Text of the speech at HT Leadership Summit

Published By : Admin | December 4, 2015 | 14:57 IST
India is heading towards a brighter future, says Prime Minister Modi
Among world economies, India is seen as one of the fastest growing: PM Modi
Having a stable Government is a very big thing and this can't be ignored. Fractured mandates always have uncertainty: PM
Business environment in India is improving at great pace: PM Modi
India is not going to progress from Delhi. States have most important role in India's progress. States & Centre must work together: PM
World must know about the strengths of our states: PM Modi
Happy to cite that over 40 lakh people have given up LPG subsidy. This shows our country is changing: PM Modi
For first time, Rupee bond has been accepted for Railways at London Exchange: PM Narendra Modi
Development of India's eastern part cannot be ignored. They are areas with great potential: PM Modi
There are 18,000 villages in India, which do not have electricity. We are commited to electrify them: PM

उपस्थित सभी महानुभव और इस summit में पधारे हुए सभी वरिष्ठजन

आपने विषय तय किया है कि हम उज्वल भारत की दिशा में है या नहीं ?

मुझे विश्वास है कि ये जो दो दिन मंथन चलेगा पक्ष-विपक्ष में अनेक विचार उभरकर के आएंगे, नए सुझाव आएंगे, स्थितियों का मूल्याकंन होगा, परिस्थिति का आंकलन होगा और उस सब के द्वारा कुछ न कुछ बातें उभर कर आती हैं जो देश के लिए काम आती हैं।

मैं हिन्दुस्तान टाइम्स को और शोभना जी को बधाई देता हूं कि पिछले 12 साल से लगातार ये उनका अनुष्ठान चल रहा है, जिसमें सभी विचार के पक्ष-विपक्ष के विचार के लोग आते हैं, मिलते हैं, संवाद करते हैं। आज जो वैश्विक परिस्थिति है उसमें By and large इस बात को स्वीकृति मिली हुई है कि दुनिया की बड़ी economies में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। और जब भारत सबसे आगे बढ़ने वाला देश माना गया है, तो दूसरी तरफ देखें, तो विश्व की स्थिति पूरी तरह Slowdown की है। China की तो बहुत सी चीजें पिछले दिनों उजागर हुई। Euro region के अंदर 1.5 percent GDP आकर के अटक गया है और ऐसे में world bank कह रही है कि भारत का जीडीपी 7.5 percent और already पिछले तीन महीने का जो हिसाब आया है वो 7.4 आया। अगर आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो, ये हम मानकर के चलते हैं कि भारत उज्वल भविष्य की दिशा में बहुत ही सफलता पूर्वक आगे बढ़ रहा है। ये अचानक नहीं होता है और आज की भारतीय स्थिति को समझना है तो एक वैश्विक संदर्भ में देखना होता है।

दूसरा, हमारे बीते हुये कल के संदर्भ में भी देखना आवश्यक होता है। अगर हम हमारे बीते हुए दो साल, पांच साल जो भी तय करें उसको अगर हम नजरअंदाज कर दें और फिर तराजू लेकर के बैठेंगे तो बात सही नहीं निकलेगी। लेकिन मैं जानता हूं कि यह बहुत मुश्किल काम है। क्योंकि इसके लिए एक खुला मन चाहिए, एक साहस चाहिए कि हम कहां थे, किस हालात में थे। अब उसमें से निकलना कितना कठिन था। चारों तरफ निराशा का माहौल था। यहां बैठे हुए जो उद्योगकार हैं, वो एक पैर तो already बाहर रख चुके थे और दूसरा ले जाने की तैयारी कर रहे थे। अगर इस रूप को पहले ध्यान में लिया जाए और फिर देखा जाए, तो पता चलेगा कि हां भाई ये समझने के लिए मोदी की जरूरत नहीं है, अपने आप समझ आता है कि काफी बदलाव आया है। और इसलिये मैं आशा करूंगा कि हम चीजों को इन दो प्रमुख बातें हैं, एक वैश्विक परिवेश, एक हमारा बीता हुआ कल। और ये जो कुछ भी परिणाम आया है एक तो stable government होना वो अपने आपमें एक बहुत बड़ा योगदान होता है। इसे कोई नकार नहीं सकता है। कितनी ही अच्छी पार्टी हो, अच्छे लोग हों लेकिन अगर factual mandate है, तो आशंकाओं का माहौल बना रहता है। करेंगे नहीं करेंगे, कर पाएंगे नहीं कर पाएंगे। तो सबसे पहले जो बदलाव आया है, जो हमें उज्वल भविष्य की दिशा में ले जाने वाले का अगर सबसे पहला कोई क्रेडिट जाता है और सबसे पहला यशस्वी कदम कोई है तो हिन्दुस्तान की जनता ने उन्होंने बहुमत वाला mandate दिया। Credit goes to सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी है। ये बहुत बड़ा काम देश की जनता ने किया है।

सरकार जब परिवर्तन लाती है अचानक नहीं लाती, एक लम्बा परिश्रम करना पड़ता है। अब हमें मालूम है कि world bank ease of doing business का rating करती रहती है। कई वर्षों से या तो हम स्थिर हैं या फिर लुढ़क जाते हैं। आगे जाने की तो अवस्था हमारे नसीब में ही नहीं थी। और हम भी ऐसे आदी हो गये थे कि हां गुजारा कर लो। मन से हमनें उस स्थिति को स्वीकार कर लिया था। इतने कम समय में अचानक 12 point उछलकर के आगे बढ़ना। दुनिया के जितने भी लोग मिलते हैं वो इस बात को ध्यान से कह रहे हैं कि भई इतना बड़ा jump कैसे लगा। और ease of doing business तब होता है जब राज्य सरकारें, केन्द्र सरकारें मिलकर के निश्चित दिशा में सुधार अभियान चलाते हैं। सरलीकरण करते हैं। Minimum Government Maximum Governance को साकार करते हैं। 20 forms हैं उसको 2 कर देते हैं। प्रक्रिया तीन साल चलती है, उसको छह महीने में ले आते हैं। ऐसे एक-एक चीज , और इसके लिए मैंने पहले राज्यों के सभी अधिकारियों को बुलाया। एक 100 point का चार्टर दिया। दो दिन का workshop किया। आग्रह किया।

लेकिन सबसे खुशी की बात इस form में समझने वाली जो बात है, वो यह है, 12 point उछल कर जाना अच्छी बात ,है अच्छी दिशा है। लेकिन उसमें सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात है, उन राज्यों ने कमाल करकर के दिखाया है। जिसकी तरफ कभी हिन्दुस्तान की आर्थिक जगत वालों का ध्यान कभी जाता ही नहीं है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, ease of doing business में ये rank profile बढ़ा है अपना। इसका मतलब यह हुआ कि हिन्दुस्तान के मुख्य धारा में जिन राज्यों को आर्थिक विकास यात्रा में योगदान कभी गिना नहीं जाता था, वे आज lead role कर रहे हैं। इसका मतलब ये हुआ कि राज्यों में एक नई ताकत, नई ऊर्जा, नया विश्वास पैदा हुआ है। भारत को आगे बढ़ना है तो दिल्ली से देश आगे नहीं बढ़ सकता है। राज्यों के मजबूत खम्बों पर ही देश खड़ा हो सकता है। और अगर हम इस psyche करके चलते हैं कि दिल्ली देने वाला है और राज्य लेने वाला है। तो देश आगे नहीं बढ़ेगा। राज्य और दिल्ली दोनों मिलकर के कंधे से कंधा मिलाकर के चलें, एक दिशा में चलें, गति समान बनाने की कोशिश करें। परिणाम अपने आप निकल आएंगे।

नीति आयोग का जो गठन हुआ है। उसका मूल प्रयास यह है कि राज्य और केन्द्र मिलकर के काम करें। पहली बार केन्द्र और राज्य के पैसों का आवंटन कैसे किया जाए 14 Finance commission ने 42 percent रुपये राज्यों को देने के लिए कह दिया। स्थिति ये बनी है कि आज देश का जो पूरा खजाना है उस खजाने में से करीब 65 प्रतिशत खजाना राज्यों की जेब में है, सिर्फ 35 प्रतिशत दिल्ली के पास है। ये पहले कभी नहीं था। पहले reverse था। 35 प्रतिशत राज्यों के पास था 65 प्रतिशत दिल्ली के पास। ये बदलाव आया। उसके बाद करना था तो मैंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कमेटी बनाई उनको कहा कि देखिए भाई ये काम करना है आप मिल बैठकर के तय करके लाओ। अब तक क्या होता था दिल्ली तय करता था ये करेंगे ये नहीं करेंगे। पहली बार हुआ कि राज्यों ने मुख्यमंत्रियों ने मिलकर के तय किया कि ऐसा करिए। और मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों का अभिनन्दन करता हूं कि उन्होंने भी दिल्ली के प्रति उदारता भी रखी और अपनी चिंता भी की और ऐसा एक समावेशी व्यवस्था बना कर के दी जिसको हमने लागू कर दी । हम राज्यों को कैसे साथ लें। हमारे देश में हम चाहते हैं export हो लेकिन राज्यों का agenda ही नहीं है। और इसलिये quality production, quality packaging, quality branding ये राज्यों की कोई initiative है क्या, राज्यों के उसकी incentive, कोई scheme है क्या। export करने वालों के लिए राज्य कुछ करता है क्या। पहली बार हमने राज्यों में Export Promotion Council बनाने का आग्रह किया। और राज्यों को कहा कि आप अपने राज्य में इसके लिये जो काम करने वाले लोग हैं उनको जरा प्रोत्साहित कीजिये उनको मिलिये उनकी कठिनाइयां समझिये औऱ ग्लोबल मार्केट में वो कैसे जा सकते हैं।

उसी प्रकार से हमारा इतना बड़ा देश है। हम इंडिया कहते हैं, भारत कहते हैं, तो दुनिया को ये समझ नहीं आता कि हम क्या कह रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा उसको मुम्बई का पता है, दिल्ली का पता है, कलकत्ता का पता है। IT revolution के बाद बैंगलोर, हैदराबाद का पता है। पूरे हिन्दुस्तान की ताकत विश्व को मालूम नहीं है। हमारे राज्यों को दुनिया पहचाने ये बहुत आवश्यक है। हमारे राज्यों की अपनी-अपनी ताकत है। पहली बार हमने विदेश व्यवस्था के अंदर राज्यों को जोड़ने का सक्रिय प्रयास किया है। विदेश विभाग में special राज्यों के लिए अलग डिपार्टमेंट बनाया है। और विश्व के नेताओं का राज्यों से मिलना-जुलना बढ़े, राज्यों की ताकत पहचाने। भारत इतना बड़ा विशाल देश है, हम सिर्फ दिल्ली से हिन्दुस्तान दुनिया को नहीं दिखा सकते। राज्यों की ताकत दिखाएंगे तो बदलाव आएगा। ये जो दिशा है वो दिशा बदलाव लाती है।

कभी-कभार आर्थिक दृष्टि से हम लोग उस सोच के लोग हैं। मान लीजिये यानी इसमें दोष, कुल मिलाकर हमने कई वर्षों से जो सुना है हमारी जो सोच बनी है, तो हम चीजों को उसी दायरे में देखते हैं। अगर दिल्ली सरकार ये कहे कि हम एक साल में 20 हजार मेगावाट बिजली के कारखाने लगाएंगे। डेढ़ लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करेंगे। तो आर्थिक जगत में जरूर लिखा जाएगा वाह, सरकार कुछ कर रही है। बड़ा कमाल का काम कर रही है। सरकार बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। क्या मोदी ने decision ले लिया। क्यों 21 हजार मेगा वॉट बिजली एक साल में , लेकिन मोदी ने छोटा काम किया| हिन्दुस्तान के 100 शहरों के साथ MOU किया LED Bulb, street light में LED Bulb बदलना, घरों में LED Bulb बदलना अब तक बीस शहरों का काम पूरा कर दिया। 83 शहरों का काम चल रहा है। जिस दिन ये 100 शहरों का काम पूरा हो जाएगा LED का उस दिन इस देश में 21500 मेगा वॉट बिजली बचेगी। 21500 मेगा वॉट बिजली अगर मोदी कारखाना लगाता है तो हिन्दुस्तान टाइम्स में तो मैं नहीं कह सकता हूं। लेकिन किसी न किसी अखबार में तो Headline हो जाती है। मोदी ने 21500 मेगा वॉट का बिजली का कारखाना लगा दिया। क्योंकि हमने वो सोचा है। 21500 मेगा वॉट बिजली के कारखाने ने सवा लाख करोड़ रुपया का investment मतलब देश का सवा लाख करोड़ रुपया बच गया। LED Bulb लगाने से इन 100 शहरों को और उन सौ शहरों के नागरिकों को हर साल 45000 करोड़ रुपये की बचत होगी। 45000 करोड़ रूपये आप कल्पना कर सकते हैं कि बदलाव कैसे आता है।

अभी मैंने एक छोटा सा Pilot project के रूप में काम किया। चंडीगढ़ में हमने कहा कि जरा technology का उपयोग करके थोड़ा बारीकी से देखें चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त बनाना। विनोद शर्मा अगर यहां होंगे तो उनको कुछ ओर सुनाई देगा। मैं कैरोसीन मुक्त कह रहा हूं। चंडीगढ़ में हर वर्ष 30 लाख लीटर कैरोसीन जाता है। उसमें subsidy जाती है करीब साढ़े तीन करोड़ रूपये की। अब चंडीगढ़ ऐसा शहर है जहां लोगों के पास गैस सिलेंडर भी है फिर कैरोसीन जा रहा है। मतलब कहीं गड़बड़ है। मैंने टेक्नोलोजी का उपयोग किया। मैंने कहा देखो भई और आप जानकर के हैरान होंगे 80 percent कैरोसीन उन घरों में जाता ही नहीं था। फिर भी सरकार का जाता था। और पैसे जाते थे। import करना पड़ता था, खर्च होता था। कहीं ओर चला जाता था। हमने तय किया कि भई जहां गैस सिलंडर है, घर में बिजली उसको कैरोसीन की क्या जरूरत है उसको कोई जरूरत ही नहीं। 80 प्रतिशत कैरोसीन बचा। लेकिन ये जांच करते समय ध्यान में आया कि 3200 गरीब परिवार ऐसे थे जिनमें कैरोसीन का इस्तेमाल होता था। हमने तय किया कि उनको गैस सिलंडर पहुंचाएंगे। और चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त करेंगे। चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त करना मतलब सरकार की तिजोरी में बहुत बड़ी मात्रा में subsidy चोरी होती थी बंद हो गई। Environment को जो नुकसान हो रहा था बंद हो गया। 30 लाख लीटर कैरोसीन जो की डीज़ल में मिक्स होता था, जो total pollution समस्या पैदा करता था वो रुक गया। 30 लाख लीटर कैरोसीन जो की हम विदेशों से import करते थे, देश का फॉरन एक्सचैंज जाता था वो रुक गया। crude oil लाते थे refine करते थे।

मैं देश के संदर्भ में, मैं सिर्फ ये चीजें बताता हूं कि दिशा क्या है। इससे पता चलता है कि आप देखिये गैस सिलंडर, हमारे यहां गैस सिलंडर को हमने Direct Benefit Transfer के साथ जोड़ दिया बैंकों में सीधा subsidy देना शुरू कर दिया। पहले जितने गैस सिलेंडर जाते थे और जब डायरेक्ट बेनिफिट सीधा बैंक Account में जाने लगा, तो करोड़ो की तादाद में गैस सिलंडर लेने वाले कोई निकले ही नहीं। मतलब करोड़ों गैस सिलंडर बच गए यानी की करोड़ों गैस सिलंडर की subsidy बच गई। यानी targeted subsidy। आज देश में अगर मोदी ये निर्णय करता कि हम इतनी subsidy कट कर देंगे। तो जो अपने आप को reformist मानते हैं, वे हफ्ते भर मोदी की तालियां बजाते कि यार subsidy मोदी ने निकाली है। है आदमी में दम है। लेकिन Targeted Subsidy कर के leakages रोक कर के देश के धन को बचाने वाला मोदी reform नहीं दिखता है। और इसलिये सोचने वालों को भी दिशा पकड़नी पड़ेगी कि हम जिसे काम मानते थे। वो ही काम नहीं होता है, जो हम परिणाम चाहते थे, वो परिणाम किसी और रास्ते से भी आ सकता है। देश का भी भला हो सकता है और welfare state के नाते हमारा रास्ता नहीं चला जाता। और इसलिए हम चीजों को कैसे बनाते हैं।

हमारे देश में हम लोगों का स्वभाव कैसा है। हम मान लीजिये विमान में जा रहे हैं, क्योंकि यहां सब विमान वाले बैठे हुए हैं। कुछ पढ़ने की किताबें कुछ चीज बगल वाले सीट खाली है वहां रख दी। हमारी तो सीट पर हम बैठे हैं। बगल वाली सीट हमारी नहीं है। लेकिन हमनें अपनी कुछ चीजें रखी हैं कुछ छोटा बैग,पाउच,किताब रख दी। और विमान चलने से पहले-पहले आखिरी इंसान आ गया और उसकी वो सीट वहां बैठ गया। तो हमें क्या लगता है मेरी सीट ले ली। this is our Psychology यानी जो सीट मेरी नहीं है , सिर्फ मैंने किताब रखी है, उसका मूल मालिक आ गया तो भी मुझे लगता है मेरी सीट ले ली है। हम उस मनोवैज्ञानिक aवस्था में काम करते हैं इसको हम इंकार नहीं कर सकते और ऐसे मनोस्थिति के अंदर अगर मोदी कहता है। जब आपको ईश्वर ने इतना दिया है ये गैस सिलंडर 400-500 की subsidy में क्या लगा है क्यों लेते हो। और मुझे खुशी है मैंने ज्यादा campaign नहीं किया। इस देश के 40 लाख से अधिक लोगों ने गैस सिलेंडर की subsidy छोड़ दी। जो देश बगल वाले की सीट छोड़ने को तैयार नहीं वो खुद की चालीस लाख लोग गैस सिलंडर छोड़ दें। मतलब देश का जन-मन विकास की दिशा में कितना बदला है। इसका ये उदहारण है। और इसलिए बदलाव कैसे आते हैं। ये बदलाव हमें ध्यान आते हैं। हमने भी तय किया कि जिन्होंने 40 लाख गैस subsidy छोड़ी है। ये पैसे मैं सरकार की तिजोरी में नहीं ले जाऊंगा। उन्होंने अगर इतनी उदारता बताई है तो सरकार का भी दायित्व बनता है कि उसको समाज की ताकत में convert करें। इसलिये हमने क्या किया चालीस लाख उन गरीब परिवारों को ढूंढा। इनकी गैस subsidy के बदले में गैस सिलेंडर उनको दिया। subsidy उनको ट्रांसफर की और जो घर में लकड़ी का चूल्हा जलाते थे, खुद का स्वास्थ खराब करते थे, बच्चे रोते रहते थे, पर्यावरण का नुकसान होता था उन चालीस लाख परिवारों को बाहर निकालने का काम किया इतना ही नहीं कोशिश यह है कि जिसने subsidy छोड़ी है उसको हम बताते हैं कि तुम्हारे वाली subsidy राजस्थान के उस गांव में पहुंची है। कैसे बदलाव आता है। ये सब संभव है।

रेलवे, किसी ने सोचा होगा क्या कि दुनिया के बाजार में रुपये की इतनी बड़ी ताकत हो माफ करना मुझे ये हो जाने के बाद भी अभी कइयों को समझ में नहीं आया कि कुछ काम हुआ है। पहली बार London Stock Exchange में रेलवे के लिए रुपये बॉन्ड को स्वीकृति मिलना, वरना गोल्ड चलता है, डॉलर चलता है, पॉउन्ड चलता है, रुपया दुनिया के बाजार में नहीं चलता है। पहली बार लंदन एक्सचैंज ने रुपये बॉन्ड को हमने मंजूरी दे दी रुपया बॉन्ड निकला। अब दुनिया का कोई भी व्यक्ति निवेश करेगा रुपये में करेगा और उसको वापस भी रुपया मिलेगा। ये रुपये की प्रतिष्ठा विश्व में बनना। अब धीरे-धीरे मैं एनटीपीसी को भी उसमें ले जाने वाला हूं। हो सकता है हम सिंगापुर जाएं, लंदन जाएं कहीं और जाएं लेकिन विश्व के बाजार में हमारी ये साख पैदा होना ये अपने आप में आर्थिक विकास के लिए एक साख, साख बहुत बड़ी बात होती है जी। साख बहुत बड़ी बात होती है।

हमारे देश में आपको हैरानी होगी जानकर के और कभी आप जाओगे तो देखना, रेल जाती है ऊपर ब्रिज बना है। एक तरफ यहां बना है एक तरफ यहां से बना है। बीच में खाली है। तो रेलवे वाले permission नहीं देते। अब बन चुका है वो तोड़ने वाला तो है नहीं। permission लेकिन दो-दो साल चार-चार साल हमने एक फॉर्मूला बनाया कि महीने में जिने लोग होंगे एक बार exchange करेंगे बातों को और फॉर्मूला के तहत clear कर देंगे। आज इस प्रकार का कोई project pending नहीं पड़ा है। जो दो-दो, तीन-तीन साल पड़ा रहता था। चीजों को गति कैसे दी जाती है।

हमारे देश में मेरी ये सोच है कि आज हमारे देश का विकास कितना ही क्यों न हो ...मान लीजिए साइकल में हम हवा भरते हैं। तो नापते हैं कि 40 डिग्री हवा गई कि 30 डिग्री गई। मीटर ठीक बताता है लेकिन मान लीजिए कि साइकल की ट्यूब में एक कोने में फुग्गा हो जाए गुबारा हो जाए और हवा वहां चली जाए तो मीटर तो ठीक बताएगा, लेकिन साइकल चलेगी क्या। मैं समझा पा रहा हूं। साइकल की पूरी ट्यूब में समान रूप से हवा पहुंचनी चाहिए तब साइकल चलेगी। अगर उसी ट्यूब में उतने ही point वाली हवा गुब्बारा हो जाए तो साइकल नहीं चल सकती। उसी प्रकार से देश की इकोनोमी भी अगर पश्चिम भारत में ही चलती रहे और पूर्वी भारत में विकास न हो तो ये देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता है। ये बात हमें समझनी होगी पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, असाम हो, बंगाल हो, नॉर्थ ईस्ट हो, ओड़िशा हो, ये ऐसे potential क्षेत्र हैं हिन्दुस्तान के second green revolution की ताकत eastern India में पड़ी हुई है। हमारी पूरी योजना का केन्द्र बिन्दु वो होना चाहिए देश की economy को नई ताकत मिलेगी।

उसी प्रकार से अभी चार दिन पहले एक महत्वपूर्ण काम हुआ, अच्छा होता देश के मीडिया जगत का उस पर ध्यान गया होता। भारत में Railway Engine बनेंगे। कई वर्षों से फाइलें चल रही थीं। फैसला नहीं हो रहा था। Foreign Direct Investment, चालीस हजार करोड़ रुपया। दो railway engine बनाने के उद्योग के लिए already agreement हो गया। काम शुरू हो गया। पिछले हफ्ते की बात है और दोनों major policy है Eastern India को develop करना है। ये दोनों कारखाने बिहार में लगेंगे। और निर्णय अभी किया है मैंने चुनाव के पहले नहीं किया है। कहने का तात्पर्य आपने देखा होगा बजट को बारीकी से हमनें infrastructure में बहुत बड़ी राशि Eastern India में लगाई है। पहली बार हम Eastern India को gas grid से जोड़ रहे हैं।

देश में fertilizer आप 80 हजार करोड़ रुपये यूरिया fertilizer subsidy जाती है। जितने अर्थशास्त्री हैं वो कहते हैं ये पैसे बरबाद कर रहे हो। reform लाओ, subsidy रद्द करो। क्या उसके कोई उपाय है कि नहीं है। हमने एक निर्णय किया। कुछ लोग कहेंगे हमारे समय में हुआ अब मैं उस विवाद में जाना नहीं चाहता हूं। लेकिन कोई भी चीज का परिणाम जब तक उस चीज को 100 percent नहीं करते नहीं आता है। टोकन करने से नहीं आता है। हमें मालूम है हमारे देश में यूरिया में बहुत subsidy दी जाती है करीब 80 हजार करोड़ रुपया। लेकिन कोई देखता नहीं कि ये यूरिया किसान के पास जाता है कि नहीं जाता। यह subsidized यूरिया Chemical Industries के लिए raw material है।

इसलिए क्या होता है कि subsidized यूरिया की चोरी होती है, Chemical Industry वाले मार लेते हें। वो processing करके अपना product बाजार में बेच देते हैं। नाम आता है किसान का, इसको कैसे रोका जाए। हमने तय किया यूरिया को 100 percent Neem Coating किया जाएगा। एक बार यूरिया को Neem Coating किया तो वो खेती के सिवा किसी और काम में आ ही नहीं सकता है। हिंदुस्तान में जितना यूरिया produce होता है, उसका काम पूरा हो गया है। Imported जो यूरिया है, उसका within a month पूरा हो जाएगा। उसका मतलब हुआ कि यूरिया की चोरी गई, चोरी मतलब subsidy बची, मतलब अगर reformist को ठीक लगे तो इसको reform कहना चाहिए।

कामों में efficiency, कामों में target, कामों को कैसे चलाना अगर उस दिशा में हम चलते हैं, हम कैसे परिणाम ला सकते हैं। इसका मैं उत्तर, नमूना दे रहा हूं। At the same time हमने क्या होता था पहला मालूम है कि जो fertilizer कारखाना होता है उसकी inefficiency एक प्रकार से incremental beneficiary रहती थी, ऐसी scheme थी कि भई आपका अगर उत्पादन खर्च 50 रुपया हुआ तो आपको उस प्रकार की subsidy मिलेगी। अगर production cost 100 हो गया, उस प्रकार से मिलेगी मतलब जितना बुरा करोगे उतना ही ज्यादा सब्सिडी मिलेगी। ये चलता था। हमने आकर तय किया सबकी input cost की जो कीमत है वो common कर दी। गैस को वो हमने common कर दिया सारी चीजें। अब हमने कह दिया सबका rate fix होगा। बाजार में जाएगा सब्सिडी fix होगी। अब उनका efficiency level बढ़ाने की नौबत आ गई है। चीजों को अगर थोड़ा involve होकर के बदलते हैं तो चीजें बदलती हैं।

हमारे देश में, मैं हिसाब लगा रहा था करीब 85 major projects, installed projects, शिलान्यास पता नहीं किस प्रधानमंत्री ने किया होगा, वो तो पत्थर शायद गुम हो गया होगा और अरबों-खरबों रुपयों के project, मैंने review शुरू किया। आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं करीब 60-65 project उसमें से already काम आगे बढ़ने लग गया। अभी आपने देखा होगा डाभोल का power generation , Maharashtra में दो साल से बंद पड़ा था अभी पिछले महीने चालू हो गया|हमारे देश में बिजली के कारखाने, कोयला उत्पादन बंद था, बिजली के कारखाने बंद थे। बिजली नहीं थी, उद्योग बंद थे, उद्योग बंद थे, रोजगार नहीं था। रोजगार नहीं था, Economy ठप पड़ी थी। कैसा विष चक्र चल रहा था। कोयले पर हमने ध्यान केंद्रित किया और highest coal उत्पादन record break कर दिया हमने। बिजली को पहुंचाया और भारत आजाद होने के बाद सबसे ज्यादा बिजली पैदा करने का record हमने तोड़ दिया। अब ये बिजली पैदा होने का record टूटने का काम है कि नहीं मैं नहीं जानता हूं लेकिन हुआ है। बिजली का झटका लगे, बिजली बंद हो, तब तो हमारा ध्यान जाए लेकिन बिजली इतनी तेज गति से सुधार हो आज करीब साढ़े 8 प्रतिशत growth है उसका, छोटी बात नहीं है।

Infrastructure विकास के लिए ये सबसे अहम चीज है, वो बदलाव ला रही है तो ये चीजें हैं परिवर्तन कैसे आता है उसका देखते हैं। एक दिन मैं देख रहा था, आजादी के 60 साल हो गए, बिजली पहुंचनी चाहिए। मैं फिर कहता हूं, मैं किसी की आलोचना करने नहीं आया हूं। आजादी के 70 साल होने आए हैं, 18 हजार गांव, जहां आज बिजली का खंभा भी नहीं है। मैंने अफसरों को पूछा, ऐसा तो नहीं है कोई पुरानी सरकारों ने तय नहीं किया होगा, उन्होंने भी किया होगा। कोई ऐसा थोड़ा चाहेगा कि काम न हो लेकिन किया होगा। मैंने कहा नहीं जी मुझे ऐसा नहीं करना है, मुझे परिणाम चाहिए और मैंने 15 अगस्त को लाल किले से कह दिया 1000 दिन में मैं 18 हजार गांव में बिजली पहुचाऊंगा। अब जो काम 70 साल में नहीं हुआ वो अगर मैं हजार दिन में करना चाहता हूं तो आप जानते हैं कि कितनी तकलीफ होती है लेकिन मुझे 1000 दिन में 18 हजार गांव करने हैं तो per day मुझे करीब-करीब मुझे 19 गांव Per day मुझे बिजली पहुंचानी चाहिए per day तब जाकर के...... आप सबसे मेरा आग्रह है कि आप Mobile Phone पर एक App ले लीजिए, download कीजिए ग्रामीण विद्युतीकरण यहां से बाहर जाकर के, यहां तो शायद जैमर होगा लेकिन आप कीजिये और उसमें आप देख सकते हैं कि per day किस गांव में क्या काम हो रहा है, इतनी transparency और आज 100 दिन हुए हैं। मैंने घोषणा की करीब-करीब 100 दिन हुए हैं अब तक मुझे 1900 गांवों में बिजली का काम पूरा करना चाहिए था। कल रात को मैंने देखा जरा यहां आने से पहले App पर तो 3004 गांव पूरे हो चुके हैं और आप अपने mobile phone पर देख सकते हैं कि किस गांव में क्या चल रहा है। खंभे पहुंचे हैं, तार पहुंचा, लोग पहुंचे उसमें जो engineer काम कर रहा है उसका mobile number और e-mail address भी रखा है। कहने का तात्पर्य ये है कि challenge रूप में काम स्वीकार किया है। आजादी के 70 साल बाद जब वो अपने गांव में बिजली देखेगा। मुझे बताइए वो बिजली गरीब के काम आयेगी कि नहीं आयेगी। देश गरीब के काम आ रहा है कि नहीं आ रहा है। अगर हम तय करें, चीजें बदल सकते हैं।

हमने सागरमाला, भारतमाला, भारतनेट कुछ ऐसे initiative लिए हैं। आज global economy में Port sector बहुत ही important है। अगर हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन हमारा देश क्या था रेलवे अलग, Port अलग, रेलवे वाला train कहां लगाता है, जहां political MP का pressure आता है वहां 2 kilometer डाल देता है और Parliament में भी पूरे रेलवे बजट पर ताली नहीं बजती उसके गांव में रेल आई या नहीं उस पर बजती है....हमने कहा कि चलिए, हम Port Sector का अपना रेल department बनाएं और Port Rail Department बनाया इधर से ये रेल जाएगी औऱ वो Port से इधर दोनों रेल जुड़ेंगी और जब तक हम Port को Rail Connectivity से नहीं जोड़ते हैं, हमारे goods transportation को global level का नहीं बनाते हैं। हम Globally competitive बन ही नहीं सकते हैं। ये Infrastructure का एक ऐसा क्षेत्र हमने चुना है और आने वाले दिनों में जाएंगे। हमारे देश में जो reformist लोग हैं वो कहेंगे आप disinvestment करो, ये सरकार है यार देखो। Strike होती है उसको कोई पूछने वाला नहीं, पहले page पर Photo आती है मोदी मुर्दाबाद-मोदी मुर्दाबाद यानि देश कैसे चल रहा है।

हमने Shipping company सब लोग कहते हैं घाटे में कई चल रही थी, कई सालों से घाटे में चल रही थी। आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं, घाटे में से तो बाहर निकाला इस वर्ष भारत की Shipping company profit में जा रही है। यानि हमारे पास दो ही रास्ते हैं क्या, एक या तो disinvestment करो या बंद कर दो। तीसरा रास्ता भी है उसको corporatize करो, उसको culture बदलो, work culture बदलो और apolitical कर दो, efficiency लाओ, आप स्थितियों को बदल सकते हो। ऐसे अनेक initiative हैं। जिसके कारण मुझे मालूम नहीं समय का क्या हाल है तो मुझे parliament जाना है। खुशखबरी है कि parliament चल रही है और इसकी credit मोदी को नहीं जाती है, सभी दलों को जाती है, सभी दलों को जाती है। मेरा कहने का तात्पर्य ये है कि आप कोई भी sector ले लीजिए, मैं अनगिनत गिना सकता हूं, एक सप्ताह भर मैं भाषण कर सकता हूं। देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हमेशा कार्यक्रमों के आधार पर हम सोचते हैं तो एक सीमा आ जाती है। सबसे पहली बात होती है नीयत और मैं मानता हूं सफलता का मूल आधार नीयत होती है और नीयत के प्रकाश में कौन-सी नीति बनती है और उस नीति को लागू करने के लिए कौन सी राणनीति लाते हो और उस रणनीति को सफल करने के लिए कौन सा आपका time table है, road map है, implementation speed है।

आज देश में विचारों की, सुझावों की कमी नहीं है। आवश्यकता है उत्तम बातों को लागू करना, धरती पर उतारना। मेरा प्रयास है चीजों को धरती पर कैसे उतारूं और आज मैं कह सकता हूं कि जितनी चीजें देखते हैं आप अचानक नहीं हुई हैं एक बहुत ही सजग प्रयास का परिणाम हैं कि जिसके कारण ये संभव हुआ है और ये प्रयास निरंतर चलते रहेंगे, ये देश आगे बढ़कर रहेगा, आप विश्वास कीजिए।

सारी दुनिया इस बात को मान रही है और हमारा problem क्या है जी, विवेकानंद जी ने सालों तक यहां काम किया लेकिन जब तक शिकागो से चिल्लाए नहीं देश को पता नहीं चला, लेकिन अब दुनिया कह रही है कि देश आगे बढ़ रहा है तो यहां के लोग भी मान लेंगे मुझे विश्वास है और जिधर भी देखोगे देश आगे बढ़ रहा है।

मैं फिर एक बार इस समारोह में मुझे आने के लिए निमंत्रण दिया, मैं आपका आभारी हूं।

मेरी कोशिश रही है कि जिस विषय पर आप चाहते थे उस विषय पर मैंने बोलने का प्रयास किया है क्योंकि मुझे आदत नहीं है इधर-उधर जाने की चुनाव है तो उस mood में होता हूँ। यहां हूं तो उस mood में होता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद

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Those who have the courage to find new solutions to challenges, for them, the challenges will become opportunities: PM
Keep your curiosity alive in life, keep your learning instinct : PM
Question things that are accepted without a thought, but don't just stop at questioning; have the courage to also find their solutions: PM
Today, India is working towards self-reliance in economic, technological and industrial sectors, forming a strong foundation for Viksit Bharat: PM
Today, new sectors are emerging in the country for our youth: PM

শিক্ষামন্ত্রী প্রহ্লাদ যোশী, আমার বন্ধু হরিশ সালভে, অধ্যাপক অভয় করন্দিকর, আইআইটি দিল্লির ডিরেক্টর অধ্যাপক রঙ্গন ব্যানার্জী, সকল অধ্যাপকবৃন্দ, অন্যান্য গণ্যমান্য ব্যক্তিবর্গ এবং সকল সহপাঠী ছাত্রছাত্রী।

 আজ দেশের সকল প্রতিভাবান তরুণ-তরুণীদের জন্য এক নতুন যাত্রা শুরু হলো। তোমরা তোমাদের জীবনের এক স্মরণীয় মুহূর্তের সাক্ষী হচ্ছো। উত্তেজনা, উদ্দীপনা, স্বপ্ন এবং আবেগে পরিপূর্ণ এই মুহূর্তের অংশ হতে পারা, আইআইটি দিল্লির এই ক্যাম্পাসে আসা এবং তোমাদের সাথে এই অভিজ্ঞতা ভাগ করে নেওয়া আমার জন্যও খুব বিশেষ। শেষবার যখন আমি সমাবর্তনে যোগ দিয়েছিলাম, তখন সারা দেশ কোভিড-১৯ মহামারীর মধ্যে দিয়ে যাচ্ছিল। তখন আমি ভার্চুয়ালি যোগ দিয়েছিলাম, কিন্তু আজ আমি তোমাদের মতো সকল তরুণ-তরুণীদের মাঝে উপস্থিত। আর সে কারণেই আমার খুব ভালো লাগছে।

বন্ধুগণ,

 আজ যেমন তোমাদের পরিবার গর্বিত বোধ করছে, আমিও তোমাদের সকলের জন্য গর্বিত। কারণ, তোমরা শুধু একটি ডিগ্রিই পাচ্ছো না; তোমরা দেশের জন্য অনেক কিছু করার স্বপ্ন নিয়ে এখান থেকে যাচ্ছো। আজ অনেক ছাত্রছাত্রী তাদের কৃতিত্বের জন্য পদকও পেয়েছে। এর জন্য আমি তোমাদের সকলকে অভিনন্দন জানাই। কিন্তু আমাদের যদি এক বা দুটি মেয়ে থাকত, তাহলে আরও ভালো হতো। দুঃখিত, শুধু এক বা দুটি কেন, আরও বেশি থাকা উচিত ছিল। আজ আইআইটি দিল্লিতে এআই (AI) সম্পর্কিত কিছু নতুন উদ্যোগও চালু করা হয়েছে, এবং আমি এর জন্য আপনাদের সকলের শুভকামনা জানাই।

 বন্ধুগণ,

 আজ আপনারা সবাই এবং সমস্ত ছাত্রছাত্রীরা এই অনুষ্ঠানে উপস্থিত আছেন, কিন্তু তাদের মনের গভীরে নিশ্চয়ই অন্য কিছু চলছে। আমি বাবা বাগেশ্বর নই, কিন্তু নিশ্চয়ই কিছু একটা চলছে। প্রত্যেক ছাত্রছাত্রীরই আগামীকালের নিজস্ব স্বপ্ন আছে। অনেক ছাত্রছাত্রী তাদের প্রথম বেতনের জন্য অপেক্ষা করবে। কেউ কেউ নতুন শহরে নতুন করে শুরু করার প্রস্তুতি নেবে। অনেক বন্ধু তাদের প্রথম স্টার্টআপের স্বপ্ন দেখবে। কেউ কেউ পরবর্তী প্রতিযোগিতামূলক পরীক্ষার দিকে লক্ষ্য স্থির করবে। প্রত্যেকের পথ আলাদা, প্রত্যেকের স্বপ্ন আলাদা, কিন্তু এত কিছুর পরেও, একটি অনুভূতি আপনাদের সকলের মধ্যে একই রকম হবে: মনে করুন সেই দিনটির কথা, যেদিন আইআইটি দিল্লিতে আপনাদের প্রথম দিন ছিল এবং আজকের দিনটির কথা। তোমরা হয়তো ভাবছো যে এই তো সেদিন ওরিয়েন্টেশন হলো, আর এখন সমাবর্তন এসে গেছে। ওরিয়েন্টেশন থেকে সমাবর্তন পর্যন্ত এই যাত্রাপথ থেকে তোমরা অপার তৃপ্তি পাবে। আর জীবনের নতুন এক অধ্যায় শুরু করার উত্তেজনাও অনুভব করবে। তাই আমি বলব, এই মুহূর্তটাকে পুরোপুরি উপভোগ করো। ভবিষ্যতে যখন তোমাদের দায়িত্ব আরও বাড়বে, তখন এই জায়গার স্মৃতিগুলো তোমাদের নিশ্চয়ই অতীতে ফিরিয়ে নিয়ে যাবে। সেগুলো তোমাদের শক্তিও জোগাবে। প্রতিটি হোস্টেলের স্মৃতি—কুমায়ুন, আরা, কারা, উইন্ডি, নীল, কৈলাশ, হিমাদ্রি, আন্তঃ-হোস্টেল প্রতিযোগিতার গল্প, পুরোনো খুনসুটি—ছেড়ে যাওয়ার আগে এমন অনেক কিছুই তোমাদের অবশ্যই মনে রাখা উচিত।

আর বন্ধুগণ,

 এটা শুধু পড়াশোনার ব্যাপার নয়; এমনও হতে পারে যে জিয়া সরাইয়ের পোয়াও আজ কিছু লোককে ডাকছে। সময় হয়েই গেছে, আর তোমরা হয়তো সাতপুরা মেসের পরোটা মিস করছো। তোমাদের মধ্যে অনেকেই হয়তো উইন্ড টি-এর সাথে আরও কিছুক্ষণ সময় কাটাতে চাইবে, আর যখন উইন্ড টি খেতে যাবে, তখন আমার কথাও মনে রেখো। কেউ কেউ হয়তো তাদের বিভাগে আবার যেতে চাইবে। কেউ কেউ হয়তো তাদের প্রিয় আড্ডার জায়গায় আরেকটু বেশি সময় বসে থাকতে চাইবে।

 আর বন্ধুগণ,

 এই আবেগঘন মুহূর্তে আমি তোমাদের একটা কথা অবশ্যই বলব: জীবন যখনই তোমাদের পেছনে ফিরে তাকানোর সুযোগ দেবে, তোমরা ক্যাম্পাস জীবনের কথা মনে করবে; তোমাদের বন্ধু, শিক্ষক, পরামর্শদাতা এবং সহায়ক কর্মীদের কথা, যারা তোমাদের পরিবার হয়ে উঠেছে; তোমাদের অধ্যাপকদের কথা, যারা তোমাদের মতো প্রতিভাদের গড়ে তোলার দায়িত্ব নিয়েছিলেন; এবং তোমাদের 'ইনস্টিটিউট', যা ধীরে ধীরে তোমাদের ঘর হয়ে উঠেছে। প্রতিটি সাফল্যে তোমরা তাদের সবাইকে মনে রাখবে। তোমরা তাদের সকলের প্রতি কৃতজ্ঞ থাকবে। আর তাই, এখান থেকে যাওয়ার সময় তাদের সম্পদ হিসেবে সঙ্গে নিয়ে যেও। তাদের ভুলে যেও না, পেছনে ফেলে যেও না, সঙ্গে নিয়ে যেও। আমার পরামর্শ থাকবে, এখান থেকে যাওয়ার আগে তোমরা এখানকার প্রত্যেক সদস্যের সাথে দেখা করবে, এবং যেখানেই থাকো না কেন, এই সম্পর্কটা সতেজ রাখার চেষ্টা করবে।

বন্ধুগণ,

 আজ তোমরা এই ইনস্টিটিউট ছেড়ে যাচ্ছ এমন এক সময়ে যখন পৃথিবী দ্রুত বদলে যাচ্ছে। বিশ্বের কৌশলগত সমীকরণগুলো দ্রুত বদলে যাচ্ছে। বৈশ্বিক ক্ষমতার ভারসাম্যও প্রতি মুহূর্তে পরিবর্তিত হচ্ছে। আর এর পেছনের সবচেয়ে বড় চালিকাশক্তি হলো প্রযুক্তির গতি। আগামী ২০-৩০ বছরে বিশ্ব কেমন হবে, তা আজ কেউই নিশ্চিতভাবে বলতে পারে না।

 কিন্তু বন্ধুগণ,

 যখনই পরিবর্তনের সময় আসে, তখনই নতুন চ্যালেঞ্জ এবং নতুন সুযোগও আসে। পৃথিবী বদলাবে, প্রযুক্তি বদলাবে, শিল্পক্ষেত্র বদলাবে, এবং পেশাও বদলাবে। কিন্তু, এই সবকিছুর মাঝে আমার কথাটি মনে রেখো: যারা শেখে, তারাই জয়ী হয়। যাদের নতুন চ্যালেঞ্জের নতুন সমাধান খুঁজে বের করার সাহস আছে, তাদের জন্য চ্যালেঞ্জগুলোই সুযোগে পরিণত হয়। আর এটাই তোমরা আইআইটি দিল্লি থেকে শিখেছ। সর্বোপরি, তোমাদের ডিগ্রি কী বলে? এটা কি শুধু এই প্রমাণ যে তোমরা পরীক্ষায় পাশ করেছ? ভালো সিজিপিএ পেয়েছ? নাকি ভালো চাকরি পেয়েছ? অবশ্যই, এই সবকিছুরই নিজস্ব গুরুত্ব আছে, কিন্তু আমি বিশ্বাস করি তোমাদের ডিগ্রি পৃথিবীকে বলে যে তোমরা কঠিন সমস্যার সমাধান করতে জানো। আইআইটি দিল্লিতে তোমাদের যাত্রার কথা মনে করো। এখানে আসাটা সহজ ছিল না, সেখানে পড়াশোনা করাও সহজ ছিল না। কিন্তু তোমরা হাল ছাড়োনি। এই ডিগ্রি তোমরা রাতারাতি পাওনি। প্রতিটি বিষয়, প্রতিটি প্রজেক্ট, মধ্য-সেমিস্টার এবং শেষ সেমিস্টার, এই ছোট ছোট পদক্ষেপগুলোই তোমাদের এখানে নিয়ে এসেছে। জীবন এই নীতিই অনুসরণ করে। যখনই কোনো চ্যালেঞ্জকে বিশাল মনে হবে, ভয় পেয়ো না; সেটিকে ছোট ছোট অংশে ভাগ করে নাও। আপনারা নিজ চোখে দেখেছেন, ল্যাবে কোনো সমস্যার সমাধান কীভাবে একটি অচলাবস্থায় পৌঁছে যেত। সিমুলেশনের মাধ্যমে সমাধান খুঁজে পেতে ঘণ্টার পর ঘণ্টা বা দিনের পর দিন লেগে যেত। কিন্তু তারপর আপনারা সমস্যাটির সমাধান করেছেন এবং নতুন কিছু আবিষ্কার করেছেন। একইভাবে, জীবনেও নানা প্রতিকূলতা আসবে, কিন্তু অসুবিধা তো থাকবেই; সেগুলো একা আসে না। যখন আসে, তখন সুযোগও নিয়ে আসে। সবাইকে শুধু সতর্ক ও সজাগ থাকতে হবে। এই প্রতিষ্ঠান আপনাদের যা শিখিয়েছে, তা মনে রাখবেন।

 বন্ধুগণ,

 আমি আপনাদের সাথে জীবনের কিছু বাস্তব শিক্ষাও ভাগ করে নিতে চাই। ক্যাম্পাস জীবন এবং ক্যাম্পাসের বাইরের জীবনের মধ্যে বিশাল পার্থক্য রয়েছে। আইআইটি পরীক্ষার একটি সিলেবাস থাকে, কিন্তু জীবনের পরীক্ষায় সবকিছুই সিলেবাসের বাইরে। মনে রাখবেন, ক্যাম্পাস জীবনে সমস্ত মৌলিক বিষয় পরিষ্কার ছিল। কী পড়তে হবে, কোন অ্যাসাইনমেন্টগুলো শেষ করতে হবে, কোন পরীক্ষাগুলো দিতে হবে সবকিছুই আগে থেকে ঠিক করা থাকত। কিন্তু জীবনটা ভিন্ন; এখানে কোনো নির্দিষ্ট কোর্স বা প্রশ্নপত্র নেই। কখনও কখনও, আসল প্রশ্নটা কী ছিল, সেটাও কেউ বলে না; সেই প্রশ্নটা আপনাকে নিজেই খুঁজে বের করতে হয়। আমি অনেক আইআইটি প্রাক্তনীর এই পথচলা প্রত্যক্ষ করেছি। তাদের সাফল্য শুধু সঠিক উত্তরের কারণেই আসেনি; বরং এমন সব প্রশ্ন চিহ্নিত করার ক্ষমতার কারণে এসেছিল, যেগুলোকে এই পৃথিবী প্রশ্ন হিসেবেই গণ্য করা বন্ধ করে দিয়েছিল। অন্যরা যেসব সমস্যার সাথে আপোস করে নিয়েছিল, তারা সেগুলোর সমাধান খুঁজে বের করেছিল। তাই, জীবনে কৌতূহল বজায় রাখুন, আপনার শেখার প্রবৃত্তিকে সজীব রাখুন, সচেতন থাকুন। যে বিষয়গুলো বিনা চিন্তায় মেনে নেওয়া হয়, সেগুলোকে পরীক্ষা করুন এবং প্রশ্ন করুন। কিন্তু শুধু প্রশ্ন করেই থেমে যাবেন না; সমাধান খুঁজে বের করার সাহস রাখুন। এই চিন্তাভাবনাই আপনাকে অন্যদের থেকে আলাদা করবে।

বন্ধুগণ,

 আপনারা সবাই জানেন যে প্রতিটি প্রজন্মকে তার নিজস্ব চ্যালেঞ্জের মুখোমুখি হতে হয় এবং প্রতিটি প্রজন্মের নিজস্ব জাতীয় দায়িত্বও থাকে। আমাদের দেশও পরাধীনতার একটি সময় দেখেছে, যখন সেই প্রজন্মের একটাই লক্ষ্য ছিল: ভারতের স্বাধীনতা। তারা এর জন্য ত্যাগ স্বীকার করেছিলেন এবং দীর্ঘ সংগ্রাম করেছিলেন। আজ আমরা এক স্বাধীন ভারতে শ্বাস নিচ্ছি, সেই প্রজন্মের দৃঢ়তা, ত্যাগ এবং নিষ্ঠার কারণেই।

 এবং বন্ধুগণ,

 এই যুগে আমরা ভিন্ন চ্যালেঞ্জের মুখোমুখি, এবং সেই কারণে আমাদের দায়িত্বও ভিন্ন। আপনার জীবনের আগামী ৩০-৩৫ বছরে আপনি যা কিছু করবেন, তা একটি উন্নত ভারতের দিকে আমাদের যাত্রাকে প্রভাবিত করবে। সুতরাং, আপনাদের প্রতিটি সিদ্ধান্ত দেশের জন্য কতটা উপকারী হবে এবং কী কী চাহিদা পূরণ করবে, তার উপর ভিত্তি করে হওয়া উচিত। আজ ভারত প্রতিটি ক্ষেত্রে আত্মনির্ভরশীল হওয়ার জন্য কাজ করছে: অর্থনৈতিক আত্মনির্ভরশীলতা, প্রযুক্তিগত আত্মনির্ভরশীলতা এবং শিল্পক্ষেত্রে আত্মনির্ভরশীলতা। এটি একটি উন্নত ভারতের শক্তিশালী ভিত্তির প্রমাণ। এই শক্তিশালী ভিত্তির উপর আপনাদের একটি মহৎ ও সুন্দর উন্নত ভারত গড়তে হবে।

বন্ধুগণ,

 একটি উন্নত ভারত গড়ার এই যাত্রায় আপনাদের ভূমিকা অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ। দেশের যুবসমাজ যত বেশি ক্ষমতায়িত হবে, দেশ তত বেশি শক্তিশালী হবে। এই দৃষ্টিভঙ্গি নিয়ে আমরা এমন অনেক ক্ষেত্র উন্মুক্ত করেছি যেখানে আগে যুবকদের প্রবেশাধিকার বন্ধ ছিল। সরকারের আধুনিক নীতির কল্যাণে দেশে যুবকদের জন্য নতুন নতুন ক্ষেত্র তৈরি হচ্ছে।

 বন্ধুগণ,

 গতবার যখন তোমাদের সিনিয়রদের সমাবর্তনে ভার্চুয়ালি যোগ দেওয়ার সুযোগ পেয়েছিলাম, তখন আমি তরুণদের জন্য মহাকাশ খাতে চলমান সংস্কারগুলো নিয়ে আলোচনা করেছিলাম। তার আগে পর্যন্ত এই খাতের প্রায় সমস্ত কাজই সরকার সামলাত। কিন্তু আজ, সেই একই মহাকাশ খাত হাজার হাজার তরুণের জন্য নতুন সম্ভাবনার আকাশ হয়ে উঠেছে। আজ আমাদের তরুণরা নিজেদের লঞ্চ ভেহিকেল তৈরি করছে, রকেট উৎক্ষেপণ করছে এবং এমন সব কীর্তি অর্জন করছে যা বিশ্বের মাত্র কয়েকটি দেশই করতে পেরেছে। আমি নিশ্চিত যে আজ আমাদের দেশের কোথাও কোনো তরুণ প্রকৌশলী গর্বের সাথে বলছে, "আমার বংশে প্রথম রকেট তৈরি।" সেমিকন্ডাক্টর খাতও আমাদের জন্য একটি উদাহরণ। যখন আমরা এই দিকে পদক্ষেপ নিয়েছিলাম, তখন কিছু লোক প্রশ্ন তুলেছিল। বলা হয়েছিল যে ভারত এটা করতে পারবে না। কিন্তু আজ প্রথম সেমিকন্ডাক্টর ইউনিটগুলিতে উৎপাদন শুরু হয়ে গেছে। আমি দৃঢ়ভাবে বিশ্বাস করি যে চিপ থেকে শুরু করে জাহাজ পর্যন্ত সবকিছু এখানেই তৈরি হবে, তোমাদের নিজেদের হাতে। এবং কোথাও কোনো তরুণ আত্মবিশ্বাসের সাথে বলছে, "আমার বংশে প্রথম ভারতে চিপ তৈরি।"

বন্ধুগণ,

 আজ আমাদের ড্রোন খাতের দিকে তাকাও। তরুণরা এই ক্ষেত্রে নতুন সম্ভাবনা তৈরি করছে। কোথাও মাঠে ড্রোন ব্যবহার করা হচ্ছে, কোথাও ড্রোন ওষুধ পৌঁছে দিচ্ছে, আবার কোথাও ড্রোন দেশ রক্ষায় সাহায্য করছে। আর আজ, কোথাও একজন তরুণ বলছে, "আমার বংশে আমিই প্রথম ড্রোন তৈরি করলাম।"

 বন্ধুগণ,

 তোমাদের মতো এই প্রজন্মের তরুণরাই ভারতের স্টার্টআপ বিপ্লবকে রূপ দিয়েছে এবং শক্তিশালী করেছে। এই প্রতিষ্ঠান থেকে বহু প্রতিষ্ঠাতা উঠে এসেছেন। যদি একটি প্রতিষ্ঠান থেকে এত কিছু হতে পারে, তবে ভাবুন সারা দেশে কী বিপুল সম্ভাবনা তৈরি হচ্ছে। ইউনিকর্ন, ডিজিটাল পেমেন্ট এবং ফিনটেক বিপ্লব লক্ষ লক্ষ তরুণকে প্রথমবারের মতো নতুন কিছু করার সুযোগ দিয়েছে।

 বন্ধুগণ,

 এমন অনেক ক্ষেত্র রয়েছে যেখানে ভারত এক নতুন যাত্রা শুরু করছে, এবং দেশ তোমাদের মতো তরুণদের দিকে বিরাট দায়িত্ব ও বিরাট প্রত্যাশা নিয়ে তাকিয়ে আছে। কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা, ডেটা সেন্টার, গুরুত্বপূর্ণ খনিজ, গভীর সমুদ্র অনুসন্ধান, ব্যাটারি, শক্তি সঞ্চয়, শক্তি সুরক্ষা, বৈদ্যুতিক গতিশীলতা, কোয়ান্টাম কম্পিউটিং এবং আরও অনেক ক্ষেত্র তোমাদের প্রতিভা, উদ্ভাবন এবং নেতৃত্বের অপেক্ষায় রয়েছে, এবং আমিও তোমাদের জন্য অপেক্ষা করছি।

 বন্ধুগণ,

 এখন আপনাদের সকলের সামনে আরও একটি দারুণ সুযোগ রয়েছে, আর সেই নতুন সুযোগটি হলো গবেষণা। আজ দেশে উদ্ভাবনী গবেষণার তীব্র প্রয়োজন, এবং আমরাও গবেষণার প্রতি সমানভাবে মনোযোগী। প্রধানমন্ত্রীর গবেষণা ফেলোশিপ আমাদের প্রতিভাবান তরুণদের গবেষণা করার সুযোগ করে দিচ্ছে। ধারণাগুলোকে বিকশিত হওয়ার সুযোগ করে দিতে গবেষণা উন্নয়ন ও উদ্ভাবন প্রকল্প চালু করা হয়েছে। দেশে বিজ্ঞান ও গবেষণাকে শক্তিশালী করার জন্য জাতীয় গবেষণা ফাউন্ডেশনও প্রতিষ্ঠা করা হয়েছে। গবেষণা খাতের জন্য এক লক্ষ কোটি টাকা পর্যন্ত তহবিলের ব্যবস্থা করা হচ্ছে। সহজ কথায়, আমি বলতে চাইছি, এক লক্ষ কোটি। আমি আপনাদের এটাই বলছি।

 একইভাবে, বন্ধুগণ,

 শিক্ষামূলক উপকরণে প্রবেশাধিকারও সহজ করা হয়েছে। আজ ‘এক দেশ এক সাবস্ক্রিপশন’-এর মাধ্যমে দেশের ক্ষুদ্রতম শহরগুলোতেও বিশ্বখ্যাত গবেষণা জার্নালগুলো কোনো অতিরিক্ত খরচ ছাড়াই পৌঁছে যাচ্ছে।

বন্ধুগণ,

 আমি জানি এই পথে আমাদের এখনও অনেক দূর যেতে হবে, এবং এটি কেবল গবেষণার প্রতি আপনাদের অঙ্গীকারের মাধ্যমেই অর্জন করা সম্ভব। এই বিষয়ে দেশের আপনাদের কাছে প্রত্যাশা রয়েছে, এবং সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ হলো, আপনাদের ওপর আস্থা রয়েছে।

 বন্ধুগণ,

 এখন আমি তোমাদের মনোযোগ-বিচ্যুতি নিয়ে কথা বলব। যখন আমরা বড় কোনো লক্ষ্য অর্জনের জন্য যাত্রা শুরু করি, তখন একটি বড় মনোযোগ-বিচ্যুতিও দেখা দেয়। এই মনোযোগ-বিচ্যুতি হলো একে অপরের সাথে তুলনা করা, কে কী প্যাকেজ পেয়েছে, কে কোন কোম্পানিতে যোগ দিয়েছে, কোন শহরে, কোন দেশে, কে স্টার্টআপ শুরু করেছে। আজকের সোশ্যাল মিডিয়ার যুগে এই তুলনাগুলো কখনও শেষ হয় না। কিন্তু মনে রেখো, জীবন কোনো লিডারবোর্ড নয়; তোমার আসল দৌড় অন্য কারও সাথে নয়, বরং নিজের সাথেই। প্রতিদিন গতকালের চেয়ে আরও ভালো হওয়ার চেষ্টা চালিয়ে যাও। এছাড়াও, তোমার শারীরিক ও মানসিক স্বাস্থ্যের যত্ন নাও।

 বন্ধুগণ,

 আমি আবারও সকল ছাত্রছাত্রীকে আমার আন্তরিক অভিনন্দন জানাই। আমি তোমাদের বাবা-মা ও পরিবারকে বিশেষ অভিনন্দন জানাই এবং তোমাদের শিক্ষক ও যারা এই যাত্রাপথে প্রতিটি পদক্ষেপে তোমাদের পাশে ছিলেন, তাদের সকলের জন্য আমার শুভকামনা রইল। তোমাদের ভবিষ্যৎ উজ্জ্বল হোক এবং তোমরা নতুন নতুন উচ্চতায় পৌঁছাতে থাকো। এই শুভকামনা সহ, তোমাদের অনেক অনেক ধন্যবাদ।

 নমস্কার!