Text of the speech at HT Leadership Summit

Published By : Admin | December 4, 2015 | 14:57 IST
India is heading towards a brighter future, says Prime Minister Modi
Among world economies, India is seen as one of the fastest growing: PM Modi
Having a stable Government is a very big thing and this can't be ignored. Fractured mandates always have uncertainty: PM
Business environment in India is improving at great pace: PM Modi
India is not going to progress from Delhi. States have most important role in India's progress. States & Centre must work together: PM
World must know about the strengths of our states: PM Modi
Happy to cite that over 40 lakh people have given up LPG subsidy. This shows our country is changing: PM Modi
For first time, Rupee bond has been accepted for Railways at London Exchange: PM Narendra Modi
Development of India's eastern part cannot be ignored. They are areas with great potential: PM Modi
There are 18,000 villages in India, which do not have electricity. We are commited to electrify them: PM

उपस्थित सभी महानुभव और इस summit में पधारे हुए सभी वरिष्ठजन

आपने विषय तय किया है कि हम उज्वल भारत की दिशा में है या नहीं ?

मुझे विश्वास है कि ये जो दो दिन मंथन चलेगा पक्ष-विपक्ष में अनेक विचार उभरकर के आएंगे, नए सुझाव आएंगे, स्थितियों का मूल्याकंन होगा, परिस्थिति का आंकलन होगा और उस सब के द्वारा कुछ न कुछ बातें उभर कर आती हैं जो देश के लिए काम आती हैं।

मैं हिन्दुस्तान टाइम्स को और शोभना जी को बधाई देता हूं कि पिछले 12 साल से लगातार ये उनका अनुष्ठान चल रहा है, जिसमें सभी विचार के पक्ष-विपक्ष के विचार के लोग आते हैं, मिलते हैं, संवाद करते हैं। आज जो वैश्विक परिस्थिति है उसमें By and large इस बात को स्वीकृति मिली हुई है कि दुनिया की बड़ी economies में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। और जब भारत सबसे आगे बढ़ने वाला देश माना गया है, तो दूसरी तरफ देखें, तो विश्व की स्थिति पूरी तरह Slowdown की है। China की तो बहुत सी चीजें पिछले दिनों उजागर हुई। Euro region के अंदर 1.5 percent GDP आकर के अटक गया है और ऐसे में world bank कह रही है कि भारत का जीडीपी 7.5 percent और already पिछले तीन महीने का जो हिसाब आया है वो 7.4 आया। अगर आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो, ये हम मानकर के चलते हैं कि भारत उज्वल भविष्य की दिशा में बहुत ही सफलता पूर्वक आगे बढ़ रहा है। ये अचानक नहीं होता है और आज की भारतीय स्थिति को समझना है तो एक वैश्विक संदर्भ में देखना होता है।

दूसरा, हमारे बीते हुये कल के संदर्भ में भी देखना आवश्यक होता है। अगर हम हमारे बीते हुए दो साल, पांच साल जो भी तय करें उसको अगर हम नजरअंदाज कर दें और फिर तराजू लेकर के बैठेंगे तो बात सही नहीं निकलेगी। लेकिन मैं जानता हूं कि यह बहुत मुश्किल काम है। क्योंकि इसके लिए एक खुला मन चाहिए, एक साहस चाहिए कि हम कहां थे, किस हालात में थे। अब उसमें से निकलना कितना कठिन था। चारों तरफ निराशा का माहौल था। यहां बैठे हुए जो उद्योगकार हैं, वो एक पैर तो already बाहर रख चुके थे और दूसरा ले जाने की तैयारी कर रहे थे। अगर इस रूप को पहले ध्यान में लिया जाए और फिर देखा जाए, तो पता चलेगा कि हां भाई ये समझने के लिए मोदी की जरूरत नहीं है, अपने आप समझ आता है कि काफी बदलाव आया है। और इसलिये मैं आशा करूंगा कि हम चीजों को इन दो प्रमुख बातें हैं, एक वैश्विक परिवेश, एक हमारा बीता हुआ कल। और ये जो कुछ भी परिणाम आया है एक तो stable government होना वो अपने आपमें एक बहुत बड़ा योगदान होता है। इसे कोई नकार नहीं सकता है। कितनी ही अच्छी पार्टी हो, अच्छे लोग हों लेकिन अगर factual mandate है, तो आशंकाओं का माहौल बना रहता है। करेंगे नहीं करेंगे, कर पाएंगे नहीं कर पाएंगे। तो सबसे पहले जो बदलाव आया है, जो हमें उज्वल भविष्य की दिशा में ले जाने वाले का अगर सबसे पहला कोई क्रेडिट जाता है और सबसे पहला यशस्वी कदम कोई है तो हिन्दुस्तान की जनता ने उन्होंने बहुमत वाला mandate दिया। Credit goes to सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी है। ये बहुत बड़ा काम देश की जनता ने किया है।

सरकार जब परिवर्तन लाती है अचानक नहीं लाती, एक लम्बा परिश्रम करना पड़ता है। अब हमें मालूम है कि world bank ease of doing business का rating करती रहती है। कई वर्षों से या तो हम स्थिर हैं या फिर लुढ़क जाते हैं। आगे जाने की तो अवस्था हमारे नसीब में ही नहीं थी। और हम भी ऐसे आदी हो गये थे कि हां गुजारा कर लो। मन से हमनें उस स्थिति को स्वीकार कर लिया था। इतने कम समय में अचानक 12 point उछलकर के आगे बढ़ना। दुनिया के जितने भी लोग मिलते हैं वो इस बात को ध्यान से कह रहे हैं कि भई इतना बड़ा jump कैसे लगा। और ease of doing business तब होता है जब राज्य सरकारें, केन्द्र सरकारें मिलकर के निश्चित दिशा में सुधार अभियान चलाते हैं। सरलीकरण करते हैं। Minimum Government Maximum Governance को साकार करते हैं। 20 forms हैं उसको 2 कर देते हैं। प्रक्रिया तीन साल चलती है, उसको छह महीने में ले आते हैं। ऐसे एक-एक चीज , और इसके लिए मैंने पहले राज्यों के सभी अधिकारियों को बुलाया। एक 100 point का चार्टर दिया। दो दिन का workshop किया। आग्रह किया।

लेकिन सबसे खुशी की बात इस form में समझने वाली जो बात है, वो यह है, 12 point उछल कर जाना अच्छी बात ,है अच्छी दिशा है। लेकिन उसमें सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात है, उन राज्यों ने कमाल करकर के दिखाया है। जिसकी तरफ कभी हिन्दुस्तान की आर्थिक जगत वालों का ध्यान कभी जाता ही नहीं है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, ease of doing business में ये rank profile बढ़ा है अपना। इसका मतलब यह हुआ कि हिन्दुस्तान के मुख्य धारा में जिन राज्यों को आर्थिक विकास यात्रा में योगदान कभी गिना नहीं जाता था, वे आज lead role कर रहे हैं। इसका मतलब ये हुआ कि राज्यों में एक नई ताकत, नई ऊर्जा, नया विश्वास पैदा हुआ है। भारत को आगे बढ़ना है तो दिल्ली से देश आगे नहीं बढ़ सकता है। राज्यों के मजबूत खम्बों पर ही देश खड़ा हो सकता है। और अगर हम इस psyche करके चलते हैं कि दिल्ली देने वाला है और राज्य लेने वाला है। तो देश आगे नहीं बढ़ेगा। राज्य और दिल्ली दोनों मिलकर के कंधे से कंधा मिलाकर के चलें, एक दिशा में चलें, गति समान बनाने की कोशिश करें। परिणाम अपने आप निकल आएंगे।

नीति आयोग का जो गठन हुआ है। उसका मूल प्रयास यह है कि राज्य और केन्द्र मिलकर के काम करें। पहली बार केन्द्र और राज्य के पैसों का आवंटन कैसे किया जाए 14 Finance commission ने 42 percent रुपये राज्यों को देने के लिए कह दिया। स्थिति ये बनी है कि आज देश का जो पूरा खजाना है उस खजाने में से करीब 65 प्रतिशत खजाना राज्यों की जेब में है, सिर्फ 35 प्रतिशत दिल्ली के पास है। ये पहले कभी नहीं था। पहले reverse था। 35 प्रतिशत राज्यों के पास था 65 प्रतिशत दिल्ली के पास। ये बदलाव आया। उसके बाद करना था तो मैंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कमेटी बनाई उनको कहा कि देखिए भाई ये काम करना है आप मिल बैठकर के तय करके लाओ। अब तक क्या होता था दिल्ली तय करता था ये करेंगे ये नहीं करेंगे। पहली बार हुआ कि राज्यों ने मुख्यमंत्रियों ने मिलकर के तय किया कि ऐसा करिए। और मैं राज्यों के मुख्यमंत्रियों का अभिनन्दन करता हूं कि उन्होंने भी दिल्ली के प्रति उदारता भी रखी और अपनी चिंता भी की और ऐसा एक समावेशी व्यवस्था बना कर के दी जिसको हमने लागू कर दी । हम राज्यों को कैसे साथ लें। हमारे देश में हम चाहते हैं export हो लेकिन राज्यों का agenda ही नहीं है। और इसलिये quality production, quality packaging, quality branding ये राज्यों की कोई initiative है क्या, राज्यों के उसकी incentive, कोई scheme है क्या। export करने वालों के लिए राज्य कुछ करता है क्या। पहली बार हमने राज्यों में Export Promotion Council बनाने का आग्रह किया। और राज्यों को कहा कि आप अपने राज्य में इसके लिये जो काम करने वाले लोग हैं उनको जरा प्रोत्साहित कीजिये उनको मिलिये उनकी कठिनाइयां समझिये औऱ ग्लोबल मार्केट में वो कैसे जा सकते हैं।

उसी प्रकार से हमारा इतना बड़ा देश है। हम इंडिया कहते हैं, भारत कहते हैं, तो दुनिया को ये समझ नहीं आता कि हम क्या कह रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा उसको मुम्बई का पता है, दिल्ली का पता है, कलकत्ता का पता है। IT revolution के बाद बैंगलोर, हैदराबाद का पता है। पूरे हिन्दुस्तान की ताकत विश्व को मालूम नहीं है। हमारे राज्यों को दुनिया पहचाने ये बहुत आवश्यक है। हमारे राज्यों की अपनी-अपनी ताकत है। पहली बार हमने विदेश व्यवस्था के अंदर राज्यों को जोड़ने का सक्रिय प्रयास किया है। विदेश विभाग में special राज्यों के लिए अलग डिपार्टमेंट बनाया है। और विश्व के नेताओं का राज्यों से मिलना-जुलना बढ़े, राज्यों की ताकत पहचाने। भारत इतना बड़ा विशाल देश है, हम सिर्फ दिल्ली से हिन्दुस्तान दुनिया को नहीं दिखा सकते। राज्यों की ताकत दिखाएंगे तो बदलाव आएगा। ये जो दिशा है वो दिशा बदलाव लाती है।

कभी-कभार आर्थिक दृष्टि से हम लोग उस सोच के लोग हैं। मान लीजिये यानी इसमें दोष, कुल मिलाकर हमने कई वर्षों से जो सुना है हमारी जो सोच बनी है, तो हम चीजों को उसी दायरे में देखते हैं। अगर दिल्ली सरकार ये कहे कि हम एक साल में 20 हजार मेगावाट बिजली के कारखाने लगाएंगे। डेढ़ लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करेंगे। तो आर्थिक जगत में जरूर लिखा जाएगा वाह, सरकार कुछ कर रही है। बड़ा कमाल का काम कर रही है। सरकार बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। क्या मोदी ने decision ले लिया। क्यों 21 हजार मेगा वॉट बिजली एक साल में , लेकिन मोदी ने छोटा काम किया| हिन्दुस्तान के 100 शहरों के साथ MOU किया LED Bulb, street light में LED Bulb बदलना, घरों में LED Bulb बदलना अब तक बीस शहरों का काम पूरा कर दिया। 83 शहरों का काम चल रहा है। जिस दिन ये 100 शहरों का काम पूरा हो जाएगा LED का उस दिन इस देश में 21500 मेगा वॉट बिजली बचेगी। 21500 मेगा वॉट बिजली अगर मोदी कारखाना लगाता है तो हिन्दुस्तान टाइम्स में तो मैं नहीं कह सकता हूं। लेकिन किसी न किसी अखबार में तो Headline हो जाती है। मोदी ने 21500 मेगा वॉट का बिजली का कारखाना लगा दिया। क्योंकि हमने वो सोचा है। 21500 मेगा वॉट बिजली के कारखाने ने सवा लाख करोड़ रुपया का investment मतलब देश का सवा लाख करोड़ रुपया बच गया। LED Bulb लगाने से इन 100 शहरों को और उन सौ शहरों के नागरिकों को हर साल 45000 करोड़ रुपये की बचत होगी। 45000 करोड़ रूपये आप कल्पना कर सकते हैं कि बदलाव कैसे आता है।

अभी मैंने एक छोटा सा Pilot project के रूप में काम किया। चंडीगढ़ में हमने कहा कि जरा technology का उपयोग करके थोड़ा बारीकी से देखें चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त बनाना। विनोद शर्मा अगर यहां होंगे तो उनको कुछ ओर सुनाई देगा। मैं कैरोसीन मुक्त कह रहा हूं। चंडीगढ़ में हर वर्ष 30 लाख लीटर कैरोसीन जाता है। उसमें subsidy जाती है करीब साढ़े तीन करोड़ रूपये की। अब चंडीगढ़ ऐसा शहर है जहां लोगों के पास गैस सिलेंडर भी है फिर कैरोसीन जा रहा है। मतलब कहीं गड़बड़ है। मैंने टेक्नोलोजी का उपयोग किया। मैंने कहा देखो भई और आप जानकर के हैरान होंगे 80 percent कैरोसीन उन घरों में जाता ही नहीं था। फिर भी सरकार का जाता था। और पैसे जाते थे। import करना पड़ता था, खर्च होता था। कहीं ओर चला जाता था। हमने तय किया कि भई जहां गैस सिलंडर है, घर में बिजली उसको कैरोसीन की क्या जरूरत है उसको कोई जरूरत ही नहीं। 80 प्रतिशत कैरोसीन बचा। लेकिन ये जांच करते समय ध्यान में आया कि 3200 गरीब परिवार ऐसे थे जिनमें कैरोसीन का इस्तेमाल होता था। हमने तय किया कि उनको गैस सिलंडर पहुंचाएंगे। और चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त करेंगे। चंडीगढ़ को कैरोसीन मुक्त करना मतलब सरकार की तिजोरी में बहुत बड़ी मात्रा में subsidy चोरी होती थी बंद हो गई। Environment को जो नुकसान हो रहा था बंद हो गया। 30 लाख लीटर कैरोसीन जो की डीज़ल में मिक्स होता था, जो total pollution समस्या पैदा करता था वो रुक गया। 30 लाख लीटर कैरोसीन जो की हम विदेशों से import करते थे, देश का फॉरन एक्सचैंज जाता था वो रुक गया। crude oil लाते थे refine करते थे।

मैं देश के संदर्भ में, मैं सिर्फ ये चीजें बताता हूं कि दिशा क्या है। इससे पता चलता है कि आप देखिये गैस सिलंडर, हमारे यहां गैस सिलंडर को हमने Direct Benefit Transfer के साथ जोड़ दिया बैंकों में सीधा subsidy देना शुरू कर दिया। पहले जितने गैस सिलेंडर जाते थे और जब डायरेक्ट बेनिफिट सीधा बैंक Account में जाने लगा, तो करोड़ो की तादाद में गैस सिलंडर लेने वाले कोई निकले ही नहीं। मतलब करोड़ों गैस सिलंडर बच गए यानी की करोड़ों गैस सिलंडर की subsidy बच गई। यानी targeted subsidy। आज देश में अगर मोदी ये निर्णय करता कि हम इतनी subsidy कट कर देंगे। तो जो अपने आप को reformist मानते हैं, वे हफ्ते भर मोदी की तालियां बजाते कि यार subsidy मोदी ने निकाली है। है आदमी में दम है। लेकिन Targeted Subsidy कर के leakages रोक कर के देश के धन को बचाने वाला मोदी reform नहीं दिखता है। और इसलिये सोचने वालों को भी दिशा पकड़नी पड़ेगी कि हम जिसे काम मानते थे। वो ही काम नहीं होता है, जो हम परिणाम चाहते थे, वो परिणाम किसी और रास्ते से भी आ सकता है। देश का भी भला हो सकता है और welfare state के नाते हमारा रास्ता नहीं चला जाता। और इसलिए हम चीजों को कैसे बनाते हैं।

हमारे देश में हम लोगों का स्वभाव कैसा है। हम मान लीजिये विमान में जा रहे हैं, क्योंकि यहां सब विमान वाले बैठे हुए हैं। कुछ पढ़ने की किताबें कुछ चीज बगल वाले सीट खाली है वहां रख दी। हमारी तो सीट पर हम बैठे हैं। बगल वाली सीट हमारी नहीं है। लेकिन हमनें अपनी कुछ चीजें रखी हैं कुछ छोटा बैग,पाउच,किताब रख दी। और विमान चलने से पहले-पहले आखिरी इंसान आ गया और उसकी वो सीट वहां बैठ गया। तो हमें क्या लगता है मेरी सीट ले ली। this is our Psychology यानी जो सीट मेरी नहीं है , सिर्फ मैंने किताब रखी है, उसका मूल मालिक आ गया तो भी मुझे लगता है मेरी सीट ले ली है। हम उस मनोवैज्ञानिक aवस्था में काम करते हैं इसको हम इंकार नहीं कर सकते और ऐसे मनोस्थिति के अंदर अगर मोदी कहता है। जब आपको ईश्वर ने इतना दिया है ये गैस सिलंडर 400-500 की subsidy में क्या लगा है क्यों लेते हो। और मुझे खुशी है मैंने ज्यादा campaign नहीं किया। इस देश के 40 लाख से अधिक लोगों ने गैस सिलेंडर की subsidy छोड़ दी। जो देश बगल वाले की सीट छोड़ने को तैयार नहीं वो खुद की चालीस लाख लोग गैस सिलंडर छोड़ दें। मतलब देश का जन-मन विकास की दिशा में कितना बदला है। इसका ये उदहारण है। और इसलिए बदलाव कैसे आते हैं। ये बदलाव हमें ध्यान आते हैं। हमने भी तय किया कि जिन्होंने 40 लाख गैस subsidy छोड़ी है। ये पैसे मैं सरकार की तिजोरी में नहीं ले जाऊंगा। उन्होंने अगर इतनी उदारता बताई है तो सरकार का भी दायित्व बनता है कि उसको समाज की ताकत में convert करें। इसलिये हमने क्या किया चालीस लाख उन गरीब परिवारों को ढूंढा। इनकी गैस subsidy के बदले में गैस सिलेंडर उनको दिया। subsidy उनको ट्रांसफर की और जो घर में लकड़ी का चूल्हा जलाते थे, खुद का स्वास्थ खराब करते थे, बच्चे रोते रहते थे, पर्यावरण का नुकसान होता था उन चालीस लाख परिवारों को बाहर निकालने का काम किया इतना ही नहीं कोशिश यह है कि जिसने subsidy छोड़ी है उसको हम बताते हैं कि तुम्हारे वाली subsidy राजस्थान के उस गांव में पहुंची है। कैसे बदलाव आता है। ये सब संभव है।

रेलवे, किसी ने सोचा होगा क्या कि दुनिया के बाजार में रुपये की इतनी बड़ी ताकत हो माफ करना मुझे ये हो जाने के बाद भी अभी कइयों को समझ में नहीं आया कि कुछ काम हुआ है। पहली बार London Stock Exchange में रेलवे के लिए रुपये बॉन्ड को स्वीकृति मिलना, वरना गोल्ड चलता है, डॉलर चलता है, पॉउन्ड चलता है, रुपया दुनिया के बाजार में नहीं चलता है। पहली बार लंदन एक्सचैंज ने रुपये बॉन्ड को हमने मंजूरी दे दी रुपया बॉन्ड निकला। अब दुनिया का कोई भी व्यक्ति निवेश करेगा रुपये में करेगा और उसको वापस भी रुपया मिलेगा। ये रुपये की प्रतिष्ठा विश्व में बनना। अब धीरे-धीरे मैं एनटीपीसी को भी उसमें ले जाने वाला हूं। हो सकता है हम सिंगापुर जाएं, लंदन जाएं कहीं और जाएं लेकिन विश्व के बाजार में हमारी ये साख पैदा होना ये अपने आप में आर्थिक विकास के लिए एक साख, साख बहुत बड़ी बात होती है जी। साख बहुत बड़ी बात होती है।

हमारे देश में आपको हैरानी होगी जानकर के और कभी आप जाओगे तो देखना, रेल जाती है ऊपर ब्रिज बना है। एक तरफ यहां बना है एक तरफ यहां से बना है। बीच में खाली है। तो रेलवे वाले permission नहीं देते। अब बन चुका है वो तोड़ने वाला तो है नहीं। permission लेकिन दो-दो साल चार-चार साल हमने एक फॉर्मूला बनाया कि महीने में जिने लोग होंगे एक बार exchange करेंगे बातों को और फॉर्मूला के तहत clear कर देंगे। आज इस प्रकार का कोई project pending नहीं पड़ा है। जो दो-दो, तीन-तीन साल पड़ा रहता था। चीजों को गति कैसे दी जाती है।

हमारे देश में मेरी ये सोच है कि आज हमारे देश का विकास कितना ही क्यों न हो ...मान लीजिए साइकल में हम हवा भरते हैं। तो नापते हैं कि 40 डिग्री हवा गई कि 30 डिग्री गई। मीटर ठीक बताता है लेकिन मान लीजिए कि साइकल की ट्यूब में एक कोने में फुग्गा हो जाए गुबारा हो जाए और हवा वहां चली जाए तो मीटर तो ठीक बताएगा, लेकिन साइकल चलेगी क्या। मैं समझा पा रहा हूं। साइकल की पूरी ट्यूब में समान रूप से हवा पहुंचनी चाहिए तब साइकल चलेगी। अगर उसी ट्यूब में उतने ही point वाली हवा गुब्बारा हो जाए तो साइकल नहीं चल सकती। उसी प्रकार से देश की इकोनोमी भी अगर पश्चिम भारत में ही चलती रहे और पूर्वी भारत में विकास न हो तो ये देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता है। ये बात हमें समझनी होगी पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, असाम हो, बंगाल हो, नॉर्थ ईस्ट हो, ओड़िशा हो, ये ऐसे potential क्षेत्र हैं हिन्दुस्तान के second green revolution की ताकत eastern India में पड़ी हुई है। हमारी पूरी योजना का केन्द्र बिन्दु वो होना चाहिए देश की economy को नई ताकत मिलेगी।

उसी प्रकार से अभी चार दिन पहले एक महत्वपूर्ण काम हुआ, अच्छा होता देश के मीडिया जगत का उस पर ध्यान गया होता। भारत में Railway Engine बनेंगे। कई वर्षों से फाइलें चल रही थीं। फैसला नहीं हो रहा था। Foreign Direct Investment, चालीस हजार करोड़ रुपया। दो railway engine बनाने के उद्योग के लिए already agreement हो गया। काम शुरू हो गया। पिछले हफ्ते की बात है और दोनों major policy है Eastern India को develop करना है। ये दोनों कारखाने बिहार में लगेंगे। और निर्णय अभी किया है मैंने चुनाव के पहले नहीं किया है। कहने का तात्पर्य आपने देखा होगा बजट को बारीकी से हमनें infrastructure में बहुत बड़ी राशि Eastern India में लगाई है। पहली बार हम Eastern India को gas grid से जोड़ रहे हैं।

देश में fertilizer आप 80 हजार करोड़ रुपये यूरिया fertilizer subsidy जाती है। जितने अर्थशास्त्री हैं वो कहते हैं ये पैसे बरबाद कर रहे हो। reform लाओ, subsidy रद्द करो। क्या उसके कोई उपाय है कि नहीं है। हमने एक निर्णय किया। कुछ लोग कहेंगे हमारे समय में हुआ अब मैं उस विवाद में जाना नहीं चाहता हूं। लेकिन कोई भी चीज का परिणाम जब तक उस चीज को 100 percent नहीं करते नहीं आता है। टोकन करने से नहीं आता है। हमें मालूम है हमारे देश में यूरिया में बहुत subsidy दी जाती है करीब 80 हजार करोड़ रुपया। लेकिन कोई देखता नहीं कि ये यूरिया किसान के पास जाता है कि नहीं जाता। यह subsidized यूरिया Chemical Industries के लिए raw material है।

इसलिए क्या होता है कि subsidized यूरिया की चोरी होती है, Chemical Industry वाले मार लेते हें। वो processing करके अपना product बाजार में बेच देते हैं। नाम आता है किसान का, इसको कैसे रोका जाए। हमने तय किया यूरिया को 100 percent Neem Coating किया जाएगा। एक बार यूरिया को Neem Coating किया तो वो खेती के सिवा किसी और काम में आ ही नहीं सकता है। हिंदुस्तान में जितना यूरिया produce होता है, उसका काम पूरा हो गया है। Imported जो यूरिया है, उसका within a month पूरा हो जाएगा। उसका मतलब हुआ कि यूरिया की चोरी गई, चोरी मतलब subsidy बची, मतलब अगर reformist को ठीक लगे तो इसको reform कहना चाहिए।

कामों में efficiency, कामों में target, कामों को कैसे चलाना अगर उस दिशा में हम चलते हैं, हम कैसे परिणाम ला सकते हैं। इसका मैं उत्तर, नमूना दे रहा हूं। At the same time हमने क्या होता था पहला मालूम है कि जो fertilizer कारखाना होता है उसकी inefficiency एक प्रकार से incremental beneficiary रहती थी, ऐसी scheme थी कि भई आपका अगर उत्पादन खर्च 50 रुपया हुआ तो आपको उस प्रकार की subsidy मिलेगी। अगर production cost 100 हो गया, उस प्रकार से मिलेगी मतलब जितना बुरा करोगे उतना ही ज्यादा सब्सिडी मिलेगी। ये चलता था। हमने आकर तय किया सबकी input cost की जो कीमत है वो common कर दी। गैस को वो हमने common कर दिया सारी चीजें। अब हमने कह दिया सबका rate fix होगा। बाजार में जाएगा सब्सिडी fix होगी। अब उनका efficiency level बढ़ाने की नौबत आ गई है। चीजों को अगर थोड़ा involve होकर के बदलते हैं तो चीजें बदलती हैं।

हमारे देश में, मैं हिसाब लगा रहा था करीब 85 major projects, installed projects, शिलान्यास पता नहीं किस प्रधानमंत्री ने किया होगा, वो तो पत्थर शायद गुम हो गया होगा और अरबों-खरबों रुपयों के project, मैंने review शुरू किया। आज मैं संतोष के साथ कह सकता हूं करीब 60-65 project उसमें से already काम आगे बढ़ने लग गया। अभी आपने देखा होगा डाभोल का power generation , Maharashtra में दो साल से बंद पड़ा था अभी पिछले महीने चालू हो गया|हमारे देश में बिजली के कारखाने, कोयला उत्पादन बंद था, बिजली के कारखाने बंद थे। बिजली नहीं थी, उद्योग बंद थे, उद्योग बंद थे, रोजगार नहीं था। रोजगार नहीं था, Economy ठप पड़ी थी। कैसा विष चक्र चल रहा था। कोयले पर हमने ध्यान केंद्रित किया और highest coal उत्पादन record break कर दिया हमने। बिजली को पहुंचाया और भारत आजाद होने के बाद सबसे ज्यादा बिजली पैदा करने का record हमने तोड़ दिया। अब ये बिजली पैदा होने का record टूटने का काम है कि नहीं मैं नहीं जानता हूं लेकिन हुआ है। बिजली का झटका लगे, बिजली बंद हो, तब तो हमारा ध्यान जाए लेकिन बिजली इतनी तेज गति से सुधार हो आज करीब साढ़े 8 प्रतिशत growth है उसका, छोटी बात नहीं है।

Infrastructure विकास के लिए ये सबसे अहम चीज है, वो बदलाव ला रही है तो ये चीजें हैं परिवर्तन कैसे आता है उसका देखते हैं। एक दिन मैं देख रहा था, आजादी के 60 साल हो गए, बिजली पहुंचनी चाहिए। मैं फिर कहता हूं, मैं किसी की आलोचना करने नहीं आया हूं। आजादी के 70 साल होने आए हैं, 18 हजार गांव, जहां आज बिजली का खंभा भी नहीं है। मैंने अफसरों को पूछा, ऐसा तो नहीं है कोई पुरानी सरकारों ने तय नहीं किया होगा, उन्होंने भी किया होगा। कोई ऐसा थोड़ा चाहेगा कि काम न हो लेकिन किया होगा। मैंने कहा नहीं जी मुझे ऐसा नहीं करना है, मुझे परिणाम चाहिए और मैंने 15 अगस्त को लाल किले से कह दिया 1000 दिन में मैं 18 हजार गांव में बिजली पहुचाऊंगा। अब जो काम 70 साल में नहीं हुआ वो अगर मैं हजार दिन में करना चाहता हूं तो आप जानते हैं कि कितनी तकलीफ होती है लेकिन मुझे 1000 दिन में 18 हजार गांव करने हैं तो per day मुझे करीब-करीब मुझे 19 गांव Per day मुझे बिजली पहुंचानी चाहिए per day तब जाकर के...... आप सबसे मेरा आग्रह है कि आप Mobile Phone पर एक App ले लीजिए, download कीजिए ग्रामीण विद्युतीकरण यहां से बाहर जाकर के, यहां तो शायद जैमर होगा लेकिन आप कीजिये और उसमें आप देख सकते हैं कि per day किस गांव में क्या काम हो रहा है, इतनी transparency और आज 100 दिन हुए हैं। मैंने घोषणा की करीब-करीब 100 दिन हुए हैं अब तक मुझे 1900 गांवों में बिजली का काम पूरा करना चाहिए था। कल रात को मैंने देखा जरा यहां आने से पहले App पर तो 3004 गांव पूरे हो चुके हैं और आप अपने mobile phone पर देख सकते हैं कि किस गांव में क्या चल रहा है। खंभे पहुंचे हैं, तार पहुंचा, लोग पहुंचे उसमें जो engineer काम कर रहा है उसका mobile number और e-mail address भी रखा है। कहने का तात्पर्य ये है कि challenge रूप में काम स्वीकार किया है। आजादी के 70 साल बाद जब वो अपने गांव में बिजली देखेगा। मुझे बताइए वो बिजली गरीब के काम आयेगी कि नहीं आयेगी। देश गरीब के काम आ रहा है कि नहीं आ रहा है। अगर हम तय करें, चीजें बदल सकते हैं।

हमने सागरमाला, भारतमाला, भारतनेट कुछ ऐसे initiative लिए हैं। आज global economy में Port sector बहुत ही important है। अगर हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन हमारा देश क्या था रेलवे अलग, Port अलग, रेलवे वाला train कहां लगाता है, जहां political MP का pressure आता है वहां 2 kilometer डाल देता है और Parliament में भी पूरे रेलवे बजट पर ताली नहीं बजती उसके गांव में रेल आई या नहीं उस पर बजती है....हमने कहा कि चलिए, हम Port Sector का अपना रेल department बनाएं और Port Rail Department बनाया इधर से ये रेल जाएगी औऱ वो Port से इधर दोनों रेल जुड़ेंगी और जब तक हम Port को Rail Connectivity से नहीं जोड़ते हैं, हमारे goods transportation को global level का नहीं बनाते हैं। हम Globally competitive बन ही नहीं सकते हैं। ये Infrastructure का एक ऐसा क्षेत्र हमने चुना है और आने वाले दिनों में जाएंगे। हमारे देश में जो reformist लोग हैं वो कहेंगे आप disinvestment करो, ये सरकार है यार देखो। Strike होती है उसको कोई पूछने वाला नहीं, पहले page पर Photo आती है मोदी मुर्दाबाद-मोदी मुर्दाबाद यानि देश कैसे चल रहा है।

हमने Shipping company सब लोग कहते हैं घाटे में कई चल रही थी, कई सालों से घाटे में चल रही थी। आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं, घाटे में से तो बाहर निकाला इस वर्ष भारत की Shipping company profit में जा रही है। यानि हमारे पास दो ही रास्ते हैं क्या, एक या तो disinvestment करो या बंद कर दो। तीसरा रास्ता भी है उसको corporatize करो, उसको culture बदलो, work culture बदलो और apolitical कर दो, efficiency लाओ, आप स्थितियों को बदल सकते हो। ऐसे अनेक initiative हैं। जिसके कारण मुझे मालूम नहीं समय का क्या हाल है तो मुझे parliament जाना है। खुशखबरी है कि parliament चल रही है और इसकी credit मोदी को नहीं जाती है, सभी दलों को जाती है, सभी दलों को जाती है। मेरा कहने का तात्पर्य ये है कि आप कोई भी sector ले लीजिए, मैं अनगिनत गिना सकता हूं, एक सप्ताह भर मैं भाषण कर सकता हूं। देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। हमेशा कार्यक्रमों के आधार पर हम सोचते हैं तो एक सीमा आ जाती है। सबसे पहली बात होती है नीयत और मैं मानता हूं सफलता का मूल आधार नीयत होती है और नीयत के प्रकाश में कौन-सी नीति बनती है और उस नीति को लागू करने के लिए कौन सी राणनीति लाते हो और उस रणनीति को सफल करने के लिए कौन सा आपका time table है, road map है, implementation speed है।

आज देश में विचारों की, सुझावों की कमी नहीं है। आवश्यकता है उत्तम बातों को लागू करना, धरती पर उतारना। मेरा प्रयास है चीजों को धरती पर कैसे उतारूं और आज मैं कह सकता हूं कि जितनी चीजें देखते हैं आप अचानक नहीं हुई हैं एक बहुत ही सजग प्रयास का परिणाम हैं कि जिसके कारण ये संभव हुआ है और ये प्रयास निरंतर चलते रहेंगे, ये देश आगे बढ़कर रहेगा, आप विश्वास कीजिए।

सारी दुनिया इस बात को मान रही है और हमारा problem क्या है जी, विवेकानंद जी ने सालों तक यहां काम किया लेकिन जब तक शिकागो से चिल्लाए नहीं देश को पता नहीं चला, लेकिन अब दुनिया कह रही है कि देश आगे बढ़ रहा है तो यहां के लोग भी मान लेंगे मुझे विश्वास है और जिधर भी देखोगे देश आगे बढ़ रहा है।

मैं फिर एक बार इस समारोह में मुझे आने के लिए निमंत्रण दिया, मैं आपका आभारी हूं।

मेरी कोशिश रही है कि जिस विषय पर आप चाहते थे उस विषय पर मैंने बोलने का प्रयास किया है क्योंकि मुझे आदत नहीं है इधर-उधर जाने की चुनाव है तो उस mood में होता हूँ। यहां हूं तो उस mood में होता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद

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नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !