Ujjwala Yojana aims to provide cooking gas connections to five crore below-poverty-line beneficiaries: PM Modi
The aim of all workers across the world should be to unite the world: PM Modi
Union Government’s primary focus is the welfare of the poor: PM
Fruits of development must reach eastern part of India, for us to gain strength in the fight against poverty: PM
Pradhan Mantri Ujjwala Yojana will benefit the poor, especially the women: PM Modi
Schemes must be made for the welfare of the poor not keeping in mind considerations of the ballot box: PM

विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों,

भृगु बाबा की धरती पर रउवा, सभन के प्रणाम। ‘ई धरती त साक्षात भृगु जी की भूमि रहल’ ब्रह्मा जी भी यही जमीन पर उतर रहल। रामजी यहीं से विश्वामित्र मुनी के साथे गइल। त सुन्दर धरती पर सभी के हाथ जोड़ के फिर से प्रणाम।

भाइयों – बहनों मैं पहले भी बलिया आया हूं। ये बलिया की धरती क्रांतिकारी धरती है। देश को आजादी दिलाने के लिए इसी धरती के मंगल पाण्डे और वहां से लेकर के चितु पाण्डे तक एक ऐसा सिलसिला हर पीढ़ी में, हर समय देश के लिए जीने-मरने वाले लोग इस बलिया की धरती ने दिये। ऐसी धरती को मैं नमन करता हूं। यही धरती है जहां भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान चन्द्र शेखर जी का भी नाम जुड़ा हुआ है। यही धरती है, जिसका सीधा नाता बाबू जयप्रकाश नारायण के साथ जुड़ता है। और यही तो धरती है। उत्तर प्रदेश राम मनोहर लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय के बिना अधूरा लगता है। ऐसे एक से बढ़कर एक दिग्गज, जिस धरती ने दिये उस धरती को मैं नमन करता हूं। आपके प्यार के लिए सत्, सत् नमन।

आप मुझे जितना प्यार देते हैं, मुझ पर आपका कर्ज चड़ता ही जाता है, चढ़ता ही जाता है, लेकिन मेरे प्यारे भाइयों -बहनों मैं इस कर्ज को इस प्यार वाले कर्ज को ब्याज समेत चुकाने का संकल्प लेकर के काम कर रहा हूं और ब्याज समेत मैं चुकाऊंगा, विकास करके चुकाऊंगा मेरे भाइयों बहनों, विकास कर के चुकाऊंगा।

आज पहली May है, एक मई, पूरा विश्व आज श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। और आज देश का ये ‘मजदूर नम्बर एक’ देश के सभी श्रमिकों को उनके पुरुषार्थ को, उनके परिश्रम को, राष्ट्र को आगे बढ़ाने में उनके अविरथ योगदान को कोटि-कोटि अभिनन्दन करता है। उस महान परम्परा को प्रणाम करता है।

भाइयों–बहनों दुनिया में एक नारा चलता था। जिस नारे में राजनीति की बू स्वाभाविक थी। और वो नारा चल रहा था। दुनिया के मजदूर एक था, दुनिया के मजदूर एक हो जाओ, और वर्ग संघर्ष के लिए मजदूरों को एक करने के आह्वान हुआ करते थे। भाइयों–बहनों जो लोग इस विचार को लेकर के चले थे, आज दुनिया के राजनीतिक नक्शे पर धीरे-धीरे करके वो अपनी जगह खोते चले जा रहे हैं। 21वीं सदी में दुनिया के मजदूर एक हो जाओ इतनी बात से चलने वाला नहीं है। 21वीं सदी की आवश्यकताएं अलग हैं, 21वीं सदी की स्थितियां अलग है और इसलिये 21वीं सदी का मंत्र एक ही हो सकता है ‘विश्व के मजदूरों विश्व के श्रमिकों आओ हम दुनिया को एक करें दुनिया को जोड़ दें’ ये नारा 21वीं सदी का होना चाहिए।

वो एक वक्त था ‘Labourers of the World, Unite’, आज वक्त है ‘Labourers, Unite the World’ ये बदलाव इस मंत्र के साथ। आज दुनिया को जोड़ने की जरूरत है। और दुनिया को जोड़ने के लिए अगर सबसे बड़ा कोई chemical है, सबसे बड़ा ऊर्जावान कोई cementing force है, तो वो मजदूर का पसीना है। उस पसीने में एक ऐसी ताकत है, जो दुनिया को जोड़ सकता है।

भाइयों–बहनों जब आप लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत से विजयी बनाया। तीस साल के बाद दिल्ली में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। और NDA के सभी घटकों ने मुझे अपने नेता के रूप में चुना, तो उस दिन Parliament के Central Hall में मेरे प्रथम भाषण में मैंने कहा था कि मेरी सरकार गरीबों को समर्पित है। ये सरकार जो भी करेगी वो गरीबों की भलाई के लिये करेगी, गरीबों के कल्याण के लिये करेगी। भाइयों-बहनों हमने मजदूरों के लिए भी श्रम कानूनों में, श्रमिकों की सरकार के साथ संबंधों में, एक आमूलचूल परिवर्तन लाया है। अनेक बदलाव लाए हैं। मेरे प्यारे भाइयों-बहनों आपको जानकर के दुःख होगा, पीड़ा होगी, आश्चर्य भी होगा कि हमारे देश में सरकार से जिनको पैंशन मिलता था, इस देश में तीस लाख से ज्यादा श्रमिक ऐसे थे, जिसको पैंशन किसी को 15 रुपया महीने का, किसी को 100 रुपया, किसी को 50 रुपया इतना पैंशन मिलता था। आप मुझे बताइए कि पैंशन लेने के लिए वो गरीब वृद्ध व्यक्ति दफ्तर जाएगा, तो उसका बस का किराय का खर्चा हो जाएगा, ऑटो रिक्शा का खर्चा हो जाएगा। लेकिन सालों से मेरे देश के बनाने वाले श्रमिकों को 15 रुपया, 20 रुपया, 50 रुपया, 100 रुपया पैंशन मिलता था। हमने आकर के इन तीस लाख से ज्यादा मेरे श्रमिकों परिवारों को minimum 1000 रुपया पैंशन देने का निर्णय कर लिया, लागू कर दिया और उस गरीब परिवार को वो पैंशन मिलने लग गया।

भाइयों-बहनों हमारे यहां कभी कभार गरीबों के लिये योजनाओं की चर्चाएं बहुत होती हैं और उनकी भलाई के लिए काम करने की बातें भी बहुत होती हैं। हमने आने के बाद एक श्रम सुविधा पोर्टल चालू किया, जिसके तहत आठ महत्वपूर्ण श्रम कानूनों को एकत्र कर के उसका सरलीकरण करने का काम कर लिया। पहली बार देश के श्रमिकों को एक Labour Identity Number (LIN) ये नम्बर दिया गया, ताकि हमारे श्रमिक की पहचान बन जाए। इतना ही नहीं हमारे देश के श्रमिकों को पूरे देश में Opportunity प्राप्त हो। इसलिए NCSP इसकी हमने एक National Career Service Portal, इसकी शुरुआत की। ताकि जिसको रोजगार देना है और जिसको रोजगार लेना है दोनों के बीच एक सरलता से तालमेल हो सके।

भाइयों-बहनों बोनस का कानून हमारे देश में सालों से है। बोनस का कानून यह था कि 10 हजार रुपये से अगर कम आवक है और कंपनी बोनस देना चाहती है तो उसी को मिलेगा। आज के जमाने में 10 हजार रुपये की आय कुछ नहीं होती है। और उसके कारण अधिकतम श्रमिकों को बोनस नहीं मिलता था। हमने आकर के निर्णय किया कि minimum income 10 हजार से बढ़ाकर के 21 हजार रुपया कर दी जाए। इतना ही नहीं पहले बोनस सिर्फ साढ़े तीन हजार रुपया मिलता था। हमने निर्णय किया कि ये बोनस minimum सात हजार रुपया मिलेगा और उससे भी ज्यादा उसका पाने का हक़ बनता है तो वो भी उसको मिलेगा।

भाइयों-बहनों कभी हमारा श्रमिक एक जगह से दूसरी जगह पर नौकरी चला जाता था, तो उसके जो पीएफ वगैरह के पैसे कटते थे उसका कोई हिसाब ही नहीं रहता था। वो गरीब मजदूर बेचारा पुरानी जगह पर लेने के लिए वापस नहीं जाता था। सरकार के खजाने में करीब 27 हजार करोड़ रुपया इन मेरे गरीबों के पड़े हुए थे। कोई सरकार उसकी सूंघ लेने को तैयार नहीं था। हमने आकर के सभी मजदूरों को ऐसे कानून में बांध दिया कि मजदूर जहां जाएगा उसके साथ उसके ये Provident Fund के पैसे भी साथ-साथ चले जाएंगे। और उसको जब जरूरत पड़ेगी वो पैसे ले सकता है। आज वो 27 हजार करोड़ रुपयों का मालिक बन सकेगा। ऐसी व्यवस्था हमने की है।

भाइयों-बहनों हमारे यहां Construction के काम में बहुत बड़ी मात्रा में मजदूर होते हैं। करीब चार करोड़ से ज्यादा मजदूर Construction के काम में हैं, इमारत बनाते हैं, मकान बनाते हैं, लेकिन उनके देखभाल की व्यवस्था नहीं थी। श्रमिक कानूनों में परिवर्तन करके आज हमने इन Construction के श्रमिकों के लिए उनके आरोग्य के लिए, उनके insurance के लिए, उनके bank account के लिए, इनके पैंशन के लिए एक व्यापक योजना बना कर के हमारे Construction के मजदूरों को भी हमनें उसका फायदा दिया है।

भाइयों–बहनों हमारा उत्तर प्रदेश जिसने अनेक-अनेक प्रधानमंत्री दिये, लेकिन क्या कारण कि हमारी गरीबी बढ़ती ही गई बढ़ती ही गई। गरीबों की संख्या भी बढ़ती गई। हमारी नीतियों में ऐसी क्या कमी थी कि हम गरीबों को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिये तैयार नहीं कर पाए। ऐसा क्या कारण था कि हमने गरीबों को सिर्फ गरीबी के बीच जीना नहीं, लेकिन हमेशा सरकारों के पास हाथ फैलाने के लिए मजबूर कर के छोड़ दिया, उसके जमीर को हमने खत्म कर दिया। गरीबी के खिलाफ लड़ने का उसका हौसला हमने तबाह कर दिया। भाइयों–बहनों अभी धर्मेन्द्र जी बता रहे थे के गाजीपुर के सांसद नेहरू के जमाने में पूरे हिन्दुस्तान को हिला दिया था। जब उन्होंने संसद में कहा कि मेरे पूर्वी उत्तर प्रदेश के भाई-बहन ऐसी गरीबी में जी रहे हैं के उनके पास खाने के लिए अन्न नहीं होता है। पशु के गोबर को धोते हैं और उस गोबर में से जो दाने निकलते हैं उन दानों से पेट भर के वे अपना गुजारा करते हैं। जब ये बात संसद में कही गई थी, पूरा हिन्दुस्तान हिल गया था और तब एक पटेल कमीशन बैठा था। यहां की स्थिति सुधारने के लिए। कई बातों का सुझाव आज से पचास साल पहले दिया गया था। लेकिन उन सुझाव पर क्या हुआ, वो तो भगवान जाने। लेकिन भाइयों–बहनों उसमें एक सुझाव था। उसमें एक सुझाव था ताड़ी घाट, गाजीपुर, और मऊ इसे रेल से जोड़ा जाए। पचास साल बीत गए, वो बात कागज पर ही रही। मैं भाई मनोज सिन्हा को हृदय से अभिनन्दन करता हूं, यहां के मेरे भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों का अभिनन्दन करता हूं कि वे पचास साल पहले जिन बातों को भुला दिया गया था उसको लेकर के निकल पड़े, मुझ पर दबाव डालते रहे। बार-बार मिलते रहे, और आज मैं संतोष से कह सकता हूं उस रेल लाइन के लिए बजट आवंटन करने का निर्णय हमने कर लिया और उस काम को हम आगे बढ़ाएंगे। गंगा के ऊपर रेल और रोड का दोनों bridge बनेंगे। ताकि infrastructure होता है, जो विकास के लिए एक नया रास्ता भी खोलता है और उस दिशा में हम का कर रहे हैं।

भाइयों-बहनों आज मैं बलिया की धरती पर से मेरे देश के उन एक करोड़ परिवारों को सर झुका कर के नमन करना चाहता हूं, उनका अभिनन्दन करना चाहता हूं। करीब एक करोड़ दस लाख से भी ज्यादा ऐसे परिवार हैं, जिनको मैंने कहा था कि अगर आप खर्च कर सकते हो तो रसोई गैस की सब्सिडी क्यों लेते हो। क्या आप पांच-दस हजार रुपया का बोझ नहीं उठा सकते साल का। क्या आप सब्सिडी Voluntarily छोड़ नहीं सकते। मैंने ऐसे ही एक कार्यक्रम में बोल दिया था। मैंने ज्यादा सोचा भी नहीं था, न योजना बनाई थी, न follow-up करने की व्यवस्था की थी, यूहीं दिल से एक आवाज उठी और मैंने बोल दिया। आज एक साल के भीतर-भीतर मेरे देश के लोग कितने महान हैं। अगर कोई अच्छा काम हो तो सरकार से भी दो कदम आगे जाकर के चलने के लिए तैयार रहते हैं। इसका ये उदहारण है । आज के युग में, हम बस में जाते हों, बगल वाली सीट खाली हो और हमें लगे की चलो बगल में कोई पैसेंजर नहीं है तो जरा ठीक से बैठूंगा। आराम से प्रवास करूंगा। लेकिन अगर कोई पैसेंजर आ गया, बगल में बैठ गया, हम तो हमारी सीट पर बैठे हैं, तो भी थोड़ा मुंह बिगड़ जाता है। मन में होता है ये कहां से आ गया। जैसे मेरी सीट ले ली हो। ऐसा जमाना है। ऐसे समय एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवार सिर्फ बातों–बातों में कहने पर प्रधानमंत्री की बात को गले लगा कर के सर आंखों पर चढ़ा के एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवार अपनी सब्सिडी छोड़ दें। इससे बड़ा क्या होगा। मैं आप सब से कहता हूं उन एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवारों के लिये जोर से तारियां बजाइए। उनका सम्मान कीजिए। उनका गौरव कीजिए। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं मेरे भाइयों – बहनों। ये देश के लिए किया हुआ काम है। ये गरीबों के लिये किया हुआ काम है। इन लोगों का जितना गौरव करें उतना कम है। और हमारे देश में लेने वाले से ज्यादा देने वाले की इज्जत होती है। ये देने वाले लोग हैं। जहां भी बैठे होंगे ये तालियों की गूंज उन तक सुनाई देती होगी और वो गौरव महसूस करते होंगे।

भाइयों – बहनों हमने कहा था गरीबों के लिए जो सब्सिडी छोड़ेगा वो पैसे सरकार की तिजोरी में नहीं जाएगी। वो पैसे गरीबों के घर में जाएंगे। एक साल में ये इतिहासिक रिकॉर्ड है भाइयों 1955 से, रसोई गैस देने का काम चल रहा है। इतने सालों में 13 करोड़ परिवारों को रसोई गैस मिला। सिर्फ 13 करोड़ परिवारों को करीब साठ साल में, मेरे भाइयों–बहनों हमने एक साल में तीन करोड़ से ज्यादा परिवारों को रसोई का गैस दे दिया। जिन लोगों ने सब्सिडी छोड़ी थी वो गैस सिलंडर गरीब के घर में पहुंच गया।

भाइयों-बहनों हम जानते हैं कि लोग कहते हैं कि मोदी जी बलिया में कार्यक्रम क्यों किया। हमारा देश का एक दुर्भाग्य है, कुछ लोग राजनीति में नहीं हैं, लेकिन उनको 24ओं घंटे राजनीति के सिवा कुछ दिखता ही नहीं है। किसी ने लिख दिया कि बलिया में मोदी जो आज कार्यक्रम कर रहे हैं वो चुनाव का बिगुल बजा रहे हैं। वे चुनाव का बिगुल बजा रहे हैं। अरे मेरे मेहरबानों हम कोई चुनाव का बिगुल बजाने नहीं आए हैं। ये बिगुल तो मतदाता बजाते हैं। हम बिगुल बजाने नहीं आए हैं।

भाइयों –बहनों अभी मैं पिछले हफ्ते झारखंड में एक योजना लागू करने के लिए गया था, झारखंड में कोई चुनाव नहीं है। मैं कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश में एक योजना लागू करने गया था, वहां पर कोई चुनाव नहीं है। मैंने ‘बेटी बचाओ’ अभियान हरियाणा से चालू किया था, वहां कोई चुनाव नहीं है। ये बलिया में ये रसोई गैस का कार्यक्रम इसलिए तय किया कि उत्तर प्रदेश में जो एवरेज हर जिले में जो रसोई गैस है, बलिया में कम से कम है, इसलिये मैं बलिया आया हूं। ये ऐसा इलाका है, जहां अभी भी गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले 100 में से मुश्किल से आठ परिवारों के घर में रसोई गैस जाता है। और इसलिये भाइयों –बहनों बलिया जहां कम से कम परिवारों में रसोई गैस जाता है, इसलिए मैंने आज बलिया में आकर के देश के सामने इतनी बड़ी योजना लागू करने का निर्णय किया। मैंने हरियाणा में बेटी बचाओ इसलिये कार्यक्रम लिया था, क्योंकि हरियाणा में बालकों की संख्या की तुलना में बेटियों की संख्या बहुत कम थी। बड़ी चिंताजनक स्थिति थी। और इसलिए मैंने वहां जाकर के खड़ा हो गया और उस काम के लिए प्रेरित किया और आज हरियाणा ने बेटी बाचाने के काम में हिन्दुस्तान में नम्बर एक लाकर के खड़ा कर दिया। और इसलिए भाइयों–बहनों मैं इस पूर्वी उत्तर प्रदेश में बलिया में इसलिये आया हूं, क्योंकि हमें गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। अगर पूर्वी हिन्दुस्तान पश्चिमी हिन्दुस्तान की बराबरी भी कर ले तो इस देश में गरीबी का नामोनिशान नहीं रहेगा, मेरा मानना है। मेरा पूर्वी उत्तर प्रदेश, मेरा बिहार, मेरा पश्चिम बंगाल, मेरा असम, मेरा नॉर्थ ईस्ट, मेरा ओड़िशा, ये ऐसे प्रदेश हैं कि अगर वहां विकास गरीबों के लिए पहुंच जाए, तो गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में हम सफल हो जाएंगे भाइयों।

आप मुझे बताइए एक जमाना था, बहुत लोगों को ये रसोई गैस की ताकत क्या है अभी भी समझ नहीं आती। बहुत लोगों को ये रसोई गैस की राजनीति क्या थी ये भी भूल चुके हैं, बहुत लोग ये रसोई गैस कितना मूल्यवान माना जाता था वो भूल गए हैं। मैं आज जरा याद दिलाना चाहता हूं। मैं political पंडितों को याद दिलाना चाहता हूं। दिल्ली में बैठकर के air-conditioned कमरे में बढ़िया-बढ़िया सलाह देने वालों को मैं आज झकझोड़ना चाहता हूं। उनको मैं हिलाना चाहता हूं, मैं उनको समझाना चाहता हूं। वो दिन याद करो, वो दिन याद करो, जब सांसद Parliament का Member बनता था, तो उसको हर साल रसोई गैस की 25 कूपन दी जाती थी और वो अपने इलाके में 25 परिवारों को साल में रसोई गैस दिलवाता था। और वो इतना गर्व करता था कि मैंने मेरे इलाके में 25 परिवारों को एक साल में रसोई गैस का connection दिलवा दिया। ये बहुत दूर की बात नहीं कर रहा हूं। मैं अभी-अभी पिछले सालों की बात करता हूं। और अखबारों में खबरें आती थीं कि सांसद महोदय ने कालेबाजारी में रसोई गैस का टिकट बेच दिया। ऐसे भी लोग थे कि रसोई गैस का connection लेने के लिए दस-दस, 15-15 हजार रुपया वो टिकट खरीदने के लिए black में खर्च करते थे। वो दिन थे और आज ये सरकार देखिए। एक-एक सांसद के क्षेत्र में हिन्दुस्तान के एक-एक Parliament Member के क्षेत्र में किसी के यहां साल में दस हजार गैल सिलंडर पहुंच जाएंगे, किसी के यहां बीस हजार, किसी के यहां पचास हजार और तीन साल के भीतर –भीतर पांच करोड़ गरीब परिवारों में ये रसोई गैस पहुंचाने का मेरा इरादा है। पांच करोड़ परिवारों में, भाइयों–बहनों ये पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस पहुंचाना ये छोटा काम नहीं है। इतना बड़ा काम, इतना बड़ा काम आज मैं गरीब माताओं बहनों के लिए लेकर आया हूं। आपने देखा होगा, मैं इन माताओं को पूछ रहा था कि आपने कभी सोचा था कि आपके घर में कभी रसोई गैस आएगा, उन्होंने कहा नहीं हमने तो सोचा नहीं था कि हमारे बच्चों के नसीब में भी रसोई गैस आएगा, ये हमने सोचा नहीं था। मैंने पूछा रसोई में कितना टाइम जाता है वो कहते लकड़ी लेने जाना पड़ता है, लकड़ी जलाते हैं , बुझ जाती है, कभी आधी रोटी रह जाती है फिर लकड़ी लेने जाते हैं, बड़ी अपनी मुसीबत बता रही थी। भाइयों –बहनों ये रसोई गैस के कारण पांच करोड़ परिवार 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी। 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी तब गांव और गरीब के लिए पांच करोड़ गैस रसोई गैस पहुंच चुके होंगे भाइयों, समय सीमा में काम करने का हमने फैसला किया है।

एक गरीब मां जब लकड़ी के चूल्हे से खाना पकाती है, तो वैज्ञानिकों का कहना है कि गरीब मां लकड़ी के चूल्हे से खाना पकाती है, तो एक दिवस में उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुआं चला जाता है, 400 सिगरेट का। बच्चे घर में होते हैं। और इसलिए उनको भी धुएं में ही गुजारा करना पड़ता है। खाना भी खाते हैं, तो धुआं ही धुआं होता है। आंख से पानी निकलता है और वो खाना खाता है। मैंने तो ये सारे हाल, बचपन में मैं जी चुका हूं। मैं जिस घर में पैदा हुआ, बहुत ही छोटा एक गलियारी जैसा मेरा घर था। कोई खिड़की नहीं थी। आने जाने का सिर्फ एक दरवाजा था। और मां लकड़ी का चूल्हा जला कर के खाना पकाती थी। कभी-कभी तो धुआं इतना होता था कि मां खाना परोस रही हो लेकिन हम मां को देख नहीं पाते थे। ऐसे बचपन में धुएं में खाना खाते थे। और इसलिए मैं उन माताओं की पीड़ा को, उन बच्चों की पीड़ा को, भलीभांति अनुभव कर के आया हूं उस पीड़ा को जी कर के आया हूं और इसलिये मुझे मेरी इन गरीब माताओं को इस कष्टदायक जिन्दगी से मुक्ति दिलानी है। और इसलिए पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस देने का हमने उपक्रम किया है।

भाइयों – बहनों आज लकड़ी के कारण जो खर्चा होता है । इस रसोई गैस से खर्चा भी कम होने वाला है। आज उसकी तबियत की बर्बादी होती है। उसकी तबियत भी ठीक रहेगी। लकड़ी लाना चूल्हा जलाना में time जाता है। उस गरीब मां का time भी बच जाएगा। उसको अगर मजदूरी करनी है सब्जी बेचनी है, तो वो आराम से कर सकती है।

भाइयों –बहनों हमारी कोशिश ये है और इतना ही नहीं ये जो गैस की सब्सिडी दी जाएगी वो भी उन महिलाओं के नाम दी जाएगी, उनका जो प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट है, उसी में सब्सिडी जमा होगी ताकि वो पैसे किसी ओर के हाथ न लग जाए, उस मां के हाथ में ही पैसे लग जाए ये भी व्यवस्था की। ये environment के लिये भी हमारा एक बहुत बड़ा initiative है। और इसलिए मेरे भाइयों- बहनों हजारों करोड़ रुपया का खर्चा सरकार को लगने वाला है। कहां MP की 25 रसोई गैस की टिकट और कहां पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस पहुंचाने का अभियान, ये फर्क होता है सरकार-सरकार में। काम करने वाली सरकार, गरीबों की भला करने वाली सरकार, गरीबों के लिए सामने जाकर के काम करने वाली सरकार कैसे काम करती है इसका ये उत्तम उदहारण आज ये पांच करोड़ परिवारों को रसोई गैस देने का कार्यक्रम है।

भाइयों–बहनों आज, पिछली किसी भी सरकार ने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए जितना काम नहीं किया होगा, इतनी धनराशि आज भारत सरकार उत्तर प्रदेश में लगा रही है। क्योंकि हम चाहते हैं कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हमारे जो गरीब राज्य हैं वो तेजी से तरक्की करें। और इसलिये हम काम में लगे हैं। गंगा सफाई का अभियान जनता की भागीदारी से सफल होगा। और इसलिये जन भागीदारी के साथ जन-जन संकल्प करें। ये मेरा बलिया तो मां गंगे और सरयू के तट पर है। दोनों की कृपा आप पर बरसी हुई है और हम सब अभी जहां बैठे हैं वो जगह भी एक बार मां गंगा की गोद ही तो है। और इसलिये जब मां गंगा की गोद में बैठ कर के मां गंगा की सफाई का संकल्प हर नागरिक को करना होगा। हम तय करें मैं कभी भी गंगा को गंदी नहीं करूंगा। मेरे से कभी गंगा में कोई गंदगी नहीं जाएगी। एक बार हम तय कर लें कि मैं गंगा को गंदी नहीं करूंगा। ये मेरी मां है। उस मां को गंदा करने का पाप मैं नहीं कर सकता। ये अगर हमने कर लिया, तो दुनिया की कोई ताकत ये मां गंगा को गंदा नहीं कर सकता है।

और इसलिए मेरे भाइयों–बहनों हम गरीब व्यक्ति की जिंदगी बदलना चाहते हैं। उसके जीवन में बदलाव लाने के लिये काम कर रहे हैं। और आज पहली मई जब मजदूरों का दिवस है। गरीबी में जीने वाला व्यक्ति मजदूरी से जूझता रहता है। भाइयों–बहनों गरीबी हटाने के लिए नारे तो बहुत दिये गए, वादे बहुत बताए गए, योजनाएं ढेर सारी आईं लेकिन हर योजना गरीब के घर को ध्यान में रख कर के नहीं बनी, हर योजना मत पेटी को ध्यान में रख कर के बनी। जब तक मत पेटियों को ध्यान में रख कर के गरीबों के लिए योजनाएं बनेगी, कभी भी गरीबी जाने वाली नहीं है। गरीबी तब जाएगी, जब गरीब को गरीबी से लड़ने की ताकत मिलेगी। गरीबी तब जाएगी, जब गरीब फैसला कर लेगा कि अब मेरे हाथ में साधन है मैं गरीबी को प्रास्त कर के रहूंगा। अब मैं गरीब नहीं रहूंगा, अब मैं गरीबी से बाहर आऊंगा। और इसके लिए उसको शिक्षा मिले, रोजगार मिले, रहने को घर मिले, घर में शौचालय हो, पीने का पानी हो, बिजली हो, ये अगर हम करेंगे, तभी गरीबी से लड़ाई लड़ने के लिए मेरा गरीब ताकतवर हो जाएगा। और इसीलिये मेरे भाइयों-बहनों हम गरीबी के खिलाफ लड़ाइ लड़ने के लिए काम कर रहे हैं।

आजादी के इतने साल हो गये। आजादी के इतने सालों के बाद इस देश में 18 हजार गांव ऐसे जहां बिजली का खंभा भी नहीं पहुंचा है, बिजली का तार नहीं पहुंचा है। 18वीं शताब्दि में जैसी जिन्दगी वो गुजारते थे। 21वीं सदी में भी 18 हजार गांव ऐसी ही जिन्दगी जीने के लिए मजबूर हैं। मुझे बताओ मेरे प्यारे भाइयों–बहनों क्या किया किया इन गरीबी के नाम पर राजनीति करने वालों ने । उन 18 हजार गांव को बिजली क्यों नहीं पहुंचाई। मैंने बीड़ा उठाया है। लालकिले से 15 अगस्त को मैंने घोषणा की मैं एक हजार दिन में 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचा दूंगा। रोज का हिसाब देता हूं, देशवासियों को और आज हमारे उत्तर प्रदेश में आर हैरान होंगे इतने प्रधानमंत्री हो गये उत्तर प्रदेश में । आज उत्तर प्रदेश मेरा कार्य क्षेत्र है। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे स्वीकार किया है। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे आशिर्वाद दिये हैं। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना बनाया है। और इसलिये उत्तर प्रदेश में इतने प्रधानमंत्री आए भाइयों–बहनों बैठा 1529 गांव ऐसे थे, जहां बिजली का खंभा नहीं पहुंचा था। अभी तो ढाई सौ दिन हुए हैं। मेरी योजना को ढाई सौ दिन हुए हैं। भाइयों–बहनों मैंने अब तक मैंने 1326 गांवों में, 1529 में से 1326 गांवों खंभा पहुंच गया, तार पहुंच गया, तार लग गया, बिजली चालू हो गई और लोगों ने बिजली का स्वागत भी कर दिया। और जिन गांवों में बाकी है। वहां भी तेजी से काम चल रहा है। आज औसत उत्तर प्रदेश में हम एक दिन में तीन गांवों में बिजली पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जो काम साठ साल तक नहीं हुआ वो हम एक दिन में तीन गांवों तक पहुंचने का काम कर रहे हैं।

भाइयों–बहनों पूरे देश में आज जो ‘प्रधानमंत्री उज्जवला योजना’ इसका आरम्भ हो रहा है। मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी देश में करीब 25 कोरड़ परिवार है, उसमे से ये पांच करोड़ परिवारों के लिए योजना है। इससे बड़ी कोई योजना नहीं हो सकती। कभी एक योजना पांच करोड़ परिवारों को छूती हो, ऐसी एक योजना नहीं हो सकती। ऐसी योजना आज लागू हो रही है, बलिया की धरती पर हो रही है। राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, उनके आशिर्वाद से हो रही है, चन्द्र शेखर जी, बाबु जयप्रकाश जी ऐसे महापुरषों के आशीर्वाद से प्रारंभ हो रही है। और बलिया की धरती...अब बलिया- ‘बलिया’ बनना चाहिए, इस संकल्प को लेकर के आगे बढ़ना है। मैं फिर एक बार हमारे सासंद महोदय भाई भरत का बड़ा आभार व्यक्त करता हूँ, इतने उमंग के साथ इस कार्यक्रम की उन्होंने अर्जना की। मैं पूरे उत्तर प्रदेश का अभिनन्दन करता हूं। मैं श्रीमान धर्मेन्द्र प्रधान उसकी पूरी टीम का अभिनन्दन करता हूं। ये Petroleum sector कभी गरीबों के लिये माना नहीं गया था, हमने Petroleum sector को गरीबों का बना दिया। ये बहुत बड़ा बदलाव धर्मेन्द्र जी के नेतृत्व में आया है। मैं उनको बहुत–बहुत बधाई देता हूं। मेरी पूरी टीम को बधाई देता हूं। आप सबका बहुत – बहुत अभिनन्दन करता हूं। बहुत- बहुत धन्यवाद।

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The aspirations, skills and potential of our youth shape the path to a Viksit Bharat: PM Modi at VBRY programme
June 19, 2026
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana is about empowering first-time employees and building a bridge between youth and industry: PM
The aspirations, skills and potential of our youth shape the path to a Viksit Bharat: PM
India's youth will be at the forefront of driving global growth, innovation and entrepreneurship in the years to come: PM
India is set to lead from the front: PM
In the 21st century, opportunities will belong to nations that nurture skilled talent, foster innovation and uphold the highest standards of quality: PM
To compete globally, we must meet the highest quality standards: PM

मंत्रिमंडल के मेरे साथी श्री मनसुख मांडविया जी, बहन शोभा जी, देश के विभिन्न हिस्सों के अलग-अलग कार्यक्रमों में जुड़े, टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए सभी महानुभाव, और जैसा अभी मंच संचालक बता रहे थे कि, 200 स्थान पर करीब दो लाख लोग अभी इस कार्यक्रम में हमारे साथ जुड़े हुए हैं, मैं उन सबका भी दूर से ही सही, लेकिन दिल से आप सबको मेरी शुभकामनाएं देता हूं। उद्योग जगत से भी जुड़े हुए बहुत सारे महानुभाव मैं आज देख रहा हूं यहां पर, और युवा साथियों का उत्साह तो ध्यान में आता ही आता है, इतनी बड़ी तादाद में।

आज यहां इस कार्यक्रम से जुड़े युवा साथियों में मुझे भारत के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर दिखाई दे रही है। मैं अब से कुछ ही घंटे पहले ही फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा से लौटा हूं। जी-7 में विकसित देशों के दिग्गज नेताओं से मिला हूं। दुनिया आज, भारत की युवा शक्ति की चर्चा कर रही है। भारत की टैलेंट, स्किल और पोटेंशियल की चर्चा सब जगह हो रही है। दुनिया भारत के युवाओं की क्षमता को भलीभाँति पहचानने लगी है। और ऐेसे समय में, हमारी कोशिश है कि भारत का हर युवा अपनी क्षमता को अवसर में बदल सके, और इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का आरंभ हुआ। यह रोजगार योजना सामान्य तौर पर सोचे जानी वाली रोजगार योजना से बहुत आगे बढ़कर, पहली नौकरी पाने वाली युवा के सपनों को शक्ति देने वाली योजना है। ये युवा और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतू बनाने वाली योजना है।

साथियों,

आमतौर पर योजनाएं या तो कर्मचारी के लिए बनती हैं या तो फिर उद्योगों के लिए बनती हैं, लेकिन ये एक योजना ऐसी है, इस योजना में भारत के सामर्थ्यवान मेरे युवा, समृद्ध युवा, भविष्य की ओर और उद्योग विकास की ओर, और इन दोनों को साथ लेकर चलती है। जो युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, सरकार उसके साथ खड़ी होती है, और इसलिए उद्योगकार को भी लगता है कि अकेला मेरा नहीं आया है, इसके पीछे पूरी सरकार आई है। और इसके कारण ऐसे युवकों की तरफ देखने का उस उद्योगकार का भी नजरिया बदल जाता है। और जो संस्थान नए रोजगार का सृजन करता है, सरकार उनका भी उत्साह बढ़ाती है। हमारे यहां पहले कुछ नियम व्यवस्था ऐसी थी कि लोगों को बड़े होने में थोड़ा डर लगता था, कि यार बड़ा हो जाऊंगा, तो मैं ये-ये बंधनों में फंस जाऊंगा, तो उसको लगता था छोटा ही रहना अच्छा है। और कभी बड़े होने की संभावना हो, उसको लगता नहीं ऐसा करो एक दूसरा छोटा और कर दो। आज वो सोच बदली है। हर किसी को बड़ा बनने का हौसला मिलना चाहिए, उसकी उम्मीदों को पंख मिलने चाहिए, और ये उद्योग को भी जरूरत होती है। और इस योजना से वो द्वार भी खुला है, और यही इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है। अभी कुछ देर पहले, मैं कुछ लाभार्थी नौजवानों के साथ बैठा था, उनके अनुभव मैं सुन रहा था, उसमें कुछ लोग वो थे जिनको पहली बार नौकरी मिली है और कुछ लोग वो थे, जिन्होंने इस योजना के तहत अपने यहां कुछ लोगों को काम दिया है। मैं वाकई कहता हूं, इतना कान्फिडेंस था उन बच्चों में, और ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने दुनिया जीत ली है। उनके सपने, उनका विश्वास, ये सचमुच में हमारी बहुत बड़ी पूंजी है।

साथियों,

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के सहयोग से अब तक करीब 70 लाख जॉब सृजित हुई हैं। करीब 70 लाख, first time employees को। Social Security का कवच भी मिला है। करीब 20 लाख युवा अपनी पहली नौकरी के छह महीने पूरे भी कर चुके हैं। और आज इन्हीं में से करीब 10 लाख युवा साथियों को अपनी पहली नौकरी में छह महीना पूरा करने पर, इस योजना के तहत उसके लाभार्थी होने के नाते इंसेंटिव भी मिल चुका है। दो हजार करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची है। ये राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं है, ये उनके परिश्रम का सम्मान है। ये उनके उज्ज्वल भविष्य पर देश के विश्वास की अभिव्यक्ति है।

साथियों,

मुझे उतनी ही खुशी उन संस्थानों के लिए भी है, जिन्होंने हमारे इन नौजवानों को अवसर दिए हैं, उनके अंदर छिपे हुए सामर्थ्य को पहचाना, और इसलिए ये अवसर देने वाले भी उतने ही अभिनंदन के अधिकारी हैं। इन्हीं संस्थानों ने बीते महीनों में लाखों नौकरियों का सृजन किया है। और अभी मनसुख भाई जो आंकड़े बताते थे, मैं आशा करता हूं कि मीडिया के लोग इन आंकड़ों पर ध्यान करेंगे, देश के लोगों में खुशी की लहर छा जाएगी कि इतना बड़ा काम हो रहा है, ये आंकड़े और अनुभव यही बताता है कि जब सरकार, युवा और उद्योग एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो रोजगार निर्माण की गति कई गुना बढ़ जाती है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना इसी नए भारत की पहचान है। एक ऐसा भारत, जहां युवा को अवसर मिले। उद्योग को प्रोत्साहन मिले। और रोजगार निर्माण एक राष्ट्रीय अभियान बन जाए।

साथियों,

भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। इसलिए विकसित भारत का रास्ता भी, युवाओं के सपनों, उनके कौशल और उनके सामर्थ्य से होकर ही आगे जाता है। हमारा प्रयास है कि देश का हर युवा अपनी क्षमता के अनुसार जितना आगे बढ़ सकता है बढ़े। जिसके पास हुनर है, उसे अवसर मिले। जिसके पास आइडिया है, उसे इनोवेशन के लिए मंच मिले। और जो अपने दम पर कुछ करना चाहता है, उसे पूरा सहयोग मिले। मेरा स्पष्ट मानना है, भारत जैसे युवा देश में अवसरों के स्रोत जितने अधिक होंगे, युवाओं के सपनों को उतनी ही अधिक उड़ान मिलेगी। इसी सोच के साथ बीते 12 वर्षों में रोजगार के हर रास्ते को मजबूत किया गया है। Infrastructure से लेकर Innovation तक, Manufacturing से लेकर Digital Economy तक, स्पेस से लेकर Start-ups तक, हर क्षेत्र में नए अवसर तैयार किए गए हैं। मेक इन इंडिया अभियान, वोकल फॉर लोकल, लोकल को ग्लोबल ले जाने का अभियान, मिशन मैन्यूफैक्चरिंग, ये सभी योजनाएं देश में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बना रही हैं। आज गाड़ियों से लेकर मेट्रो कोच, ट्रेन के डिब्बे और डिफेंस के साजो सामान तक, अनेक सेक्टर में निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है, एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। ये तभी हो पा रहा है, क्योंकि भारत में मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ रहा है, फैक्ट्रियां बढ़ रही हैं। और इनमें काम करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।

साथियों,

बीते 12 वर्ष में भारत सरकार की जो नीतियां रही हैं, जो निर्णय लिए गए हैं, उन्होंने देश में निरंतर रोजगार के नए सेक्टर्स बनाए हैं। आज इंफ्रास्ट्रक्चर पर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, लाखों युवाओं का आधार बन रहा है। मुद्रा योजना के तहत 33 लाख करोड़ रूपये से अधिक की सहायता ने करोड़ों-करोड़ युवाओं को अपना काम शुरू करने का अवसर दिया है। 10 करोड़ से अधिक महिलाएं Self Help Groups से जुड़ी हैं और 3 करोड़ से अधिक लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी पहलों ने छोटे उद्यमियों, रेहड़ी-पटरी वालों और पारंपरिक कारीगरों को नई टेक्नोलॉजी दी है, नई आर्थिक सहायता दी है और नई ताकत से भर दिया है। मैं अभी जिन नौजवानों से बात कर रहा था, उसमें एक नौजवान आईटीआई से निकलकर के ड्रोन बनाने में लगे हैं तो बड़े उमंग से बता रहे थे वो, मैं भी आपको ड्रोन सेक्टर का ही एक उदाहरण दूंगा। दवाइयों की सप्लाई हो या पेस्टिसाइड का छिड़काव, स्वामित्व योजना में ड्रोन से मैपिंग हो, या फिर रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग, ड्रोन्स का उपयोग देश में लगातार बढ़ रहा है। और ड्रोन्स का ये बढ़ता हुआ उपयोग, युवाओं को नई नौकरियां दे रहा है। वो नौजवान तो आईटीआई करके निकला है, लेकिन वो कह रहा था, कि वीडियो ड्रोन का मत देखो, खुद ड्रोन बनाना शुरू करो, बना लोगे। इतने कान्फिडेंस से बोल रहा था। हमारी सरकार ने स्पेस सेक्टर को खोलने का जो निर्णय लिया, उसका भी बड़ा लाभ युवाओं को मिला है।

साथियों,

पिछले दशक में Digital Economy ने भी अवसरों की एक नई दुनिया बनाई है। Gig Economy हो, Platform Economy हो, Content Creation हो, या Technology Services, रोजगार के नए क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। आज जिन अवसरों की कल्पना भी मुश्किल थी, वे करोड़ों युवाओं की आय का माध्यम बन चुके हैं। यही बदलाव Startup Ecosystem में भी दिखाई देता है। एक समय देश में लगभग 500 Startups हुआ करते थे। आज 2 लाख से अधिक Registered Startups, और वो भी देश के हर जिले में आपको Startups नजर आएंगे। ये आंकड़े विश्वास देते हैं कि भारत का युवा, आने वाले वर्षों में, दुनिया की Growth, Innovation और Entrepreneurship का नेतृत्व करेगा।

साथियों,

आज दुनिया में हर कोई भारत के भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित है। हर कोई भारत की युवाशक्ति के सामर्थ्य को लेकर के बहुत आश्वस्त है। आपने भी देखा होगा, फ्रांस में "भारत इनोवेट्स" का इतना बड़ा कार्यक्रम हुआ। AI, Space, Green Energy, Biotechnology, ऐसे कई क्षेत्रों में, भारत के Startups और Global Investors, यानी मैं देख रहा था वो एक नई ताकत के रूप में उभर रहे हैं, वो एक साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं। आज भारत दुनिया के साथ नए Trade Agreements कर रहा है। ऐसे समझौते, जो भारत के उद्योगों के लिए नए बाजार खोल रहे हैं। ऐसे समझौते, जो भारत के Professionals के लिए नई संभावनाएं बना रहे हैं। पिछले महीनों में भी यूरोप के अनेक देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। ये समझौते भी देश में लाखों की संख्या में नए रोजगार बनाने का माध्यम बन रहे हैं।

साथियों,

दुनिया भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रही है। और भारत भविष्य की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है। दुनिया Future Technologies की ओर आगे बढ़ रही है। और भारत अपने युवाओं को Future Ready बनाने में जुटा है। और यही भारत के युवाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर है। और हमें इस अवसर का पूरा लाभ उठाना है।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में भारत के रोजगार परिदृश्य में एक और बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। अक्सर इसकी चर्चा कम होती है, लेकिन विकसित भारत की यात्रा में इसका महत्व बहुत बड़ा है। ये परिवर्तन है, रोजगार के साथ सुरक्षा और सम्मान को जोड़ने का। हमारी सोच Secure Employment की है। हमारी सोच Social Security for Every Worker की है। इसलिए आज Technology के माध्यम से EPFO की व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा गया है। Pension व्यवस्था को भी सरल और सुलभ बनाया गया है। लाखों नए कर्मियों को Health Insurance और सस्ते उपचार की व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।

साथियों,

हमने श्रम सुधारों को भी इसी दृष्टि से आगे बढ़ाया है। नए Labour Codes का उद्देश्य, कामगारों को अधिक सुरक्षा, अधिक पारदर्शिता और अधिक अधिकार देना है। Appointment Letter को कानूनी मान्यता देना हो, Fixed Term Employees को समान सुविधाएं सुनिश्चित करना हो, या फिर Minimum Wage के दायरे का विस्तार करना हो, हर प्रयास का उद्देश्य यही है कि श्रमिक का सम्मान और सुरक्षा दोनों मजबूत हों।

साथियों,

हमारी नारीशक्ति भी आज हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही है। इसलिए महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अधिक अवसरों वाला वातावरण तैयार किया जा रहा है। Night Shift से जुड़े पुराने प्रतिबंधों में बदलाव हो, Work From Home की सुविधा हो, या सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था, हम महिलाओं की भागीदारी को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज यहां बड़ी संख्या में, मेरे उद्योग जगत के साथी भी उपस्थित हैं। आप सब से भी मेरा एक आग्रह है। 21वीं सदी में अवसर उन्हीं देशों के पास जाएंगे, जिनके पास Skilled Talent होगा। जिनके पास Innovation होगा। जिनके पास Quality होगी। और आज भारत के पास इन तीनों क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अभूतपूर्व क्षमता है। और इसलिए मैं भारत के उद्योग जगत से भी कहना चाहता हूं, आज जो अवसर हमारे सामने हैं, उन्हें हमें पूरी शक्ति से अपनाना होगा। हमें नए बाजारों तक पहुंचना होगा। हमें नए उत्पाद बनाने होंगे। हमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। क्योंकि आज दुनिया भारत के लिए दरवाजे खोल रही है। पहले खिड़की भी खोलना नसीब नहीं था दोस्तों, आज दरवाजे खुल रहे हैं। भारत ने करीब 40 देशों के साथ जो फ्री ट्रेड अग्रीमेंट्स किए हैं, हमें इसका भी पूरा-पूरा लाभ उठाना चाहिए। ये अग्रीमेंट्स नए बाजार बना रहे हैं, नए मार्केट्स को उपलब्ध करा रहे हैं, दुनिया में मेक इन इंडिया ब्रांड्स के लिए नए अवसर पैदा हो ही रहे हैं, और इसलिए हमें इन अवसरों को गंवाना नहीं है दोस्तों।

साथियों,

जब लक्ष्य बड़े होते हैं, तो उपलब्धियां भी तो बड़ी होती हैं। जब सोच वैश्विक होती है, तो सफलताएं भी, सीमाएं भी अपने आप विस्तृत हो ही जाती हैं। और इसीलिए Training, Mentorship और Internship अब वैकल्पिक नहीं हैं वो। ये 21वीं सदी की आवश्यकता हैं। भारत के उद्योग जगत को अपने लिए Skilled Workforce को भी तैयार करना ही करना है, और भविष्य के लिए नए अवसर भी तैयार करने हैं। क्योंकि विकसित भारत का रास्ता केवल निवेश से नहीं बनेगा, वह टेलेंट, स्किल और इनोवेशन की शक्ति से बनने वाला है। और इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी कसौटी एक ही है, और मैं उद्योग जगत के साथियों को बार-बार कह रहा हूं, इन सारी परिस्थितियों का फायदा लेने की एक सबसे बड़ी सफल जड़ी बूटी एक ही है और वो जड़ी बूटी है Quality। शिक्षा की Quality। Skill की Quality। Service की Quality। Product की Quality। ईवन Packaging की Quality, दुनिया में टिकना है, तो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों पर खरा उतरना ही होगा। दुनिया में आगे बढ़ना है, तो उत्कृष्टता को अपनी पहचान बनाना होगा। आज दुनिया भारत से बहुत अपेक्षाएं रखती है। लेकिन मुझे विश्वास है, भारत का युवा उन अपेक्षाओं को पूरा ही नहीं करेगा, बल्कि उनसे भी आगे निकलकर के दुनिया को दिखा देगा, और डंके की चोट पर दिखाएगा। और यही विकसित भारत की शक्ति है। और यही मेरे नौजवान साथियों की, मेरे युवाओं की, उनके सामर्थ्य की युवाशक्ति की पहचान है, यही उनका सामर्थ्य है।

साथियों,

सपने वहीं बड़े होते हैं, जहां वो साकार होते हैं। एक सपने का पूरा होना, उससे बड़े सपने का रास्ता खोलता है। और यही आज भारत में हो रहा है। मैं भारत के युवाओं की अधीरता समझता हूं, और मैं युवाशक्ति से एक ही बात कहूंगा, आपके सपने ही, मैं फिर कहता हूं मेरे नौजवान साथियों, आपके सपने ही मोदी का संकल्प है! कामयाबी की तरफ बढ़ता आपका हर कदम, ये मेरी भी प्रेरणा है। और हां, असफल होने पर भी आपको हताश होने की कोई जरूरत नहीं। हर असफलता में हमें कुछ न कुछ तो सीखने को मिलता ही मिलता है। और मैं तो खेल जगत के लोगों को हमेशा ही कहता हूं, जो खेल के मैदान में उतरते हैं ना, कोई हारता नहीं है, एक जीतता है तो दूसरा सीखता है, हारता कोई नहीं है। युवा मन की एक ही कसौटी है, जो असफलताओं से निरंतर नया सीखने का आदि हो, जो सपनों को सिद्ध करे और हर सिद्धि के बाद नए सपनों को जन्म दे। मुझे भारत की युवाशक्ति पर विश्वास है, मुझे भारत की उद्यमिता पर भरोसा है, इसी भरोसे के साथ एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, और विकसित भारत 2047, जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा, हिन्दुस्तान विकसित होकर रहेगा। ये हम सबका सपना भी है, हम सबका संकल्प भी है। और मैं मानता हूं दोस्तों मेरे नौजवान साथी हम अपनी आंखों से खुद देखेंगे, विकसित भारत खुद देखेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।