भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मलेशिया के प्रधानमंत्री महामहिम दातो सेरी अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर 07-08 फरवरी 2026 को मलेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे।

यह प्रधानमंत्री का मलेशिया का तीसरा दौरा होगा, और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने के बाद पहला दौरा होगा।

इस दौरे में पीएम मोदी, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ इंडस्ट्री और बिजनेस के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री के दौरे के साथ ही 10वां इंडिया-मलेशिया CEO फोरम भी आयोजित किया जाएगा।

भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित मित्रता के दीर्घकालिक रिश्ते हैं। मलेशिया में 29 लाख भारतीयों की मौजूदगी से यह रिश्ता और मजबूत होता है, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है।

भारत और मलेशिया के संबंध बहुआयामी हैं और लगातार मजबूत हो रहे हैं। पीएम की आगामी यात्रा; दोनों नेताओं को व्यापार और निवेश, रक्षा, सुरक्षा एवं समुद्री सहयोग से लेकर डिजिटल व फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन तथा लोगों के आपसी संपर्क तक, द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू की समीक्षा का अवसर देगी। साथ ही, आपसी लाभ के लिए भविष्य के सहयोग की दिशा भी तय की जाएगी।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।