यों से आगे बांग्लादेश और म्यांमार हैं और फिर आगे दक्षिण-पूर्व एशिया का विशाल बाजार है। यानी बराक घाटी, एक बहुत उज्जवल भविष्य की तरफ जुड़ने का आज शिलान्यास कर रही है। इसका फायदा असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट के किसानों को होगा, यहां के नौजवानों को होगा। इतनी अच्छी कनेक्टिविटी वाले ये सारा क्षेत्र बनने से, इस पूरे क्षेत्र में इंडस्ट्री को बल मिलेगा, टूरिज्म को फायदा होगा और सबसे बड़ी बात, हिन्दुस्तान का कोना-कोना आसानी से आप लोगों से जुड़ जाने वाला है।

साथियों,

आप सभी यहां सिलचर में ट्रैफिक को लेकर भी काफी परेशान रहे हैं। अब सिलचर फ्लाईओवर से ये समस्या भी कम हो जाएगी। सिल्चर मेडिकल कॉलेज, NIT सिल्चर और असम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे युवा साथियों के लिए, ये बहुत अच्छी सुविधा हो गई है। इससे आने-जाने में उनका बहुत ही कीमती समय बचने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन की बीजेपी सरकार, असम की रेल कनेक्टिविटी पर भी बहुत अधिक काम कर रही है। खासतौर पर रेलवे का बिजलीकरण हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। अब असम का ढाई हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क, अब इलेक्ट्रिफाई हो चुका है। अब यहां भी तेज़ गति से ट्रेनें चल पाएंगी, इससे बराक वैली के स्वच्छ वातावरण को भी फायदा मिलेगा।

साथियों,

बराक वैली के किसानों और यहां के चाय-बागानों में काम करने वाले श्रमिकों का असम के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। डबल इंजन सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कदम उठा रही है। कल ही, गुवाहाटी से मैंने पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किश्त जारी की है। अब तक पीएम किसान सम्मान निधि का देश के किसानों को लाखों करोड़ रूपया, और अकेले हमारे असम के किसानों को 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा पैसा असम के किसानों को मिल चुका है। अब आप सोचिये, हमने 10 साल में यहां के किसानों की जेब में, 20 हजार करोड़ रुपया उनकी जेब में दिया है। ये कांग्रेस वालों ने 10 साल राज किया, प्रधानमंत्री तो असम से चुनकर के गए थे, उसके बावजूद भी एक फूटी कौड़ी नहीं दी, एक फूटी कौड़ी किसानों को नहीं दी, हमने 20 हजार करोड़ रूपया दिया है। कल बराक वैली के हज़ारों किसानों के खाते में भी, ये आखिरी किस्त भी पहुंची है, ये वाली किस्त पहुंची है और फिर जब चुनाव के बाद आएगा समय, तब भी पहुंचेगी। ये पैसा खेती से जुड़ी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में, मेरे गांव के छोटे-छोटे किसान भाई-बहनों को बहुत बड़ी मदद कर रहा है।

साथियों,

बराक वैली अब अपनी फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। पत्थरकांडी में बराक घाटी के पहले एग्रीकल्चर कॉलेज का निर्माण कार्य आज से शुरु हो रहा है। इससे किसानों को तो फायदा होगा ही, यहां के नौजवानों को कृषि स्टार्टअप्स के लिए सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन मिलेगा।

साथियों,

भाजपा का मंत्र है- जो विकास की दौड़ में पीछे रह गया, उसे प्राथमिकता देना। कांग्रेस की सरकारें बॉर्डर एरिया को, देश के अंतिम गांव मानती थीं। हम बॉर्डर के गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं। और इसलिए, बॉर्डर एरिया के विकास के लिए, कछार जिले से ही वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का अगला चरण शुरु किया था। इससे बराक वैली के अनेक गांवों में भी सुधार होना तय हो गया है।

साथियों,

यहां बड़ी संख्या में चाय-बागानों में कार्य करने वाले साथी भी हैं। असम सरकार ने, चाय-बगानों से जुड़े हजारों परिवारों को, उनकी जमीन का अधिकार देने का ऐतिहासिक काम किया है, वो इन परिवारों के भविष्य को बदलने की एक बड़ी शुरुआत है। जमीन के पट्टे मिलने से, इन परिवारों को सुरक्षा मिली है, उन्हें सम्मान का जीवन मिलना सुनिश्चित हुआ है।

साथियों,

आप जरा वहां से दूर रहिए, अब जगह नहीं है, आगे नहीं आ सकते हैं। देखिए वहां से जरा दूर रखिये उनको, अब आगे नहीं आ सकते भईया, अरे हमारे असम के भाई-बहन तो बड़े समझदार हैं। आपका से प्यार, आपका आशीर्वाद, ये इतनी बड़ी ताकत है, कृपा करके आप।

साथियों,

मैं हेमंता जी की सरकार को बधाई देता हूं, चाय-बागानों में करीब 200 सालों से सेवा दे रही अनेक पीढ़ियों के संघर्ष को आपने आज सम्मान दिया है। देखिए मेरी इस बात पर बादल भी गरजने लग गए। मुझे खुशी है कि जिनको पहले की सरकारों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था, उनकी सुध बीजेपी सरकार ने ली है।

साथियों,

ये सिर्फ भूमि पर कानूनी अधिकार का ही मामला नहीं है। इससे ये लाखों परिवार, केंद्र और राज्य सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से भी तेज़ी से जुड़ेंगे। पक्के घर की योजना हो, बिजली, पानी और गैस की योजनाएं हों, इन सब स्कीम्स का पूरा फायदा अब इन परिवारों को मिलना संभव होगा।

साथियों,

बीते सालों में बीजेपी सरकार ने चाय-बागानों में अनेक स्कूल खोले हैं, बच्चों को स्कॉलरशिप्स दिए हैं। सरकारी नौकरियों के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। ऐसे प्रयासों से चाय-बागानों के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खुल रहे हैं।

साथियों,

बीजेपी की डबल इंजन सरकार के लिए शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत बड़ी प्राथमिकताएं रही हैं। असम ने तो शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस की उपेक्षा को बहुत लंबे समय तक भुगता है। आज असम शिक्षा और स्वास्थ्य का बहुत बड़ा हब बनकर सामने आ रहा है। इसका बहुत अधिक फायदा बराक वैली को मिला है। आज यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अनेक बड़े संस्थान बन चुके हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के युवाओं को सिर्फ हिंसा और आतंकवाद के कुचक्र में ही उलझाए रखा था। कांग्रेस ने असम को फूट डालो और राज करो की नीति की प्रयोगशाला बनाया। आज असम के युवाओं के सामने अवसरों का खुला आसमान है। आज असम भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर का अहम हिस्सा बन रहा है। यहां नेक्स्ट जेनरेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़ा इकोसिस्टम और टैलेंट तैयार हो रहा है। यहां IIT और IIM जैसे संस्थान बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, एम्स और कैंसर अस्पतालों का सशक्त नेटवर्क बन रहा है। शांति और प्रगति का ये नया दौर, अनेक बलिदानों और अनेक प्रयासों से आया है। अब ऐसी हर ताकत को मुंहतोड़ जवाब देना है, जो असम को पुराने दौर में धकेलने की कोशिश करती है।

साथियों,

आज मैं सिलचर से असम को सावधान-सतर्क भी करना चाहता हूं। आपने कांग्रेस को असम से बाहर किया। आज देश का हर राज्य कांग्रेस को सबक सिखा रहा है। कांग्रेस एक के बाद एक चुनाव हार रही है। अब निकट भविष्य में, कांग्रेस खुद के पराजय के इतिहास की सेंचूरी मारने वाला है। हार की हताशा से भरी कांग्रेस ने देश के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के नेता देश को बदनाम करने में जुट गए हैं, आपने देखा है, दिल्ली में इतनी बड़ी AI समिट हुई। आज पूरी दुनिया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI को लेकर बहुत ही उत्सुक है। दिल्ली में सफलतापूर्वक विश्व की एक नई आशा पैदा करने वाला AI समिट हुआ। दुनियाभर के नेता, दुनियाभर की टेक्नॉलॉजी कंपनियां, टेक्नॉलॉजी के बड़े-बड़े लीडर दिल्ली आए थे। कांग्रेस ने इस समिट को बदनाम करने के लिए कपड़ा फाड़ प्रदर्शन किया। अब कांग्रेस के पास खुद के कपड़े फाड़ने के सिवा कुछ नहीं बचा है। पूरे देश ने कांग्रेस के इस भौंडे और भद्दे प्रदर्शन की आलोचना की। लेकिन दिल्ली में जो कांग्रेस का शाही परिवार है, वो इस कांड को भी अपना मेडल बता रहा है, देश को बदनाम करने वालों की वाहवाही कर रहा है। ऐसी कांग्रेस, जो देश की विरोधी हो, वो किसी राज्य का भला नहीं कर सकती, वो असम के युवाओं का कभी भला नहीं सोच सकती।

साथियों,

आजकल दुनिया में चारों तरफ और हमारे तो अड़ोस पड़ोस में ही युद्ध के हालात और आप सब भलिभांति युद्ध कि क्या भयानकता है, वो रोजमर्रा देख रहे हो। युद्ध से जो स्थितियां बनी हैं, हमारी सरकार उनसे निपटने के लिए, हमारे देश के नागरिकों को कम से कम मुसीबत आए इसलिए हो सके उतने सारे प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि देश के नागरिकों पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े। इस समय कांग्रेस से उम्मीद थी कि वो एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभाए, लेकिन कांग्रेस देश हित के इस महत्वपूर्ण काम में भी फिर एक बार फेल हो गई। कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि देश में पैनिक क्रिएट हो, देश मुश्किल में फंस जाए। और उसके बाद कांग्रेस भर-भर कर मोदी को गाली दे।

साथियों,

कांग्रेस के लिए और कांग्रेस असम के लिए, देश के लिए कांग्रेस का कोई विजन ही नहीं है, इसलिए, इन्होंने अफवाहों को, झूठ-प्रपंच को ही, और जैसे झूठे रील बनाने की इंडस्ट्री खोलकर रखी है, उसी को हथियार बना दिया है। दुनिया में जो ताकतें भारत के तेज़ विकास को नहीं पचा पा रहीं हैं, जिन विदेशी ताकतों को देश की प्रगति रास नहीं आ रही, कांग्रेस देश का दुर्भाग्य देखिए, कांग्रेस उनके हाथ की कठपुतली बनती जा रही है। इसलिए, असम के हर नागरिक को, हर नौजवान को कांग्रेस से सावधान रहना है।

साथियों,

असम हो, बराक वैली हो, अब ये विकास के पथ पर बढ़ चुका है। बराक वैली, अपनी भाषा, अपने साहित्य, अपनी संस्कृति के लिए जानी जाती है। वो दिन दूर नहीं, जब बराक वैली को विकास के नए सेंटर के रूप में पहचान मिलेगी।

साथियों,

आप इतनी बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। जो राजनीति के भविष्य की रेखाएं अंकित करने वाले लोग हैं, वो भांति-भांति की जो संभावनाएं तलाशते रहते हैं, वे आज बराक वैली का ये दृश्य, कल बोड़ो समुदाय का वो दृश्य, टी गार्डन वालों के समूह का दृश्य, ये साफ-साफ बता रहा है कि, इस चुनाव का नतीजा भी क्या होने वाला है। और आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए हैं, मैं आपका हृदय से आभारत व्यक्त करता हूं और आप सभी को फिर से विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!