বিশ্ব পরিবেশ দিবস উপলক্ষে বিশ্বের প্রতিটি দেশকে আন্তরিক শুভেচ্ছা জানিয়েছেন প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী। এই বিশেষ দিনটির স্মরণে আয়োজিত এক বৈঠকের ভিডিও মঞ্চে উপস্থিত থেকে তিনি সকলের উদ্দেশে ভাষণ দিচ্ছিলেন।
এ বছরের বিশ্ব পরিবেশ দিবস উদযাপনের মূল থিম হিসেবে বেছে নেওয়া হয়েছে ‘একবার ব্যবহারযোগ্য প্লাস্টিক বর্জন’। এই প্রসঙ্গের অবতারণা করে প্রধানমন্ত্রী সন্তোষ প্রকাশ করে বলেন, ‘একবার ব্যবহারযোগ্য প্লাস্টিক বর্জন’ – ভারত গত ৪-৫ বছর ধরে নিরন্তর এই প্রচেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে। এই উদ্যোগের সূচনা হয় ২০১৮ সালে। এই ঘটনাটিকে স্মরণ করে শ্রী মোদী বলেন যে, একদিকে যেমন আমরা একবার ব্যবহারযোগ্য প্লাস্টিক-কে নিষিদ্ধ ঘোষণা করেছি, অন্যদিকে তেমনই প্লাস্টিক বর্জ্য প্রক্রিয়াকরণের মতো বিষয়টিকে বাধ্যতামূলক করা হয়েছে। এর সুবাদে আমাদের দেশে ৩০ লক্ষ টনের মতো প্লাস্টিক প্যাকেজিং-কে প্রক্রিয়াকরণের মাধ্যমে পুনর্ব্যবহারযোগ্য করে তোলার বিষয়টিকে আবশ্যিক বলে ঘোষণা করা হয়েছে। এই প্রক্রিয়াকরণের আওতায় ১০ হাজার উৎপাদক, আমদানিকারক এবং ব্র্যান্ড সংস্থাকে নিয়ে আসা হয়েছে বলেও উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী।
একুশ শতকের ভারত জলবায়ু পরিবর্তন এবং পরিবেশ সুরক্ষার কাজে একটি স্বচ্ছ ও সুনির্দিষ্ট রোডম্যাপ অনুসরণ করে এগিয়ে চলেছে বলে জানান তিনি। বর্তমানের চাহিদা এবং ভবিষ্যতের লক্ষ্য ও দৃষ্টিভঙ্গী – এই দুটির মধ্যে ভারসাম্য রক্ষা করে দেশ এই কাজে সামিল হয়েছে। পরিবেশ রক্ষার কাজে দেশের দরিদ্রতম মানুষটির কাছেও প্রয়োজনীয় সাহায্য ও সহায়তা পৌঁছে দেওয়া হচ্ছে। একইসঙ্গে, বিশেষ পদক্ষেপ গ্রহণ করা হচ্ছে ভবিষ্যতের জ্বালানী শক্তির চাহিদা তথা প্রয়োজনীয়তার দিকে দৃষ্টি রেখে। গত ৯ বছরে ভারত যে পরিবেশ-বান্ধব এবং দূষণমুক্ত জ্বালানী উৎপাদন ও যোগানের ক্ষেত্রে এক নজিরবিহীন পদক্ষেপ গ্রহণ করেছে – একথাও তাঁর ভাষণে উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী। দৃষ্টান্ত-স্বরূপ সৌরবিদ্যুৎ এবং এলইডি বাল্বের উত্তরোত্তর ব্যবহারের কথা তুলে ধরেন তিনি। শ্রী মোদী বলেন, এর ফলে একদিকে যেমন সাধারণ মানুষের ব্যয় সাশ্রয় ঘটেছে, অন্যদিকে তেমনই পরিবেশকে সুরক্ষিত রাখার কাজও আরও জোরদার হয়ে উঠেছে। সাম্প্রতিককালের বিশ্বব্যাপী অতিমারীকালে ভারত যেভাবে নেতৃত্বের দায়িত্ব পালন করেছে, সেকথার উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী জানান, ‘মিশন গ্রিন হাইড্রোজেন’ কর্মসূচিটির সূচনা হয় ভারতের উদ্যোগেই। এই পথ অনুসরণ করে রাসায়নিক সারের হাত থেকে জল ও জমির মাটিকে রক্ষা করে প্রাকৃতিক কৃষি পদ্ধতি প্রচলনের পথে অনেকটাই পথ অতিক্রম করে গেছে আমাদের দেশ।
প্রধানমন্ত্রী বলেন, গত ৯ বছরে দেশের জলাজমির সংখ্যা অতীতের তুলনায় প্রায় তিন গুণ বৃদ্ধি পেয়েছে। পরিবেশ সুরক্ষার কাজে ‘গ্রিন ফিউচার গ্রিন ইকনোমি’ অভিযানকে আরও জোরদার করে তুলতে আজ আরও দুটি কর্মসূচির সূচনা হয়েছে বলেও ঘোষণা করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, আজ থেকে শুরু হয়েছে ‘অমৃত ধরহর যোজনা’, যা এই ধরনের পরিবেশ সুরক্ষা সম্পর্কিত কর্মসূচিগুলিকে আরও উৎসাহিত করবে। ভবিষ্যতে তা পরিবেশ পর্যটনের কাজেও বিশেষ সহায়ক হবে বলেও মনে করেন তিনি। তিনি আরও জানান যে, দেশের ম্যানগ্রোভের পরিবেশকে সুরক্ষিত রাখতে ‘মিষ্টি যোজনা’ নামে আরেকটি কর্মসূচির আজ সূচনা হচ্ছে। এই কর্মসূচির মাধ্যমে দেশের ৯টি রাজ্যের ম্যানগ্রোভ পুনরুদ্ধার করা সম্ভব হবে। ফলে, সংশ্লিষ্ট অঞ্চলের বসবাসকারীদের জীবন ও জীবিকাকে বিপন্ন হওয়া থেকে রক্ষা করার কাজ আরও সহজ হয়ে উঠবে।
পরিবেশ সুরক্ষার কাজে তথা বিশ্বের জলবায়ু নিয়ন্ত্রণে প্রত্যেকটি দেশকেই নিঃস্বার্থভাবে এগিয়ে আসতে হবে বলে মন্তব্য করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, কায়েমি স্বার্থকে সর্বতোভাবে পরিহার করা প্রয়োজন। গুটি কয়েক উন্নত দেশের ভুল নীতির জন্য বিশ্বের অন্যান্য উন্নয়নশীল ও উন্নয়নকামী দেশ যে বিশেষভাবে ক্ষতিগ্রস্ত হচ্ছে – এই সতর্কবার্তাও তুলে ধরেন প্রধানমন্ত্রী তাঁর আজকের ভাষণে। প্রতিটি দেশের সামনে জলবায়ুর প্রতি সুবিচার করার বিষয়টিকে ভারত যে সঠিকভাবে তুলে ধরতে পেরেছে, এজন্য বিশেষ আনন্দও প্রকাশ করেন তিনি।
শ্রী মোদী তাঁর ভাষণে আরও বলেন যে, হাজার হাজার বছরের ভারতীয় সংস্কৃতিতে প্রকৃতি এবং অগ্রগতির কথা বারংবার উল্লেখ করা হয়েছে। পরিবেশের সঙ্গে দেশের অর্থনীতিরও যে একটি নিবিড় যোগসূত্র রয়েছে, একথাও বরাবর ঘোষণা করে এসেছে আমাদের দেশ। ভারত বর্তমানে যেভাবে বিনিয়োগ প্রচেষ্টার উপর বিশেষ গুরুত্ব আরোপ করেছে, তার মূল লক্ষ্যই হ’ল পরিবেশের সুরক্ষা ও সংরক্ষণ। দেশ যেমন একদিকে ৪জি এবং ৫জি সংযোগ ও যোগাযোগ ব্যবস্থার উপর গুরুত্ব আরোপ করেছে, অন্যদিকে তেমনই বনাঞ্চলের পরিধি বিস্তারের কথাও রয়েছে ভারতের চিন্তাভাবনার মধ্যে। এদেশে দরিদ্র জনসাধারণের জন্য নির্মিত হয়েছে ৪ কোটি বাসস্থান। এইভাবেই বন্যপ্রাণী সংরক্ষণ এবং অভয়ারণ্য গড়ে তোলার কাজেও ভারত তৎপরতার সঙ্গেই এগিয়ে গেছে। প্রসঙ্গত, ‘জল জীবন মিশন’ এবং ৫০ হাজার ‘অমৃত সরোবর’ নির্মাণের কথাও উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, পুনর্নবীকরণযোগ্য জ্বালানী, কৃষি পণ্যের রপ্তানি বৃদ্ধি এবং পেট্রোলের সঙ্গে ২০ শতাংশ ইথানল মিশ্রণের কাজেও ভারত এখন কোনোভাবেই পিছিয়ে নেই। ‘বিপর্যয় প্রতিরোধী পরিকাঠামো’ অর্থাৎ সিডিআরআই – এর নির্মাণ ও বাস্তবায়নে ভারত সকলের সঙ্গে জোটবদ্ধভাবে এগিয়ে যেত আগ্রহী।
‘লাইফ’ অর্থাৎ পরিবেশের স্বার্থে জীবনশৈলীর পরিবর্তনকে একটি জন আন্দোলন রূপে ঘোষণা করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই অভিযান সাধারণ মানুষের মধ্যে সচেতনতার প্রসার ঘটিয়েছে। এ সম্পর্কে মানুষের মনে আগ্রহও বৃদ্ধি পেয়েছে। এই লক্ষ্যকে সামনে রেখে নানাধরনের অনুষ্ঠান ও কর্মসূচিরও আয়োজন করা হয়েছে সারা দেশে।
পরিশেষে প্রধানমন্ত্রী বলেন, জলবায়ু পরিবর্তন সম্পর্কে মানুষের চেতনাবোধকে জাগিয়ে তোলার কাজ শুধু ভারতের একার নয়, এজন্য প্রয়োজন সারা বিশ্বের সমর্থন ও সহযোগিতা। তবে, এ ব্যাপারে বিশ্ব জুড়ে নতুন নতুন উদ্যোগ গৃহীত হওয়ায় স্পষ্টতই সন্তোষ প্রকাশ করেন প্রধানমন্ত্রী।
राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,
नमस्कार!
G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
Friends,
आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।
ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।
विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,
पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।
किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।
Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.
अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।
Friends,
भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।
भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।
संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।
श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।
भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,
आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।
हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।
Friends,
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।
हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।
Friends,
भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
बहुत-बहुत धन्यवाद।


