ਮਾਣਯੋਗ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਨਰੇਂਦਰ ਮੋਦੀ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਵਾਲੀ ਆਰਥਿਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਦੀ ਕੈਬਨਿਟ ਕਮੇਟੀ (ਸੀਸੀਈਏ) ਨੇ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਸੀਜ਼ਨ 2023-24 ਲਈ ਸਾਰੀਆਂ ਲਾਜ਼ਮੀ ਖਰੀਫ ਫਸਲਾਂ ਲਈ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਸਮਰਥਨ ਮੁੱਲ (ਐੱਮਐੱਸਪੀ) ਵਿੱਚ ਵਾਧੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਵਾਨਗੀ ਦੇ ਦਿੱਤੀ ਹੈ।

 

ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਮੰਡੀਕਰਨ ਸੀਜ਼ਨ 2023-24 ਲਈ ਖਰੀਫ ਫ਼ਸਲਾਂ ਦੇ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਸਮਰਥਨ ਮੁੱਲ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਜੋ ਉਤਪਾਦਕਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਉਪਜ ਲਈ ਲਾਹੇਵੰਦ ਕੀਮਤਾਂ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਈਆਂ ਜਾ ਸਕਣ ਅਤੇ ਫ਼ਸਲੀ ਵਿਵਿਧਤਾ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕੇ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਹੇਠਾਂ ਦਿੱਤੀ ਸਾਰਣੀ ਵਿੱਚ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ:

 

ਖਰੀਫ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਸੀਜ਼ਨ (ਕੇਐੱਮਐੱਸ) 2023-24 ਲਈ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਸਮਰਥਨ ਮੁੱਲ

(ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ)

ਫਸਲਾਂ

2014-15 ਲਈ ਐੱਮਐੱਸਪੀ

2022-23 ਲਈ ਐੱਮਐੱਸਪੀ

2023-24 ਲਈ ਐੱਮਐੱਸਪੀ

2023-24 ਲਈ ਲਾਗਤ* ਕੇਐੱਮਐੱਸ

2022-23 ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਐੱਮਐੱਸਪੀ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ

ਲਾਗਤ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਾਰਜਿਨ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਵਿੱਚ

ਝੋਨਾ - ਆਮ

1360

2040

2183

1455

143

50

ਝੋਨਾ-ਗਰੇਡ ਏ^

1400

2060

2203

-

143

-

ਜਵਾਰ-ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ

1530

2970

3180

2120

210

50

ਜਵਾਰ- ਮਾਲਡੰਡੀ^

1550

2990

3225

-

235

-

ਬਾਜਰਾ

1250

2350

2500

1371

150

82

ਰਾਗੀ

1550

3578

3846

2564

268

50

ਮੱਕੀ

1310

1962

2090

1394

128

50

ਤੁਅਰ/ਅਰਹਰ

4350

6600

7000

4444

400

58

ਮੂੰਗ

4600

7755

8558

5705

803

50

ਉੜਦ

4350

6600

6950

4592

350

51

ਮੂੰਗਫਲੀ

4000

5850

6377

4251

527

50

ਸੂਰਜਮੁਖੀ ਦੇ ਬੀਜ

3750

6400

6760

4505

360

50

ਸੋਇਆਬੀਨ (ਪੀਲਾ)

2560

4300

4600

3029

300

52

ਤਿਲ

4600

7830

8635

5755

805

50

ਨਾਈਜਰਸੀਡ

3600

7287

7734

5156

447

50

ਕਪਾਹ (ਮੀਡੀਅਮ ਸਟੈਪਲ)

3750

6080

6620

4411

540

50

ਕਪਾਹ (ਲੰਬੀ ਸਟੈਪਲ) ^

4050

6380

7020

-

640

-

 

* ਲਾਗਤ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਰੇ ਖ਼ਰਚੇ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਭੁਗਤਾਨ ਕੀਤੇ ਗਏ ਖਰਚੇ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਕਿਰਾਏ ਦੀ ਮਾਨਵ ਮਜ਼ਦੂਰੀ, ਬਲਦਾਂ ਦੀ ਮਜ਼ਦੂਰੀ/ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਮਜ਼ਦੂਰੀ, ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੀਜ਼ ਲਈ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਕਿਰਾਇਆ, ਬੀਜਾਂ, ਖਾਦਾਂ, ਰੂੜ੍ਹੀ, ਸਿੰਚਾਈ ਦੇ ਖਰਚੇ ਜਿਹੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 'ਤੇ ਕੀਤੇ ਖਰਚੇ, ਔਜ਼ਾਰਾਂ ਅਤੇ ਖੇਤਾਂ ਦੀਆਂ ਇਮਾਰਤਾਂ ‘ਤੇ ਕੀਤੇ ਖ਼ਰਚੇ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਮੁੱਲ ਵਿੱਚ ਕਮੀ (depreciation), ਵਰਕਿੰਗ ਕੈਪੀਟਲ 'ਤੇ ਵਿਆਜ, ਪੰਪ ਸੈੱਟਾਂ ਦੇ ਸੰਚਾਲਨ ਲਈ ਡੀਜ਼ਲ/ਬਿਜਲੀ ਆਦਿ, ਫੁਟਕਲ ਖਰਚੇ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਕ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਦਾ ਲਗਾਇਆ ਗਿਆ ਮੁੱਲ।

^ ਝੋਨਾ (ਗਰੇਡ ਏ), ਜਵਾਰ (ਮਾਲਦੰਡੀ) ਅਤੇ ਕਪਾਹ (ਲੰਬਾ ਸਟੈਪਲ) ਲਈ ਲਾਗਤ ਡੇਟਾ ਵੱਖਰੇ ਤੌਰ 'ਤੇ ਸੰਕਲਿਤ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।

 

ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਸੀਜ਼ਨ 2023-24 ਲਈ ਖਰੀਫ ਫ਼ਸਲਾਂ ਲਈ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ ਸਮਰਥਨ ਮੁੱਲ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਕੇਂਦਰੀ ਬਜਟ 2018-19 ਦੀ ਘੋਸ਼ਣਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ, ਜਿਸਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਚਿਤ ਮਿਹਨਤਾਨਾ ਦਿੱਤੇ ਜਾਣ ਲਈ ਵਾਜਬ ਤੌਰ 'ਤੇ ਆਲ-ਇੰਡੀਆ ਵੇਟਿਡ ਔਸਤ ਉਤਪਾਦਨ ਲਾਗਤ ਦੇ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 1.5 ਗੁਣਾ ਦੇ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਐੱਮਐੱਸਪੀ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਉਤਪਾਦਨ ਲਾਗਤ ਤੋਂ ਵੱਧ ਅਨੁਮਾਨਿਤ ਮਾਰਜਿਨ ਬਾਜਰੇ (82%) ਦੇ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੋਣ ਦਾ ਅਨੁਮਾਨ ਹੈ, ਜਿਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁਰ (58%), ਸੋਇਆਬੀਨ (52%) ਅਤੇ ਉੜਦ (51%) ਹੈ। ਬਾਕੀ ਫ਼ਸਲਾਂ ਲਈ, ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਉਤਪਾਦਨ ਲਾਗਤ ਤੋਂ ਵੱਧ ਮਾਰਜਨ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 50% ਹੋਣ ਦਾ ਅਨੁਮਾਨ ਹੈ। 

 

ਹਾਲ ਹੀ ਦੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ, ਸਰਕਾਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਫਸਲਾਂ ਲਈ ਇੱਕ ਉੱਚੇਰੀ ਐੱਮਐੱਸਪੀ ਦੀ ਪੇਸ਼ਕਸ਼ ਕਰਕੇ, ਅਨਾਜ ਜਿਵੇਂ ਦਾਲਾਂ, ਤੇਲ ਬੀਜਾਂ, ਅਤੇ ਪੌਸ਼ਟਿਕ-ਅਨਾਜ/ਸ਼੍ਰੀ ਅੰਨ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਹੋਰ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਵਿਵਿਧਤਾ ਲਈ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਕਾਸ ਯੋਜਨਾ (ਆਰਕੇਵੀਵਾਈ), ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਖੁਰਾਕ ਸੁਰੱਖਿਆ ਮਿਸ਼ਨ (ਐੱਨਐੱਫਐੱਸਐੱਮ) ਜਿਹੀਆਂ ਕਈ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਅਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੀਆਂ ਹਨ।

 

2022-23 ਲਈ ਤੀਸਰੇ ਅਗਾਊਂ ਅਨੁਮਾਨਾਂ ਅਨੁਸਾਰ, ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਕੁੱਲ ਅਨਾਜ ਉਤਪਾਦਨ ਰਿਕਾਰਡ 330.5 ਮਿਲੀਅਨ ਟਨ ਹੋਣ ਦਾ ਅਨੁਮਾਨ ਹੈ ਜੋ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ 2021-22 ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ 14.9 ਮਿਲੀਅਨ ਟਨ ਵੱਧ ਹੈ। ਇਹ ਪਿਛਲੇ 5 ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਅਧਿਕ ਵਾਧਾ ਹੈ।

 

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।