केंद्र और राज्य सरकार को बिहार के विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने मोकामा में नमामि गंगे के तहत एवं विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया
हम एक योजना की शुरूआत करते हैं तो यह भी सुनिश्चित करते हैं कि उसे पूरा करने की रूपरेखा तैयार करें: प्रधानमंत्री
जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा है, उससे बिहार के विकास को गति मिलेगी: प्रधानमंत्री मोदी

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज बिहार के मोकामा में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चार सीवरेज परियोजनाओं और चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं का कुल परिव्‍यय 3,700 करोड़ रुपये से अधिक है। 

एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महान कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के साथ करीबी से जुड़ी धरती पर आकर उन्‍हें खुशी हो रही है। उन्होंने सभी को आश्‍वस्‍त किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार बिहार के विकास के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की आधारशिला आज रखी जा रही है उनसे बिहार के विकास को गति मिलेगी।

उन्‍होंने कहा कि सरकार सड़क निर्माण की रफ्तार बढ़ाने पर ध्‍यान केंद्रित कर रही है। उन्‍होंने कहा कि नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाएं गंगा नदी को बचाने में मदद करेंगी।

हाल में शुरू किए गए अंत्‍योदय एक्‍सप्रेस का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि इनसे बिहार, पूर्वी भारत और देश के अन्‍य भागों के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होगा। अच्‍छी कनेक्टिविटी से बेहतर विकास होने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सड़क, रेलवे और जलमार्ग पर जोर दिया जा रहा है।  

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जिन चार राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी गई है उनमें शामिल हैं: 

- राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के अंटा-सिमरिया खंड को 4 लेन बनाना और 6 लेन वाला गंगा सेतु का निर्माण 

- राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के बख्तियारपुर-मोकामा खंड को 4 लेन बनाना 

- राष्ट्रीय राजमार्ग 107 के महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया खंड पर 2-लेन का निर्माण 

- एनएच 82 के बिहारशरीफ-बरबिघा-मोकामा खंड पर 2-लेन का निर्माण 

चार सीवरेज परियोजनाओं में बेऊर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बेऊर में सीवर नेटवर्क के साथ सिवरेज प्रणाली, करमालीचक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सैदपुर में एसटीपी एवं सीवर नेटवर्क शामिल हैं। इन परियोजनाओं से कुल मिलाकर 120 एमएलडी नई एसटीपी क्षमता सृजित होगी और बेऊर के लिए मौजूदा 20 एमएलडी का उन्‍नयन होगा।  

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।