CM meets probation officers of Indian Forest Service

Published By : Admin | March 28, 2013 | 16:30 IST
"Shri Narendra Modi meets 38 probationary officers of Indian Forest Service in Gandhinagar"
"Shri Modi talks about steps taken by Gujarat to preserve forests and wildlife"
"38 probationers of Indian Forest Service meet Gujarat Chief Minister Narendra Modi"
"Gujarat showcase only natural abode of Asiatic Lions at Gir, Jamnagar National Marine Park, Wild Ass Migratory Birds to Forest Officers"

Gandhinagar, Thursday: A group of 38 probationary officers of Indian Forest Service, including nine women officers, on a study tour of Gujarat, called on Chief Minister Narendra Modi here today.

The group coming from different states apprised themselves about the Gir Lions Sanctuary, Jamnagar National Marine Park, Wild Ass and other sanctuaries. Mr. Modi briefed them about special care and action plans required to preserve the Asiatic Lions in their only natural abode in Gir Forests with people’s participation, about management of whale sharks, migratory birds, forestation and social forestry.

In the interactive session with the forest officers also took keen interest in Gujarat Government’s unique good governance, development model, transparency in administration, responsibility to the citizens under the leadership of the Chief Minister and a host of other issues necessary to empower the society.

Forest and Environment Principal Secretary H. K. Das, Principal Conservator of Forests S. K. Goel and other senior officers of the Department were present.

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Text of PM’s speech during the 45th anniversary celebrations of The Art of Living in Bengaluru
May 10, 2026

श्रद्धेय श्री श्री रविशंकर जी, यहां उपस्थित अन्य सभी संतजन, भाइयों और बहनों, एल्लारिगू नमस्कारा।

आज की ये सुबह एक अलग अनुभूति लेकर आई है। बच्चों के वैदिक मंत्रों से स्वागत, भगवान श्री गणेश के दर्शन, श्री श्री रविशंकर जी के 70 वर्ष, और Art of Living के 45 वर्ष, ये ऐसे पल हैं, जो हमेशा मेरी स्मृतियों में रहेंगे। इस अद्भुत समारोह में आमंत्रित करने के लिए मैं आप सभी का आभारी हूं।

अभी गुरूदेव ने बहुत कुछ बताया, आपको लगता होगा वो मेरी तारीफ कर रहे थे, लेकिन मुझे लग रहा था कि वो मुझे काम बता रहे थे। आपने सही कहा कि मेरा धन्यवाद नहीं हो सकता, आप ही का हूँ, आप ही के बीच आया और आप ही के लिए आया हूँ, और जहां हूँ वहां भी आप ही के कारण हूं। आज गुरूदेव के 70 साल का ये कार्यक्रम है, लेकिन मैं चाहूंगा जब मैं घर का ही हूं तो सामने से कह देता हूं, कि जब आपका शताब्दी समारोह होगा तब मैं भी फिर से एक बार आऊंगा।

आज दिव्य और भव्य, ध्यान मंदिर का लोकार्पण हुआ है। जब संकल्प स्पष्ट हो और सेवा भाव से कार्य किया जाए, तो हर प्रयास का सुखद परिणाम मिलता है। बाकि कुछ हो या न हो, हम सब लोटस की छत्रछाया में हैं। जैसे जैसे समझ आता जाए, ताली बजाते जाइये। और गुरू देव के आशीर्वाद हैं, तो फिर लोटस की छत्रछाया ही देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगी। मैं आर्ट ऑफ लिविंग परिवार को इस ध्यान मंदिर के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

बेंगलुरू का माहौल, यहां का वातावरण, कुछ अलग ही होता है। ये शहर software और services के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन भारत की सांस्कृतिक पहचान, Spirituality, आध्यात्मिक चेतना को भी इस शहर ने नई ऊंचाई दी है। योग, ध्यान, प्राणायाम, भारत के संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। और जैसा गुरूजी ने कहा, आज दुनिया भर के लोग भारत के इन आध्यात्मिक संस्कारों से प्रभावित हैं, और इन्हीं पुरातन संस्कारों से भारत की भी अनेक संस्थाओं को प्रेरणा मिलती रही है।

साथियों,

इसी प्रेरणा से श्री श्री रविशंकर जी ने, 45 वर्ष पहले आर्ट ऑफ लिविंग के रूप में एक बीज बोया था। आज वो एक विशाल वटवृक्ष के रूप में हमारे सामने है। इस वटवृक्ष की हजारों शाखाएं दुनिया भर में अनगिनत लोगों के जीवन को स्पर्श कर रही हैं। और मुझे विदेश में जहां-जहां जाना पड़ता है सरकारी काम के लिए, तो कोई न कोई आप वाला मिल ही जाता है।

साथियों,

हमारा भारत विविधताओं से भरा देश है। इतनी भाषाएं, इतनी परंपराएं, अलग रीति-रिवाज, उपासना के अलग-अलग तरीके, जब हम इसे देखते हैं तो एक स्वाभाविक प्रश्न हम सबके मन में आता है। आखिर इन सभी सुंदर विविधताओं को जोड़ने वाला मूल तत्व क्या है? इसका उत्तर है- स्वयं के लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए जीना। हमारे यहां कहा गया है, अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्। परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्॥ अर्थात, दूसरों की सेवा करना पुण्य है, और पीड़ा देना पाप है। सेवा परमो धर्म है, ये हमारे समाज का स्वाभाविक चरित्र है। पीढ़ी दर पीढ़ी ये संस्कार सरिता हम सबको संस्कारित करती है, प्रेरित करती है, ऊर्जावान बनाती है। भारत के अनेक आध्यात्मिक आंदोलनों ने अंततः स्वयं को मानव सेवा के माध्यम से ही अभिव्यक्त किया है। मुझे खुशी है कि Art of Living के हर प्रयास में सेवा की इसी भावना का प्रतिबिंब नजर आता है। अभी जो वीडियो दिखाया गया, सेवा ही सेवा है उसमें, लोगों का ही कल्याण है। मैं आर्ट ऑफ लिविंग की यात्रा से जुड़े हर volunteer को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

कोई भी अभियान तब सफल होता है, जब उसके साथ समाज की शक्ति जुड़ जाती है। इसलिए, ऐसे हर महत्वपूर्ण मिशन के लिए समाज की शक्ति को जागृत करना बहुत आवश्यक है। मेरा हमेशा से ये विश्वास रहा है कि समाज, राजनीति और सरकारों से भी अधिक शक्तिशाली होता है। और कोई भी सरकार तभी सफल हो सकती है, जब समाज स्वयं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाता है। अब जैसे हमारा स्वच्छ भारत अभियान है। ये सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि, ये लोगों के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन चुका है। अब ये समाज की शक्ति से ही आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

जब समाज सक्रिय हो जाता है, तब देश की सबसे बड़ी चुनौतियों का भी सामूहिक समाधान निकाला जा सकता है। ये देखना बहुत सुखद है कि आर्ट ऑफ लिविंग संस्था भी, हमेशा से, समाज की इस शक्ति को साथ लेकर चलती है। आप सभी ने विकास से जुड़े कार्यक्रमों में सोशल अप्रोच को बहुत महत्व दिया है। चाहे वृक्षारोपण अभियान हो, या rural smart village centres हों, महिलाओं और जनजातीय समाज को सशक्त बनाने वाले कार्यक्रम हों, या फिर कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला अभियान हो, ये सभी प्रयास देश और समाज की विकास यात्रा के, उसमें महत्वपूर्ण योगदान देने वाले होते हैं।

साथियों,

मैं एक और बात के लिए यहां उपस्थित हर व्यक्ति की प्रशंसा करूंगा, और वो है, युवा शक्ति पर फोकस। आज की दुनिया में बहुत तेजी से बड़े-बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। हर दिन साइंस, नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। नए नए इनोवेशन, पूरी की पूरी इकॉनॉमीज को बदल रहे हैं। भारत इस बदलाव में केवल भागीदारी नहीं कर रहा, वो कई क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रहा है। हमारी डिजिटल क्रांति ने भारत को डिजिटल पेमेंट में ग्लोबल लीडर बनाया है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर भी अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और futuristic विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। स्टार्ट अप में भारत बहुत तेजी से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बना है। हमारे युवा आज स्पेस में अपनी सैटेलाइट्स भेज रहे हैं, देश की ऐसी सभी उपलब्धियों का सबसे बड़ा कारण है, हमारे युवा हैं, और आर्ट ऑफ लिविंग है। युवाओँ को, आज के आधुनिक युग की चुनौतियों के समाधान पाने में गुरूदेव और आर्ट ऑफ लिविंग बहुत सहायता कर रहा है।

साथियों,

आज टेक्नॉलॉजी की वजह से दूर बैठे लोग एक पल में एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। लेकिन जरूरी है, हम दुनिया से जुड़े या न जुड़े, स्वयं से तो जुड़ें। और ये स्वयं से जुड़ने की क्षमता को, चाहे बीजारोपण करना हो, उसको सिंचन करना हो, या उसको सक्षम बनाना हो, ये महान परंपरा से संभव होता है। विकसित भारत का निर्माण ऐसे युवाओं से ही होगा, जो युवा मानसिक रूप से शांत हों, जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार हों, और जो समाज के प्रति संवेदनशील हों। इसीलिए, spiritual well being, मेंटल हेल्थ, योग, मेडिटेशन, इस पर काम करने वाली आपकी ये महत्वपूर्ण गतिविधि और इस प्रकार से काम करने वाली अन्य संस्थाएं भी, इन सबकी भूमिका बहुत-बहुत अहम है। ऐसी संस्थाएं लोगों में जुड़ाव, अपनापन और सामूहिक जिम्मेदारी का भाव मजबूत करती हैं। साथ ही, ऐसे संस्थानों में लोगों को अपनी संस्कृति को जानने और समझने का अवसर भी मिलता है। मुझे विश्वास है कि आज जिस ध्यान मंदिर का उद्घाटन हुआ है, वो आने वाली अनेक पीढ़ियों को, हजारों लोगों के लिए शांति और उपचार का केंद्र बनेगा।

साथियों,

आप सभी देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को बखूबी निभा रहे हैं। लेकिन मैं जब भी आपके बीच आता हूं, तो कुछ आग्रह करने से खुद को रोक नहीं पाता। अब ये मेरे बोलने से पहले ही गुरू जी ने कह दिया कि आपके नौ आग्रह हमें मंजूर हैं, तो बोलने के लिए कुछ बचा नहीं, लेकिन आदत जाती नहीं। भारत के होलिस्टिक डेवलपमेंट के लिए कई स्तरों पर सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। इनमें Art of Living जैसे संगठन महत्वपूर्ण भूमिका और ज्यादा शक्ति से इस परिवर्तन के प्रहरी बन सकते हैं। आपमें से बहुत से लोग किसानों और ग्रामीण समुदायों के साथ जुड़कर काम करते हैं। जैसा यहां फिल्म में भी बताया गया कि किसानों को नैचुरल फार्मिंग से जोड़ने की दिशा में और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। आज बीमारी में भी इंसान नैचुरल हिलिंग के रास्ते खोज रहा है, तो ये हमारी धरती मां, उसे भी नैचुरल हिलिंग की जरूरत है। केमिकल फर्टिलाइजर ने हमारे खेत को, हमारी धरती मां को उजाड़ दिया है। इस हमारी धरती मां को केमिकल से बचाना, ये भी आर्ट ऑफ लिविंग है। एक पेड़ मां के नाम अभियान को और व्यापक बनाने में आप बहुत ताकत दे सकते हैं, उसको और विस्तार कर सकते हैं। क्योंकि पर्यावरण की रक्षा, ये भी आर्ट ऑफ लिविंग है। इकोलॉजी और इकोनॉमी हम अलग नहीं कर सकते हैं। पर ड्रॉप मोर क्रॉप के माध्यम से किसानों को पानी का बेहतर उपयोग बताया जा रहा है। इसमें आपके सहयोग से और बेहतर परिणाम मिलेंगे। क्योंकि पानी की हर बूंद बचाना, ये भी आर्ट ऑफ लिविंग तो है। कुछ ही हफ्ते में मानसून आने वाला है। ये सही समय है, जब जल संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाई जाए। इसी तरह, बिजली बचाना, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाना, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, ये सभी आर्ट ऑफ लिविंग ही है। आज देश Mission LiFE पर भी जोर दे रहा है। ये जीवन को अधिक जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ जीने का एक जीवंत अभियान है। इसमें एक ऐसी जीवनशैली अपनाने का आग्रह है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चले। और मेरे हिसाब से मिशन लाईफ भी एक प्रकार से आर्ट ऑफ लिविंग का एक प्रकट रूप है। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में आप सभी, जो हमेशा आप करते आए हैं, आर्ट ऑफ लिविंग के भिन्न-भिन्न पहुलओं को आपने विस्तार भी दिया है, विकास भी किया है। समाज के एक बड़े वर्ग को जोड़ने के लिए आप ज्यादा प्राथमिकता देंगे, और गुरूजी की शताब्दी जब हम मनाएं तब इन सारे लक्ष्यों को हम पूरा करके रहें। मैं एक बार फिर श्री श्री रविशंकर जी को, गुरूदेव को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मैं Art of Living परिवार के हर volunteer का, उनकी सेवा भावना और समर्पण के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। फिर एक बार आप सबने मुझे यहां आपके बीच आने का अवसर दिया, इस पवित्र वातावरण में कुछ पल बिताने का मौका दिया, लोटस की छत्रछाया में सोचने का मौका दिया, इसके लिए मैं फिर से आप सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। जय गुरूदेव।