India is the world's fastest-growing major economy and is soon set to become the third-largest globally: PM
India, with its resilience and strength, stands as a beacon of hope for the world: PM
Our Government is infusing new energy into India's space sector: PM
We are moving ahead with the goal of a quantum jump, not just incremental change: PM
For us, reforms are neither a compulsion nor crisis-driven, but a matter of commitment and conviction: PM
It is not in my nature to be satisfied with what has already been achieved. The same approach guides our reforms: PM
A major reform is underway in GST, set to be completed by this Diwali, making GST simpler and bringing down prices: PM
A Viksit Bharat rests on the foundation of an Aatmanirbhar Bharat: PM
'One Nation, One Subscription' has simplified access to world-class research journals for students: PM
Guided by the mantra of Reform, Perform, Transform, India today is in a position to help lift the world out of slow growth: PM
Bharat carries the strength to even bend the course of time: PM

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ নতুন দিল্লিতে ইকোনমিক টাইমস ওয়ার্ল্ড লিডার্স ফোরামে ভাষণ দেন। প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই ফোরামে বিশ্ব পরিস্থিতি এবং ভূ-অর্থনৈতিক ব্যবস্থা নিয়ে বিস্তারিত আলোচনা হয়েছে এবং আন্তর্জাতিক পরিস্থিতির প্রেক্ষাপটে ভারত আর্থিকভাবে কতটা শক্তিশালী অবস্থায় রয়েছে, তা তিনি তুলে ধরেন। তিনি বলেন, ভারত এখন বিশ্বের সবচেয়ে দ্রুত বিকাশশীল অর্থনীতির দেশ হয়ে উঠেছে এবং খুব শীঘ্রই বিশ্বের তৃতীয় বৃহত্তম আর্থিক শক্তির দেশ হয়ে উঠবে। শ্রী মোদী বলেন, ভারতের রাজস্ব ঘাটতি ৪.৪ শতাংশ কমে এসেছে এবং ভারতীয় সংস্থাগুলি মূলধনী বাজার থেকে রেকর্ড পরিমাণ অর্থ সংগ্রহ করছে। অন্যদিকে, ভারতীয় ব্যাঙ্কিং ব্যবস্থা ক্রমশ শক্তিশালী হয়ে উঠছে, যা আগে কখনও ঘটেনি। তিনি জানান, মুদ্রাস্ফীতি অনেক কমে এসেছে এবং সুদের হারও কমেছে। সিস্টেমেটিক ইনভেস্টমেন্ট প্ল্যান (এসআইপি)-এর মাধ্যমে দেশের লগ্নিকারীরা হাজার হাজার কোটি টাকা বিনিয়োগ করছেন। 

প্রধানমন্ত্রী জানান, ইপিএফও-র তথ্য অনুযায়ী, শুধুমাত্র ২০২৫-এর জুন মাসেই ২২ লক্ষ সাধারণ চাকরি হয়েছে, যা আগে কখনও ঘটেনি।  খুচরো মুদ্রাস্ফীতিও সর্বনিম্ন স্তরে নেমে এসেছে। তিনি জানান, ২০১৪ সালে যেখানে ২.৫ গিগাওয়াট সৌরবিদ্যুৎ উৎপাদিত হতো, এখন তা ১০০ গিগাওয়াটে পৌঁছে গিয়েছে। 

শ্রী মোদী আগের সরকারগুলির বিরুদ্ধে ভোট ব্যাঙ্কের রাজনীতির অভিযোগ করেন। এই সংকীর্ণ মানসিকতার কারণে অন্য দেশগুলির তুলনায় ভারত বছরের পর বছর ধরে পিছিয়ে ছিল বলে মন্তব্য করেন তিনি। প্রধানমন্ত্রী বলেন, ২০১৪ সালের পরবর্তী পর্বে এই মানসিকতার পরিবর্তন ঘটে। ভারত এখন ৬জি প্রযুক্তি অর্জনের লক্ষ্যে কাজ করে চলেছে। 

 

শ্রী মোদী বলেন, ভারত ৫০-৬০ বছর আগে সেমিকন্ডাক্টর তৈরির কাজ শুরু করতে পারত, কিন্তু তা হয়নি। তিনি দৃঢ়তার সঙ্গে বলেন, সেমিকন্ডাক্টর তৈরির সঙ্গে যুক্ত সংস্থাগুলি এখন ভারতে আসতে শুরু করেছে। চলতি বছরের শেষের দিকে মেক ইন ইন্ডিয়া চিপ বাজারে চলে আসবে বলে তিনি আশাপ্রকাশ করেন। 

জাতীয় মহাকাশ দিবস উপলক্ষে শুভেচ্ছা জানানোর পাশাপাশি মহাকাশ ক্ষেত্রেও ভারতের অগ্রগতির কথা তুলে ধরেন তিনি। শ্রী মোদী বলেন, ২১ শতকে বিশ্বের অন্য দেশগুলি যখন মহাকাশে অভিযান চালাচ্ছে, তখন ভারতও পিছিয়ে থাকতে পারে না। মহাকাশ ক্ষেত্রেও সরকারের সংস্কারের কথা উল্লেখ করে শ্রী মোদী বলেন, গত ১১ বছরে ভারত ৬০টির বেশি মিশন সম্পন্ন করেছে। তিনি বলেন, ভারত এখন গগণযান মিশনের প্রস্তুতি চালাচ্ছে। মহাকাশ ক্ষেত্রে নানা বিধিনিষেধ তুলে দিয়ে বেসরকারি অংশগ্রহণের পথ খুলে দেওয়া হয়েছে। তিনি জানান, ২০১৪-র আগে ভারতে মাত্র একটি স্টার্টআপ ছিল, এখন তা ৩০০ ছাড়িয়ে গিয়েছে। মহাকাশে ভারতের নিজস্ব মহাকাশ স্টেশন তৈরির পরিকল্পনার কথাও উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, বিরোধীরা যতই বাধা দিক, সংস্কার চালিয়ে যেতে সরকার দৃঢ়প্রতিজ্ঞ। এ প্রসঙ্গে সংশোধিত আয়কর আইনের কথাও তুলে ধরেন তিনি। 

 

শ্রী মোদী বলেন, সরকার ক্রীড়া ক্ষেত্রেও সংস্কারের পথে হেঁটেছে। নতুন ক্রীড়ানীতিও চালু করা হয়েছে। তিনি বলেন, জিএসটি কাঠামো ক্ষেত্রেও বড় ধরনের সংস্কার করা হচ্ছে। জিএসটি প্রক্রিয়া আরও সহজ করা হবে এবং জিএসটি-র হার আরও কমানো হবে বলে জানান প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, ভারতে উৎপাদন শিল্পের বিকাশের লক্ষ্যে পরবর্তী প্রজন্মের সংস্কারের পথে হাঁটছে সরকার। এর ফলে, নতুন নতুন কর্মসংস্থানের সুযোগ সৃষ্টির পাশাপাশি মানুষের জীবনযাপন এবং ব্যবসা করা আরও সহজ হবে বলে তিনি মন্তব্য করেন। 

শ্রী মোদী বলেন, ২০৪৭ সালের মধ্যে উন্নত ভারত গড়তে সরকার অঙ্গীকারবদ্ধ। তিনি বলেন, আত্মনির্ভর ভারতই হবে উন্নত ভারতের ভিত্তি। প্রধানমন্ত্রী জানান, ২০৩০ সালের মধ্যে ভারত তার  বিদ্যুৎ উৎপাদন ক্ষমতার ৫০ শতাংশ অজৈব জ্বালানির মাধ্যমে উৎপাদনে লক্ষ্যমাত্রা স্থির করেছিল। ৫ বছর আগে অর্থাৎ ২০২৫-এর মধ্যেই সেই সাফল্য অর্জন করা গেছে। 

 

রপ্তানির ক্ষেত্রেও আত্মনির্ভর ভারতের সাফল্যের কথা উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, গতবছর ৪ লক্ষ কোটি টাকার কৃষিপণ্য বিদেশে রপ্তানি করা হয়েছে। গতবছর বিশ্বে তৈরি ৮০০ কোটি ভ্যাকসিন ডোজের মধ্যে ৪০০ কোটিই তৈরি হয়েছে ভারতে। শ্রী মোদী জানান, স্বাধীনতার পর সাড়ে ছয় দশকে ভারতে ইলেক্ট্রনিক্স রপ্তানি ছিল প্রায় ৩৫ হাজার কোটি টাকা। এখন তা বেড়ে ৩.২৫ লক্ষ কোটি টাকায় পৌঁছেছে। তিনি আরও জানান, ২০১৪ পর্যন্ত গাড়ি শিল্পে বার্ষিক রপ্তানির পরিমাণ ছিল ৫০ হাজার কোটি টাকা। এখন মাত্র এক বছরেই ১.২ লক্ষ কোটি টাকার গাড়ি রপ্তানি করেছে  ভারত। বিশ্বের ১০০টি দেশে বৈদ্যুতিক গাড়িও রপ্তানি করে থাকে ভারত। 

 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, দেশের অগ্রগতির প্রধান ভিত্তি হল গবেষণা। দেশের গবেষণাকে এগিয়ে নিয়ে যেতে ন্যাশনাল রিসার্চ ফাউন্ডেশন তৈরি করা হয়েছে এবং এর জন্য ৫০ হাজার কোটি টাকার বাজেট বরাদ্দ করা হয়েছে। 

 

প্রধানমন্ত্রী তাঁর ভাষণে পরিবেশবান্ধব শক্তি, কোয়ান্টাম প্রযুক্তি, ব্যাটারি স্টোরেজ এবং জৈব প্রযুক্তির কথা উল্লেখ করেন। তিনি বলেন, ভারত এখন 'সংস্কার, কার্য সম্পাদন এবং রূপান্তর'-এর মন্ত্রকে হাতিয়ার করে এগিয়ে চলেছে। লাল কেল্লার প্রাকার থেকে তাঁর স্বাধীনতা দিবসের ভাষণের প্রসঙ্গ টেনে প্রধানমন্ত্রী বলেন, ভারত এখন পরিবর্তনের কান্ডারী হয়ে উঠেছে। 

 

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जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।