भारत का इतिहास सिर्फ वो नहीं है, जो देश को गुलाम बनाने वालों और गुलामी की मानसिकता के साथ इतिहास लिखने वालों ने लिखा है : प्रधानमंत्री मोदी
उत्तर प्रदेश में बेहतर होती आधारभूत सुविधाओं का सीधा लाभ किसानों, गरीबों, ग्रामीणों को हो रहा है : प्रधानमंत्री मोदी
यूपी के करीब 2.5 करोड़ किसानों के बैंक खाते में पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से रुपए जमा किए जा चुके हैं : प्रधानमंत्री मोदी
विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करने में उत्तर प्रदेश देश के टॉप तीन राज्यों में आ चुका है : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महाराजा सुहेलदेव स्मारक और चित्तौरा झील के विकास कार्यों की आधारशिला रखी। प्रधानमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव के नाम पर एक मेडिकल कॉलेज भवन का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का इतिहास केवल औपनिवेशिक शक्तियों या औपनिवेशिक मानसिकता वाले लोगों द्वारा लिखा गया इतिहास ही नहीं है, अपितु भारत के इतिहास को आम लोगों ने अपनी लोककथाओं में भी पोषित किया है और इसे पीढ़ियों ने आगे बढ़ाया है। उन्होंने इस तथ्य पर अफसोस जताते हुए कहा कि जिन लोगों ने भारत और भारतीयता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उन्हें उचित महत्व नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कहा कि अपनी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में प्रवेश करने के साथ भारतीय इतिहास लेखकों द्वारा भारतीय इतिहास निर्माताओं के विरुद्ध की गई अनियमितताओं और अन्याय को अब ठीक किया जा रहा है और इस दिशा में उनके योगदान को स्मरण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने लालकिले से लेकर अंडमान निकोबार तक नेताजी सुभाषचंद्, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में सरदार पटेल और पंच तीर्थ के माध्यम से बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को स्मरण करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनेकों व्यक्तित्व हैं जिन्हें विभिन्न कारणों से मान्यता नहीं मिली। प्रधानमंत्री ने पूछा कि चौरी-चौरा के बहादुरों के साथ क्या हुआ था, क्या हम इसे भूल सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीयता की रक्षा के लिए महाराजा सुहेलदेव के योगदान की भी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव की पाठ्यपुस्तकों में अनदेखी के बावजूद उन्हें अवध, तराई और पूर्वांचल के लोकगीतों ने लोगों के दिलों में जीवित रखा है। प्रधानमंत्री ने एक संवेदनशील और विकासोन्मुख शासक के रूप में उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि महाराजा सुहेलदेव के लिए यह स्मारकआने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की स्थापना और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ, इस आकांक्षी जिले और आस-पास के क्षेत्रों में लोगों के लिए जीवन को बेहतर बनाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री ने दो वर्ष पहले महाराजा सुहेलदेव की स्मृति में एक डाक टिकट भी जारी किया था।

श्री मोदी ने बसंत पंचमी के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि इस बसंत ने भारत के लिए महामारी की निराशा को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कामना की है कि मां सरस्वती भारत और हर उस देशवासी के ज्ञान और विज्ञान को अपना आशीर्वाद प्रदान करें, जो अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र के निर्माण में शामिल है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निर्मित इतिहास, आस्था और आध्यात्मिकता से संबंधित स्मारकों का सबसे बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पर्यटन और तीर्थयात्रा दोनों क्षेत्रों में भी समृद्ध है और प्रदेश में इसकी संभावनाएं बहुत अधिक हैं। उत्तर प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए अयोध्या, चित्रकूट, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, कुशीनगर, श्रावस्ती आदि जैसे भगवान राम, श्री कृष्ण और बुद्ध के जीवन से संबंधित स्थलों पर रामायण सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, बौद्ध सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणाम दिखाई देने लगे हैं और अब उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों से पर्यटकों की अधिकतम संख्या को आकर्षित करता है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में भी उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है।

प्रधानमंत्री ने कहा की कि उत्तर प्रदेश में पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के साथ-साथ आधुनिक कनेक्टिविटी को भी बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या हवाई अड्डा और कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भविष्य में घरेलू और विदेशी दोनों ही तरह के पर्यटकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे। उत्तर प्रदेश में एक दर्जन छोटे और बड़े हवाई अड्डों पर काम चल रहा है, जिनमें से कई पूर्वांचल में ही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे, बलिया लिंक एक्सप्रेसवे जैसी आधुनिक और चौड़ी सड़कें पूरे उत्तर प्रदेश में बनाई जा रही हैं और यह एक तरह से आधुनिक उत्तर प्रदेश में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश दो बड़े समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन है। उत्तर प्रदेश में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण ने निवेशकों को उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए उत्साहित किया है। इससे उद्योगों के साथ-साथ युवाओं के लिए भी बेहतर अवसर पैदा हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना की रोकथाम केप्रति अपनाई गई रणनीति की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने अपने घर लौटे श्रमिकों को रोजगार देने के लिए राज्य सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा किपिछले 3-4 वर्षों में राज्य नेकोरोना को खत्म करने की दिशा में बड़ा योगदान दिया है। राज्य सरकार के प्रयासों के कारण पूर्वांचल में मेनिन्जाइटिस की समस्या काफी हद तक कम हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह वर्षों में उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 24 हो गई है। साथ ही गोरखपुर और बरेली में एम्स का काम चल रहा है। इनके अलावा, 22 नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। वाराणसी में आधुनिक कैंसर अस्पतालों की सुविधा भी पूर्वांचल को दी जा रही है। उत्तर प्रदेश जल जीवन मिशन यानी हर घर में पानी पहुंचाना भी प्रशंसनीय कार्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शुद्ध पेयजल के घर पहुंचने पर कई तरह की बीमारियों को कम किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में, गाँव, गरीब और किसान बेहतर बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा किप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से उत्तर प्रदेश के लगभग 2.5 करोड़ किसान परिवारों के बैंक खातों में सीधे धनराशि जमा कर दी गई है। ये किसान कभी खाद की एक बोरी खरीदने के लिए भी दूसरों से कर्ज लेने के लिए मजबूर थे। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को सिंचाई के लिए बिजली का उपयोग करने के लिए रात भर जागना पड़ता था और अब उनकी सरकार ने बिजली की आपूर्ति में सुधार करके ऐसी समस्याओं को दूर किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन कृषि भूमि को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इस तरह यह प्रति किसान के स्तर पर कम होती कृषि भूमि के मुद्दे का समाधान करता है। उन्होंने कहा कि जब 1-2 बीघा वाले 500 किसान परिवार संगठित होंगे तो वे 500-1000 बीघा किसानों से अधिक शक्तिशाली होंगे। इसी तरह, सब्जी, फल, दूध, मछली और ऐसे कई व्यवसायों से जुड़े छोटे किसान अब किसान रेल के माध्यम से बड़े बाजारों से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू किए गए नए कृषि सुधारों से छोटे और सीमांत किसानों को भी फायदा होगा और इन कृषि कानूनों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देश भर से मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ भ्रामक सूचनाएं फैलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश में विदेशी कंपनियों को बुलाने के लिए कानून बनाए हैं, वे अब किसानों को भारतीय कंपनियों से डरा रहे हैं। उनके झूठ और दुष्प्रचार उजागर हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि नए कानूनों के लागू होने के बाद, उत्तर प्रदेश में धान खरीद पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई। योगी सरकार पहले ही गन्ना किसानों को 1 लाख करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। किसानों को भुगतान करने के लिए चीनी मिलों को सक्षम बनाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों को हजारों करोड़ रुपये भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रखेगी कि गन्ना किसानों को समय पर भुगतान किया जाए।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार गांव और किसान के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना से किसी भी ग्रामीण के घर पर अवैध कब्जे की संभावना से छुटकारा मिलेगा। इस योजना के तहत, इन दिनों उत्तर प्रदेश में लगभग 50 जिलों में ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण किया जा रहा है। लगभग 12 हजार गांवों में ड्रोन का सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है और अब तक 2 लाख से अधिक परिवारों को संपत्ति कार्ड मिल चुके हैं और ये परिवार अब सभी प्रकार की आशंकाओं से मुक्त हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी किसान की भूमि को कृषि सुधार कानूनों के माध्यम से हड़पा नहीं जा सकता है, इस बारे में फैलाए जा रहे दुष्प्रचार से आम लोगों को भरमाया जा रहा है। हमारा लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाना है, हमारी प्रतिज्ञा है कि देश को आत्मनिर्भर बनाना है और हम इस कार्य के लिए समर्पित हैं।प्रधानमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की एक चौपाई से अपने संबोधन का समापन किया, जिसका अभिप्राय है- कोई भी कार्य अगर सही इरादे से किया जाए और व्यक्ति के हृदय में यदि भगवान राम हैं तो सफलता निश्चित है।

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श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफी भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक अनमोल धरोहर बनेगी: पीएम मोदी
August 12, 2026
Today, we have the opportunity to release the autobiography of Shri Ram Nath Kovind ji; I am happy to be a part of this program: PM
His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation:PM
My prolonged acquaintance with Kovind Ji and his special affection and warmth towards me have been my greatest assets: PM
महात्मा गांधी, बाबासाहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने एक ऐसे नए भारत का सपना देखा था जहाँ सबसे गरीब और सबसे वंचित लोग भी शिखर तक पहुँच सकें: पीएम मोदी
कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने न केवल खुद का जीवन बदला है, बल्कि भारत के लिए अपने सपने और विजन को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाई है: पीएम मोदी


हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय ओम बिरला जी, श्रीमती सविता कोविंद जी, सभाग्रह में सभी वरिष्ठ जन बैठे हैं, सबका उल्लेख नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मेरे लिए बहुत आनंद है कि एक पारिवारिक कार्यक्रम लग रहा है।

भाइयों-बहनों,

आज हमें श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है, उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और इस सबके साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह, उनकी आत्मीयता, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है। मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफ़ी अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी। कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र के लिए उनका योगदान, ऐसा कितना कुछ है जिसके बारे में मैं विस्तार से बात कर सकता हूं, लेकिन बुक रिलीज़ में केवल ‘कर्टन रेज़र’ ही होना चाहिए। आप सब किताब का पूरा लाभ पढ़कर ही लें, तो ही ज्यादा अच्छा है।

साथियों,

कोविंद जी की जीवन यात्रा को आप उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी को, उनके अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मैं रामनाथ कोविंद जी को इस आत्मकथा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी इस पुस्तक को बहुत ही सटीक नाम दिया है- “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” कहने का भाव ये कि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है।

साथियों,

हम सब अक्सर अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है, लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं और जीवन की मुश्किलों के लिए, कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हों, तब व्यक्ति समाज की कमियाँ निकालने में समय नहीं गँवाता, वो उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। आप उनका जीवन देखिए, एक बेहद सामान्य परिवार में, कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अभी भी कुछ वर्णन किया और अपनी किताब में भी लिखा है, कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी माँ अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं। आखिर, एक सामान्य परिवार में, माँ के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में, आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, माँ को इस तरह खो देना, ये कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।

साथियों,

उनके जीवन का एक ऐसा दर्दनाक ये घटनाक्रम था, कोई भी इससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों ने मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की। इससे उन्होंने समाज की एकता और सौहार्द की ताकत को समझा। इस घटना के बाद कोविंद जी के जीवन में उनके पिता की भूमिका और बड़ी हो गई और जिस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, बच्चों को संस्कार दिये, इसीलिए, कोविंद जी अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।

साथियों,

बचपन के इन संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, उन्होंने संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। और, एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी। वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने।

साथियों,

इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व, उनकी सादगी ऐसे ही कायम रही। मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने वहाँ अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। पूरे देश ने वो भावुक दृश्य देखा था। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कुछ खोया था। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुँचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुद का जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न को, उस विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं। हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।

साथियों,

ऐसे युवाशक्ति के निर्माण के लिए जो प्रेरणा चाहिए, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी जीवनी में मोरारजी भाई देसाई के साथ अनुभवों के बारे में भी इसमें विस्तार से बताया है। कोविंद जी के भीतर देशसेवा की जो भावना थी, मोरारजी भाई के साथ काम करके उन्हें जो सीखने को मिला, जो रास्ता मिला। कोविंद जी ने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया। वो अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे। सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में भी हमें उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहाँ तक कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। देश को जगा रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूँ, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुये ऑटोबायोग्राफ़ी के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। कोविंद जी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं। कैसे एक साधारण परिवार मुश्किल हालातों में भी जीवन की शुचिता और ईमानदारी से समझौता नहीं करता, कैसे वही आदर्श आगे चलकर हमारे जीवन का आधार बनते हैं, हमारे कठिन समय के मूल्य किस तरह जीवनभर हमें रोशनी देते हैं, कैसे इस पवित्रता से हमें राष्ट्र सेवा की शक्ति मिलती है। अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।

साथियों,

मुझे विश्वास है, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी, इसमें उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियाँ सुरक्षित होंगी। मैं एक बार फिर उन्हें उनकी आत्मकथा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। और मैं खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करूंगा, रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड की इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। इतिहास से काफी निकट होता है वो कालखंड बायोग्राफी का और इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि कोविंद जी की जो मेहनत है, वो आने वाली पीढ़ियों को काम आए, युवा पीढ़ी को विशेष रूप से काम आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।