মণিপুরের সামগ্রিক পরিবর্তন ঘটছে এবং কয়েক দশক ধরে যে সমস্ত প্রকল্পের কাজ থমকে ছিল সেগুলি সম্পূর্ণ করা হচ্ছে: প্রধানমন্ত্রী মোদী
যখনই ভারতের গ্রামের বৈদ্যুতীকরণের বিষয়ে আলোচনা হয়, তখন মণিপুরের লেইসাং গ্রামের নাম উঠে আসে: প্রধানমন্ত্রী মোদী
যে উত্তরপূর্বকে নেতাজি সুভাষ বসু ভারতের স্বাধীনতার গেটওয়ে বলেছিলেন, সেটা এখন নতুন ভারতের বিকাশের দুয়ার হিসেবে রূপান্তরিত হচ্ছে: প্রধানমন্ত্রী মোদী

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ ইম্ফল সফর করেন। এক বিশাল জনসভায় তিনি মোরে-তে সুসংহত সীমান্ত চৌকির উদ্বোধন করেন। সাওমবুঙ্গ-এ তিনি দোলাইথাবি বাঁধ প্রকল্প, ভারতীয় খাদ্য নিগমের মজুতভাণ্ডার সহ জল সরবরাহ ও পর্যটন সংক্রান্ত একাধিক প্রকল্পের সূচনা করেন।

 

প্রধানমন্ত্রী, ৪০০ কিলোভোল্ট বিদ্যুৎবাহী শিলচর-ইম্ফল ডবল সার্কিট লাইনের উদ্বোধন করেন।

ক্রীড়াক্ষেত্রের সঙ্গে যুক্ত একাধিক প্রকল্পেরও তিনি শিলান্যাস করেন।

জনসভায় ভাষণে প্রধানমন্ত্রী বীর স্বাধীনতা সংগ্রামীদের বিশেষ করে, মণিপুরের মহিলা স্বাধীনতা সংগ্রামীদের প্রতি শ্রদ্ধা নিবেদন করেন। অবিভক্ত ভারতে মণিপুরের মইরাং-এ স্থাপিত প্রথম অন্তর্বর্তী সরকার গঠনের কথাও তিনি স্মরণ করেন। উত্তর-পূর্বাঞ্চলের মানুষের কাছ থেকে আজাদ হিন্দ ফৌজ যে বিপুল সমর্থন পেয়েছিল, তার কথাও প্রধানমন্ত্রী উল্লেখ করেন। তিনি বলেন, ‘নতুন ভারতে’র অগ্রগতিতে মণিপুর গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করতে পারে।

আজকের অনুষ্ঠানে ১,৫০০ কোটি টাকার বেশি যে সমস্ত প্রকল্পের উদ্বোধন বা শিলান্যাস হয়েছে, সেগুলি এই রাজ্যের মানুষের জীবনযাপনের মানোন্নয়নে বড় ভূমিকা নিতে চলেছে বলেও শ্রী মোদী অভিমত প্রকাশ করেন।

বিগত সাড়ে চার বছরে তিনি প্রায় ৩০ বার উত্তর-পূর্ব সফর করেছেন জানিয়ে প্রধানমন্ত্রী বলেন, এই অঞ্চলের সামগ্রিক পরিবর্তন ঘটছে এবং কয়েক দশক ধরে যে সমস্ত প্রকল্পের কাজ থমকে ছিল সেগুলি সম্পূর্ণ করা হচ্ছে।

মোরের সুসংহত চেক পোস্টটি সীমাশুল্ক সংক্রান্ত ছাড়পত্র প্রদান, বিদেশি মুদ্রা বিনিময়, অভিবাসন সংক্রান্ত কাজকর্ম সম্পাদনের ক্ষেত্রে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নেবে বলে তিনি জানান।

প্রধানমন্ত্রী আরও বলেন, আজ যে সব প্রকল্পের উদ্বোধন করা হচ্ছে, সেগুলি কেন্দ্রীয় সরকারের উন্নয়নের প্রতি অঙ্গীকারকেই প্রতিফলিত করে। তিনি জানান, ১৯৮৭ সালে দোলাইথাবি বাঁধ প্রকল্প রূপায়ণের সিদ্ধান্ত হয়। কিন্তু ২০১৪ সালের পর এই প্রকল্প রূপায়ণের কাজে গতি আসে এবং আজ এই প্রকল্পের কাজ সম্পূর্ণ হল। পর্যটন ক্ষেত্রের সঙ্গে যুক্ত যে সমস্ত প্রকল্পের আজ উদ্বোধন করা হয় সেগুলির কথাও তিনি উল্লেখ করেন। এ প্রসঙ্গে শ্রী মোদী জানান, কেন্দ্রীয় সরকারের পক্ষ থেকে বিভিন্ন প্রকল্পের কাজ আরও দ্রুতগতিতে শেষ করতে ‘প্রগতি’ ব্যবস্থায় ভিডিও কনফারেন্সের মাধ্যমে প্রকল্পগুলির কাজকর্মের অগ্রগতিতে নজর রাখা হচ্ছে। তিনি বলেন, ‘প্রগতি’ বৈঠকের মাধ্যমে ১২ লক্ষ কোটি টাকারও বেশি থমকে থাকা বিভিন্ন প্রকল্পের সঙ্গে যুক্ত সমস্যার সমাধান করা হয়েছে।

সাওমবুঙ্গ-এ ভারতীয় খাদ্য নিগমের (এফসিআই) মজুতভাণ্ডার গড়ে তোলার কাজ ২০১৬-র ডিসেম্বরে শুরু হয়। ইতিমধ্যেই এই কাজ শেষ হয়েছে। প্রসঙ্গত তিনি জল সরবরাহ সংক্রান্ত একাধিক প্রকল্পের কাজ শেষ হওয়ার কথাও উল্লেখ করেন।

শ্রী মোদী বলেন, কেন্দ্রীয় সরকার এবং মণিপুর সরকার উভয় পক্ষই ‘সবকা সাথ সবকা বিকাশ’-এর উদ্দেশ্য পূরণের লক্ষ্যে কাজ করছে। তিনি রাজ্য সরকারের ‘গো টু হিল্‌স, গো টু ভিলেজ’ কর্মসূচির প্রশংসা করেন। ‘পরিবহণের মাধ্যমে পরিবর্তন’ আনার যে কর্মসূচি গ্রহণ করা হয়েছে, তার ভিত্তিতে উত্তর-পূর্বে উন্নত সড়ক, রেল ও বিমান যোগাযোগ ব্যবস্থার কথাও তিনি উল্লেখ করেন।

স্বচ্ছ ভারত ও অনাময় অভিযান সহ উন্নয়নকামী জেলাগুলির মধ্যে রাজ্যের চান্দেল জেলার অন্তর্ভুক্তির প্রসঙ্গ উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বিভিন্ন ক্ষেত্রে মণিপুরের অগ্রগতির কথা তুলে ধরেন।

মহিলা ক্ষমতায়ন ক্ষেত্রে মণিপুর সামনে থেকে নেতৃত্ব দিচ্ছে বলে উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী রাজ্যের উজ্জ্বল ক্রীড়া ব্যক্তিত্ব মেরি কম-এর প্রসঙ্গ উল্লেখ করেন। শ্রী মোদী বলেন, ক্রীড়াক্ষেত্রে ভারতকে বিশ্ব আঙিনায় শক্তিধর দেশে পরিণত করতে উত্তর-পূর্বাঞ্চল গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা নিতে পারে। আন্তর্জাতিক ক্রীড়া প্রতিযোগিতাগুলিতে ভারতের উজ্জ্বল সাফল্য প্রশিক্ষণ প্রদান এবং খেলোয়াড়দের নির্বাচন প্রক্রিয়ায় স্বচ্ছতা বজায় রাখার বিষয়টিকেই প্রতিফলিত করে বলে প্রধানমন্ত্রী মন্তব্য করেন।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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Text of PM's remarks at beginning of the Budget Session of Parliament
January 29, 2026
The President’s Address Reflects Confidence and Aspirations of 140 crore Indians: PM
India-EU Free Trade Agreement Opens Vast Opportunities for Youth, Farmers, and Manufacturers: PM
Our Government believes in Reform, Perform, Transform; Nation is moving Rapidly on Reform Express: PM
India’s Democracy and Demography are a Beacon of Hope for the World: PM
The time is for Solutions, Empowering Decisions and Accelerating Reforms: PM

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।