Telangana is a land of art, skill and culture. The products of Telangana are being liked in the world: PM Modi in Mahabubnagar
Recently, we launched the PM Vishwakarma Scheme... A lot of Vishwakarma friends earn with their skills. They have been neglected for decades, says PM Modi
We are respecting our farmers. We are giving them the correct price for their hard work. Money is going directly into farmers' bank accounts. There is no place for any middleman: PM Modi
Family based parties are busy in the welfare of their own families, but BJP is worried about the families of common citizens of the country: PM Modi in Telangana

भारत माता की, भारत माता की।


पालमूरु प्रजलन्दरिकी ना नमस्कारालु मरियु शुभाभिनन्दनालु।

यहां आने से पहले मुझे आज सुबह स्वच्छता अभियान के कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। मैं देशवासियों से स्वच्छता के कार्यक्रम से जुड़ने का आह्वान करता हूं कि वे भी एक घंटा निकालकर इस अभियान में शामिल हों। लेकिन जिस प्रकार से भारत के लोगों ने अपने निरंतर सहयोग से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाया है। और आज सुबह में भी मैं देख रहा था। देश के कोने-कोने में स्वच्छता का अभियान चल पड़ा है। मुझे विश्वास है कि आज शुरू हुए इस अभियान में भी ऐसी ही जबरदस्त भागीदारी होगी।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
आज मुझे, तेलंगाना के लोगों के कल्याण के लिए कई परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला। 13 हजार 500 करोड़ से ज्यादा की ये परियोजनाएं तेलंगाना को विकास की नई बुलंदियों पर पहुंचाएंगी। इनसे तेलंगाना के युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। वो प्यारी सी गुड़िया को मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद...।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
हाल के वर्षों में, तेलंगाना के लोगों ने लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनावों में भाजपा को मजबूत किया है। आज यहां जो जन सैलाब दिख रहा है, उससे मैं आश्वस्त हूं कि तेलंगाना के लोगों ने बदलाव का अपना इरादा पक्का कर लिया है। तेलंगाना बदलाव चाहता है, क्योंकि अब राज्य में भ्रष्टाचार नहीं पारदर्शी, ईमानदार सरकार चाहिए। तेलंगाना बदलाव चाहता है, क्योंकि अब उसे झूठे वादे नहीं जमीन पर काम चाहिए। तेलंगाना बदलाव चाहता है, क्योंकि अब उसे भाजपा सरकार चाहिए।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
तेलंगाना की ये धरती रानी रुद्रमा देवी जैसी वीरांगनाओं की धरती है। कुछ दिन पहले ही, देश ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम पास किया है। अब, सिर्फ संसद में ही नहीं बल्कि भारत की हर विधानसभा में महिलाओं की आवाज पहले से ज्यादा मजबूत होगी। तेलंगाना की माताओं-बहनों के वोट ने मोदी को मजबूत किया, और मोदी ने बदले में तेलंगाना समेत देशभर की महिलाओं को सशक्त किया है। मैं तेलंगाना की नारी शक्ति को इस विधेयक के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
तेलंगाना की बहनें जानती हैं कि उनका एक भाई दिल्ली में है, जो निरंतर उनका जीवन बेहतर करने के प्रयास में जी-जान से जुटा है। बहनों के लिए लाखों शौचालय बनवाना हो, मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी के ऋण देना हो, पीएम आवास योजना के गरीबों को घर देना है, मुफ्त गैस कनेक्शन देना हो, हमने महिलाओं का जीवन आसान बनाने का बहुत काम किया है।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
भाजपा, तेलंगाना के लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी देश की विकास यात्रा हाइवे के विस्तार के साथ ही रफ्तार पकड़ती है। 2014 तक, ये आंकड़ा याद रखना, 2014 तक तेलंगाना में 2500 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण किया गया था। लेकिन हमने इतने ही लंबे हाइवे सिर्फ 9 वर्षों में पूरे करके दिखाए हैं। हमारा प्रयास है कि हर छोटे शहर, गांव-कस्बे के लोगों की बड़े शहरों तक पहुंच आसान हो। इससे व्यापारी, कारोबारी, नौकरीपेशा, छात्रों, प्रोफेशनल्स और किसानों को बहुत फायदा होगा।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
हम अपने अन्नदाता को सम्मान दे रहे हैं, उनकी मेहनत का सही मूल्य दे रहे हैं। 2014 में, तेलंगाना के किसानों से MSP पर धान की खरीद पर 3400 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ये आंकड़ा याद रखना, 2014 पुरानी कांग्रेस के जमाने की सरकार की बात कर रहा हूं, 3400 करोड़ रुपये। लेकिन हमने, एक साल में, 27 हजार करोड़ रुपये किसानों के लिए खर्च किए हैं। ये राशि 8 गुना ज्यादा है। ये पैसे भी सीधे किसानों के खाते में जा रहे हैं, इसमें किसी बिचौलिए के लिए कोई जगह नहीं है। लेकिन मुझे अफसोस है कि यहां की सरकार ने किसान योजनाओं को अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया है। तेलंगाना में सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ है। आपने कहीं भी सुना है कि किसी सिंचाई परियोजना का उद्घाटन हो गया, लेकिन उसमें किसानों के लिए पानी नहीं मिल रहा। ऐसा तेलंगाना में हो रहा है, तेलंगाना के किसान ये रोज देख रहे हैं।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
तेलंगाना के किसानों से कर्ज माफी का वादा किया गया था। लेकिन खोखले वादों की वजह से, कई किसानों को अपनी जान देनी पड़ी, क्योंकि राज्य सरकार ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। तेलंगाना में हमारी सरकार नहीं है, फिर भी हमने तेलंगाना के किसानों की मदद करने का भरपूर प्रयास किया। हमने वर्षों से बंद पड़े रामागुंडम फर्टिलाइजर प्लांट को फिर से शुरू किया। ताकि किसानों को इसका फायदा मिल सके। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत तेलंगाना के किसानों को करीब 10 हजार करोड़ रुपये सीधे उनके खाते में दिए गए हैं।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
अब से कुछ देर पहले मैंने तेलंगाना के हल्दी किसानों से जुड़ी बहुत बड़ी घोषणा की है। भारत विश्व में हल्दी का सबसे बड़ा producer, consumer और exporter है! 2014 की तुलना में आज भारत, करीब-करीब दोगुनी मात्रा में हल्दी का विदशों में एक्सपोर्ट करता है। भारत में अलग-अलग spices (स्पाइसेस) को बढ़ावा देने के लिए spices board पहले से काम करते आ रहे हैं। लेकिन हल्दी जैसे golden spice के लिए कोई बोर्ड नहीं था। अब भाजपा सरकार ने तय किया है कि देश में एक अलग National Turmeric Board बनाया जाएगा। इसका बहुत बड़ा लाभ तेलंगाना के किसानों को होगा। इससे हल्दी के उत्पादन में, वैल्यू चेन में, हल्दी के एक्सपोर्ट में किसानों को बहुत बड़ी मदद मिलेगी।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
तेलंगाना कला, संस्कृति और कौशल से समृद्ध जगह है। यहां बनने वाले उत्पादों को दुनियाभर में पसंद किया जा रहा है। कुछ दिन पहले मैंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को बीदरी कला से तैयार गिफ्ट भेंट किया था। इससे देश-विदेश में इस कला की चर्चा तेज हो गई है। इस तरह के कई और स्किल हैं, जिसे सपोर्ट की जरूरत है। हाल ही में, हमने पीएम विश्वकर्मा योजना लॉन्च किया। बहुत सारे विश्वकर्मा साथी ST-SC-OBC बैंकग्राउंड से आते हैं। हाथ के हुनर से कमाई करने वाले ऐसे कारीगरों की दशकों से उपेक्षा की जा रही थी। ऐसे साथियों को सपोर्ट देने के लिए ही पीएम विश्वकर्मा योजना लाई गई है। इससे हमारे विश्वकर्मा भाई-बहनों को आधुनिक औजार मिलेंगे, उनके बनाए उत्पादों को नया बाजार मिलेगा। आपके प्यार के लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। इतना प्यार, इतना उत्साह, ये अद्भुत है। आपने तो कांग्रेस और बीआरएस, दोनों की नींद हराम कर दी है।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
मैं आपको भारत सरकार के एक बहुत ही अहम निर्णय के बारे में भी बताना चाहता हूं। भारत सरकार, तेलंगाना में मुलुगु जिले में एक Central Tribal University की स्थापना करने का निर्णय कर लिया है। इस विश्वविद्यालय का नाम आदिवासी देवियों सम्मक्का-सारक्का के नाम पर रखा जाएगा। और इस पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये सेंट्रल यूनिवर्सिटी बहुत पहले बन गई होती, अगर यहां की भ्रष्ट सरकार ने इसमें दिलचस्पी दिखाई होती। मुझे अफसोस है कि यहां की राज्य सरकार Central Tribal University के लिए जमीन देने के काम को पांच साल तक टालती रही। ये दिखाता है कि तेलंगाना सरकार को आदिवासी हितों की, आदिवासी गौरव की कोई परवाह नहीं है।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
तेलंगाना सरकार, कार की है, लेकिन उस कार का स्टीयरिंग किसी और के पास है। आप भी जानते हैं कि तेलंगाना सरकार को कौन चला रहा है। तेलंगाना की प्रगति को 2 Family Run Parties ने रोक रखा है। इन दोनों ही Family Run Parties की पहचान, करप्शन और कमीशन से है। इस दोनों पार्टियों का एक ही फॉर्मूला है- “party of the family, by the family and for the family.” ये लोग प्रजातंत्र को परिवार तंत्र बना रहे हैं। ये एक पॉलिटिकल पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर चलाते हैं। इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्रेसिंडेट भी परिवार का, CEO भी परिवार का, डायरेक्टर भी परिवार का, ट्रेजरर भी परिवार का, जनरल मैनेजर भी परिवार का, चीफ मैनेजर भी परिवार का, मैनेजर भी परिवार का होता है। हां सपोर्ट स्टाफ के लिए कुछ बाहरी लोगों को दिखावे के लिए जरूर रख लिया जाता है। यानि हर बड़े पद पर या तो परिवार के लोग खुद बैठते हैं या फिर अपने करीबी को ही बिठाते हैं। पार्टी का कोई भी फैसला इनकी मर्जी के बिना नहीं हो सकता। परिवारवादी पार्टियां अपने परिवार का ही भला करने में जुटी हैं, लेकिन भाजपा को देश के सामान्य नागरिक के परिवार की चिंता है। हमारा फोकस आपके परिवार को बेहतर जीवन और बेहतर अवसर देने पर है।


ना कुटुम्भ सभ्युल्लारा,
भाजपा पर तेलंगाना के लोगों का समर्थन और विश्वास लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यहां के युवाओं-महिलाओं-किसानों को सिर्फ मोदी की गारंटी पर भरोसा है। क्योंकि मोदी जो गारंटी देता है, वो पूरी करके रहता है। तेलंगाना के लोग भी यही चाहते हैं कि उनसे किए गए सभी वादे पूरे हों। हमें मिलकर तेलंगाना को प्रगति के नए रास्ते पर लेकर जाना है। आप सबने इतनी बड़ी संख्या में आकर आशीर्वाद दिए और स्वंय वरुण देवता भी हमें आशीर्वाद देने आ गए हैं। आज जिस प्रकार से यहां की पार्टी ने मुझे आपके बीच आने का अवसर दिया। मुझे बहुत पुराने मेरे साथियों के कई वर्षों के बाद दर्शन करने का मौका मिला। आज मेरा जीवन धन्य हो गया, आपके दर्शन करके, आप साथियों के दर्शन करके, तेलंगाना की जनता जनार्दन के दर्शन करके, और इसके लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए-


भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय! वंदे ! वंदे ! वंदे ! वंदे ! वंदे ! वंदे ! वंदे ! भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Sant Ravidas ji was a great saint of the Bhakti movement, who gave new energy to the weak & divided India: PM Modi
February 23, 2024
Unveils new statue of Sant Ravidas
Inaugurates and lays foundation stones for development works around Sant Ravidas Janam Sthali
Lays the foundation stone for the Sant Ravidas Museum and beautification of the park
“India has a history, whenever the country is in need, some saint, sage or great personality is born in India.”
“Sant Ravidas ji was a great saint of the Bhakti movement, which gave new energy to the weak and divided India”
“Sant Ravidas ji told the society the importance of freedom and also worked to bridge the social divide”
“Ravidas ji belongs to everyone and everyone belongs to Ravidas ji.”
“Government is taking forward the teachings and ideals of Sant Ravidas ji while following the mantra of ‘Sabka Saath SabkaVikas’”
“We have to avoid the negative mentality of casteism and follow the positive teachings of Sant Ravidas ji”

जय गुरु रविदास।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, पूरे भारत से यहां पधारे सम्मानित संत जन, भक्त गण और मेरे भाइयों एवं बहनों,

आप सभी का मैं गुरु रविदास जी जन्म जयंती के पावन अवसर पर उनकी जन्मभूमि में स्वागत करता हूँ। आप सब रविदास जी की जयंती के पर्व पर इतनी-इतनी दूर से यहां आते हैं। खासकर, मेरे पंजाब से इतने भाई-बहन आते हैं कि बनारस खुद भी ‘मिनी पंजाब’ जैसा लगने लगता है। ये सब संत रविदास जी की कृपा से ही संभव होता है। मुझे भी रविदास जी बार बार अपनी जन्मभूमि पर बुलाते हैं। मुझे उनके संकल्पों को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, उनके लाखों अनुयायियों की सेवा का अवसर मिलता है। गुरु के जन्मतीर्थ पर उनके सब अनुयायियों की सेवा करना मेरे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं।

और भाइयों और बहनों,

यहां का सांसद होने के नाते, काशी का जन-प्रतिनिधि होने के नाते मेरी विशेष ज़िम्मेदारी भी बनती है। मैं बनारस में आप सबका स्वागत भी करूं, और आप सबकी सुविधाओं का खास ख्याल भी रखूं, ये मेरा दायित्व है। मुझे खुशी है कि आज इस पावन दिन मुझे अपने इन दायित्वों को पूरा करने का अवसर मिला है। आज बनारस के विकास के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होने जा रहा है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा और सुखद और सरल होगी। साथ ही, संत रविदास जी की जन्मस्थली के विकास के लिए भी कई करोड़ रुपए की योजनाओं का लोकार्पण हुआ है। मंदिर और मंदिर क्षेत्र का विकास, मंदिर तक आने वाली सड़कों का निर्माण, इंटरलॉकिंग और ड्रेनेज का काम, भक्तों के लिए सत्संग और साधना करने के लिए, प्रसाद ग्रहण करने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं का निर्माण, इन सबसे आप सब लाखों भक्तों को सुविधा होगी। माघी पूर्णिमा की यात्रा में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुख तो मिलेगा ही, उन्हें कई परेशानियों से भी छुटकारा मिलेगा। आज मुझे संत रविदास जी की नई प्रतिमा के लोकार्पण का सौभाग्य भी मिला है। संत रविदास म्यूज़ियम की आधारशिला भी आज रखी गई है। मैं आप सभी को इन विकास कार्यों की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूं। मैं देश और दुनिया भर के सभी श्रद्धालुओं को संत रविदास जी की जन्मजयंती और माघी पूर्णिमा की हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

आज महान संत और समाज सुधारक गाडगे बाबा की जयंती भी है। गाडगे बाबा ने संत रविदास की ही तरह समाज को रूढ़ियों से निकालने के लिए, दलितों वंचितों के कल्याण के लिए बहुत काम किया था। खुद बाबा साहब अंबेडकर उनके बहुत बड़े प्रशंसक थे। गाडगे बाबा भी बाबा साहब से बहुत प्रभावित रहते थे। आज इस अवसर पर मैं गाडगे बाबा के चरणों में भी श्रद्धापूवर्क नमन करता हूं।

साथियों,

अभी मंच पर आने से पहले मैं संत रविदास जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित करने, उन्हें प्रणाम करने भी गया था। इस दौरान मेरा मन जितनी श्रद्धा से भरा था, उतनी ही कृतज्ञता भी भीतर महसूस कर रहा था। वर्षों पहले भी, जब मैं न राजनीति में था, न किसी पद पर था, तब भी संत रविदास जी की शिक्षाओं से मुझे मार्गदर्शन मिलता था। मेरे मन में ये भावना होती थी कि मुझे रविदास जी की सेवा का अवसर मिले। और आज काशी ही नहीं, देश की दूसरी जगहों पर भी संत रविदास जी से जुड़े संकल्पों को पूरा किया जा रहा है। रविदास जी की शिक्षाओं को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए नए केन्द्रों की स्थापना भी हो रही है। अभी कुछ महीने पहले ही मुझे मध्यप्रदेश के सतना में भी संत रविदास स्मारक एवं कला संग्रहालय के शिलान्यास का सौभाग्य भी मिला था। काशी में तो विकास की पूरी गंगा ही बह रही है।

साथियों,

भारत का इतिहास रहा है, जब भी देश को जरूरत हुई है, कोई न कोई संत, ऋषि, महान विभूति भारत में जन्म लेते हैं। रविदास जी तो उस भक्ति आंदोलन के महान संत थे, जिसने कमजोर और विभाजित हो चुके भारत को नई ऊर्जा दी थी। रविदास जी ने समाज को आज़ादी का महत्व भी बताया था, और सामाजिक विभाजन को भी पाटने का काम किया था। ऊंच-नीच, छुआछूत, भेदभाव, इस सबके खिलाफ उन्होंने उस दौर में आवाज़ उठाई थी। संत रविदास एक ऐसे संत हैं, जिन्हें मत मजहब, पंथ, विचारधारा की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। रविदास जी सबके हैं, और सब रविदास जी के हैं। जगद्गुरु रामानन्द के शिष्य के रूप में उन्हें वैष्णव समाज भी अपना गुरु मानता है। सिख भाई-बहन उन्हें बहुत आदर की दृष्टि से देखते हैं। काशी में रहते हुए उन्होंने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की शिक्षा दी थी। इसलिए, काशी को मानने वाले लोग, मां गंगा में आस्था रखने वाले लोग भी रविदास जी से प्रेरणा लेते हैं। मुझे खुशी है कि आज हमारी सरकार रविदास जी के विचारों को ही आगे बढ़ा रही है। भाजपा सरकार सबकी है। भाजपा सरकार की योजनाएं सबके लिए हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’, ये मंत्र आज 140 करोड़ देशवासियों से जुड़ने का मंत्र बन गया है।

साथियों,

रविदास जी ने समता और समरसता की शिक्षा भी दी, और हमेशा दलितों, वंचितों की विशेष रूप से चिंता भी की। समानता वंचित समाज को प्राथमिकता देने से ही आती है। इसीलिए, जो लोग, जो वर्ग विकास की मुख्यधारा से जितना ज्यादा दूर रह गए, पिछले दस वर्षों में उन्हें ही केंद्र में रखकर काम हुआ है। पहले जिस गरीब को सबसे आखिरी समझा जाता था, सबसे छोटा कहा जाता था, आज सबसे बड़ी योजनाएं उसी के लिए बनी हैं। इन योजनाओं को आज दुनिया में सबसे बड़ी सरकारी योजनाएं कहा जा रहा है। आप देखिए, कोरोना की इतनी बड़ी मुश्किल आई। हमने 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन की योजना चलाई। कोरोना के बाद भी हमने मुफ्त राशन देना बंद नहीं किया। क्योंकि, हम चाहते हैं कि जो गरीब अपने पैरों पर खड़ा हुआ है वो लंबी दूरी तय करे। उस पर अतिरिक्त बोझ न आए। ऐसी योजना इतने बड़े पैमाने पर दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। हमने स्वच्छ भारत अभियान चलाया। देश के हर गांव में हर परिवार के लिए मुफ्त शौचालय बनाया। इसका लाभ सबसे ज्यादा दलित पिछड़े परिवारों को, खासकर हमारी SC, ST, OBC माताओं बहनों को ही हुआ। इन्हें ही सबसे ज्यादा खुले में शौच के लिए जाना पड़ता था, परेशानियां उठानी पड़ती थीं। आज देश के गांव- गांव तक साफ पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन चल रहा है। 5 वर्षों से भी कम समय में 11 करोड़ से ज्यादा घरों तक पाइप से पानी पहुंचाया गया है। करोड़ों गरीबों को मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड मिला है। उन्हें पहली बार ये हौसला मिला है कि अगर बीमारी आ भी गई, तो इलाज के अभाव में जिंदगी खत्म नहीं होगी। इसी तरह, जनधन खातों से गरीब को बैंक जाने का अधिकार मिला है। इन्हीं बैंक खातों में सरकार सीधे पैसा भेजती है। इन्हीं खातों में किसानों को किसान सम्मान निधि जाती है, जिनमें से करीब डेढ़ करोड़ लाभार्थी हमारे दलित किसान ही हैं। फसल बीमा योजना का लाभ उठाने वाले किसानों में बड़ी संख्या दलित और पिछड़े किसानों की ही है। युवाओं के लिए भी, 2014 से पहली जितनी स्कॉलर्शिप मिलती थी, आज हम उससे दोगुनी स्कॉलर्शिप दलित युवाओं को दे रहे हैं। इसी तरह, 2022-23 में पीएम आवास योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए दलित परिवारों के खातों में भेजे गए, ताकि उनका भी अपना पक्‍का घर हो।

और भाइयों बहनों,

भारत इतने बड़े-बड़े काम इसलिए कर पा रहा है क्योंकि आज दलित, वंचित, पिछड़ा और गरीब के लिए सरकार की नीयत साफ है। भारत ये काम इसलिए कर पा रहा है, क्योंकि आपका साथ और आपका विश्वास हमारे साथ है। संतों की वाणी हर युग में हमें रास्ता भी दिखाती हैं, और हमें सावधान भी करती हैं।

रविदास जी कहते थे-

जात पात के फेर महि, उरझि रहई सब लोग।

मानुष्ता कुं खात हई, रैदास जात कर रोग॥

अर्थात्, ज़्यादातर लोग जात-पांत के भेद में उलझे रहते हैं, उलझाते रहते हैं। जात-पात का यही रोग मानवता का नुकसान करता है। यानी, जात-पात के नाम पर जब कोई किसी के साथ भेदभाव करता है, तो वो मानवता का नुकसान करता है। अगर कोई जात-पात के नाम पर किसी को भड़काता है तो वो भी मानवता का नुकसान करता है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

आज देश के हर दलित को, हर पिछड़े को एक और बात ध्यान रखनी है। हमारे देश में जाति के नाम पर उकसाने और उन्हें लड़ाने में भरोसा रखने वाले इंडी गठबंधन के लोग दलित, वंचित के हित की योजनाओं का विरोध करते हैं। और सच्चाई ये है कि ये लोग जाति की भलाई के नाम पर अपने परिवार के स्वार्थ की राजनीति करते हैं। आपको याद होगा, गरीबों के लिए शौचालय बनाने की शुरुआत हुई थी तो इन लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने जनधन खातों का मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने डिजिटल इंडिया का विरोध किया था। इतना ही नहीं, परिवारवादी पार्टियों की एक और पहचान है। ये अपने परिवार से बाहर किसी भी दलित, आदिवासी को आगे बढ़ते नहीं देना चाहते हैं। दलितों, आदिवासियों का बड़े पदों पर बैठना इन्हें बर्दाश्त नहीं होता है। आपको याद होगा, जब देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के लिए महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी चुनाव लड़ रही थीं, तो किन किन लोगों ने उनका विरोध किया था? किन किन पार्टियों ने उन्हें हराने के लिए सियासी लामबंदी की थी? वे सब की सब यही परिवारवादी पार्टियां ही थीं, जिन्हें चुनाव के समय दलित, पिछड़ा, आदिवासी अपना वोट बैंक नज़र आने लगता है। हमें इन लोगों से, इस तरह की सोच से सावधान रहना है। हमें जातिवाद की नकारात्मक मानसिकता से बचकर रविदास जी की सकारात्मक शिक्षाओं का पालन करना है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

आज देश के हर दलित को, हर पिछड़े को एक और बात ध्यान रखनी है। हमारे देश में जाति के नाम पर उकसाने और उन्हें लड़ाने में भरोसा रखने वाले इंडी गठबंधन के लोग दलित, वंचित के हित की योजनाओं का विरोध करते हैं। और सच्चाई ये है कि ये लोग जाति की भलाई के नाम पर अपने परिवार के स्वार्थ की राजनीति करते हैं। आपको याद होगा, गरीबों के लिए शौचालय बनाने की शुरुआत हुई थी तो इन लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने जनधन खातों का मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने डिजिटल इंडिया का विरोध किया था। इतना ही नहीं, परिवारवादी पार्टियों की एक और पहचान है। ये अपने परिवार से बाहर किसी भी दलित, आदिवासी को आगे बढ़ते नहीं देना चाहते हैं। दलितों, आदिवासियों का बड़े पदों पर बैठना इन्हें बर्दाश्त नहीं होता है। आपको याद होगा, जब देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के लिए महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी चुनाव लड़ रही थीं, तो किन किन लोगों ने उनका विरोध किया था? किन किन पार्टियों ने उन्हें हराने के लिए सियासी लामबंदी की थी? वे सब की सब यही परिवारवादी पार्टियां ही थीं, जिन्हें चुनाव के समय दलित, पिछड़ा, आदिवासी अपना वोट बैंक नज़र आने लगता है। हमें इन लोगों से, इस तरह की सोच से सावधान रहना है। हमें जातिवाद की नकारात्मक मानसिकता से बचकर रविदास जी की सकारात्मक शिक्षाओं का पालन करना है।

साथियों,

रविदास जी कहते थे-

सौ बरस लौं जगत मंहि जीवत रहि करू काम।

रैदास करम ही धरम है करम करहु निहकाम॥

अर्थात्, सौ वर्ष का जीवन हो, तो भी पूरे जीवन हमें काम करना चाहिए। क्योंकि, कर्म ही धर्म है। हमें निष्काम भाव से काम करना चाहिए। संत रविदास जी की ये शिक्षा आज पूरे देश के लिए है। देश इस समय आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। पिछले वर्षों में अमृतकाल में विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव रखी जा चुकी है। अब अगले 5 साल हमें इस नींव पर विकास की इमारत को और ऊंचाई देनी है। गरीब वंचित की सेवा के लिए जो अभियान 10 वर्षों में चले हैं, अगले 5 वर्षों में उन्हें और भी अधिक विस्तार मिलना है। ये सब 140 करोड़ देशवासियों की भागीदारी से ही होगा। इसलिए, ये जरूरी है कि देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करे। हमें देश के बारे में सोचना है। हमें तोड़ने वाले, बांटने वाले विचारों से दूर रहकर देश की एकता को मजबूत करना है। मुझे विश्वास है कि, संत रविदास जी की कृपा से देशवासियों के सपने जरूर साकार होंगे। आप सभी को एक बार फिर संत रविदास जयंती की मैं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !