Over the 9 years the BJP Government at the Center has enabled the creation of infrastructure in the state of Rajasthan in terms of its roadways and highways: PM Modi
The Congress Government has only established a state of loot, falsity and lies: PM Modi
The Congress Government has only indulged in the politics of blame-game and intra-party politics that have taken the state of Rajasthan towards ruin: PM Modi
The rampant abuse of the downtrodden, especially the women and Dalits have gone out of hand, with many of them undergoing systemic exploitation under the Congress regime: PM Modi
Using the acronym ‘INDIA’ the Congress Party yet again with its allies intends to loot the country: PM Modi

श्याम बाबा की… श्याम बाबा की… शाकंभरी माता की… जीण माता की.. सालासर बालाजी की.. लोहार्गल तीर्थ और हर्षनाथ धाम की… वीरों की धरती शेखावाटी को मेरा शत-शत प्रणाम। यहाँ के बारे में कहा जाता है-
बोली जाणी मीठी मिसरी, घमी सुहावै म्हाटी।
धनवानां विद्वानां की, या महापुरसां की थाती।
घम अनमोल रतन निपजावै, वाह भाई शेखावाटी।।


यहाँ आने पर आध्यात्मिक अनुभूति भी मिलती है, और दिव्य आशीर्वाद भी मिलता है। शेखावटी की धरती शिक्षा संत स्वामी केशवानंद जी की जन्म भूमि है। ये श्रद्धानंद जी महाराज, अमृतानाथ जी महाराज, बुद्धगिरी जी महाराज और रतिनाथ जी महाराज की तपोभूमि है। इसी धरती ने हमें भैरोसिंह शेखावत, जगदीश प्रसाद माथुर और मदन लाल सैनी जैसे नेता दिए हैं। इसी शेखावाटी से निकले जगदीप धनखड़ जी आज देश के उपराष्ट्रपति हैं। इसलिए, आज जब मैं सीकर आया हूँ, तो मेरे मन में एक अलग उमंग है उत्साह है, ऊर्जा है। आप इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए हैं। जहां-जहां भी नजर पहुंचती है लोग ही लोग है। वहां तो पीछे बिल्डिंग के ऊपर भी लोग दिखते हैं। ये जनसैलाब बता रहा है कि आने वाले चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा। अब राजस्थान की करवट भी बदलेगी और मेरी गारंटी है राजस्थान की किस्मत भी बदलेगी। इसलिए आज राजस्थान में चारों तरफ एक ही गूंज है, एक ही स्वर है, एक ही नारा है- जीतेगा कमल, खिलेगा कमल!

साथियों,
भाजपा की सरकार, राजस्थान की दिन-रात सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अभी कुछ देर पहले, आपने शायद यहां टीवी पर कार्यक्रम देखा होगा, किसानों के बैंक खातों में पीएम किसान सम्मान निधि के लगभग 18 हजार करोड़ रुपए भेजे गए गए है। राजस्थान के भी 55 लाख से ज्यादा किसानों को आज 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा सीधे उनके खाते में पहुंच गए हैं। आज मुझे राजस्थान के अलग-अलग जिलों में 7 मेडिकल कॉलेजों के शिलान्यास उसका अवसर भी मिला है। सीकर, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, सिरोही, और श्रीगंगानगर के मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण भी आज हुआ है। युवाओं के भविष्य के लिए नए एकलव्य स्कूल भी मैंने राजस्थान के लोगों को समर्पित किए हैं।

साथियों,
केंद्र सरकार की तरफ से राजस्थान की सेवा का ये सिलसिला लगातार चल रहा है। इससे पहले कुछ सप्ताह पहले मैं बीकानेर आया था। तब भी मुझे अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे और 24 हजार करोड़ रुपयों की परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास का सौभाग्य मिला था। राजस्थान में अच्छी सड़कों के लिए, अच्छे हाईवे के लिए, राज्य के विकास के लिए भाजपा सरकार लगातार केंद्र से पैसा दे रही है।
जब केंद्र में, साथियों ये याद रखना... याद रखोगे..? याद रखोगे..? जरा हाथ ऊपर करके बताओ याद रखोगे..? पक्का याद रखोगे..? केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी तो 10 साल में राजस्थान को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में एक लाख करोड़ रुपए ही दिए गए थे। बीते 9 वर्षो में भाजपा की सरकार ने टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में राजस्थान को 4 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा पहुंचाए हैं। कहां एक लाख करोड़ और कहां चार लाख करोड़। जब केंद्र में 10 साल कांग्रेस की सरकार थी, तो राजस्थान को सेंट्रल ग्रांट के रूप में भी करीब 50 हजार करोड़ रुपए ही दिए गए थे। हमारी सरकार ने बीते 9 वर्षों में सेंट्रल ग्रांट के तौर पर राजस्थान को डेढ़ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए हैं। लेकिन जबसे यहां कांग्रेस की सरकार बनी है, तबसे यहां विकास के काम में सिर्फ रोड़े अटकाने का ही काम चल रहा है। मैंने राजस्थान सहित पूरे देश की बहनों से वादा किया था कि उनके घर तक पाइप से पानी पहुंचाऊंगा। और जब इतनी बड़ी मात्रा में माताएं-बहने आशीर्वाद देने आई हैं हमने इसके लिए जल जीवन मिशन शुरु किया। आज देशभर में, आंकड़ा सुनिए दोस्तों... आज देश भर में 9 करोड़ से अधिक नए परिवारों तक पानी के कनेक्शन पहुंच चुके हैं। अनेक राज्यों में शत-प्रतिशत नल से जल देने का काम पूरा हो गया है। लेकिन राजस्थान के लोगों को कांग्रेस की सरकार पानी के लिए भी तरसा कर रखना चाहती है। राजस्थान, हर घर जल योजना में बहुत पीछे चल रहा है। यहां शेखावाटी के लोग जानते हैं कि कुंभाराम लिफ्ट पेयजल योजना के साथ इन्होंने क्या किया। जब यहां भाजपा सरकार थी, तब इस पर 5 हजार करोड रुपए का खर्च होने का अनुमान था। कांग्रेस की सरकार बनी तो उन्होंने परियोजना को तो लटका दिया। आज इसकी लागत भी करीब-करीब दोगुनी हो गई है। यानि कांग्रेस ने पानी का भी नुकसान किया और पैसे का भी नुकसान किया।

भाइयों और बहनों,
कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार चलाने के नाम पर सिर्फ लूट की दुकान चलाई है, झूठ का बाजार सजाया है। कांग्रेस का मतलब ही है- लूट की दुकान, झूठ का बाज़ार! और लूट की इस दुकान का सबसे ताजा प्रॉडक्ट है- राजस्थान की लाल डायरी। आपने लाल डायरी के बारे में सुना है ना? कहते हैं इस लाल डायरी में कांग्रेस सरकार के काले कारनामे दर्ज हैं। लोग कह रहे हैं कि लाल डायरी के पन्ने खुले तो अच्छे-अच्छे निपट जाएंगे। कांग्रेस के बड़े से बड़े नेताओं की इस लाल डायरी का नाम सुनते ही बोलती बंद हो रही है। ये लोग भले ही मुंह पर ताला लगा लें, लेकिन ये लाल डायरी इस चुनाव में पूरी कांग्रेस का डिब्बा गोल करने जा रही है।

साथियों,
लोकतंत्र में हर सरकार को अपने काम का हिसाब देना होता है। लेकिन क्या राजस्थान में कांग्रेस आपको अपने काम का हिसाब देती है क्या? जरा जोर से बताइए ना अपने काम का हिसाब देती है क्या?
जो चार साल सिर्फ सोएगा, वो अपने काम का हिसाब कैसे देगा? इन लोगों ने सरकार का हर दिन, आपसी खींचतान में, वर्चस्व की लड़ाई में बर्बाद किया है। साथियों, आज केंद्र की भाजपा सरकार, आपके सुख-दुख की साथी बनकर, आपके जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए काम कर रही है। देश के करोड़ों लोगों को पक्का घर बनाकर लखपति बनाने की गारंटी दी है। साथियों पक्का घर बनाकर लखपति बनाने की गारंटी किसने दी है?.. ये गारंटी किसने दी है? इस गारंटी को किसने पूरा किया है? - भाजपा सरकार ने। देश के करोड़ों गरीबों को मुफ्त राशन की गारंटी किसने दी?... किसने दी?..- भाजपा सरकार ने दी। कोरोना के काल में करोड़ों गरीबों को मुफ्त वैक्सीन की गारंटी किसने दी?- भाजपा सरकार ने दी। देश के करोड़ों गरीबों को अस्पताल में 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की गारंटी किसने दी?.. किसने दी? जनऔषधि केंद्र में गरीबों को सस्ती दवाइयों की गारंटी किसने दी?... किसने दी?... गरीब का बच्चा भी ईंजीनियर-डॉक्टर बन सके, अंग्रेजी न आने की वजह से पीछे न रह जाए, इसके लिए मातृभाषा में पढ़ाई की गारंटी किसने दी?... पूरी ताकत से बोलिए किसने दी?...गरीब के कल्याण के लिए दिल्ली में बैठा आपका ये सेवक पूरे समर्पित भाव से काम कर रहा है।

भाइयों और बहनों,
हमारे सीकर की पहचान तो शिक्षा नगरी के रूप में भी होती है। यहां के गांव-ढाणी डॉक्टर-इंजीनियर बनाते आए हैं। केंद्र की भाजपा सरकार युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के नए अवसर देने में जुटी है। लेकिन राजस्थान में क्या हो रहा है? राजस्थान में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है, पेपरलीक उद्योग चल रहा है, पेपरलीक उद्योग। ...राजस्थान के युवा काबिल हैं, समर्थ हैं, लेकिन यहां की सरकार उनके भविष्य को बर्बाद कर रही है। यहां सत्ताधारी दल के लोगों पर ही पेपरलीक माफिया होने का आरोप लग रहा है। लग रहा है ना... लग रहा है ना..राजस्थान के युवाओं को पेपरलीक माफिया से बचाने के लिए क्या करना पड़ेगा? कांग्रेस को हटाना ही होगा। क्या करना होगा? भाइयों और बहनों, राज्य सरकारों की एक और सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, नागरिकों की सुरक्षा की, कानून-व्यवस्था की। लेकिन कांग्रेस सरकार ये भी नहीं कर पा रही। आए दिन गैंगवॉर की खबरों ने राजस्थान जैसे शांतिप्रिय प्रदेश को उसकी साख की साख को बिगाड़ दिया है। राजस्थान में दलितों पर अत्याचार चरम पर है। राजस्थान में नशे की तस्करी, नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। हमारे तीज-त्यौहारों पर खतरा मंडराता रहा है। कब पत्थर चलने लगें, कब गोलियां चले, कब कर्फ्यू लग जाए, कोई नहीं जानता। भाइयों और बहनों, राजस्थान के लोग कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन राजस्थान के लोग बहन-बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकते। मां पद्मावती और पन्ना धाय की इस धरती की बेटियों के साथ जो हो रहा है, वो आक्रोश से भर देता है। किसी दलित बेटी के साथ दुष्कर्म होता है, और फिर उस पर एसिड डाल दिया जाता है। किसी दलित बहन के साथ उसके पति के सामने गैंगरेप होता है, आरोपी उसका वीडियो बनाते हैं। पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखी जाती, बेखौफ़ आरोपी वीडियो वायरल कर देते हैं। छोटी-छोटी बच्चियां, स्कूलों में पढ़ाने वाली टीचर्स तक यहां सुरक्षित नहीं हैं। और साथियों, कार्रवाई करने के बजाय कांग्रेस के नेता पीड़ित महिलाओं पर ही झूठ बोलने का आरोप लगा रहे हैं। वाकई, बहुत हो गया। भाइयों-बहनों राजस्थान की धरती है, ये वीरों की धरती है, ये पराक्रमियों की धरती है, ये याचना करने वाले लोग नहीं है, ये हुंकार करने वाले लोग हैं। और इसलिए इस बार चारो ओर एक ही हुंकार है, एक ही नारा है... हर राजस्थानी का एक ही संकल्प है... बहन बेटियों पर अत्याचार, नहीं सहेगा राजस्थान! बहन बेटियों पर अत्याचार... बहन बेटियों पर अत्याचार.. बहन बेटियों पर अत्याचार... दलित पर अत्याचार... दलित पर अत्याचार... कर्ज़ से मरता किसान... कर्ज़ से मरता किसान...! अपराध बेलगाम- नहीं सहेगा राजस्थान !

पेपर लीक से युवा परेशान- नहीं सहेगा राजस्थान! भ्रष्टाचार- नहीं सहेगा राजस्थान !

साथियों,
कांग्रेस आज देश की सबसे बड़ी दिशाविहीन पार्टी बनकर रह गई है। इन दिनों कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने एक नया पैंतरा चला है। ये पैंतरा है, नाम बदलने का। पहले के जमाने में, राजस्थान के लोग व्यापारियों की दुनिया को बराबर जानते हैं, पहले के जमाने में कोई पीढ़ी, कोई कंपनी अगर बदनाम हो जाए तो फ्रॉड करने वाली कंपनी का चिट्ठा लिकल जाए तो तुरंत वो कंपनी वाले नया बोर्ड लगाकर के अपना कारोबार शुरू कर के लोगों को भ्रमित करने का काम करते थे। नाम बदल करके लोगों को मूरख बना कर के अपना धंधा पानी चलाने की कोशिश करते थे। कांग्रेस और उसके साथियों की जमात, ऐसी फ्रॉड कंपनियों की नकल कर रही है। UPA के कुकर्म लोगों को याद ना आएं, इसलिए, इन्होंने अपना नाम यूपीए से बदलकर आईएनडीआईए कर दिया और इतना लंबा कर दिया कि लोग भूल जाएं। UPA ने नाम बदला है ताकि ये आतंकवाद के सामने घुटने टेकने का अपना पाप छिपा सकें। इन्होंने नाम बदला है ताकि ये कर्जमाफी के नाम पर किसानों से विश्वासघात को छिपा सकें। UPA नाम बदला है ताकि ये गरीबों के साथ किए गए छल-कपट को छिपा सकें। और मैं आज राजस्थान की धरती से देश के लोगों को एक और बात बताना चाहता हूं। इनका तरीका वही है, जो हमेशा देश के दुश्मनों ने अपनाया है। पहले भी, ये तो आईएनडीआईए के नाम से आए हैं, लेकिन पहले इंडिया के नाम के पीछे अपने पाप को छुपाने का प्रयास किया गया है। इंडिया नाम तो ईस्ट इंडिया कंपनी में भी था। ईस्ट इंडिया कंपनी में था कि नहीं था? लेकिन इंडिया नाम, अपनी भारतभक्ति दिखाने के लिए नहीं बल्कि भारत को लूटने के इरादे से लगाया गया था। आपको याद होगा कि कांग्रेस के शासनकाल में SIMI यानि स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया बना था। नाम में इंडिया था, लेकिन मिशन, इंडिया को आतंकी हमलों से बर्बाद करने का था। जब इसके कुकर्म सामने आए तो सीमी भी बैन किया गया। और ये बैन हुआ तो फिर ये नया नाम लेकर आए- उन्होंने भी नाम बदला... SIMI बन गया PFI यानि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया। नाम नया, नाम में फिर इंडिया, लेकिन काम वही पुराना।

साथियों,
आईएनडीआईए के नाम के लेबल से ये अपने पुराने कारनामों को छुपाना चाहते हैं। यूपीए के कारनामों को छुपाना चाहते हैं। अगर इनको वाकई इंडिया की परवाह होती तो, क्या ये विदेश में जाकर के विदेशियों से भारत में दखल देने के लिए बात करते क्या? अगर इन्हें इंडिया की चिंता होती तो, क्या ये सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाते क्या? इनको इंडिया की चिंता होती, तो क्या ये गलवान में भारत की सेना के शौर्य को कठघरे में रखते क्या? साथियों, ये वही चेहरे हैं जो आतंकी हमला होने पर दुनिया के आगे रोते थे, खुद कुछ नहीं करते थे। इन्हें देश के सुरक्षाबलों के सामर्थ्य पर भरोसा नहीं है। ये वही चेहरे हैं, जिन्होंने हमारे सैनिकों का हक मारा है। दशकों तक हमारे सैनिक वन रैंक वन पेंशन मांगते रहे, लेकिन इन्होंने नहीं दिया। जो लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग को गले लगाते हैं, जो लोग भारत में भाषा के आधार पर बंटवारा करते हैं, जो लोग विदेशों से संबंध भी इस आधार पर बनाते हैं, कि उनका वोट बैंक नाराज़ ना हो जाए, इनके लिए राष्ट्रहित नहीं बल्कि वोटबैंक सर्वोपरि है, वो लोग जब आईएनडीआईओ की बात करते हैं, तो दिखावा लगता है, छलावा लगता है, झूठ लगता है। भाइयों और बहनों, इन लोगों में अहंकार कूट-कूट कर भरा हुआ है। एक बार इन्होंने नारा दिया था इंदिरा Is India, India इज इंदिरा। और तब देश की जनता ने इनका हिसाब चुकता किया था, चुन-चुन कर के साफ कर दिया था.. इन्हें उखाड़ फेंका था उनलोगों को। अहंकार से भरे इन लोगों ने फिर वही पाप दोहराया है। ये सुधरने को तैयार नहीं है... ये लोग कह रहे हैं UPA is India, India is UPA. इनका जनता फिर से एक बार वही हाल करेगी जो पहले किया था।

साथियों,
हम जानते हैं कि आजादी का आंदोलन जब पूरी प्रखरता पर था तो महात्मा गांधी ने एक नारा दिया था। ये नारा देश के लोगों की प्रेरणा बन गया था। और आजादी के आंदोलन में इस नारे ने ऊर्जा भर दी थी। नौजवान स्कूल-कॉलेज में अपनी किताबें छोड़ कर के महात्मा गांधी के आदेश पर आजादी के लिए चल पड़े थे, जेलें भर दी थी, क्योंकि गोलियां कम पड़ गई थी। वो दिन थे और तब महात्मा गांधी ने जो नारा दिया था। आज फिर से देश के कल्याण के लिए, देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए उस नारे की फिर से जरूरत है दोस्तों। इस नारे को फिर से गांव-गांव और घर-घर पहुंचाने की जरूरत है। क्या नारा था ? महात्मा गांधी ने नारा दिया था क्विट इंडिया- अंग्रेजों इंडिया छोड़ो... अंग्रेजों इंडिया छोड़ो...और अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना पड़ा था। वैसे ही आज हम समृद्ध भारत बनाने का संकल्प लेकर चल रहे हैं। जैसे गांधी जी ने क्विट इंडिया का मंत्र दिया था, वैसे ही आज का मंत्र है- भ्रष्टाचार- क्विट इंडिया... भ्रष्टाचार- छोड़ो इंडिया..। परिवारवाद- क्विट इंडिया... परिवारवाद छोड़ो इंडिया। तुष्टिकरण- क्विट इंडिया- तुष्ट्रिकरण छोड़ो इंडिया..। क्विट इंडिया ही देश को बचाएगा और देश को विकसित भारत बनाएगा।

भाइयों और बहनों,
राजस्थान के लिए भी भाजपा का रोडमैप स्पष्ट है, नीति साफ है। आने वाले 5 साल में जब भारत दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी होगा, तो उसमें राजस्थान की बहुत बड़ी हिस्सेदारी होगी। भाजपा सरकार बनते ही, यहां भ्रष्टाचारियों पर, अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा सरकार राजस्थान के नौजवान की आकांक्षा को सम्मान देगी। भाजपा की डबल इंजन सरकार बिना रुके, बिना थके काम करेगी। राजस्थान के पास सामर्थ्य की कमी नहीं है। राजस्थान के विकास के लिए जैसे पूरा राजस्थान आज मेरा साथ दे रहा है मेरा शेखावाटी भी पीछे नहीं रहेगा, ये मुझे पूरा भरेसा है। साथियों हाथ ऊपर करके जवाब दीजिए शेखावटी की हर सीट, हर विधानसभा सीट पर, हर बूथ पर कमल खिला कर के रहेंगे। ये संकल्प है? ये वादा है? साथियों ये ऊर्जा पूरे राजस्थान के हर बूथ पर कमल खिलाएगी। इसी विश्वास के साथ घर-घर ये मंत्र लेकर चले जाइए... भ्रष्टाचारी क्विट इंडिया... परिवारवादी- क्विट इंडिया.. इस मंत्र को लेकर के आगे बढ़ें
बहुत-बहुत धन्यवाद !


मेरे साथ बोलिए भारत माता की...

भारत माता की...

भारत माता की...

जय..

 

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April 17, 2026

आदरणीय सभापति जी,

सदन की ओर से, मेरी तरफ से, मैं श्रीमान हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और शुभकामनाएं भी देता हूं। राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, यह अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है और यह अपने आप में यह एक अनुभव का सम्मान है, एक सहज कार्य शैली का सम्मान है और एक सहज कार्य शैली की स्वीकृति भी है। हमने सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वह अपने जीवन के जो भूतकाल के अनुभव हैं, उसको भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग लाते हैं। उनका यह अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व को बनाता है। मुझे विश्वास है, उपसभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी का जन्म यूपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण उन्हें अपने गांव के विकास में विद्यार्थी काल से भी कुछ ना कुछ करते रहे। उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई और इन सारे विषयों पर मुझे भूतकाल में बोलने का अवसर मिला, तो मैं काफी कुछ कह चुका हूं। इसलिए मैं आज इसको दोहराता नहीं हूं। एक बात का उल्लेख आज जरूर मैं करूंगा, आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल 1927, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती भी है और विशेषता यह है कि आज 17 अप्रैल को आप जब तीसरी बार इस दायित्व को संभालने जा रहे हैं और वह भी चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर और चंद्रशेखर जी के साथ आपका जुड़ाव, उनके प्रति आपका लगाव और एक प्रकार से आप उनके सहयात्री रहे, उनके पूरे कार्यकाल में, तो यह एक अपने आप में एक बहुत ही बड़ा सुयोग है। अपने चंद्रशेखर जी के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और चंद्रशेखर जी के एक वृहद जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बहुत बड़ा काम भी आपने किया है और इसलिए आपके लिए एक बहुत बड़ा विशेष अवसर बन जाता है कि चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर आपके तीसरा कार्यकाल का प्रारंभ हो रहा है। हरिवंश जी का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है। पत्रकारिता के उच्च मानदंड, यह आज भी आदर्श के रूप में रेखांकित किए जाते हैं। लंबा जीवन पत्रकारिता का रहा है, लेकिन पत्रकारिता में भी उन्होंने उच्च मानदंड को हमेशा आधार माना। हम सब जानते हैं, उनके लेखनी में धार है, लेकिन उनकी वाणी में और व्यवहार में सौम्‍यता और शिष्‍टता भरी-भरी रहती है, यह अपने आप में और मैं जब गुजरात में था, तब भी मैं उनकी लेखों को पढ़ने की मेरी आदत रही थी और मैं देखता था कि वह अपना पक्ष बड़ी दृढ़ता के साथ रखते थे और मैं अनुभव करता था कि उसमें काफी अध्ययन के बाद उसका निचोड़ उसमें प्रकट होता था। पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का उनका निरंतर प्रयास रहा और एक सफल प्रयास भी रहा और हम देखते हैं, सदन में भी चाहे पॉलिसी हो या प्रोसेस हो, उन बातों का कहीं ना कहीं छाया हमें हमेशा नजर आती है और यह हम सबके लिए सुखद अनुभव है। वह समाज की वास्तविकताओं के साथ गहरे जुड़ाव के साथ काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। मैं तो कहूंगा, जो चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा हो, जो नए सांसद आते हैं, जो हरिवंश जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं, बहुत कुछ बातें करके उनसे जान सकते हैं, क्योंकि जब वह पत्रकारिता में थे, तो उनकी कॉलम चलती थी, हमारा सांसद कैसा हो, हमारा पार्लियामेंट मेंबर कैसा हो, तब उनको शायद पता नहीं होगा, कभी उनको ही बैठना पड़ेगा। लेकिन वह लिखते थे और वह बातों में बहुत व्यापकता रहती थी। सदन की गरिमा और बैठने वाले सदस्य का दायित्व, अब उसके आचार विचार को लेकर भी बहुत गहरा उनका अध्ययन रहता था और उन बातों का उपयोग आज हमारे सदन के साथी, उनके साथ बैठकर के बहुत कुछ जान सकते हैं, सीख सकते हैं। समय की पाबंदी एक डिसिप्लिन लाइफ में और अपने कर्तव्‍यों के प्रति गंभीरता, यह आपकी विशेषता रही है और शायद इसी के कारण आप सर्व स्वीकृत व्‍यक्‍तित्‍व आपका विकसित हुआ है। हमने देखा होगा जब से वह राज्यसभा के सदस्य बने हैं, मैं कह सकता हूं कि पूर्ण समय वह सदन में होते हैं। सभापति जी की अनुपस्थिति में सदन को संभालने का काम तो करते ही हैं, लेकिन बाकी समय भी यहां कमेटी का कोई भी व्यक्ति बैठा हो, तो भी वह सदन में हमेशा अपनी मौजूदगी रहती है। हर बात को सुनते हैं, उस समय सदन का जो संचालन करते हैं, उनके कार्य को भी देखते हैं और यह इसके पीछे उनको अपना जो दायित्व है, उसके प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता है, उसके कारण यह संभव होता है और यह हम सबके लिए सीखने जैसा है और मैंने देखा है कि वह पूरा समय इन चीजों के लिए वह खपा देते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

उपसभापति के तौर पर सदन को कैसे चलाया, सदन में सदस्य के तौर पर क्या योगदान दिया, इस बारे में हम स्वाभाविक रूप से एक सकारात्मक चर्चा करते रहते हैं। लेकिन सदन के बाहर, जनता के बीच वह कैसे अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक दायित्‍वों को निभाते हैं, यह भी हम सार्वजनिक जीवन में जो लोग हैं, उनके लिए सचमुच में ध्यान आकर्षित करने वाले विषय हैं और हमें उसको देखना चाहिए। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि काम सराहनीय तो है ही हैं, अनुकरणीय भी हैं। हमारा देश युवा देश है और मैंने देखा है कि हरिवंश जी ने अपने समय का उपयोग सबसे ज्यादा युवाओं के बीच में बिताना पसंद किया है। युवाओं में लगातार गंभीर विषयों पर जागरूकता बने, एक प्रकार से लोक शिक्षा का काम निरंतर चलता रहे, यह अपने आप में वह लगातार करते रहते हैं, तो देश भर में उनका भ्रमण रहता है। वह मीडिया की नजरों में बहुत ज्यादा रहने का उनका शौक नहीं है, लेकिन भ्रमण और कार्यक्रमों की संख्या उनकी लगातार चलती रहती है। 2018 में, जब उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद जो मेरी जानकारी है, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज में 350 कार्यक्रम किए हैं। यह एक बहुत बड़ा काम है। देश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस में 350 से अधिक कार्यक्रम, जाना-आना, उनके साथ बैठना, बातें करना, उसके लिए विषयों की तैयारी करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा, एक प्रकार से आपने बृहतस्य के रूप में इस काम को किया है और युवाओं से ही जुड़ने के लक्ष्य को आपने जरा भी ओझल नहीं होने दिया है। और विकसित भारत का सपना युवाओं के लिए भी क्यों होना चाहिए, इस मूल विषय को अलग-अलग तरीके से जिस प्रकार से विद्यार्थियों का मूड हों, वह बताते रहते हैं। विद्यार्थियों में, युवा पीढ़ी में एक आत्मविश्वास कैसे पैदा हो, निराशा से वह हमेशा-हमेशा बाहर रहें, इन सारे विषयों की चर्चा वह करते हैं। उनके कुछ ऐतिहासिक रेफरेंस के साथ बात करते हैं कि हम ऐसे क्या कारण हैं कि हम जितनी तेजी से जाना चाहिए था, आगे नहीं जा पाए, अब अवसर क्या आया है, सारी बातें हो और देश इतनी बड़ी छलांग लगा सकता है, उसका आत्मविश्वास भरने का काम उनके द्वारा होता है। आजकल देश में लिटरेचर फेस्टिवल, एक बड़ा सिलसिला चला है और अब तो वह टीयर-2, टीयर-3 सिटीज़ तक भी वह सिलसिला चला है। लिटरेचर फेस्टिवल्स में भी हरिवंश जी का अक्सर जाना होता है और उस समाज का, उस तबके को भी वह अपने विचारों से प्रभावित करते रहते हैं, प्रेरित करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

मैंने उनके जीवन का एक प्रसंग जो सुना है, शायद हो सकता है, सार्वजनिक तौर में मेरी जानकारी सटीक ना भी हो। मैंने सुना है कि 1994 में हरिवंश जी पहली बार विदेश यात्रा की और वह अमेरिका गए। जब अमेरिका गए, तो अपने सारे कार्यक्रमों के अलावा उनसे पूछा गया कि आप कहीं और जाना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं। तो उन्होंने आग्रह से कहा कि मैं जरूर यह विकसित देश है, तो मैं उसकी यूनिवर्सिटी को देखना-समझना चाहता हूं और वहाँ की ऐसी कौन सी शिक्षा और कल्चर है, जिसके कारण यह देश इतना आगे बढ़ रहा है और उन्होंने काफी समय अपने निर्धारित कार्यक्रमों के सिवाय वह पहली अमेरिका की यात्रा में सिर्फ और सिर्फ यूनिवर्सिटीज में बिताया, उसका अध्ययन करने का काम किया। यानी यह जो ललक थी उनके मन में, यह अगर यह विकसित देश की यूनिवर्सिटी से जो निकलता है, तो हिंदुस्तान की यूनिवर्सिटीज़ भी ऐसी हों, ताकि विकसित भारत का सपना वहीं से रेखांकित किया जा सके।

आदरणीय सभापति जी,

MPs को MPLAD फंड के संबंध में तो काफी चर्चा रहती है और एक बड़ा प्रसंगी का विषय भी रहता है MPs में और कभी-कभी तो यह भी संघर्ष रहता है कि MPLAD फंड इतना है और वहां उधर एमएलए फंड ज्यादा है, उसकी चर्चा रहती है। लेकिन एमपी फंड का उपयोग कैसे हो, MPLAD जो फंड की बातें हैं, उसमें हरिवंश जी के विचारों को तो मैंने स्वयं भी सुना है, मैं प्रभावित हूं इससे, लेकिन हमारी भी कुछ मजबूरी रही है। शायद हम उनकी अपेक्षा के अनुसार उसको कर नहीं पाए हैं, क्योंकि सबको ऐसे विषय में साथ लेना जरा कठिन होता है। लेकिन उन्होंने खुद की उस जिम्मेदारी को कैसे निभाया है, मैं समझता हूं वह भी हम लोगों ने, उन्होंने यह MPLAD फंड था, जो अपने जो विचार हैं, उसके विचार को भी नीचे धरातल पर उतारने के लिए उपयोग किया, शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी, यह उसके सारे केंद्र में रहा, MPLAD फंड उन्होंने इस्तेमाल करने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थानों में ऐसे अध्ययन केंद्र स्थापित किया और उसका प्रभाव लंबे अरसे तक रहने वाला है और उसमें भी उन्होंने प्रोजेक्ट ओरिएंटेड, समस्या के समाधान को केंद्र में रखा। जैसे लुप्त होती जा रही भारतीय भाषाओं, उनके संरक्षण के लिए उन्होंने आईआईटी पटना में एक अध्ययन केंद्र के लिए MPLAD फंड का उपयोग किया, तो उस काम को वह लगातार वहां हो रहा है। एक और उन्होंने काम किया, जो बिहार में कुछ क्षेत्र हैं, जहां भयावह भूकंप की घटनाएं रोज घटती रहती हैं, नेपाल में भी एक छोटा सा भूकंप आ जाए, तो भी उस क्षेत्र का प्रभावित करता है। इस काम को ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से सेंटर फॉर अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के रूप में एक स्टडी सेंटर रिसर्च के लिए खुलवाया है। यानी वह स्टडी का काम करना, रिसर्च करना, उस पर लगातार काम कर रहा है। हम जानते हैं कि जैसा मैंने कहा है, जय प्रकाश जी का गांव सिताब दियारा हरिवंश जी वहीं हैं और वहां गंगा और घाघरा दो नदी के बीच में एक गांव है, तो हमेशा ही जल के कारण जो कटाव की समस्या रहती है, वो गांव परेशान रहता है और नदी धारा भी बदलती रहती है, तो विनाश भी बहुत होता रहता है। उसको भी ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उन्होंने पटना की आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में एक नदी अध्ययन केंद्र खुलवाया है। पटना के ही चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्था में वो बिजनेस इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर बनवा रहे हैं। एआई के इस दौर में मगध विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बनाया है। यानी MPLAD फंड का एक निर्धारित दिशा में काम कैसे किया जा सकता है, इसका एक उदाहरण आपने प्रस्तुत किया है।

आदरणीय सभापति जी,

हम सभी ने अनुभव किया है कि लोग जब अपने गांव से स्थानांतरण करते हैं, एक दूसरे शहर में जाते हैं, तो जीवन में एक प्रकार से गांव से कट जाते हैं। हरिवंश जी का जीवन आज भी गांव से जुड़ा रहता है, अपने गांव से जुड़ा रहता है। वह लगातार वहां के सुख दुख के साथी बन करके वह अपना जो भी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं, वह करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

जिस संसद की नई इमारत में बैठे हैं, उसका जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब मुझे उनके साथ निकट से काम करने का अवसर आया। और मैं अनुभव कर रहा था कि जो विचार मेरे मन में आते थे, मैं हरिवंश जी से कहता था, हम ऐसा करें तो कैसा होगा, दो दिन में वो बराबर परफेक्ट उसको लेकर आते थे, कहीं नामकरण करना है, उसके पहचान इस सदन की कैसे बने, तो काफी कुछ कंट्रीब्यूशन सदन के निर्माण में, उसकी आर्ट गैलरी में, विभिन्न द्वार के नाम रखने हों, यानी हर प्रकार से मेरे एक साथी के रूप में हम दोनों को और मुझे बड़ा आनंददायक रहा वो अनुभव काम का।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी के सदन को चलाने की कुशलता को तो हम भली भांति देखे हैं, लेकिन साथ-साथ उन्होंने राज्यों की विधानसभाएं, विधान परिषदें और वहां जो प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स हैं, उनको भी कैसे मदद रूप होना, उनके लिए किस प्रकार से आवश्यक उनके ट्रेनिंग के लिए काम किया जाना, उसके लिए भी काफी समय दिया और उन्होंने लगातार उनके लिए समय दिखाया। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भी उन्होंने भारत की डेमोक्रेटिक व्यवस्था की छाप छोड़ने में बहुत बड़ी सक्रिय भूमिका निभाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि 21वीं सदी का यह दूसरा क्वार्टर यह सदन को बहुत कुछ कंट्रीब्यूट करना है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाने में, विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में, मुझे विश्वास है कि सदन के द्वारा बहुत कुछ होगा और उसके कारण पीठाधीश सबका दायित्व बहुत बड़ा होता है। हम सबका बड़े विश्वास से मैं कह सकता हूं कि सभी साथी आप जो चाहते होंगे, उसको पूरा करने के लिए सहयोग करते रहेंगे और आपके काम को कठिनाइयों में ना परिवर्तित करें इसके लिए ताकि आप ज्यादा आउटकम दे सकते हैं और मुझे विश्वास है सब लोग इसको करेंगे और मैंने पहले भी कहा था कि हरि कृपा पर है सब कुछ और हरि तो यहां के भी है, हरि वहां के भी है और हरि यही बैठेंगे। तो हरि कृपा बनी रहे। इसी एक अपेक्षा के साथ मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!