उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव,
मैं आईडीएफसी बैंक को बधाई देता हूं कि 18 साल की यात्रा कोई बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन 18 साल की इस छोटी सी यात्रा में भी भारत के नक्श्ो पर अपनी एक जगह बनाई है। लेकिन अब तक जो उन्होंने जगह बनाई थी वो ईंट, चूना, माटी, पत्थर, तार इसी के द्वारा बनाई थी। कभी रोड बनाएं कभी बिल्डिंग बनाएं, कभी port बनाए लेकिन अब वो जीवन निर्माण की दिशा में कदम रख रहे हैं। और मैं मानता हूं कि 18 साल में जो चुनौतियां आपको मिली हैं, अब शायद ज्यादा चुनौतियां आपके सामने हैं। क्योंकि वो एक limited clientele होता है और आपको अपनी गाड़ी को आगे बढ़ाना होता है। और कुछ चीजें उसमें assured होती हैं, पहले से पता होता है कि भई इस Project का क्या होगा, क्या refund होगा, क्या revenue होगा, बैंक की क्या स्थिति रहेगी। ये वो क्षेत्र नहीं है। और इसलिए एक इंजीनियर का काम सरल होता है, लेकिन एक शिक्षक का काम बड़ा भारी होता है क्योंकि शिक्षक को जीवन तैयार करना होता है, इंजीनियर को इमारत बनानी होती है। IDFC अब तक जो काम करती थी अब उसको शिक्षक का रोल भी अदा करना होगा और इसलिए मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में ये चुनौतियों के बावजूद भी, एक सही दिशा में कदम होगा।
ये बैंक का मूल उद्देश्य तो गांव में जाना है और मैं मानता हूं ये देश का दुर्भाग्य है कि देश को नियम बनाना पड़ा कि 25% जब तक आप बैंक में गांव नहीं खोलते हैं आपको permission नहीं मिलेगी। मैं मानता हूं ये नियम बनाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी, लेकिन पड़ी। क्योंकि हम लोगों ने कभी भी हमारे ग्रामीण जीवन के potential को समझा नहीं और urban life, governments, government machinery, वहां पर इन कारोबार को चलाने के लिए बहुत अवसर होता है और इसलिए एक प्रकार से बैंक को चलाना, बैंक का growth continue करना ये ज्यादा challenging work नहीं है और इस तरफ ध्यान नहीं गया। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये ध्यान में आया है और हर किसी की नजर गई है कि भारत में ग्रामीण जीवन भी एक बहुत बड़ा growth centre बना है। आपको मालूम होगा जब telecom industry आई और उनको जब भी spectrum दिया जाता था और गांव की बात कहते थे तो आगे-पीछे, आगे-पीछे होते थे। या तो किसी को sub-contract दे देते थे और अपनी गाड़ी चला लेते थे। लेकिन जब गांव में गए तो उनके लिए surprise था कि telecom के growth का शहरी percentage से ग्रामीण percentage ज्यादा ऊंचा था। Spread भी ज्यादा था, गति भी तेज थी। और इस अर्थ में उनके लिए वो.. अच्छा! गांव के व्यक्ति का communication ज्यादातर अन्य शहरों से होता है, इसलिए Income का level भी ज्यादा था। शहर का गांव, शहर में ही शहर में करता था, लेकिन उनका Income level….लेकिन ये बातें उनको ध्यान आईं, बाद में जाने के बाद। मैं समझता हूं बैंकिग sector के लिए भी अब ये अनुभव आने वाला है। बहुत तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था भारत के जीवन को एक ताकत दे रही है। बड़ा बदलाव आ रहा है।
एक बात और भी है, जैसे अरुण जी ने बड़ा विस्तार से बताया कि अब, अब banking जीवन बदल चुका है, अब वो mobile banking ही चलने वाला है। premises-less, paper-less, ये ही बैंक की पहचान होने वाली है। न जिसमें कोई premises होगा और न ही कोई paper होगा। और उसके बाद भी बैंक चलेगी, लोगों को पैसे मिलेंगे, लोगों का कारेाबार चलेगा। और धीरे-धीरे हमारे देश में ये स्थिति आने वाली है कि currency भी, शायद आज जो currency print करने का खर्चा होता है, वो भी धीरे-धीरे-धीरे-धीरे कम होता जाएगा क्योंकि ये कारोबार इस प्रकार से बढ़ने वाला है। और हमने भी देश को उस दिशा में ले जाना है। और जैसे-जैसे हम technology के सहारे banking करेंगे, जब हम paper-less bank की व्यवस्था करेंगे, currency-less कारोबार चलाएंगे तो काले धन की संभावनाएं धीरे-धीरे-धीरे जीरो की तरफ चली जाएंगी। और इसलिए इस सारी व्यवस्था का उपयोग एक उस दायरे में होने वाला है जो देश की मूलभूत कुछ बाते हैं जिसको address करने वाला है। IDFC उसकी beginning कर रहा है। मध्यप्रदेश से उनका प्रारंभ हो रहा है, वो भी उस इलाके, जो एक प्रकार से आदिवासी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, नर्मदा के तट के साथ जुड़े हुए हैं, वहां से इस काम का आंरभ हो रहा है। ये भी आवश्यक है।
आज सारा विश्व आर्थिक दृष्टि से भारत के प्रति एक बड़े संतोष की नजर से देख रहा है, सिर्फ आशा की नजर से नहीं, एक संतोष की नजर से। और उसको लगता है कि पूरे विश्व में इतना turmoil आ रहा है लेकिन एक भारत है जो स्थिर खड़ा रह पाया है और global economy में भी किसी राष्ट्र का स्थिर economy को handle करना ये भी अपने-आप में विश्व में संतुलन बनाने के लिए बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है। और वो भूमिका भारत ने इस पूरे वैश्विक संकट के समय अदा की है। इतने बड़े तूफान के बीच भारत अपने आप को बना पाया है। और बना पाया है तो आगे बढ़ने की संभावना भी उसमें बहुत ज्यादा है।
विश्व भारत के संबंध में ये अनुमान लगाता है कि भारत का potential इतना अपरम्पार है अभी तक आप tap नहीं कर पाए। लोग ये नहीं करते हैं कि भई आप कैसे आगे बढ़ोगे, आप कुछ टिक पाओगे के नहीं पाओगे, बचोगे कि नहीं बचोगे, ये चर्चा नहीं। चर्चा ये है, अरे भाई इतना मौका है, आप, आप ठंडे क्यों ? ये सवाल पूछा जा रहा है। यानी सारे विश्व को लग रहा है कि आज विश्व के आर्थिक जीवन में सबसे अगर कोई potential area है जहां growth story है तो वो हिंदुस्तान में है। और हमने भी देखा है World Bank हो, IMF हो, बाकी जितनी Rating Agencies हों, सबने कहा है कि भारत आज दुनिया की, बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कम्पनी है। अगर ये ताकत हमारे पास है, तो हमारा काम है कि हम foundation को भी मजबूत करें और vertical भी जाएं। Horizontal and vertical, दोनों तरफ हमें आगे बढ़ना पड़ेगा और Horizontal जाने के लिए ये ग्रामीण जीवन में हम कैसे प्रवेश ? हमारा व्याप कैसे बढ़ाएं? उसी प्रकार से हम नए-नए क्षेत्रों को कैसे चुनें? अगर हम priority sector देखें, priority sector को पैसे देना, ये सरकार के कुछ नियम हैं, जाते हैं लेकिन मान लीजिए कहा गया कि भाई agriculture sector को पैसा देना है, लेकिन एक fertilizer कारखाने को दे दिया, माना जाएगा agriculture sector और हिसाब ठीक हो जाएगा तो agriculture sector को दे दिया। इससे हमें बाहर आना है। हम एक सामान्य agriculturist को या गांव को ध्यान में रख करके या दो, चार, दस गांव के बीच में cold storage कैसे बनें? Warehousing की व्यवस्था कैसे हो? उसमें banking कैसे? हम value addition में कैसे मदद कर सकते? हम सिर्फ agriculture sector को पकड़ें, आज मैं समझता हूं कि इतनी संभावनाएं पड़ी हुई हैं, हिन्दुस्तान का किसान आज दुनिया के साथ अपने-आप में तालमेल करने की कोशिश कर रहा है। आपने देखा होगा, कि एक महिला अपना नम्बर अंग्रेजी में बता रही थी, Mobile Number अंग्रेजी में बता रही थी। अब ये कोई जरूरी नहीं है कि उन्होंने किसी स्कूल में जा करके पढ़ा होगा। लेकिन अब धीरे-धीरे करके सब चीजें समाज, जीवन में सहज हिस्सा बन रही हैं। ये इस ताकत को पहचानना, यही तो सबसे बड़ी खूबी है। हम इसको अगर ताकत मानते हुए, हां ये बदलाव है क्योंकि मेरा तो ये अनुभव है।
मैंने एक बार कहीं वर्णन भी किया था, में गुजरात में जब मुख्यमंत्री था तो एक बहुत ही पिछड़ा तहसील है हमारे यहां, धर्मपुर के पास, बलसाड़ जिले में, tribal belt है। अब मेरा मुख्यमंत्री रहते हुए वहां कभी कार्यक्रम नहीं हुआ था तो मैंने आग्रह किया, मैंने कहा मुझे वहां जाना है। न एक दिन कोई कार्यक्रम नहीं होगा तो ऐसे ही जा करके एक पेड़ लगा करके वहां से वापिस आऊंगा। तो फिर एक chilling centre के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम बन गया। अब chilling centre क्या 50 लाख का होता है, छोटा सा क्या होता है, जो दूध लोग देने आते हैं, उसको, ट्रक आने तक उसको संभालते हैं। इतना ही होता है। मैंने कहा मैं उसके लिए जाऊंगा। फिर वहां करनी थी तो जगह नहीं थी, क्योंकि जंगल है तो कोई जगह नहीं थी, तो एक स्कूल थी दूर, दो-ढाई किलोमीटर, स्कूल में function था। लेकिन इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने 50 करीब आदिवासी महिलाओं को बुलाया था। दूध भरने वाली जो महिलाएं होती हैं, 50 को बुलाया था। जहां chilling centre था, वहां। सब वहां तो अलग था माहौल। मैं हैरान था जब chilling center में उद्घाटन वगैरह हुआ, ये महिलाएं सारी मोबाइल से फोटो निकालती थी। आदिवासी महिलाएं फोन से फोटो निकालती थी। मुझे जरा surprise हुआ। मैं उनके पास गया। मैंने कहा ये फोटो निकाल कर क्या करोगे? उन्होंने जो जवाब दिया वो और आश्चर्यजनक था। उन्होंने कहा, हम इसको download करवा देंगे। अब ये download शब्द उनको मालूम था। download कैसे होता है, कहां होता है, ये पता था। इसका मतलब ये हुआ कि हम कहां तक पहुंचे। इसको हम किस प्रकार से आने वाले दिनों में हमारी growth story का हिस्सा कैसे बनाए और उस दिशा में हम कैसे काम करे?
उसी प्रकार से हमारे नौजवान। उनको पढ़ाई के लिए सरलता से Bank loan की व्यवस्था क्यों न हो? मेरा मत है ये women self-help groups....Women self-help group को पैसा मिलता है, अगर उनको बुधवार को पैसा जमा करवाना है 100 रुपए तो मंगल को आकर के दे जाते हैं कि लीजिए साहब मेरा पैसा कल पता नहीं कहीं और खर्च हो जाएगा। ये sensitivity है हमारे यहां, ग्रामीण जीवन में। इसका जितना लाभ लेना चाहिए हमने लिया नहीं और साहूकारों ने इस पर अपनी पकड़ा जमा दी और उसने हमारी economy को भी बहुत बड़ा नुकसान किया है। तो हमने एक विश्वास पैदा करना है, एक गारंटी पैदा करनी है। मैं समझता हूं ये जो प्रयास है, वो प्रयास उस परिणामों को जरूर अवश्य फल देगा।
Banking sector में हमारी ये कोशिश रही है कि bank nationalize हुई। तब तो बताया गया था कि भई गरीबों के लिए हुआ, लेकिन हमने जो देखा कि वो बहुत सीमित रहा। जैसे मध्यम वर्ग के परिवारों तक family doctor होता है, वैसे उच्च परिवारों का एक Banker होता है। बड़े ऊंचे घरानों का और बीमार भी होंगे लेकिन अगर Banker ने कहीं lunch-dinner रखा है तो जरूर जाएंगे क्योंकि उनको पता है कि भई इसका उनका कारोबार कितना महत्वपूर्ण है। ये अच्छा है, बुरा है लेकिन है। मैं समझता हूं कि अब हमारे यहां Neo-Middle Class कहो या मध्यम वर्ग कहो, ये एक बहुत बड़ी ताकत होती है। हम उनकी तरफ ध्यान केन्द्रित करके, ऐसी व्यवस्थाओं को कैसे विकसित करें। मान लीजिए आप, आपके सामने दो proposal है। एक है कि कोई भवन बनाना है, सरकारी दफ्तर बनाना है और दूसरी proposal है कि इसने प्राइवेट में कहा है कि मैं यहां एक कॉलेज खड़ा करना चाहता हूं, एक Higher-Secondary School चालू करना चाहता हूं, मुझे बैंक से पैसा चाहिए। अगर मैं बैंक में हूं तो मैं पहली priority उस स्कूल वाले को दूंगा। क्योंकि मुझे मालूम है कि वहां स्कूल बनता है तो फिर ऐसे 50 दफ्तर बनाने की ताकत उनसे अपने आप आ जाने वाली है। इसलिए हमारे investment की priority क्या बने? पैसे देने की priority क्या बने? ये अगर हमने chain शुरू की जिसके multiple हमें benefit हो। अगर ये होगा तो मैं मानता हूं कि बहुत ही लाभ होगा।
हमने जो financial inclusion का जो मिशन उठाया है। अब जैसे अरुण जी बता रहे थे कि प्रधानमंत्री की जो हमने योजना बनाई जिसमें हमने मध्यम वर्ग, गरीब, धोबी हो, नाई हो, दूध बेचने वाला हो, अखबार बेचने वाला हो उसको मुद्रा योजना के तहत finance कैसे हो। इस देश में करीब 6 करोड़ लोग ऐसे हैं, इस प्रकार के काम में और उनका average कर्ज 17 हजार रुपए है। कोई ज्यादा नहीं है, लेकिन वे ये पैसे साहूकार से लेते हैं, बहुत ब्याज देते हैं और वो अपना विकास-विस्तार नहीं कर पाते हैं। मुद्रा योजना के तहत हमारी कोशिश है कि ऐसे लोगों को इस ब्याज के चक्कर से मुक्ति दिलाना और उनको financial help liberally करना। हमने 50 हजार, 5 लाख, 10 लाख तक की, उसकी व्यवस्थाएं की, 50 लाख तक की की। अभी तो मैं समझता हूं मुश्किल से 100 दिन हुए होंगे इस योजना को launch किए। अब तक 61 लाख clients and करीब 35 thousand crore rupees, ये वहां गया है। 35 हजार करोड़ रुपया बाजार के अंदर नीचे जाना मतलब economy को कितनी बड़ी ताकत देता है वो। 35 हजार करोड़ किसी एक शहर में डालने से उतना change नहीं आता है जितना कि हजारों गांवों के अंदर 35 हजार करोड़ रुपया जाता है, तो economy में एक vibrancy आना शुरू हो जाता है, नीचे से शुरू हो जाता है और ये आने वाले दिनों में देखेंगे और हमारी कोशिश यही है कि हम उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं।
हमारे देश में Banking sector के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान उठे हैं। Appointment से लेकर के, governance से लेकर के, पैसे देने के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान लगे हैं। हमने आने के बाद एक दिन round-table conference किया, चिंतन शिविर की, सभी बैंक के लोगों के साथ detail में चर्चा की। उनकी समस्याएं क्या हैं, सरकार से अपेक्षाएं क्या हैं, कानूनी मुसीबतें क्या हैं। सारी चीजों की विस्तार से चर्चा की। RBI भी मौजूद था, मैं भी था, अरुण जी भी थे, काफी विस्तार से चर्चा की और उसमें से जो बातें आईं उस बातों को हमने लागू करने का प्रयास किया है। हमने एक सप्तसूत्री योजना बनाई है, जिस योजना का मैं समझता हूं कि हमारे देश में ऐसी चीजों की चर्चा बहुत कम होती है। लेकिन इसका बहुत बड़ा निर्णय है और A B C D E F G, ये सप्तसूत्री मेरा कार्यक्रम है। ये सप्तसूत्री कार्यक्रम बैंकों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है।
एक है हमारा A – Appointments. बैंकों में उच्च पदों पर नियुक्तियों में सुधार लाने का हमने फैसला किया है और इसलिए हमने 1969 के बाद nationalised bank में private sector के लोगों को भी लिया है, वरना nationalised bank से लोग private में चले जाते थे। पहली बार ये reverse trend शुरू हुआ है, जिसमें efficiency को हमने महत्व दिया है।
B – B for Bank, Board, Bureau. ये B3 पहली बार हम इस देश में लाए हैं कि बैंकों में जो भी नियुक्तियां हुईं उसका selection top rank के लिए, ये board करेगा। Politically मुझे ये पसंद आया, उसको मैं एक director बना दू और वो वहां बैठ जाए और फिर बाद में जब loan देनी हो तो वाया उसी से आ जाए proposal और फिर पता चले भई ये तो PM का आदमी बोल रहा है, देना ही पड़ेगा। ये डूबने के पीछे कारण यही है और इसलिए हमने कहा है कि ये कतई हम नहीं करेंगे, सारे professional लोगों को हम इस काम में लगाएंगे।
C – Capitalization. पिछले कुछ वर्षों में दिए गए loans में bad loans हैं। उसके कारण संकट आया है। अब रोते-बैठने का कोई अर्थ नहीं है इसलिए हमने करीब आने वाले कुछ वर्षों में 70 हजार करोड़ रुपया बैंक के अंदर डालकर के ये bad loans के कारण जो संकट है, उसमें से हम बाहर लाने का कार्यक्रम कर रहे हैं।
D – De-stress of assets. कुछ क्षेत्रों में जहां ये समस्या गंभीर है, हमने import duties बढ़ाने का domestic producer को सहारा दिया है। आपने देखा होगा हमने Steel में अभी किया। ताकि जिसके कारण Steel जो बैंक के साथ Steel उद्योग पैसा लेता था, उसको एक ताकत मिले। तो हमने De-stress के लिए कई कदम उठाने की दिशा में काम किया है।
6 है -नए debt recovery tribunal. जिसमें हम bad loans recovery इन सारे कामों को मैंने कहा है जैसे Power sector. हम बहुत तेज गति से निर्णय पर जा रहे हैं। Power sector जो NPA की समस्या से जुड़ा हुआ है उसको कैसे handle करना है।
E – Empower. Empower का मेरा सीधा-सीधा मतलब था, जब मैं पुणे में गया था इस मीटिंग में तब मैंने कहा था, Zero interferes. आपको political leadership और establishment से कभी फोन नहीं आएगा कि इसके loan का क्या करना है लेना, देना और आज तक इतने महीने हो गए, एक भी जगह से खबर नहीं आई है कि ऐसा कोई pressure है। purely, professionally चलाइए और बाहर लाइए। तो इस प्रकार से बैंकों को Empower करने की दिशा में हमने काम किया है।
F – Framework for accountability. बैंकों का performance monitor करने के लिए key performance indicator हमने set किए हैं ताकि हमें regularly पता चले कि भई कहां जा रहे हैं, किस दिशा में जा रहे हैं। कितना जा रहे हैं, वो नहीं। कितना तो संतोष कभी-कभी दे देता है, लेकिन कहां और कैसे और कितने समय में। उस दिशा में indicators को हमने बल दिया है।
और last है G – Governance. हमारे banking sectorमें governance को बल देना है। हमने technology पर जाना है, transparency को लाना है। cyber crime की सबसे ज्यादा संभावनाएं banking sector, financial world में हैं या तो data चोरी करने की। ये दो ही सबसे बड़े क्षेत्र हैं और इसलिए हमको assure करना होगा हमारे governance को।
तो ऐसी सप्तसूत्री हमारी योजना के द्वारा इन seven pillars पर पूरा banking sector को ताकत कैसे मिले। सरकार ने इतने महत्वपूर्ण initiative लिए हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में भारत जिस तेज गति से आगे बढ़ रहा है बैंक कंधे से कंधा मिलाकर के उसके साथ चलेगा। कुछ क्षेत्रों में बैंक दो कदम आगे होगा और मैं समझता हूं कि ये ताकत ultimately भारत के जो निर्धारित लक्ष्य हैं और जिन माध्यमों से हैं, उन सबको मिलकर के हम पूरा कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में IDFC को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं वो इस क्षेत्र में बहुत-बहुत प्रगति करें। बहुत-बहुत धन्यवाद।
Excellencies, Honourable Ministers, Industry Leaders, Innovators, Entrepreneurs, Researchers, डेलिगेट्स, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों! नमस्ते !
दुनिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक AI इंपैक्ट समिट में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन है। ये समिट जिस भारत में हो रही है, वो भारत One sixth of humanity को रिप्रजेंट करता है। भारत, दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है, सबसे बड़े Tech talent pool का केंद्र है, सबसे बड़े tech-enabled eco-system का उदाहरण है। भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है, और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है। नई टेक्नोलॉजी के प्रति उत्सुक 140 करोड़ भारतीयों की ओर से, मैं आप सभी Heads of Governments, Global AI eco-system के leaders और Innovators का इस समिट में स्वागत करता हूं, आपका आभार व्यक्त करता हूं।
इस समिट का भारत में होना, भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है। इस समिट में AI जगत के who’s who यहां पर मौजूद हैं। दुनिया के 100 से ज्यादा देशों का Representation, दुनिया के कोने-कोने से यहां आए महानुभाव, इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। इसमें Young Generation की जो उपस्थिति हमने देखी है, वो एक नया विश्वास पैदा करती है। आमतौर पर नई टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ लोगों में, शुरुआती में संदेह होता है, लेकिन जिस तेजी और भरोसे के साथ दुनिया की युवा पीढ़ी AI को स्वीकार कर रही है, उसकी ownership ले रही है, AI का इस्तेमाल कर रही है, वो अभूतपूर्व है। यहां AI समिट की Exhibition को लेकर भी बहुत उत्साह रहा है। खासकर Young Talent बहुत बड़ी संख्या में आया है। एग्रीकल्चर, सिक्योरिटी, दिव्यांगजनों की मदद, मल्टी-लिंगुवल Population की तमाम जरूरतों से जुड़े, जो भी सॉल्यूशंस यहां प्रेजेंट किए गए हैं, वो इस फील्ड में ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत और भारत की Innovative Capabilities का बहुत बड़ा उदाहरण हैं।

साथियों,
मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक turning point आता है, और वो turning point सभ्यता की दिशा reset करता है, और वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है, सोचने, समझने और काम करने के पैराडाइम्स बदलते हैं। और दिलचस्प बात यह है, जब हम transformation के उस दौर में होते हैं, तब उसके वास्तविक impact का अंदाज़ा भी नहीं होता। जब पत्थरों से पहली बार स्पार्क निकला, किसी ने नहीं सोचा था कि वही चिंगारी civilizational की foundation बनेगी। जब बोली को पहली बार लिपि में बदला गया, किसी ने नहीं जाना था कि written नॉलेज, future systems की back-bone बनेगी। जब पहली बार signals को wire-less ट्रांसमिट किया गया, किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया real-time में connect होगी।
साथियों,
Artificial Intelligence मानव इतिहास का ऐसा ही transformation है। आज जो हम देख रहे हैं, जो predict कर रहे हैं, वो इसके impact का सिर्फ प्रारंभिक संकेत है। AI मशीनों को intelligent बना रही है, लेकिन उससे भी अधिक, मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है। अंतर सिर्फ एक है, इस बार speed भी अभूतपूर्व है और scale भी अप्रत्याशित है। पहले technology का impact दिखने में दशकों लगते थे, आज machine learning से learning machines तक का सफर तेज़ भी है, गहरा भी है, व्यापक भी है। इसलिए, हमें vision भी बड़ा रखना है और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है। वर्तमान पीढ़ी के साथ ही हमें इस बात की भी चिंता करनी है कि आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम AI का क्या स्वरूप सौंपकर जाएंगे। इसलिए, आज असली प्रश्न यह नहीं कि भविष्य में Artificial Intelligence क्या कर सकती है, प्रश्न यह है कि वर्तमान में हम Artificial Intelligence के साथ क्या करते हैं। ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं। सबसे सशक्त उदाहरण है nuclear power, हमने उसका destruction भी देखा है, और सकारात्मक contribution भी देखा है। AI भी एक transformative power है। दिशाहीन हुई तो disruption, सही दिशा मिली तो solution. AI को machine-centric से human-centric कैसे बनाएं, संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाएं, यही इस Global AI Impact Summit का मूल उद्देश्य है।
साथियों,
भारत AI को किस दृष्टि से देखता है, उसका स्पष्ट प्रतिबिंब इस समिट की थीम में है- सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय ! Welfare for all, Happiness of all. यही हमारा benchmark है। AI के लिए इंसान सिर्फ data point न बन जाए, इंसान सिर्फ raw material तक सीमित न रह जाए, इसलिए AI को डेमोक्रेटाइज करना होगा। इसे inclusion और empowerment का माध्यम बनाना होगा, और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में।

साथियों,
हमें AI को open sky भी देना है, और command भी अपने हाथ में रखना है। जैसे G.P.S. होता है, G.P.S. हमें रास्ता सुझाता है, लेकिन हमें किस डायरेक्शन में जाना है, इसकी फाइनल कॉल हमारी ही होती है। आज हम AI को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसा ही हमारा भविष्य तय होगा।
साथियों,
आज न्यू दिल्ली AI इंपैक्ट समिट में, मैं AI के लिए M.A.N.A.V,MANAV, मानव, मानव विजन प्रस्तुत करता हूँ। मानव का अर्थ होता है- ह्यूमन, और मानव विजन कहता है- M – Moral and Ethical Systems, यानि AI ethical guidelines पर आधारित हो। A – Accountable Governance, यानि Transparent Rules, रॉबस्ट ओवरसाइट। N – National सॉवरनिटी, यानि जिसका डेटा, उसका अधिकार। A – Accessible and Inclusive, यानि AI monopoly नहीं, multiplier बने। V – Valid and Legitimate, यानि AI lawful और वेरिफाय-एबल हो। भारत का ये ‘मानव’ विजन 21वीं सदी की AI आधारित दुनिया में, मानवता के कल्याण की अहम कड़ी बनेगा।
साथियों,
दशकों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई, तो कोई सोच भी नहीं पाता था कि इससे कितनी Jobs बनेंगी, यही बात AI में है। आज कल्पना करना मुश्किल है कि आने वाले समय इस फील्ड में किस तरह की Jobs पैदा होंगी। AI का Future of work प्रि-डिफाइन्ड नहीं है, ये हमारे निर्णय पर, हमारे कोर्स ऑफ़ एक्शन पर निर्भर होगा। मैं समझता हूं, हमारे लिए Future of work एक नई opportunity है। ये humans और intelligent systems के साथ मिलकर काम करने का युग है। “We are entering an era where humans and intelligent systems co-create, co-work, and co-evolve”. AI हमारे काम को और अधिक smart, efficient और impactful बनाएगा। हम बेहतर design करेंगे, तेज़ build करेंगे और बेहतर decisions ले सकेंगे। इससे और ज्यादा लोगों को higher-value, creative और meaningful roles भी मिलेंगे। ये innovation, entrepreneurship और new industries के लिए बड़ा मौका है। इसलिए, हमें skilling, reskilling और lifelong learning को mass movement बनाना होगा।
साथियों,
Future of work - inclusive, trusted और human-centric होगा। अगर हम मिलकर आगे बढ़ें, तो Artificial intelligence पूरी मानवता की क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

साथियों,
कहा जाता है- Sunlight is the best disinfectant, यानी पारदर्शिता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कुछ देश और कंपनियाँ मानती हैं कि AI एक “strategic asset” है, इसलिए इसे confidential तरीके से develop किया जाना चाहिए, लेकिन भारत की सोच अलग है। हम मानते हैं कि AI जैसी तकनीक तभी दुनिया के लिए लाभकारी होगी, जब उसे शेयर किया जाएगा, जब code Open होंगे और शेयर किए जाएंगे, तभी हमारे मिलियंस ऑफ यंग माइंड्स उन्हें बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे। इसलिए, आइए हम ये संकल्प लें कि AI को Global Common Good के रूप में विकसित किया जाएगा।
साथियों,
आज की एक बहुत बड़ी आवश्यकता global standards बनाने की भी है। Deep-fakes और फैब्रिकेटेड कॉन्टेंट, open societies में अस्थिरता ला रहे हैं। Physical world में हम food पर न्यूट्रीशन लेबल्स देखते हैं, ताकि हमें पता हो कि हम क्या खा रहे हैं। ठीक उसी तरह, digital world में content पर भी ऑथेन्टिसिटी लेबल्स होने चाहिए, ताकि लोगों को पता हो कि क्या असली है और क्या AI से बनाया गया है। जैसे-जैसे AI ज़्यादा text, images और videos बना रहा है, वैसे-वैसे इंडस्ट्री में Water-marking और Clear source standards की ज़रूरत बढ़ती जा रही है। इसीलिए, ये जरूरी है कि ये विश्वास टेक्नोलॉजी में शुरू से built-in हो।
साथियों,
हमें children safety के प्रति और अधिक सजग होना होगा। जैसे स्कूल का syllabus क्यूरेटेड होता है, वैसे ही AI space भी child-safe और family-guided होना चाहिए।
Friends,
आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं, एक जिन्हें AI में भय दिखता है, वो हमेशा वैसी ही बात करते हैं, ऐसे लोग जिन्हें AI में भय दिखता है, औऱ दूसरे वो जिन्हें AI में भाग्य दिखता है।

और साथियों,
मैं जिम्मेवारी के साथ कहता हूं, गर्व के साथ कहता हूं, हमें भय नहीं, भारत को AI में भाग्य दिखता है, भारत को AI में भविष्य दिखता है। हमारे पास talent भी है, energy capacity भी है और policy clarity भी है। और मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि इस समिट में 3 भारतीय कंपनियों ने अपने AI मॉडल्स और Apps लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स, हमारे Youth के टैलेंट को दिखाते हैं और भारत जो सॉल्यूशंस दे रहा है, उसकी depth और diversity का भी प्रतिबिंब है।

साथियों
भारत semi-conductor और chip making से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक रिजिलिएंट eco-system बना रहा है। Secure डेटा सेंटर्स, मजबूत IT back-bone, डायनामिक startup eco-system, भारत को affordable, scalable और secure AI solutions का natural hub बनाते हैं। भारत के पास diversity भी है, demography भी है और democracy भी है। जो AI model भारत में सक्सीड करता है, वो globally डिप्लॉय हो सकता है। इसलिए, मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ - Design and Develop in India. Deliver to the World. Deliver to Humanity. एक बार फिर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
Thank You !
धन्यवाद !


