Tamil Nadu will shatter the false confidence and pride of the I.N.D.I alliance
On the one hand, our record is of unprecedented development, and on the other hand, the I.N.D.I alliance holds a record of crores of scams.
Both the DMK and the Congress are against Tamil Nadu's timeless traditions and culture. The DMK-Congress even supported the ban against 'Jallikattu, ' the pride of Tamil Nadu and its people.
Even when our fishermen were languishing in Sri Lankan jails, they did nothing, and it was our government that got them back safely.
DMK-Congress supports crime against women and also politicizes issues for convenience
भारत माता की, भारत माता की। एन अन्बारंद तमिल सगोदर सगोदरिगडे वणक्कम !
आज कन्याकुमारी से, देश के इस दक्षिणी छोर से जो लहर उठी है, वो बहुत दूर तक जाने वाली है। अभी अन्नामलाई बड़े विस्तार से बता रहे थे, मैं 1991 में एकता यात्रा लेकर कन्याकुमारी से कश्मीर गया था और, इस बार मैं कश्मीर से कन्याकुमारी आया हूं। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने देश को तोड़ने का सपना जो देखते हैं, जम्मू-कश्मीर के लोगों ने ऐसे लोगों को नकार दिया है। अब तमिलनाडु के लोग भी ऐसा ही करने जा रहे हैं। साथियों, मैं तमिलनाडु की धरती पर बहुत बड़े परिवर्तन की आहट देख रहा हूं। तमिलनाडु में बीजेपी का प्रदर्शन इस बार डीएमके और कांग्रेस के इंडी अलायंस का सारा घमंड तोड़कर रख देगा।
साथियों, डीएमके और कांग्रेस का इंडी अलायंस कभी भी तमिलनाडु को विकसित नहीं बना सकता। इन लोगों की हिस्ट्री घोटालों की है, इन लोगों की राजनीति का आधार लोगों को लूटने के लिए सत्ता में आना है। एक तरफ बीजेपी की कल्याणकारी स्कीम होती हैं, दूसरी तरफ इनके करोड़ों के स्कैम होते हैं। हमने ऑप्टिकल फाइबर और 5G दिया, हमारे नाम पर डिजिटल इंडिया स्कीम है। इंडी अलायंस के नाम पर लाखों करोड़ रुपए का 2G का स्कैम है। और डीएमके उस लूट की सबसे बड़ी हिस्सेदार थी। बीजेपी ने बड़ी संख्या में एयरपोर्ट बनाए, हमारे नाम पर उड़ान स्कीम है। इंडी अलायंस के नाम देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाला हेलिकॉप्टर स्कैम है। हमारी खेलो इंडिया और TOPS स्कीम्स से देश ने खेलों में ऊंचा मुकाम हासिल किया। लेकिन उनके नाम पर CWG स्कैम का दाग है। हमने खनिज सेक्टर में Reforms को लागू किया। इंडी अलायंस के नाम पर कोल स्कैम की कालिख लगी है। ये लिस्ट बहुत लंबी है और यही इंडी अलायंस की सच्चाई है।
साथियों, कन्याकुमारी ने हमेशा बीजेपी को भरपूर प्यार दिया है। और इसीलिए, यहां की डीएमके-कांग्रेस गठबंधन कन्याकुमारी के लोगों को सजा देने का कोई मौका नहीं छोड़ती। आप एक के बाद एक इनकी हरकतें देखिए, 20 साल पहले, अटल जी ने नॉर्थ-साउथ कॉरिडॉर की नींव रखी थी। इस कॉरिडोर के कन्याकुमारी-नारीकुलम ब्रिज का काम इन लोगों ने इतने वर्षों तक लटकाकर रखा। 2014 में जब हमारी सरकार आई, तब हमने उसे पूरा किया। कन्याकुमारी और तिरुवनन्तपुरम फोरलेन रोड भी यहां की सरकारें बनने नहीं दे रही थीं। हमें इसके लिए अतिरिक्त फंड देना पड़ा, तब ये काम शुरू हो पाया। कन्याकुमारी के लोग मार्तंडम और पार्वतीपुरम फ्लाइओवर के लिए भी वर्षों से मांग कर रहे थे। लेकिन, डीएमके और कांग्रेस के लोगों ने एक बार भी नहीं सुना। जब बीजेपी केंद्र में आई, तब ये काम भी पूरा किया गया। यहां लोग 40 साल से डबल रेल ब्रिज का भी सपना देख रहे थे। उसे भी इन्होंने पूरा नहीं होने दिया। अब बीजेपी सरकार ये काम कर रही है।
साथियों, हम तमिलनाडु का Port Infrastructure डवलप करने में भी जुटे हुए हैं। अभी पिछले महीने ही मैं थूथुकुडी आया था। वहां मैंने चिदम्बरनार पोर्ट ‘आउटर हार्बर कंटेनर टर्मिनल’ का शिलान्यास किया था। हमारे फिशरमेन भाइयों के लिए भी बीजेपी सरकार लगातार काम कर रही है। चाहे वो आधुनिक फिशिंग बोट्स के लिए आर्थिक मदद देना हो या फिर उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में लाना, आपकी हर चिंता का हमने समाधान करने का प्रयास किया है। यहां के हमारे साथी श्रीमान ‘जॉय डी क्रूज’ ने भी फिशरमेन कम्यूनिटी के लिए जो काम किया है, मैं उसकी प्रशंसा करता हूं। और जब भी मैं उनको मिलता हूं, ऐसे अनेक विषयों पर उनसे मुझे बात करने का अवसर मिलता है।
साथियों हम तमिलनाडु की connectivity को बेहतर बनाने के लिए रेलवेज और हाइवेज का नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। इन 10 वर्षों में तमिलनाडु में भी करीब-करीब Fifty Thousand Crore के हाइवे प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए हैं। Seventy Thousand करोड़ रुपये के हाइवे प्रोजेक्ट्स पर काम भी चल रहा है। 2009 से 2014 तक, कांग्रेस-डीएमके सरकार, दिल्ली में बैठी थी, हर साल तमिलनाडु को रेल विकास के लिए करीब-करीब सिर्फ Eight Hundred करोड़ rupees देती थी। बीजेपी सरकार ने इस साल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तमिलनाडु को करीब Sixty Three Hundred करोड़ रुपए दिये हैं।
साथियों, डीएमके तमिलनाडु के भविष्य की ही दुश्मन नहीं है, डीएमके तमिलनाडु के अतीत की, उसकी विरासत की भी दुश्मन है। मैं अयोध्या में राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पहले तमिलनाडु आया था। मैंने यहां के प्राचीन तीर्थों के दर्शन किए थे। लेकिन डीएमके सरकार ने क्या किया? डीएमके ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देखने तक पर रोक लगाने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट को तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगानी पड़ी थी। आप कल्पना कीजिए, कि इनके मन में हमारा देश, हमारी संस्कृति, हमारे महापुरुष, हमारी परंपरा इन सब बातों के लिए कितनी नफरत है। इतना ही नहीं, जब दिल्ली में संसद की नई इमारत बनी तो, तमिल महान परंपरा के प्रतीक इस धरती के आशीर्वाद स्वरूप पवित्र सेंगोल को हमने संसद के नए भवन में स्थापित किया। लेकिन इन लोगों ने डीएमके वालों ने इसका भी बॉयकॉट किया, उन्हें सेंगोल की स्थापना भी पसंद नहीं आई। ये लोग अब गाली-गलौच पर उतर आए है। तमिलनाडु की पहचान को बदनाम कर रहे हैं। आप सोचिए, डीएमके और कांग्रेस तब भी चुप बैठे रहे थे जब जलिकट्टू पर पाबंदी लगी थी। ये लोग तमिल संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं। ये हमारी सरकार है, एनडीए की सरकार है जिसने जलिकट्टू को पूरे उत्साह के साथ मनाए जाने का रास्ता साफ किया। जलिकट्टू तमिलनाडु का गौरव है। जलिकट्टू हो, या तमिलनाडु की पहचान यहां की संस्कृति हो, जब तक मोदी है, इस पर आंच नहीं आने देगा। इदु मोदियिन् गारंटी।
साथियों, ये दिल्ली में बैठे हुए लोगों की नींद खराब हो रही है कि कन्याकुमारी से आवाज उठ रही है। ये आपका प्यार, ये आपके आशीर्वाद सिर्फ मेरी ही नहीं, पूरे देश की ऊर्जा को नई ताकत दे रहे हैं।
साथियों, इंडी अलायंस के ये लोग तमिलनाडु के लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ के भी गुनहगार हैं। और मैं बहुत जिम्मेवारी के साथ कह रहा हूं, ये गुनहगार हैं। आपको याद होगा, श्रीलंका में हमारे मछुआरे भाइयों को फांसी की सजा दे दी गई थी। ये मोदी चुप नहीं बैठा, ये मोदी सोता नहीं रहा, हर रास्ते का इस्तेमाल किया, डिप्लोमेटिक चैनल का इस्तेमाल किया, हर प्रकार का दबाव बनाया, और मेरे तमिलनाडु के भाइयों-बहनों, मैं उन सभी मछुआरों को श्रीलंका में फांसी के फंदे से उतारकर वापिस लेकरके आया हूं। हमारे मछुआरों को क्यों श्रीलंका की जेलों में जाना पड़ता है, इसका जिम्मेदार कौन है? किसने हमारे मछुआरों को, हमारे तमिल भाई बहनों को, और देश की जनता को इतने सालों तक किसने गुमराह किया है?
साथियों, ये पाप न आपने किया है न हमने किया है। ये पाप कांग्रेस और DMK ने मिलकर किया है। दशकों से दोनों मिल कर देश की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। लेकिन अब देश इनको और नहीं सहेगा। मेरे तमिल परिवारजन अब और नहीं सहेंगे। मेरे मछुआरे भाई-बहन अब और नहीं सहेंगे। कांग्रेस और DMK, दोनों को अपने इन पापों का हिसाब जल्द ही देना होगा। हिसाब मांगोगे ना?
साथियों, केंद्र की NDA सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी शक्ति से काम कर रही है। और मुझे खुशी है कि आज मंच पर भी बहुत बड़ी मात्रा में महिलाएं नेतृत्व की ताकत दिखा रही है। लेकिन भाइयों-बहनों, डीएमके कांग्रेस के लोग महिलाओं को केवल धोखा देना जानते हैं, उनका अपमान करना जानते हैं। तमिलनाडु के लोग जानते हैं कि जयललिता जी के साथ डीएमके नेताओं ने कैसा व्यवहार किया था। डीएमके में वही संस्कृति अब भी जारी है। तमिलनाडु में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। ये लोग महिलाओं के नाम पर राजनीति करने की कोशिश करते हैं। जब हम महिला आरक्षण बिल लेकर आए, तो इसमें सहयोग की जगह डीएमके नेताओं ने उस पर भी सवाल उठाए। डीएमके और कांग्रेस, महिला विरोधी है और यही इनका असली चेहरा है।
साथियों, मुझे तमिलनाडु में आपका इतना प्यार मिलता है, इतने आशीर्वाद मिलते हैं, आप इतनी बड़ी तादाद में आते हैं, लेकिन, मुझे ये तकलीफ भी रहती है कि मैं तमिल भाषा नहीं सीख पाया। थोड़ा-बहुत समझ लेता हूं। मुझे इसकी तकलीफ है। लेकिन इस कमी को पूरा करने के लिए हमने technology की मदद लेना शुरू किया है। अब आप सोशल मीडिया साइट एक्स पर...नमो इन तमिल हैंडल पर भी मेरी बात सुन सकते हैं। और वो तमिल में सुन सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि काफी हद तक 95 परसेंट मैं कह सकता हूं। मैं इसके जरिए आप तक अपनी बात पहुंचाऊंगा। और बाद में मैं अन्नामलाई को कहूंगा कि वो आपको, ये टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, आपको क्या करना है, कैसे मोदी का तमिल भाषा में सुन सकते हैं, वो अन्नामलाई समझाएंगे आपको। आपके इस आशीर्वाद के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।
मेरे ये प्रयास आपके आशीर्वाद से सफल होगा। क्या आपलोग इसको डाउनलोड करके तमिल में मेरे मन की बात सुनेंगे। औरों को भी सुनने के लिए बताएंगे। हरेक को मोबाइल पर सिखाएंगे कि कैसे सुनना चाहिए। ये मोदी जो तमिल में कोशिश कर रहा है न, आप तमिल भाषा का सम्मान कर रहे हैं। आप… मोदी का तमिल के प्रति प्यार है उसका सम्मान कर रहे हैं। और इसलिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं।
भारत माता की, भारत माता की, भारत माता की। बहुत-बहुत धन्यवाद, वणक्कम।
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
Share
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM
आप सभी को नमस्कार।
यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।
साथियों,
इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।
साथियों,
आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
Friends,
आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।
साथियों,
अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।
साथियों,
ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।
साथियों,
भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।
साथियों,
आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।
साथियों,
आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।
साथियों,
भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।
साथियों,
जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।
साथियों,
भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।
साथियों,
Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।
साथियों,
आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।
साथियों,
अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।
साथियों,
गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।
लेकिन साथियों,
आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।
साथियों,
गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।
साथियों,
गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।
साथियों,
शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
साथियों,
गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।
साथियों,
हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।
साथियों,
पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।
साथियों,
हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।
साथियों,
ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।
साथियों,
हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।
साथियों,
मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।
साथियों,
यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।
साथियों,
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।
साथियों,
इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।
वैसे साथियों,
अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।
साथियों,
Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।
साथियों,
एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।