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प्रधानमंत्री ने वाराणसी में रिक्शा संघ द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित किया
प्रधानमंत्री ने वाराणसी में वित्तीय समावेशन पहल की शुरूआत करते हुए इसे लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए ऐतिहासिक कदम बताया
गरीबी दूर करने के लिए किये गए विभिन्न कार्यक्रमों के परिणामों को गति देने और उनके स्तर को बढ़ाने की जरुरत है: प्रधानमंत्री
हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी अगली पीढ़ी का जीवन उसके अपने जीवन से बेहतर हो: प्रधानमंत्री मोदी
केंद्र सरकार गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करने के लिए कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रही है: प्रधानमंत्री
शिक्षा गरीबी से लड़ने के लिए सबसे प्रमुख हथियार है: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने लाभार्थियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनके बच्चों को उचित शिक्षा मिले

विशाल संख्या में आए भाईयो और बहनों,

यहां जो कार्यक्रम हो रहा है, ये कार्यक्रम सिर्फ कुछ गरीब परिवारों का जीवन बदलेगा, ऐसा नहीं है। ये कार्यक्रम एक ऐसी शुभ शुरूआत है, जो काशी के भाग्‍य को बदलेगा। यहां के गरीब के जीवन में अगर हम थोड़ा सा आवश्‍यक बदलाव ला ले, समय के आधारित जीवन में technology का प्रवेश करें, तो गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति की पहले जितना परिश्रम करके कमाता था, उससे भी थोड़ा कम परिश्रम करके, वो ज्‍यादा कमा सकता है। आज यहां उस प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं, जिसमें बैंक का सहयोग है, American Foundation का सहयोग है, भारत सरकार बहुत बड़ी मात्रा में इन चीजों को promote कर रही है और गरीब को सबसे पहला प्रयास है कि वो आत्‍मनिर्भर कैसे बने।

हम करीब-करीब पिछले 40-50 साल से गरीबी हटाओ, इस बात को सुनते आए हैं। हमारे देश में चुनावों में भी गरीबों का कल्‍याण करने वाले भाषण लगातार सुनने को मिलते हैं। हमारे यहां राजनीति करते समय कुछ भी करते हो लेकिन सुबह-शाम गरीबों की माला जपते रहना, ये एक परंपरा बन गई है। इस परंपरा से जरा बाहर आने की जरूरत है और बाहर आने का मतलब है कि क्‍या हम प्रत्‍यक्ष रूप से गरीबों को साथ ले करके, गरीबी से मुक्‍ति का अभियान चला सकते हैं क्‍या? अब तक जितने प्रयोग हुए हैं, उन प्रयोगों से जितनी मात्रा में परिणाम चाहिए था, वो देश को मिला नहीं है। गरीब की जिन्‍दगी में भी जिस तेजी से बदलाव आना चाहिए, वो बदलाव हम ला नहीं पाए हैं। मैं किसी सरकार को दोष देना नहीं चाहता हूं, किसी दल को दोष देना नहीं चाहता हूं, लेकिन कुछ अच्‍छा करने की दिशा में एक नए सिरे से गरीबों के कल्‍याण के लिए मूलभूत बातों पर focus करना। वो कौन सी चीजें करें ताकि गरीब जो सचमुच में मेहनत करने को तैयार है, गरीबी की जिन्‍दगी से बाहर निकलने को तैयार है। आप किसी भी गरीब को पूछ लीजिए, उसे पूछिए कि भाई क्‍या आप अपने संतानों को ऐसी ही गरीबी वाली जिन्‍दगी जीएं, ऐसा चाहते हो कि अच्‍छी जिन्‍दगी जीएं चाहते हो। गरीब से गरीब व्‍यक्‍ति भी ये कहेगा कि मैं मेरे संतानों को विरासत मैं ऐसी गरीबी देना नहीं चाहता। मैं उसे एक ऐसी जिन्‍दगी देना चाहता हूं कि जिसके कारण वो अपने कदमों पर खड़ा रहे, सम्‍मान से जीना शुरू करें और अपनी जिन्‍दगी गौरवपूर्व बताएं, ऐसा हर गरीब मां-बाप की इच्‍छा होती हैं। उसको वो पूरा कैसे करें। आज कभी हालत ऐसी होती है कि वो मजदूरी करता है, लेकिन अगर थोड़ा-सा skill development कर दिया जाए, उसको थोड़ा हुनर सिखा दिया जाए तो पहले अगर वो सौ रुपया कमाता है, थोड़ा हुनर सिखा दिया तो वो 250-300 रुपए कमाना शुरू कर देता है और एक बार हुनर सीखता है तो खुद भी दिमाग लगाकर के उसमें अच्‍छाई करने का प्रयास करता है और इसलिए भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा अभियान चलाया है skill development का, कौशल्‍यवर्धन का। गरीब से गरीब का बच्‍चा चाहे स्‍कूल के दरवाजे तक पहुंचा हो या न पहुंचा हो, या पांचवीं, सातवीं, दसवीं, बारहवीं पढ़कर के छोड़ दी हो, रोजी-रोटी तलाशता हो। अगर उसे कोई चीज सिखा ली जाए तो वो देश की अर्थनीति को भी बल देता है, आर्थिक गतिविधि को भी बल देता है और स्‍वयं अपने जीवन में कुछ कर-गुजरने की इच्‍छा रखता है और इसलिए छोटी-छोटी चीजें ये कैसे develop करे उस दिशा में हमारा प्रयास है।

आज मैं यहां ये सब ई-रिक्‍शा वाले भाइयों से मिला। मैंने उनको पूछा क्‍या करोगे, चला पाओगे क्‍या? तो उन्‍होंने कहा साहब पहले से मेरा confidence level ज्‍यादा है। मैंने कहा क्‍यों? वो मेरा skill development हो गया। उसे skill शब्‍द भी आता था। बोले मेरा skill development हो गया। बोले मेरी training हुई और मेरा पहले से ज्‍यादा विश्‍वास है। पहले मैं pedal वाले रिक्‍शा चलाता था। मैंने कहा speed कितनी रखोगे? बोले साहब मैं कानून का पालन करूंगा और मैं कभी ऐसा न करूं ताकि मेरे परिवार को भी कोई संकट आए और मेरे passenger के परिवार को भी संकट आए, ऐसा मैं कभी होने नहीं दूंगा और काशी की गलियां तो छोटी है तो वैसे भी मुझे संभाल के चलना है। उसकी ये training हुई है। काशी में दुनिया भर के लोग आते हैं। काशी का tourism कैसा हो, काशी कैसा है, काशी के लोग कैसे है? उसका पहला परिचय यात्री को किसके साथ होता है, रिक्‍शा वाले के साथ होता है। वो उसके साथ किस प्रकार से व्‍यवहार करता है, वो उसके प्रति किस प्रकार का भाव रखता है, उसी से उसकी मन में छवि बनती है। अरे भाई, ये तो शहर बहुत अच्‍छा है। यहां के रिक्‍शा वाले भी इतने प्‍यार से हमारी चिन्‍ता करते हैं, वहीं से शुरू होता है और इसलिए यहां जो टूरिस्‍टों के लिए एक स्‍पेशल रिक्‍शा का जो सुशोभन किया गया है, कुछ व्‍यवस्‍थाएं विकसित की गई हैं। मैं उनसे पूछ रहा था, मैंने कहा आप Guide के नाते मुझे सब चीजें बता सकते हों, बोले हां बता सकता हूं। मैं हर चीज बता सकता हूं रिक्‍शा चलाते-चलाते और बोले मुझे विश्‍वास है कि मेरे रिक्‍शा में जो बैठेगा, उसको ये संतोष होगा कि काशी उसको देखने को सहज मिल जाएगा। चीजें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वे बहुत बड़ा बदलाव लाती है।

आज चाहे pedal रिक्‍शा को आधुनिक कैसे किया जाए, pedal रिक्‍शा से ई-रिक्‍शा की ओर shifting कैसे किया जाए, यात्रियों की सुविधाओं को कैसे स्‍थान दिया जाए, बदलते हुए युग में environment friendly technology का कैसे उपयोग किया जाए? इन सारी बातों का इसके अंदर जोड़ हैं और सबसे बड़ी बात है उनके परिवार की। आज इसमें जो लोग select किए गए हैं, वो वो लोग है, जिनकी खुद की कभी रिक्‍शा नहीं थी। वो बेचारे किराए पर रिक्‍शा लेकर के दिनभर मजदूरी करते थे। 50 रुपया, 60 रुपया उस रिक्‍शा मालिक को उनको देना पड़ता था। बचा-खुचा घर जाकर के ले जाता था। बच्‍चों के लिए डबलरोटी साथ ले जाता था, उसी से रात का गुजारा हो जाता था। इस प्रयोग का सबसे बड़ा लाभ उन गरीब रिक्‍शा वालों को है कि अब उनको वो जो ऊंचे ब्‍याज से पैसे देने पड़ते थे, उससे अब मुक्‍ति हो गई। अब वो जो पैसे होंगे वो बैंक के बहुत ही कम rate से पैसा जमा करेगा और कोई साल के अंदर और कोई दो साल में इस रिक्‍शा का मालिक हो जाएगा। जब उसे पता है, इसका मतलब ये हुआ कि उसकी ये बचत होने वाली है। ये पैसे उसके किसी ओर की जेब में नहीं जाने वाले, खुद की जेब में जाने वाले है ताकि वो एक साल-दो साल के बाद इसका मालिक बन जाने वाला है और मुझे विश्‍वास है कि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था के कारण आने वाले दिनों में जितने परिवार है, उनको फिर गरीबी की हालत में रहने की नौबत नहीं आएगी, वो आगे बढ़ेंगे।

मैंने उनसे पूछा कि बच्‍चों को पढ़ाओगे क्‍या? बोले साहब अब तक तो कभी-कभी मन में रहता था कि कितना पढ़ाऊं, कहां से पैसा लाऊं, लेकिन ये जो आपने व्‍यवस्‍था की है, अब मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मैं बच्‍चों को पढ़ाऊंगा। मेरी बात तो ये पांच-छह लोगों के साथ हुई है लेकिन यहां जिन लोगों को आज रिक्‍शा मिल रही है, उन सबसे मेरा आग्रह है कितनी ही तकलीफ क्‍यों न हो, मेरे प्रति नाराजगी व्‍यक्‍त करनी है, तो जरूर करना, आपको हक है। लेकिन बच्‍चों को पढ़ाई से कभी खारिज मत करना, बच्‍चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देना। गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने का सबसे बड़ा औजार और सस्‍ते से सस्‍ता औजार कोई है, तो अपनी संतानों को शिक्षा देना। अगर हम अपने बच्‍चों को शिक्षा देंगे, तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो हमें गरीब रहने के लिए मजबूर कर दे। देखते ही देखते स्थिति बदलना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि ये जो नई सुविधाएं जिन-जिन परिवारों को मिल रही हैं, वे अपने बच्‍चों को पढ़ाने के विषय में कोई compromise न करें, अपने बच्‍चों को जरूर पढ़ाएं।

आज मुझे एक परिवार से मिलना हुआ। वो बहन चौराहे पर दरी बिछाकर के सब्‍जी बगैरा बेचती रहती थी, आज उसको एक ठेला मिल गया है। मैंने उसको पूछा क्‍या फर्क पड़ेगा। बोले जी पहले तो मैं जहां बैठती थी कोई आया तो माल ले के जाता था, अब मैं अलग-अलग इलाकों में जाऊंगी, अपना समय पत्रक बना दूंगी कि इस इलाके में सुबह 9 बजे जाना है, इस इलाके में सुबह 10 बजे जाना है इस इलाके में 11 बजे जाना है, तो लोगों को भी पता रहेगा कि मैं कितने बजे वहां माल अपना लेकर जाऊंगी, तो वो जरूर उस समय पर मेरा माल ले लेंगे। अब देखिए अनपढ़ महिला! लेकिन उसे मालूम है कि मैं ऐसा टाईम-टेबल बनाऊंगी कि इस इलाके में 9 बजे जाती हूं तो रोज, हर रोज 9 बजे वहां पहुंच जाऊंगी, इस इलाके में दोपहर को 12 बजे पहुंचती हूं, मतलब 12 बजे पहुंच जाऊंगी। यानी उसको business का perfect management मालूम है। ठेला चलाते-चलाते भी अपनी जिंदगी बदली जा सकती है, इसका विश्‍वास उसके अंदर आया है। ये छोटी-छोटी चीजें हैं, जिसके द्वारा हम एक बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

अभी प्रधानमंत्री जन-धन खाते खोलने का जो अभियान चलाया, हमारे देश में सालों से कहा जाता था कि गरीबों के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया है, लेकिन बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 40-50 साल के बाद भी, बैंक के दरवाजे पर कभी कोई गरीब दिखाई नहीं दिया था और इस देश में कभी उसकी चर्चा भी नहीं थी। इस देश में ऐसा क्‍यों ? ये सवाल इस देश के किसी बुद्धिमान व्‍यक्ति ने किसी राजनेता को नहीं पूछा, किसी सरकार को नहीं पूछा। 50 साल में नहीं पूछा। Taken for granted था। हमने आकर के बीड़ा उठाया कि बैंकों के दरवाजे पर मेरा गरीब होगा, बैंकों के अंदर मेरा गरीब होगा। ये बैंक गरीबों के लिए होगी, बड़ा अभियान उठाया। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी, 26 जनवरी तक पूरा करने का संकल्‍प लिया था और सभी बैंकों ने जी-जान से मेरे साथ जुड़ गए, कंधे से कंधा जुड़ गए और आज देश में करीब 18 करोड़ से ज्‍यादा बैंकों के खाते गरीबों के खुल गए।

हिन्‍दुस्‍तान में कुल परिवारों में जितने थे करीब-करीब सारे आ गए और हमने तो कहा था कि हम गरीबों का account कोई भी प्रकार का पैसा लेकर कर के नहीं खोलेंगे। बिना पैसे, बैंक खर्चा करेगी फॉर्म का खर्चा होगा, जो होगा करेंगे, गरीबों का एक बार मुफ्त में खाता खोल देंगे। आदत लगेगी उसको धीरे-धीरे और खाते खोल दिए लेकिन देखिए, गरीबों की अमीरी देखिए, सरकार ने तो कहा था एक रुपया नहीं दोगे लेकिन गरीबों ने करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा रकम जमा कर दी है। इसका मतलब ये हुआ कि गरीब को पैसे बचाने की अब इच्‍छा होने लगी है। अगर गरीब को पैसे बचाने की इच्‍छा होगी तो उसके आर्थिक जीवन में बदलाव आना स्‍वाभाविक शुरू हो जाएगा। धीरे-धीरे बैंक के खाते उपयोग करने की आदत भी अब धीरे-धीरे बन रही है। मैं हैरान हूं जिन्‍होंने खाते नहीं खोले कभी, वो आज मेरा हिसाब मांग रहे हैं कि खाते खोल तो दिए हैं, लेकिन उसका उपयोग करने वालों की संख्‍या बढ़ नहीं रही है। जिन्‍होंने खाते तक खोलने की परवाह नहीं की थी, उनको अभी खाते operate हो रहे कि नहीं हो रहे, इसकी चिन्‍ता होने लगी है। अच्‍छा होता, ये काम अगर आपने 40-50 साल पहले कर दिया होता तो आज operate करने का सवाल मुझे नहीं पूछना पड़ता देश के सभी गरीब के खाते हो जाते। लेकिन आपने जो काम 50 साल नहीं किया है वो 50 महीने में मैं पूरा करके रहूंगा, ये मैं बताने आया हूं।

गरीब का भला कैसे हो, अभी काशी के अंदर रक्षाबंधन को सुरक्षाबंधन बनाने का बड़ा अभियान चलाया और मैं काशी की माताओं-बहनों का विशेष रूप से, सार्वजनिक रूप से आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि इस रक्षाबंधन के पर्व पर मुझे इतनी राखियां मिली हैं बनारस से, इतने आशीर्वाद मिले हैं, माताओं-बहनों के, मैं सिर झुकाकर उन सभी माताओं-बहनों को नमन करता हूं। आपने जो मेरे प्रति सद्भाव व्‍यक्‍त किया है, मेरी रक्षा की चिन्‍ता की है और सुरक्षा का बंधन की जो बात कही है, मैं उसके लिए काशी की सभी माताओं-बहनों का ह्दय से बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। मैं इन सभी महानुभावों का भी आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि योजना में हमारे साथ, ये partner बने हैं और एक Model के रूप में ये काम आने वाले दिनों में विकसित होगा। अब आप धीरे-धीरे देखिए काशी के अंदर एक नया....और इसके कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण गति आने वाली है, इन चीजों के कारण शहर की एक नई पहचान बनने वाली है। इन चीजों के कारण सामान्‍य मानव के जीवन में सुविधा का अवसर शुरू होने वाला है।

ऐसी इस योजना के निमित्‍त मैं आज उन सभी बधुंओं को जिन्‍हें आज ये साधन मिल रहे हैं, मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और काशी की आर्थिक प्रगति में गरीब से गरीब व्‍यक्ति की ताकत काम में आए, उस दिशा के प्रयत्‍नों में हमें सफलता मिले, यही भोलेनाथ हम पर आशीर्वाद बरसाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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June 23, 2018
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सबी बेन भई पांवणा, ओरएं म्हारो राम राम जी।

विशाल संख्या में पधारे हुए राजगढ़ क्षेत्र के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

जून महीने की इस भयानक गर्मी में आप सभी का इतनी बड़ी संख्या में आना मेरे लिए, हम सभी सा‍थियों के लिए, एक बहुत बड़ा आशीर्वाद है। आपके इस स्नेह के आगे मैं सिर झुका करके नमन करता हूं। आपकी यही ऊर्जा, यही आशीर्वाद, भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता को आपकी सेवा करने के लिए नित्‍य नूतन प्रेरणा देता रहता है।

ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज 4 हज़ार करोड़ रुपए की मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के लोकार्पण के साथ-साथ पानी की तीन बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने का भी अवसर मिला। इन सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े हर व्यक्ति को, अपने सिर पर ईंटे उठाने वाले महानभावों को, तसला उठाने वाली माताओं, बहनों, भाइयों को, फावड़ा चलाने वालों को, छोटी-छोटी मशीनों से ले करके बड़े-बड़े यंत्र चलाने वाले को मैं इस सफलता के लिए प्रणाम करता हूं, उनका मैं अभिनंदन करता हूं।

गर्मी हो या बरसात, राष्ट्र निर्माण के जिस पुण्य कार्य में वे जुटे हैं, वो अतुलनीय है। मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, बटन दबाकर लोकार्पण करना एक महज औपचारिकता है, लेकिन इन परियोजनाओं का असली लोकार्पण तो आपके पसीने से हुआ है, आपके श्रम से हुआ है। आपके पसीने की महक से ये महक उठा है।  

आप जैसे करोड़ों लोगों के इसी श्रम से, इसी आशीर्वाद की वजह से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सफलतापूर्वक जनसेवा करते-करते, एक के बाद एक जनकल्‍याण के फैसले लेते-लेते चार वर्ष की यात्रा पूर्ण की है। इतनी बड़ी संख्या में आपका आना इस बात की गवाही दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर, उसकी नीतियों पर आपका कितना विश्वास है। जो लोग देश में भ्रम फैलाने में लगे हैं, झूठ फैलाने में लगे हैं, निराशा फैलाने में लगे हैं, वो जमीनी सच्चाई से किस तरह कट चुके हैं, आप इसकी साक्षात तस्वीर हैं।

ये भी बहुत बड़ा संयोग है कि आज 23 जून, देश के महान सपूत, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि है। 23 जून के दिन कश्मीर में उनकी शंकास्पद मृत्यु हुई थी। आज के इस अवसर पर मैं डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुण्‍य स्‍मरण करता हूं, उनको नमन करता हूं, और आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

भाइयों और बहनों, डॉक्टर मुखर्जी कहा करते थे- कोई भी राष्ट्र सिर्फ अपनी ऊर्जा से ही सुरक्षित रह सकता है।‘ उनका भरोसा था देश के साधनों पर, संसाधनों पर, देश के प्रतिभाशाली लोगों पर।

स्वतंत्रता के बाद देश को हताशा से, निराशा से निकालने का उनका vision आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रहा है। देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री के तौर पर उन्होंने देश की पहली औद्योगिक नीति बनाई। वे कहते थे-

“अगर सरकार, देश के शिक्षण संस्थान और औद्योगिक संगठन मिलकर उद्योगों को बढ़ावा देंगे, तो देश बहुत जल्द ही आर्थिक तौर पर भी स्वतंत्र हो जाएगा”।

शिक्षा से जुड़े क्षेत्र के लिए, महिला सशक्तिकरण के लिए, देश की परमाणु नीति को दिशा देने के लिए उन्होंने जो कार्य किया, जो विचार रखे वो उस दौर की सोच से भी बहुत आगे के थे। देश के विकास में जनभागीदारी का महत्व समझते हुए उन्होंने जो रास्ते सुझाए, वो आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

साथियों, डॉक्टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी कहते थे कि ‘शासन का पहला कर्तव्य धनहीन, गृहहीन जनता की सेवा और उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का है”। यही वजह है कि देश का उद्योग मंत्री बनने से पहले जब वो बंगाल के वित्त मंत्री थे, finance minister थे, तब बहुत व्यापक स्तर पर उन्होंने भूमि सुधार का काम किया था। उनका मानना था कि शासन अंग्रेजों की तरह राज करने के लिए नहीं बल्कि नागरिकों के सपने पूरे करने के लिए होना चाहिए।

डॉक्‍टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सबसे ज्यादा महत्व शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को दिया। वो कहते थे कि "सरकार को शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, इसके लिए व्यापक सुविधाएं जुटानी चाहिए, युवाओं में छिपी प्रतिभा को निकालने के लिए उचित माहौल बनाया जाना चाहिए। ताकि हमारे युवा अपने गांव, अपने नगर की सेवा करने के लिए समर्थ बन सकें।“  डॉक्‍टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन विद्या, वित्त और विकास; विद्या, वित्त और विकास- इन तीन मूलभूत चिंतन से जुड़ी धाराओं का संगम था।

ये हमारे देश का दुर्भाग्य रहा, कि एक परिवार का महिमामंडन करने के लिए, देश के अनेक सपूतों को और उनके योगदान को जानबूझ करके छोटा कर दिया गया, भुला देने के भरपूर प्रयास किए गए।

साथियों, आज केंद्र हो या फिर देश के किसी भी राज्य में चलने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो, डॉक्टर मुखर्जी के विजन से अलग नहीं है। चाहे युवाओं के लिए स्किल इंडिया मिशन हो, स्टार्ट अप योजना हो, स्वरोजगार के लिए बिना बैंक गारंटी कर्ज देने की सुविधा देने वाली मुद्रा योजना हो या फिर मेक इन इंडिया हो, इनमें आपको डॉक्टर मुखर्जी के विचारों की झलक मिलेगी।

आपका ये राजगढ़ जिला भी अब इसी विजन के साथ पिछड़े होने की अपनी पहचान को छोड़ने जा रहा है। सरकार ने इसे आकांक्षी जिलों या Aspirational District के तौर पर विकसित करने का फैसला लिया है। आपके जिले में अब स्वास्थ्य, शिक्षा, सफाई, पोषण, जल संरक्षण, कृषि जैसे विषयों पर और तेजी से काम किया जाएगा।

इन जिलों के गांवों में अब राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत जरूरी सुविधाओं को पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। सरकार अब ये सुनिश्चित कर रही है कि आने वाले समय में इन जिलों के हर गांव में, सभी के पास उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन हो; सौभाग्य योजना के तहत हर घर में बिजली कनेक्शन हो; जनधन योजना के तहत सभी के पास बैंक खाते हों; सभी को सुरक्षा बीमा का कवच मिला हो; इंद्र धनुष योजना के तहत हर गर्भवती महिला और बच्चे का टीकाकरण हो।

साथियों, ये कार्य पहले भी हो सकते थे, पहले की सरकारों को किसी ने रोका नहीं था। लेकिन ये दुर्भाग्य है कि देश पर लंबे समय तक जिस दल ने शासन किया, उन्होंने आप लोगों पर, आपकी मेहनत पर भरोसा नहीं किया था। उसने कभी देश के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं किया।

आप मुझे बताइए, पिछले चार वर्षों में भारत सरकार ने कभी भी निराशा की बात कही है? हताशा की बात कही है? हम क्‍या करें ये तो हो सकता है, नहीं हो सकता है। हमने हर बार संकल्‍प करके अच्‍छा करने के लिए कदम उठाए हैं, जी-जान से प्रयास किया है।

और इसलिए भाइयों, बहनों हम हमेशा एक आशा और विश्‍वास के साथ आगे बढ़ने वाले लोग हैं। साथियों, हमारी सरकार देश की आवश्यकताओं को समझते हुए, देश के संसाधनों पर भरोसा करते हुए, देश को 21वीं सदी में नई ऊँचाई पर पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है और प्रयत्‍नरत है।

बीते चार वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा और बीते 13 वर्षो में भारतीय जनता पार्टी की मध्‍य प्रदेश की सरकार ने गरीबों-पिछड़ों-शोषितों-वंचितों-किसानों को सशक्त करने का काम किया है। पिछले 5 वर्षों में मध्य प्रदेश में कृषि विकास दर सालाना औसतन 18 प्रतिशत रही है, जो देश में सबसे अधिक है। देश में दलहन के कुल उत्पादन की बात हो, तिलहन के कुल उत्पादन की बात हो, चना या सोयाबीन, टमाटर, लहसुन के उत्पादन में मध्य प्रदेश पूरे देश में नंबर एक रहा है। गेंहूं उत्पादन और अरहर, सरसो, आंवला, धनिया, इसके उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है और एक नंबर के दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा है।

शिवराज जी के शासन में मध्य प्रदेश ने विकास की नई गाथा लिखी है। आज यहां मोहनपुरा में सिंचाई परियोजना का लोकार्पण और तीन वॉटर सप्लाई स्कीमों पर काम शुरू होना, इस कड़ी का एक महत्‍वूपूर्ण हिस्सा है। ये परियोजना राजगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की भी बड़ी परियोजनाओं में से एक है।

साथियों, इस प्रोजेक्ट से सवा सात सौ गांव के किसान भाई-बहनों को सीधा लाभ होने वाला है। आने वाले दिनों में, इन गांवों की सवा लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर ना सिर्फ सिंचाई की व्यवस्था होगी बल्कि 400 गांवों में पीने के पानी की समस्या से भी लोगों को मुक्ति मिलेगी। और 400 गांवों में पीने के पानी की समस्‍या से मुक्ति मिलना, इसका मतलब यहां की लाखों माताओं-बहनों का आशीर्वाद मिलना होगा। पानी की कठिनाई माताएं-बहने जितनी समझती हैं, शायद ही कोई और समझ सकता है। एक प्रकार से ये माताओं-बहनों की उत्‍तम सेवा का काम हुआ है।

ये परियोजना ना सिर्फ तेजी से होते विकास का उदाहरण है बल्कि सरकार के काम करने के तौर तरीके का भी सबूत है। लगभग 4 वर्ष के भीतर इस परियोजना को पूरा कर लिया  गया है। इसमें micro irrigation का विशेष ध्यान रखा गया है, यानि खुली नहर को नहीं बल्कि पाइपलाइन बिछाकर खेत तक पानी पहुंचाने को प्राथमिकता दी गई है।

भाइयों और बहनों, यहां मालवा में एक कहावत है- मालव धरती गगन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर । ये कहावत पुरानी है-

यानि एक जमाना था जब मालवा की धरती में ना तो धन धान्य की कमी थी और ना ही पानी की कोई कमी थी। कदम-कदम पर यहां पानी मिला करता था। लेकिन पहले की सरकारों ने जिस तरह का काम किया, उसमें पानी के साथ ये कहावत भी संकट में पड़ गई। लेकिन बीते वर्षों में शिवराज जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने मालवा और मध्य प्रदेश की पुरानी पहचान को लौटाने का गंभीर प्रयास किया है।

साथियों, 2007 में सिंचाई परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में सिर्फ साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई होती थी। शिवराज जी के शासन में अब ये बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर हो गई है। जो लोग टीवी पर देश में सुन रहे हैं, उनको भी मैं कहता हूं भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने से पहले साढ़े सात लाख हेक्‍टेयर और भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में 40 लाख हेक्‍टेयर। अब तो राज्य सरकार इसे 2024 तक दोगुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। Micro irrigation system के विस्तार के लिए 70 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

आप सभी को मैं यहां विश्वास दिलाने आया हूं कि जो लक्ष्य राज्य सरकार ने तय किया है, उससे भी अधिक हासिल करने का प्रयास किया जाएगा और भारत सरकार कंधे से कंधा मिलाकर आपके साथ चलेगी।  

मध्य प्रदेश को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से भी पूरी मदद मिल रही है। राज्य में इस योजना के तहत 14 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मध्य प्रदेश को भी इस योजना के तहत करीब 1400 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इस योजना के माध्यम से ‘per drop more crop’ के मिशन को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। चार वर्षों के परिश्रम का परिणाम है कि देशभर में माइक्रो इरीगेशन का दायरा 25 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसमें डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि मध्य प्रदेश की है।

साथियों, आजकल आप भी देख रहे होंगे कि सरकारी योजनाओं के बारे में वीडियो तकनीक और नमो एप्प के माध्यम से मैं अलग-अलग लोगों से बात कर रहा हूं। तीन दिन पहले ही मैंने देशभर के किसानों से बात की थी। इसी कार्यक्रम में मुझे झाबुआ के किसान भाई-बहनों से बात करने का अवसर मिला। झाबुआ की एक किसान बहन ने मुझे विस्तार से बताया कि कैसे ड्रिप इरिगेशन से उसकी टमाटर की खेती में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

साथियों, New India के नए सपने में देश के गांव और किसान की महत्वपूर्ण भूमिका है। और इसलिए New India के उदय के साथ ही किसानों की आय को दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में बीज से ले करके बाजार तक, एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं। 

साथियों, पिछले चार वर्षों में देशभर में लगभग 14 करोड़ soil health card बांटे गए हैं, जिसमें से लगभग सवा करोड़ यहां मध्य प्रदेश के मेरे किसान भाई-बहनों को भी मिले हैं। इसमें अब किसान भाईयों को आसानी से पता लग रहा है कि उनकी जमीन के लिए कौन सा उर्वरक कितनी मात्रा में उपयुक्त है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मध्य प्रदेश के भी 35 लाख से ज्यादा किसान उठा रहे हैं।

किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए देशभर की मंडियों को ऑनलाइन बाजार से जोड़ा जा रहा है। अब तक देश की पौने 600 मंडियों को E-NAM प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, मध्य प्रदेश भी, उसकी भी आज 58 मंडियां इसके साथ जुड़ गई हैं। वो दिन दूर नहीं जब देश का ज्यादा से ज्यादा किसान सीधे अपने गांव के कॉमन सर्विस सेंटर या अपने मोबाइल फोन से ही देश की किसी भी मंडी में सीधे अपनी फसल वो बेच सकेगा।

भाइयों और बहनों, सरकार गांव और गरीब के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठा रही है। विशेष रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े समाज की माताओं बहनों को जहरीले धुएं से मुक्ति दिलाने का काम निरंतर चल रहा है।

अब तक देश में 4 करोड़ से अधिक गरीब माताओं-बहनों को रसोई में मुफ्त एलपीजी सिलेंडर पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश में भी अब तक लगभग 40 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जा चुका है।

साथियों, ये सरकार श्रम का सम्मान करने वाली सरकार है। देश में अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न करने वाले उद्यमी कैसे आगे आएं, इसकी चिंता आज भारत सरकार कर रही है। श्रम के प्रति कुछ लोगों का रवैया भले ही सकारात्मक ना हो, वो रोजगार का मजाक उड़ाते हों, लेकिन इस सरकार के प्रयास आज सफलता के रूप में सबके सामने हैं।

देश में आज मुद्रा योजना के तहत छोटे से छोटे उद्यमियों को बिना बैंक गारंटी कर्ज दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश के भी 85 लाख से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया है।

भाइयों और बहनों, दिल्ली और भोपाल में लगा विकास का ये डबल इंजन पूरी शक्ति के साथ मध्‍य प्रदेश को आगे बढ़ रहा है।

मुझे याद है कि कभी मध्य प्रदेश की स्थिति ऐसी थी कि उसके साथ एक अपमानजनक शब्द जोड़ दिया गया था-और वो शब्‍द था जो हमें किसी को पसंद नहीं है, वो शब्‍द था- बीमारू। देश के बीमार राज्यों में मध्य प्रदेश को गिना जाता था। राज्य में लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस को मध्य प्रदेश का ये अपमान कभी दिखता नहीं था, चुभता नहीं था।

जन सामान्य को अपनी प्रजा समझकर, हमेशा अपनी जय जयकार लगवाना, यही कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश के अंदर करते रहे और न ही आने वाले भविष्य पर उन्‍होंने कोई गौर किया।

राज्य को उस स्थिति से निकालकर देश के विकास का प्रमुख भागीदार बनाने का काम यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है। शिवराज जी को आपने एक पद दिया है लेकिन वो सेवक की तरह इस महान भूमि की, यहां की जनता की सेवा कर रहे हैं।

आज मध्य प्रदेश सफलता के जिस मार्ग पर है, उसके लिए मैं यहां के लोगों को, यहां की सरकार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

एक बार फिर आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आप सभी यहां भारी संख्या में आए, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!

मेरे साथ जोर से बोलिए, दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए –

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।