“পৰৱৰ্তি প্ৰজন্মৰ আন্তঃগাঁথনি নিৰ্মাণৰে তেওঁলোকৰ আশা-আকাংক্ষা পূৰণ কৰি অতি দৰিদ্ৰ আৰু পীড়িতসকলৰ প্ৰয়োজনীয়তাসমূহ পূৰণৰ বাবে আমি প্ৰতিশ্ৰুতিবদ্ধ”
“মানুহক অন্তৰত লৈহে যিকোনো ধৰণৰ আন্তঃগাঁথনি বিকাশৰ অভিযান আগবাঢ়িব লাগিব। আমাৰ ভাৰতত আমি ঠিক তাকেই কৰিছো”
“আমি যদি আমাৰ আন্তঃগাঁথনিসমূহ নমনীয়কৈ গঢ়ি তোলো তেন্তে আমি কেৱল আমাৰ বাবেই দুৰ্যোগক প্ৰতিৰোধ নকৰিম, বৰং ভৱিষ্যতৰ বহু প্ৰজন্মৰ বাবেও এই প্ৰতিৰোধ অব্যাহত থাকিব”

মহামান্য বিশেষজ্ঞ, শিক্ষাবিদ, ব্যৱসায়িক নেতা, নীতি নিৰ্ধাৰক, আৰু সমগ্ৰ বিশ্বৰ মোৰ মৰমৰ বন্ধুসকল,

নমস্কাৰ!

দুৰ্যোগ স্থিতিস্থাপক আন্তঃগাঁথনিৰ ওপৰত আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় সন্মিলনৰ চতুৰ্থ সংস্কৰণত আপোনালোকৰ সৈতে যোগদান কৰি মই আনন্দিত। আৰম্ভণিতে, আমি নিজকে মনত পেলাই দিব লাগিব যে বহনক্ষম উন্নয়ন লক্ষ্যৰ গাম্ভীৰ্যপূৰ্ণ প্ৰতিশ্ৰুতি হৈছে কাকো এৰি নিদিয়া। সেয়েহে, আমি আটাইতকৈ দৰিদ্ৰ আৰু আটাইতকৈ দুৰ্বল লোকসকলৰ প্ৰয়োজনীয়তা পূৰণ কৰিবলৈ প্ৰতিশ্ৰুতিবদ্ধ হৈ আছোঁ, তেওঁলোকৰ আশা-আকাংক্ষা উপলব্ধি কৰিবলৈ পৰৱৰ্তী প্ৰজন্মৰ আন্তঃগাঁথনি নিৰ্মাণ কৰি। আৰু, আন্তঃগাঁথনি কেৱল মূলধনসম্পদ সৃষ্টি কৰা আৰু বিনিয়োগৰ ওপৰত দীৰ্ঘম্যাদী লাভ সৃষ্টি কৰাৰ বিষয়ে নহয়। এইটো সংখ্যাৰ বিষয়ে নহয়। এইটো টকাৰ বিষয়ে নহয়। এইটো মানুহৰ বিষয়ে। ই তেওঁলোকক উচ্চ মানদণ্ডৰ, নিৰ্ভৰযোগ্য আৰু বহনক্ষম সেৱা সমানভাৱে প্ৰদান কৰাৰ বিষয়ে। যিকোনো আন্তঃগাঁথনি বিকাশৰ কাহিনীৰ কেন্দ্ৰবিন্দু হ'ব লাগিব মানুহ। আৰু, আমি ভাৰতত ঠিক সেইটোৱেই কৰি আছো। আমি ভাৰতত মৌলিক সেৱাৰ ব্যৱস্থা বৃদ্ধি কৰাৰ লগে লগে... শিক্ষাৰ পৰা স্বাস্থ্যলৈকে, খোৱা পানীৰ পৰা অনাময়লৈকে, বিদ্যুতৰ পৰা পৰিবহনলৈকে, আৰু বহুতো, আমি জলবায়ু পৰিৱৰ্তনৰ সৈতে অতি পোনপটীয়াকৈ মোকাবিলা কৰি আছো।

বন্ধুসকল,

আন্তঃগাঁথনিৰ বিকাশে মানৱ সম্ভাৱনাক উল্লেখনীয় উপায়েৰে উন্মোচিত কৰিব পাৰে। কিন্তু, আমি আমাৰ আন্তঃগাঁথনিক সহজ ভাৱে ল'ব নালাগে। এই প্ৰণালীবোৰৰ জলবায়ু পৰিৱৰ্তনকে ধৰি জ্ঞাত আৰু অজ্ঞাত বহুতো প্ৰত্যাহ্বান আছে। যেতিয়া আমি ২০১৯ চনত চিডিআৰআই মুকলি কৰিছিলো, ই আমাৰ নিজৰ অভিজ্ঞতা আৰু অনুভৱ কৰা প্ৰয়োজনীয়তাৰ ওপৰত আধাৰিত আছিল। যেতিয়া এখন দলং বানপানীত উটি যায়, যেতিয়া ঘূৰ্ণীবতাহৰ দ্বাৰা এটা বিদ্যুতৰ লাইন ভাঙি যায়, যেতিয়া বনজুইৰ ফলত এটা যোগাযোগ স্তম্ভ ক্ষতিগ্ৰস্ত হয়, ই হাজাৰ হাজাৰ লোকৰ জীৱন আৰু জীৱিকা পোনপটীয়াকৈ ব্যাহত কৰে। এনে আন্তঃগাঁথনিৰ ক্ষতিৰ পৰিণাম বছৰ ধৰি থাকিব পাৰে, আৰু লাখ লাখ লোকক প্ৰভাৱিত কৰিব পাৰে। সেয়েহে, আমাৰ সন্মুখত প্ৰত্যাহ্বানটো সম্পূৰ্ণ স্পষ্ট। আধুনিক প্ৰযুক্তি আৰু জ্ঞানৰ সৈতে, আমি স্থায়ী ভাৱে নিৰ্মাণ কৰা স্থিতিস্থাপক আন্তঃগাঁথনি সৃষ্টি কৰিব পাৰোঁনে? এই প্ৰত্যাহ্বানক স্বীকৃতি দিবলৈকে চিডিআৰআই সৃষ্টি কৰা হৈছে। এই মিত্ৰজোঁটটো সম্প্ৰসাৰিত হৈছে আৰু সমগ্ৰ বিশ্বৰ পৰা ব্যাপক সমৰ্থন লাভ কৰিছে এইটোৱে ইংগিত দিয়ে যে এইটো আমাৰ উমৈহতীয়া উদ্বেগৰ বিষয়।

বন্ধুসকল,

আঢ়ৈ বছৰৰ কম সময়ৰ ভিতৰতে চিডিআৰআইয়ে গুৰুত্বপূৰ্ণ পদক্ষেপ গ্ৰহণ কৰিছে আৰু উল্লেখনীয় অৰিহনা আগবঢ়াইছে। যোৱা বছৰ ক’পেনহেগেন জলবায়ু সন্মিলনত আৰম্ভ কৰা 'স্থিতিস্থাপক দ্বীপ ৰাজ্যৰ বাবে আন্তঃগাঁথনি' সন্দৰ্ভত লোৱা পদক্ষেপটো হৈছে ক্ষুদ্ৰ দ্বীপৰ দেশবোৰৰ সৈতে কাম কৰাৰ আমাৰ প্ৰতিশ্ৰুতিৰ এক স্পষ্ট অভিব্যক্তি। স্থিতিস্থাপক বিমানবন্দৰত চিডিআৰআইৰ কামে বিশ্বজুৰি ১৫০ টা বিমানবন্দৰ অধ্যয়ন কৰি আছে। চিডিআৰআইৰ নেতৃত্বত চলি থকা 'আন্তঃগাঁথনি প্ৰণালীৰ দুৰ্যোগ স্থিতিস্থাপকতাৰ বিশ্বব্যাপী মূল্যাঙ্কনে' বিশ্বব্যাপী জ্ঞান সৃষ্টি কৰাত সহায় কৰিব যি যথেষ্ট মূল্যৱান হ'ব।

বন্ধুসকল,

আমাৰ ভৱিষ্যত সুস্থিৰ কৰি তুলিবলৈ, আমি এক 'দৃঢ় আন্তঃগাঁথনি পৰিৱৰ্তন'ৰ দিশত কাম কৰিব লাগিব, যি হৈছে এই সন্মিলনৰ প্ৰাথমিক গুৰুত্ব। দৃঢ় আন্তঃগাঁথনি আমাৰ ব্যাপক ৰূপান্তৰ প্ৰক্ৰিয়াৰ কেন্দ্ৰবিন্দুও হ'ব পাৰে। যদি আমি আন্তঃগাঁথনি সুস্থিৰ কৰি তুলিব পাৰো, আমি কেৱল নিজৰ বাবেই নহয়, বহুতো ভৱিষ্যত প্ৰজন্মৰ বাবে দুৰ্যোগ প্ৰতিৰোধ কৰিব পাৰিম। এইটো এটা অংশীদাৰী সপোন, এক অংশীদাৰী দৃষ্টিভংগী, যাক আমি বাস্তৱলৈ ৰূপান্তৰ কৰিব লাগিব, আৰু আমি কৰি দেখুৱাব লাগিব। মই ভাষণ সমাপ্ত কৰাৰ পূৰ্বে এই সন্মিলন আয়োজনৰ বাবে চিডিআৰআই আৰু আমেৰিকা যুক্তৰাষ্ট্ৰৰ চৰকাৰক অভিনন্দন জনাইছো।

এই অনুষ্ঠানটোত সহযোগিতা আগবঢ়োৱা সকলো অংশীদাৰলৈ মই শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিব বিচাৰো। মই আপোনালোক সকলোৰে পৰা এক ফলপ্ৰসূ আৰু গঠনমূলক আলোচনা আশা কৰিছো।

ধন্যবাদ।

বহুত বহুত ধন্যবাদ।

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Text of PM's remarks at beginning of the Budget Session of Parliament
January 29, 2026
The President’s Address Reflects Confidence and Aspirations of 140 crore Indians: PM
India-EU Free Trade Agreement Opens Vast Opportunities for Youth, Farmers, and Manufacturers: PM
Our Government believes in Reform, Perform, Transform; Nation is moving Rapidly on Reform Express: PM
India’s Democracy and Demography are a Beacon of Hope for the World: PM
The time is for Solutions, Empowering Decisions and Accelerating Reforms: PM

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।