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उपस्थित सभी महानुभाव, आप सबको नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं,

किसी संस्था के जीवन में 60 साल की यात्रा बहुत बड़ी नहीं होती है। 60 साल का कार्यकाल भारत जैसे विशाल देश में किसी Institution को build up करने में, उसे लोगों तक पहुंचाने में ये समय बहुत कम पड़ता है। व्यक्ति के लिए जीवन में 60 साल बहुत बड़ी बात होती है। लेकिन संस्था के जीवन में एक प्रकार से उसका प्रारंभ होता है। मैं मानता हूं कि अब ICICI Group उस स्थिति में पहुंच रहा है जिसकी बदौलत,जिन आशाओं और आकांक्षाओं को लेकर उसका जन्म हुआ, जिन अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए उसने यात्रा की, उसको Achieve करने का अब उसके सामने समय आया है और तब उसको 60 साल की जो गति है वो काम नहीं आती है। 60 साल का जो canvass है, वो भी छोटा पड़ता है। उसे बड़े canvass पर लंबी दौड़ के साथ अपनी योजनाएं करनी होती हैं। लेकिन, 60 साल का ये अनुभव भारत की विकास यात्रा में, banking Sector के योगदान में एक बहुमूल्य भूमिका निभाने का, उसकी सफलता का आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक ताकतवर बनाने में बहुत-बहुत उपयोगी होगा। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

कभी-कभी मुझे लगता है कि इस ग्रुप के नाम पर ICICI मैं समझता हूं 60 साल हो गए, आई को बहुत देखा, अब ICU होना चाहिए। मैं आपको देख रहा हूं, हिंदुस्तान के गरीब को देख रहा हूं और उस रूप में मैं आशा करता हूं कि जब 60 साल मनाए जा रहे हैं, क्यों न group के प्रमुख लोग बैठें। Grass root level के बैंक के साथ जुड़े हुए सभी लोग बैठें और हम जब 75 साल के होंगे, तब तक क्या क्या achieve करेंगे, हमारा social charter क्या होगा?और एक देश के सामने उस रूप में बैंकिंग क्षेत्र में ICICI lead कर सकता है क्या? for fifteen years, next fifteen years 75 celebrate करने से पहले हम ये social charter ले करके आ रहे हैं। 10 हों, 12 हों, इन चीज़ों को हम देश में ला करके रहेंगे।

कभी कभार एक आध Institution lead करती है तो बाकी सब उसको follow करते हैं और अपने आप में एक momentum बन जाता है और उस दिशा में हम काम कर सकते हैं। 2022 में भारत की आज़ादी के 75 साल हो रहे हैं और 25 में, 30 में आपके 75 साल होंगे। उस अर्थ में बीच में आपको एक अवसर मिलता है कि भारत के 75 साल के समय का क्या goal हो और Next अपके 75 होंगे तब क्या हो। एक social charter के साथ देश के सामने, financial Sector किस प्रकार से नई दिशा दे सकता है, इसके सपनों को ले करके आप आएंगे। मैं समझता हूं कि देश की बहुत बड़ी सेवा होगी। देश को एक नई दिशा मिलेगी।

मैं चंदा जी का विशेष रूप से इसलिए भी अभिनंदन करता हूं कि इस काम को मैं बड़े आग्रह से करना चाहता हूं। स्वच्छ भारत! उन्होंने उस बीड़े को उठाया, स्वयं ने भी इस काम को किया। लेकिन साथ- साथ उन्होंने अपनी सभी Branches को सप्ताह में एक दिन सफाई का कुछ-न-कुछ करने के लिए प्रेरित किया है। एक momentum खड़ा हुआ है। उनके इन प्रयासों का मैं अभिनंदन करता हूं और सभी ग्रुप को, सभी Branches को, उन Branches में बैठे हुए सभी बैंक के कर्मचारियों को इस काम को आगे बढ़ाने के लिए बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं, बहुत बहुत बधाई देता हूं।

लेकिन बैंक सेक्टर से मेरी एक और अपेक्षा है। क्या हम इस काम को तो आगे बढ़ाएं, ज़रूर बढ़ाएं। लेकिन हम हमारे finance के जो areas हैं, उसमें एक नए क्षेत्र का इज़ाफा कर सकते हैं क्या और उसको प्राथमिकता दे सकते हैं क्या? क्या हमारा group एक साल के भीतर- भीतर bank finance की मदद से नौजवानों को प्रेरित करके कम से कम एक लाख स्वच्छता के entrepreneur तैयार कर सकते हैं? Waste management एक बहुत बड़ा Business है। solid west management के क्षेत्र में नौजवान आएं, बहुत बड़ा Business है, Waste water treatment के Business में आएं, बहुत बड़ा क्षेत्र है। हम इस प्रकार के नए entrepreneur तैयार कर सकते हैं। हमारी young generation को, उसकी training करना, उसको model करना और financial व्यवस्था देना।

मैं समझता हूं कि जो काम स्वच्छता के अभियान में आपकी बैंक कर रही है, लेकिन वो स्वच्छता के entrepreneur तैयार करती है तो शायद एक sustainable व्यवस्था, एक लंबे समय तक काम आने वाली व्यवस्था को हम उभार सकते हैं और हमें उस दिशा में प्रयास करना चाहिए। मुझे विश्वास है कि आप infrastructure में पैसे देते होंगे, आप पावर प्रोजेक्ट में देते होंगे आप और development में देते होंगे, बहुत बहुत बड़े कारोबार आपके चलते होंगे। यहां जिस प्रकार का audience है, उसको लगता है कि बड़े काम आपके चलते होंगे। इस audience को भी देख कर मैं तय कर सकता हूं। लेकिन मैं एक और क्षेत्र में ले जाने के लिए कह रहा हूं, छोटे छोटे लोग जो entrepreneur के रूप में इस field में आए, उनको प्रेरित करें। एक बहुत बड़ा काम होगा।

उसी प्रकार से यहां पर video conference से हमारे साबरकांठा को एक छोटे से गांव के लोग इस कार्यक्रम में शरीक हुए हैं। मजा मैं बैदा बिदा! इस गांव की एक और भी विशेषता है। देश का पहला गांव ऐसा है जहां पर cattle hostel है। हमारे यहां गांवों में पशु अपने घर के बाहर ही बांध कर रखते हैं और सारी गंदगी वहीं होती है और बीमारी की जड़ भी वहीं होती है। आजकल लड़कियों को गांव में शादी करने में एतराज नहीं है, लेकिन ये पशु वाला काम करना पड़ता है तो उसके लिए उसकी तैयारी कम है। तो हमें एक नई समाज रचना करनी पड़ेगी और उसी विचार में से एक प्रयोग यहां शुरू हुआ है। गांव के सारे cattle hostel में रहते हैं और मालिक लोग hostel में जाते हैं, अपने पशु की देखभाल करते हैं। दूध लेने के समय, दूध के समय पहुँच जाते हैं। पूरा गांव साफ-सुथरा रहता है। एक hostel का प्रयोग आने वाले दिनों में देशभर में ये होने वाला है। अगर हम हमारे प्रिय से प्रिय बच्चों को hostel में रख सकते हैं तो हमारे cattle के लिए hostel क्यों नहीं बना सकते! और उसके कारण उनकी देखभाल भी अच्छी होती है। जब मैं वहां था, मुझे तब तो मालूम है, उनकी income में 20 percent बढ़ोतरी हुई थी, केवल hostel के कारण, क्योंकि वो उसमें से fertilizer निकालने लगे, गैस बनाने लगे, बिजली पैदा करने लगे, कई चीज़ें उनकी हुई, दूध में बढ़ोतरी हुई, अब उसी गांव को बैंक ने Digital Village बनाने के लिए और उसको बहुत सारा काम पूरा कर दिया है।

अब गांव भी बहुत इंतजार करने वाला नहीं है, उसके expectations भी वही हैं जो शहर में बैठे समृद्ध वर्ग के हैं और ये समय की मांग है कि हम उस पर Focus करें। Rural Development भी भारत की GDP को बढ़ाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। नए तरीके से उसकी संभावनाएं बढ़ी हैं, उसके Infrastructure पर बल दे दिया है, Agri-structure पर बल दिया जाए, Agri-structure valuation पर बल दिया जाए। बहुत बड़ी संभावनाएं हमारे Rural life में आर्थिक विकास का एक बहुत बड़ा Power Station एक नया हम खड़ा कर सकते हैं, ये संभावनाएं बढ़ी हैं। ये Digital Village की कल्पना आने वाले दिनों में, जो Digital India का सपना हम पूरा करना चाहते हैं, उसमें ये भी चीजें एक Model के रूप में हमारे सामने आएंगी और काम आएंगी। मैं इस Initiative के लिए भी आपको बधाई देता हूं।

अकोद्रा गांव के लोग तो अब Cashless उनका कारोबार चले लेकिन हम ये सपना कब पूरा करेंगे कि भारत में भी Cashless आर्थिक व्यवस्था विकसित हो और मैं चाहता हूं कि हिंदुस्तान के बैंकिंग सेक्टर में इसकी Competition होनी चाहिए। कौन बैंक है जिसका Maximum Transaction है और Cashless है। कालेधन के उपायों में एक महत्वपूर्ण उपाय ये है, Cashless Transaction एक बहुत बड़ा उसका कारण और हमें इसको Promote करना चाहिए, लोगों का आदत डालनी चाहिए और बैंक के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती मैं मानता हूं वो ये है, एशिया के ये वो भू-भाग है। भारत के उसके आस-पड़ोस के देश Including China विश्व में ये एक ऐसा भू-भाग है जहां परंपरागत रूप से Saving का स्वभाव है। सदियों से परंपरा है हर पीढ़ी के मां-बाप आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ-कुछ बचाना ये सोच रखते हैं। दुनिया के और हिस्से हैं कि जहां पर Credit Card की दुनिया हैं, जहां पर बच्चों के हिस्से में Credit Card आता है और कुछ नहीं आता है। यहां वो सोच नहीं है, यहां पर Saving की सोच है लेकिन काल क्रम स्थिति ये बन गई कि उसका स्वभाव तो बन गया है कि भई बच्चों के लिए कुछ छोड़कर जाना। Security के लिए कुछ व्यवस्था रखनी चाहिए लेकिन वो उसके लिए Gold की तरफ चला गया है। उसको लगता है कि सोना खरीदकर रख लो भाई, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए। शायद सौ में से एक इंसान भी नहीं निकलता होगा कि जिसको अचानक सोना बेचकर के कहीं जाना पड़ा हो, सौ में से एक भी नहीं निकलता है लेकिन Psychological Effect है कि भई सोना होगा तो आधी रात काम आएगा। बैंकिंग सेक्टर के सामने Challenge है वो Credibility हर इंसान के दिमाग में हम पैदा कर सकते हैं कि जिसको कभी उसकी इच्छा न हो कि अब सोने खरीदने की इच्छा न हो, गांव में अब बैंक की ब्रांच है, एटीएम है, मुझे कभी अब पैसों के लिए संकट नहीं होगा, सारी व्यवस्थाएं मौजूद हैं अब मुझे सोना खरीदकर के कोने में रखकर के जरूरत नहीं है। भारत की Economy में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। बहुत बड़ा वर्ग है जो आवश्यकता से अधिक होड़ रखता है उसका मूल कारण उसके दिमाग में Safety, Security और Future होता है। अगर बैंक के द्वारा उसे Assurance मिलता है, उसमें विश्वास पैदा होता है कि हां भई इसके साथ अब मेरा नाता जुड़ गया यानि अब मेरे जीवन के संकट के काल में भी ये मेरा साथी है। मैं समझता हूं कि ये एक Gold Hub का Alternative बनने के लिए एक Golden Opportunity में देख रहा हूं।

क्या हम 75 साल मनाएं तब इन चीजों को Achieve करने की दिशा में कुछ कर सकता हैं क्या। आप देख सकते हैं कि एक बैंक Social Transformation का Agent बन सकता है। सिर्फ बैंकिंग सेवाएं नहीं…. Social Transformation का Agent बन सकता है। हम उस दिशा में नए तरीके से हमारे Banking Sector सोचें। मुझे विश्वास है कि हम बहुत कुछ देश को दे सकते हैं।

मैं फिर एक बार आज इस अवसर पर इस 60 साल की यात्रा में जिन-जिन्होंने योगदान दिया है, जिन्होंने इसका नेतृत्व किया वे सब अभिनंदन के अधिकारी हैं क्योंकि एक कालखंड में सब होता नहीं है। एक लंबी प्रक्रिया के बाद ये परिणाम मिलता है इसलिए इस Group के सभी उन वरिष्ठजनों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Modi Govt's #7YearsOfSeva
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ସର୍ଦ୍ଦାର ବଲ୍ଲଭଭାଇ ପଟେଲ ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ପୁଲିସ ଏକାଡେମୀରେ ଆଇପିଏସ ପ୍ରଶିକ୍ଷାର୍ଥୀମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
July 31, 2021
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ଆପଣମାନେ ସୌଭାଗ୍ୟଶାଳୀ ଯେ ଆପଣମାନେ ଦେଶର ୭୫ତମ ବର୍ଷ ପୂର୍ତ୍ତି ଅବସରରେ ଏହି ସେବାରେ ଯୋଗ ଦେଉଛନ୍ତି, ଆଗାମୀ ୨୫ ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆପଣମାନଙ୍କ ଓ ଭାରତ ଉଭୟଙ୍କ ପାଇଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
“ସେମାନେ ସ୍ୱରାଜ୍ୟ” ପାଇଁ ସଂଗ୍ରାମ କରିଥିଲେ; ଆପଣମାନେ “ସୁରାଜ୍ୟ” ନିମନ୍ତେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ପଡ଼ିବ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ପ୍ରଯୁକ୍ତି କ୍ଷେତ୍ରରେ ବ୍ୟାପକ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଘଟୁଥିବା ଯୋଗୁ ପୁଲିସବଳକୁ ଏଥି ନିମନ୍ତେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ରୂପେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ରହିବା ଏକ ଚାଲେଞ୍ଜ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଆପଣ ମାନେ “ଏକ ଭାରତ- ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତ”ର ଧ୍ୱଜାବାହକ ହେବେ, “ପ୍ରଥମେ ରାଷ୍ଟ୍ର, ସଦୈବ ପ୍ରଥମେ” ମନ୍ତ୍ରକୁ ସଦାବେଳେ ସର୍ବୋପରି ରଖନ୍ତୁ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ସଦୈବ ମିତ୍ରଭଳି ରହନ୍ତୁ ଏବଂ ଖାକିର ସମ୍ମାନକୁ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ବୋଲି ମାନନ୍ତୁ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ମୁଁ ମହିଳା ଅଧିକାରୀମାନଙ୍କର ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ନୂତନ ପିଢ଼ି ଦେଖୁଛି, ଆମେ ପୁଲିସ ବଳରେ ମହିଳାମାନଙ୍କ ଭାଗୀଦାରୀ ବୃଦ୍ଧିକୁ ସଦାବେଳେ ଧ୍ୟାନ ଦେଇଆସିଛୁ: ପ୍ରଧାନନମନ୍ତ୍ରୀ
ମହାମାରୀ କାଳରେ ନିଜର ପ୍ରାଣବଳୀ ଦେଇଥିବା ପୁଲିସ ସେବାର ସଦସ୍ୟମାନଙ୍କୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳି ଦିଅନ୍ତୁ ।
ପ୍ରତିବେଶୀ ରାଷ୍ଟ୍ରର ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ଅଧିକାରୀ ଆମ ଦେଶ ସହିତ ନିକଟନା ଏବଂ ଗଭୀର ସମ୍ପର୍କକୁ ରେଖାଙ୍କିତ କରେ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ ମୋତେ ବହୁତ ଭଲ ଲାଗିଲା । ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ମୋର ଏହି ପ୍ରୟାସ ରହିଥାଏ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବ ସାଥୀମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୁଏ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଚିନ୍ତାଧାରା ସଂପର୍କରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଜାଣୁଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କର କଥା, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରଶ୍ନ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଉତ୍ସୁକତା, ମୋତେ ମଧ୍ୟ ଭବିଷ୍ୟତର ଆହ୍ୱାନ ମୁକାବିଲା କରିବାରେ ସହାୟତା କରିଥାଏ।

ସାଥୀଗଣ,

ଚଳିତ ଥରର ଏହି ଚର୍ଚ୍ଚା ଏଭଳି ସମୟରେ ହେଉଛି ଯେତେବେଳେ ଭାରତ, ନିଜ ସ୍ୱାଧନତାର 75 ବର୍ଷର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ କରୁଛି। ଚଳିତ ବର୍ଷର ଅଗଷ୍ଟ 15 ତାରିଖ, ନିଜ ସହିତ ସ୍ୱାଧୀନତାର 75 ବର୍ଷ ପୂର୍ତି ନେଇକରି ଆସିଛି। ବିଗତ 75 ବର୍ଷରେ ଭାରତ ଏକ ଉନ୍ନତ ପୁଲିସ ସେବାର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରିଛି। ପୁଲିସ ଟ୍ରେନିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଭିତିଭୂମିରେ ମଧ୍ୟ ଏହି କିଛି ବର୍ଷ ହେବ ବହୁତ ସଂସ୍କାର ହୋଇଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେଉଛି, ସେତେବେଳେ ସେହି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଦେଖୁଛି, ଯେଉଁମାନେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଭାରତରେ ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରବାରେ ସହଭାଗୀ ହେବେ। ଏହା ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ। ଏଥିପାଇଁ ଏବେ ଏକ ନୂତନ ଶୁଭାରମ୍ଭ, ଏକ ନୂଆ ସଂକଳ୍ପର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୋତେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସୂଚନା ମିଳିନାହିଁ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ କେତେ ଲୋକ ଦାଣ୍ଡି ଯାଇଛନ୍ତି ଅବା ପୁଣି କେତେ ଜଣ ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମ ଦେଖିଛନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ 1930ର ଦାଣ୍ଡି ଯାତ୍ରା ସମ୍ପର୍କରେ ସ୍ମରଣ କରାଇ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଗାନ୍ଧିଜୀ ଯେଉଁ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ବଳରେ ଇଂରେଜ ଶାସନର ମୂଳଦୁଆକୁ ଦୋହଲାଇ ଦେବାର କଥା କହିଥିଲେ। ସେ ମଧ୍ୟ ଏହା କହିଥିଲେ ଯେ ‘ଯେତେବେଳେ ସାଧନ ନ୍ୟାୟପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ ଠିକ୍ ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଭଗବାନ ମଧ୍ୟ ସାଙ୍ଗରେ ଠିଆ ହେବା ପାଇଁ ଉପସ୍ଥିତ ହୋଇ ଯାଇଥାଆନ୍ତି।’

 

 

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଟିଏ ଛୋଟିଆ ଲାଠିକୁ ସାଙ୍ଗରେ ଧରି ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧି ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମରୁ ବାହାରି ପଡ଼ିଥିଲେ। ଦିନ ପରେ ଦିନ ବିତି ଚାଲିଲା ଆଉ ଲୋକମାନେ ଯିଏ ଯେଉଁଠାରେ ଥିଲେ, ସେମାନେ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇ ଚାଲିଲେ । 24 ଦିନ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଗାନ୍ଧିଜୀ ଦାଣ୍ଡିରେ ନିଜର ଯାତ୍ରା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କଲେ, ସେତେବେଳେ ସମଗ୍ର ଦେଶ, ଏକ ପ୍ରକାରରେ ସାରା ଦେଶ ଜାଗ୍ରତ ହୋଇ ଠିଆ ହୋଇ ପଡ଼ିଥିଲା । କଶ୍ମୀରରୁ କନ୍ୟାକୁମାରୀ, ଅଟକରୁ କଟକ। ସମଗ୍ର ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନ ଚେତନାଯୁକ୍ତ ହୋଇ ଯାଇଥିଲା। ସେହି ମନୋଭାବକୁ ସ୍ମରଣ କରିବା, ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତିକୁ ସ୍ମରଣ କରନ୍ତୁ। ସେହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ, ସେହି ଐକ୍ୟବଦ୍ଧ ମନୋଭାବ ଭାରତର ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମକୁ ସାମୁହିକତାର ଶକ୍ତିରେ ଭରି ଦେଇଥିଲା। ପରିବର୍ତନର ସେହି ଭାବ, ସଂକଳ୍ପର ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଆଜି ଦେଶ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରୁଛି। 1930 ରୁ 1947 ମଧ୍ୟରେ ଦେଶରେ ଯେଉଁ ଜୁଆର ଉଠିଥିଲା, ଯେଉଁଭଳି ଭାବେ ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ଆଗକୁ ଆସିଲେ, ଏକ ଲକ୍ଷ୍ୟ ପାଇଁ ଏକଜୁଟ ହୋଇ ସମଗ୍ର ଯୁବପିଢ଼ୀ ଏକାଠି ଯୋଡ଼ି ହୋଇଗଲେ, ଆଜି ସେହି ମନୋଭାବ ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରାଯାଉଛି। ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ଭାବ ସହିତ ବଂଚିବାକୁ ହେବ। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଯୋଡି ହେବା। ସେହି ସମୟରେ ଦେଶର ଲୋକ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ସ୍ୱରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ଲଢ଼େଇ କରିଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସୁରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ମନ-ପ୍ରାଣ ଦେଇ ଏକାଠି ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ। ସେହି ସମୟରେ ଲୋକମାନେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତା ପାଇଁ ପ୍ରାଣବଳୀ ଦେବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଦେଶ ପାଇଁ ଜୀଇଁବାର ଭାବନା ନେଇ ଆଗକୁ ଚାଲିବାର ଅଛି। 25 ବର୍ଷ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତାର 100 ବର୍ଷ ପୂରଣ ହେବ, ସେତେବେଳେ ଆମ ଦେଶର ପୁଲିସ ସେବା କିପରି ହେବ, କେତେ ସଶକ୍ତ ହେବ, ତାହା ଆପଣମାନଙ୍କର ଆଜିର କାର୍ଯ୍ୟ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ନିର୍ଭର କରିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସେହି ମୂଳଦୁଆ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି, ଯାହା ଉପରେ 2047ର ଭବ୍ୟ, ଅନୁଶାସିତ ଭାରତର ଭବନ ନିର୍ମାଣ ହେବ। ସମୟ ଏହି ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ମନୋନୀତ କରିଛି। ଆଉ ମୁଁ ଏହାକୁ ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବହୁତ ବଡ଼ ସୌଭାଗ୍ୟ ବୋଲି ଭାବୁଛି। ଆପଣ ଏକ ଏଭଳି ସମୟରେ କ୍ୟାରିୟର ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି, ଯେତେବେଳେ ଭାରତର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ ରୂପାନ୍ତରଣର ସମୟ ଦେଇ ଗତି କରୁଛି। ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟରରେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ଭାରତର ବିକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ସବୁଠାରୁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ 25ବର୍ଷ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ପ୍ରସ୍ତୁତି, ଆପଣମାନଙ୍କର ମନର ସ୍ଥିତି, ଏହି ବଡ଼ ଲକ୍ଷ୍ୟର ଅନୁକୂଳ ହେବା ଉଚିତ। ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷରେ ଆପଣ ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭାଗରେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ପଦରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବେ। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ଉପରେ ଏକ ଆଧୁନିକ, ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳ ପୁଲିସ ସେବାକ ନିର୍ମାଣର ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ରହିଛି। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ 25 ବର୍ଷ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ମିଶନରେ ଅଛନ୍ତି, ଆଉ ଭାରତ ଏଥିପାଇଁ ବିଶେଷ ଭାବେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମନୋନନୀତ କରିଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ସାରା ବିଶ୍ୱର ଅନୁଭବ କହୁଛି ଯେ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ରାଷ୍ଟ୍ର ବିକାଶ ପଥରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଥାଏ, ତେବେ ଦେଶ ବାହାରୁ ଏବଂ ଦେଶ ଭିତରୁ, ଆହ୍ୱାନ ମଧ୍ୟ ସେତିକି ବୃଦ୍ଧି ପାଇଥାଏ। ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତିରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ବୈଷୟିକ ବିଘଟନର ଏହି ସମୟରେ ପୁଲିସିଂକୁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ଅପରାଧର ନୂଆ-ନୂଆ କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ଅଭିନବତାର ସହିତ ରୋକିବାକୁ ଅଛି। ବିଶେଷ ଭାବେ ସାଇବର ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ ନୂଆ ପ୍ରୟୋଗ, ନୂତନ ଗବେଷଣା ଏବଂ ନୂଆ କଳା କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରିବାକୁ ହେବ ଏବଂ ତାହାକୁ ମଧ୍ୟ ଉପଯୋଗ କରିବାର ଅଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସମ୍ବିଧାନ, ଦେଶର ଗଣତନ୍ତ୍ର, ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଯାହା ମଧ୍ୟ ଅଧିକାର ଦେଇଛି, ଯେଉଁ କର୍ତବ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ପାଳନ କରିବାର ଆଶା ରଖିଛି, ତାହାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବାରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ହେଉଛି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ବହୁତ କିଛି ଆଶା ରହିଛି। ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ ଉପରେ ସର୍ବଦା ଦୃଷ୍ଟି ରହିଛି। ଆପଣମାନଙ୍କ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଚାପ ଆସିଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ କେବଳ ପୁଲିସ ଥାନାରୁ ନେଇ ପୁଲିସ ମୁଖ୍ୟାଳୟର ସୀମା ଭିତରେ ରହିବା ଚିନ୍ତା କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମାଜରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭୂମିକା ସହିତ ମଧ୍ୟ ପରିଚିତ ରହିବାର ଅଛି, ବନ୍ଧୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବ ସହିତ ରହିବାର ଅଛି ଏବଂ ପୋଷାକର ମର୍ଯ୍ୟାଦାକୁ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ସ୍ଥାନରେ ରଖିବାର ଅଛି। ଆଉ ଏକ କଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଧ୍ୟାନରେ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଆପଣମାନଙ୍କର ସେବା, ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଜିଲ୍ଲାରେ ରହିବ, ସହରରେ ମଧ୍ୟ ରହିବ, ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଏକ ମନ୍ତ୍ର ସଦା ସର୍ବଦା ମନେ ରଖିବାର ଅଛି। କ୍ଷେତ୍ରରେ ରହିବା ସମୟରେ ଆପଣମାନେ ଯାହା ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ପତି ନେବେ, ତାହା ଦ୍ୱାରା ଦେଶର ହିତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ପରିପ୍ରେକ୍ଷ୍ୟ ହେବା ଉଚିତ। ଆପଣମାନଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟକଳାପର ପରିସର ଏବଂ ସମସ୍ୟାମାନ ଯଦିଓ ସ୍ଥାନୀୟ ହେବ, ଏଭଳି କ୍ଷେତ୍ରରେ ତାହାର ମୁକାବିଲା କରିବା ସମୟରେ ଏହି ମନ୍ତ୍ର ବହୁତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆସିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ ଏକ ଭାରତ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତ ଭାବନାର ହେଉଛନ୍ତି ଧ୍ୱଜାବାହକ। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ କାର୍ଯ୍ୟ, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗତିବିଧିରେ ଦେଶ ପ୍ରଥମେ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମେ- ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରଥମ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମ ଏହି ଭାବନାକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରିବା ଭଳି ହେବା ଉଚିତ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୁଁ ଆପଣଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ତେଜସ୍ୱୀ ମହିଳା ଅଫିସରମାନଙ୍କର ନୂଆ ପିଢ଼ୀକୁ ଦେଖୁଛି। ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ପୁଲିସ ବଳରେ ଝିଅମାନଙ୍କର ଯୋଗଦାନକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରାଯାଇଛି। ଆମର ଝିଅମାନେ ପୁଲିସ ସେବାରେ ଦକ୍ଷତା ଏବଂ ଉତରଦାୟିତ୍ୱ ସହିତ, ବିନମ୍ରତା, ସହଜତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ମଧ୍ୟ ସଶକ୍ତ କରିଛନ୍ତି। ଏହିଭଳି ଭାବେ ୧୦ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଜନସଂଖ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ସହରରେ କମିଶନର ପଦ୍ଧତି ଲାଗୁ କରିବାକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ରାଜ୍ୟଗୁଡ଼ିକ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ 16ଟି ରାଜ୍ୟର ଅନେକ ସହରରେ କମିଶନର ବ୍ୟବସ୍ଥା ଲାଗୁ କରାଯାଇ ସାରିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନରେ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ସକରାତ୍ମକ ପଦକ୍ଷେପ ଉଠାଯିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ପୁଲିସିଂକୁ ଭବିଷ୍ୟତବାଦୀ ଏବଂ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ କରିବା ପାଇଁ ସାମୁହିକତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ହେଉଛି ବହୁତ ଜରୁରୀ। ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଦେଖିଛୁ ପୁଲିସ ସାଥୀମାନେ କିଭଳି ସ୍ଥିତିକୁ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇଛନ୍ତି। କରୋନା ବିରୋଧୀ ଲଢେଇରେ ଆମର ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ, ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସହିତ କାନ୍ଧକୁ କାନ୍ଧ ମିଳାଇ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛନ୍ତି। ଏହି ପ୍ରୟାସରେ ଅନେକ ପୁଲିସ କର୍ମୀଙ୍କୁ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଆହୁତି ଦେବାକୁ ପଡିଛି। ମୁଁ ସେହି ସମସ୍ତ ଯବାନଙ୍କୁ, ପୁଲିସ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ଆଦର ପୂର୍ବକ ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳି ଜଣାଉଛି ଏବଂ ଦେଶ ତରଫରୁ ସେମାନଙ୍କ ପରିବାର ପ୍ରତି ସମ୍ବେଦନା ପ୍ରକଟ କରୁଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ, ମୁଁ ଆଉ ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷ ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ରଖିବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଆଜିକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଛେ ଯେ ଯେଉଁଠି– ଯେଉଁଠି ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, କେଉଁଠାରେ ବନ୍ୟା, କେଉଁଠାରେ ସାମୁଦ୍ରିକ ଝଡ଼, କେଉଁଠାରେ ଭୂସ୍ଖଳନ, ତେବେ ଆମର ଏନଡିଆରଏଫର ସାଥୀମାନେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସାମର୍ଥ୍ୟର ସହିତ ସେଠାରେ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହୋଇଥାଆନ୍ତି। ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ନାମ ଶୁଣି ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଏକପ୍ରକାରର ବିଶ୍ୱାସ ଜନ୍ମିଥାଏ। ଏନଡିଆରଏଫର ଏହି ଶାଖା ନିଜର ଉନ୍ନତ କାର୍ଯ୍ୟ ଯୋଗୁଁ ଏହି ସୁନାମ ଅର୍ଜନ କରି ପାରିଛି। ଆଜି ଲୋକଙ୍କୁ ଏହି ଭରସା ରହିଛି ଯେ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ଯବାନମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ମଧ୍ୟ ବାଜି ଲଗାଇ ଆମକୁ ବଂଚାଇବେ। ଏନଡିଆରଏଫ ମଧ୍ୟ ଅଧିକାଂଶ ପୁଲିସ ବଳର ଯବାନ ଥାଆନ୍ତି। ଆପଣମାନଙ୍କର ସାଥୀମାନେ ଥାଆନ୍ତି। କିନ୍ତୁ କ’ଣ ଏହି ଭାବନା, ଏହି ସମ୍ମାନ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ରହିଛି? ଏନଡିଆରଏଫରେ ପୁଲିସର ଲୋକମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଛନ୍ତି । ଏନଡିଆରଏଫକୁ ସମ୍ମାନ ମଧ୍ୟ ମିଳୁଛି । ଏନଡିଆରଏଫରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ପୁଲିସ ଯବାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସମ୍ମାନ ମିଳୁଛି। କିନ୍ତୁ ସାମାଜିକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସେପରି ରହିଛି କି? କିନ୍ତୁ କ’ଣ ପାଇଁ ? ଏହାର ଉତର,   ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଜଣାଅଛି । ଜନମାନସରେ ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଏ ଯେଉଁ ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ରହିଛି, ତାହା ନିଜକୁ ନିଜ ମଧ୍ୟରେ ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଆହ୍ୱାନ । କରୋନା ସମୟରେ ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ଅବସ୍ଥାରେ ଅନୁଭବ କରାଯାଇଥିଲା ଯେ ଏହି ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ଟିକେ ବଦଳି ଯାଇଛି । କାରଣ ଲୋକମାନେ ଯେତେବେଳେ ଭିଡିଓଗୁଡ଼ିକୁ ସାମାଜିକ ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ଦେଖୁଥିଲେ । ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ ଗରିବମାନଙ୍କର ସେବା କରୁଥିଲେ। ଭୋକିଲା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଖାଦ୍ୟ ଖାଇବାକୁ ଦେଉଥିଲେ । କେଉଁଠାରେ ଖାଦ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରି ଗରିବଙ୍କ ନିକଟରେ ପହଂଚାଉଥିଲେ, ସେତେବେଳେ ସମାଜରେ ଲୋକମାନେ ପୁଲିସକୁ ଏକ ଭିନ୍ନ ଦୃଷ୍ଟିରେ ଦେଖୁଥିଲେ, ଚିନ୍ତା କରିବାର ବାତାବରଣ ବଦଳୁଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଏବେ ପୁଣି ସେହି ପୁରୁଣା ସ୍ଥିତି ହୋଇ ଯାଇଛି। ତେବେ କାହିଁକି ଜନତାଙ୍କ ବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ, ଭରସା କାହିଁକି ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ?

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ, ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ବଜାୟ ରଖିବା ପାଇଁ, ଆତଙ୍କର ସମାପ୍ତି ପାଇଁ ଆମର ପୁଲିସ ସାଥୀ, ନିଜ ପ୍ରାଣ ଉତ୍ସର୍ଗ କରି ଦେଇଥାଆନ୍ତି। ଅନେକ- ଅନେକ ଦିନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆପଣମାନେ ଘରକୁ ଯାଇ ପାରନ୍ତି ନାହିଁ, ପର୍ବପର୍ବାଣୀ ଉତ୍ସବ ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରାୟତଃ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପରିବାର ଠାରୁ ଦୂରରେ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। କିନ୍ତୁ ଯେତେବେଳେ ପୁଲିସର ଭାବମୂର୍ତିର କଥା ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଲୋକଙ୍କ ମନୋଭାବ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ। ପୁଲିସ ବିଭାଗକୁ ଆସୁଥିବା ନୂତନ ପିଢ଼ୀର ଏହା ହେଉଛି ଦାୟିତ୍ୱ ଯେ ଏହି ଭାବମୂର୍ତି ବଦଳୁ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଥିବା ଏହି ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀର ଅନ୍ତ ହେଉ। ଏହା ଆପଣମାନଙ୍କୁ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ତାଲିମ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଚିନ୍ତାଧାରା ମଧ୍ୟରେ ବର୍ଷ-ବର୍ଷ ଧରି ଚଳି ଆସୁଥିବା ପୁଲିସ ବିଭାଗର ଯେଉଁ ସ୍ଥାପିତ ପରମ୍ପରା ରହିଛି, ତାହା ସହିତ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପ୍ରତିଦିନ ସାମ୍ନା-ସାମ୍ନି ହେବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। ବ୍ୟବସ୍ଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବଦଳାଇ ଦେଇଥାଏ ଅବା ଆପଣ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ବଦଳାଇ ଦେଉଛନ୍ତି, ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଟ୍ରେନିଂ, ଆପଣଙ୍କର ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଏବଂ ଆପଣଙ୍କର ମନୋବଳ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିଥାଏ। ଆପଣଙ୍କର କ’ଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଛି। କେଉଁ ଆଦର୍ଶ ସହିତ ଆପଣ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି? ସେହି ଆଦର୍ଶର ପରିପୂରଣ ପାଇଁ କେଉଁ ସଂକଳ୍ପ ନେଇ ଆପଣ ଚାଲୁଛନ୍ତି। ତାହା ହିଁ ନିର୍ଭର କରୁଛି ଆପଣ କିଭଳି ବ୍ୟବହାର କରିବେ। ଏହା ଏକ ପ୍ରକାରରେ ଆପଣଙ୍କର ଆଉ ଏକ ପରୀକ୍ଷା ହେବ। ଆଉ ମୋର ଭରସା ରହିଛି, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ସଫଳ ହେବେ, ନିଶ୍ଚୟ ସଫଳ ହେବେ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏଠାରେ ଆମର ଯେଉଁ ପଡୋଶୀ ଦେଶର ଯୁବ ଅଫିସର ଅଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ମୁଁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଭୁଟାନ ହେଉ, ନେପାଳ ହେଉ, ମାଳଦ୍ୱୀପ ହେଉ, ମରିସସ ହେଉ, ଆମେ ସମସ୍ତେ କେବଳ ପଡୋଶୀ ହିଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ଆମର ଚିନ୍ତାଧାରା ଏବଂ ସାମାଜିକ ଚାଲିଚଳଣୀରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ସମାନତା ରହିଛି। ଆମେ ସମସ୍ତେ ହେଉଛେ ସୁଖ-ଦୁଃଖର ସାଥୀ। ଯେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ କୌଣସି ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, ବିପତି ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ସର୍ବପ୍ରଥମେ ପରସ୍ପରକୁ ସହାୟତା କରିଥାଉ। କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଏହା ଅନୁଭବ କରିଛେ। ଏଥିପାଇଁ, ଆଗାମୀ ବର୍ଷରେ ହେବାକୁ ଥିବା ବିକାଶରେ ମଧ୍ୟ ଆମର ଭାଗିଦାରୀ ବଢ଼ିବା ଥୟ। ବିଶେଷ ଭାବେ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଅପରାଧ ଏବଂ ଅପରାଧୀ, ସୀମାରେଖା ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ନାହାଁନ୍ତି, ସେଭଳି ସମୟରେ ପାରସ୍ପରିକ ସମନ୍ୱୟ ଅଧିକ ଜରୁରୀ ହୋଇ ପଡ଼ିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ସର୍ଦ୍ଦାର ପଟେଲ ଏକାଡେମୀରେ ବିତାଇଥିବା ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଦିନ, ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟର, ଆପଣଙ୍କର ଜାତୀୟ ଏବଂ ସାମାଜିକ ଦାୟିତ୍ୱବୋଧ ଆଉ ଭାରତ ସହିତ ବନ୍ଧୁତାକୁ ମଧ୍ୟ ଦୃଢ଼ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ। ପୁଣିଥରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା!

ଧନ୍ୟବାଦ!