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उपस्थित सभी महानुभाव, आप सबको नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं,

किसी संस्था के जीवन में 60 साल की यात्रा बहुत बड़ी नहीं होती है। 60 साल का कार्यकाल भारत जैसे विशाल देश में किसी Institution को build up करने में, उसे लोगों तक पहुंचाने में ये समय बहुत कम पड़ता है। व्यक्ति के लिए जीवन में 60 साल बहुत बड़ी बात होती है। लेकिन संस्था के जीवन में एक प्रकार से उसका प्रारंभ होता है। मैं मानता हूं कि अब ICICI Group उस स्थिति में पहुंच रहा है जिसकी बदौलत,जिन आशाओं और आकांक्षाओं को लेकर उसका जन्म हुआ, जिन अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए उसने यात्रा की, उसको Achieve करने का अब उसके सामने समय आया है और तब उसको 60 साल की जो गति है वो काम नहीं आती है। 60 साल का जो canvass है, वो भी छोटा पड़ता है। उसे बड़े canvass पर लंबी दौड़ के साथ अपनी योजनाएं करनी होती हैं। लेकिन, 60 साल का ये अनुभव भारत की विकास यात्रा में, banking Sector के योगदान में एक बहुमूल्य भूमिका निभाने का, उसकी सफलता का आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक ताकतवर बनाने में बहुत-बहुत उपयोगी होगा। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

कभी-कभी मुझे लगता है कि इस ग्रुप के नाम पर ICICI मैं समझता हूं 60 साल हो गए, आई को बहुत देखा, अब ICU होना चाहिए। मैं आपको देख रहा हूं, हिंदुस्तान के गरीब को देख रहा हूं और उस रूप में मैं आशा करता हूं कि जब 60 साल मनाए जा रहे हैं, क्यों न group के प्रमुख लोग बैठें। Grass root level के बैंक के साथ जुड़े हुए सभी लोग बैठें और हम जब 75 साल के होंगे, तब तक क्या क्या achieve करेंगे, हमारा social charter क्या होगा?और एक देश के सामने उस रूप में बैंकिंग क्षेत्र में ICICI lead कर सकता है क्या? for fifteen years, next fifteen years 75 celebrate करने से पहले हम ये social charter ले करके आ रहे हैं। 10 हों, 12 हों, इन चीज़ों को हम देश में ला करके रहेंगे।

कभी कभार एक आध Institution lead करती है तो बाकी सब उसको follow करते हैं और अपने आप में एक momentum बन जाता है और उस दिशा में हम काम कर सकते हैं। 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल हो रहे हैं और 25 में, 30 में आपके 75 साल होंगे। उस अर्थ में बीच में आपको एक अवसर मिलता है कि भारत के 75 साल के समय का क्या goal हो और Next अपके 75 होंगे तब क्या हो। एक social charter के साथ देश के सामने, financial Sector किस प्रकार से नई दिशा दे सकता है, इसके सपनों को ले करके आप आएंगे। मैं समझता हूं कि देश की बहुत बड़ी सेवा होगी। देश को एक नई दिशा मिलेगी।

मैं चंदा जी का विशेष रूप से इसलिए भी अभिनंदन करता हूं कि इस काम को मैं बड़े आग्रह से करना चाहता हूं। स्वच्छ भारत! उन्होंने उस बीड़े को उठाया, स्वयं ने भी इस काम को किया। लेकिन साथ- साथ उन्होंने अपनी सभी Branches को सप्ताह में एक दिन सफाई का कुछ-न-कुछ करने के लिए प्रेरित किया है। एक momentum खड़ा हुआ है। उनके इन प्रयासों का मैं अभिनंदन करता हूं और सभी ग्रुप को, सभी Branches को, उन Branches में बैठे हुए सभी बैंक के कर्मचारियों को इस काम को आगे बढ़ाने के लिए बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं, बहुत बहुत बधाई देता हूं।

लेकिन बैंक सेक्टर से मेरी एक और अपेक्षा है। क्या हम इस काम को तो आगे बढ़ाएं, ज़रूर बढ़ाएं। लेकिन हम हमारे finance के जो areas हैं, उसमें एक नए क्षेत्र का इज़ाफा कर सकते हैं क्या और उसको प्राथमिकता दे सकते हैं क्या? क्या हमारा group एक साल के भीतर- भीतर bank finance की मदद से नौजवानों को प्रेरित करके कम से कम एक लाख स्वच्छता के entrepreneur तैयार कर सकते हैं? Waste management एक बहुत बड़ा Business है। solid west management के क्षेत्र में नौजवान आएं, बहुत बड़ा Business है, Waste water treatment के Business में आएं, बहुत बड़ा क्षेत्र है। हम इस प्रकार के नए entrepreneur तैयार कर सकते हैं। हमारी young generation को, उसकी training करना, उसको model करना और financial व्यवस्था देना।

मैं समझता हूं कि जो काम स्वच्छता के अभियान में आपकी बैंक कर रही है, लेकिन वो स्वच्छता के entrepreneur तैयार करती है तो शायद एक sustainable व्यवस्था, एक लंबे समय तक काम आने वाली व्यवस्था को हम उभार सकते हैं और हमें उस दिशा में प्रयास करना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आप infrastructure में पैसे देते होंगे, आप पावर प्रोजेक्ट में देते होंगे आप और development में देते होंगे, बहुत बहुत बड़े कारोबार आपके चलते होंगे। यहां जिस प्रकार का audience है, उसको लगता है कि बड़े काम आपके चलते होंगे। इस audience को भी देख कर मैं तय कर सकता हूं। लेकिन मैं एक और क्षेत्र में ले जाने के लिए कह रहा हूं, छोटे छोटे लोग जो entrepreneur के रूप में इस field में आए, उनको प्रेरित करें। एक बहुत बड़ा काम होगा।

उसी प्रकार से यहां पर video conference से हमारे साबरकांठा को एक छोटे से गांव के लोग इस कार्यक्रम में शरीक हुए हैं। मजा मैं बैदा बिदा! इस गांव की एक और भी विशेषता है। देश का पहला गांव ऐसा है जहां पर cattle hostel है। हमारे यहां गांवों में पशु अपने घर के बाहर ही बांध कर रखते हैं और सारी गंदगी वहीं होती है और बीमारी की जड़ भी वहीं होती है। आजकल लड़कियों को गांव में शादी करने में एतराज नहीं है, लेकिन ये पशु वाला काम करना पड़ता है तो उसके लिए उसकी तैयारी कम है। तो हमें एक नई समाज रचना करनी पड़ेगी और उसी विचार में से एक प्रयोग यहां शुरू हुआ है। गांव के सारे cattle hostel में रहते हैं और मालिक लोग hostel में जाते हैं, अपने पशु की देखभाल करते हैं। दूध लेने के समय, दूध के समय पहुँच जाते हैं। पूरा गांव साफ-सुथरा रहता है। एक hostel का प्रयोग आने वाले दिनों में देशभर में ये होने वाला है। अगर हम हमारे प्रिय से प्रिय बच्चों को hostel में रख सकते हैं तो हमारे cattle के लिए hostel क्यों नहीं बना सकते! और उसके कारण उनकी देखभाल भी अच्छी होती है। जब मैं वहां था, मुझे तब तो मालूम है, उनकी income में 20 percent बढ़ोतरी हुई थी, केवल hostel के कारण, क्योंकि वो उसमें से fertilizer निकालने लगे, गैस बनाने लगे, बिजली पैदा करने लगे, कई चीज़ें उनकी हुई, दूध में बढ़ोतरी हुई, अब उसी गांव को बैंक ने Digital Village बनाने के लिए और उसको बहुत सारा काम पूरा कर दिया है।

अब गांव भी बहुत इंतजार करने वाला नहीं है, उसके expectations भी वही हैं जो शहर में बैठे समृद्ध वर्ग के हैं और ये समय की मांग है कि हम उस पर Focus करें। Rural Development भी भारत की GDP को बढ़ाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। नए तरीके से उसकी संभावनाएं बढ़ी हैं, उसके Infrastructure पर बल दे दिया है, Agri-structure पर बल दिया जाए, Agri-structure valuation पर बल दिया जाए। बहुत बड़ी संभावनाएं हमारे Rural life में आर्थिक विकास का एक बहुत बड़ा Power Station एक नया हम खड़ा कर सकते हैं, ये संभावनाएं बढ़ी हैं। ये Digital Village की कल्पना आने वाले दिनों में, जो Digital India का सपना हम पूरा करना चाहते हैं, उसमें ये भी चीजें एक Model के रूप में हमारे सामने आएंगी और काम आएंगी। मैं इस Initiative के लिए भी आपको बधाई देता हूं।

अकोद्रा गांव के लोग तो अब Cashless उनका कारोबार चले लेकिन हम ये सपना कब पूरा करेंगे कि भारत में भी Cashless आर्थिक व्यवस्था विकसित हो और मैं चाहता हूं कि हिंदुस्तान के बैंकिंग सेक्टर में इसकी Competition होनी चाहिए। कौन बैंक है जिसका Maximum Transaction है और Cashless है। कालेधन के उपायों में एक महत्वपूर्ण उपाय ये है, Cashless Transaction एक बहुत बड़ा उसका कारण और हमें इसको Promote करना चाहिए, लोगों का आदत डालनी चाहिए और बैंक के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती मैं मानता हूं वो ये है, एशिया के ये वो भू-भाग है। भारत के उसके आस-पड़ोस के देश Including China विश्व में ये एक ऐसा भू-भाग है जहां परंपरागत रूप से Saving का स्वभाव है। सदियों से परंपरा है हर पीढ़ी के मां-बाप आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ-कुछ बचाना ये सोच रखते हैं। दुनिया के और हिस्से हैं कि जहां पर Credit Card की दुनिया हैं, जहां पर बच्चों के हिस्से में Credit Card आता है और कुछ नहीं आता है। यहां वो सोच नहीं है, यहां पर Saving की सोच है लेकिन काल क्रम स्थिति ये बन गई कि उसका स्वभाव तो बन गया है कि भई बच्चों के लिए कुछ छोड़कर जाना। Security के लिए कुछ व्यवस्था रखनी चाहिए लेकिन वो उसके लिए Gold की तरफ चला गया है। उसको लगता है कि सोना खरीदकर रख लो भाई, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए। शायद सौ में से एक इंसान भी नहीं निकलता होगा कि जिसको अचानक सोना बेचकर के कहीं जाना पड़ा हो, सौ में से एक भी नहीं निकलता है लेकिन Psychological Effect है कि भई सोना होगा तो आधी रात काम आएगा। बैंकिंग सेक्टर के सामने Challenge है वो Credibility हर इंसान के दिमाग में हम पैदा कर सकते हैं कि जिसको कभी उसकी इच्छा न हो कि अब सोने खरीदने की इच्छा न हो, गांव में अब बैंक की ब्रांच है, एटीएम है, मुझे कभी अब पैसों के लिए संकट नहीं होगा, सारी व्यवस्थाएं मौजूद हैं अब मुझे सोना खरीदकर के कोने में रखकर के जरूरत नहीं है। भारत की Economy में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। बहुत बड़ा वर्ग है जो आवश्यकता से अधिक होड़ रखता है उसका मूल कारण उसके दिमाग में Safety, Security और Future होता है। अगर बैंक के द्वारा उसे Assurance मिलता है, उसमें विश्वास पैदा होता है कि हां भई इसके साथ अब मेरा नाता जुड़ गया यानि अब मेरे जीवन के संकट के काल में भी ये मेरा साथी है। मैं समझता हूं कि ये एक Gold Hub का Alternative बनने के लिए एक Golden Opportunity में देख रहा हूं।

क्या हम 75 साल मनाएं तब इन चीजों को Achieve करने की दिशा में कुछ कर सकता हैं क्या। आप देख सकते हैं कि एक बैंक Social Transformation का Agent बन सकता है। सिर्फ बैंकिंग सेवाएं नहीं…. Social Transformation का Agent बन सकता है। हम उस दिशा में नए तरीके से हमारे Banking Sector सोचें। मुझे विश्वास है कि हम बहुत कुछ देश को दे सकते हैं।

मैं फिर एक बार आज इस अवसर पर इस 60 साल की यात्रा में जिन-जिन्होंने योगदान दिया है, जिन्होंने इसका नेतृत्व किया वे सब अभिनंदन के अधिकारी हैं क्योंकि एक कालखंड में सब होता नहीं है। एक लंबी प्रक्रिया के बाद ये परिणाम मिलता है इसलिए इस Group के सभी उन वरिष्ठजनों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Empowerment of the poor is being given top priority today: PM Modi
August 03, 2021
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Earlier, the scope and budget of cheap ration schemes kept on increasing but starvation and malnutrition did not decrease in that proportion: PM
Beneficiaries are getting almost double the earlier amount of ration after Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana started: PM
More than 80 crore people people are getting free ration during the pandemic with an expenditure of more than 2 lakh crore rupees: PM
No citizen went hungry despite the biggest calamity of the century: PM
Empowerment of the poor is being given top priority today: PM
New confidence of our players is becoming the hallmark of New India: PM
Country is moving rapidly towards the vaccination milestone of 50 crore: PM
Let's take holy pledge to awaken new inspiration for nation building on Azadi ka Amrit Mahotsav: PM

नमस्‍कार! गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, उप-मुख्यमंत्री श्री नितिन भाई पटेल जी, संसद में मेरे साथी और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष श्रीमान सी. आर. पाटिल जी, पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के सभी लाभार्थी, भाइयों और बहनों!

बीते वर्षों में गुजरात ने विकास और विश्वास का जो अनवरत सिलसिला शुरु किया, वो राज्य को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। गुजरात सरकार ने हमारी बहनों, हमारे किसानों, हमारे गरीब परिवारों के हित में हर योजना को सेवाभाव के साथ ज़मीन पर उतारा है। आज गुजरात के लाखों परिवारों को पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत एक साथ मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। ये मुफ्त राशन वैश्विक महामारी के इस समय में गरीब की चिंता कम करता है, उनका विश्वास बढ़ाता है। ये योजना आज से प्रारंभ नहीं हो रही है, योजना तो पिछले एक साल से करीब-करीब चल रही है ताकि इस देश का कोई गरीब भूखा ना सो जाए।

मेरे प्‍यारे भाईयों और बहनों,

गरीब के मन में भी इसके कारण विश्‍वास पैदा हुआ है। ये विश्वास, इसलिए आया है क्योंकि उनको लगता है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी हो, देश उनके साथ है। थोड़ी देर पहले मुझे कुछ लाभार्थियों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, उस चर्चा में मैंने अनुभव भी किया कि एक नया आत्‍मविश्‍वास उनके अन्‍दर भरा हुआ है।

साथियों,

आज़ादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वो सीमित ही रहा। देश के खाद्य भंडार बढ़ते गए, लेकिन भुखमरी और कुपोषण में उस अनुपात में कमी नहीं आ पाई। इसका एक बड़ा कारण था कि प्रभावी डिलिवरी सिस्टम का ना होना और कुछ बिमारियाँ भी आ गईं व्‍यवस्‍थाओं में, कुछ cut की कंपनियाँ भी आ गईं, स्‍वार्थी तत्‍व भी घुस गये। इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरु किया गया। नई technology को इस परिवर्तन का माध्यम बनाया गया। करोड़ों फर्ज़ी लाभार्थियों को सिस्टम से हटाया। राशन कार्ड को आधार से लिंक किया और सरकारी राशन की दुकानों में digital technology को प्रोत्साहित किया गया। आज परिणाम हमारे सामने है।

भाइयों और बहनों,

सौ साल की सबसे बड़ी विपत्ति सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी दुनिया पर आई है, पूरी मानव जाति पर आई है। आजीविका पर संकट आया, कोरोना लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद करने पड़े। लेकिन देश ने अपने नागरिकों को भूखा नहीं सोने दिया। दुर्भाग्य से दुनिया के कई देशों के लोगों पर आज संक्रमण के साथ-साथ भुखमरी का भी भीषण संकट आ गया है। लेकिन भारत ने संक्रमण की आहट के पहले दिन से ही, इस संकट को पहचाना और इस पर काम किया। इसलिए, आज दुनियाभर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की प्रशंसा हो रही है। बड़े-बड़े expert इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि भारत अपने 80 करोड़ से अधिक लोगों को इस महामारी के दौरान मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रहा है। इस पर 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक ये देश खर्च कर रहा है। मकसद एक ही है- कोई भारत का मेरा भाई-बहन, मेरा कोई भारतवासी भूखा ना रहे। आज 2 रुपए किलो गेहूं, 3 रुपए किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को 5 किलो गेहूं और चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानि इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्ड धारकों को लगभग डबल मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ये योजना दीवाली तक चलने वाली है, दिवाली तक किसी गरीब को पेट भरने के लिये अपनी जेब से पैसा नहीं निकालना पड़ेगा। गुजरात में भी लगभग साढ़े 3 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन का लाभ आज मिल रहा है। मैं गुजरात सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा करूंगा कि उसने देश के दूसरे हिस्सों से अपने यहां काम करने आए श्रमिकों को भी प्राथमिकता दी। कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए लाखों श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिला है। इसमें बहुत सारे ऐसे साथी थे, जिनके पास या तो राशन कार्ड था ही नहीं, या फिर उनका राशन कार्ड दूसरे राज्यों का था। गुजरात उन राज्यों में है जिसने सबसे पहले वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना को लागू किया। वन नेशन, वन राशन कार्ड का लाभ गुजरात के लाखों श्रमिक साथियों को हो रहा है।

भाइयों और बहनों,

एक दौर था जब देश में विकास की बात केवल बड़े शहरों तक ही सीमित होती थी। वहाँ भी, विकास का मतलब बस इतना ही होता था कि ख़ास-ख़ास इलाकों में बड़े बड़े flyovers बन जाएं, सड़कें बन जाएं, मेट्रो बन जाएं! यानी, गाँवों-कस्बों से दूर, और हमारे घर के बाहर जो काम होता था, जिसका सामान्‍य मानवी से लेना-देना नहीं था उसे विकास माना गया। बीते वर्षों में देश ने इस सोच को बदला है। आज देश दोनों दिशाओं में काम करना चाहता है, दो पटरी पर चलना चाहता है। देश को नए infrastructure की भी जरूरत है। Infrastructure पर भी लाखों-करोड़ों खर्च हो रहा है, उससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, लेकिन साथ ही, सामान्य मानवी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, Ease of Living के लिए नए मानदंड भी स्थापित कर रहे हैं। गरीब के सशक्तिकरण, को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जब 2 करोड़ गरीब परिवारों को घर दिये जाते हैं तो इसका मतलब होता है कि वो अब सर्दी, गर्मी, बारिश के डर से मुक्त होकर जी पायेगा, इतना ही नहीं, जब खुद का घर होता है ना तो आत्‍मसम्‍मान से उसका जीवन भर जाता है। नए संकल्‍पों से जुड़ जाता है और उन संकल्‍पों को साकार करने के लिये गरीब परिवार समेत जी जान से जुट जाता है, दिन रात मेहनत करता है। जब 10 करोड़ परिवारों को शौच के लिए घर से बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है तो इसका मतलब होता है कि उसका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वो पहले सोचता था कि सुखी परिवारों के घर में ही toilet होता है, शौचालय उन्‍हीं के घर में होता है। गरीब को तो बेचारे को अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है, खुले में जाना पड़ता है। लेकिन जब गरीब को शौचालय मिलता है तो वो अमीर की बराबरी में अपने आप को देखता है, एक नया विश्‍वास पैदा होता है। इसी तरह, जब देश का गरीब जन-धन खातों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ता है, मोबाइल बैंकिंग गरीब के भी हाथ में होती है तो उसे ताकत मिलती है, उसे नए अवसर मिलते हैं। हमारे यहाँ कहा जाता है-

सामर्थ्य मूलम्
सुखमेव लोके!

अर्थात्, हमारे सामर्थ्य का आधार हमारे जीवन का सुख ही होता है। जैसे हम सुख के पीछे भागकर सुख हासिल नहीं कर सकते बल्कि उसके लिए हमें निर्धारित काम करने होते हैं, कुछ हासिल करना होता है। वैसे ही सशक्तिकरण भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधा और गरिमा बढ़ने से होता है। जब करोड़ों गरीबों को आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज मिलता है, तो स्वास्थ्य से उनका सशक्तिकरण होता है। जब कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की सुविधा सुनिश्चित की जाती है तो इन वर्गों का शिक्षा से सशक्तिकरण होता है। जब सड़कें शहरों से गाँवों को भी जोड़ती हैं, जब गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलता है तो ये सुविधाएं उनका सशक्तिकरण करती हैं। जब एक व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाएं मिलती हैं तो वो अपनी उन्नति के बारे में, देश की प्रगति में सोचता है। इन सपनों को पूरा करने के लिए आज देश में मुद्रा योजना है, स्वनिधि योजना है। भारत में ऐसी अनेकों योजनाएं गरीब को सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दे रही हैं, सम्मान से सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं।

भाइयों और बहनों,

जब सामान्य मानवी के सपनों को अवसर मिलते हैं, व्यवस्थाएं जब घर तक खुद पहुँचने लगती हैं तो जीवन कैसे बदलता है, ये गुजरात बखूबी समझता है। कभी गुजरात के एक बड़े हिस्से में लोगों को, माताओं-बहनों को पानी जैसी जरूरत के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। हमारी सभी माताएं-बहनें साक्षी हैं। ये राजकोट में तो पानी के लिये ट्रेन भेजनी पड़ती थी। राजकोट में तो पानी लेना है तो घर के बाहर गड्ढा खोदकर के नीचे पाइप में से पानी एक-एक कटोरी लेकर के बाल्‍टी भरनी पड़ती थी। लेकिन आज, सरदार सरोवर बांध से, साउनी योजना से, नहरों के नेटवर्क से उस कच्छ में भी मां नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जहां कोई सोचता भी नहीं था और हमारे यहां तो कहा जाता था कि मां नर्मदा के स्‍मरण मात्र से पूण्‍य मिलता है, आज तो स्‍वयं मां नर्मदा गुजरात के गांव-गांव जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा घर-घर जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा आपके द्वार आकर के आपको आशीर्वाद देती है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज गुजरात शत-प्रतिशत नल से जल उपलब्ध कराने के लक्ष्य से अब ज्यादा दूर नहीं है। यही गति, आम जन के जीवन में यही बदलाव, अब धीरे धीरे पूरा देश महसूस कर रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी देश में सिर्फ 3 करोड़ ग्रामीण परिवार पानी के नल की सुविधा से जुड़े हुए थे, जिनको नल से जल मिलता था। लेकिन आज जल जीवन अभियान के तहत देशभर में सिर्फ दो साल में, दो साल के भीतर साढ़े 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पाइप के पानी से जोड़ा जा चुका है और इसलिये मेरी माताएं-बहनें मुझे भरपूर आशीर्वाद देती रहती हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार के लाभ भी गुजरात लगातार देख रहा है। आज सरदार सरोवर बांध से विकास की नई धारा ही नहीं बह रही, बल्कि Statue of Unity के रूप में विश्व के सबसे बड़े आकर्षण में से एक आज गुजरात में है। कच्छ में स्थापित हो रहा Renewable Energy Park, गुजरात को पूरे विश्व के Renewable Energy Map में स्थापित करने वाला है। गुजरात में रेल और हवाई कनेक्टिविटी के आधुनिक और भव्य Infrastructure Project बन रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। Healthcare और Medical Education में भी गुजरात में प्रशंसनीय काम हो रहा है। गुजरात में तैयार हुए बेहतर Medical Infrastructure ने 100 साल की सबसे बड़ी Medical Emergency को हैंडल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

साथियों,

गुजरात सहित पूरे देश में ऐसे अनेक काम हैं, जिनके कारण आज हर देशवासी का, हर क्षेत्र का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। और ये आत्मविश्वास ही है जो हर चुनौती से पार पाने का, हर सपने को पाने का एक बहुत बड़ा सूत्र है। अभी ताज़ा उदाहरण है ओलंपिक्स में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन। इस बार ओलंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। याद रहे ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए हमने किया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार qualify किया है। सिर्फ qualify ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं। हमारे खिलाड़ी हर खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस ओलिंपिक में नए भारत का बुलंद आत्मविश्वास हर game में दिख रहा है। ओलंपिक्स में उतरे हमारे खिलाड़ी, अपने से बेहतर रैंकिंग के खिलाड़ियों को, उनकी टीमों को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज़्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, transparent होती हैं। ये नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है। ये आत्मविश्वास आज देश के कोने-कोने में, हर छोटे-छोटे बड़े गांव-कस्बे, गरीब, मध्यम वर्ग के युवा भारत के हर कोने में ये विश्‍वास में आ रहा है।

साथियों,

इसी आत्मविश्वास को हमें कोरोना से लड़ाई में और अपने टीकाकरण अभियान में भी जारी रखना है। वैश्विक महामारी के इस माहौल में हमें अपनी सतर्कता लगातार बनाए रखनी है। देश आज 50 करोड़ टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है तो, गुजरात भी साढ़े 3 करोड़ वैक्सीन डोसेज के पड़ाव के पास पहुंच रहा है। हमें टीका भी लगाना है, मास्क भी पहनना है और जितना संभव हो उतना भीड़ का हिस्सा बनने से बचना है। हम दुनिया में देख रहे हैं। जहां मास्क हटाए भी गए थे, वहां फिर से मास्क लगाने का आग्रह किया जाने लगा है। सावधानी और सुरक्षा के साथ हमें आगे बढ़ना है।

साथियों,

आज जब हम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नयोजना पर इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं तो मैं एक और संकल्प देशवासियों को दिलाना चाहता हूँ। ये संकल्प है राष्ट्र निर्माण की नई प्रेरणा जगाने का। आज़ादी के 75 वर्ष पर, आजादी के अमृत महोत्सव में, हमें ये पवित्र संकल्प लेना है। इन संकल्पों में, इस अभियान में गरीब-अमीर, महिला-पुरुष, दलित-वंचित सब बराबरी के हिस्सेदार हैं। गुजरात आने वाले वर्षों में अपने सभी संकल्प सिद्ध करे, विश्व में अपनी गौरवमयी पहचान को और मजबूत करे, इसी कामना के साथ मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। एक बार फिर अन्न योजना के सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !!! आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद !!!