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PM speaks at the function organized by Rickshaw Sangh in Varanasi
PM launches financial inclusion initiative in Varanasi, calls it a landmark event that would transform lives of people
There is a need to increase the pace and scale of outcomes of the initiatives to remove poverty: PM
Every person wants his or her child to lead a life better than what they led. Every person wants his or her child lead a life of dignity: PM
Union Government is putting emphasis on skill development to help make the poor self-reliant: PM
Education is the best way to fight poverty: PM Narendra Modi
PM Modi urges beneficiaries to ensure that their children receive proper education

विशाल संख्या में आए भाईयो और बहनों,

यहां जो कार्यक्रम हो रहा है, ये कार्यक्रम सिर्फ कुछ गरीब परिवारों का जीवन बदलेगा, ऐसा नहीं है। ये कार्यक्रम एक ऐसी शुभ शुरूआत है, जो काशी के भाग्‍य को बदलेगा। यहां के गरीब के जीवन में अगर हम थोड़ा सा आवश्‍यक बदलाव ला ले, समय के आधारित जीवन में technology का प्रवेश करें, तो गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति की पहले जितना परिश्रम करके कमाता था, उससे भी थोड़ा कम परिश्रम करके, वो ज्‍यादा कमा सकता है। आज यहां उस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं, जिसमें बैंक का सहयोग है, American Foundation का सहयोग है, भारत सरकार बहुत बड़ी मात्रा में इन चीजों को promote कर रही है और गरीब को सबसे पहला प्रयास है कि वो आत्‍मनिर्भर कैसे बने।

हम करीब-करीब पिछले 40-50 साल से गरीबी हटाओ, इस बात को सुनते आए हैं। हमारे देश में चुनावों में भी गरीबों का कल्‍याण करने वाले भाषण लगातार सुनने को मिलते हैं। हमारे यहां राजनीति करते समय कुछ भी करते हो लेकिन सुबह-शाम गरीबों की माला जपते रहना, ये एक परंपरा बन गई है। इस परंपरा से जरा बाहर आने की जरूरत है और बाहर आने का मतलब है कि क्‍या हम प्रत्‍यक्ष रूप से गरीबों को साथ ले करके, गरीबी से मुक्‍ति का अभियान चला सकते हैं क्‍या? अब तक जितने प्रयोग हुए हैं, उन प्रयोगों से जितनी मात्रा में परिणाम चाहिए था, वो देश को मिला नहीं है। गरीब की जिन्‍दगी में भी जिस तेजी से बदलाव आना चाहिए, वो बदलाव हम ला नहीं पाए हैं। मैं किसी सरकार को दोष देना नहीं चाहता हूं, किसी दल को दोष देना नहीं चाहता हूं, लेकिन कुछ अच्‍छा करने की दिशा में एक नए सिरे से गरीबों के कल्‍याण के लिए मूलभूत बातों पर focus करना। वो कौन सी चीजें करें ताकि गरीब जो सचमुच में मेहनत करने को तैयार है, गरीबी की जिन्‍दगी से बाहर निकलने को तैयार है। आप किसी भी गरीब को पूछ लीजिए, उसे पूछिए कि भाई क्‍या आप अपने संतानों को ऐसी ही गरीबी वाली जिन्‍दगी जीएं, ऐसा चाहते हो कि अच्‍छी जिन्‍दगी जीएं चाहते हो। गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति भी ये कहेगा कि मैं मेरे संतानों को विरासत मैं ऐसी गरीबी देना नहीं चाहता। मैं उसे एक ऐसी जिन्‍दगी देना चाहता हूं कि जिसके कारण वो अपने कदमों पर खड़ा रहे, सम्‍मान से जीना शुरू करें और अपनी जिन्‍दगी गौरवपूर्व बताएं, ऐसा हर गरीब मां-बाप की इच्‍छा होती हैं। उसको वो पूरा कैसे करें। आज कभी हालत ऐसी होती है कि वो मजदूरी करता है, लेकिन अगर थोड़ा-सा skill development कर दिया जाए, उसको थोड़ा हुनर सिखा दिया जाए तो पहले अगर वो सौ रुपया कमाता है, थोड़ा हुनर सिखा दिया तो वो 250-300 रुपए कमाना शुरू कर देता है और एक बार हुनर सीखता है तो खुद भी दिमाग लगाकर के उसमें अच्‍छाई करने का प्रयास करता है और इसलिए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा अभियान चलाया है skill development का, कौशल्‍यवर्धन का। गरीब से गरीब का बच्‍चा चाहे स्‍कूल के दरवाजे तक पहुंचा हो या न पहुंचा हो, या पांचवीं, सातवीं, दसवीं, बारहवीं पढ़कर के छोड़ दी हो, रोजी-रोटी तलाशता हो। अगर उसे कोई चीज सिखा ली जाए तो वो देश की अर्थनीति को भी बल देता है, आर्थिक गतिविधि को भी बल देता है और स्‍वयं अपने जीवन में कुछ कर-गुजरने की इच्‍छा रखता है और इसलिए छोटी-छोटी चीजें ये कैसे develop करे उस दिशा में हमारा प्रयास है।

आज मैं यहां ये सब ई-रिक्‍शा वाले भाइयों से मिला। मैंने उनको पूछा क्‍या करोगे, चला पाओगे क्‍या? तो उन्‍होंने कहा साहब पहले से मेरा confidence level ज्‍यादा है। मैंने कहा क्‍यों? वो मेरा skill development हो गया। उसे skill शब्‍द भी आता था। बोले मेरा skill development हो गया। बोले मेरी training हुई और मेरा पहले से ज्‍यादा विश्‍वास है। पहले मैं pedal वाले रिक्‍शा चलाता था। मैंने कहा speed कितनी रखोगे? बोले साहब मैं कानून का पालन करूंगा और मैं कभी ऐसा न करूं ताकि मेरे परिवार को भी कोई संकट आए और मेरे passenger के परिवार को भी संकट आए, ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा और काशी की गलियां तो छोटी है तो वैसे भी मुझे संभाल के चलना है। उसकी ये training हुई है। काशी में दुनिया भर के लोग आते हैं। काशी का tourism कैसा हो, काशी कैसा है, काशी के लोग कैसे है? उसका पहला परिचय यात्री को किसके साथ होता है, रिक्‍शा वाले के साथ होता है। वो उसके साथ किस प्रकार से व्‍यवहार करता है, वो उसके प्रति किस प्रकार का भाव रखता है, उसी से उसकी मन में छवि बनती है। अरे भाई, ये तो शहर बहुत अच्‍छा है। यहां के रिक्‍शा वाले भी इतने प्‍यार से हमारी चिन्‍ता करते हैं, वहीं से शुरू होता है और इसलिए यहां जो टूरिस्‍टों के लिए एक स्‍पेशल रिक्‍शा का जो सुशोभन किया गया है, कुछ व्‍यवस्‍थाएं विकसित की गई हैं। मैं उनसे पूछ रहा था, मैंने कहा आप Guide के नाते मुझे सब चीजें बता सकते हों, बोले हां बता सकता हूं। मैं हर चीज बता सकता हूं रिक्‍शा चलाते-चलाते और बोले मुझे विश्‍वास है कि मेरे रिक्‍शा में जो बैठेगा, उसको ये संतोष होगा कि काशी उसको देखने को सहज मिल जाएगा। चीजें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वे बहुत बड़ा बदलाव लाती है।

आज चाहे pedal रिक्‍शा को आधुनिक कैसे किया जाए, pedal रिक्‍शा से ई-रिक्‍शा की ओर shifting कैसे किया जाए, यात्रियों की सुविधाओं को कैसे स्‍थान दिया जाए, बदलते हुए युग में environment friendly technology का कैसे उपयोग किया जाए? इन सारी बातों का इसके अंदर जोड़ हैं और सबसे बड़ी बात है उनके परिवार की। आज इसमें जो लोग select किए गए हैं, वो वो लोग है, जिनकी खुद की कभी रिक्‍शा नहीं थी। वो बेचारे किराए पर रिक्‍शा लेकर के दिनभर मजदूरी करते थे। 50 रुपया, 60 रुपया उस रिक्‍शा मालिक को उनको देना पड़ता था। बचा-खुचा घर जाकर के ले जाता था। बच्‍चों के लिए डबलरोटी साथ ले जाता था, उसी से रात का गुजारा हो जाता था। इस प्रयोग का सबसे बड़ा लाभ उन गरीब रिक्‍शा वालों को है कि अब उनको वो जो ऊंचे ब्‍याज से पैसे देने पड़ते थे, उससे अब मुक्‍ति हो गई। अब वो जो पैसे होंगे वो बैंक के बहुत ही कम rate से पैसा जमा करेगा और कोई साल के अंदर और कोई दो साल में इस रिक्‍शा का मालिक हो जाएगा। जब उसे पता है, इसका मतलब ये हुआ कि उसकी ये बचत होने वाली है। ये पैसे उसके किसी ओर की जेब में नहीं जाने वाले, खुद की जेब में जाने वाले है ताकि वो एक साल-दो साल के बाद इसका मालिक बन जाने वाला है और मुझे विश्‍वास है कि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था के कारण आने वाले दिनों में जितने परिवार है, उनको फिर गरीबी की हालत में रहने की नौबत नहीं आएगी, वो आगे बढ़ेंगे।

मैंने उनसे पूछा कि बच्‍चों को पढ़ाओगे क्‍या? बोले साहब अब तक तो कभी-कभी मन में रहता था कि कितना पढ़ाऊं, कहां से पैसा लाऊं, लेकिन ये जो आपने व्‍यवस्‍था की है, अब मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं बच्‍चों को पढ़ाऊंगा। मेरी बात तो ये पांच-छह लोगों के साथ हुई है लेकिन यहां जिन लोगों को आज रिक्‍शा मिल रही है, उन सबसे मेरा आग्रह है कितनी ही तकलीफ क्‍यों न हो, मेरे प्रति नाराजगी व्‍यक्‍त करनी है, तो जरूर करना, आपको हक है। लेकिन बच्‍चों को पढ़ाई से कभी खारिज मत करना, बच्‍चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देना। गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का सबसे बड़ा औजार और सस्‍ते से सस्‍ता औजार कोई है, तो अपनी संतानों को शिक्षा देना। अगर हम अपने बच्‍चों को शिक्षा देंगे, तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो हमें गरीब रहने के लिए मजबूर कर दे। देखते ही देखते स्थिति बदलना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि ये जो नई सुविधाएं जिन-जिन परिवारों को मिल रही हैं, वे अपने बच्‍चों को पढ़ाने के विषय में कोई compromise न करें, अपने बच्‍चों को जरूर पढ़ाएं।

आज मुझे एक परिवार से मिलना हुआ। वो बहन चौराहे पर दरी बिछाकर के सब्‍जी बगैरा बेचती रहती थी, आज उसको एक ठेला मिल गया है। मैंने उसको पूछा क्‍या फर्क पड़ेगा। बोले जी पहले तो मैं जहां बैठती थी कोई आया तो माल ले के जाता था, अब मैं अलग-अलग इलाकों में जाऊंगी, अपना समय पत्रक बना दूंगी कि इस इलाके में सुबह 9 बजे जाना है, इस इलाके में सुबह 10 बजे जाना है इस इलाके में 11 बजे जाना है, तो लोगों को भी पता रहेगा कि मैं कितने बजे वहां माल अपना लेकर जाऊंगी, तो वो जरूर उस समय पर मेरा माल ले लेंगे। अब देखिए अनपढ़ महिला! लेकिन उसे मालूम है कि मैं ऐसा टाईम-टेबल बनाऊंगी कि इस इलाके में 9 बजे जाती हूं तो रोज, हर रोज 9 बजे वहां पहुंच जाऊंगी, इस इलाके में दोपहर को 12 बजे पहुंचती हूं, मतलब 12 बजे पहुंच जाऊंगी। यानी उसको business का perfect management मालूम है। ठेला चलाते-चलाते भी अपनी जिंदगी बदली जा सकती है, इसका विश्‍वास उसके अंदर आया है। ये छोटी-छोटी चीजें हैं, जिसके द्वारा हम एक बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

अभी प्रधानमंत्री जन-धन खाते खोलने का जो अभियान चलाया, हमारे देश में सालों से कहा जाता था कि गरीबों के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया है, लेकिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 40-50 साल के बाद भी, बैंक के दरवाजे पर कभी कोई गरीब दिखाई नहीं दिया था और इस देश में कभी उसकी चर्चा भी नहीं थी। इस देश में ऐसा क्‍यों ? ये सवाल इस देश के किसी बुद्धिमान व्‍यक्ति ने किसी राजनेता को नहीं पूछा, किसी सरकार को नहीं पूछा। 50 साल में नहीं पूछा। Taken for granted था। हमने आकर के बीड़ा उठाया कि बैंकों के दरवाजे पर मेरा गरीब होगा, बैंकों के अंदर मेरा गरीब होगा। ये बैंक गरीबों के लिए होगी, बड़ा अभियान उठाया। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी, 26 जनवरी तक पूरा करने का संकल्‍प लिया था और सभी बैंकों ने जी-जान से मेरे साथ जुड़ गए, कंधे से कंधा जुड़ गए और आज देश में करीब 18 करोड़ से ज्‍यादा बैंकों के खाते गरीबों के खुल गए।

हिन्‍दुस्‍तान में कुल परिवारों में जितने थे करीब-करीब सारे आ गए और हमने तो कहा था कि हम गरीबों का account कोई भी प्रकार का पैसा लेकर कर के नहीं खोलेंगे। बिना पैसे, बैंक खर्चा करेगी फॉर्म का खर्चा होगा, जो होगा करेंगे, गरीबों का एक बार मुफ्त में खाता खोल देंगे। आदत लगेगी उसको धीरे-धीरे और खाते खोल दिए लेकिन देखिए, गरीबों की अमीरी देखिए, सरकार ने तो कहा था एक रुपया नहीं दोगे लेकिन गरीबों ने करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा रकम जमा कर दी है। इसका मतलब ये हुआ कि गरीब को पैसे बचाने की अब इच्‍छा होने लगी है। अगर गरीब को पैसे बचाने की इच्‍छा होगी तो उसके आर्थिक जीवन में बदलाव आना स्‍वाभाविक शुरू हो जाएगा। धीरे-धीरे बैंक के खाते उपयोग करने की आदत भी अब धीरे-धीरे बन रही है। मैं हैरान हूं जिन्‍होंने खाते नहीं खोले कभी, वो आज मेरा हिसाब मांग रहे हैं कि खाते खोल तो दिए हैं, लेकिन उसका उपयोग करने वालों की संख्‍या बढ़ नहीं रही है। जिन्‍होंने खाते तक खोलने की परवाह नहीं की थी, उनको अभी खाते operate हो रहे कि नहीं हो रहे, इसकी चिन्‍ता होने लगी है। अच्‍छा होता, ये काम अगर आपने 40-50 साल पहले कर दिया होता तो आज operate करने का सवाल मुझे नहीं पूछना पड़ता देश के सभी गरीब के खाते हो जाते। लेकिन आपने जो काम 50 साल नहीं किया है वो 50 महीने में मैं पूरा करके रहूंगा, ये मैं बताने आया हूं।

गरीब का भला कैसे हो, अभी काशी के अंदर रक्षाबंधन को सुरक्षाबंधन बनाने का बड़ा अभियान चलाया और मैं काशी की माताओं-बहनों का विशेष रूप से, सार्वजनिक रूप से आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि इस रक्षाबंधन के पर्व पर मुझे इतनी राखियां मिली हैं बनारस से, इतने आशीर्वाद मिले हैं, माताओं-बहनों के, मैं सिर झुकाकर उन सभी माताओं-बहनों को नमन करता हूं। आपने जो मेरे प्रति सद्भाव व्‍यक्‍त किया है, मेरी रक्षा की चिन्‍ता की है और सुरक्षा का बंधन की जो बात कही है, मैं उसके लिए काशी की सभी माताओं-बहनों का ह्दय से बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैं इन सभी महानुभावों का भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि योजना में हमारे साथ, ये partner बने हैं और एक Model के रूप में ये काम आने वाले दिनों में विकसित होगा। अब आप धीरे-धीरे देखिए काशी के अंदर एक नया....और इसके कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण शहर की एक नई पहचान बनने वाली है। इन चीजों के कारण सामान्‍य मानव के जीवन में सुविधा का अवसर शुरू होने वाला है।

ऐसी इस योजना के निमित्‍त मैं आज उन सभी बधुंओं को जिन्‍हें आज ये साधन मिल रहे हैं, मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और काशी की आर्थिक प्रगति में गरीब से गरीब व्‍यक्ति की ताकत काम में आए, उस दिशा के प्रयत्‍नों में हमें सफलता मिले, यही भोलेनाथ हम पर आशीर्वाद बरसाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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ସଂସଦର ଶୀତକାଳୀନ ଅଧିବେଶନ 2021 ପୂର୍ବରୁ ଗଣମାଧ୍ୟମକୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ବିବୃତ୍ତି
November 29, 2021
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ନମସ୍କାର ବନ୍ଧୁଗଣ,

ସଂସଦର ଏହି ଅଧିବେଶନ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମହତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ। ଦେଶ ସ୍ୱାଧୀନତାର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ କରୁଛି। ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନର ଚାରିଆଡ଼େ ଏହି ଆଜାଦୀ କା ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ନିମନ୍ତେ ସୃଜନଶୀଳ, ସକାରାତ୍ମକ, ଜନହିତ ଲାଗି, ରାଷ୍ଟ୍ରହିତ ଲାଗି ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ, ସାଧାରଣ ନାଗରିକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଅନେକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆୟୋଜନ କରାଯାଉଛି। ବିଭିନ୍ନ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରାଯାଉଛି। ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମୀମାନେ ଯେଉଁ ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖିଥିଲେ ସେହି ସ୍ୱପ୍ନକୁ ପୂରଣ କରିବା ଲାଗି ସାଧାରଣ ନାଗରିକମାନେ ମଧ୍ୟ ନିଜର କୌଣସି ନା କୌଣସି ଦାୟିତ୍ୱ ନିର୍ବାହ କରିବା ଲାଗି ପ୍ରୟାସ କରୁଛନ୍ତି। ଏସବୁ ଖବର ଭାରତର ଉଜ୍ଜ୍ଵଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଶୁଭ ସଙ୍କେତ।

ପୂର୍ବରୁ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଦେଖିଛୁ, ଗତ କିଛି ଦିନ ତଳେ ସମ୍ବିଧାନ ଦିବସ ଆୟୋଜନ କରାଯାଇଥିଲା। ନୂତନ ସଂକଳ୍ପ ନେଇ ସମ୍ବିଧାନର ଭାବନାକୁ ସାକାର କରିବା ଲାଗି ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକ ନିଜର ଦାୟିତ୍ୱ ନିର୍ବାହ କରିବା ଲାଗି ଶପଥ କରିଥିଲେ। ସାରା ଦେଶ ମଧ୍ୟ ଏକ ସଂକଳ୍ପ ନେଲା। ଏହି ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ଆମେ ଚାହୁଁଛୁ ଓ ସାରା ଦେଶ ମଧ୍ୟ ଚାହୁଁଛି ଯେ ସଂସଦରେ ଫଳପ୍ରଦ ଆଲୋଚନା ହେଉ। ଭାରତୀୟ ସଂସଦର ଚଳିତ ଅଧିବେଶନ ଏବଂ ଆଗାମୀ ଅଧିବେଶନରେ ମଧ୍ୟ ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମୀମାନଙ୍କର ଭାବନା, ସେମାନଙ୍କର ଲକ୍ଷ୍ୟ, ସ୍ୱାଧୀନତାର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବର ଭାବନା ଅନୁକୂଳ ଏବଂ ଦେଶ ହିତ ପାଇଁ ଆଲୋଚନା କରାଯାଉ। ଦେଶର ପ୍ରଗତି ଓ ବିକାଶ ପାଇଁ ନୂଆ ଉପାୟ ଓ ମାର୍ଗର ସନ୍ଧାନ କରାଯାଉ। ଏହି ଆଲୋଚନାରୁ ଦୂରଗାମୀ ପ୍ରଭାବ ବିସ୍ତାର କରୁଥିବା ସକାରାତ୍ମକ ନିଷ୍ପତ୍ତି ଗ୍ରହଣ କରାଯାଉ। ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଯେ ଭବିଷ୍ୟତରେ ସଂସଦର ସୁପରିଚାଳନାରେ କେତେ ଯୋଗଦାନ ଦିଆଗଲା ତାହାର ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କରାଯିବ। କିଏ କେତେ ଜୋର ଲଗାଇ ସଂସଦ ଅଧିବେଶନରେ ବାଧା ଉତ୍ପନ୍ନ କଲା ସେହି ମାନଦଣ୍ଡକୁ ନେଇ ମୂଲ୍ୟାଙ୍କନ କରାଯିବ ନାହିଁ। ସଂସଦରେ କେତେ ଘଣ୍ଟା କାମ ହେଲା, କେତେ ସକାରାତ୍ମକ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଲା ସେହି ମାନଦଣ୍ଡକୁ ଗ୍ରହଣ କରାଯିବା ଉଚିତ୍। ସରକାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ଆଲୋଚନା, ବିସ୍ତୃତ ଆଲୋଚନା କରିବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଅଛନ୍ତି। ସରକାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରଶ୍ନର ଉତ୍ତର ଦେବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ରହିଛନ୍ତି ଏବଂ ସ୍ୱାଧୀନତାର ଏହି ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ କାଳରେ ଆମେ ଚାହୁଁଛୁ ଯେ ସଂସଦରେ ପ୍ରଶ୍ନ ଉତ୍ଥାପନ କରାଯାଉ, କିନ୍ତୁ ସଂସଦରେ ଶାନ୍ତି ମଧ୍ୟ ବଜାୟ ରହୁ।

ଆମେ ଚାହୁଁଛୁ, ସଂସଦରେ ସରକାରଙ୍କ ବିରୋଧରେ, ସରକାରୀ ନୀତି ବିରୋଧରେ ସ୍ୱର ଅଧିକ ପ୍ରଖର ହେବା ଉଚିତ୍, କିନ୍ତୁ ସଂସଦର ଗରିମା, ବାଚସ୍ପତିଙ୍କ ଗରିବା, ପଦବୀର ଗରିମା ବଜାୟ ରଖି ଆମେ ଏପରି ଆଚରଣ କରିବା ଯାହା ଆଗାମୀ ଦିନରେ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଉଦାହରଣ ପାଲଟିବ। ବିଗତ ଅଧିବେଶନ ପରେ କରୋନାର ଏକ ବିକଟ ପରିସ୍ଥିତିରେ ମଧ୍ୟ ଦେଶ ୧୦୦ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଡୋଜ୍ କୋଭିଡ ଟିକାକରଣର ଉପଲବ୍ଧି ହାସଲ କରିପାରିଛି। ଏବେ ଆମେ ୧୫୦ କୋଟି ଡୋଜ୍ ଟିକାକରଣ ଦିଗରେ ଅଗ୍ରସର ହେଉଛୁ। ନୂଆ ଭାରିଆଣ୍ଟର ଖବର ମଧ୍ୟ ଆମକୁ ଆହୁରି ଅଧିକ ସତର୍କ ଓ ସଜାଗ କରି ଦେଇଛି। ମୁଁ ସଂସଦର ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସତର୍କ ରହିବା ଲାଗି ନିବେଦନ କରୁଛି। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସତର୍କ ରହିବା ଲାଗି ଅନୁରୋଧ କରୁଛି। କାରଣ ପ୍ରତି ଏ ସଙ୍କଟପୂର୍ଣ୍ଣ ସମୟରେ ଆପଣମାନଙ୍କର, ଦେଶବାସୀଙ୍କର ଉତ୍ତମ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଆମେ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେଉଛୁ।

ଦେଶର ୮୦ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ଏହି କରୋନା କାଳର ସଙ୍କଟରେ ଯେମିତି ଅଧିକ କଷ୍ଟ ହେବ ନାହିଁ ସେଥିପାଇଁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ମାଗଣାରେ ଖାଦ୍ୟ ଶସ୍ୟ ଯୋଗାଇ ଦେବା ଲାଗି ଯୋଜନା କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରାଯାଉଛି। ବର୍ତ୍ତମାନ ଏହାକୁ ମାର୍ଚ୍ଚ ୨୦୨୨ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବଢ଼ାଇ ଦିଆଯାଇଛି। ପାଖାପାଖି ୨ ଲକ୍ଷ ୬୦ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ବ୍ୟୟରେ, ୮୦ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଗରିବ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଘରେ ଖାଦ୍ୟର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରିବା ଲାଗି ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଛି। ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଯେ ଆମେ ସମସ୍ତେ ଏହି ଅଧିବେଶନରେ, ମିଳିମିଶି ରାଷ୍ଟ୍ର ହିତରେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ନିଷ୍ପତ୍ତି ଗ୍ରହଣ କରିବା। ସାଧାରଣ ଜନତାଙ୍କ ଆଶା-ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ପୂରଣ କରିବା ଲାଗି ବିଭିନ୍ନ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେବା। ମୁଁ ଏହି ଆଶା କରୁଛି...

ଅନେକ ଅନେକ ଧନ୍ୟବାଦ।