PM Narendra Modi launches IDFC Bank
PM Modi compliments IDFC for its successful journey of 18 years
The main aim of this bank is to venture out to the villages: PM Narendra Modi
Our villages have the ability to become great growth centres: PM Modi
From helping to build infrastructure, IDFC is now progressing to building lives: PM
Future of banking would not just be premises-less & paper-less, but also, eventually, currency-less: PM
Govt will bring improvements in appointments at top levels of banks. This improves efficiency: PM

उपस्थित सभी वरिष्‍ठ महानुभाव,

मैं आईडीएफसी बैंक को बधाई देता हूं कि 18 साल की यात्रा कोई बहुत बड़ी नहीं होती, लेकिन 18 साल की इस छोटी सी यात्रा में भी भारत के नक्‍श्‍ो पर अपनी एक जगह बनाई है। लेकिन अब तक जो उन्‍होंने जगह बनाई थी वो ईंट, चूना, माटी, पत्‍थर, तार इसी के द्वारा बनाई थी। कभी रोड बनाएं कभी बिल्डिंग बनाएं, कभी port बनाए लेकिन अब वो जीवन निर्माण की दिशा में कदम रख रहे हैं। और मैं मानता हूं कि 18 साल में जो चुनौतियां आपको मिली हैं, अब शायद ज्‍यादा चुनौतियां आपके सामने हैं। क्‍योंकि वो एक limited clientele होता है और आपको अपनी गाड़ी को आगे बढ़ाना होता है। और कुछ चीजें उसमें assured होती हैं, पहले से पता होता है कि भई इस Project का क्‍या होगा, क्‍या refund होगा, क्‍या revenue होगा, बैंक की क्‍या स्थिति रहेगी। ये वो क्षेत्र नहीं है। और इसलिए एक इंजीनियर का काम सरल होता है, लेकिन एक शिक्षक का काम बड़ा भारी होता है क्‍योंकि शिक्षक को जीवन तैयार करना होता है, इंजीनियर को इमारत बनानी होती है। IDFC अब तक जो काम करती थी अब उसको शिक्षक का रोल भी अदा करना होगा और इसलिए मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में ये चुनौतियों के बावजूद भी, एक सही दिशा में कदम होगा।

ये बैंक का मूल उद्देश्‍य तो गांव में जाना है और मैं मानता हूं ये देश का दुर्भाग्‍य है कि देश को नियम बनाना पड़ा कि 25% जब तक आप बैंक में गांव नहीं खोलते हैं आपको permission नहीं मिलेगी। मैं मानता हूं ये नियम बनाने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी, लेकिन पड़ी। क्‍योंकि हम लोगों ने कभी भी हमारे ग्रामीण जीवन के potential को समझा नहीं और urban life, governments, government machinery, वहां पर इन कारोबार को चलाने के लिए बहुत अवसर होता है और इसलिए एक प्रकार से बैंक को चलाना, बैंक का growth continue करना ये ज्‍यादा challenging work नहीं है और इस तरफ ध्‍यान नहीं गया। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये ध्‍यान में आया है और हर किसी की नजर गई है कि भारत में ग्रामीण जीवन भी एक बहुत बड़ा growth centre बना है। आपको मालूम होगा जब telecom industry आई और उनको जब भी spectrum दिया जाता था और गांव की बात कहते थे तो आगे-पीछे, आगे-पीछे होते थे। या तो किसी को sub-contract दे देते थे और अपनी गाड़ी चला लेते थे। लेकिन जब गांव में गए तो उनके लिए surprise था कि telecom के growth का शहरी percentage से ग्रामीण percentage ज्‍यादा ऊंचा था। Spread भी ज्‍यादा था, गति भी तेज थी। और इस अर्थ में उनके लिए वो.. अच्‍छा! गांव के व्‍यक्ति का communication ज्‍यादातर अन्‍य शहरों से होता है, इसलिए Income का level भी ज्‍यादा था। शहर का गांव, शहर में ही शहर में करता था, लेकिन उनका Income level….लेकिन ये बातें उनको ध्‍यान आईं, बाद में जाने के बाद। मैं समझता हूं बैंकिग sector के लिए भी अब ये अनुभव आने वाला है। बहुत तेजी से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था भारत के जीवन को एक ताकत दे रही है। बड़ा बदलाव आ रहा है।

एक बात और भी है, जैसे अरुण जी ने बड़ा विस्‍तार से बताया कि अब, अब banking जीवन बदल चुका है, अब वो mobile banking ही चलने वाला है। premises-less, paper-less, ये ही बैंक की पहचान होने वाली है। न जिसमें कोई premises होगा और न ही कोई paper होगा। और उसके बाद भी बैंक चलेगी, लोगों को पैसे मिलेंगे, लोगों का कारेाबार चलेगा। और धीरे-धीरे हमारे देश में ये स्थिति आने वाली है कि currency भी, शायद आज जो currency print करने का खर्चा होता है, वो भी धीरे-धीरे-धीरे-धीरे कम होता जाएगा क्‍योंकि ये कारोबार इस प्रकार से बढ़ने वाला है। और हमने भी देश को उस दिशा में ले जाना है। और जैसे-जैसे हम technology के सहारे banking करेंगे, जब हम paper-less bank की व्‍यवस्‍था करेंगे, currency-less कारोबार चलाएंगे तो काले धन की संभावनाएं धीरे-धीरे-धीरे जीरो की तरफ चली जाएंगी। और इसलिए इस सारी व्‍यवस्‍था का उपयोग एक उस दायरे में होने वाला है जो देश की मूलभूत कुछ बाते हैं जिसको address करने वाला है। IDFC उसकी beginning कर रहा है। मध्‍यप्रदेश से उनका प्रारंभ हो रहा है, वो भी उस इलाके, जो एक प्रकार से आदिवासी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, नर्मदा के तट के साथ जुड़े हुए हैं, वहां से इस काम का आंरभ हो रहा है। ये भी आवश्‍यक है।

आज सारा विश्‍व आर्थिक दृष्टि से भारत के प्रति एक बड़े संतोष की नजर से देख रहा है, सिर्फ आशा की नजर से नहीं, एक संतोष की नजर से। और उसको लगता है कि पूरे विश्‍व में इतना turmoil आ रहा है लेकिन एक भारत है जो स्थिर खड़ा रह पाया है और global economy में भी किसी राष्‍ट्र का स्थिर economy को handle करना ये भी अपने-आप में विश्‍व में संतुलन बनाने के लिए बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है। और वो भूमिका भारत ने इस पूरे वैश्विक संकट के समय अदा की है। इतने बड़े तूफान के बीच भारत अपने आप को बना पाया है। और बना पाया है तो आगे बढ़ने की संभावना भी उसमें बहुत ज्‍यादा है।

विश्‍व भारत के संबंध में ये अनुमान लगाता है कि भारत का potential इतना अपरम्‍पार है अभी तक आप tap नहीं कर पाए। लोग ये नहीं करते हैं कि भई आप कैसे आगे बढ़ोगे, आप कुछ टिक पाओगे के नहीं पाओगे, बचोगे कि नहीं बचोगे, ये चर्चा नहीं। चर्चा ये है, अरे भाई इतना मौका है, आप, आप ठंडे क्‍यों ? ये सवाल पूछा जा रहा है। यानी सारे विश्‍व को लग रहा है कि आज विश्‍व के आर्थिक जीवन में सबसे अगर कोई potential area है जहां growth story है तो वो हिंदुस्‍तान में है। और हमने भी देखा है World Bank हो, IMF हो, बाकी जितनी Rating Agencies हों, सबने कहा है कि भारत आज दुनिया की, बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कम्‍पनी है। अगर ये ताकत हमारे पास है, तो हमारा काम है कि हम foundation को भी मजबूत करें और vertical भी जाएं। Horizontal and vertical, दोनों तरफ हमें आगे बढ़ना पड़ेगा और Horizontal जाने के लिए ये ग्रामीण जीवन में हम कैसे प्रवेश ? हमारा व्‍याप कैसे बढ़ाएं? उसी प्रकार से हम नए-नए क्षेत्रों को कैसे चुनें? अगर हम priority sector देखें, priority sector को पैसे देना, ये सरकार के कुछ नियम हैं, जाते हैं लेकिन मान लीजिए कहा गया कि भाई agriculture sector को पैसा देना है, लेकिन एक fertilizer कारखाने को दे दिया, माना जाएगा agriculture sector और हिसाब ठीक हो जाएगा तो agriculture sector को दे दिया। इससे हमें बाहर आना है। हम एक सामान्‍य agriculturist को या गांव को ध्‍यान में रख करके या दो, चार, दस गांव के बीच में cold storage कैसे बनें? Warehousing की व्‍यवस्‍था कैसे हो? उसमें banking कैसे? हम value addition में कैसे मदद कर सकते? हम सिर्फ agriculture sector को पकड़ें, आज मैं समझता हूं कि इतनी संभावनाएं पड़ी हुई हैं, हिन्‍दुस्‍तान का किसान आज दुनिया के साथ अपने-आप में तालमेल करने की कोशिश कर रहा है। आपने देखा होगा, कि एक महिला अपना नम्‍बर अंग्रेजी में बता रही थी, Mobile Number अंग्रेजी में बता रही थी। अब ये कोई जरूरी नहीं है कि उन्‍होंने किसी स्‍कूल में जा करके पढ़ा होगा। लेकिन अब धीरे-धीरे करके सब चीजें समाज, जीवन में सहज हिस्‍सा बन रही हैं। ये इस ताकत को पहचानना, यही तो सबसे बड़ी खूबी है। हम इसको अगर ताकत मानते हुए, हां ये बदलाव है क्‍योंकि मेरा तो ये अनुभव है।

मैंने एक बार कहीं वर्णन भी किया था, में गुजरात में जब मुख्‍यमंत्री था तो एक बहुत ही पिछड़ा तहसील है हमारे यहां, धर्मपुर के पास, बलसाड़ जिले में, tribal belt है। अब मेरा मुख्‍यमंत्री रहते हुए वहां कभी कार्यक्रम नहीं हुआ था तो मैंने आग्रह किया, मैंने कहा मुझे वहां जाना है। न एक दिन कोई कार्यक्रम नहीं होगा तो ऐसे ही जा करके एक पेड़ लगा करके वहां से वापिस आऊंगा। तो फिर एक chilling centre के उद्घाटन के लिए कार्यक्रम बन गया। अब chilling centre क्‍या 50 लाख का होता है, छोटा सा क्‍या होता है, जो दूध लोग देने आते हैं, उसको, ट्रक आने तक उसको संभालते हैं। इतना ही होता है। मैंने कहा मैं उसके लिए जाऊंगा। फिर वहां करनी थी तो जगह नहीं थी, क्‍योंकि जंगल है तो कोई जगह नहीं थी, तो एक स्‍कूल थी दूर, दो-ढाई किलोमीटर, स्‍कूल में function था। लेकिन इस कार्यक्रम के लिए उन्‍होंने 50 करीब आदिवासी महिलाओं को बुलाया था। दूध भरने वाली जो महिलाएं होती हैं, 50 को बुलाया था। जहां chilling centre था, वहां। सब वहां तो अलग था माहौल। मैं हैरान था जब chilling center में उद्घाटन वगैरह हुआ, ये महिलाएं सारी मोबाइल से फोटो निकालती थी। आदिवासी महिलाएं फोन से फोटो निकालती थी। मुझे जरा surprise हुआ। मैं उनके पास गया। मैंने कहा ये फोटो निकाल कर क्‍या करोगे? उन्‍होंने जो जवाब दिया वो और आश्‍चर्यजनक था। उन्‍होंने कहा, हम इसको download करवा देंगे। अब ये download शब्‍द उनको मालूम था। download कैसे होता है, कहां होता है, ये पता था। इसका मतलब ये हुआ कि हम कहां तक पहुंचे। इसको हम किस प्रकार से आने वाले दिनों में हमारी growth story का हिस्‍सा कैसे बनाए और उस दिशा में हम कैसे काम करे?

उसी प्रकार से हमारे नौजवान। उनको पढ़ाई के लिए सरलता से Bank loan की व्‍यवस्‍था क्‍यों न हो? मेरा मत है ये women self-help groups....Women self-help group को पैसा मिलता है, अगर उनको बुधवार को पैसा जमा करवाना है 100 रुपए तो मंगल को आकर के दे जाते हैं कि लीजिए साहब मेरा पैसा कल पता नहीं कहीं और खर्च हो जाएगा। ये sensitivity है हमारे यहां, ग्रामीण जीवन में। इसका जितना लाभ लेना चाहिए हमने लिया नहीं और साहूकारों ने इस पर अपनी पकड़ा जमा दी और उसने हमारी economy को भी बहुत बड़ा नुकसान किया है। तो हमने एक विश्‍वास पैदा करना है, एक गारंटी पैदा करनी है। मैं समझता हूं ये जो प्रयास है, वो प्रयास उस परिणामों को जरूर अवश्‍य फल देगा।

Banking sector में हमारी ये कोशिश रही है कि bank nationalize हुई। तब तो बताया गया था कि भई गरीबों के लिए हुआ, लेकिन हमने जो देखा कि वो बहुत सीमित रहा। जैसे मध्‍यम वर्ग के परिवारों तक family doctor होता है, वैसे उच्‍च परिवारों का एक Banker होता है। बड़े ऊंचे घरानों का और बीमार भी होंगे लेकिन अगर Banker ने कहीं lunch-dinner रखा है तो जरूर जाएंगे क्‍योंकि उनको पता है कि भई इसका उनका कारोबार कितना महत्‍वपूर्ण है। ये अच्‍छा है, बुरा है लेकिन है। मैं समझता हूं कि अब हमारे यहां Neo-Middle Class कहो या मध्‍यम वर्ग कहो, ये एक बहुत बड़ी ताकत होती है। हम उनकी तरफ ध्‍यान केन्‍द्रित करके, ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को कैसे विकसित करें। मान लीजिए आप, आपके सामने दो proposal है। एक है कि कोई भवन बनाना है, सरकारी दफ्तर बनाना है और दूसरी proposal है कि इसने प्राइवेट में कहा है कि मैं यहां एक कॉलेज खड़ा करना चाहता हूं, एक Higher-Secondary School चालू करना चाहता हूं, मुझे बैंक से पैसा चाहिए। अगर मैं बैंक में हूं तो मैं पहली priority उस स्‍कूल वाले को दूंगा। क्‍योंकि मुझे मालूम है कि वहां स्‍कूल बनता है तो फिर ऐसे 50 दफ्तर बनाने की ताकत उनसे अपने आप आ जाने वाली है। इसलिए हमारे investment की priority क्‍या बने? पैसे देने की priority क्‍या बने? ये अगर हमने chain शुरू की जिसके multiple हमें benefit हो। अगर ये होगा तो मैं मानता हूं कि बहुत ही लाभ होगा।

हमने जो financial inclusion का जो मिशन उठाया है। अब जैसे अरुण जी बता रहे थे कि प्रधानमंत्री की जो हमने योजना बनाई जिसमें हमने मध्‍यम वर्ग, गरीब, धोबी हो, नाई हो, दूध बेचने वाला हो, अखबार बेचने वाला हो उसको मुद्रा योजना के तहत finance कैसे हो। इस देश में करीब 6 करोड़ लोग ऐसे हैं, इस प्रकार के काम में और उनका average कर्ज 17 हजार रुपए है। कोई ज्‍यादा नहीं है, लेकिन वे ये पैसे साहूकार से लेते हैं, बहुत ब्‍याज देते हैं और वो अपना विकास-विस्‍तार नहीं कर पाते हैं। मुद्रा योजना के तहत हमारी कोशिश है कि ऐसे लोगों को इस ब्‍याज के चक्‍कर से मुक्‍ति दिलाना और उनको financial help liberally करना। हमने 50 हजार, 5 लाख, 10 लाख तक की, उसकी व्‍यवस्‍थाएं की, 50 लाख तक की की। अभी तो मैं समझता हूं मुश्‍किल से 100 दिन हुए होंगे इस योजना को launch किए। अब तक 61 लाख clients and करीब 35 thousand crore rupees, ये वहां गया है। 35 हजार करोड़ रुपया बाजार के अंदर नीचे जाना मतलब economy को कितनी बड़ी ताकत देता है वो। 35 हजार करोड़ किसी एक शहर में डालने से उतना change नहीं आता है जितना कि हजारों गांवों के अंदर 35 हजार करोड़ रुपया जाता है, तो economy में एक vibrancy आना शुरू हो जाता है, नीचे से शुरू हो जाता है और ये आने वाले दिनों में देखेंगे और हमारी कोशिश यही है कि हम उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं।

हमारे देश में Banking sector के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान उठे हैं। Appointment से लेकर के, governance से लेकर के, पैसे देने के संबंध में पचासों प्रकार के सवालिया निशान लगे हैं। हमने आने के बाद एक दिन round-table conference किया, चिंतन शिविर की, सभी बैंक के लोगों के साथ detail में चर्चा की। उनकी समस्‍याएं क्‍या हैं, सरकार से अपेक्षाएं क्‍या हैं, कानूनी मुसीबतें क्‍या हैं। सारी चीजों की विस्‍तार से चर्चा की। RBI भी मौजूद था, मैं भी था, अरुण जी भी थे, काफी विस्‍तार से चर्चा की और उसमें से जो बातें आईं उस बातों को हमने लागू करने का प्रयास किया है। हमने एक सप्‍तसूत्री योजना बनाई है, जिस योजना का मैं समझता हूं कि हमारे देश में ऐसी चीजों की चर्चा बहुत कम होती है। लेकिन इसका बहुत बड़ा निर्णय है और A B C D E F G, ये सप्‍तसूत्री मेरा कार्यक्रम है। ये सप्‍तसूत्री कार्यक्रम बैंकों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है।

एक है हमारा A – Appointments. बैंकों में उच्‍च पदों पर नियुक्‍तियों में सुधार लाने का हमने फैसला किया है और इसलिए हमने 1969 के बाद nationalised bank में private sector के लोगों को भी लिया है, वरना nationalised bank से लोग private में चले जाते थे। पहली बार ये reverse trend शुरू हुआ है, जिसमें efficiency को हमने महत्‍व दिया है।

B – B for Bank, Board, Bureau. ये B3 पहली बार हम इस देश में लाए हैं कि बैंकों में जो भी नियुक्‍तियां हुईं उसका selection top rank के लिए, ये board करेगा। Politically मुझे ये पसंद आया, उसको मैं एक director बना दू और वो वहां बैठ जाए और फिर बाद में जब loan देनी हो तो वाया उसी से आ जाए proposal और फिर पता चले भई ये तो PM का आदमी बोल रहा है, देना ही पड़ेगा। ये डूबने के पीछे कारण यही है और इसलिए हमने कहा है कि ये कतई हम नहीं करेंगे, सारे professional लोगों को हम इस काम में लगाएंगे।

C – Capitalization. पिछले कुछ वर्षों में दिए गए loans में bad loans हैं। उसके कारण संकट आया है। अब रोते-बैठने का कोई अर्थ नहीं है इसलिए हमने करीब आने वाले कुछ वर्षों में 70 हजार करोड़ रुपया बैंक के अंदर डालकर के ये bad loans के कारण जो संकट है, उसमें से हम बाहर लाने का कार्यक्रम कर रहे हैं।

D – De-stress of assets. कुछ क्षेत्रों में जहां ये समस्‍या गंभीर है, हमने import duties बढ़ाने का domestic producer को सहारा दिया है। आपने देखा होगा हमने Steel में अभी किया। ताकि जिसके कारण Steel जो बैंक के साथ Steel उद्योग पैसा लेता था, उसको एक ताकत मिले। तो हमने De-stress के लिए कई कदम उठाने की दिशा में काम किया है।

6 है -नए debt recovery tribunal. जिसमें हम bad loans recovery इन सारे कामों को मैंने कहा है जैसे Power sector. हम बहुत तेज गति से निर्णय पर जा रहे हैं। Power sector जो NPA की समस्‍या से जुड़ा हुआ है उसको कैसे handle करना है।

E – Empower. Empower का मेरा सीधा-सीधा मतलब था, जब मैं पुणे में गया था इस मीटिंग में तब मैंने कहा था, Zero interferes. आपको political leadership और establishment से कभी फोन नहीं आएगा कि इसके loan का क्‍या करना है लेना, देना और आज तक इतने महीने हो गए, एक भी जगह से खबर नहीं आई है कि ऐसा कोई pressure है। purely, professionally चलाइए और बाहर लाइए। तो इस प्रकार से बैंकों को Empower करने की दिशा में हमने काम किया है।

F – Framework for accountability. बैंकों का performance monitor करने के लिए key performance indicator हमने set किए हैं ताकि हमें regularly पता चले कि भई कहां जा रहे हैं, किस दिशा में जा रहे हैं। कितना जा रहे हैं, वो नहीं। कितना तो संतोष कभी-कभी दे देता है, लेकिन कहां और कैसे और कितने समय में। उस दिशा में indicators को हमने बल दिया है।

और last है G – Governance. हमारे banking sectorमें governance को बल देना है। हमने technology पर जाना है, transparency को लाना है। cyber crime की सबसे ज्‍यादा संभावनाएं banking sector, financial world में हैं या तो data चोरी करने की। ये दो ही सबसे बड़े क्षेत्र हैं और इसलिए हमको assure करना होगा हमारे governance को।

तो ऐसी सप्‍तसूत्री हमारी योजना के द्वारा इन seven pillars पर पूरा banking sector को ताकत कैसे मिले। सरकार ने इतने महत्‍वपूर्ण initiative लिए हैं। मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में भारत जिस तेज गति से आगे बढ़ रहा है बैंक कंधे से कंधा मिलाकर के उसके साथ चलेगा। कुछ क्षेत्रों में बैंक दो कदम आगे होगा और मैं समझता हूं कि ये ताकत ultimately भारत के जो निर्धारित लक्ष्‍य हैं और जिन माध्‍यमों से हैं, उन सबको मिलकर के हम पूरा कर सकते हैं।

आने वाले दिनों में IDFC को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं वो इस क्षेत्र में बहुत-बहुत प्रगति करें। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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जय केरलम... जय केरलम...

जय विकसिता केरलम... जय विकसिता केरलम

केरलत्तिले एंडे प्रियप्पेट्टा….

सहोदरी सहोदरनमारे, एल्लावर्कम एंडे नमस्कारम।

सर्वप्रथम मैं भगवान श्रीवल्लभन के चरणों में प्रणाम करता हूं।

तिरुवल्ला की इस पवित्र धरती से मैं सबरीमला तीर्थ को, और स्वामी अय्यप्पा को भी प्रणाम करता हूं।

मैं सबसे पहले तो छोटी बिटिया को आशीर्वाद देता हूं जो बढ़िया चित्र बनाकर मुझे भेंट किया है। उधर भी एक नौजवान ने मेरी मां का चित्र मुझे दिया है। मैं इन सबका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस बेटी को आशीर्वाद देता हूं। मैं अपना भाषण शुरू करूं उससे पहले इस चुनाव में जो कैंडिडेट है उनसे आग्रह करता हूं कि कैंडिडेट सारे आगे आ जाएं। कैंडिडेट वहां खड़ें हो जाएं जरा। मैं एक दो मिनट जाकर के आता हूं आपके पास।

आज तिरुवल्ला में इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति...NDA पर आप लोगों का ये भरोसा... मेरी माताओं-बहनों का ये स्नेह और विश्वास...पूरे केरलम में आज ऐसा ही माहौल दिख रहा है। मुझे निकट से केरलम के चुनाव देखने का अवसर मिला है। मैं पहले भी आया हूं लेकिन इस बार हवा का रूख कुछ और है। लोगों का मिजाज कुछ और है। केरलम में अब सबसे बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। 9 अप्रैल को वोटिंग और 4 मई को दशकों के कुशासन का अंत की घोषणा....अब ये पक्का हो चुका है....LDF सरकार के जाने का काउंट डाउन शुरू हो चुका है...केरलम में पहली बार बीजेपी और NDA की सरकार आने वाली है।

इस चुनाव में केरलम का तो फायदा होने वाला है लेकिन मेरा एक निजी नुकसान होने वाला है। आपको लगता होगा ऐसी क्या बात है कि केरलम का फायदा होगा और मोदी का नुकसान होगा। जी मेरा व्यक्तिगत नुकसान होने वाला है। आपके मन में होता होगा क्या है बताऊं... बताऊं आपको। ऐसा है ये जो अनूप लड़ रहा है ना चुनाव आपके यहां.. ये पिछले पांच साल से मेरे साथ काम करता है। और देश भर में घूमकर के चीजें खोज कर के लाता है। यानि एक प्रकार से मेरा डेडिकेटेड साथी रहा है। एक प्रकार से ऐसे कामों के लिए वो मेरा बांया हाथ बन गया है। और कभी भी, शायद यहां भी कई लोगों को पता नहीं होगा कि अनूप मेरे साथ इतने सालों से है। कभी बोलता नही है और मैंने इसकी शक्तियों को जाना है। चूपचाप काम करना। अपने काम के लिए दिन रात जुटे रहना। मैंने ऐसा नौजवान मुझे मिला मेरा बहुत काम हो गया। लेकिन मैंने देखा कि जब केरलम को इस नौजवान की सेवाओं का फायदा होगा तो मैंने कहा मेरा भले ही नुकसान हो जाए लेकिन मैं आज अनूप को आपको सुपुर्द करने के लिए आया हूं।

एंडे सुहुर्तगले,

तिरुवल्ला केरलम में विकास के नए युग की शुरुआत का केंद्र बनकर उभरा है। मैं इस जनसमर्थन के लिए तिरुवल्ला की जनता का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। तिरुवल्ला के लोगों का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है। तिरुवल्लयिले जनंगलुडे विश्वासमाण्, यंगलुडे एट्टवुं वलिय शक्ति।

एंडे सुहुर्तगले,

अभी दो-तीन दिन पहले जब मैं दिल्ली में था...मेरी केरलम के बीजेपी कार्यकर्ताओं से फोन पर लंबी चर्चा हुई। मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम में 5 हजार से ज्यादा शक्ति केंद्र, इतने छोटे केरलम में 5 हजार से ज्यादा शक्ति केंद्र में बीजेपी के एक लाख 25 हजार से ज्यादा कार्यकर्ता मेरे साथ फोन पर जुड़े थे। और तीस-चालीस मिनट इस चर्चा में मैंने देखा, साफ दिखा कि केरलम की जनता ने LDF सरकार की विदाई पक्की कर ली है। इस चुनाव में मेहनत कर रहे सभी बीजेपी-एनडीए कार्यकर्ताओं की मैं हृदय से सराहना करता हूं, उनका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

एंडे सुहुर्तगले,

मैं केरलम की ताकत को देख रहा हूं। अभी मेरा हेलीकॉप्टर जहां लैंड हुआ, हेलीपैड से यहां तक मैं आया, जितने लोग यहां हैं ना इससे ज्यादा लोगो वहां रोड शो में खड़े थे। मेरे लिए बड़ा सरप्राइज था... रोड शो का कार्यक्रम नहीं था, लेकिन पूरे रास्ते भर मैं देख रहा था। लोग ह्यूमन चेन की बात करते हैं लेफ्ट के लोग, आज यहां के लोगों ने ह्यूमल वॉल बनाकर के दिखा दिया।

एंडे सुहुर्तगले,

हमारे केरलम को ईश्वर ने अपार संसाधन और संभावनाएं दी हैं।
यहाँ समंदर में ब्लू इकोनॉमी के असीम अवसर हैं। यहाँ उद्योगों के लिए संभावनाएं हैं। पर्यटन के क्षेत्र में कितना बड़ा potential है। लेकिन फिर भी, केरलम विकास की दौड़ में बाकी राज्यों से लगातार पिछर रहा है..पिछरते-पिछरते जा रहा है।

एंडे सुहुर्तगले,

LDF-UDF की सरकारों ने कभी इस क्षेत्र की परवाह नहीं की।
यहाँ कनेक्टिंग रोड्स का हाल बेहाल है। मुझे आपके ही साथी बता रहे थे कि यहां कई बरसों से एक भी बड़ा पुल नहीं बना है। कोट्टयम में मेडिकल कॉलेज की हालत इतनी खराब है कि उसका वर्णन करना मुश्किल है। जहां बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ऐसी कमी हो, वहां आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ कैसी होगी, इसका अंदाजा हर कोई लगा सकता है।

एंडे सुहुर्तगले,

केरलम में कभी BJP सरकार नहीं रही। लेकिन, आप सब के आशीर्वाद से, देश की जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से हम केंद्र सरकार के जरिए केरलम के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। जब कांग्रेस दिल्ली में सत्ता में थी.. और एलडीएफ-यूडीएफ दोनों मिलकर के दिल्ली में सरकार चलाते थे, उस समय जो केरलम को मदद मिली.उसकी तुलना में NDA सरकार ने मोदी सरकार ने 5 गुना ज्यादा पैसा केरलम को भेजा है।

एंडे सुहुर्तगले,

बीजेपी-एनडीए को आपकी Ease of Living और क्वालिटी ऑफ लाइफ, दोनों की चिंता है। हमने पीएम आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के घर दिये हैं। जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पाइप से पानी पहुंचाने का काम हो रहा है। यहां रबर के किसान बड़ी संख्या में रहते हैं...केरलम के किसानों को हमने पीएम-किसान सम्मान निधि के जरिए Around thirteen thousand करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे उनके खातों में पहुंचाई है। इससे रबर के किसानों को भी मदद मिली है।

साथियों,

नॉर्थ-ईस्ट में ईसाई समाज की संख्या बहुत अधिक है। एक राज्य को छोड़कर के नॉर्थ-ईस्ट के सात राज्यों में एनडीए की सरकार है और वहां पिछले 50-60 साल में जो काम नही हुआ है वो हमने कर के दिखाया है। गोवा में ईसाई समाज निर्णायक है। गोवा के अंदर लगातार बिजेपी की एनडीए की सरकार है, गोवा विकास के नए ऊंचाइयों को छू रहा है।
केरलम में भी NDA सरकार बनेगी तो विकास की नई ऊंचाइयों को पाएंगे, स्थानीय किसानों और फिशरमेन की हर समस्या का हम समाधान करेंगे।

एंडे सुहुर्तगले,

केंद्र की NDA सरकार ही केरलम में आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर ज़ोर दे रही है। हम यहाँ नेशनल हाइवेज बनाने को गति दे रहे हैं। रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया गया है। यहाँ रेलवे लाइनों की डबलिंग का काम भी पूरा हो गया है। कोट्यम से अब हाइस्पीड आधुनिक वंदेभारत ट्रेन भी चलाई जा रही है।

एंडे सुहुर्तगले,

यहां सबरीमला रेलवे प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में नई संभावनाओं को खोल सकता है। इससे सबरीमला तक सीधी कनेक्टिविटी बनेगी। श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी... स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी...और मेरे नौजवान मित्रों को मेरे युवा साथियों के लिए रोजगार के नए-नए रास्ते खुलेंगे। लेकिन साथियों, आपको ये बात हमेशा याद रखनी है। यहां प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की जगह उसको लटकाए रखा! तिरुवल्ला को इसका बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। जब बीजेपी की डबल इंजन सरकार आएगी, तो ऐसी सभी रुकावटें हटेंगी। और ये मोदी की गारंटी है। NDA की राज्य सरकार में केरलम तेज गति से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
एनडीए सरकारिनु कीड़िल केरलम
कसनत्तिन्टे पातयिल अतिवेगम मुन्नेरुम।

एंडे सुहुर्तगले,

NDA की नीतियों का सबसे बड़ा लाभ अगर किसी वर्ग को होता है, तो वो मेरी माताएं-बहने महिलाओं को होता है। महिलाओं का सशक्तिकरण, महिलाओं का प्रतिनिधित्व....ये हमारी प्राथमिकता है। हमने महिलाओं के जीवन से जुड़ी हर समस्या के समाधान का प्रयास किया है। हमने घर घर शौचालय बनवाए, जनधन खाते खुलवाए, महिलाओं के नाम उनके घर महिलाओं के नाम पर बनवाए...मुद्रा लोन के जरिए अपना कारोबार शुरू करने वालों में भी बड़ी हिस्सेदारी महिलाओं की है। उनको बैंक से पैसा मिला है। हम वूमन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी लाखों करोड़ रुपए की मदद दे रहे हैं। लखपति दीदी का अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। पहले मैंने तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा था। देश में तीन करोड़ लखपति दीदी बन चुकी अब मैंने और नाइनटीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। केरलम में बीजेपी सरकार आएगी, तो यहाँ भी डबल इंजन सरकार का सबसे बड़ा लाभ मेरी माताओं, बहनों को, बेटियों को, महिलाओं को मिलने वाला है। आपने देखा होगा, अभी हमने एक बड़ा कार्यक्रम शुरू किया है। भविष्य में माताओ-बहनों को कैंसर ना हो, इसलिए 13-14 साल की बच्चियों को उनकी जांच करके वैक्सीन लेने की योजना है। ये भविष्य में हमारी माताओ-बहनों को, ये बटियां जब बड़ी हो जाएंगी, वो कैंसर से बच पाएगी। इतना बड़ा काम आज देश की बेटियों के लिए, महिलाओं के लिए, माताओं के लिए एनडीए-भाजपा सरकार कर रही है।

एंडे सुहुर्तगले,

ये हमारी ही सरकार है जिसने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को thirty three percent reservation दिया है। और आप सभी की जानकारी में है कि बजट सत्र का हमने पूर्णाहुति करने वी बजाए उसका विस्तार किया है। तीन दिन के लिए 16-17 और 18 अप्रैल को संसद फिर से मिलने वाली है। आपको पता है क्यों मिलने वाली है। जो कानून हमने पारित किया है। 33 पर्सेंट महिलाओं के लिए 2029 में लोकसबा के चुनाव से इसका लाभ मिलना शुरू हो जाए। 33 पर्सेंट बहनें पार्लियामेंट में आकर बैठे। इसके लिए कानून बनाने की जरूरत है। जैसे पार्लियामेंट ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण बिल पास किया था बैसे ही 16-17 -18 को दो काम करने हैं। केरल हो तमिलनाडु हो और बाकी राज्य हो, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, लोग झूठ फैला रहे हैं कि जनसंख्या कम हो रही हैं तो सीटें कम हो जाएगी। हम इस बार पार्लियामेंट में पक्का करना चाहते हैं कि पार्लियामेंट में कानून में ठप्पा लगाना चाहते हैं कि केरल हो, तमलनाडु हो, कर्नाटक हो, आंध्र हो, गोवा हो, तेलंगाना हो कहीं पर भी लोकसभा की सीटें कम ना हो, इसका ठप्पा लगाने के लिए और दूसरा महिलाओं के लिए जो सीटें होंगी वो अतिरिक्त सीटें बढ़ जाएं इतना बड़ा फायदा हमारे दक्षिण भारत के राज्य को मिले इसके लिए हम कानून संशोधन के लिए हम सत्र बुला रहे हैं। हमने कांग्रेस के लोगों को मीटिंग के लिए बुलाया। हम आशा करते हैं कि वो हमारी बात मानकर के आएंगे।

हमने इंडिया एलायंस के मित्रों से बात की है। आप ही लोगों को बताइए, कांग्रेस के लोगो को बताइए, एलडीएफ के लोगों को बताएं कि महिलाओं के अधिकार ये कानून निर्विरोध पास होना चाहिए। ये उन से वादा लीजिए आपलोग । और में उनसे भी प्रार्थना करता हूं कि मेरी माताओं-बहनों का ये हक 40 सालों से लटका हुआ है। अब 2029 के चुनाव में फिर से लटकना नहीं चाहिए। इसलिए मैं सभी राजनीतिक दलों पर देश की माताएं-बहनें दबाव डालें। सब संसद में आएं और इस कानून को पारित करें। महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या इस विषय को देखते हुए नारीशक्ति वंदन कानून में संशोधन किया जाएगा। ये आवश्यक है कि ये संशोधन सर्वसम्मति से पास हो ताकि साल 2029 में होने वाले चुनाव में ही इसका लाभ हमारी माताओं -बहनों को मिलना शुरू हो जाए। मैं सभी दलों से आग्रह करूंगा कि ये नारीशक्ति से हित से जुड़ा काम है, इसलिए खुले मन से, कोई भी राजनीतिक हिसाब किए बिना पूर्ण समर्थन कर के माताओं-बहनों का विश्वास जीतने में आप भी भागीदान बनिए।

एंडे सुहुर्तगले,

आज केरलम में युवाओं का पलायन सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। केरलम में रोजगार के लिए यहाँ इंडस्ट्री लगाने की जरूरत है। रोजगार के लिए जरूरी है कि, यहाँ service sector बढ़े। start-ups को जगह मिले, skill को सही value मिले। लेकिन इन सबके आगे केरलम में सबसे बडी दीवार है- करप्शन और कम्यूनलिज्म। जब यहां करप्शन और कम्यूनलिज्म की दीवार टूटेगी, तभी केरलम का विकास होगा। और इसके लिए आपको LDF-UDF दोनों को हराना होगा।

एंडे सुहुर्तगले,

रोजगार की तलाश में यहाँ से लाखों युवा विदेशों में भी गए हैं। NRI के तौर पर भी वो केरलम की सेवा करते हैं। यहाँ अपनी आय का बड़ा हिस्सा remittance के तौर पर भेजते हैं। इसी का परिणाम है, ये क्षेत्र बैंकिंग कैपिटल बनकर उभरा है। लेकिन कांग्रेस ने आपके और आपके संबंधियों के खिलाफ एक बहुत खतरनाक काम किया है। मैं विस्तार से आपको ये बात बताना चाहता

एंडे सुहुर्तगले,

वेस्ट एशिया के युद्ध संकट ने कांग्रेस और उसके साथी दलों के मंसूबों को एक्सपोज कर दिया है। आज पूरा देश देख रहा है... खाड़ी के देशों में कैसे हालात बने हुये हैं। और वहां हमारे लाखों लोग केरल के मेरे भाई-बहन वहां काम कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं... ऐसे बयान देते हैं... जिनसे वेस्ट एशिया में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए ! वहां के लोगों को बीच में अविश्वास पैदा हो जाए। वहां की सरकार ये तो हमारी दोस्ती अच्छी है कि गल्फ की सभी सरकारें हमारे सभी भारतीयों को अपने ही परिवार मानकर के उनकी रक्षा कर रहे हैं। लेकिन यहां से ऐसी-ऐसी भाषा बोली जा रही है। ऐसी भड़काव बातें हो रही हैं। मैं उनको कह-कह कर थक गया कि ये बोलने का समय नहीं है। ये हमारे लाखों भाई-बहन वहां है ना उनकी सुरक्षा ही मेरा पहला दायित्व है। सबसे बड़ी प्रायरिटी है, कृपा कर के अनाप-शनाप बोलना बंद करो ताकि हमारे नौजवानों को हमारी बेटियों को वहां कोई तकलीफ ना हो।

एंडे सुहुर्तगले,

कांग्रेस चाहती है कि वेस्ट एशिया के देश भारत को अपना दुश्मन समझें...यहां हम कोई गलती कर दे ऐसा कोई बयान कर दे और गल्फ कंट्रीज से भारतीयों को वहां से बाहर निकलने के लिए मूसीबत आ जाए ! इसलिए कांग्रेस...गल्फ कंट्रीज को नाराज करने वाले बयान दे रही है। कांग्रेस चाहती है कि पैनिक फैले और उसे मोदी को गाली देने का मौका मिल जाए। अरे कांग्रेस के लोगो, एलडीएफ के लोगो, यूडीएफ के लोगो, अरे राजनीति अपनी जगह पर है, अरे चुनाव आते जाते रहेंगे, लेकिन मेरे केरलम के लाखों भाई-बहन वहां है मेरे लिए उनकी सुरक्षा सबसे बड़ा काम है और मैं इसके लिए कमिटेड हूं। चुनाव जीतने के लिए, मोदी को गाली देने के लिए....कांग्रेस 1 करोड़ प्रवासियों का जीवन संकट में डालने को तैयार बैठी है। उधर ईरान में हमारा फिशरमैन केरल के हैं तमिलनाडु के हैं, गोवा के हैं आंध्र के हैं, तेलंगाना के हैं, पुड्डुचेरी के हैं। उनकी जिंदगी खतरे में है। हम वहां के संकट में से उनको बाहर ले आ रहे हैं। आज सैकड़ों की तादाद में मेरे मछुआरे भाई-बहन भारत लौटने वाले हैं। हमारे लिए उनकी जिंदगी बचाना ये महत्वपूर्ण है बयानबाजी करने के लिए और बहुत मौके आएंगे अभी तो हमारे लोगों की, हमारे मछुआरे भाई-बहनों को हमें जिंदा वापस लाना है। कांग्रेस को इन सारी चीजों से कोई लेना देना नहीं है। बस चुनाव... चुनाव... चुनाव.. क्या देश के लोगों की चिंता नहीं करोगे... काँग्रेस इस स्वार्थी सियासत के लिए केरलम के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। पाप कर रहे हो।

एंडे सुहुर्तगले,

युद्ध की इन परिस्थितियों में मैं आपकी चिंता समझता हूं। इसलिए गल्फ कंट्रीज के नेताओं से लगातार संपर्क में हूं। इसलिए गल्फ कंट्रीज के नेताओं से मैं लगातार संपर्क में हूं। वहां की सरकारों से हम लगाता बात कर रहे हैं। मैं आप सभी परिजनों को आश्वस्त करता हूँ.... आपका बेटा, आपकी बेटी, आपके परिवारजन भले ही आपसे दूर हों...लेकिन, वो अकेले नहीं हैं। भारत सरकार इन देशों में रह रहे हर भारतीय के साथ है। युद्ध के बीच भी हम भारत के लोगों को हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं।

एंडे सुहुर्तगले,

इस चुनाव में LDF-UDF वालों ने मिलकर एक और propaganda शुरू किया है। लेफ्ट वाले कहते हैं कि, कांग्रेस बीजेपी की B टीम है। और, कांग्रेस कहती है कि लेफ्ट BJP की B टीम है। इन्हें ये इसलिए कहना पड़ रहा है... क्योंकि ये दोनों भी जानते हैं कि इस चुनाव में केरलम में अगर कोई पार्टी A टीम है तो A टीम BJP ही है।

साथियों,

आपने ये भी देखा है कि इस चुनाव में LDF और UDF दोनों मिलकर सिर्फ BJP को गालियां दे रही हैं, उनके निशाने पर सिर्फ बीजेपी है। इसकी एक वजह और भी है जो आपको जरूर नोट करनी चाहिए। दरअसल LDF और UDF की सीक्रेट पार्टनरशिप इतनी पक्की है कि ये एक दूसरे पर आरोप लगाने से बच रहे हैं। असल में ये दोनों एक ही सिक्के दो साइड हैं। इनकी दुश्मनी नकली है... WWWF है। LDF और UDF की दोस्ती एवरग्रीन है! जब दिल्ली में सरकार बनती है दोनों साथ होते हैं। बगल में तमिलनाडु में साथ में चुनाव लड़ रहे हैं।

एंडे सुहुर्तगले,

लेफ्ट और काँग्रेस दोनों वोटबैंक के लिए कट्टरपंथी लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाते हैं। मुनंबम जैसी घटनाएं केरलम में आम होती जा रही हैं... वहाँ सैकड़ों ईसाई और हिंदू परिवारों को डराया गया। लेकिन, केरलम सरकार पीड़ितों को सहायता देने की जगह कट्टरपंथी ताकतों के साथ ही खड़ी नज़र आती है। ये एक खतरनाक ट्रेंड है। वोटबैंक के लिए केरलम और देश की सुरक्षा से ये खिलवाड़.... केरलम के देशभक्त लोग इसे कभी भी कामयाब नहीं होने देंगे।

एंडे सुहुर्तगले,

लेफ्ट और काँग्रेस का भ्रष्टाचार हो, या उनका तुष्टीकरण... इसका सीधा हमला केरलम की संस्कृति और आस्था पर हो रहा है। पहले इन लोगों ने सबरीमला तीर्थ को बदनाम करने के लिए कैसे-कैसे षड्यंत्र रचे थे! और अब, सबरीमला इनकी लूट और चोरी के निशाने पर भी आ गया है।

एंडे सुहुर्तगले,

सबरीमला में हुये इस पाप का एक पैटर्न है... ये चोरी LDF की सरकार में हुई। और, इसमें चोरी करने वालों के तार काँग्रेस के शीर्ष नेताओं के जुड़े पाए गए। लेफ्ट वाले तो हमेशा से हिन्दू आस्था पर हमले के लिए जाने जाते हैं। इसीलिए, LDF सरकार मामले की जांच CBI को नहीं सौंप रही है। और, जो काँग्रेस हमेशा मंदिर से जुड़े विषयों को अछूत मानती थी... वो आज हिंदुओं की हितैषी बनने का नाटक कर रही है दिखावा कर रही है। मैं ये साफ-साफ कहना चाहता हूँ... NDA सरकार बनने के बाद LDF-UDF को उनके अपराध की सजा जरूर मिलेगी। और जो लूटा है वो लौटाना पड़ेगा। स्वामी अयप्पा और उनके भक्तों के आक्रोश के आगे ये लोग बच नहीं पाएंगे। ये कांग्रेस वाले ये यूडीएफ वाले, ये एलडीएफ वाले हर चीज में झूठ बोलना ये जैसे उनका स्वभाव बन गया है।

देश को गुमराह करना ये उनका स्वभाव बन गया है। जब सीएए लाए तो देश को इतना झूठ बोला... इतना झूठ बोला आज सीएए लागून हुआ देश को कोई नुकसान नहीं हुआ, झूठ बोलने में माहिर है.. केरलम फाइल्स आई फिल्म तो बोलने लगे कि सब झूठ है... कश्मीर फाइल आई तो बोलने लगे सब झूठ है..धुरंधर फिल्म आई तो बोलने लगे कि झूठ है। कुछ भी करो बता देना... झूठ फैला देना। इन दिनो सीआआर को लेकर भी, ऐसा ही झूठ फैलाया जा रहा है। यूसीसी के लिए ऐसा ही झूठ फैलाया जा रहा है। गोवा में सीसीए आया हुआ है, दशकों से है लेकिन झूठ फैलाना एफसीआरए के लिए झूठ फैलाना, सीएए के लिए झूठ फैलाना, धुरंधर जैसी फिल्म के लिए झूठ फैलाना केरलम फिल्म के लिए झूठ फैलाना, कश्मीर फाइल्स के लिए झूठ फैलाना। झूठ फैलाने का कारोबाल लेकर के बैठे हुए हैं।

एंडे सुहुर्तगले,

केरलम की आस्था, संस्कृति इसकी रक्षा हो... केरलम विकास की नई ऊंचाइयों को छूए... ये हम सभी का संकल्प है। आप भाजपा-एनडीए उम्मीदवार को वोट देकर विकसित केरलम की यात्रा शुरू करिए। मैं आपको निमंत्रण देता हूं आप आइए.. ये मेरी जिम्मेदारी है ये मेरी गारंटी है 50 सालों में केरलम का विकास नहीं हुआ, हम पांच साल में करके देंगे।

एंडे सुहुर्तगले,

कल ईस्टर है। मैं ईस्टर की आपको शुभकामनाएं देता हूं। कुछ ही सप्ताह में सभी मलयाली साथी विशु भी मनाएंगे। मैं विशु की भी अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। मैं सबसे पहले तो आप सबसे माफी मांगना चाहता हूं, क्योंकि मैं मलयालम, मलयाली, ये आपकी बहुत सुंदर भाषा है, मैं बोल नहीं पाता हूं, मुझे हिंदी में बोलना पड़ा। लेकिन इसके बावजूद भी, एक भी व्यक्ति यहां से हटा नहीं। मैं जानता हूं यहां गांव के लोग आए हैं, हो सकता है मेरी भाषा नहीं समझ पाते हों, लेकिन ये आपके प्यार की ताकत है। ये आपका आशीर्वाद है... एक भी व्य़क्ति हिल नहीं रहा है हट नहीं रहा है। मेरा ये बहुत बड़ा सौभाग्य है। मैं आपका ये कर्ज, मैं आपका प्यार कभी भूलूंगा नहीं, ये मेरे पर आपका कर्ज है... और मैं केरलम के विकास को प्राथमिकता देकर के सवा गुना विकास करके इस कर्ज को चुकाऊंगा ये आज मैं वादा करता हूं।

मैं आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ बोलिए, दोनों हाथ ऊपर करके बोलिए...

भारत माता की... जय! भारत माता की... जय!

भारत माता की... जय! भारत माता की... जय!

वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...