पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांच्या अध्यक्षतेखाली केंद्रीय मंत्रीमंडळाने आज जल जीवन मिशनच्या अंमलबजावणीची पुनर्रचना तसेच सेवा वितरणाच्या दिशेने वळवण्यास  मंजूरी दिली. पेयजल प्रशासन व संस्थाप्रणालीच्या पाठिंब्याद्वारे नळाद्वारे शाश्वत ग्रामीण पेयजल पुरवठ्यासाठी पायाभूत सुविधा निर्मिती ते पुरवठा असे हे अभियान आहे.

रचनात्मक सुधारणांवर भर देत जेजेएमची पुनर्रचना करण्यासाठी मंत्रीमंडळाने 8.69 लाख कोटी रुपये वाढीव खर्चालाही मंजूरी दिली. यामध्ये केंद्रातर्फे 3.59 लाख कोटी रुपये खर्च करण्यात येतील. 2019-20 मध्ये या योजनेसाठी 2.08 लाख कोटी रुपये खर्च मंजूर करण्यात आला होता. म्हणजेच मंत्रीमंडळाने केंद्रातर्फे अतिरिक्त 1.51 लाख कोटी खर्चाला मंजूरी दिली आहे.  

यासाठी शासनाकडून 'सुजलाम भारत' नावाची एकात्मिक राष्ट्रीय डिजिटल योजना आखली जाईल. या योजनेअंतर्गत प्रत्येक गावाला एक सुजल गाव/सेवा क्षेत्र ओळख क्रमांक दिला जाईल आणि जलस्रोत ते नळ अशा संपूर्ण पेयजल पुरवठा यंत्रणेचे डिजिटल मॅपिंग केले जाईल. पारदर्शकता व उत्तरदायित्वाच्या हमीसाठी जल अर्पण योजनेअंतर्गत प्रकल्पाच्या अंमलबजावणी व औपचारिक हस्तांतरण प्रक्रियेत ग्राम पंचायती  आणि 'ग्राम पाणी आणि स्वच्छता समिती'  ची मदत घेतली जाईल.

ग्राम पंचायत हा प्रकल्प पूर्ण झाल्याचे प्रमाणपत्र देईल आणि राज्य सरकारने गावात पुरेशी कृती व व्यवस्थापन यंत्रणा उभारल्याची खात्री झाल्यानंतरच हे गाव स्वतःला 'हर घर जल' गाव घोषित करेल. समाजाचा सहभाग व मालकीहक्क कामातील कार्यक्षमता व स्रोताच्या शाश्वततेसाठी महत्त्वाचे आहेत हे ओळखून या योजनेद्वारे वार्षिक जल उत्सवाला प्रोत्साहन दिले जाईल. हा समाजाचा सहभाग असलेला व्यवस्थापन व आढावा कार्यक्रम असेल आणि यामध्ये स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा समावेश केला जाईल. पेयजलाच्या सुरक्षित भविष्यासाठी सामुहिक जबाबदारी या उत्सवात सुनिश्चित केली जाईल.

जेजेएम अंतर्गत 2019 मधील 3.23 कोटी (17 टक्के) इतक्या ग्रामीण घरांमध्ये नळजोडणी पुरवल्यानंतर आतापर्यंत 12.56 कोटींपेक्षा अधिक ग्रामीण घरांमध्ये नळजोडणी पुरवण्यात आली आहे. सध्या राज्ये व केंद्रशासित प्रदेशांमधील 19.36 कोटी ग्रामीण घरांपैकी सुमारे 15.80 कोटी (81.61 टक्के) ग्रामीण घरांमध्ये नळाद्वारे पाणीपुरवठा होत असल्याची नोंद आहे.

प्रत्यक्ष कृतीतील या यशाबरोबरच जेजेएमची प्रतिष्ठीत राष्ट्रीय आणि आंतरराष्ट्रीय संस्था / व्यक्तींनी दखल घेतली आहे. एसबीआयने केलेल्या अभ्यासातून असे दिसून आले आहे की जेजेएममुळे 9 कोटी महिलांची लांबून पाणी भरण्याच्या कामातून सुटका झाली आणि त्या इतर आर्थिक कामांमध्ये सहभागी होऊ लागल्या. दररोज 5.5 कोटी तास वाचल्यामुळे महिलांचे कष्ट कमी झाले, अतिसारामुळे होणाऱ्या 4,00,000 मृत्युंचा प्रतिबंध झाला आणि 14 दशलक्ष अपंगत्व समायोजित जीवन वर्षांची बचत झाली असे जागतिक आरोग्य संघटनेने म्हटले आहे.  नोबेल पुरस्कार विजेते प्रो. मायकेल क्रेमर यांनी असा अंदाज वर्तवला आहे की या योजनेच्या अंमलबजावणीमुळे पाच वर्षांखालील बालकांच्या मृत्युदरात 30 टक्के घट होऊन  दरवर्षी 1,36,000 जीव वाचू शकतील.  आयआयएम बेंगळुरू आणि आंतरराष्ट्रीय श्रम संघटनेच्या अंदाजानुसार 59.9 लाख थेट व 2.2 कोटी अप्रत्यक्ष वार्षिक रोजगार निर्मिती झाली आणि जेजेएममुळे ग्रामीण लोकांच्या अर्थार्जनात वाढ झाली.

जेजेएम 2.0 मुळे डिसेंबर 2028 पर्यंत देशातल्या सर्व 19.36 कोटी ग्रामीण घरांमध्ये नळाद्वारे पाणी पुरवठा होईल आणि सर्व ग्राम पंचायतींना हर घर जल प्रमाणपत्र मिळेल. राज्य / केंद्रशासित प्रदेशांसोबतच्या वेगवेगळ्या सामंजस्य कराराद्वारे वेळेचे पालन, योजनेची शाश्वतता आणि नागरिक केंद्रित पाणी पुरवठा सेवेची हमी मिळेल. रचनात्मक सुधारणांमुळे पायाभूत सुविधांवर भर देण्याऐवजी नागरिक केंद्री सेवेला महत्त्व दिले जाईल आणि याद्वारे 24 तास नळाद्वारे पेयजल पुरवठ्याच्या खात्रीमुळे विकसित भारत 2047 या उद्दीष्टपूर्तीलाही बळ मिळेल.

जेजेएम 2.0 मधून केंद्र सरकारचा सर्वंकष दृष्टीकोन, विविध विभागांचा धोरणात्मक समन्वय याद्वारे ग्रामीण पेयजल पुरवठ्याच्या पायाभूत सुविधांची दीर्घकालिन कार्यक्षमता व देखभाल आणि जलस्रोत योजनेचे सबलीकरण याबाबतचा दृष्टीकोन मांडण्यात आला आहे. 

 

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BAPS Swaminarayan Temple in Paris: PM Modi calls pran pratishtha a new era for India-France cultural relations

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The inauguration of Swaminarayan Temple is a new milestone in the cultural relations between India and France: PM Modi
September 06, 2026
It is a matter of great joy that BAPS Swaminarayan Hindu Mandir is being inaugurated in Paris: PM
This temple will surely enrich the diversity of France and energize our cultural relations: PM
India-France Strategic Partnership is special as it rests on the strong foundation of old cultural and political bonds: PM

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!