17 फरवरी 2026 को, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने द्विपक्षीय संबंधों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उन्नत किया था। उन्होंने संयुक्त रूप से 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026' का उद्घाटन किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, डिजिटल तकनीक व साइबर स्पेस, स्वास्थ्य, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, शैक्षिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव जैसे क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक और विविधतापूर्ण बनाने का आह्वान किया। 

'होराइजन 2047 रोडमैप' और दोनों देशों की साझा नवाचार यात्रा को आधार बनाते हुए, भारत और फ्रांस ने नवाचार को आर्थिक मजबूती, सतत विकास, रणनीतिक स्वायत्तता तथा तकनीकी और औद्योगिक संप्रभुता के प्रमुख आधार के रूप में मान्यता दी है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि एक मजबूत नवाचार साझेदारी दोनों देशों की पूर्ण नवाचार क्षमताओं का लाभ उठाने में मदद करेगी और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में योगदान देगी। 

दोनों पक्षों ने इस बात को रेखांकित किया है कि भारत का 'विकसित भारत 2047' का दृष्टिकोण और 'फ्रांस 2030' के अंतर्गत फ्रांस की महत्वाकांक्षाएँ भविष्योन्मुखी नवाचार साझेदारी के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं, जो अग्रणी नवाचारों में निवेश के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसलिए, भारत और फ्रांस 'इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030' को एक ऐसे फ्रेमवर्क के रूप में अपना रहे हैं जो महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में मिलकर विकास को आगे बढ़ाने, विश्वसनीय टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूत करने, अकादमिक और अनुसंधान आदान-प्रदान को बढ़ाने तथा लोगों, विश्व और साझा समृद्धि के लिए ठोस परिणाम देने की दिशा में उनके सहयोगात्मक प्रयासों का मार्गदर्शन करेगा। 

इस रोडमैप में निम्नलिखित मुख्य तत्व शामिल हैं: 

I.  'विश्वसनीय एआई' के लिए साझेदारी, नवाचार साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ: फरवरी 2025 की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत-फ्रांस घोषणा और क्रमशः 2025 तथा 2026 में फ्रांस और भारत द्वारा आयोजित 'एआई एक्शन एंड इम्पैक्ट समिट्स' को आधार बनाते हुए, दोनों देश 'विश्वसनीय एआई' को अपनी नवाचार साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ बनाने पर सहमत हुए हैं।

● सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय एआई प्रणाली: दोनों पक्ष ऐसी सुरक्षित, संरक्षित और विश्वसनीय एआई प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप हों, भेदभाव तथा दुष्प्रचार के प्रसार को रोकें, और 'सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा' का समर्थन करें। वे एआई गवर्नेंस के लिए इंटरऑपरेबल और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने हेतु नियामकों, मानक निकायों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे—जिसमें फ्रंटियर और जनरेटिव मॉडल भी शामिल हैं—साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि नवाचार और राष्ट्रीय विकास बाधित न हो।

● शामिल हैं—साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि नवाचार और राष्ट्रीय विकास बाधित न हो।
एआई साझेदारी की प्राथमिकता के रूप में ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर सहयोग: डिजिटल परिवेश में एआई-सक्षम सेवाओं से संवेदनशील वर्गों, विशेषकर बच्चों के लिए उत्पन्न होने वाले गंभीर जोखिमों को स्वीकार करते हुए, भारत और फ्रांस अपनी एआई साझेदारी की प्राथमिकता के रूप में ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हैं। 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में गठित एआई और बाल सुरक्षा पर विशेषज्ञ सहभागिता समूह तथा ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर भारत के उभरते टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क को आधार बनाते हुए, दोनों पक्ष अपनी चल रही पहलों के बीच ठोस तालमेल विकसित करेंगे। इसमें प्राइवेसी-प्रिजर्विंग एज एश्योरेंस (उम्र की पुष्टि करते समय प्राइवेसी का ध्यान रखना), सेफ्टी-बाय-डिजाइन आर्किटेक्चर और उन एआई प्रणालियों के लिए परिणाम-आधारित सुरक्षा मानक शामिल होंगे जो बच्चों के साथ प्रत्यक्ष रूप से इंटरैक्ट करती हैं।

● प्राइवेसी का ध्यान रखने वाले डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क की अहमियत: भारत और फ्रांस मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हुए एआई और डेटा-संचालित नवाचार की पूर्ण क्षमता को अनलॉक करने के लिए प्राइवेसी का ध्यान रखने वाले डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क की अहमियत को मान्यता देते हैं। भारत का 'डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर' (डीईपीए) और विश्वसनीय डेटा स्पेस तथा भरोसेमंद डेटा प्लेटफॉर्म पर फ्रांस का कार्य, पूरक शक्तियाँ प्रदान करते हैं, जो अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवाओं के लिए सुरक्षित तथा सहमति-आधारित डेटा के आदान-प्रदान में मदद कर सकते हैं।

II. अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से जन-संपर्क सहयोग को बढ़ावा देना: 'होराइजन 2047' फ्रेमवर्क के तहत साझा उद्देश्यों के अनुरूप, दोनों पक्ष इस बात को स्वीकार करते हैं कि एसटीईएम शिक्षा, अनुसंधान साझेदारी, प्रतिभाओं का आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग, भविष्य की पीढ़ियों को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस संबंध में, दोनों पक्ष 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करने के फ्रांस के लक्ष्य के महत्व को स्वीकार करते हैं और द्विपक्षीय साझेदारी की नींव के रूप में लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष निम्नलिखित पहलों का स्वागत करते हैं:

● शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू): दीर्घकालिक नवाचार साझेदारी को बनाए रखने में लोगों की आवाजाही और एकेडमिक इंटीग्रेशन की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्ष उच्च शिक्षा और पेशेवर योग्यताओं के लिए पारस्परिक मान्यता व्यवस्था को मजबूत करने के महत्व को दोहराते हैं। यह स्मरण करते हुए कि फ्रांस 2018 में भारत के साथ शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (एमआरक्यू) समझौते को संपन्न करने वाला पहला देश बना था, दोनों पक्ष एक विस्तारित और अपडेटेड फ्रेमवर्क की दिशा में काम करने के अपने इरादे को व्यक्त करते हैं, जिसमें एकेडमिक विषयों, रेगुलेटेड प्रोफेशन और उभरते टेक्नोलॉजी क्षेत्रों की एक व्यापक श्रेणी शामिल होगी। इस प्रकार का सहयोग अधिक शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, डुअल-डिग्री प्रोग्राम और डॉक्टरेट को-सुपरविज़न की व्यवस्था को सुगम बनाएगा तथा भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक प्रतिभा और ज्ञान साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

● इसके अतिरिक्त, भारत और फ्रांस के कई संस्थानों ने उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान सहयोग के माध्यम से अकादमिक जुड़ाव को बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के लिए सहमति व्यक्त की है [समझौता ज्ञापनों की सूची अनुलग्नक में संलग्न है]।

III. उद्योग-अकादमिक संबंधों के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार-संचालित विकास के लिए साझेदारी: दोनों देश इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच निकट सहयोग, नवाचार-संचालित विकास को बढ़ावा देने तथा रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन निर्माण के लिए अनिवार्य होगा। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष मानते हैं कि:

● 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर द प्रमोशन ऑफ एडवांस्ड रिसर्च' (CEFIPRA) की केंद्रीय भूमिका, जो द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग का एक प्रमुख माध्यम है, जिसमें नवाचार तथा रणनीतिक रूप से प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों के सह-विकास और विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।

●इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क' (IFIN) का महत्व, जो 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' की एक प्रमुख उपलब्धि है तथा दोनों देशों के इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है। दोनों देश इसके लंबे समय तक सक्रिय रहने में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें IFIN के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए एक संयुक्त भारत-फ्रांस स्टीयरिंग कमिटी का संभावित गठन भी शामिल है।

●बायोमेडिकल साइंस और हेल्थ इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने वाले मौजूदा प्लेटफॉर्म के तौर पर 'फ्रेंको-इंडियन कैंपस इन लाइफ साइंसेज फॉर हेल्थ' (FIC-LSH) की अहमियत को पहचानना और हेल्थ सेक्टर में द्विपक्षीय रिसर्च, एकेडमिक सहयोग और इनोवेशन पार्टनरशिप में इसके योगदान को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा जारी रखने में रुचि व्यक्त करते हैं।

अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक पारस्परिक पहुंच, CEFIPRA, संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति, स्टेशन-एफ तथा FRIND-X में स्टार्टअप सहयोग और इंडिया-फ्रांस इनोवेशन नेटवर्क के शुभारंभ के माध्यम से, दोनों देश अपनी तकनीकी स्वायत्तता को सुरक्षित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों की अगली पीढ़ी वैश्विक चुनौतियों का स्वतंत्र रूप से समाधान कर सके।

इसके अलावा, दोनों पक्ष निम्नलिखित पहलों पर सहमत हुए: 

● एरोनॉटिक्स ट्रेनिंग और करियर के लिए फ्रेंको-इंडियन कैंपस: फ्रांस और भारत, एमएसडीई के साथ मिलकर कानपुर में एक एरोनॉटिकल ट्रेनिंग कैंपस बनाएंगे। इसका मकसद इस अहम और रणनीतिक सेक्टर में ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करना और उन्हें साझा करना है।

● इंडिया-फ्रांस इनोएक्सचेंज ब्रिज: दोनों पक्ष इंडिया-फ्रांस इनोएक्सचेंज ब्रिज की क्षमता को स्वीकार करते हैं। यह दोनों देशों के बीच एक समर्पित रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप कॉरिडोर बनाने के मकसद से शुरू की गई एक द्विपक्षीय स्टार्टअप और इनोवेशन एक्सचेंज पहल है। पहले से चल रही द्विपक्षीय पहलों को आगे बढ़ाते हुए, इनोएक्सचेंज ब्रिज दोनों देशों में रिसर्च लैबोरेटरी, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, इनोवेशन क्लस्टर, निवेशकों और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम तक व्यवस्थित और आपसी पहुंच प्रदान कर सकता है। इससे स्टार्ट-अप और इनोवेटर्स को दोनों देशों में रिसर्च रेजिडेंसी, मिलकर इनोवेशन करने और सहयोग कार्यक्रमों के साथ-साथ 'सॉफ्ट लैंडिंग' (नए बाजार में आसानी से प्रवेश) की सुविधा मिल सकेगी।

● नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्ष एसएमई इकोसिस्टम के बीच और अधिक संवाद व सहयोग के मार्ग तलाशने का इरादा रखते हैं।

● फ्रांस और भारत, संस्थागत स्तर के साथ-साथ फ्रांस और भारत के प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में मौजूदा मजबूत साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत और फ्रांस एक ही सप्ताह के दौरान दो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों की मेजबानी करेंगे: 7-9 सितंबर को बेंगलुरु में 'बेंगलुरु स्पेस एक्सपो' (BSX), और 9-10 सितंबर को पेरिस में इंटरनेशनल स्पेस समिट। ये प्रमुख आयोजन अर्थ ऑब्जर्वेशन और ह्यूमन एक्सप्लोरेशन के क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय अंतरिक्ष सहयोग को गहरा करने के लिए एक संरचित साझा महत्वाकांक्षा की नींव रखने में योगदान देंगे। इसमें फ्रांस की जीरो-जी क्षमताओं और विशेषज्ञता तथा भारतीय भविष्य के लो अर्थ ऑर्बिट अंतरिक्ष स्टेशन से संबंधित संयुक्त गतिविधियां शामिल होंगी, ताकि फ्रांस और भारत के ईकोसिस्टम को एक साथ लाया जा सके।

IV. स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों के लिए एआई और रिसर्च पर आधारित समाधान तैयार करने के लिए साझेदारी 

● सहमति पर आधारित डेटा शेयरिंग: भारत के आईसीएमआर और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब (एचडीएच) से जुड़ी पायलट परियोजनाओं जैसे मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, दोनों पक्ष सुरक्षित डेटा साझाकरण के लिए राष्ट्रीय कानूनी ढांचे के अनुपालन में, सहमति-आधारित आर्किटेक्चर पर कार्य करेंगे। इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है, अन्य क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है और ग्लोबल साउथ सहित इच्छुक भागीदारों के साथ साझा किया जा सकता है। भारत और फ्रांस एआई नवाचार और जन-हितैषी अनुसंधान को आधार प्रदान करने वाले इंटरऑपरेबल तथा अधिकारों की सुरक्षा करने वाले डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए अपने डेटा मध्यस्थों, तकनीकी मानक निकायों और नियामकों के बीच संयुक्त कार्य को प्रोत्साहित करेंगे।

भारत और फ्रांस इस रोडमैप को आपसी विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, रणनीतिक स्वायत्तता तथा विश्वसनीय, मुक्त, समावेशी और मानव-केंद्रित नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता से निर्देशित साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाएंगे। 

भारत-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 का अनुलग्नक 

समझौता-सूचियां

1.

आईआईटी बॉम्बे और इंस्टीट्यूट पॉलिटेक्निक डी पेरिस (IPP), फ्रांस के बीच अनुवाद, इनक्यूबेशन और एक्सेलेरेशन में सहयोग को शामिल करने हेतु मौजूदा समझौता ज्ञापन में संशोधन।

2.

आईआईटी बॉम्बे और पेरिस-सैक्ले विश्वविद्यालय, फ्रांस के बीच अनुवाद, इनक्यूबेशन और एक्सेलेरेशन में सहयोग को शामिल करने के लिए मौजूदा समझौता ज्ञापन में संशोधन।

3.

आईआईटी बॉम्बे और यूनिवर्सिटी कोटे डी'अज़ूर (Université Côte d’Azur), नीस, फ्रांस के बीच फैकल्टी, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ, विभागों और अनुसंधान संस्थानों के मध्य आपसी सहयोग।

4 .

आईआईटी दिल्ली और इंस्टीट्यूट माइन्स-टेलीकॉम, फ्रांस के बीच शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अकादमिक एवं वैज्ञानिक आदान-प्रदान और सहयोग।

5.

आईआईटी दिल्ली, फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) और फ्रांस की 'रासीन द फ्रांस' (Racines de France) के बीच नवाचार एवं उद्यमिता साझेदारी, विशेष रूप से एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट चेंज के क्षेत्र में।

6.

आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) और 'डेसकार्टेस डेवेलपमेंट एंड इनोवेशन' (डीडीआई) इनक्यूबेटर के बीच नवाचार एवं उद्यमिता साझेदारी, जो विशेष रूप से एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट चेंज पर केंद्रित है।

7.

वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने तथा अनुसंधान को बाजार के अनुकूल उत्पादों और समाधानों में बदलने की गति को तेज करने के लिए, आईआईटी दिल्ली के 'फाउंडेशन फॉर इनोवेशन' और 'G2i वेंचर मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड' (इसकी फ्रांसीसी इकाई SC Conseil द्वारा प्रतिनिधित्व) के बीच नवाचार एवं उद्यमिता साझेदारी।

8.

आईआईटी गांधीनगर और कोम्युटो एस.ए. / ब्लाब्लाकार (Comuto SA / BlaBlaCar), फ्रांस के बीच मोबिलिटी, एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सस्टेनेबिलिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम और इनोवेशन इकोसिस्टम के क्षेत्रों में अकादमिक, नवाचार, उद्यमिता और अनुसंधान सहयोग तलाशने हेतु 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट'।

9.

आईआईटी तिरुपति और सफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस (Safran Electronics & Defense), फ्रांस के बीच पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (पीएनटी) में रणनीतिक अकादमिक-उद्योग साझेदारी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में एक राष्ट्रीय इकोसिस्टम का निर्माण करना है।

10.

आपसी हित के क्षेत्रों में अकादमिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी, आईआईएससी और यूडीआईसीई नेटवर्क के बीच आशय की घोषणा।

11.

आईआईटी हैदराबाद, क्रिमसन एनर्जी एक्सपर्ट्स और डसॉल्ट सिस्टम्स के बीच 3D कंप्यूटिंग सिस्टम पर सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन।

12.

साइरन एआई (CYRAN AI) और सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन के बीच समझौता ज्ञापन।

13.

आईआईटी मद्रास और यूनिवर्सिटी डी लिमोज (Université de Limoges - UNILIM), फ्रांस के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट का नवीनीकरण।

14.

आईआईटी मद्रास और ESCP बिजनेस स्कूल, फ्रांस के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट।

15.

आईआईटी मद्रास और क्लेरमोंट ऑवेर्गने इंस्टीट्यूट नेशनल पॉलिटेक्निक (Clermont Auvergne INP), फ्रांस के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट

16.

आईआईटी मद्रास और यूनिवर्सिटी डी टेक्नोलोजी डी कॉम्पिएग्ने (यूटीसी) के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट का नवीनीकरण।

17.

आईआईटी मद्रास और सेंट्रल-सुपेलक (CentraleSupélec), यूनिवर्सिटी पेरिस-सैक्ले (Université Paris-Saclay), फ्रांस के बीच स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट का नवीनीकरण।

18.

यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल आल्प्स (UGA), फ्रांस और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु (IISc), भारत के बीच समझौता ज्ञापन

19.

आईआईटी मद्रास और Ecole Nationale Supérieure des Mines de Saint-Etienne, फ्रांस के बीच अकादमिक सहयोग और स्टूडेंट एक्सचेंज एग्रीमेंट।

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Prime Minister extends greetings on the Parkash Purab of Sri Guru Granth Sahib Ji
September 12, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, extended greetings on the occasion of the Parkash Purab of Sri Guru Granth Sahib Ji.

The Prime Minister said that for centuries, Sri Guru Granth Sahib Ji has shown humanity the way of selfless service, human dignity and togetherness.

Shri Modi expressed hope that the sacred occasion would inspire everyone to deepen these values in society and build a more compassionate and harmonious world.

The Prime Minister wrote on X;

“Greetings on the Parkash Purab of Sri Guru Granth Sahib Ji.

For centuries, it has shown humanity the way of selfless service, human dignity and togetherness.

May this sacred occasion inspire us to deepen these values in our society and build a more compassionate and harmonious world.”