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क छोटे से कमरे में, एशिया के भिन्न-भिन्न देशों के नीति निर्धारक बैठकर के मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर सोच रहे हैं। आम तौर पर इस प्रकार के सेमीनार सिंगापोर में होते हैं, टोक्यो में होते हैं, कभी-कभी बीजिंग में होते हैं। इस प्रकार के विषयों का नेतृत्व कभी भी हिंदुस्तान को नसीब नहीं होता है। लेकिन ये गुजरात का सौभाग्य और अहमदाबाद का कमाल है कि बी.आर.टी.एस. की सफलता ने एशिया के अनेक देशों को यहाँ खींच लाने के लिए सफलता प्राप्त की है। ऐेसे मैं इस शहर को हृदय से बहुत=बहुत अभिनंदन करता हूँ, बधाई देता हूँ..!

ज विश्व के सभी देशों के सामने ट्रांसपोर्टेशन के विषय को लेकर एक बहुत बडी चिंता का हम अनुभव कर रहें हैं। एक तो बढ़ती हुई जनसंख्या, मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स, बढ़ती हुई वेहिकलों की संख्या, इंसान का स्पीड की ओर अधिक लगाव और दूसरी तरफ एनर्जी क्राइसिस। इन सभी सवालों के जवाब हमें एक साथ ढूंढ़ने हैं, ताकि लोगों को बस की सुविधाएं मिलें, ट्रांसपोर्टेशन की सुविधाएं मिलें, एनर्जी कन्ज़रवेशन में हम कुछ कान्ट्रीब्यूट करें, लोगों के समय की बचत करें, हमारी व्यवस्थाएं ऐसी हों जिसमें सामान्य मानवी को सुरक्षा का अहसास हो, इन सभी पहलुओं पर अगर हमने सोचने में देरी की, तो कितना बड़ा सकंट पैदा हो सकता है इसका हम अंदाजा लगा सकते हैं। आज किसी व्यक्ति को मुंबई जाना है, मुंबई में बसना है तो सबसे पहले उसके दिमाग में समस्या यह आती है कि दिनभर मैं आऊंगा कैसे-जाऊंगा कैसे..? वह पचास बार सोचता है, सबसे पहले समस्या ये आती है। आज हिंदुस्तान के कई शहर ऐसे हैं कि जहाँ डेस्टिनैशन पर पहुँचने का एवरेज टाइम 55 से 60 मिनट है। अभी हम गुजरात में भागयवान हैं, अहमदाबाद-सूरत जैसे शहरों में अभी भी हमारा रिचिंग टाइम एवरेज 20 मिनट का है। लेकिन फिर भी, चाहे ये 20 हो, 55 हो या कहीं पर 60 हो, ये अपने आप में इसको कैसे कम किया जाए और फिर भी सुविधा बढ़ाई जाए, यह एक बहुत बड़ी चैलेंज है, और इस चैलेंज को हम कैसे पूरा कर पाएंगे..!

दूसरी बात है कि इन सारे विषयों को अगर हम टुकड़ों में सोचेंगे, कि चलिए भाई, आज लोगों को जाने-आने में दिक्कत हो रही है, तो ट्रांसपोर्ट के लिए सोचो..! फिर कभी बैठेंगे तो सोचेंगे कि बच्चों को स्कूल जाने की व्यवस्था के लिए सोचो..! तीसरे दिन सोचेंगे, कि चलिए भाई, वहाँ कोई फैस्टिवल हो रहा है, तो वहाँ का ही कुछ सोचो..! अगर टुकड़ों में चीजों को सोचा जाएगा तो इन समस्याओं का कभी समाधान नहीं होगा। और इसलिए हमारे देश ने और विशेष कर के एशिया के कुछ देशों ने इस क्षेत्र में काम किया है, उनसे सीखते हुए हमें पूरे गवर्नेंस के मॉडल को विकसित करना पड़ेगा, अर्बन डेवलपमेंट का साइंटिफिक एप्रोच क्या हो, इस पर हमें बल देना होगा। हम सिर्फ हाउसिंग इन्डस्ट्री को एड्रेस करें, हाउसिंग प्राब्लम को एड्रेस करें और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को ना करें, हम रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को करें लेकिन ट्रांसपोर्टेशन को ना करें, हम ट्रांसपोर्टेशन को करें लेकिन पावर सप्लाई को ना करें, हम पावर सप्लाई को करें लेकिन गैस ग्रिड को ना करें, हम गैस ग्रिड को करें लेकिन ब्रॉड-बैंड कनेक्टिविटी ना दें... अगर हम ऐसे टुकड़ों में करेंगे, तो मैं नहीं मानता हूँ कि हम सुविधाओं को पहुँचा सकते हैं। और इसलिए एक इन्टीग्रेटेड हॉलिस्टिक एप्रोच, और उसके लिए सबसे पहली आवश्यकता जो मैं अपने देश में महसूस करता हूँ, कि जिस प्रकार से आई.आई.एम. के अंदर भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, एम.बी.ए. के भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, ये समय की मांग है कि हमारे देश में जितना हो सके उतना जल्दी अर्बन मैनेजमेंट,अर्बन इनिशियेटिव्स को लेकर के युनिवर्सिटीज में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाए। एक्सपर्ट टैलेंट हमको तैयार करनी होगी, जो इन बढ़ते हुए, क्योंकि गुजरात एक ऐसा स्टेट है जहाँ हमारा आज 42% अर्बन पॉप्यूलेशन है और 50% पॉप्यूलेशन अर्बन एरिया पर डिपेन्डन्ट है, अगर यह मेरी स्थिति है तो मेरे लिए आवश्यक बन जाता है। आज इस प्रकार का सांइटिफिक नॉलेज रखने वाले ह्यूमन रिसोर्स भी उपलब्ध नहीं है। अगर कहीं कोई विदेश पढ़ करके आया है, तो ऐसे दो चार लोग मिल जाएंगे कि जिन्होंने इसी विषय पर मास्टरी की है। आवश्यकता यह है कि हमारे देश की गिवन सिचूऐशन के संदर्भ में, एशियन कंट्रीज़ की गिवन सिचूएशन के संदर्भ में, हम किस प्रकार का अर्बन मैनेजमेंट खड़ा कर सकते हैं..! और जब अर्बन मैनेजमेंट का पूरा सोचते हैं, तब जा कर के उसमें ट्रासंपोर्टेशन का मुद्दा आता है।

ब जैसे गुजरात जैसा प्रदेश है, बी.आर.टी.एस. में हम सफल हुए, और कभी-कभी मुझे लगता है कि हम बी.आर.टी.एस. में सिर्फ सफल होते तो दुनिया का ध्यान नहीं जाता..! हमारा दुर्भाग्य यह है कि हम कितना ही पसीना बहाएं, कितना ही अच्छा करें, लेकिन शुरू में किसी का उस पर ध्यान नहीं जाता है। जब दिल्ली में बी.आर.टी.एस. फेल हुआ, तब गुजरात पर ध्यान गया। अगर दिल्ली फेल ना गया होता तो हमारी सक्सेस की तरफ किसी की नजर नहीं जाती..! हमारे यहाँ ‘ज्योती ग्राम योजना’, चौबीस घंटे, थ्री फेज़, अनइन्ट्रप्टेड पावर गुजरात के अंदर पिछले पांच-छह साल से हम सप्लाई कर रहे हैं, सक्सेसफुली कर रहे हैं, लेकिन देश का कभी ध्यान नहीं गया। लेकिन अभी थोड़े दिन पहले जब पूरा हिंदुस्तान अंधेरे में फंस गया, 19 राज्य अंधेरे में फंस गएं, तब लोगों को गुजरात का उजाला दिखाई दिया और वॉशिंगटन पोस्ट तक सबको लिखना पड़ा कि एक गुजरात है जहाँ एनर्जी की दिशा में ये सेल्फ सफिशियंट है। तो ये दिल्ली में जब बी.आर.टी.एस. फेल गया, तब जा करके गुजरात के अहमदाबाद के बी.आर.टी.एस. प्रोजेक्ट की सफलता की तरफ दुनिया का ध्यान गया..! मित्रों, ये बी.आर.टी.एस. की बात हो, कोई भी बात हो, एक बात लिख कर रखिए, जब भी दिल्ली विफल जाएगा,गुजरात सक्सेस करके दिखाएगा। व्हेनएवर दिल्ली फेल्स,गुजरात सक्सीड्स..! और हम सफलता कि दिशा में, सफलता की ओर लोगों को ले जाने के पक्ष में हैं।

ब हम बी.आर.टी.एस. पर रुकने के मूड में नहीं हैं, और ट्रांसपोर्टेशन के सिस्ट्म्स की ओर हम आगे बढऩा चाहते हैं। अभी आप लोगों को जिस दिन मैंने कांकरिया और रिवर फ्रंट का लोकार्पण किया था, उस दिन हमने कहा था कि हिंदुस्तान में पहली बार हम एम्फि सर्विस को शुरू करने जा रहे हैं। साबरमती रिवर फ्रंट के अंदर जो कि नर्मदा का पानी बहा है, अब उसमें हम उस ट्रांस्पोर्टेशन को ला रहे हैं कि जिस में बस पानी में चलेगीऔर जहाँ पानी पूरा हो जाएगा, फिर वो जमीन पर दौडऩे लगेगी..! हमें नई-नई व्यवस्थाओं का उपयोग करना होगा।

ब गुजरात के पास 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन है। लेकिन अभी तक ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी इस 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन का उपयोग होना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हम आने वाले दिनों में, और हम बीते हुए कल के गाने गा करके दिन गुजारने वाले लोग नहीं हैं, रोज नए सपने देखते हैं और सपनों को साकार करने के लिए जी-जान से जुटते रहते हैं..! 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन, विद इन स्टेट, हमारा पूरा ट्रांसपोर्टेशन मोड क्यों ना बने..? सारा हमारा जो बर्डन आज है उसको हम कितना परसेंट रिड्यूस कर सकते हैं..! आज हमारे जो नेशनल हाइवेज़ हैं, आज अगर मुबंई से कोई लगेज आता है और मुझे मुंद्रा तक ले जाना है, या मुझे कच्छ मांडवी तक ले जाना है, अगर वो ही लगेज को मैं समुद्री तट से ले आता हूँ, तो मैं पूरे ट्रांसपोर्टेशन का कितना प्रेशर कम कर देता हूँ..! और सेफ और सस्ता भी कर देता हूँ, एनर्जी सेविंग का भी काम कर सकता हूँ। और इसलिए हम अभी 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन पर अभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहे हैं।

मुझे याद है, मैं जब छोटा था, स्कूल में पढ़ता था, अखबार पढऩे की आदत थी, तो हर मुख्यमंत्री या मंत्री के मुंह से एक बात हम बचपन में पढ़ा करते थे, सुना करते थे कि घोघा-दहेज फेरी सर्विस..! मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने लोगों से सवाल पूछा कि भाई, मैं ये बचपन से सुनता-पढ़ता आया हूँ, इसका हुआ क्या..? मित्रों, अखबार में तो हम चीज देखते थे लेकिन कागज पर, फाइल में कहीं नजर नहीं आती थी..! और मैंने वो बीड़ा उठाया है और मैं उस घोघा-दहेज फेरी सर्विस को शुरू करने जा रहा हूँ। अभी इसका इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है, दोनो तरफ चल रहा है। अब ये एक नया ट्रांसपोर्टेशन का मोड होगा, सौ से अधिक व्हीकल उसके अंदर आ जाएंगे, एक हजार से अधिक पैसेंजर आ जाएंगे... कितना एनर्जी सेविंग होगा, कितना समय का बचाव होगा, और कितना एग्ज़िस्टिंग ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के प्रेशर को वो कम करेगा..! हम उस दिशा में जा रहे हैं।

मित्रों, मेरे गुजरात की लाइफ लाइन है नर्मदा,लेकिन सिर्फ पानी बहता रहे तो वो लाइफ लाइन रहेगी ऐसा मैं नहीं मानता..! मैंने कुछ लोगों को अभ्यास करने में लगाया है कि गुजरात के हार्ट में से निकलने वाली 500 किलोमीटर की कैनाल है, मेन कैनाल, क्या उसके अंदर हम ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं..? लोगों को फन भी मिल जाएगा, प्रेशर भी कम होगा और कम से कम लगेज तो ले जा सकते हैं..! छोटे से, पानी से एक फुट ऊंचे ऐसा एक बने तो कहीं पर भी ब्रिज आता होगा, नाले के नीचे से निकलना होगा, तो भी वो 500 किलोमीटर लॉंग..., यानि जो काम करने के लिए अरबों-खरबों रूपये 500 किलोमीटर रोड बनाने के लिए लग जाएगा, वो आज वॉटर वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से हो सकता है क्या..? हम इसको कैसे आगे बढ़ाएं..!

मेट्रो ट्रेन..! अहमदाबाद में,सूरत में,बड़ौदा में, मेट्रो ट्रेन कि दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर सूरत के मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, बड़ौदा की मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, अहमदाबाद का मेट्रो ट्रेन का एक मॉडल होगा, तो ये बिखरी हुई अवस्था हमें मंजूर नहीं है। इसलिए हिंदुस्तान में, गुजरात विल बी द फर्स्ट स्टेट, जो हम आने वाले दिनों में मल्टीमोडएफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण करने वाले हैं। एक अम्ब्रेला के नीचे गुजरात के सभी शहरों में इंटरसिटी के लिए, इवन हमारे जो नए स्पेशल इनवेस्टमेंट रिजन बन रहे हैं वहाँ पर,ये मल्टीमोडएफॉर्डेबल, इस काम को करने के लिए एक सेपरैट ट्रांसपोर्ट अथोरिटी बनाएंगे और शॉर्टफॉर्म होगा उसका, ‘एम. ए. टी. ए. - माता’..! और माता शब्द आते ही सुविधाएं ही सुविधाएं मिलती हैं, जहाँ माता शब्द होता है..! तो ये ‘माता’ शब्द के साथ मल्टीमोड एफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण गुजरात के अंदर किया जाएगा और जितने भी प्रकार के आवागमन के संसाधनों की व्यवस्थाएं हैं, आज एग्ज़िस्टिंग हैं, नई आने की संभावनाएं हैं, एक होलिस्टिक एप्रोच और एक दूसरे के साथ कॉन्ट्रडिक्टरी ना हो, एक-दूसरे के साथ नए कॉन्ट्रास्ट पैदा करें ऐसे ना हों, एक दूसरे के पूरक हों और व्यवस्था ऐसी कॉमन हो, ताकि काफी खर्च नीचे लाया जा सके। अगर सूरत का एक बोर्ड है, अहमदाबाद का दूसरा बोर्ड है, तो दोनों का सप्लाई करने वाली टीमें अलग बन जाएगी, खर्चा बढ़ जाएगा। लेकिन अगर मार्केट कॉमन पैदा किया जाए, तो मैन्युफैक्चरिंग भी कॉमन होगा, तो उसके कारण उसकी कॉस्ट नीचे लाने में भी बहुत सुविधा होगी, और उस दिशा में काम करने का हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, जो लोग गुजरात की विकास यात्रा को देखते हैं, मैं जानता हूँ कि स्वस्थता पूर्वक, बारीकियों से चीजों को एनालिसिस करने का स्वभाव समाज में कम होता जा रहा है। अध्ययन करके चीजों का मूल्यकांन करने की आदत कम होती जा रही है। ऐसे बहुत से अच्छे इनिशियेटिव होते हैं, जिस पर किसी का ध्यान जाता नहीं है। क्या कारण होगा कि बी.आर.टी.एस. का नाम हमने ‘जन मार्ग’ रखा हुआ है, क्या कारण है कि हजारों करोड़ रूपयों की गोल्डन वैल्यू की जमीन हमने इस प्रकार से इस काम के लिए लगा दी होगी..! वरना इसकी कीमत की जाए तो हजारों करोड़ रूपये की कीमत की जमीन है जिस पर आज बी.आर.टी.एस. दौड़ रही है, लेकिन स्टडी करके इतने अरबों-खरबों रूपया खपाना..! कुछ लोग कहते हैं कि इतने बढिय़ा... मेरी आलोचना क्या हुई है..? मेरी आलोचना ये हुई है कि इतने बढिय़ा बस स्टेशन की क्या जरूरत थी..? मुझे कभी-कभी ये गरीब सोच वाले लोग होते हैं, उन पर बड़ी दया आती है। सामान्य मानवी के लिए अगर अच्छी सुविधा होती है तो लोगों की आंख में चुभने लगती है, लेकिन अरबों-खरबों का एयरपोर्ट बन जाता है,तो लोगों के आंख में नहीं चुभता..! एयरपोर्ट अच्छा क्यों बना ऐसा कोई सवाल नहीं पूछता है, लेकिन बस स्टेशन अच्छा क्यों बना, हमें सवाल पूछा जा रहा है..? क्या सामान्य मानवी के लिए अच्छी सुविधा नहीं होनी चाहिए, हमें इसके लिए क्वेश्चन किया जाता है..? और ये कुछ लोगों की मानसिक दरिद्रता होती है। और मुझे एक कथा बराबर याद है, बहुत सालों पहले की घटना है और सत्य घटना है। मैं मेहसाणा के प्लेटफार्म पर खड़ा था और वहाँ पर भीख मांगने वाला एक इंसान, किसी ने ब्रेड दिया होगा, तो ब्रेड अपने हाथ के अंदर ऐसे डूबो-डूबो कर खा रहा था और बड़े चाव से खा रहा था। मेरी यूँ ही नजर गई, मैंने देखा कि उसके हाथ में तो कुछ है नहीं, तो ये ब्रेड जो है उसे ऐसे डूबो-डूबो कर कैसे खा रहा है..? तो मेरा मन कर गया और उस गरीब आदमी के पास जाकर मैंने पूछा। मैंने कहा भइया, तुम ब्रेड खा रहे हो, तेरे हाथ में तो कुछ है नहीं, ये ऐसे बराबर डूबो-डूबो कर क्यों खा रहे हो..? तो उसने मुझे जवाब दिया, उसने कहा साहब, ऐसा है कि अकेली ब्रेड टेस्टी नहीं लगती, तो मैं मन से सोचता हूँ कि मेरे हाथ में नमक है और नमक में डूबो के मैं उसे खा रहा हूँ..! मैंने कहा यार, कल्पना ही करनी है तो श्रीखंड की कर, नमक की क्यों कर रहा है..? लेकिन वो गरीब आदमी की कल्पना की दरिद्रता इतनी थी कि वो उससे बाहर नहीं जा सका था..! मित्रों, आप गुजरात का अध्ययन करेंगे तो देखेंगे कि जो गरीबों की भलाई के काम हैं उसको ऊचांई पर ले जाने की हमारी सोच है। हमने ‘ज्योतिग्राम योजना’ क्यों की..? सामान्य मानवी को 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिलनी चाहिए..! अमीर तो अपने घर में जनरेटर लगा सकता है, गरीब के घर में स्वीच ऑन करने से बिजली मिलनी चाहिए। उन गरीबों के प्रति लगाव का परिणाम है कि ‘ज्योतिग्राम योजना’ ने जन्म लिया..! ‘108’ क्यों आई..? किसी अमीर को अस्पताल जाना है तो उसके लिए पचास एम्बूलेंस घर के सामने खड़ी हो जाएंगी, हैल्थ केयर करने वाला एक पूरा कोन्वॉय उसके घर आ जाएगा। सामान्य आदमी बीमार हो तो कहाँ जाएगा और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से ‘108’ सेवा का जन्म हुआ और आज गरीब से गरीब व्यक्ति एक रूपया खर्च किये बिना ‘108’ अपने घर पर बुला सकता है और उसको आगे ले जा सकता है। अभी परसों हमने एक कार्यक्रम किया, हिंदुस्तान में पहली बार ऐसा कार्यक्रम हमने दिया है। ‘खिलखिलाट’, ये ‘खिलखिलाट’ योजना..! अस्पताल तक तो ले जाती है ‘108’, लेकिन वो ठीक होने के बाद, बच्चा जन्म लेता है और बच्चे को लेकर वो घर जाता है और उसको अगर सही व्यवस्था नहीं मिली, और 48 अवर्स में बच्चा जब घर जा रहा है और उसको कोई इनफ़ेक्शन लग गया, तो हमें उस बच्चे की जान गंवा देनी पड़ती है। उस बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए, उस मां और उस नवजात शिशु को उसके घर तकछोडऩे के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्टेशन देने का काम, ये ‘खिलखिलाट’ योजना हमने दो दिन पूर्व समर्पित की।

मारी हर योजना के केन्द्र में गरीब हैबी.आर.टी.एस.,गरीब सामान्य मानवी को समय पर पहुँचाने के लिए और सम्मान पूर्वक बैठने के लिए हमने व्यवस्था की। हमने स्मार्ट कार्ड बनाया तो किसका पास बनाया? स्मार्ट कार्ड योजना से एक सामान्य मानवी के लिए टिकट की व्यवस्था की। हमने बिलो पॉवर्टी लाइन के लोगों को, जो सस्ता अनाज की दुकान से पी.डी.एस. सिस्टम का लाभ लेने के लिए दुकान पर जाते हैं, तो गुजरात इज़ द ओन्ली स्टेट, जिसने बार कोड सिस्टम बनाई है ताकि उसको किस तारिख को माल मिला वहाँ तक का पूरा रिकार्ड होगा और कोई दुकानदार उसको डिनाई नहीं कर सकता है। इस प्रकार की व्यवस्था क्यों की..? हमारे दिलो-दिमाग के अंदर हर पल एक गरीब आदमी की सुख-सुविधा रहती है। जितनी भी योजनाएं हैं, उसका कोई अध्ययन करेगा तो उसको ध्यान आएगा। गुजरात एक ऐसा प्रदेश है, 2001 में जब मैंने कार्यभार संभाला था तब मेरे राज्य के अंदर मुश्किल से 32% माताएं ऐसी थीं,जिन्हें इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी का लाभ मिलता था, अस्पताल में उनकी डिलीवरी होती थी, ओन्ली 32%..! भाइयों-बहनों, गरीबों के लिए योजनाएं बनाईं, ‘चिरंजीवी स्कीम’ लाए, सरकार ने हिस्सा लिया, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल लाए, नई व्यवस्थाएं खड़ी कीं... और आज मैं गर्व से कहता हूँ कि मेरे राज्य के अंदर करीब 96% इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी होती हैं, गरीब माताओं की प्रसूती अस्पतालों में होने लगी हैं या डॉक्टरों की मदद से होने लगी हैं..! ये स्थिति हम लाए क्यों..? मुझे गरीब मां को बचाना है, गरीब बच्चों को बचाना है और इसलिए की है। जितनी भी योजनाओं का अध्ययन करोगे, वो बी.आर.टी.एस. का होगा तो भी, उस योजना के केन्द्र में सामान्य मानवी की सुविधा है, गरीब मानवी की सुविधा है। उस प्रेरणा से काम हो रहा है और तब जाकर के बी.आर.टी.एस. सफल होती है, तब जाकर के योजनाएं सफल होती हैं और उस योजनाओं को सफल करने की दिशा में प्रयास करते हैं।

आने वाले दिनों में हमारे यहाँ जापान के साथ मिल कर के एक डेडिकैटेड इंडस्ट्रियलकॉरिडोर खड़ा हो रहा है। वो भी ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के अगल-बगल में डेवलपमेंट का पूरा मॉडल है, वो भी होने वाला है। हम कैनाल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम कोस्टल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम इंटर डिस्ट्रीक्ट का, तीन सिटी का प्लान तैयार करने जा रहे हैं जिसको ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम की प्राथमिकता से जोडऩा चाहते हैं। यानि, इतने विषयों के इनिशियेटिव दिमाग में भरे पड़े हैं जिसको धरती पर उतारने के सपने लेकर के काम कर रहे हैं, उसमें ये जो एशिया की कान्फ्रेंस हो रही है, यह एशिया की कान्फ्रेंस हमें भी नई दिशा और दर्शन देंगे, नई शक्ति देंगे, नए विचार देंगे, और उसको लेकर के हम इस शहर के सामान्य मानवी की सुख सुविधाओं में और अधिक बढ़ोतरी कर पाएंगे।

मुझे आप सब के बीच आने का अवसर मिला, आप सब से बात करने का सौभाग्य मिला, मैं अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का बहुत आभारी हूँ और इस इनिशियेटिव के लिए उनका अभिनदंन करता हूँ..!

य जय गरवी गुजरात...!!

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पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजनेच्या गुजरातमधील लाभार्थ्यांशी संवाद साधताना केलेले संबोधन
August 03, 2021
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पूर्वी, स्वस्त धान्य योजनांचे अर्थसाह्य आणि व्याप्ती वाढत असे, मात्र त्या प्रमाणात भूकबळी आणि कुपोषणाच्या प्रमाणात घट झाली नाही-पंतप्रधान
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना सुरु झाल्यापासून लाभार्थ्यांना आधीपेक्षा जवळपास दुप्पट अन्नधान्याचा लाभ-पंतप्रधान
कोरोना महामारीच्या काळात 80 कोटींपेक्षा अधिक लोकांना मोफत अन्नधान्य; योजनेसाठी 2 लाख कोटी रुपयांचा खर्च- पंतप्रधान
शतकातील सर्वात मोठ्या संकटाच्या काळातही एकही नागरिक उपाशी राहिला नाही- पंतप्रधान
गरिबांना रोजगार देण्यास आज सरकारचे सर्वोच्च प्राधान्य- पंतप्रधान
आपल्या खेळाडूंचा नवा आत्मविश्वास आज नव्या भारताची ओळख ठरतो आहे- पंतप्रधान
देशाची 50 कोटींच्या विक्रमी लसीकरणाच्या दिशेने झपाट्याने वाटचाल-पंतप्रधान
स्वातंत्र्याच्या अमृतमहोत्सवात राष्ट्र उभारणीसाठी नवी प्रेरणा घेण्याची प्रतिज्ञा करूया- पंतप्रधान

गुजरातचे मुख्यमंत्री विजय रुपाणी , उप-मुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल जी, संसदेतील माझे सहकारी आणि गुजरात भाजपा अध्यक्ष सी. आर. पाटिल, पंतप्रधान  गरीब कल्याण अन्न योजनेचे सर्व  लाभार्थी, बंधू आणि भगिनींनो,

गेल्या अनेक वर्षात गुजरातने विकास आणि  विश्वासाची जी सातत्यपूर्ण प्रक्रिया सुरु केली आहे ती राज्याला नव्या उंचीवर घेऊन जात आहे. गुजरात सरकारने आपल्या भगिनी, आपले शेतकरी,आपल्या गरीब कुटुंबांच्या कल्याणासाठी प्रत्येक योजना सेवाभावाने वास्तवात साकारली आहे. आज गुजरातच्या लाखो कुटुंबांना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजनेअंतर्गत एकाच वेळी मोफत शिधावाटप केले जात आहे. हे मोफत शिधावाटप जागतिक महामारीच्या या काळात गरीबांची चिंता कमी करत आहे, त्यांचा विश्वास वाढवत आहे.हा विश्वास यामुळे आला आहे कारण त्यांना वाटत आहे की आव्हान कितीही मोठे असो, देश त्यांच्याबरोबर आहे. थोड्या वेळापूर्वी लाभार्थ्यांबरोबरच्या चर्चेत मी हा अनुभव घेतला आहे.

मित्रानो,

स्वातंत्र्य मिळाले तेव्हापासूनच बहुतांश सर्वच सरकारांनी स्वस्तात भोजन देण्याची घोषणा केली होती. स्वस्त शिधा योजनांची व्याप्ती आणि तरतुदीत वर्षागणिक वाढ होत गेली मात्र त्याचा जो प्रभाव पडायला हवा होता तो मर्यदितच राहिला. देशाची धान्याची कोठारे वाढत गेली, मात्र उपासमारी आणि कुपोषणात तेवढ्या प्रमाणात घट झाली नाही. याचे एक मोठे कारण होते -  वितरण प्रणाली प्रभावी नसणे. ही स्थिति बदलण्यासाठी वर्ष 2014 नंतर नव्याने काम सुरु करण्यात आले. नवीन तंत्रज्ञानाला या परिवर्तनाचे माध्यम बनवण्यात आले. कोट्यवधी बनावट लाभार्थ्यांना व्यवस्थेतून हद्दपार करण्यात आले. शिधापत्रिका आधारशी जोडण्यात आली आणि सरकारी शिधावाटप दुकानांमध्ये डिजिटल तंत्रज्ञानाला प्रोत्साहित करण्यात आले. त्याचा आज परिणाम आपल्यासमोर आहे.

बंधू आणि भगिनींनो,

शंभर वर्षातील सर्वात मोठे संकट देशावर ओढवले आहे. उपजीविका संकटात सापडली, कोरोना लॉकडाउन यामुळे उद्योग व्यवसाय बंद करावे लागले. मात्र देशाने आपल्या नागरिकांना उपाशी झोपू दिले नाही.   दुर्दैवाने जगातील अनेक देशांच्या लोकांवर  आज संक्रमणबरोबरच उपासमारीचे भीषण संकट ओढवले आहे. मात्र भारताने संक्रमणाची चाहूल लागल्यापासून पहिल्या दिवसापासूनच हे संकट ओळखून त्यावर काम सुरु केले. म्हणूनच आज जगभरात पंतप्रधान गरीब कल्याण अन्न योजनेची प्रशंसा होत आहे. मोठमोठे तज्ञ या गोष्टीची प्रशंसा करत आहेत की भारत आपल्या 80 कोटींहून अधिक लोकांना या महामारीच्या काळात मोफत अन्नधान्य पुरवत आहे. यावर देश 2 लाख कोटींहून अधिक खर्च करत आहे. उद्देश एकच आहे - कुणीही भारतीय उपाशी राहू नये. आज 2 रुपये किलो गहू, 3 रुपये  किलो तांदळाच्या कोटयाव्यतिरिक्त प्रत्येक लाभार्थीला 5 किलो गहू आणि तांदूळ मोफत दिले जात आहेत. म्हणजेच या योजनेद्वारे पूर्वीच्या तुलनेत शिधापत्रिकाधारकांना सुमारे दुप्पट प्रमाणात अन्नधान्य उपलब्ध करून दिले जात आहे. ही योजना दिवाळीपर्यंत चालेल. गुजरातमध्येही सुमारे साडे 3 कोटी लाभार्थ्यांना मोफत अन्नधान्याचा आज लाभ मिळत आहे. मी गुजरात सरकारची  प्रशंसा करतो कारण त्यांनी देशाच्या अन्य भागातून गुजरातमध्ये कामासाठी आलेल्या मजुरांना प्राधान्य दिले. कोरोना लॉकडाउनमुळे प्रभावित  लाखो मजुरांना या योजनेचा लाभ मिळाला आहे. यामध्ये अनेकजण असे होते ज्यांच्याकडे एकतर शिधापत्रिका नव्हती किंवा त्यांची  शिधापत्रिका अन्य राज्यांची होती. गुजरात त्या राज्यांपैकी एक आहे ज्यांनी सर्वप्रथम एक राष्ट्र, एक शिधापत्रिका योजना लागू केली. एक राष्ट्र,एक शिधापत्रिकेचा लाभ गुजरातमधील लाखो मजुरांना होत आहे

बंधू आणि भगिनींनो,

एक काळ होता जेव्हा देशात  विकास केवळ मोठ्या शहरांपुरता मर्यादित होता. तिथेही विकासाचा अर्थ एवढाच होता की विशिष्ट भागात मोठमोठे उड्डाणपूल बांधले गेले, रस्ते बांधले गेले, आणि मेट्रोचे काम सुरु झाले. म्हणजे गावे-खेड्यांपासून दूर आणि आपल्या घराबाहेर जे काम होत होते त्यालाच विकास समजले जात होते.  गेल्या काही वर्षात देशाने ही विचारधारा बदलली आहे. आज देश पायाभूत विकासावर लाखो कोटी रुपये खर्च करत आहे. मात्र त्याचबरोबर , सामान्य माणसाच्या जीवनाचा दर्जा सुधारण्यासाठी राहण्यास सुलभ असे नवे मापदंड देखील स्थापित करत आहे. गरीबाच्या सक्षमीकरणाला आज सर्वोच्च प्राधान्य दिले जात आहे. जेव्हा 2 कोटी गरीब कुटुंबांना घरे दिली जातात तेव्हा त्याचा अर्थ असतो की ते आता थंडी ,उन, पावसाच्या भीतीपासून मुक्त होऊन जगू शकतील. जेव्हा 10 कोटी कुटुंबांना शौचासाठी घराबाहेर जाण्यापासून मुक्ती मिळते तेव्हा त्याचा असा अर्थ होतो की त्यांचे जीवनमान उंचावले आहे. त्याचबरोबर जेव्हा देशातील गरीब जन-धन खात्याच्या माध्यमातून बँकिंग व्यवस्थेशी जोडला जातो, मोबाईल बँकिंग गरीबाच्या हातात येते तेव्हा त्याला ताकद मिळते, त्याला नव्या संधी मिळतात. आपल्याकडे म्हटले जाते-

सामर्थ्‍य मूलम्

सुखमेव लोके!

याचा अर्थ असा आहे की, आपल्या जीवनामध्ये सुख असेल तरच त्याआधारे सामर्थ्‍य  प्राप्त होते. ज्याप्रमाणे आपण सुखाच्या मागे धावलो तरी सुख काही प्राप्त करून घेवू शकत नाही आणि सुखासाठी जे काही निर्धारित कार्य असते ते आपल्याला वास्तविक करावे लागते. असे कार्य केले तरच कशाची तरी म्हणजेच सुखाची प्राप्ती होवू शकणार आहे. अगदी तसेच सशक्तीकरणाचेही आहे. आरोग्य, शिक्षण, सुविधा आणि आपली प्रतिष्ठा वाढली तरच सशक्तीकरण होते. ज्यावेळी कोट्यवधी गरीबांना आयुष्मान योजनेतून मोफत औषधोपचार मिळतो, त्यावेही आरोग्य सेवेचे सशक्तीकरण होत असते. ज्यावेळी शहराचं रस्ते गावांनाही जोडले जातात, ज्यावेळी गरीब कुटुंबाला मोफत स्वयंपाकाच्या गॅसची जोडणी दिली जाते, मोफत विजेची जोडणी दिली जाते, त्यावेळी या सुविधांमुळे त्या गरीबांचे सशक्तीकरण केले जाते. ज्यावेळी एका व्यक्तीला औषधोपचार, शिक्षण आणि इतर सुविधा मिळतात, त्यावेळी ती व्यक्ती आपल्या उन्नतीच्या दृष्टीने आणि देशाच्या प्रगतीविषयी विचार करायला लागतात. त्या स्वप्नांना पूर्ण करण्यासाठी आज देशामध्ये मुद्रा योजना आहे, स्वनिधी योजना आहे. भारतामध्ये असलेल्या अशा अनेक योजनांमुळे गरीबांना सन्मानाने जगण्याचा मार्ग दाखवत आहेत. सन्मानाने सशक्तीकरणाचे माध्यम म्हणजे या योजना आहेत.

बंधू भगिनींनो,

ज्यावेळी सामान्य माणसाला स्वप्ने पाहण्याची, ती पूर्ण करण्याची संधी मिळते, तशी व्यवस्था ज्यावेळी घरापर्यंत पोहोचवली जाते, त्यावेळी त्याच्या जीवनामध्ये कसा कायापालट होतो, हे गुजरातला खूप चांगले माहिती आहे, गुजरातने चांगले अनुभवले आहे. कधी काळी गुजरातच्या एका खूप मोठ्या भागातल्या लोकांना, माता- भगिनींना पाण्याची मूलभूत गरज पूर्ण करण्यासाठी अनेक किलोमीटर पायपीट करावी लागत होती. परंतु आज, सरदार सरोवर धरणामुळे, साउनी योजनेमुळे, कालव्यांचे जाळे तयार करण्यात आल्यामुळे, कच्छमध्येही माता नर्मदेचे पाणी पोहोचत आहे. नर्मदेचे पाणी कच्छमध्ये पोहोचू शकेल, असा कोणी याआधी विचारही केला नव्हता. या प्रयत्नांचे परिणाम म्हणजे, आज गुजरातमध्ये अगदी शंभर टक्के, नळाव्दारे पेयजल उपलब्ध करून देण्याचे लक्ष्य गाठण्याच्या अगदी जवळ आले आहे. गुजरात हे लक्ष्य सहज गाठू शकणार आहे. या वेगाने काम होत असल्यामुळे सामान्य जनतेच्या जीवनामध्ये परिवर्तन येत आहे. असेच परिवर्तन आता हळूहळू संपूर्ण देशामध्येही होत असल्याचे सर्वांना जाणवत आहे, दिसून येत आहे.

स्वातंत्र्य मिळाल्यानंतर अनेक दशकांनंतरही देशामध्ये फक्त तीन कोटी ग्रामीण परिवारांना नळाव्दारे पाणी पुरवठ्याची सुविधा मिळू शकली होती. आज मात्र जल जीवन अभियानाअंतर्गत देशभरामध्ये अवघ्या दोन वर्षांच्या आत साडे चार कोटींपेक्षा जास्त परिवारांना जलवाहिनीच्या माध्यमातून पाणी पुरवठा योजनेत समाविष्ट करून घेतले आहे.

बंधू आणि भगिनींनो,

डबल इंजिनाच्या सरकारचा लाभही कितीतरी मिळू शकतो, याचाही गुजरातला सातत्याने अनुभव आहे. आज सरदार सरोवर धरणामुळे विकासाची नवीन धारा वाहू लागली आहे, इतकेच नाही; तर स्टॅच्यू ऑफ युनिटीच्या रूपाने संपूर्ण विश्वामध्ये सर्वात उंच, मोठ्या पुतळ्याविषयीचे आकर्षण वाढते आहे. हे आकर्षण गुजरातमध्येच आहे. कच्छमध्ये स्थापित होत असलेल्या नवीकरणीय ऊर्जा पार्कमुळे गुजरातला संपूर्ण विश्वाच्या नवीकरणीय ऊर्जा नकाशावर मानाचे स्थान प्राप्त झाले आहे. गुजरातमध्ये रेल्वे आणि हवाई संपर्क व्यवस्था आधुनिक बनविण्यासाठी आणि ती अधिक व्यापक बनवण्यासाठी मोठे, भव्य पायाभूत सुविधा निर्मितीचे प्रकल्प उभे करण्यात येत आहेत. गुजरातमधल्या अहमदाबाद आणि सूरत या शहरांमध्ये मेट्रो संपर्क व्यवस्थेचा विस्तार वेगाने केला जात आहे. आरोग्य दक्षता आणि वैद्यकीय शिक्षण क्षेत्रातही गुजरातमध्ये कौतुकास्पद काम होत आहे. गुजरातमध्ये तयार झालेल्या चांगल्या वैद्यकीय पायाभूत सुविधामुळे 100 वर्षांतल्या सर्वात मोठ्या वैद्यकीय आणीबाणीच्या काळामध्ये सेवेचे नियोजन करण्यात मोठी भूमिका बजावली आहे.

मित्रांनो,

गुजरातसहित संपूर्ण देशामध्ये अशी अनेक कामे झाली आहेत, त्यांच्यायोगे आज प्रत्येक देशवासियाचा, प्रत्येक क्षेत्राचा आत्मविश्वास वाढतोय. हा आत्मविश्वासच आज प्रत्येकाला येणारे प्रत्येक आव्हान पार करण्याचे, प्रत्येक स्वप्नपूर्ती करण्यासाठी एक खूप मोठे सूत्र बनतोय. आजचे अगदी ताजे उदाहरण आहे. ऑलिपिंक्समध्ये आपल्या खेळाडूंनी केलेले प्रदर्शनाचे घेवू. यावेळी ऑलिपिंक्समध्ये भारताच्या सर्वात जास्त खेळाडूंनी पात्रता फेरी पार केली आहे. आपण विशेष लक्षात घेतले पाहिजे की,  हे कार्य सर्वांनी 100 वर्षांतल्या सर्वात मोठ्या वैद्यकीय आणीबाणीला तोंड देत केले आहे. या खेळाडूंनी फक्त पात्रता फेरी जिंकली असे नाही, तर त्यांनी आपली सर्व ताकद पणाला लावून टक्कर दिली आहे. आपले खेळाडू प्रत्येक खेळ प्रकारामध्ये स्वतःचे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करीत आहेत. या ऑलिपिंकमध्ये नवीन भारताचा तगडा आत्मविश्वास आपल्याला प्रत्येक खेळामध्ये दिसून येत आहे. ऑलिपिंक्समध्ये उतरलेले आपले खेळाडू आपल्यापेक्षा चांगली कामगिरी करणारे, वरची क्रमवारी असलेल्या खेळाडूंना, संघांना आव्हान देत आहेत. भारतीय खेळाडूंचा उत्साह, त्यांचा जोश आणि खिलाडू वृत्ती, आज सर्वोच्च स्तरावर आहे. ज्यावेळी  खेळाडूंमधले योग्य गुण, कौशल्य, ओळखून खेळाडूंची निवड केली गेली की, हा असा आत्मविश्वास दिसून येतो. खेळाडूंच्या गुणांना प्रोत्साहन मिळते. ज्यावेळी व्यवस्था बदलते, व्यवस्था पारदर्शक बनते, त्याचवेळी हा आत्मविश्वास येत असतो. हा नवीन आत्मविश्वास नव भारताची ओळख बनत आहे. हा आत्मविश्वास आज देशाच्या कानाकोप-यात, प्रत्येक लहान-लहान गावांमध्ये मोठ्या गावांच्या गल्ली बोळांमध्ये, गरीब, मध्यम वर्गातल्या युवा भारतामध्ये येत आहे.

मित्रांनो,

या आत्मविश्वासानेच आपल्याला कोरोनाविरोधातल्या लढाईमध्ये आणि आपल्या लसीकरण अभियानामध्ये पुढे जायचे आहे. वैश्विक महामारीच्या या काळामध्ये आपल्याला सातत्याने सतर्क राहिले पाहिजे. देश आता 50 कोटी लोकांच्या लसीकरणाचा टप्पा पार करण्यासाठी वेगाने वाटचाल करीत आहे.  तर गुजरातही साडे तीन कोटी लसीकरणाचा टप्पा गाठण्याच्या जवळ आला आहे. आपल्या सर्वांना लस तर घ्यायची आहे, मास्कही लावायचा आहे, आणि जितके शक्य आहे, तितके गर्दीपासून दूर रहायचे आहे. आपण दुनियेमध्ये पाहतोय की, जिथे जिथे मास्क लावण्याचे निर्बंध काढून टाकण्यात आले होते,  त्या भागांमध्ये काही दिवसांनी पुन्हा मास्क लावण्याचा आग्रह केला जात आहे. दक्षता आणि सुरक्षितता यांचा बरोबरीने विचार करून आपल्याला पुढे जायचे आहे.

मित्रांनो,

आज ज्यावेळी आपण अन्न योजनेविषयी इतका मोठा कार्यक्रम करीत आहोत, तर मी आणखी एक संकल्प देशवासियांना देवू इच्छितो. हा संकल्प आहे, राष्ट्र निर्माणाची नवीन प्रेरणा जागृत करण्याचा ! स्वातंत्र्याच्या 75 व्या वर्धापनादिनीनिमित्त, स्वातंत्र्याच्या अमृत महोत्सवामध्ये, आपण हा पवित्र संकल्प केला पाहिजे. या संकल्पामध्ये, या अभियानामध्ये गरीब-श्रीमंत, महिला-पुरूष, दलित-वंचित असे सगळेजण समसमान भागीदार आहेत. गुजरातने आगामी वर्षात आपले सर्व संकल्प सिद्धीस न्यावेत, विश्वामध्ये आपली गौरवशाली ओळख अधिक मजबूत करावी. या कामनेबरोबर मी आपले भाषण समाप्त करतो. पुन्हा एकदा अन्न योजनेच्या सर्व लाभार्थींना खूप- खूप शुभेच्छा!!!......