Gujarat Chief Minister addressed a Asia BRTS Conference, Ahmedabad

Published By : Admin | September 6, 2012 | 15:05 IST

क छोटे से कमरे में, एशिया के भिन्न-भिन्न देशों के नीति निर्धारक बैठकर के मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पर सोच रहे हैं। आम तौर पर इस प्रकार के सेमीनार सिंगापोर में होते हैं, टोक्यो में होते हैं, कभी-कभी बीजिंग में होते हैं। इस प्रकार के विषयों का नेतृत्व कभी भी हिंदुस्तान को नसीब नहीं होता है। लेकिन ये गुजरात का सौभाग्य और अहमदाबाद का कमाल है कि बी.आर.टी.एस. की सफलता ने एशिया के अनेक देशों को यहाँ खींच लाने के लिए सफलता प्राप्त की है। ऐेसे मैं इस शहर को हृदय से बहुत=बहुत अभिनंदन करता हूँ, बधाई देता हूँ..!

ज विश्व के सभी देशों के सामने ट्रांसपोर्टेशन के विषय को लेकर एक बहुत बडी चिंता का हम अनुभव कर रहें हैं। एक तो बढ़ती हुई जनसंख्या, मल्टीमोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स, बढ़ती हुई वेहिकलों की संख्या, इंसान का स्पीड की ओर अधिक लगाव और दूसरी तरफ एनर्जी क्राइसिस। इन सभी सवालों के जवाब हमें एक साथ ढूंढ़ने हैं, ताकि लोगों को बस की सुविधाएं मिलें, ट्रांसपोर्टेशन की सुविधाएं मिलें, एनर्जी कन्ज़रवेशन में हम कुछ कान्ट्रीब्यूट करें, लोगों के समय की बचत करें, हमारी व्यवस्थाएं ऐसी हों जिसमें सामान्य मानवी को सुरक्षा का अहसास हो, इन सभी पहलुओं पर अगर हमने सोचने में देरी की, तो कितना बड़ा सकंट पैदा हो सकता है इसका हम अंदाजा लगा सकते हैं। आज किसी व्यक्ति को मुंबई जाना है, मुंबई में बसना है तो सबसे पहले उसके दिमाग में समस्या यह आती है कि दिनभर मैं आऊंगा कैसे-जाऊंगा कैसे..? वह पचास बार सोचता है, सबसे पहले समस्या ये आती है। आज हिंदुस्तान के कई शहर ऐसे हैं कि जहाँ डेस्टिनैशन पर पहुँचने का एवरेज टाइम 55 से 60 मिनट है। अभी हम गुजरात में भागयवान हैं, अहमदाबाद-सूरत जैसे शहरों में अभी भी हमारा रिचिंग टाइम एवरेज 20 मिनट का है। लेकिन फिर भी, चाहे ये 20 हो, 55 हो या कहीं पर 60 हो, ये अपने आप में इसको कैसे कम किया जाए और फिर भी सुविधा बढ़ाई जाए, यह एक बहुत बड़ी चैलेंज है, और इस चैलेंज को हम कैसे पूरा कर पाएंगे..!

दूसरी बात है कि इन सारे विषयों को अगर हम टुकड़ों में सोचेंगे, कि चलिए भाई, आज लोगों को जाने-आने में दिक्कत हो रही है, तो ट्रांसपोर्ट के लिए सोचो..! फिर कभी बैठेंगे तो सोचेंगे कि बच्चों को स्कूल जाने की व्यवस्था के लिए सोचो..! तीसरे दिन सोचेंगे, कि चलिए भाई, वहाँ कोई फैस्टिवल हो रहा है, तो वहाँ का ही कुछ सोचो..! अगर टुकड़ों में चीजों को सोचा जाएगा तो इन समस्याओं का कभी समाधान नहीं होगा। और इसलिए हमारे देश ने और विशेष कर के एशिया के कुछ देशों ने इस क्षेत्र में काम किया है, उनसे सीखते हुए हमें पूरे गवर्नेंस के मॉडल को विकसित करना पड़ेगा, अर्बन डेवलपमेंट का साइंटिफिक एप्रोच क्या हो, इस पर हमें बल देना होगा। हम सिर्फ हाउसिंग इन्डस्ट्री को एड्रेस करें, हाउसिंग प्राब्लम को एड्रेस करें और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को ना करें, हम रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को करें लेकिन ट्रांसपोर्टेशन को ना करें, हम ट्रांसपोर्टेशन को करें लेकिन पावर सप्लाई को ना करें, हम पावर सप्लाई को करें लेकिन गैस ग्रिड को ना करें, हम गैस ग्रिड को करें लेकिन ब्रॉड-बैंड कनेक्टिविटी ना दें... अगर हम ऐसे टुकड़ों में करेंगे, तो मैं नहीं मानता हूँ कि हम सुविधाओं को पहुँचा सकते हैं। और इसलिए एक इन्टीग्रेटेड हॉलिस्टिक एप्रोच, और उसके लिए सबसे पहली आवश्यकता जो मैं अपने देश में महसूस करता हूँ, कि जिस प्रकार से आई.आई.एम. के अंदर भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, एम.बी.ए. के भिन्न-भिन्न प्रकार के कोर्सेज चलते हैं, ये समय की मांग है कि हमारे देश में जितना हो सके उतना जल्दी अर्बन मैनेजमेंट,अर्बन इनिशियेटिव्स को लेकर के युनिवर्सिटीज में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाए। एक्सपर्ट टैलेंट हमको तैयार करनी होगी, जो इन बढ़ते हुए, क्योंकि गुजरात एक ऐसा स्टेट है जहाँ हमारा आज 42% अर्बन पॉप्यूलेशन है और 50% पॉप्यूलेशन अर्बन एरिया पर डिपेन्डन्ट है, अगर यह मेरी स्थिति है तो मेरे लिए आवश्यक बन जाता है। आज इस प्रकार का सांइटिफिक नॉलेज रखने वाले ह्यूमन रिसोर्स भी उपलब्ध नहीं है। अगर कहीं कोई विदेश पढ़ करके आया है, तो ऐसे दो चार लोग मिल जाएंगे कि जिन्होंने इसी विषय पर मास्टरी की है। आवश्यकता यह है कि हमारे देश की गिवन सिचूऐशन के संदर्भ में, एशियन कंट्रीज़ की गिवन सिचूएशन के संदर्भ में, हम किस प्रकार का अर्बन मैनेजमेंट खड़ा कर सकते हैं..! और जब अर्बन मैनेजमेंट का पूरा सोचते हैं, तब जा कर के उसमें ट्रासंपोर्टेशन का मुद्दा आता है।

ब जैसे गुजरात जैसा प्रदेश है, बी.आर.टी.एस. में हम सफल हुए, और कभी-कभी मुझे लगता है कि हम बी.आर.टी.एस. में सिर्फ सफल होते तो दुनिया का ध्यान नहीं जाता..! हमारा दुर्भाग्य यह है कि हम कितना ही पसीना बहाएं, कितना ही अच्छा करें, लेकिन शुरू में किसी का उस पर ध्यान नहीं जाता है। जब दिल्ली में बी.आर.टी.एस. फेल हुआ, तब गुजरात पर ध्यान गया। अगर दिल्ली फेल ना गया होता तो हमारी सक्सेस की तरफ किसी की नजर नहीं जाती..! हमारे यहाँ ‘ज्योती ग्राम योजना’, चौबीस घंटे, थ्री फेज़, अनइन्ट्रप्टेड पावर गुजरात के अंदर पिछले पांच-छह साल से हम सप्लाई कर रहे हैं, सक्सेसफुली कर रहे हैं, लेकिन देश का कभी ध्यान नहीं गया। लेकिन अभी थोड़े दिन पहले जब पूरा हिंदुस्तान अंधेरे में फंस गया, 19 राज्य अंधेरे में फंस गएं, तब लोगों को गुजरात का उजाला दिखाई दिया और वॉशिंगटन पोस्ट तक सबको लिखना पड़ा कि एक गुजरात है जहाँ एनर्जी की दिशा में ये सेल्फ सफिशियंट है। तो ये दिल्ली में जब बी.आर.टी.एस. फेल गया, तब जा करके गुजरात के अहमदाबाद के बी.आर.टी.एस. प्रोजेक्ट की सफलता की तरफ दुनिया का ध्यान गया..! मित्रों, ये बी.आर.टी.एस. की बात हो, कोई भी बात हो, एक बात लिख कर रखिए, जब भी दिल्ली विफल जाएगा,गुजरात सक्सेस करके दिखाएगा। व्हेनएवर दिल्ली फेल्स,गुजरात सक्सीड्स..! और हम सफलता कि दिशा में, सफलता की ओर लोगों को ले जाने के पक्ष में हैं।

ब हम बी.आर.टी.एस. पर रुकने के मूड में नहीं हैं, और ट्रांसपोर्टेशन के सिस्ट्म्स की ओर हम आगे बढऩा चाहते हैं। अभी आप लोगों को जिस दिन मैंने कांकरिया और रिवर फ्रंट का लोकार्पण किया था, उस दिन हमने कहा था कि हिंदुस्तान में पहली बार हम एम्फि सर्विस को शुरू करने जा रहे हैं। साबरमती रिवर फ्रंट के अंदर जो कि नर्मदा का पानी बहा है, अब उसमें हम उस ट्रांस्पोर्टेशन को ला रहे हैं कि जिस में बस पानी में चलेगीऔर जहाँ पानी पूरा हो जाएगा, फिर वो जमीन पर दौडऩे लगेगी..! हमें नई-नई व्यवस्थाओं का उपयोग करना होगा।

ब गुजरात के पास 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन है। लेकिन अभी तक ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी इस 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन का उपयोग होना चाहिए, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। हम आने वाले दिनों में, और हम बीते हुए कल के गाने गा करके दिन गुजारने वाले लोग नहीं हैं, रोज नए सपने देखते हैं और सपनों को साकार करने के लिए जी-जान से जुटते रहते हैं..! 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन, विद इन स्टेट, हमारा पूरा ट्रांसपोर्टेशन मोड क्यों ना बने..? सारा हमारा जो बर्डन आज है उसको हम कितना परसेंट रिड्यूस कर सकते हैं..! आज हमारे जो नेशनल हाइवेज़ हैं, आज अगर मुबंई से कोई लगेज आता है और मुझे मुंद्रा तक ले जाना है, या मुझे कच्छ मांडवी तक ले जाना है, अगर वो ही लगेज को मैं समुद्री तट से ले आता हूँ, तो मैं पूरे ट्रांसपोर्टेशन का कितना प्रेशर कम कर देता हूँ..! और सेफ और सस्ता भी कर देता हूँ, एनर्जी सेविंग का भी काम कर सकता हूँ। और इसलिए हम अभी 1600 किलोमीटर कोस्टलाइन पर अभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहे हैं।

मुझे याद है, मैं जब छोटा था, स्कूल में पढ़ता था, अखबार पढऩे की आदत थी, तो हर मुख्यमंत्री या मंत्री के मुंह से एक बात हम बचपन में पढ़ा करते थे, सुना करते थे कि घोघा-दहेज फेरी सर्विस..! मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने लोगों से सवाल पूछा कि भाई, मैं ये बचपन से सुनता-पढ़ता आया हूँ, इसका हुआ क्या..? मित्रों, अखबार में तो हम चीज देखते थे लेकिन कागज पर, फाइल में कहीं नजर नहीं आती थी..! और मैंने वो बीड़ा उठाया है और मैं उस घोघा-दहेज फेरी सर्विस को शुरू करने जा रहा हूँ। अभी इसका इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम चल रहा है, दोनो तरफ चल रहा है। अब ये एक नया ट्रांसपोर्टेशन का मोड होगा, सौ से अधिक व्हीकल उसके अंदर आ जाएंगे, एक हजार से अधिक पैसेंजर आ जाएंगे... कितना एनर्जी सेविंग होगा, कितना समय का बचाव होगा, और कितना एग्ज़िस्टिंग ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के प्रेशर को वो कम करेगा..! हम उस दिशा में जा रहे हैं।

मित्रों, मेरे गुजरात की लाइफ लाइन है नर्मदा,लेकिन सिर्फ पानी बहता रहे तो वो लाइफ लाइन रहेगी ऐसा मैं नहीं मानता..! मैंने कुछ लोगों को अभ्यास करने में लगाया है कि गुजरात के हार्ट में से निकलने वाली 500 किलोमीटर की कैनाल है, मेन कैनाल, क्या उसके अंदर हम ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं..? लोगों को फन भी मिल जाएगा, प्रेशर भी कम होगा और कम से कम लगेज तो ले जा सकते हैं..! छोटे से, पानी से एक फुट ऊंचे ऐसा एक बने तो कहीं पर भी ब्रिज आता होगा, नाले के नीचे से निकलना होगा, तो भी वो 500 किलोमीटर लॉंग..., यानि जो काम करने के लिए अरबों-खरबों रूपये 500 किलोमीटर रोड बनाने के लिए लग जाएगा, वो आज वॉटर वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से हो सकता है क्या..? हम इसको कैसे आगे बढ़ाएं..!

मेट्रो ट्रेन..! अहमदाबाद में,सूरत में,बड़ौदा में, मेट्रो ट्रेन कि दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर सूरत के मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, बड़ौदा की मेट्रो ट्रेन का मॉडल एक होगा, अहमदाबाद का मेट्रो ट्रेन का एक मॉडल होगा, तो ये बिखरी हुई अवस्था हमें मंजूर नहीं है। इसलिए हिंदुस्तान में, गुजरात विल बी द फर्स्ट स्टेट, जो हम आने वाले दिनों में मल्टीमोडएफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण करने वाले हैं। एक अम्ब्रेला के नीचे गुजरात के सभी शहरों में इंटरसिटी के लिए, इवन हमारे जो नए स्पेशल इनवेस्टमेंट रिजन बन रहे हैं वहाँ पर,ये मल्टीमोडएफॉर्डेबल, इस काम को करने के लिए एक सेपरैट ट्रांसपोर्ट अथोरिटी बनाएंगे और शॉर्टफॉर्म होगा उसका, ‘एम. ए. टी. ए. - माता’..! और माता शब्द आते ही सुविधाएं ही सुविधाएं मिलती हैं, जहाँ माता शब्द होता है..! तो ये ‘माता’ शब्द के साथ मल्टीमोड एफॉर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी का निर्माण गुजरात के अंदर किया जाएगा और जितने भी प्रकार के आवागमन के संसाधनों की व्यवस्थाएं हैं, आज एग्ज़िस्टिंग हैं, नई आने की संभावनाएं हैं, एक होलिस्टिक एप्रोच और एक दूसरे के साथ कॉन्ट्रडिक्टरी ना हो, एक-दूसरे के साथ नए कॉन्ट्रास्ट पैदा करें ऐसे ना हों, एक दूसरे के पूरक हों और व्यवस्था ऐसी कॉमन हो, ताकि काफी खर्च नीचे लाया जा सके। अगर सूरत का एक बोर्ड है, अहमदाबाद का दूसरा बोर्ड है, तो दोनों का सप्लाई करने वाली टीमें अलग बन जाएगी, खर्चा बढ़ जाएगा। लेकिन अगर मार्केट कॉमन पैदा किया जाए, तो मैन्युफैक्चरिंग भी कॉमन होगा, तो उसके कारण उसकी कॉस्ट नीचे लाने में भी बहुत सुविधा होगी, और उस दिशा में काम करने का हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, जो लोग गुजरात की विकास यात्रा को देखते हैं, मैं जानता हूँ कि स्वस्थता पूर्वक, बारीकियों से चीजों को एनालिसिस करने का स्वभाव समाज में कम होता जा रहा है। अध्ययन करके चीजों का मूल्यकांन करने की आदत कम होती जा रही है। ऐसे बहुत से अच्छे इनिशियेटिव होते हैं, जिस पर किसी का ध्यान जाता नहीं है। क्या कारण होगा कि बी.आर.टी.एस. का नाम हमने ‘जन मार्ग’ रखा हुआ है, क्या कारण है कि हजारों करोड़ रूपयों की गोल्डन वैल्यू की जमीन हमने इस प्रकार से इस काम के लिए लगा दी होगी..! वरना इसकी कीमत की जाए तो हजारों करोड़ रूपये की कीमत की जमीन है जिस पर आज बी.आर.टी.एस. दौड़ रही है, लेकिन स्टडी करके इतने अरबों-खरबों रूपया खपाना..! कुछ लोग कहते हैं कि इतने बढिय़ा... मेरी आलोचना क्या हुई है..? मेरी आलोचना ये हुई है कि इतने बढिय़ा बस स्टेशन की क्या जरूरत थी..? मुझे कभी-कभी ये गरीब सोच वाले लोग होते हैं, उन पर बड़ी दया आती है। सामान्य मानवी के लिए अगर अच्छी सुविधा होती है तो लोगों की आंख में चुभने लगती है, लेकिन अरबों-खरबों का एयरपोर्ट बन जाता है,तो लोगों के आंख में नहीं चुभता..! एयरपोर्ट अच्छा क्यों बना ऐसा कोई सवाल नहीं पूछता है, लेकिन बस स्टेशन अच्छा क्यों बना, हमें सवाल पूछा जा रहा है..? क्या सामान्य मानवी के लिए अच्छी सुविधा नहीं होनी चाहिए, हमें इसके लिए क्वेश्चन किया जाता है..? और ये कुछ लोगों की मानसिक दरिद्रता होती है। और मुझे एक कथा बराबर याद है, बहुत सालों पहले की घटना है और सत्य घटना है। मैं मेहसाणा के प्लेटफार्म पर खड़ा था और वहाँ पर भीख मांगने वाला एक इंसान, किसी ने ब्रेड दिया होगा, तो ब्रेड अपने हाथ के अंदर ऐसे डूबो-डूबो कर खा रहा था और बड़े चाव से खा रहा था। मेरी यूँ ही नजर गई, मैंने देखा कि उसके हाथ में तो कुछ है नहीं, तो ये ब्रेड जो है उसे ऐसे डूबो-डूबो कर कैसे खा रहा है..? तो मेरा मन कर गया और उस गरीब आदमी के पास जाकर मैंने पूछा। मैंने कहा भइया, तुम ब्रेड खा रहे हो, तेरे हाथ में तो कुछ है नहीं, ये ऐसे बराबर डूबो-डूबो कर क्यों खा रहे हो..? तो उसने मुझे जवाब दिया, उसने कहा साहब, ऐसा है कि अकेली ब्रेड टेस्टी नहीं लगती, तो मैं मन से सोचता हूँ कि मेरे हाथ में नमक है और नमक में डूबो के मैं उसे खा रहा हूँ..! मैंने कहा यार, कल्पना ही करनी है तो श्रीखंड की कर, नमक की क्यों कर रहा है..? लेकिन वो गरीब आदमी की कल्पना की दरिद्रता इतनी थी कि वो उससे बाहर नहीं जा सका था..! मित्रों, आप गुजरात का अध्ययन करेंगे तो देखेंगे कि जो गरीबों की भलाई के काम हैं उसको ऊचांई पर ले जाने की हमारी सोच है। हमने ‘ज्योतिग्राम योजना’ क्यों की..? सामान्य मानवी को 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिलनी चाहिए..! अमीर तो अपने घर में जनरेटर लगा सकता है, गरीब के घर में स्वीच ऑन करने से बिजली मिलनी चाहिए। उन गरीबों के प्रति लगाव का परिणाम है कि ‘ज्योतिग्राम योजना’ ने जन्म लिया..! ‘108’ क्यों आई..? किसी अमीर को अस्पताल जाना है तो उसके लिए पचास एम्बूलेंस घर के सामने खड़ी हो जाएंगी, हैल्थ केयर करने वाला एक पूरा कोन्वॉय उसके घर आ जाएगा। सामान्य आदमी बीमार हो तो कहाँ जाएगा और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से ‘108’ सेवा का जन्म हुआ और आज गरीब से गरीब व्यक्ति एक रूपया खर्च किये बिना ‘108’ अपने घर पर बुला सकता है और उसको आगे ले जा सकता है। अभी परसों हमने एक कार्यक्रम किया, हिंदुस्तान में पहली बार ऐसा कार्यक्रम हमने दिया है। ‘खिलखिलाट’, ये ‘खिलखिलाट’ योजना..! अस्पताल तक तो ले जाती है ‘108’, लेकिन वो ठीक होने के बाद, बच्चा जन्म लेता है और बच्चे को लेकर वो घर जाता है और उसको अगर सही व्यवस्था नहीं मिली, और 48 अवर्स में बच्चा जब घर जा रहा है और उसको कोई इनफ़ेक्शन लग गया, तो हमें उस बच्चे की जान गंवा देनी पड़ती है। उस बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए, उस मां और उस नवजात शिशु को उसके घर तकछोडऩे के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्टेशन देने का काम, ये ‘खिलखिलाट’ योजना हमने दो दिन पूर्व समर्पित की।

मारी हर योजना के केन्द्र में गरीब हैबी.आर.टी.एस.,गरीब सामान्य मानवी को समय पर पहुँचाने के लिए और सम्मान पूर्वक बैठने के लिए हमने व्यवस्था की। हमने स्मार्ट कार्ड बनाया तो किसका पास बनाया? स्मार्ट कार्ड योजना से एक सामान्य मानवी के लिए टिकट की व्यवस्था की। हमने बिलो पॉवर्टी लाइन के लोगों को, जो सस्ता अनाज की दुकान से पी.डी.एस. सिस्टम का लाभ लेने के लिए दुकान पर जाते हैं, तो गुजरात इज़ द ओन्ली स्टेट, जिसने बार कोड सिस्टम बनाई है ताकि उसको किस तारिख को माल मिला वहाँ तक का पूरा रिकार्ड होगा और कोई दुकानदार उसको डिनाई नहीं कर सकता है। इस प्रकार की व्यवस्था क्यों की..? हमारे दिलो-दिमाग के अंदर हर पल एक गरीब आदमी की सुख-सुविधा रहती है। जितनी भी योजनाएं हैं, उसका कोई अध्ययन करेगा तो उसको ध्यान आएगा। गुजरात एक ऐसा प्रदेश है, 2001 में जब मैंने कार्यभार संभाला था तब मेरे राज्य के अंदर मुश्किल से 32% माताएं ऐसी थीं,जिन्हें इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी का लाभ मिलता था, अस्पताल में उनकी डिलीवरी होती थी, ओन्ली 32%..! भाइयों-बहनों, गरीबों के लिए योजनाएं बनाईं, ‘चिरंजीवी स्कीम’ लाए, सरकार ने हिस्सा लिया, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल लाए, नई व्यवस्थाएं खड़ी कीं... और आज मैं गर्व से कहता हूँ कि मेरे राज्य के अंदर करीब 96% इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी होती हैं, गरीब माताओं की प्रसूती अस्पतालों में होने लगी हैं या डॉक्टरों की मदद से होने लगी हैं..! ये स्थिति हम लाए क्यों..? मुझे गरीब मां को बचाना है, गरीब बच्चों को बचाना है और इसलिए की है। जितनी भी योजनाओं का अध्ययन करोगे, वो बी.आर.टी.एस. का होगा तो भी, उस योजना के केन्द्र में सामान्य मानवी की सुविधा है, गरीब मानवी की सुविधा है। उस प्रेरणा से काम हो रहा है और तब जाकर के बी.आर.टी.एस. सफल होती है, तब जाकर के योजनाएं सफल होती हैं और उस योजनाओं को सफल करने की दिशा में प्रयास करते हैं।

आने वाले दिनों में हमारे यहाँ जापान के साथ मिल कर के एक डेडिकैटेड इंडस्ट्रियलकॉरिडोर खड़ा हो रहा है। वो भी ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम के अगल-बगल में डेवलपमेंट का पूरा मॉडल है, वो भी होने वाला है। हम कैनाल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम कोस्टल नेटवर्क का उपयोग करना चाहते हैं, हम इंटर डिस्ट्रीक्ट का, तीन सिटी का प्लान तैयार करने जा रहे हैं जिसको ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम की प्राथमिकता से जोडऩा चाहते हैं। यानि, इतने विषयों के इनिशियेटिव दिमाग में भरे पड़े हैं जिसको धरती पर उतारने के सपने लेकर के काम कर रहे हैं, उसमें ये जो एशिया की कान्फ्रेंस हो रही है, यह एशिया की कान्फ्रेंस हमें भी नई दिशा और दर्शन देंगे, नई शक्ति देंगे, नए विचार देंगे, और उसको लेकर के हम इस शहर के सामान्य मानवी की सुख सुविधाओं में और अधिक बढ़ोतरी कर पाएंगे।

मुझे आप सब के बीच आने का अवसर मिला, आप सब से बात करने का सौभाग्य मिला, मैं अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का बहुत आभारी हूँ और इस इनिशियेटिव के लिए उनका अभिनदंन करता हूँ..!

य जय गरवी गुजरात...!!

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UPI भारत की फिनटेक स्टोरी का एक बड़ा चैंपियन: मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में पीएम मोदी
September 08, 2026
India is taking its fintech journey to new heights, with innovation and inclusion at its core: PM
India's growth gives the world renewed confidence: PM
UPI is a major champion of India's FinTech story: PM
Technologies like Agentic AI, tokenisation and quantum are opening new possibilities in the financial sector: PM
प्रधानमंत्री ने फिनटेक सेक्टर से साइबर सिक्योरिटी, एथिकल डेटा प्रोटेक्शन, इनोवेशन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स पर ध्यान देने का आग्रह किया।

आरबीआई के गर्वनर श्री संजय मल्होत्रा जी, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के चेयरमैन क्रिस गोपाल कृष्णन जी, फिनटेक वर्ल्ड के सभी innovators, leaders and investors, देवियों और सज्जनों।

Global Fintech Fest में देश विदेश से आए सभी Guests और Delegates का मैं अभिनंदन करता हूं। मुझे खुशी है कि आज यहां एक और हैट्रिक लगी है। एक हैट्रिक तो 2024 में तीसरी बार सरकार बनने से लगी थी, और एक हैट्रिक आप सभी के बीच आने से जुड़ी है। Global Fintech Fest में लगातार ये मेरा Third year है। ये हैट्रिक बताती है कि विकसित भारत के लिए आप कितने महत्वपूर्ण हैं, आपका काम कितना महत्वपूर्ण है।

साथियों,

हर बार जब मैं यहां आता हूं, तो मुझे पहले से ज्यादा युवा दिखाई देते हैं, पहले से ज्यादा एनर्जी अनुभव होती है। मुझे possibilities का दायरा expand होता दिखता है। ये साफ साफ लगता है कि risk taking capacity बढ़ रही है, ड्रीम्स और बोल्ड हो रहे हैं। और इसलिए, विकसित भारत के फ्यूचर को लेकर मेरा विश्वास और मजबूत हो रहा है।

साथियों,

Fintech की इस एनर्जी के बीच ही मुंबई में सांस्कृतिक ऊर्जा भी इन दिनों चरम पर है। कुछ ही दिनों में महाराष्ट्र सहित पूरे देश में गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। हमारे यहां हर शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश को याद किया जाता है। मैं गणपति बप्पा को नमन करते हुए, आप सभी को Global Fintech Fest 2026 के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

दुनिया के हालात क्या हैं, ये आप सब भलीभांति जानते हैं। दुनिया Conflicts और अन-सर्टेनिटी के दौर से गुजर रही है। Energy और कमोडिटीज़ की सप्लाई चेन्स पर दबाव है, Trade को लेकर भी तनाव है। और ये स्थितियां कई महीनों से बनी हुई हैं। इसमें भी अप्रैल से जून का क्वार्टर सबसे चैलेंजिंग रहा है। और इसमें भी जब भारत, Seven point eight percent से ग्रो करता है, तो दुनिया को एक नया भरोसा मिलता है। और ये जो विश्वास है, वो मैं यहां आप सभी के चेहरों पर भी साफ-साफ देख रहा हूं।

साथियों,

भारत पर इस बढ़ते भरोसे का एक और उदाहरण हमारी सॉवरीन रेटिंग्स भी है। हाल में ही, जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सॉवरीन रेटिंग्स को A-कैटेगरी में अपग्रेड किया है। अपग्रेड करना तो खुशी की बात है, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि ये सौभाग्य तीन दशक के बाद आया है, तीस साल के बाद। ये दिखाता है कि भारत के ग्रोथ मोमेंटम, हमारी मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, और जो स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स बीते वर्षों में किए हैं, उन सब को लेकर दुनिया कितनी आश्वस्त है। और मैं फिर कहूंगा कि भारत की ये रिफॉर्म एक्सप्रेस और तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ेगी।

साथियों,

भारत की फिनटेक स्टोरी अद्भुत रही है। और इसका एक बड़ा चैंपियन है- हमारा UPI. मैंने पिछले साल भी इसकी चर्चा की थी। लेकिन ये इतनी बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन है कि जब भी फिनटेक की चर्चा होगी, तो वो UPI के बिना अधूरी ही होगी।

साथियों,

अभी कुछ ही दिन पहले, 25 अगस्त को UPI ने अपने 10 साल पूरे किए हैं। 10 वर्ष पहले जब मैं कहता था कि आपका बैंक आपकी फिंगर टिप्स पर होगा, तो कुछ लोगों को ये असंभव लगता था और मैं well informed लोगों की बात कर रहा हूं, चेहरा याद कर लीजिए। मैं उन करोड़ों भारतीयों की बात नहीं कर रहा हूँ, जिनके तब बैंक अकाउंट भी नए-नए खुले थे। उनकी तो अनेक पीढ़ियों ने बैंक का दरवाज़ा तक नहीं देखा था। लेकिन आज 10 वर्ष बाद देखिए, वही करोड़ों लोग, जो पीढ़ियों से बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे, वे भारत में फिनटेक ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बन गए हैं।

साथियों,

आज अकेले अगस्त महीने में ही UPI से Twenty-Four Hundred करोड़ से ज्यादा Transactions हुए हैं। यानी हम यहां जितनी देर से बैठे हैं, सिर्फ 10 मिनट में ही, औसतन 50 लाख से ज्यादा UPI Transactions देशभर में हो चुके होंगे। यही Impact है जिसके कारण फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, उन्होंने कहा था कि UPI केवल एक Tech Story नहीं है, ये एक सिविलाइजेशनल स्टोरी है।

और साथियों,

UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कुछ वर्ष पहले यहां कोई कहता कि विदेश में भी भारत के बैंक अकाउंट से पेमेंट कर देगा, तो शायद ही कोई विश्वास करता। लेकिन आज, यह एक हकीकत है। भारत का UPI अब दुनिया के 11 देशों में लाइव है। ये अद्भुत आंकड़े हैं, जो हमें बताते हैं कि हमने कितना लंबा सफर तय किया है। लेकिन अब सवाल ये है कि क्या हम इस सफर से संतुष्ट हो जाएं? क्या भारत में फिनटेक की सफलता को ही फाइनल मान लिया जाए?

साथियों,

पॉलिसी और गवर्नेंस से जुड़े इकोसिस्टम में मुझे अब 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। और जिन्होंने भी मुझे इन वर्षों में देखा है, वो जानते हैं, मोदी एक पड़ाव पर पहुंचकर, जश्न मनाकर संतुष्ट होने वालों में से नहीं है। जब एक लक्ष्य प्राप्त होता है, तो मैं उससे भी बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुट जाता हूं।

साथियों,

आज हमारा UPI कई देशों में पहुंचा है। लेकिन ये फर्स्ट स्टेप है। अब उन देशों के पेमेंट सिस्टम्स के साथ जुड़ना हमारा अगला लक्ष्य होना चाहिए। सिंगापुर के साथ हम ये कर चुके हैं। इससे भारत और सिंगापुर के बीच ट्रांजेक्शन वैसे ही हो पा रहे हैं, जैसे एक ही शहर के दो मोहल्लों के बीच होता है। यही कनेक्शन हमें, अन्य देशों, अन्य बाज़ारों में भी built करना है, इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ना होगा। जहाँ भी भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं, जहाँ भी भारत, बड़े पैमाने पर trade करता है, दुनिया का जो भी देश हमारे साथ चलने को तैयार है, हमें उन सबको जोड़ने के लिए काम करना होगा।

साथियों,

ये इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। और दुनिया में सबसे अधिक भारतीय ही विदेश से पैसा भेजते हैं। लेकिन आज उस पैसे का एक हिस्सा, ट्रांजैक्शन कॉस्ट में चला जाता है। UPI, भारतीयों को इसमें भी बचत दिला सकता है, और पैसा तेज़ी से भारतीय परिवारों के पास पहुंच सकता है।

साथियों,

आज आप भारत में कार्ड से पेमेंट कैसे करते हैं? यह सिस्टम उन स्टैंडर्ड्स पर चलता है, जो कहीं और डिज़ाइन किए गए थे। हमने उन स्टैंडर्ड्स और Rules को अपनाया,जो दूसरों ने बनाया था। उस समय, हमारे पास अपना कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अब हमारे पास अपना विकल्प है, अब हम अपने खुद के Rules और स्टैंडर्ड बना सकते हैं, और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकते हैं। मुझे आप सभी पर पूरा भरोसा है कि आप ये कर सकते हैं।

साथियों,

टेक्नॉलॉजी, इंक्लूजन का सबसे प्रभावी टूल है। और UPI ने ये करके दिखाया है। जब फिनटेक की बात आती है, तो इसका यूनीक फीचर ही वहां पहुंचने का होना चाहिए, जहां ट्रेडिशनल मॉडल नहीं पहुंच पाए। जहां पारंपरिक बैंक नहीं पहुंच पाए, जहां बैंक ब्रांच नहीं पहुंच पाई, UPI ने बैंकिंग व्यवस्था को उस स्थान, उस व्यक्ति तक पहुंचा दिया है।

साथियों,

आज फिनटेक बाज़ार का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पेमेंट्स का है। लेकिन अब हमें, यहां से Next level पर जाना है, तेज़ी से जाना है। अब फिनटेक मार्केट में, पेमेंट्स के साथ-साथ, क्रेडिट ट्रांजैक्शन्स का हिस्सा भी बढ़ना चाहिए, इंश्योरेंस का हिस्सा बढ़ना चाहिए, सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट्स और पेंशन का हिस्सा बढ़ना चाहिए।

साथियों,

मैं समझता हूं फिनटेक देश की उस ताकत को उभार सकता है, जो अभी ट्रेडिशनल फाइनेंशियल मॉडल्स की रीच से बाहर है, या उस प्रकार से एड्रेस नहीं हो पा रही है। विकसित भारत के लिए, इस ताकत का उभार बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

इसका इंपैक्ट क्या होता है, ये हम अभी पीएम स्वनिधि की सफलता से देख ही रहे हैं। हमारे स्ट्रीट वेंडर्स शहरों की रीढ़ हैं। लेकिन ये देश के बैंकिंग सिस्टम से, फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से बाहर थे। पीएम स्वनिधि ने, देश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को फॉर्मल सिस्टम से जोड़ा। और अब इन साथियों के पास भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड है, यानी इनके पास, एक फॉर्मल क्रेडिट एक्सेस का टूल है। और studies बताती हैं, कि स्वनिधि के इन बेनिफिशरीज की एवरेज एनुअल इनकम ट्वेंटी परसेंट से ज्यादा बढ़ी है। यही नहीं, इससे इन परिवारों की हाउसिंग, न्यूट्रिशन, हेल्थकेयर एक्सेस और बच्चों की एजुकेशन, इनमें भी बहुत सुधार हुआ है। इसलिए सरकार ने इस स्कीम को 2030 तक बढ़ाने का फैसला भी लिया है।

साथियों,

पीएम स्वनिधि को ये सफलता हासिल ही नहीं होती, अगर UPI ही नहीं होता। इस स्कीम की सफलता में UPI की एक बहुत बड़ी भूमिका है। इसी अनुभव से सीखते हुए हमें फिनटेक की ताकत से इकोनॉमिक एक्टिविटीज को और बढ़ाना है। मैं आपको कैपिटल और क्रेडिट की दुनिया से एक उदाहरण देता हूँ। एक बहन है, जो एक छोटी दुकान चलाती है। उसको हर दिन डिजिटल पेमेंट मिलता है। अब उसकी इनकम और खर्च में एक क्लीयर पैटर्न दिखता है। उसका बिजनेस काफी अच्छा चल रहा है। वो उस लेवल से आगे बढ़ चुकी है, जहां कम कैपिटपल भी काफी था। अब उसे अपने बिजनेस को स्केल-अप करने के लिए, सामान चाहिए, इक्विपमेंट्स चाहिए, और इसके लिए थोड़े ज्यादा पैसे की जरूरत है। ये बहुत बड़ा क्रेडिट नहीं है। और उस बहन का बिजनेस अभी भी इतना छोटा है, कि ट्रेडिशनल क्रेडिट मॉडल, उसको एफिशियंट सर्विस नहीं दे सकते। इस प्रकार के बिजनेस हैं, जिनकी ज़रूरतों को फिनटेक, एनालाइज, एंटिसिपेट और एड्रेस कर सकते हैं। और ऐसे बिजनेसेज की संख्या बहुत बड़ी है।

साथियों,

टेक्नॉलॉजी हमें ऐसे बिजनेसेज की इकोनॉमिक एक्टिविटीज को स्टडी करने और उनके लिए क्यूरेटेड मॉडल डिजायन करने में बहुत काम आ सकती है। मेरा मानना है कि फिनटेक का नेक्स्ट चैप्टर, यहीं लिखा जाएगा। हमने पेमेंट्स में स्पीड और स्केल दिखाई है। अब, हमें नॉन-पेमेंट्स ट्रांजैक्शन्स का शेयर बढ़ाने में मदद करनी होगी। जैसे कोई डिलिवरी पार्टनर है, या अपना कोई छोटा-मोटा काम करने वाला व्यक्ति है, वो हर महीने कमाता है, लेकिन उसे सेविंग्स और पेंशन प्रोडक्ट्स जैसी सर्विसेज़ तक एक्सेस चाहिए। ऐसे लोगों की ज़रूरतों को फिनटेक एड्रेस कर सकता है। ऐसे ही फिनटेक, इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स और अन्य फाइनांशियल सर्विसेज तक भी एक्सेस आसान बना सकता है। ये सब भी उतने ही सरल, सहज और सुलभ हो सकते हैं, जितना आसान, आज क्यूआर कोड से पेमेंट करना है।

साथियों,

21वीं सदी का पहला क्वार्टर खत्म हो चुका है। अब हम साल 2026 में हैं। अब दूसरा क्वार्टर हमारे लिए और भी नई संभावनाएं लेकर आया है। Agentic AI, Tokenisation, Quantum, ऐसी Technologies फाइनेंशियल सेक्टर में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। अब हमारे सामने चुनौती है, इन संभावनाओं को वास्तविक Impact में कैसे बदलें। और इसके लिए, मैं चाहता हूँ, हमारी फिनटेक कंपनियाँ साथ मिलकर कुछ tasks अपने लिए सेट करें। और इसके लिए मैं कुछ सुझाव भी आपके बीच रखना चाहता हूं। पहला- हमें भारत में cyber security को टॉप नॉच बनाना है। दूसरा- हमारी इंडस्ट्री के पास अपने इथिकल डेटा प्रोटेक्शन स्टैंडर्ड्स होने चाहिए। तीसरा- हमें एक मजबूत, फिनटेक रेगुलेटर इंडस्ट्री इनोवेशन इकोसिस्टम बनाना है। और चौथा, हमारे पास एक, फिनटेक कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स होना चाहिए। जिसके आधार पर हर कंपनी की पारदर्शी रेटिंग हो सके। अगर हम इन कसौटियों पर खुद को कसेंगे, तो भारत का Fintech Sector असंख्य possibilities का गेटवे बन सकता है। हमारे पास अनुभव भी है, उसे जमीन पर उतारने का तरीका भी है। इसलिए हमें तेजी से काम करना है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया की सक्सेस स्टोरी अब एक नए अध्याय के लिए तैयार है। हमारी फिनटेक सक्सेस स्टोरी की अब तक की सफलता, स्केल है, स्कोप है, सिक्योर सिस्टम्स हैं, डेमोक्रटाइजेशन ऑफ टेक्नॉलॉजी है, और जनता का ट्रस्ट है। इन्हीं कोर वैल्यूज को ध्यान में रखते हुए, Fintech Sector को, नेक्स्ट जेनरेशन इनोवेशन पर फोकस करना है। इसी आग्रह के साथ, आप सभी को एक बार फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाए। बहुत-बहुत धन्यवाद।