PM speaks at the function organized by Rickshaw Sangh in Varanasi
PM launches financial inclusion initiative in Varanasi, calls it a landmark event that would transform lives of people
There is a need to increase the pace and scale of outcomes of the initiatives to remove poverty: PM
Every person wants his or her child to lead a life better than what they led. Every person wants his or her child lead a life of dignity: PM
Union Government is putting emphasis on skill development to help make the poor self-reliant: PM
Education is the best way to fight poverty: PM Narendra Modi
PM Modi urges beneficiaries to ensure that their children receive proper education

विशाल संख्या में आए भाईयो और बहनों,

यहां जो कार्यक्रम हो रहा है, ये कार्यक्रम सिर्फ कुछ गरीब परिवारों का जीवन बदलेगा, ऐसा नहीं है। ये कार्यक्रम एक ऐसी शुभ शुरूआत है, जो काशी के भाग्‍य को बदलेगा। यहां के गरीब के जीवन में अगर हम थोड़ा सा आवश्‍यक बदलाव ला ले, समय के आधारित जीवन में technology का प्रवेश करें, तो गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति की पहले जितना परिश्रम करके कमाता था, उससे भी थोड़ा कम परिश्रम करके, वो ज्‍यादा कमा सकता है। आज यहां उस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं, जिसमें बैंक का सहयोग है, American Foundation का सहयोग है, भारत सरकार बहुत बड़ी मात्रा में इन चीजों को promote कर रही है और गरीब को सबसे पहला प्रयास है कि वो आत्‍मनिर्भर कैसे बने।

हम करीब-करीब पिछले 40-50 साल से गरीबी हटाओ, इस बात को सुनते आए हैं। हमारे देश में चुनावों में भी गरीबों का कल्‍याण करने वाले भाषण लगातार सुनने को मिलते हैं। हमारे यहां राजनीति करते समय कुछ भी करते हो लेकिन सुबह-शाम गरीबों की माला जपते रहना, ये एक परंपरा बन गई है। इस परंपरा से जरा बाहर आने की जरूरत है और बाहर आने का मतलब है कि क्‍या हम प्रत्‍यक्ष रूप से गरीबों को साथ ले करके, गरीबी से मुक्‍ति का अभियान चला सकते हैं क्‍या? अब तक जितने प्रयोग हुए हैं, उन प्रयोगों से जितनी मात्रा में परिणाम चाहिए था, वो देश को मिला नहीं है। गरीब की जिन्‍दगी में भी जिस तेजी से बदलाव आना चाहिए, वो बदलाव हम ला नहीं पाए हैं। मैं किसी सरकार को दोष देना नहीं चाहता हूं, किसी दल को दोष देना नहीं चाहता हूं, लेकिन कुछ अच्‍छा करने की दिशा में एक नए सिरे से गरीबों के कल्‍याण के लिए मूलभूत बातों पर focus करना। वो कौन सी चीजें करें ताकि गरीब जो सचमुच में मेहनत करने को तैयार है, गरीबी की जिन्‍दगी से बाहर निकलने को तैयार है। आप किसी भी गरीब को पूछ लीजिए, उसे पूछिए कि भाई क्‍या आप अपने संतानों को ऐसी ही गरीबी वाली जिन्‍दगी जीएं, ऐसा चाहते हो कि अच्‍छी जिन्‍दगी जीएं चाहते हो। गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति भी ये कहेगा कि मैं मेरे संतानों को विरासत मैं ऐसी गरीबी देना नहीं चाहता। मैं उसे एक ऐसी जिन्‍दगी देना चाहता हूं कि जिसके कारण वो अपने कदमों पर खड़ा रहे, सम्‍मान से जीना शुरू करें और अपनी जिन्‍दगी गौरवपूर्व बताएं, ऐसा हर गरीब मां-बाप की इच्‍छा होती हैं। उसको वो पूरा कैसे करें। आज कभी हालत ऐसी होती है कि वो मजदूरी करता है, लेकिन अगर थोड़ा-सा skill development कर दिया जाए, उसको थोड़ा हुनर सिखा दिया जाए तो पहले अगर वो सौ रुपया कमाता है, थोड़ा हुनर सिखा दिया तो वो 250-300 रुपए कमाना शुरू कर देता है और एक बार हुनर सीखता है तो खुद भी दिमाग लगाकर के उसमें अच्‍छाई करने का प्रयास करता है और इसलिए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा अभियान चलाया है skill development का, कौशल्‍यवर्धन का। गरीब से गरीब का बच्‍चा चाहे स्‍कूल के दरवाजे तक पहुंचा हो या न पहुंचा हो, या पांचवीं, सातवीं, दसवीं, बारहवीं पढ़कर के छोड़ दी हो, रोजी-रोटी तलाशता हो। अगर उसे कोई चीज सिखा ली जाए तो वो देश की अर्थनीति को भी बल देता है, आर्थिक गतिविधि को भी बल देता है और स्‍वयं अपने जीवन में कुछ कर-गुजरने की इच्‍छा रखता है और इसलिए छोटी-छोटी चीजें ये कैसे develop करे उस दिशा में हमारा प्रयास है।

आज मैं यहां ये सब ई-रिक्‍शा वाले भाइयों से मिला। मैंने उनको पूछा क्‍या करोगे, चला पाओगे क्‍या? तो उन्‍होंने कहा साहब पहले से मेरा confidence level ज्‍यादा है। मैंने कहा क्‍यों? वो मेरा skill development हो गया। उसे skill शब्‍द भी आता था। बोले मेरा skill development हो गया। बोले मेरी training हुई और मेरा पहले से ज्‍यादा विश्‍वास है। पहले मैं pedal वाले रिक्‍शा चलाता था। मैंने कहा speed कितनी रखोगे? बोले साहब मैं कानून का पालन करूंगा और मैं कभी ऐसा न करूं ताकि मेरे परिवार को भी कोई संकट आए और मेरे passenger के परिवार को भी संकट आए, ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा और काशी की गलियां तो छोटी है तो वैसे भी मुझे संभाल के चलना है। उसकी ये training हुई है। काशी में दुनिया भर के लोग आते हैं। काशी का tourism कैसा हो, काशी कैसा है, काशी के लोग कैसे है? उसका पहला परिचय यात्री को किसके साथ होता है, रिक्‍शा वाले के साथ होता है। वो उसके साथ किस प्रकार से व्‍यवहार करता है, वो उसके प्रति किस प्रकार का भाव रखता है, उसी से उसकी मन में छवि बनती है। अरे भाई, ये तो शहर बहुत अच्‍छा है। यहां के रिक्‍शा वाले भी इतने प्‍यार से हमारी चिन्‍ता करते हैं, वहीं से शुरू होता है और इसलिए यहां जो टूरिस्‍टों के लिए एक स्‍पेशल रिक्‍शा का जो सुशोभन किया गया है, कुछ व्‍यवस्‍थाएं विकसित की गई हैं। मैं उनसे पूछ रहा था, मैंने कहा आप Guide के नाते मुझे सब चीजें बता सकते हों, बोले हां बता सकता हूं। मैं हर चीज बता सकता हूं रिक्‍शा चलाते-चलाते और बोले मुझे विश्‍वास है कि मेरे रिक्‍शा में जो बैठेगा, उसको ये संतोष होगा कि काशी उसको देखने को सहज मिल जाएगा। चीजें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वे बहुत बड़ा बदलाव लाती है।

आज चाहे pedal रिक्‍शा को आधुनिक कैसे किया जाए, pedal रिक्‍शा से ई-रिक्‍शा की ओर shifting कैसे किया जाए, यात्रियों की सुविधाओं को कैसे स्‍थान दिया जाए, बदलते हुए युग में environment friendly technology का कैसे उपयोग किया जाए? इन सारी बातों का इसके अंदर जोड़ हैं और सबसे बड़ी बात है उनके परिवार की। आज इसमें जो लोग select किए गए हैं, वो वो लोग है, जिनकी खुद की कभी रिक्‍शा नहीं थी। वो बेचारे किराए पर रिक्‍शा लेकर के दिनभर मजदूरी करते थे। 50 रुपया, 60 रुपया उस रिक्‍शा मालिक को उनको देना पड़ता था। बचा-खुचा घर जाकर के ले जाता था। बच्‍चों के लिए डबलरोटी साथ ले जाता था, उसी से रात का गुजारा हो जाता था। इस प्रयोग का सबसे बड़ा लाभ उन गरीब रिक्‍शा वालों को है कि अब उनको वो जो ऊंचे ब्‍याज से पैसे देने पड़ते थे, उससे अब मुक्‍ति हो गई। अब वो जो पैसे होंगे वो बैंक के बहुत ही कम rate से पैसा जमा करेगा और कोई साल के अंदर और कोई दो साल में इस रिक्‍शा का मालिक हो जाएगा। जब उसे पता है, इसका मतलब ये हुआ कि उसकी ये बचत होने वाली है। ये पैसे उसके किसी ओर की जेब में नहीं जाने वाले, खुद की जेब में जाने वाले है ताकि वो एक साल-दो साल के बाद इसका मालिक बन जाने वाला है और मुझे विश्‍वास है कि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था के कारण आने वाले दिनों में जितने परिवार है, उनको फिर गरीबी की हालत में रहने की नौबत नहीं आएगी, वो आगे बढ़ेंगे।

मैंने उनसे पूछा कि बच्‍चों को पढ़ाओगे क्‍या? बोले साहब अब तक तो कभी-कभी मन में रहता था कि कितना पढ़ाऊं, कहां से पैसा लाऊं, लेकिन ये जो आपने व्‍यवस्‍था की है, अब मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं बच्‍चों को पढ़ाऊंगा। मेरी बात तो ये पांच-छह लोगों के साथ हुई है लेकिन यहां जिन लोगों को आज रिक्‍शा मिल रही है, उन सबसे मेरा आग्रह है कितनी ही तकलीफ क्‍यों न हो, मेरे प्रति नाराजगी व्‍यक्‍त करनी है, तो जरूर करना, आपको हक है। लेकिन बच्‍चों को पढ़ाई से कभी खारिज मत करना, बच्‍चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देना। गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का सबसे बड़ा औजार और सस्‍ते से सस्‍ता औजार कोई है, तो अपनी संतानों को शिक्षा देना। अगर हम अपने बच्‍चों को शिक्षा देंगे, तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो हमें गरीब रहने के लिए मजबूर कर दे। देखते ही देखते स्थिति बदलना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि ये जो नई सुविधाएं जिन-जिन परिवारों को मिल रही हैं, वे अपने बच्‍चों को पढ़ाने के विषय में कोई compromise न करें, अपने बच्‍चों को जरूर पढ़ाएं।

आज मुझे एक परिवार से मिलना हुआ। वो बहन चौराहे पर दरी बिछाकर के सब्‍जी बगैरा बेचती रहती थी, आज उसको एक ठेला मिल गया है। मैंने उसको पूछा क्‍या फर्क पड़ेगा। बोले जी पहले तो मैं जहां बैठती थी कोई आया तो माल ले के जाता था, अब मैं अलग-अलग इलाकों में जाऊंगी, अपना समय पत्रक बना दूंगी कि इस इलाके में सुबह 9 बजे जाना है, इस इलाके में सुबह 10 बजे जाना है इस इलाके में 11 बजे जाना है, तो लोगों को भी पता रहेगा कि मैं कितने बजे वहां माल अपना लेकर जाऊंगी, तो वो जरूर उस समय पर मेरा माल ले लेंगे। अब देखिए अनपढ़ महिला! लेकिन उसे मालूम है कि मैं ऐसा टाईम-टेबल बनाऊंगी कि इस इलाके में 9 बजे जाती हूं तो रोज, हर रोज 9 बजे वहां पहुंच जाऊंगी, इस इलाके में दोपहर को 12 बजे पहुंचती हूं, मतलब 12 बजे पहुंच जाऊंगी। यानी उसको business का perfect management मालूम है। ठेला चलाते-चलाते भी अपनी जिंदगी बदली जा सकती है, इसका विश्‍वास उसके अंदर आया है। ये छोटी-छोटी चीजें हैं, जिसके द्वारा हम एक बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

अभी प्रधानमंत्री जन-धन खाते खोलने का जो अभियान चलाया, हमारे देश में सालों से कहा जाता था कि गरीबों के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया है, लेकिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 40-50 साल के बाद भी, बैंक के दरवाजे पर कभी कोई गरीब दिखाई नहीं दिया था और इस देश में कभी उसकी चर्चा भी नहीं थी। इस देश में ऐसा क्‍यों ? ये सवाल इस देश के किसी बुद्धिमान व्‍यक्ति ने किसी राजनेता को नहीं पूछा, किसी सरकार को नहीं पूछा। 50 साल में नहीं पूछा। Taken for granted था। हमने आकर के बीड़ा उठाया कि बैंकों के दरवाजे पर मेरा गरीब होगा, बैंकों के अंदर मेरा गरीब होगा। ये बैंक गरीबों के लिए होगी, बड़ा अभियान उठाया। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी, 26 जनवरी तक पूरा करने का संकल्‍प लिया था और सभी बैंकों ने जी-जान से मेरे साथ जुड़ गए, कंधे से कंधा जुड़ गए और आज देश में करीब 18 करोड़ से ज्‍यादा बैंकों के खाते गरीबों के खुल गए।

हिन्‍दुस्‍तान में कुल परिवारों में जितने थे करीब-करीब सारे आ गए और हमने तो कहा था कि हम गरीबों का account कोई भी प्रकार का पैसा लेकर कर के नहीं खोलेंगे। बिना पैसे, बैंक खर्चा करेगी फॉर्म का खर्चा होगा, जो होगा करेंगे, गरीबों का एक बार मुफ्त में खाता खोल देंगे। आदत लगेगी उसको धीरे-धीरे और खाते खोल दिए लेकिन देखिए, गरीबों की अमीरी देखिए, सरकार ने तो कहा था एक रुपया नहीं दोगे लेकिन गरीबों ने करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा रकम जमा कर दी है। इसका मतलब ये हुआ कि गरीब को पैसे बचाने की अब इच्‍छा होने लगी है। अगर गरीब को पैसे बचाने की इच्‍छा होगी तो उसके आर्थिक जीवन में बदलाव आना स्‍वाभाविक शुरू हो जाएगा। धीरे-धीरे बैंक के खाते उपयोग करने की आदत भी अब धीरे-धीरे बन रही है। मैं हैरान हूं जिन्‍होंने खाते नहीं खोले कभी, वो आज मेरा हिसाब मांग रहे हैं कि खाते खोल तो दिए हैं, लेकिन उसका उपयोग करने वालों की संख्‍या बढ़ नहीं रही है। जिन्‍होंने खाते तक खोलने की परवाह नहीं की थी, उनको अभी खाते operate हो रहे कि नहीं हो रहे, इसकी चिन्‍ता होने लगी है। अच्‍छा होता, ये काम अगर आपने 40-50 साल पहले कर दिया होता तो आज operate करने का सवाल मुझे नहीं पूछना पड़ता देश के सभी गरीब के खाते हो जाते। लेकिन आपने जो काम 50 साल नहीं किया है वो 50 महीने में मैं पूरा करके रहूंगा, ये मैं बताने आया हूं।

गरीब का भला कैसे हो, अभी काशी के अंदर रक्षाबंधन को सुरक्षाबंधन बनाने का बड़ा अभियान चलाया और मैं काशी की माताओं-बहनों का विशेष रूप से, सार्वजनिक रूप से आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि इस रक्षाबंधन के पर्व पर मुझे इतनी राखियां मिली हैं बनारस से, इतने आशीर्वाद मिले हैं, माताओं-बहनों के, मैं सिर झुकाकर उन सभी माताओं-बहनों को नमन करता हूं। आपने जो मेरे प्रति सद्भाव व्‍यक्‍त किया है, मेरी रक्षा की चिन्‍ता की है और सुरक्षा का बंधन की जो बात कही है, मैं उसके लिए काशी की सभी माताओं-बहनों का ह्दय से बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैं इन सभी महानुभावों का भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि योजना में हमारे साथ, ये partner बने हैं और एक Model के रूप में ये काम आने वाले दिनों में विकसित होगा। अब आप धीरे-धीरे देखिए काशी के अंदर एक नया....और इसके कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण शहर की एक नई पहचान बनने वाली है। इन चीजों के कारण सामान्‍य मानव के जीवन में सुविधा का अवसर शुरू होने वाला है।

ऐसी इस योजना के निमित्‍त मैं आज उन सभी बधुंओं को जिन्‍हें आज ये साधन मिल रहे हैं, मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और काशी की आर्थिक प्रगति में गरीब से गरीब व्‍यक्ति की ताकत काम में आए, उस दिशा के प्रयत्‍नों में हमें सफलता मिले, यही भोलेनाथ हम पर आशीर्वाद बरसाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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উত্তৰ প্ৰদেশৰ হৰদোইত গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ উদ্বোধনৰ সময়ত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ ভাষণৰ মূল পাঠ
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

ভাৰত মাতাৰ জয়।

গংগা মাতাৰ জয়।

গংগা মাতাৰ জয়।

উত্তৰ প্ৰদেশৰ ৰাজ্যপাল আনন্দিবেন পেটেল, মুখ্যমন্ত্ৰী যোগী আদিত্যনাথ জী, উপ মুখ্যমন্ত্ৰী কেশৱ প্ৰসাদ মৌৰ্য আৰু ব্রিজেশ পাঠক জী, কেন্দ্ৰীয় মন্ত্ৰীসভাত মোৰ সহকৰ্মী জিতিন প্ৰসাদ জী তথা পংকজ চৌধুৰী জী, উত্তৰ প্ৰদেশ চৰকাৰৰ মন্ত্ৰী, সাংসদ আৰু বিধায়ক, অন্যান্য জন প্ৰতিনিধি আৰু ইয়াত বিশাল সংখ্যাত উপস্থিত থকা মোৰ মৰমৰ ভাই-ভনীসকল।

সৰ্বপ্ৰথমে, মই ভগৱান নৰসিংহৰ এই পুণ্যভূমিক প্ৰণাম জনাইছো। ইয়াৰ পৰা কেইকিলোমিটাৰমান দূৰত মা গংগা সুন্দৰভাৱে বৈ গৈছে। সেয়েহে, এই সমগ্ৰ অঞ্চলটো কোনো তীৰ্থতকৈ কম নহয়। আৰু মই বিশ্বাস কৰোঁ যে উত্তৰ প্ৰদেশলৈ এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ এই উপহাৰো মা গংগাৰ আশীৰ্বাদ। এতিয়া আপুনি কেইঘণ্টামানৰ ভিতৰতে সংগমলৈ যাব পাৰে আৰু কাশীত বাবাক সাক্ষাৎ কৰি উভতিও আহিব পাৰে।

 

বন্ধুসকল,

হাজাৰ হাজাৰ বছৰ ধৰি মা গংগা উত্তৰ প্ৰদেশ আৰু এই দেশৰ জীৱনৰেখা হিচাপে পৰিগণিত হৈ অহাৰ দৰে আধুনিক প্ৰগতিৰ এই যুগত, তেওঁৰ ওচৰলৈ যোৱা এই এক্সপ্ৰেছৱে উত্তৰ প্ৰদেশৰ উন্নয়নৰ নতুন জীৱনৰেখা হৈ উঠিব। এয়াও এক বিস্ময়কৰ কাকতালীয় ঘটনা যে যোৱা চাৰি-পাঁচ দিনত মই মা গংগাৰ ওচৰত আছিলো। ২৪ এপ্ৰিলত মই বংগত থাকি গংগাৰ দৰ্শন কৰাৰ পাছত কালি মই কাশীত আছিলো। আজি ৰাতিপুৱা মই পুনৰ বাবা বিশ্বনাথ, মা অন্নপূৰ্ণা আৰু মা গংগা দৰ্শন কৰাৰ সৌভাগ্য লাভ কৰিছো। আৰু এতিয়া মা গংগাৰ নামত নিৰ্মিত এই এক্সপ্ৰেছৱে উৎসৰ্গা কৰাৰ সুযোগ পালো। মই সুখী যে উত্তৰ প্ৰদেশ চৰকাৰে এই এক্সপ্ৰেছৱে’টোৰ নাম মা গংগাৰ নামেৰে ৰাখিছে। ই আমাৰ উন্নয়নৰ দৃষ্টিভংগী আৰু আমাৰ ঐতিহ্যৰ দৃষ্টিভংগীও প্ৰতিফলিত কৰে। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ বাবে মই উত্তৰ প্ৰদেশৰ কোটি কোটি লোকক অভিনন্দন জনাইছো।

 

বন্ধুসকল,

আজি গণতন্ত্ৰ উদযাপনৰ বাবেও এক গুৰুত্বপূৰ্ণ দিন। বংগত বৰ্তমান দ্বিতীয় পৰ্যায়ৰ ভোটদান চলি আছে, আৰু যি প্ৰতিবেদন আহিছে তাৰ পৰা ধাৰণা কৰা হৈছে যে বংগত ব্যাপকভাৱে ভোটদান হৈছে। প্ৰথম পৰ্যায়ৰ দৰে, জনসাধাৰণে ভোটদান কৰিবলৈ বৃহৎ সংখ্যাত নিজৰ ঘৰৰ পৰা ওলাই আহিছে, দীঘলীয়া শাৰীৰ ফটো ছ’চিয়েল মিডিয়াত বিয়পি পৰিছে। যোৱা ৬-৭ দশকত যি হোৱা নাছিল, যিটো কল্পনা কৰাটো কঠিন আছিল, এইবাৰ বংগত নিৰ্ভীক পৰিৱেশত ভোটদান অনুষ্ঠিত হৈছে। জনসাধাৰণে ভয় নোহোৱাকৈ ভোটদান কৰিছে। ই দেশৰ সংবিধান আৰু দেশৰ শক্তিশালী গণতন্ত্ৰৰ এক গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰতীক। নিজৰ অধিকাৰৰ প্ৰতি ইমান সচেতন আৰু বৃহৎ সংখ্যাত ভোটদান কৰাৰ বাবে মই বংগৰ মহান জনসাধাৰণৰ প্ৰতি কৃতজ্ঞতা প্ৰকাশ কৰিছো। ভোটদান সমাপ্ত হ’বলৈ বহু ঘণ্টা বাকী থকাৰ সময়তে, মই বংগৰ জনসাধাৰণক গণতন্ত্ৰৰ এই উৎসৱত একে উৎসাহেৰে অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ আহ্বান জনাইছো।

 

বন্ধুসকল,

কিছুদিন পূৰ্বে বিহাৰত নিৰ্বাচন অনুষ্ঠিত হোৱাৰ সময়ত বিজেপি এনডিএ-য়ে এক বৃহৎ বিজয় লাভ কৰি ইতিহাস ৰচনা কৰিছিল। কালিহে গুজৰাটৰ পৌৰ নিগম, পৌৰসভা, জিলা পঞ্চায়ত, নগৰ পঞ্চায়ত, তহচিল পঞ্চায়তৰ নিৰ্বাচনৰ ফলাফল আহিছে। আৰু আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণ সুখী হ'ব যে ৮০ৰ পৰা ৮৫ শতাংশ পৌৰসভা আৰু পঞ্চায়তত বিজেপিয়ে জয়লাভ কৰিছে। আৰু মই আত্মবিশ্বাসী যে এই পাঁচখন ৰাজ্যৰ নিৰ্বাচনতো বিজেপিয়ে ঐতিহাসিক বিজয়ৰ হেট্ৰিক ৰেকৰ্ড কৰিব। ৪ মে’ৰ ফলাফলে উন্নত ভাৰতৰ সংকল্পক শক্তিশালী কৰিব, দেশৰ উন্নয়নৰ গতি নতুন শক্তিৰে পূৰণ কৰিব।

 

বন্ধুসকল,

দেশৰ দ্ৰুত উন্নয়নৰ বাবে আমি দ্ৰুতগতিত আধুনিক আন্তঃগাঁথনিও নিৰ্মাণ কৰিব লাগিব। ২০২১ৰ ডিচেম্বৰত মই গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ আধাৰশিলা স্থাপন কৰিবলৈ শ্বাহজাহানপুৰলৈ আহিছিলো। এতিয়া ৫ বছৰতকৈও কম সময় হৈছে, আৰু আপোনালোকে দেখিব, দেশৰ সৰ্ববৃহৎ এক্সপ্ৰেছৱে’সমূহৰ ভিতৰত অন্যতম, উত্তৰ প্ৰদেশৰ দীৰ্ঘতম গ্ৰীণ কৰিডৰ এক্সপ্ৰেছৱে’ ৫ বছৰৰ ভিতৰত সম্পূৰ্ণ হৈছে। আজি ইয়াক হাৰদোইৰ পৰাও উদ্বোধন কৰা হৈছে। কেৱল এয়াই নহয়, এফালে গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ নিৰ্মাণ সম্পূৰ্ণ হোৱাৰ লগতে ইয়াৰ সম্প্ৰসাৰণৰ পৰিকল্পনাৰ কামো আৰম্ভ হৈছে। অতি সোনকালেই গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ মীৰাটৰ পৰা আগবাঢ়ি হৰিদ্বাৰলৈ সম্প্ৰসাৰিত হ’ব। ইয়াৰ অধিক উন্নত ব্যৱহাৰৰ বাবে ফাৰুখাবাদ লিংক এক্সপ্ৰেছৱে’ নিৰ্মাণ কৰি ইয়াক অন্যান্য এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ সৈতেও সংযোগ কৰা হ’ব। এয়া হৈছে দ্বৈত ইঞ্জিন চৰকাৰৰ দৃষ্টিভংগী! এই গতিৰে বিজেপি চৰকাৰে কাম কৰিছে! এয়া বিজেপি চৰকাৰৰ কাম কৰাৰ পদ্ধতি!

 

ভাই-ভনীসকল,

মাত্ৰ কেইদিনমান পূৰ্বে মই দিল্লী-ডেৰাডুন এক্সপ্ৰেছৱে’ উৎসৰ্গা কৰাৰ সুযোগ পাইছিলো। তেতিয়া মই কৈছিলো যে এই নতুন এক্সপ্ৰেছৱে'সমূহ হৈছে উন্নয়নশীল ভাৰতৰ হস্তৰেখাসদৃশ আৰু এই আধুনিক হস্তৰেখাসমূহে আজি ভাৰতৰ বাবে এক উজ্জ্বল ভৱিষ্যতৰ সূচনা কৰিছে।

বন্ধুসকল,

সেই দিনবোৰ পাৰ হৈ গ’ল যেতিয়া এটা পথৰ বাবে কেইবা দশক ধৰি অপেক্ষা কৰিবলগীয়া হৈছিল! এবাৰ ঘোষণা কৰাৰ পাছত, ফাইলসমূহ বছৰ বছৰ ধৰি চলি থাকিল! নিৰ্বাচনৰ বাবে প্ৰতিবন্ধকতা আহি পৰিছিল, তাৰ পিছত চৰকাৰ আহিছিল আৰু গৈছিল, কিন্তু কামৰ কোনো চিহ্ন নাছিল। কেতিয়াবা, জ্যেষ্ঠ বিষয়াসকলে পুৰণি ফাইলবোৰ বিচাৰি উলিয়াবলৈ দুবছৰ ধৰি কঠোৰ পৰিশ্ৰম কৰিবলগীয়া হৈছিল। দ্বৈত ইঞ্জিন চৰকাৰত আধাৰশিলাও স্থাপন কৰা হয় আৰু উদ্বোধনো যথাসময়ত হয়। সেয়েহে, যদি আজি উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক্সপ্ৰেছৱে’তকৈ দ্ৰুত গতি যদি কৰবাত আছে, তেন্তে সেয়া হৈছে উত্তৰ প্ৰদেশৰ উন্নয়নৰ গতি।

 

বন্ধুসকল,

এই এক্সপ্ৰেছৱে’ কেৱল উচ্চ গতিৰ পথ নহয়। ই হৈছে নতুন সম্ভাৱনা, নতুন সপোন, নতুন সুযোগৰ প্ৰৱেশদ্বাৰ। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ প্ৰায় ৬০০ কিলোমিটাৰ দীঘল। পশ্চিম উত্তৰ প্ৰদেশৰ মীৰাট, বুলন্দচহৰ, হাপুৰ, আমৰোহা, সম্ভল আৰু বদাউন। মধ্য উত্তৰ প্ৰদেশৰ শ্বাহজাহানপুৰ, হৰদোই, উন্নাও, ৰায় বাৰেলী। পূব উত্তৰ প্ৰদেশৰ প্ৰতাপগড় আৰু প্ৰয়াগৰাজ তথা আন কাষৰীয়া জিলাসমূহৰ অধীনৰ এই অঞ্চলসমূহৰ কোটি কোটি লোকৰ জীৱন গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ জৰিয়তে সলনি হ’ব।

 

বন্ধুসকল,

এই অঞ্চলবোৰ গংগা আৰু ইয়াৰ উপনৈসমূহৰ উৰ্বৰ মাটিৰে ধন্য। কিন্তু, আগৰ চৰকাৰসমূহে কৃষকসকলক যিধৰণে অৱহেলা কৰিছিল, কৃষকসকলক বিপথগামী কৰি পেলাইছিল! ইয়াৰ কৃষকসকলৰ শস্য ডাঙৰ ডাঙৰ বজাৰলৈ যাব পৰা নাছিল। শীতল ভাণ্ডাৰৰ অভাৱ আছিল। ৰছদপাতিৰ অভাৱ আছিল। কৃষকসকলে তেওঁলোকৰ কঠোৰ পৰিশ্ৰমৰ বাবে সঠিক মূল্য লাভ কৰা নাছিল। এতিয়া সেই সমস্যাবোৰো দ্ৰুতগতিত সমাধান হ'ব। গংগা এক্সপ্ৰেছৱেই কম সময়ৰ ভিতৰতে মুখ্য বজাৰসমূহলৈ প্ৰৱেশাধিকাৰ প্ৰদান কৰিব। ইয়াত কৃষিৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় আন্তঃগাঁথনিৰ বিকাশ হ'ব। ই আমাৰ কৃষকসকলৰ উপাৰ্জন বৃদ্ধি কৰিব।

 

বন্ধুসকল,

গংগা এক্সপ্ৰেছৱে'ই উত্তৰ প্ৰদেশৰ এটা প্ৰান্তৰ পৰা আনটো প্ৰান্তলৈ সংযোগ কৰিছে। ই এন. চি. আৰৰ সীমাহীন সম্ভাৱনাসমূহ ওচৰলৈ লৈ আহিব। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ত কেৱল ৰে’ল চলাচল কৰাই নহয়, ইয়াৰ সমান্তৰালভাৱে নতুন ঔদ্যোগিক সুযোগ বিকশিত হ’ব। ইয়াৰ বাবে হাৰদোইৰ দৰে আন জিলাসমূহতো ঔদ্যোগিক কৰিডৰ বিকশিত কৰা হৈছে। ই হৰদোই, শ্বাহজাহানপুৰ, উন্নাওকে ধৰি ১২ খন জিলাতে নতুন উদ্যোগ আনিব। ভেষজ, বস্ত্ৰ আদিৰ দৰে বিভিন্ন খণ্ডৰ গোট বিকশিত কৰা হ’ব। যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবেও নতুন নিযুক্তিৰ সুযোগ সৃষ্টি কৰা হ’ব।

 

বন্ধুসকল,

আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলেও মুদ্ৰা যোজনা আৰু অ’ড’পিৰ দৰে আঁচনিৰ জৰিয়তে নতুন অভিলেখ গঢ়িছে। ইয়াত ক্ষুদ্ৰ উদ্যোগ, এমএছএমইসমূহে উৎসাহ লাভ কৰিছে। উন্নত সংযোগৰ সুবিধা প্ৰদান কৰিলে তেওঁলোকৰ বাবেও নতুন পথ মুকলি হ’ব। মীৰাটৰ ক্ৰীড়া উদ্যোগ, সম্ভলৰ হস্তশিল্প, বুলন্দচহৰৰ মৃৎশিল্প, হৰদোইৰ হস্ততাঁত, উন্নাওৰ চামৰা, প্ৰতাপগড়ৰ আমলা সামগ্ৰী, এই সকলোবোৰ দেশ আৰু বিশ্বৰ বজাৰলৈ ব্যাপকভাৱে আহিব। ইয়াৰ ফলত লাখ লাখ পৰিয়ালৰ উপাৰ্জন বৃদ্ধি পাব। আপোনালোকে মোক কওক, পূৰ্বৰ সমাজবাদী পাৰ্টী চৰকাৰে হাৰদোই, উন্নাওৰ দৰে জিলাসমূহত ঔদ্যোগিক কৰিডৰ নিৰ্মাণৰ কথা কল্পনা কৰিছিল নেকি? কোনোবাই কেতিয়াবা কল্পনা কৰিব পাৰিলেনে যে এক্সপ্ৰেছৱেও আমাৰ হৰদোইৰ মাজেৰে পাৰ হ’ব? এয়া কেৱল বিজেপি চৰকাৰৰ অধীনতহে সম্ভৱ।

 

বন্ধুসকল,

পূৰ্বতে উত্তৰ প্ৰদেশক পিছপৰা আৰু ৰুগীয়া প্ৰদেশ বুলি কোৱা হৈছিল। সেই একেই উত্তৰ প্ৰদেশ আজি ১ ট্ৰিলিয়ন ডলাৰৰ অৰ্থনীতিত পৰিণত হোৱাৰ দিশত আগবাঢ়িছে। সেইটো এটা ডাঙৰ লক্ষ্য। কিন্তু ইয়াৰ আঁৰতো সমানেই এক বৃহৎ প্ৰস্তুতি আছে। কিয়নো, উত্তৰ প্ৰদেশত এনে অসীম সম্ভাৱনা আছে। দেশৰ ইমান বৃহৎ যুৱ জনসংখ্যাৰ সম্ভাৱনা উত্তৰ প্ৰদেশত আছে। আমি এই শক্তি ব্যৱহাৰ কৰি উত্তৰ প্ৰদেশক এক উৎপাদন কেন্দ্ৰ হিচাপে গঢ়ি তুলিছো। উত্তৰ প্ৰদেশত নতুন উদ্যোগ আৰু কাৰখানা স্থাপন কৰা হ'ব, যেতিয়া ইয়াত বৃহৎ পৰিমাণৰ বিনিয়োগ আহিব, তেতিয়া ইয়াত অৰ্থনৈতিক প্ৰগতিৰ দুৱাৰ মুকলি হ'ব আৰু যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে নিযুক্তিৰ সুযোগ সৃষ্টি হ'ব।

 

ভাই-ভনীসকল,

এই দৃষ্টিভংগীৰ আধাৰত, বছৰ বছৰ ধৰি নিৰন্তৰ কাম কৰা হৈছে। আপোনালোক সকলোৱে এইটোও উপলব্ধি কৰিছে যে পূৰ্বতে প্ৰব্ৰজনৰ বাবে পৰিচিত উত্তৰ প্ৰদেশ আজি বিনিয়োগকাৰী সন্মিলন আৰু ঔদ্যোগিক কৰিডৰৰ বাবে জনাজাত। দেশ আৰু বিশ্বৰ বিভিন্ন প্ৰান্তৰ কোম্পানীসমূহে উত্তৰ প্ৰদেশৰ বিনিয়োগকাৰী সন্মিলনত অংশগ্ৰহণ কৰে। উত্তৰ প্ৰদেশত হাজাৰ হাজাৰ কোটি টকা বিনিয়োগ কৰা হৈছে। আজি, যদি ভাৰত বিশ্বৰ দ্বিতীয় সৰ্ববৃহৎ মোবাইল নিৰ্মাতা হয়, তেন্তে ইয়াত উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক বৃহৎ অৱদান আছে। আজি, ভাৰতে নিৰ্মাণ কৰি থকা আধা মোবাইল আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। মাত্ৰ কেইসপ্তাহমান পূৰ্বে মই নয়ডাত ছেমিকণ্ডাক্টৰ প্ৰকল্পৰ আধাৰশিলাও স্থাপন কৰিছো।

 

বন্ধুসকল,

আপোনালোক সকলোৱে জানে যে এআইৰ এই যুগত ছেমিকণ্ডাক্টৰবোৰ ইমান ডাঙৰ ক্ষেত্ৰত পৰিণত হৈছে। ইউপিয়ে সেই ক্ষেত্ৰতো অগ্ৰগতি লাভ কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আছে। ভৱিষ্যতে, উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণৰ বাবে অপৰিসীম সুযোগ থকা এক বিশাল ক্ষেত্ৰ মুকলি হ’ব।

বন্ধুসকল,

উত্তৰ প্ৰদেশৰ ঔদ্যোগিক বিকাশো আজি ভাৰতৰ কৌশলগত শক্তি হৈ পৰিছে। আজি দেশৰ দুটা প্ৰতিৰক্ষা কৰিডৰৰ ভিতৰত এটা উত্তৰ প্ৰদেশত আছে। বৃহৎ প্ৰতিৰক্ষা কোম্পানীসমূহে ইয়াত তেওঁলোকৰ কাৰখানা স্থাপন কৰি আছে। ব্ৰহ্ম’ছৰ দৰে মিছাইল, যাৰ সামৰ্থ্যক বিশ্বই স্বীকৃতি দিছে, আজি উত্তৰ প্ৰদেশত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। এমএছএমইসমূহে প্ৰতিৰক্ষা সঁজুলি নিৰ্মাণত প্ৰয়োজনীয় সৰু সৰু অংশৰ যোগানৰ বাবে কাম লাভ কৰে। ইয়াৰ পৰা উত্তৰ প্ৰদেশৰ এমএছএমই খণ্ড যথেষ্ট লাভান্বিত হৈছে। আনকি সৰু সৰু জিলাসমূহতো যুৱক-যুৱতীসকলে এতিয়া ডাঙৰ উদ্যোগসমূহত যোগদান কৰাৰ সপোন দেখিব পাৰে।

 

বন্ধুসকল,

আজি উত্তৰ প্ৰদেশে ইমান দ্ৰুত গতিত বিকাশ লাভ কৰিছে, কিয়নো উত্তৰ প্ৰদেশে পুৰণি ৰাজনীতিও সলনি কৰিছে, আৰু এক নতুন পৰিচয় সৃষ্টি কৰিছে। মনত ৰাখিব, উত্তৰ প্ৰদেশক এসময়ত গাঁতৰ বাবে পৰিচিত আছিল। আজি সেই উত্তৰ প্ৰদেশখনেই দেশৰ ভিতৰতে সৰ্বাধিক এক্সপ্ৰেছৱে থকা ৰাজ্য হিচাপে পৰিগণিত হৈছে। পূৰ্বতে ইয়াৰ চুবুৰীয়া জিলালৈ যোৱাটোও অতি কঠিন আছিল। কিন্তু আজি উত্তৰ প্ৰদেশত ২১টা বিমানবন্দৰ, ৫টা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰ আছে। এতিয়া নয়ডা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰো উদ্বোধন কৰা হৈছে। নয়ডা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰ গংগা এক্সপ্ৰেছৱেৰ পৰা মাত্ৰ কেইঘণ্টামানৰ দূৰত্বত।

 

ভাই-ভনীসকল,

আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশ ভগৱান ৰাম আৰু ভগৱান কৃষ্ণৰ ভূমি। কিন্তু, পূৰ্বৰ চৰকাৰসমূহে তেওঁলোকৰ শোষণৰ বাবে অপৰাধ আৰু জংঘল ৰাজক উত্তৰ প্ৰদেশৰ পৰিচয় কৰি তুলিছিল। উত্তৰ প্ৰদেশৰ মাফিয়াসকলৰ ওপৰত চলচ্চিত্ৰ নিৰ্মাণ কৰা হৈছিল। কিন্তু, এতিয়া সমগ্ৰ দেশতে উত্তৰ প্ৰদেশৰ আইন-শৃংখলাৰ উদাহৰণ পোৱা গৈছে।

 

ভাই-ভনীসকল,

সম্পদ ভাগ-বতৰা কৰা যিসকল লোকে ক্ষমতা হেৰুৱাইছে, তেওঁলোকে উত্তৰ প্ৰদেশৰ এই প্ৰগতি পচন্দ কৰা নাই। তেওঁলোকে উত্তৰ প্ৰদেশক আকৌ এবাৰ পুৰণি যুগলৈ ঠেলি দিব বিচাৰে। তেওঁলোকে আকৌ এবাৰ সমাজক বিভাজন আৰু দ্বিখণ্ডিত কৰিব বিচাৰে।

বন্ধুসকল,

সমাজবাদী পাৰ্টি উন্নয়ন বিৰোধী আৰু মহিলা বিৰোধী। শেহতীয়াকৈ দেশখনে পুনৰ এবাৰ এছ পি আৰু কংগ্ৰেছৰ দৰে দলসমূহৰ প্ৰকৃত মুখ দেখিছে। কেন্দ্ৰৰ এন ডি এ চৰকাৰে সংসদত নাৰী শক্তি বন্দনা সংশোধনী আনিছিল। এই সংশোধনীখন গৃহীত হ’লে ২০২৯ চনৰ নিৰ্বাচনৰ পৰাই মহিলাসকলে বিধানসভা আৰু লোকসভাত সংৰক্ষণ লাভ কৰিব পাৰিলেহেঁতেন! আমাৰ বহু সংখ্যক মাতৃ আৰু ভগ্নী সাংসদ আৰু বিধায়ক হিচাপে দিল্লী-লক্ষ্ণৌত উপস্থিত হৈছিল। সেয়াও, আন কোনো শ্ৰেণীৰ আসন হ্ৰাস নকৰাকৈ! কিন্তু এছপিয়ে এই সংশোধনী বিধেয়কৰ বিৰুদ্ধে ভোটদান কৰিলে।

 

বন্ধুসকল,

এই বিধেয়কখনে সকলো ৰাজ্যৰ আসন বৃদ্ধি কৰিব পাৰে। আমি সংসদত স্পষ্টকৈ কৈছিলো যে সকলো ৰাজ্যতে সমান অনুপাতত আসন বৃদ্ধি হ’ব। কিন্তু ডিএমকেৰ দৰে দল, যিয়ে উত্তৰ প্ৰদেশক গালি পাৰি ৰাজনীতি কৰিছিল, তেওঁলোকৰ আপত্তি আছিল যে উত্তৰ প্ৰদেশৰ আসন কিয় বৃদ্ধি হ’ব? আপুনি দেখিছে, সমাজবাদী দলে সংসদত তেওঁৰ তেওঁৰ সুৰতেই কথা কৈছিল। এই এছ পিৰ লোকসকলে ইয়াৰ পৰা আপোনাৰ ভোট লৈ সংসদলৈ যায়, আৰু সংসদত উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণক গালি দিয়া লোকসকলৰ সৈতে থিয় দিয়ে। সেয়েহে, উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণে কয়, সমাজবাদী পাৰ্টি কেতিয়াও উন্নত হ’ব নোৱাৰে। এই লোকসকলে সদায় মহিলা বিৰোধী ৰাজনীতি কৰিব। এইবোৰ সদায় তুষ্টিকৰণ আৰু অপৰাধীৰ সৈতে থিয় দিব। এছ পি-য়ে কেতিয়াও পৰিয়ালবাদ আৰু জাতিবাদৰ ওপৰত উঠিব নোৱাৰে। এই লোকসকলে সদায় উন্নয়ন বিৰোধী ৰাজনীতি কৰিব। উত্তৰ প্ৰদেশে এছ পি আৰু ইয়াৰ মিত্ৰশক্তিৰ পৰা সাৱধান হ’ব লাগিব।

 

বন্ধুসকল,

আজি দেশখনে এটা সংকল্প লৈ আগবাঢ়ি আছে-উন্নত ভাৰতৰ সংকল্প! এই সংকল্প পূৰণ কৰাত উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক বৃহৎ ভূমিকা আছে। আপোনালোক সকলোৱে লক্ষ্য কৰি আছে যে আজি সমগ্ৰ বিশ্ব কেনেকৈ যুদ্ধ, অস্থিৰতা আৰু অস্থিৰতাত আবদ্ধ হৈ আছে। বিশ্বৰ বৃহৎ দেশসমূহত পৰিস্থিতি অধিক বেয়া। অৱশ্যে, ভাৰতে একে গতিৰে উন্নয়নৰ পথত আগবাঢ়ি আছে। বাহিৰৰ শত্ৰুসকলে এইটো পচন্দ নকৰে। ভিতৰত বহি থকা কিছুমান লোকে ক্ষমতাৰ ভোকত ভাৰতক হেয়জ্ঞান কৰিবলৈ চেষ্টা কৰিছে। তথাপিও, আমি কেৱল সুৰক্ষিত নহয় বৰঞ্চ উন্নয়নৰ নতুন অভিলেখ স্থাপন কৰিছো। আমি আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰত অভিযানক আগুৱাই লৈ গৈছো। আমি আধুনিক আন্তঃগাঁথনি নিৰ্মাণ কৰি আছো। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে এই দিশত আন এক শক্তিশালী পদক্ষেপ। মই আত্মবিশ্বাসী যে উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণে তেওঁলোকৰ কঠোৰ পৰিশ্ৰম আৰু প্ৰতিভাৰে গংগা এক্সপ্ৰেছৱেই আমাৰ দুৱাৰমুখলৈ অনা সম্ভাৱনাবোৰ উপলব্ধি কৰি থাকিব। এই সংকল্পৰ সৈতে আপোনালোক সকলোকে বহুত বহুত অভিনন্দন। বহুত বহুত ধন্যবাদ!

 

ভাৰত মাতাৰ জয়।

ভাৰত মাতাৰ জয়।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বহুত বহুত ধন্যবাদ!