उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे पांच करोड़ लाभार्थियों को रसोई गैस कनेक्शन प्रदान किये जाएंगे: प्रधानमंत्री मोदी
दुनिया भर में सभी कार्यकर्ताओं का उद्देश्य दुनिया को एकजुट करना होना चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
केंद्र सरकार की प्राथमिकता गरीबों का कल्याण करना है: प्रधानमंत्री
भारत के पूर्वी भाग तक विकास का फल पहुंचाना होगा और तभी हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई में ख़ुद को मजबूत कर पाएंगे: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से गरीबों, खासकर महिलाओं को लाभ मिलेगा: प्रधानमंत्री मोदी
योजनाएं गरीबों के कल्याण को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए न कि वोट पाने के लिए: प्रधानमंत्री

विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों,

भृगु बाबा की धरती पर रउवा, सभन के प्रणाम। ‘ई धरती त साक्षात भृगु जी की भूमि रहल’ ब्रह्मा जी भी यही जमीन पर उतर रहल। रामजी यहीं से विश्वामित्र मुनी के साथे गइल। त सुन्दर धरती पर सभी के हाथ जोड़ के फिर से प्रणाम।

भाइयों – बहनों मैं पहले भी बलिया आया हूं। ये बलिया की धरती क्रांतिकारी धरती है। देश को आजादी दिलाने के लिए इसी धरती के मंगल पाण्डे और वहां से लेकर के चितु पाण्डे तक एक ऐसा सिलसिला हर पीढ़ी में, हर समय देश के लिए जीने-मरने वाले लोग इस बलिया की धरती ने दिये। ऐसी धरती को मैं नमन करता हूं। यही धरती है जहां भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान चन्द्र शेखर जी का भी नाम जुड़ा हुआ है। यही धरती है, जिसका सीधा नाता बाबू जयप्रकाश नारायण के साथ जुड़ता है। और यही तो धरती है। उत्तर प्रदेश राम मनोहर लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय के बिना अधूरा लगता है। ऐसे एक से बढ़कर एक दिग्गज, जिस धरती ने दिये उस धरती को मैं नमन करता हूं। आपके प्यार के लिए सत्, सत् नमन।

आप मुझे जितना प्यार देते हैं, मुझ पर आपका कर्ज चड़ता ही जाता है, चढ़ता ही जाता है, लेकिन मेरे प्यारे भाइयों -बहनों मैं इस कर्ज को इस प्यार वाले कर्ज को ब्याज समेत चुकाने का संकल्प लेकर के काम कर रहा हूं और ब्याज समेत मैं चुकाऊंगा, विकास करके चुकाऊंगा मेरे भाइयों बहनों, विकास कर के चुकाऊंगा।

आज पहली May है, एक मई, पूरा विश्व आज श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाता है। मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। और आज देश का ये ‘मजदूर नम्बर एक’ देश के सभी श्रमिकों को उनके पुरुषार्थ को, उनके परिश्रम को, राष्ट्र को आगे बढ़ाने में उनके अविरथ योगदान को कोटि-कोटि अभिनन्दन करता है। उस महान परम्परा को प्रणाम करता है।

भाइयों–बहनों दुनिया में एक नारा चलता था। जिस नारे में राजनीति की बू स्वाभाविक थी। और वो नारा चल रहा था। दुनिया के मजदूर एक था, दुनिया के मजदूर एक हो जाओ, और वर्ग संघर्ष के लिए मजदूरों को एक करने के आह्वान हुआ करते थे। भाइयों–बहनों जो लोग इस विचार को लेकर के चले थे, आज दुनिया के राजनीतिक नक्शे पर धीरे-धीरे करके वो अपनी जगह खोते चले जा रहे हैं। 21वीं सदी में दुनिया के मजदूर एक हो जाओ इतनी बात से चलने वाला नहीं है। 21वीं सदी की आवश्यकताएं अलग हैं, 21वीं सदी की स्थितियां अलग है और इसलिये 21वीं सदी का मंत्र एक ही हो सकता है ‘विश्व के मजदूरों विश्व के श्रमिकों आओ हम दुनिया को एक करें दुनिया को जोड़ दें’ ये नारा 21वीं सदी का होना चाहिए।

वो एक वक्त था ‘Labourers of the World, Unite’, आज वक्त है ‘Labourers, Unite the World’ ये बदलाव इस मंत्र के साथ। आज दुनिया को जोड़ने की जरूरत है। और दुनिया को जोड़ने के लिए अगर सबसे बड़ा कोई chemical है, सबसे बड़ा ऊर्जावान कोई cementing force है, तो वो मजदूर का पसीना है। उस पसीने में एक ऐसी ताकत है, जो दुनिया को जोड़ सकता है।

भाइयों–बहनों जब आप लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत से विजयी बनाया। तीस साल के बाद दिल्ली में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। और NDA के सभी घटकों ने मुझे अपने नेता के रूप में चुना, तो उस दिन Parliament के Central Hall में मेरे प्रथम भाषण में मैंने कहा था कि मेरी सरकार गरीबों को समर्पित है। ये सरकार जो भी करेगी वो गरीबों की भलाई के लिये करेगी, गरीबों के कल्याण के लिये करेगी। भाइयों-बहनों हमने मजदूरों के लिए भी श्रम कानूनों में, श्रमिकों की सरकार के साथ संबंधों में, एक आमूलचूल परिवर्तन लाया है। अनेक बदलाव लाए हैं। मेरे प्यारे भाइयों-बहनों आपको जानकर के दुःख होगा, पीड़ा होगी, आश्चर्य भी होगा कि हमारे देश में सरकार से जिनको पैंशन मिलता था, इस देश में तीस लाख से ज्यादा श्रमिक ऐसे थे, जिसको पैंशन किसी को 15 रुपया महीने का, किसी को 100 रुपया, किसी को 50 रुपया इतना पैंशन मिलता था। आप मुझे बताइए कि पैंशन लेने के लिए वो गरीब वृद्ध व्यक्ति दफ्तर जाएगा, तो उसका बस का किराय का खर्चा हो जाएगा, ऑटो रिक्शा का खर्चा हो जाएगा। लेकिन सालों से मेरे देश के बनाने वाले श्रमिकों को 15 रुपया, 20 रुपया, 50 रुपया, 100 रुपया पैंशन मिलता था। हमने आकर के इन तीस लाख से ज्यादा मेरे श्रमिकों परिवारों को minimum 1000 रुपया पैंशन देने का निर्णय कर लिया, लागू कर दिया और उस गरीब परिवार को वो पैंशन मिलने लग गया।

भाइयों-बहनों हमारे यहां कभी कभार गरीबों के लिये योजनाओं की चर्चाएं बहुत होती हैं और उनकी भलाई के लिए काम करने की बातें भी बहुत होती हैं। हमने आने के बाद एक श्रम सुविधा पोर्टल चालू किया, जिसके तहत आठ महत्वपूर्ण श्रम कानूनों को एकत्र कर के उसका सरलीकरण करने का काम कर लिया। पहली बार देश के श्रमिकों को एक Labour Identity Number (LIN) ये नम्बर दिया गया, ताकि हमारे श्रमिक की पहचान बन जाए। इतना ही नहीं हमारे देश के श्रमिकों को पूरे देश में Opportunity प्राप्त हो। इसलिए NCSP इसकी हमने एक National Career Service Portal, इसकी शुरुआत की। ताकि जिसको रोजगार देना है और जिसको रोजगार लेना है दोनों के बीच एक सरलता से तालमेल हो सके।

भाइयों-बहनों बोनस का कानून हमारे देश में सालों से है। बोनस का कानून यह था कि 10 हजार रुपये से अगर कम आवक है और कंपनी बोनस देना चाहती है तो उसी को मिलेगा। आज के जमाने में 10 हजार रुपये की आय कुछ नहीं होती है। और उसके कारण अधिकतम श्रमिकों को बोनस नहीं मिलता था। हमने आकर के निर्णय किया कि minimum income 10 हजार से बढ़ाकर के 21 हजार रुपया कर दी जाए। इतना ही नहीं पहले बोनस सिर्फ साढ़े तीन हजार रुपया मिलता था। हमने निर्णय किया कि ये बोनस minimum सात हजार रुपया मिलेगा और उससे भी ज्यादा उसका पाने का हक़ बनता है तो वो भी उसको मिलेगा।

भाइयों-बहनों कभी हमारा श्रमिक एक जगह से दूसरी जगह पर नौकरी चला जाता था, तो उसके जो पीएफ वगैरह के पैसे कटते थे उसका कोई हिसाब ही नहीं रहता था। वो गरीब मजदूर बेचारा पुरानी जगह पर लेने के लिए वापस नहीं जाता था। सरकार के खजाने में करीब 27 हजार करोड़ रुपया इन मेरे गरीबों के पड़े हुए थे। कोई सरकार उसकी सूंघ लेने को तैयार नहीं था। हमने आकर के सभी मजदूरों को ऐसे कानून में बांध दिया कि मजदूर जहां जाएगा उसके साथ उसके ये Provident Fund के पैसे भी साथ-साथ चले जाएंगे। और उसको जब जरूरत पड़ेगी वो पैसे ले सकता है। आज वो 27 हजार करोड़ रुपयों का मालिक बन सकेगा। ऐसी व्यवस्था हमने की है।

भाइयों-बहनों हमारे यहां Construction के काम में बहुत बड़ी मात्रा में मजदूर होते हैं। करीब चार करोड़ से ज्यादा मजदूर Construction के काम में हैं, इमारत बनाते हैं, मकान बनाते हैं, लेकिन उनके देखभाल की व्यवस्था नहीं थी। श्रमिक कानूनों में परिवर्तन करके आज हमने इन Construction के श्रमिकों के लिए उनके आरोग्य के लिए, उनके insurance के लिए, उनके bank account के लिए, इनके पैंशन के लिए एक व्यापक योजना बना कर के हमारे Construction के मजदूरों को भी हमनें उसका फायदा दिया है।

भाइयों–बहनों हमारा उत्तर प्रदेश जिसने अनेक-अनेक प्रधानमंत्री दिये, लेकिन क्या कारण कि हमारी गरीबी बढ़ती ही गई बढ़ती ही गई। गरीबों की संख्या भी बढ़ती गई। हमारी नीतियों में ऐसी क्या कमी थी कि हम गरीबों को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिये तैयार नहीं कर पाए। ऐसा क्या कारण था कि हमने गरीबों को सिर्फ गरीबी के बीच जीना नहीं, लेकिन हमेशा सरकारों के पास हाथ फैलाने के लिए मजबूर कर के छोड़ दिया, उसके जमीर को हमने खत्म कर दिया। गरीबी के खिलाफ लड़ने का उसका हौसला हमने तबाह कर दिया। भाइयों–बहनों अभी धर्मेन्द्र जी बता रहे थे के गाजीपुर के सांसद नेहरू के जमाने में पूरे हिन्दुस्तान को हिला दिया था। जब उन्होंने संसद में कहा कि मेरे पूर्वी उत्तर प्रदेश के भाई-बहन ऐसी गरीबी में जी रहे हैं के उनके पास खाने के लिए अन्न नहीं होता है। पशु के गोबर को धोते हैं और उस गोबर में से जो दाने निकलते हैं उन दानों से पेट भर के वे अपना गुजारा करते हैं। जब ये बात संसद में कही गई थी, पूरा हिन्दुस्तान हिल गया था और तब एक पटेल कमीशन बैठा था। यहां की स्थिति सुधारने के लिए। कई बातों का सुझाव आज से पचास साल पहले दिया गया था। लेकिन उन सुझाव पर क्या हुआ, वो तो भगवान जाने। लेकिन भाइयों–बहनों उसमें एक सुझाव था। उसमें एक सुझाव था ताड़ी घाट, गाजीपुर, और मऊ इसे रेल से जोड़ा जाए। पचास साल बीत गए, वो बात कागज पर ही रही। मैं भाई मनोज सिन्हा को हृदय से अभिनन्दन करता हूं, यहां के मेरे भारतीय जनता पार्टी के सभी सांसदों का अभिनन्दन करता हूं कि वे पचास साल पहले जिन बातों को भुला दिया गया था उसको लेकर के निकल पड़े, मुझ पर दबाव डालते रहे। बार-बार मिलते रहे, और आज मैं संतोष से कह सकता हूं उस रेल लाइन के लिए बजट आवंटन करने का निर्णय हमने कर लिया और उस काम को हम आगे बढ़ाएंगे। गंगा के ऊपर रेल और रोड का दोनों bridge बनेंगे। ताकि infrastructure होता है, जो विकास के लिए एक नया रास्ता भी खोलता है और उस दिशा में हम का कर रहे हैं।

भाइयों-बहनों आज मैं बलिया की धरती पर से मेरे देश के उन एक करोड़ परिवारों को सर झुका कर के नमन करना चाहता हूं, उनका अभिनन्दन करना चाहता हूं। करीब एक करोड़ दस लाख से भी ज्यादा ऐसे परिवार हैं, जिनको मैंने कहा था कि अगर आप खर्च कर सकते हो तो रसोई गैस की सब्सिडी क्यों लेते हो। क्या आप पांच-दस हजार रुपया का बोझ नहीं उठा सकते साल का। क्या आप सब्सिडी Voluntarily छोड़ नहीं सकते। मैंने ऐसे ही एक कार्यक्रम में बोल दिया था। मैंने ज्यादा सोचा भी नहीं था, न योजना बनाई थी, न follow-up करने की व्यवस्था की थी, यूहीं दिल से एक आवाज उठी और मैंने बोल दिया। आज एक साल के भीतर-भीतर मेरे देश के लोग कितने महान हैं। अगर कोई अच्छा काम हो तो सरकार से भी दो कदम आगे जाकर के चलने के लिए तैयार रहते हैं। इसका ये उदहारण है । आज के युग में, हम बस में जाते हों, बगल वाली सीट खाली हो और हमें लगे की चलो बगल में कोई पैसेंजर नहीं है तो जरा ठीक से बैठूंगा। आराम से प्रवास करूंगा। लेकिन अगर कोई पैसेंजर आ गया, बगल में बैठ गया, हम तो हमारी सीट पर बैठे हैं, तो भी थोड़ा मुंह बिगड़ जाता है। मन में होता है ये कहां से आ गया। जैसे मेरी सीट ले ली हो। ऐसा जमाना है। ऐसे समय एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवार सिर्फ बातों–बातों में कहने पर प्रधानमंत्री की बात को गले लगा कर के सर आंखों पर चढ़ा के एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवार अपनी सब्सिडी छोड़ दें। इससे बड़ा क्या होगा। मैं आप सब से कहता हूं उन एक करोड़ दस लाख से ज्यादा परिवारों के लिये जोर से तारियां बजाइए। उनका सम्मान कीजिए। उनका गौरव कीजिए। मैं आप सबसे आग्रह करता हूं मेरे भाइयों – बहनों। ये देश के लिए किया हुआ काम है। ये गरीबों के लिये किया हुआ काम है। इन लोगों का जितना गौरव करें उतना कम है। और हमारे देश में लेने वाले से ज्यादा देने वाले की इज्जत होती है। ये देने वाले लोग हैं। जहां भी बैठे होंगे ये तालियों की गूंज उन तक सुनाई देती होगी और वो गौरव महसूस करते होंगे।

भाइयों – बहनों हमने कहा था गरीबों के लिए जो सब्सिडी छोड़ेगा वो पैसे सरकार की तिजोरी में नहीं जाएगी। वो पैसे गरीबों के घर में जाएंगे। एक साल में ये इतिहासिक रिकॉर्ड है भाइयों 1955 से, रसोई गैस देने का काम चल रहा है। इतने सालों में 13 करोड़ परिवारों को रसोई गैस मिला। सिर्फ 13 करोड़ परिवारों को करीब साठ साल में, मेरे भाइयों–बहनों हमने एक साल में तीन करोड़ से ज्यादा परिवारों को रसोई का गैस दे दिया। जिन लोगों ने सब्सिडी छोड़ी थी वो गैस सिलंडर गरीब के घर में पहुंच गया।

भाइयों-बहनों हम जानते हैं कि लोग कहते हैं कि मोदी जी बलिया में कार्यक्रम क्यों किया। हमारा देश का एक दुर्भाग्य है, कुछ लोग राजनीति में नहीं हैं, लेकिन उनको 24ओं घंटे राजनीति के सिवा कुछ दिखता ही नहीं है। किसी ने लिख दिया कि बलिया में मोदी जो आज कार्यक्रम कर रहे हैं वो चुनाव का बिगुल बजा रहे हैं। वे चुनाव का बिगुल बजा रहे हैं। अरे मेरे मेहरबानों हम कोई चुनाव का बिगुल बजाने नहीं आए हैं। ये बिगुल तो मतदाता बजाते हैं। हम बिगुल बजाने नहीं आए हैं।

भाइयों –बहनों अभी मैं पिछले हफ्ते झारखंड में एक योजना लागू करने के लिए गया था, झारखंड में कोई चुनाव नहीं है। मैं कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश में एक योजना लागू करने गया था, वहां पर कोई चुनाव नहीं है। मैंने ‘बेटी बचाओ’ अभियान हरियाणा से चालू किया था, वहां कोई चुनाव नहीं है। ये बलिया में ये रसोई गैस का कार्यक्रम इसलिए तय किया कि उत्तर प्रदेश में जो एवरेज हर जिले में जो रसोई गैस है, बलिया में कम से कम है, इसलिये मैं बलिया आया हूं। ये ऐसा इलाका है, जहां अभी भी गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले 100 में से मुश्किल से आठ परिवारों के घर में रसोई गैस जाता है। और इसलिये भाइयों –बहनों बलिया जहां कम से कम परिवारों में रसोई गैस जाता है, इसलिए मैंने आज बलिया में आकर के देश के सामने इतनी बड़ी योजना लागू करने का निर्णय किया। मैंने हरियाणा में बेटी बचाओ इसलिये कार्यक्रम लिया था, क्योंकि हरियाणा में बालकों की संख्या की तुलना में बेटियों की संख्या बहुत कम थी। बड़ी चिंताजनक स्थिति थी। और इसलिए मैंने वहां जाकर के खड़ा हो गया और उस काम के लिए प्रेरित किया और आज हरियाणा ने बेटी बाचाने के काम में हिन्दुस्तान में नम्बर एक लाकर के खड़ा कर दिया। और इसलिए भाइयों–बहनों मैं इस पूर्वी उत्तर प्रदेश में बलिया में इसलिये आया हूं, क्योंकि हमें गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। अगर पूर्वी हिन्दुस्तान पश्चिमी हिन्दुस्तान की बराबरी भी कर ले तो इस देश में गरीबी का नामोनिशान नहीं रहेगा, मेरा मानना है। मेरा पूर्वी उत्तर प्रदेश, मेरा बिहार, मेरा पश्चिम बंगाल, मेरा असम, मेरा नॉर्थ ईस्ट, मेरा ओड़िशा, ये ऐसे प्रदेश हैं कि अगर वहां विकास गरीबों के लिए पहुंच जाए, तो गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में हम सफल हो जाएंगे भाइयों।

आप मुझे बताइए एक जमाना था, बहुत लोगों को ये रसोई गैस की ताकत क्या है अभी भी समझ नहीं आती। बहुत लोगों को ये रसोई गैस की राजनीति क्या थी ये भी भूल चुके हैं, बहुत लोग ये रसोई गैस कितना मूल्यवान माना जाता था वो भूल गए हैं। मैं आज जरा याद दिलाना चाहता हूं। मैं political पंडितों को याद दिलाना चाहता हूं। दिल्ली में बैठकर के air-conditioned कमरे में बढ़िया-बढ़िया सलाह देने वालों को मैं आज झकझोड़ना चाहता हूं। उनको मैं हिलाना चाहता हूं, मैं उनको समझाना चाहता हूं। वो दिन याद करो, वो दिन याद करो, जब सांसद Parliament का Member बनता था, तो उसको हर साल रसोई गैस की 25 कूपन दी जाती थी और वो अपने इलाके में 25 परिवारों को साल में रसोई गैस दिलवाता था। और वो इतना गर्व करता था कि मैंने मेरे इलाके में 25 परिवारों को एक साल में रसोई गैस का connection दिलवा दिया। ये बहुत दूर की बात नहीं कर रहा हूं। मैं अभी-अभी पिछले सालों की बात करता हूं। और अखबारों में खबरें आती थीं कि सांसद महोदय ने कालेबाजारी में रसोई गैस का टिकट बेच दिया। ऐसे भी लोग थे कि रसोई गैस का connection लेने के लिए दस-दस, 15-15 हजार रुपया वो टिकट खरीदने के लिए black में खर्च करते थे। वो दिन थे और आज ये सरकार देखिए। एक-एक सांसद के क्षेत्र में हिन्दुस्तान के एक-एक Parliament Member के क्षेत्र में किसी के यहां साल में दस हजार गैल सिलंडर पहुंच जाएंगे, किसी के यहां बीस हजार, किसी के यहां पचास हजार और तीन साल के भीतर –भीतर पांच करोड़ गरीब परिवारों में ये रसोई गैस पहुंचाने का मेरा इरादा है। पांच करोड़ परिवारों में, भाइयों–बहनों ये पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस पहुंचाना ये छोटा काम नहीं है। इतना बड़ा काम, इतना बड़ा काम आज मैं गरीब माताओं बहनों के लिए लेकर आया हूं। आपने देखा होगा, मैं इन माताओं को पूछ रहा था कि आपने कभी सोचा था कि आपके घर में कभी रसोई गैस आएगा, उन्होंने कहा नहीं हमने तो सोचा नहीं था कि हमारे बच्चों के नसीब में भी रसोई गैस आएगा, ये हमने सोचा नहीं था। मैंने पूछा रसोई में कितना टाइम जाता है वो कहते लकड़ी लेने जाना पड़ता है, लकड़ी जलाते हैं , बुझ जाती है, कभी आधी रोटी रह जाती है फिर लकड़ी लेने जाते हैं, बड़ी अपनी मुसीबत बता रही थी। भाइयों –बहनों ये रसोई गैस के कारण पांच करोड़ परिवार 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी। 2019 में जब महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी तब गांव और गरीब के लिए पांच करोड़ गैस रसोई गैस पहुंच चुके होंगे भाइयों, समय सीमा में काम करने का हमने फैसला किया है।

एक गरीब मां जब लकड़ी के चूल्हे से खाना पकाती है, तो वैज्ञानिकों का कहना है कि गरीब मां लकड़ी के चूल्हे से खाना पकाती है, तो एक दिवस में उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुआं चला जाता है, 400 सिगरेट का। बच्चे घर में होते हैं। और इसलिए उनको भी धुएं में ही गुजारा करना पड़ता है। खाना भी खाते हैं, तो धुआं ही धुआं होता है। आंख से पानी निकलता है और वो खाना खाता है। मैंने तो ये सारे हाल, बचपन में मैं जी चुका हूं। मैं जिस घर में पैदा हुआ, बहुत ही छोटा एक गलियारी जैसा मेरा घर था। कोई खिड़की नहीं थी। आने जाने का सिर्फ एक दरवाजा था। और मां लकड़ी का चूल्हा जला कर के खाना पकाती थी। कभी-कभी तो धुआं इतना होता था कि मां खाना परोस रही हो लेकिन हम मां को देख नहीं पाते थे। ऐसे बचपन में धुएं में खाना खाते थे। और इसलिए मैं उन माताओं की पीड़ा को, उन बच्चों की पीड़ा को, भलीभांति अनुभव कर के आया हूं उस पीड़ा को जी कर के आया हूं और इसलिये मुझे मेरी इन गरीब माताओं को इस कष्टदायक जिन्दगी से मुक्ति दिलानी है। और इसलिए पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस देने का हमने उपक्रम किया है।

भाइयों – बहनों आज लकड़ी के कारण जो खर्चा होता है । इस रसोई गैस से खर्चा भी कम होने वाला है। आज उसकी तबियत की बर्बादी होती है। उसकी तबियत भी ठीक रहेगी। लकड़ी लाना चूल्हा जलाना में time जाता है। उस गरीब मां का time भी बच जाएगा। उसको अगर मजदूरी करनी है सब्जी बेचनी है, तो वो आराम से कर सकती है।

भाइयों –बहनों हमारी कोशिश ये है और इतना ही नहीं ये जो गैस की सब्सिडी दी जाएगी वो भी उन महिलाओं के नाम दी जाएगी, उनका जो प्रधानमंत्री जनधन अकाउंट है, उसी में सब्सिडी जमा होगी ताकि वो पैसे किसी ओर के हाथ न लग जाए, उस मां के हाथ में ही पैसे लग जाए ये भी व्यवस्था की। ये environment के लिये भी हमारा एक बहुत बड़ा initiative है। और इसलिए मेरे भाइयों- बहनों हजारों करोड़ रुपया का खर्चा सरकार को लगने वाला है। कहां MP की 25 रसोई गैस की टिकट और कहां पांच करोड़ परिवारों में रसोई गैस पहुंचाने का अभियान, ये फर्क होता है सरकार-सरकार में। काम करने वाली सरकार, गरीबों की भला करने वाली सरकार, गरीबों के लिए सामने जाकर के काम करने वाली सरकार कैसे काम करती है इसका ये उत्तम उदहारण आज ये पांच करोड़ परिवारों को रसोई गैस देने का कार्यक्रम है।

भाइयों–बहनों आज, पिछली किसी भी सरकार ने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए जितना काम नहीं किया होगा, इतनी धनराशि आज भारत सरकार उत्तर प्रदेश में लगा रही है। क्योंकि हम चाहते हैं कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हमारे जो गरीब राज्य हैं वो तेजी से तरक्की करें। और इसलिये हम काम में लगे हैं। गंगा सफाई का अभियान जनता की भागीदारी से सफल होगा। और इसलिये जन भागीदारी के साथ जन-जन संकल्प करें। ये मेरा बलिया तो मां गंगे और सरयू के तट पर है। दोनों की कृपा आप पर बरसी हुई है और हम सब अभी जहां बैठे हैं वो जगह भी एक बार मां गंगा की गोद ही तो है। और इसलिये जब मां गंगा की गोद में बैठ कर के मां गंगा की सफाई का संकल्प हर नागरिक को करना होगा। हम तय करें मैं कभी भी गंगा को गंदी नहीं करूंगा। मेरे से कभी गंगा में कोई गंदगी नहीं जाएगी। एक बार हम तय कर लें कि मैं गंगा को गंदी नहीं करूंगा। ये मेरी मां है। उस मां को गंदा करने का पाप मैं नहीं कर सकता। ये अगर हमने कर लिया, तो दुनिया की कोई ताकत ये मां गंगा को गंदा नहीं कर सकता है।

और इसलिए मेरे भाइयों–बहनों हम गरीब व्यक्ति की जिंदगी बदलना चाहते हैं। उसके जीवन में बदलाव लाने के लिये काम कर रहे हैं। और आज पहली मई जब मजदूरों का दिवस है। गरीबी में जीने वाला व्यक्ति मजदूरी से जूझता रहता है। भाइयों–बहनों गरीबी हटाने के लिए नारे तो बहुत दिये गए, वादे बहुत बताए गए, योजनाएं ढेर सारी आईं लेकिन हर योजना गरीब के घर को ध्यान में रख कर के नहीं बनी, हर योजना मत पेटी को ध्यान में रख कर के बनी। जब तक मत पेटियों को ध्यान में रख कर के गरीबों के लिए योजनाएं बनेगी, कभी भी गरीबी जाने वाली नहीं है। गरीबी तब जाएगी, जब गरीब को गरीबी से लड़ने की ताकत मिलेगी। गरीबी तब जाएगी, जब गरीब फैसला कर लेगा कि अब मेरे हाथ में साधन है मैं गरीबी को प्रास्त कर के रहूंगा। अब मैं गरीब नहीं रहूंगा, अब मैं गरीबी से बाहर आऊंगा। और इसके लिए उसको शिक्षा मिले, रोजगार मिले, रहने को घर मिले, घर में शौचालय हो, पीने का पानी हो, बिजली हो, ये अगर हम करेंगे, तभी गरीबी से लड़ाई लड़ने के लिए मेरा गरीब ताकतवर हो जाएगा। और इसीलिये मेरे भाइयों-बहनों हम गरीबी के खिलाफ लड़ाइ लड़ने के लिए काम कर रहे हैं।

आजादी के इतने साल हो गये। आजादी के इतने सालों के बाद इस देश में 18 हजार गांव ऐसे जहां बिजली का खंभा भी नहीं पहुंचा है, बिजली का तार नहीं पहुंचा है। 18वीं शताब्दि में जैसी जिन्दगी वो गुजारते थे। 21वीं सदी में भी 18 हजार गांव ऐसी ही जिन्दगी जीने के लिए मजबूर हैं। मुझे बताओ मेरे प्यारे भाइयों–बहनों क्या किया किया इन गरीबी के नाम पर राजनीति करने वालों ने । उन 18 हजार गांव को बिजली क्यों नहीं पहुंचाई। मैंने बीड़ा उठाया है। लालकिले से 15 अगस्त को मैंने घोषणा की मैं एक हजार दिन में 18 हजार गांवों में बिजली पहुंचा दूंगा। रोज का हिसाब देता हूं, देशवासियों को और आज हमारे उत्तर प्रदेश में आर हैरान होंगे इतने प्रधानमंत्री हो गये उत्तर प्रदेश में । आज उत्तर प्रदेश मेरा कार्य क्षेत्र है। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे स्वीकार किया है। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे आशिर्वाद दिये हैं। मुझे गर्व है, उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना बनाया है। और इसलिये उत्तर प्रदेश में इतने प्रधानमंत्री आए भाइयों–बहनों बैठा 1529 गांव ऐसे थे, जहां बिजली का खंभा नहीं पहुंचा था। अभी तो ढाई सौ दिन हुए हैं। मेरी योजना को ढाई सौ दिन हुए हैं। भाइयों–बहनों मैंने अब तक मैंने 1326 गांवों में, 1529 में से 1326 गांवों खंभा पहुंच गया, तार पहुंच गया, तार लग गया, बिजली चालू हो गई और लोगों ने बिजली का स्वागत भी कर दिया। और जिन गांवों में बाकी है। वहां भी तेजी से काम चल रहा है। आज औसत उत्तर प्रदेश में हम एक दिन में तीन गांवों में बिजली पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जो काम साठ साल तक नहीं हुआ वो हम एक दिन में तीन गांवों तक पहुंचने का काम कर रहे हैं।

भाइयों–बहनों पूरे देश में आज जो ‘प्रधानमंत्री उज्जवला योजना’ इसका आरम्भ हो रहा है। मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी देश में करीब 25 कोरड़ परिवार है, उसमे से ये पांच करोड़ परिवारों के लिए योजना है। इससे बड़ी कोई योजना नहीं हो सकती। कभी एक योजना पांच करोड़ परिवारों को छूती हो, ऐसी एक योजना नहीं हो सकती। ऐसी योजना आज लागू हो रही है, बलिया की धरती पर हो रही है। राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, उनके आशिर्वाद से हो रही है, चन्द्र शेखर जी, बाबु जयप्रकाश जी ऐसे महापुरषों के आशीर्वाद से प्रारंभ हो रही है। और बलिया की धरती...अब बलिया- ‘बलिया’ बनना चाहिए, इस संकल्प को लेकर के आगे बढ़ना है। मैं फिर एक बार हमारे सासंद महोदय भाई भरत का बड़ा आभार व्यक्त करता हूँ, इतने उमंग के साथ इस कार्यक्रम की उन्होंने अर्जना की। मैं पूरे उत्तर प्रदेश का अभिनन्दन करता हूं। मैं श्रीमान धर्मेन्द्र प्रधान उसकी पूरी टीम का अभिनन्दन करता हूं। ये Petroleum sector कभी गरीबों के लिये माना नहीं गया था, हमने Petroleum sector को गरीबों का बना दिया। ये बहुत बड़ा बदलाव धर्मेन्द्र जी के नेतृत्व में आया है। मैं उनको बहुत–बहुत बधाई देता हूं। मेरी पूरी टीम को बधाई देता हूं। आप सबका बहुत – बहुत अभिनन्दन करता हूं। बहुत- बहुत धन्यवाद।

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ये बेटी कब से चित्र लेकर खड़ी है कोई कलेक्ट कर लीजिए ताकि वो बेटी आराम से बैठ सके। जरा एसपीजी के लोग इसे कलेक्ट कर लीजिए। धन्यवाद बेटा... बहुत बढ़िया चित्र बनाया आपने...

भारत माता की... भारत माता की...

आमार प्रियो पोश्चिम बोंगोबाशी, भाई ओ बोनेरा, आमार अंतोरेर अंतोस्थल थेके… आपनादेर शोबाइके सश्रोद्धो प्रोणाम।

बंगाल की ये ऐतिहासिक धरती....ये ब्रिगेड परेड ग्राउंड का ऐतिहासिक मैदान.....और, बांग्ला मानुष का ये ऐतिहासिक जन-सैलाब... जहां जहां मेरी नजर पहुंच रही हो लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। ये अद्भुत दृश्य है। ये.आपका उत्साह...ये आपका जोश...बंगाल क्या सोच रहा है....बंगाल के मन में क्या चल रहा है....अगर किसी को ये देखना है, तो जरा ये तस्वीरें देख ले!

ब्रिगेड परेड ग्राउंड का इतिहास साक्षी है....जब-जब बंगाल देश को दिशा देता है...ये ब्रिगेड मैदान बंगाल की आवाज़ बनता है। इस मैदान से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठी आवाज. और वो आवाज हिंदुस्तान में एक क्रांति बन गई थी। और उसका नतीजा क्या हुआ...अंग्रेजों के अत्याचार और लूट का खात्मा हुआ! आज एक बार फिर...ब्रिगेड ग्राउंड से नए बंगाल की क्रांति का बिगुल बज गया है। बंगाल में बदलाव अब दीवारों पर भी लिख चुका है... और बंगाल के लोगों के दिलों में भी छप चुका है। अब बंगाल से निर्मम सरकार का अंत होकर रहेगा... अब बंगाल से महाजंगलराज का खात्मा होगा। इसीलिए, बंगाल के हर कोने से आवाज उठ रही है... चाइ बीजेपी शॉरकार चाइ बीजेपी शॉरकार पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार

साथियों,

कल TMC ने इस रैली में आने वाले आप सभी लोगों को चोर कहकर गाली दी है। असली चोर कौन है, ये बंगाल की प्रबुद्ध जनता जानती है। अपनी कुर्सी जाते हुए देखकर... यहां की निर्मम सरकार बौखला गई है।

साथियों,

आज भी इस विशाल सभा को रोकने के लिए निर्मम सरकार ने सारे हथियार निकाल लिए आपलोगों को आने से रोकने के लिए ब्रिज बंद करवा दिए, गाड़ियां रुकवा दी, ट्रैफिक जाम करवाया, भाजपा के झंडे उखड़वा दिए, पोस्टर फड़वा दिए। लेकिन निर्मम सरकार साफ-साफ देख लो आज के जनसैलाब को रोक नहीं पाई हो। बंगाल में महाजंगलराज लाने वालों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। वो दिन दूर नहीं जब बंगाल में फिर से कानून का राज होगा...जो कानून तोड़ेगा... जो अत्याचार करेगा...TMC के किसी अत्याचारी को छोड़ा नहीं जाएगा। चुन-चुन के हिसाब लिया जाएगा।

भाइयों बहनों,

यहां की निर्मम सरकार चाहे अब जितना जोर लगा ले...परिवर्तन की इस आंधी को अब निर्मम सरकार रोक नहीं पाएगी... भाजपा के साथ...एनडीए के साथ...महिषासुरमर्दिनी का आशीर्वाद है। श्री रामकृष्ण परमहंस...स्वामी विवेकानंद....नेताजी सुभाष चंद्र बोस....ऋषि बंकिम चंद्र, गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर....ईश्वर चंद विद्यासागर...बाघा जतिन और खुदीराम बोस...डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी.....लोकमाता रानी रॉशमोनी...ऐसी सभी महान विभूतियों ने जिस बंगाल की परिकल्पना की थी....भारतीय जनता पार्टी की सरकार...उस बंगाल का निर्माण करेगी, नवनिर्माण करेगी।

साथियों,

बंगाल का विकास नेक नीयत से होगा, सही नीतियों से होगा। बंगाल में अभी हमारी सरकार नहीं है। लेकिन फिर भी, केंद्र सरकार के जरिए बीजेपी दिन-रात बंगाल के विकास में लगी हुई है। आज भी, मैंने 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। अभी-अभी 18 हजार करोड़.. कितना... कितना.. 18 हजार करोड़... कितना... कितना... कितना... चार दिन पहले ही, कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल के लिए मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। ये सभी प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगे। इसका फायदा यहां के सामान्य मानवी, किसान, व्यापारी और स्टूडेंट्स को मिलेगा।

भाइयो और बहनों,

यहां की निर्मम सरकार ने बंगाल के युवाओं को पलायन का अभिशाप दिया है। आप सब जानते हैं.... बंगाल के युवा प्रतिभा और हुनर में सबसे आगे हैं। बंगाल के युवा मेहनत करने में सबसे आगे हैं। बंगाल एक समय पर पूरे भारत के विकास को गति देता था... बंगाल व्यापार और उद्योगों में सबसे आगे था। लेकिन, आज हालात क्या हैं? यहाँ का युवा ना डिग्री ले पा रहा है... और ना ही उसे रोजगार मिल रहा है! आपके बेटे-बेटियों को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।

साथियों,

पहले कांग्रेस, फिर कम्युनिस्ट और अब TMC…. ये लोग एक के बाद एक आते रहे.... अपनी जेबें भरते रहे.... और बंगाल में विकास के काम ठप्प पड़े रहे। इनफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हमारा बंगाल पीछे होता चला गया। उद्योग धंधे बंद होते चले गए। यहाँ टीएमसी सरकार में नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं। भर्तियों में घोटाले हो रहे हैं। अब समय आ गया है.... अब समय आ गया है.... ये हालात बदलें, बंगाल के युवाओं को बंगाल में काम मिले! ये नौजवान बंगाल के विकास का नेतृत्व करें! एई शोप्नो आपनार, आर एई शोप्नो पूरोन कोरा.... मोदीर गारंटी! मोदीर गारंटी!

साथियों,

TMC सरकार का एक ही एजेंडा है.... ये टीएमसी वाले न खुद काम करेंगे, न करने देंगे! जब तक इनको अपना कटमनी नहीं मिल जाता.... ये किसी भी योजना को गाँव-गरीब तक नहीं पहुँचने देते! इसीलिए, TMC सरकार केंद्र की योजनाओं को रोककर रखती है। आप देखिए.... हम कारीगरों और कामगारों को आगे बढ़ाने के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना चला रहे हैं। हमारे कुम्हार, लोहार, बढ़ई... ऐसे हुनरमंद लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। लेकिन, निर्मम सरकार ने बंगाल में योजना पर ब्रेक लगा रखा है। मुझे बताइए भाइयों, मेरे इन विश्वकर्मा भाइयों को भारत सरकार के पैसे पहुंचने चाहिए कि नहीं पहुंचने चाहिए, उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए , उनका भविष्य उज्ज्वल होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए.. केंद्र सरकार पैसे दे रही है, बंगाल को कुछ नहीं करना है लेकिन उसके बावजूद भी ये विश्वकर्मा समाज के छोटे-छोटे भाई-बहनों को उससे वंचित रखा जाता है।

साथियों,

देशवासियों को मुफ्त बिजली देने के लिए हमने पीएम-सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है। केंद्र की भाजपा सरकार इसके लिए हर लाभार्थी को 75 से 80 हजार रुपए देती है। आपको, बंगाल के मेरे भाई-बहनों को, हर परिवार को मोदी सरकार 75 से 80 हजार रुपए रुपये देती है। जो लाभार्थी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ता है, उसके घर का बिजली बिल जीरो हो जाता है...लेकिन बंगाल सरकार इसे भी लागू नहीं होने दे रही। आप मुझे बताइए आपका बिजली बिल जीरो होना चाहिए कि नहीं। बिजली बिल जीरो करने के लिए मोदी की मदद मिलनी चाहिए कि नहीं चाहिए। जो इसे रोकते हैं वो आपके दुश्मन हैं कि नहीं हैं… बंगाल के दुश्मन हैं कि नहीं हैं… हर परिवार के दुश्मन हैं कि नहीं है।

साथियों,

बंगाल के विकास में चाय बागानों और उनमें काम करने वाले श्रमिकों की बड़ी भूमिका है। लेकिन चाय बागानों के श्रमिकों को PM चाह श्रमिक प्रोत्साहन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। मुझे बताइए.. चाय बागान के मेरे श्रमिकों को ये लाभ मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… उनको मदद मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। केंद्र सरकार की इस योजना में बंगाल सरकार रोड़े अटका रही है।

साथियों,

आप सबने देश भर में पीएम-आवास योजना की सफलता के बारे में सुना है! दुनिया के लोग भी जब सुनते हैं ना तो अचरज करते हैं। जो लोग बंगाल से बाहर रह रहे हैं… ऐसे हर गरीब परिवार को पक्का घर मिल रहा है। लेकिन यहां क्या हुआ? योजना का नाम बदल दिया गया। लाभार्थियों की सूची में गड़बड़ की। और जिन गरीबों को घर मिलना चाहिए था, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं। ईमानदारी से, ट्रांसपैरेंसी से बंगाल के गरीबों को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए….ये टीएमसी सरकार मिलने देगी क्या… ये निर्मम सरकार मिलने देगी क्या… ये सरकार जानी चाहिए कि नहीं जानी चाहिए… गरीबों को घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए

साथियों,

इतना ही नहीं, यही हाल जल जीवन मिशन का भी है। बंगाल में लोग पूछ रहे हैं...जब देश के बाकी हिस्सों में हर घर जल पहुंच सकता है, तो बंगाल में क्यों नहीं? भाइयों बहनों, केवल बिजली, पानी, सड़क और घर इसकी ही बात नहीं है....ये टीएमसी की सरकार...अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से आयुष्मान योजना को लागू नहीं कर रही है। देश के करोड़ों लोग इस योजना के तहत पाँच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का लाभ उठा रहे हैं। मुझे बताइए, गरीबों को बीमारी में पांच लाख रुपये तक की मदद पहुंचनी चाहिए कि नहीं पहुंचनी चाहिए.. मोदी दे रहा है मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए… ये टीएमसी सरकार बीमार लोगों का दुश्मन है कि नहीं है.. अत्याचारी है कि नहीं है… लेकिन बंगाल के गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये वाली आयुष्मान योजना से भी, उस अधिकार से वंचित रखा गया है।

साथियों,

आज बंगाल के किसान की हालत भी किसी से छिपी नहीं है. मुझे बताया गया है कि दो-तीन दिन पहले ही चंद्रकोना में हमारे एक आलू किसान ने खुदकुशी कर ली है। आत्महत्या कर ली है। पश्चिमी मिदनापुर से हुगली और बर्धवान तक....किसानों से झूठ वायदे और सरकारी खरीद में घोटाला ही ये टीएमसी सरकार की पहचान बन गया है। TMC के कट, कमीशन और करप्शन के कारण.... गंदी राजनीति के लिए किसानों की जिंदगी से, गरीबों और मध्यम वर्ग की जिंदगी से माताओं और बहनों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसीलिए....TMC जाएगी.... तो हर गरीब को पक्का घर मिलेगा। गरीब को पक्का घर मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए… मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए.. ये मोदी की गारंटी है। हर गरीब परिवार को बता देना कि जैसे ही टीएमसी की सरकार जाएगी गरीबों का पक्का घर बनना शुरू हो जाएगा। TMC जाएगी.... तो हर घर साफ जल पहुंचेगा। TMC जाएगी.... तो हर गरीब को मुफ्त इलाज मिलेगा। TMC जाएगी.... तो कारीगरों को नए अवसर मिलेंगे। TMC जाएगी.... तभी बंगाल में सुशासन आएगा।

साथियों,

हमारे बंगाल ने आज़ादी के बाद विभाजन सहा! विभाजन की आग देखी.... मजहबी दंगे देखे.... बाद के दशकों में अस्थिरता देखी.... घुसपैठ का दौर देखा... रक्तपात सहा! इस सबकी सबसे बड़ी भुक्तभोगी अगर कोई थीं, तो बंगाल की माताएं, बहनें, बेटियां, बंगाल की महिलाएं थीं। लेफ्ट की सरकार में अपहरण, हत्या, बलात्कार का वो दौर कोई नहीं भूल सकता। इसलिए बंगाल के आप लोग... लेफ्ट को हटाकर बढ़ी आशा के साथ TMC को लेकर आए! आपने TMC पर भरोसा किया! लेकिन, TMC ने लेफ्ट के गुंडों और माफियाओं को ही अपनी पार्टी में भर्ती कर लिया। आज बंगाल में अपराधियों को खुली छूट है। आए दिन बहन-बेटियों के खिलाफ दिल दहलाने वाले अपराध होते हैं। बंगाल का कोई इलाका ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं है। आप याद करिए.... कॉलेज परिसर में दुष्कर्म की घटना.... नाबालिग बेटियों से दुष्कर्म के मामले.... TMC कार्यालय में महिला से बलात्कार.... 7-8 साल की बच्चियों से बलात्कार के खौफनाक कुकृत्य.... कहीं आदिवासी बेटी के साथ दुष्कर्म.... ऐसे ज़्यादातर मामलों में अपराधी कोई न कोई कोई न कोई TMC का नेता होता है... या TMC से जुड़ा होता है!

साथियों,

यहां निर्मम सरकार खुलेआम बलात्कारियों को संरक्षण देती है। अपराधियों को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। आप मुझे बताइए.. अपराधियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता… बलात्कारियों को बचाया जाता कि नहीं बचाया जाता.. संदेशखाली की वो तस्वीरें, और TMC सरकार का रवैया...आर.जी. कर अस्पताल की उस बेटी के साथ हुई दरिंदगी...बंगाल के लोग भूले नहीं हैं....TMC कैसे खुलेआम अपराधियों के साथ खड़ी नज़र आती थी।

साथियों,

इसी मानसिकता का परिणाम है... आज महिलाओं के खिलाफ एसिड अटैक… एसिड अटैक जैसे घिनौने अपराध इतने ज्यादा पश्चिम बंगाल में हो रहे हैं। जो बंगाल एक समय देश का सबसे प्रगतिशील राज्य होता था...आज वहाँ शाम होते ही माएं बेटियों को फोन करके कहती हैं....बाड़ी फिरे ऐशो शोन्धे नामार आगे। शक्ति की पूजा करने वाले बंगाल को ऐसे हालात मंजूर नहीं होंगे। मैं बंगाल की मेरी माताओं बहनों को भरोसा दिलाता हूँ....आप भाजपा को बीजेपी को अपना आशीर्वाद दीजिये। बीजेपी सरकार में महिलाएं सुरक्षित होंगी...और अपराधी जेल में होंगे। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

TMC सरकार गुंडों और अपराधियों की बैसाखी पर चलती है। रंगबाजी और कटमनी... ये TMC की कमाई का जरिया है। ये लोग जानते हैं.... जिस दिन बंगाल के लोग खुलकर सामने आ गए...TMC की विदाई पक्की है। और मैं ये दृश्य देखकर कह सकता हूं कि अब टीएमसी को बचाने वाला कोई नहीं बचा है इसीलिए, ये बंगाल के आप लोगों को डरा-धमकाकर रखना चाहते हैं। इसके लिए TMC वाले माफिया गिरोहों को पालते हैं। ये कट्टरपंथियों को संरक्षण देते हैं। और ऐसे गिरोहों की ताकत बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को बुलाते हैं.... घुसपैठियों को

साथियों,

ये TMC 'माँ, माटी, मानुष' के नारे पे सत्ता में आई थी..... आज वही माँ रो रही है… माटी को लूटा जा रहा है.... और, बंगाली मानुष बंगाल छोड़ने पर मजबूर हो रहा है। घुसपैठियों की वजह से आज बंगाल की ‘रोटी, बेटी, माटी’ उस पर सबसे बड़ा खतरा आ गया है। ये लोग बंगाल के लोगों का रोजगार छीन रहे हैं। हमारी बहन बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। और, बंगाल के लोगों की ज़मीनों पर, बंगाल की माटी पर इन घुसपैठियों को कब्जा दिलवाया जा रहा है। इसका परिणाम आज सबके सामने है। बीते दशकों में बंगाल के ज़्यादातर इलाकों में डेमोग्राफी बदल गई है। बंगाली हिंदुओं को जानबूझकर अल्पसंख्यक बनाया जा रहा है। तुष्टीकरण का ऐसा खुला खेल.... जब शरणार्थी हिंदुओं को नागरिकता देने की बात होती है, तो पूरी TMC उसका विरोध करती है। वो हिन्दू... जिन्होंने कभी विभाजन का समर्थन नहीं किया था! जिन्होंने हमेशा अविभाजित बंगाल को, भारत को अपनी मातृभूमि माना! TMC वाले उन्हें नागरिकता देने का विरोध करते हैं। क्योंकि, उनके लिए उनका वोट बैंक ही सबसे प्रमुख है। वो हिंदुओं को वो अपना वोटबैंक नहीं समझते! उनसे उनके आपराधिक गिरोह नहीं बढ़ते! इसीलिए, ये लोग SIR का भी विरोध करते हैं। ताकि, घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हट ना जाएं...वोटर लिस्ट शुद्ध ना हो जाए! ये तो ऐसे लोग है … जिनकी मृत्यु हो जाए उनके नाम तक निकालने को तैयार नहीं हैं ।

भाइयों बहनों,

डेमोग्राफी के इस खतरनाक बदलाव ने आज बंगाल को असुरक्षित बना दिया है। और अब तो, यहां खुलेआम धमकी दी जा रही है! कहा जा रहा है कि एक खास कम्यूनिटी वाले मिलकर आप लोगों को खत्म कर देंगे! संवैधानिक कुर्सी पर बैठकर ऐसी धमकी !!! करोड़ों बंगाली लोगों को खत्म करने की बात !!!....आपके मुंह में शोभा नहीं देती है मैं पूछना चाहता हूँ…वो कौन लोग हैं, जो TMC सरकार के इशारों पर करोड़ों लोगों को खत्म कर देंगे?

साथियों,

धमकाने-डराने की इस राजनीति को...TMC ने इसे अपना हथियार बना लिया है। चुनाव में वोटरों को धमकी... सरकार के नीतियों के आलोचकों को धमकी... मीडिया को धमकी... विपक्ष को धमकी... ये बंगाल में खौफ का कैसा माहौल बनाकर रखना चाहते हैं... ये पूरे देश को जानना चाहिए... ये लोग कहते हैं... तृणमूल को जिसका वोट नहीं, TMC को जिसका वोट नहीं, तो वो बंगाली नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो सरकार योजना का लाभ नहीं! तृणमूल को वोट नहीं, तो घरों में बिजली पानी नहीं! TMC सिंडीकेट के जरिए नहीं जाओगे, तो कोई सप्लाइ नहीं! लेकिन साथियों, मैं TMC को याद दिलाना चाहता हूँ... TMC की गुंडागर्दी के दिन अब खत्म होने जा रहे हैं। TMC सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। यहां बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद एक तरफ हम, सबका साथ, सबका विकास ये मंत्र लेकर चलेंगे, दूसरी तरफ सबका हिसाब लिया जाएगा। टीएमसी के वे गुंडे, TMC के ये गुंडे जो आपको डराते हैं...बीजेपी सरकार में उनके डर भरे दिन शुरू होना तय है। बीजेपी सरकार में खौफ हर अपराधी को होगा... खौफ हर घुसपैठिए को होगा...खौफ तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को होगा...क्योंकि, कानून अपना काम करेगा! कानून का राज आएगा ऐसे लोगों को मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। ऐसे अपराधियों की सिर्फ एक ही जगह होगी- एक ही जगह होगी जेल। जेल। जेल।

साथियों,

बंगाल की निर्मम सरकार में आज सबसे ज्यादा प्रताड़ित यहाँ का दलित, आदिवासी और हमारे गरीब भाई-बहन हैं। आदिवासी समाज के साथ कैसा अन्याय होता है... ये किसी से छिपा नहीं है। लेकिन, अब तो TMC सरकार ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। आप देखिए...अभी कुछ दिन पहले हमारे देश की महामहिम राष्ट्रपति... आदिवासी समाज की बेटी… आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी बंगाल आईं थीं। उन्हें संथाल आदिवासी परंपरा के पावन उत्सव में शामिल होना था। लेकिन अहंकार में डूबी इस निर्मम सरकार ने न केवल उस कार्यक्रम का बहिष्कार किया, बल्कि उसे पूरी तरह बदइंतजामी के हवाले कर दिया। क्योंकि, एक आदिवासी बेटी इतने बड़े पद पर है.... TMC वालों को उनका सम्मान मंजूर नहीं हुआ! द्रौपदी मुर्मू जी, जो हमेशा अपनी सरलता के लिए जानी जाती हैं.... उन्हें खुद बड़े दुखी मन से खेद व्यक्त करना पड़ा! भारत के राष्ट्रपति को अपनी तकलीफ बतानी पड़ी! TMC वालों को ये याद रखना पड़ेगा...उन्होंने केवल द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान नहीं किया है। उन्होंने करोड़ों आदिवासियों का अपमान किया है। उन्होंने करोड़ों महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इन्होंने भारत के संविधान का अपमान किया है। इन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान किया है और इसका जवाब बंगाल के लोगों से टीएमसी को मिलने वाला है। निर्मम सरकार को मिलने वाला है।

साथियों,

TMC सरकार ने बंगाल को पूरी तरह से अराजकता के हवाले कर दिया है। संवैधानिक व्यवस्था पर आए हर दिन हमले करने के वो रास्ते खोजते रहते हैं, हमले करते रहते हैं। पिछले कुछ महीनों में आपने देखा है....जब भी चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है, मतदाता सूची की शुद्धि की कोशिश करता है, तब टीएमसी उसके खिलाफ हमला करने लगती है। जो संस्था स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है, उसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। ऐसा ही व्यवहार देश की सेना को लेकर दिखाई देता है। जब 2019 में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की, तब TMC ने देश की वायुसेना से कार्रवाई का सबूत मांगा।

साथियों,

यहां राज्य सरकार...पुलिस को स्वतंत्र रूप से जांच करने नहीं देती। जब राष्ट्रीय एजेंसियां TMC सरकार के भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों की जांच करना चाहती हैं, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश होती है। अब जरा सोचिए, न्याय के लिए लोग आखिर कहां जाएंगे? साथियों, तृणमूल वाले यही अराजकता दिल्ली तक फैलाने की कोशिश करते हैं। आपने संसद में भी देखा है… सदन के भीतर कैसे कागज फाड़े जाते हैं, कैसे बहस को रोका जाता है, कैसे सदन की कार्यवाही को बाधित किया जाता है। देश...TMC की शर्मनाक हरकतें देखकर हैरान होता है। साथियों,बंगाल के प्रबुद्ध लोग अब इस अराजकतावादी सरकार के खिलाफ संकल्प ले चुके हैं। इस अराजक सरकार को उखाड़ फेंकने का काम इसी धरती के लोग करने वाले हैं।

साथियों,

आज यहां जो जनसैलाब उमड़ा है...ये पश्चिम बंगाल की जागती हुई चेतना है। यह उस बदलाव की आहट है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग की पहाड़ियों से लेकर सुंदरबन के द्वीपों तक, उत्तर बंगाल के चाय बागानों से लेकर कोलकाता की गलियों तक, आज हर जगह पर एक ही चर्चा है। बदलाव चाहिए... और ये बदलाव अब होकर रहेगा। साथियों, बंगाल की आत्मा कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल… का नौजवान कभी हार मानने वाला नहीं है। बंगाल की बेटियां कभी हार मानने वाली नहीं है। बंगाल का किसान कभी हार मानने वाला नहीं है। जब-जब इस भूमि के सामने चुनौतियाँ आई हैं, तब-तब यहाँ की जनता ने साहस के साथ उनका सामना किया है। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने भी हमें यही संदेश दिया है। उन्होंने कहा था...

“बिपोदे मोरे रोक्खा करो ए नोहे मोर प्रार्थना,
बिपोदे आमि ना जेनो कोरि भॉय।”

आज भी वही समय है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे। कुछ लोग कहेंगे कि बदलाव संभव नहीं है। लेकिन याद रखिए, और याद जरूर रखें.. जब जनता ठान लेती है, तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। और बंगाल की जनता ने जब भी ठाना है, इतिहास बदल कर दिखाया है। आज मुझे इस ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में वही आत्मविश्वास, मेरी आंखों के सामने दिखाई दे रहा है। याद रखिए...इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं... इस बार चुनाव बंगाल की आत्मा को बचाने का है। इस बार चुनाव व्यवस्था बदलने का है। इस बार चुनाव कट-मनी से छुटकारे का है। इस बार चुनाव डर से मुक्ति का है। मैं आने वाले परिवर्तन के लिए मेरे बंगाल के भाइयों बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिए, मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए..

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पाल्टानो दोरकार, चाइ बीजेपी शॉरकार!

पश्चिम बोंगेर जॉनोगोनेर जॉय होक!

जय हिंद।

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

वंदे.. वंदे... वंदे... वंदे.. मातरम्!