Ek Hain To Safe Hain: PM Modi in Nashik, Maharashtra

Published By : Admin | November 8, 2024 | 12:10 IST
If Maharashtra moves ahead, India will also become more developed: PM Modi at Nashik
The Maha Aghadi parties should get the Congress to praise Veer Savarkar's sacrifice and martyrdom: PM Modi in Nashik
Ek Hain Toh Safe Hain: PM Modi in Nashik

भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

जय भवानी ! जय भवानी !

प्रभु श्रीराम चा //पदस्पर्शाने // पवित्र //नाशिक नगरीला // माझा नमस्कार//

मैं भगवान त्रयंबकेश्वर और माता रेणुका को नमन करता हूं। आज महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के पहले दिन मुझे नासिक की पुण्य भूमि पर आने का सौभाग्य मिला है। जब अयोध्या में राममंदिर की 500 साल की प्रतीक्षा पूरी हुई। जब प्रभु श्रीराम एक बार फिर वापस आए तो अयोध्या में प्राणप्रतिष्ठा से पहले 11 दिनों के मेरे व्रत अनुष्ठान की शुरुआत भी यहीं नासिक से हुई थी। मुझे कालाराम मंदिर में सफाई और सेवा का अवसर भी मिला था। आज एक बार फिर मैं विकसित महाराष्ट्र के लिए, विकसित भारत के लिए नासिक का आशीर्वाद लेने आया हूं। मैं देख रहा हूं, नासिक में जनता जनार्दन का ये विशाल जनसमूह। महाराष्ट्र का जन-जन कह रहा है- भाजपा-महायुति //आहे// तर गति आहे// महाराष्ट्राची //प्रगति आहे//

साथियों,

आज महाराष्ट्र के प्रख्यात साहित्यकार और कला जगत के मजबूत स्तंभ रहे पी एल देशपांडे जी की जन्मजयंती है। मैं उनका पुण्य स्मरण करता हूं, उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज हमारा महाराष्ट्र विकास कर रहा है, हमारा देश नए रिकॉर्ड बना रहा है, क्योंकि आज देश में गरीबों की चिंता करने वाली सरकार है। जब गरीब आगे बढ़ता है, तभी देश आगे बढ़ता है। इतने दशकों तक देश में कांग्रेस और उसके साथियों ने गरीबी हटाओ का नारा दिया! फिर भी गरीब रोटी, कपड़ा, मकान के लिए मोहताज रहा! लेकिन अब केवल 10 वर्षों के भीतर-भीतर, देश के 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। ये कैसे हुआ? ये इसलिए हुआ, क्योंकि मोदी की नीयत सही है, मोदी गरीब का सेवक बनकर काम करता है। आपका सेवक बनकर काम करता है। ये इसलिए हुआ, क्योंकि गरीबी के खिलाफ ये लड़ाई केवल मोदी ने नहीं, देश के गरीब ने भी लड़ी, आप सबने लड़ी। आज महाराष्ट्र में 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। जल जीवन मिशन के तहत राज्य के सवा करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल की सुविधा मिलने लगी है। आज महाराष्ट्र के लगभग 7 करोड़ जरूरतमंदों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। राज्य के 26 लाख से ज्यादा गरीबों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला है, उन्हें पक्के मकान दिए गए हैं। गरीबों के लिए ऐसे काम लगातार होते रहें, इसके लिए महाराष्ट्र में महायुति सरकार फिर से बननी जरूरी है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार में विकास की गति डबल होती है, साथ ही योजनाओं का लाभ भी डबल हो जाता है। महाराष्ट्र के किसान आज इसका अनुभव कर रहे हैं। यहां किसानों को एक ओर पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। साथ ही, नमो शेतकरी महा सम्मान निधि भी मिल रही है। यानी, सालाना 12 हजार रुपए की आर्थिक मदद! और मैं मेरे किसान साथियों को बताना चाहता हूं। जब महाराष्ट्र में फिर हमारी सरकार बनेगी, तो ये 12 हजार रुपए की मदद बढ़कर 15 हजार रुपए हो जाएगी। महाराष्ट्र के लाखों किसान परिवारों को इसका बहुत बड़ा लाभ मिलेगा।

साथियों,

यहां सोयाबीन, कपास, धान और दूध उत्पादकों को भी आर्थिक मदद दी गई है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेडिंग बढ़ने से गन्ना किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। 10 वर्षों में करीब 80 हजार करोड़ रुपए इथेनॉल की खरीद में किसानों को मिले हैं। देश का जो रुपया पेट्रोल खरीदने में विदेश चला जाता था, वो पैसा अब मेरे देश के किसानों को मिल रहा है, उनके पास जा रहा है।

साथियों,

मैं यहां के प्याज किसानों की भावनाएं भी समझता हूं। इसलिए प्याज के निर्यात में सहूलियत के लिए नीतियों में बदलाव किया गया है।

साथियों,

भारत की प्रगति के लिए महाराष्ट्र का तेजी से आगे बढ़ना बहुत जरूरी है। महाराष्ट्र आगे बढ़ेगा, तभी भारत विकसित बनेगा। महाराष्ट्र किस स्पीड से आगे बढ़ सकता है, पिछले ढाई वर्ष में महायुति सरकार ने दिखाया है। आज देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स में महाराष्ट्र बहुत आगे है। यहां हाइवेज़ और एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं। आधुनिक टेक्नालजी से जुड़े क्षेत्रों में महाराष्ट्र में निवेश हो रहा है। लेकिन आप मुझे बताइये, अगर कोई सरकार ये काम रोक दे तो क्या महाराष्ट्र आगे बढ़ पाएगा? हाथ तो हिला रहे हो, मुंह से भी तो बोलो। क्या महाराष्ट्र आगे बढ़ पाएगा? महाराष्ट्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल पाएंगे क्या? अगर ये काम रुके तो महाराष्ट्र काफी पीछे छूट जाएगा। कांग्रेस और उसके साथी यही चाहते हैं। उनका यही एजेंडा है। महाराष्ट्र में कोई भी बड़ा काम होता है, ये लोग उसका विरोध करने के लिए आ जाते हैं। इन्होंने अटल सेतु का विरोध किया। इन्होंने वाढवण पोर्ट पर भी रोक लगाने की कोशिश की। इन्होंने मेट्रो परियोजनाओं को लटकाया! अघाड़ी वालों ने समृद्धि महामार्ग का काम ठप्प करने का प्रयास किया। पिछले 5 वर्षों में शुरुआती ढाई साल महाअघाड़ी के महा-भ्रष्टाचार और लटकाने-अटकाने की भेंट चढ़ गए। इसलिए महाराष्ट्र के विकास की खातिर आपको अघाड़ी वालों को घुसने ही नहीं देना है। उनको सरकार से दूर रखना है।

साथियों,

महायुति सरकार के विकास के एजेंडे में नासिक को भी उतना ही महत्व मिल रहा है। आज आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर नासिक की तस्वीर को बदल रहा है। आज यहां जो हाईवे बन रहे हैं, ट्रांसपोर्ट के साधन तैयार हो रहे हैं, उनका बहुत बड़ा फायदा, 2026 के कुंभ में भी मिलेगा। नासिक का आईटी पार्क बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करेगा।

साथियों,

आज हमारा नासिक डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का बहुत बड़ा केंद्र भी बन रहा है। नासिक में लड़ाकू विमान और सुरक्षा उपकरण बनाए जा रहे हैं। आज नासिक के हर व्यक्ति को इस बात का गर्व भी है कि उनका ये शहर सशक्त भारत में इतनी अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन साथियों, दूसरी तरफ ये कांग्रेस और अघाड़ी वाले लोग भी हैं! ये देश को पीछे करने का, देश को कमजोर करने का कोई कोई मौका नहीं छोड़ते। इन लोगों ने डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग में देश को पीछे करने के लिए क्या कुछ नहीं किया! इन्होंने HAL को लेकर तरह-तरह के झूठ फैलाए, विवाद खड़े करने की कोशिश की। इन्होंने फैक्टरियों के बाहर धरना-प्रदर्शन करवाए, कर्मचारियों को भड़काने की कोशिश की, लेकिन आज वही HAL रिकॉर्ड मुनाफे वाली कंपनी बनकर उभरी है। जब नीतियां स्पष्ट होती हैं, नीयत साफ होती है तो अच्छे परिणाम भी नासिक के मेरे भाई-बहन देख रहे हैं। डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत की ताकत बन रही है।

साथियों,

कांग्रेस और इसके साथियों को न बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान की परवाह है, ना कोर्ट की और ना ही देश की भावना की। ये सिर्फ दिखावे के लिए जेब में खाली पन्नों वाले संविधान की किताब लेकर घूमते हैं। आपने देखा होगा, उनकी पोल खुल गई। जब संविधान की रक्षा की बात आती है, जब संविधान के सम्मान की बात आती है, तो ये उल्टा ही काम करते हैं। ये कांग्रेस वाले ऐसे हैं, 75 साल तक जम्मू-कश्मीर में बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान को लागू नहीं होने दिया। 75 साल तक देश में एक संविधान नहीं था। जम्मू-कश्मीर संविधान अलग था। वो बाबा साहेब आंबेडकर वाला नहीं था। और ये पाप कांग्रेस का था। कांग्रेस ने आर्टिकल-370 की ऐसी दीवार बना दी थी कि बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान वहां घुस ही नहीं सकता था। भाजपा-NDA ने आर्टिकल-370 को हटाया और एक देश एक संविधान लागू किया। और मेरी बाबासाहेब आंबेडकर को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू हुआ पूरा देश झूम उठा था, नाच उठा था। मैं जरा मेरे नासिक के लोगों से पूछना चाहता हूं। नासिक के लोग बताइए, आर्टिकल 370 हटने से आपको खुशी हुई या नहीं हुई? जरा जोर से बताइए, खुशी हुई कि नहीं हुई? ये कांग्रेस वालों के कान फट जाएं, ऐसे बोलिए खुशी हुई कि नहीं हुई? आपको खुशी हुई लेकिन कांग्रेस और उसके साथियों के पेट में दर्द हो गया। आपने टीवी पर देखा होगा, 2-3 दिन पहले जम्मू कश्मीर की विधानसभा में कांग्रेस और इसके साथियों ने 370 फिर से लागू करने के लिए हंगामा किया। ये लोग फिर चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर से बाबासाहेब का संविधान हट जाए। ये लोग फिर चाहते हैं, कि वहां दलितों को, वाल्मीकि समाज को जो आरक्षण 75 साल बाद मिला है, उसे छीन लिया जाए। संविधान के विरुध, दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों के विरुद्ध इस साजिश में जितनी गुनहगार कांग्रेस है, उतने ही अघाड़ी के बाकी दल भी हैं।

साथियों,

चुनाव के समय पार्टियां अपने कामकाज का हिसाब देकर जनता के बीच जाती हैं। बीजेपी और महायुति भी लगातार अपने काम का हिसाब दे रही है। लेकिन बीजेपी का मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस के पास एक ही तरीका है। कांग्रेस और उसके साथियों की झूठ की दुकान! यही दुकान इन दिनों कांग्रेस और उसके चेलों ने महाराष्ट्र में लगाई है। कांग्रेस ने कर्नाटका, तेंलगाना और हिमाचल में भी यही दुकान सजाई थी। वहां क्या हाल हुआ? चुनाव खत्म हुए, दुकान का शटर गिर गया! वादे पूरा करना तो दूर कांग्रेस शासित राज्यों में हाल ये है कि सरकार चलाने के पैसे इनके पास नहीं हैं, तनख्वाह देने के पैसे नहीं हैं। खर्चों के लिए, और अपनी जेबें भरने के लिए जनता पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है। जनता से वसूली हो रही है। जनता भी इनकी असलियत जान गई है। महाराष्ट्र की जनता भी देख रही है कि एक तरफ महायुति का घोषणापत्र है वहीं दूसरी तरफ महाअघाड़ी का घोटालापत्र है। क्योंकि, ये पक्का है जहां कांग्रेस और उसके साथी होंगे, वहां घोटाला होगा ही होगा। ये लोग ऐसी योजनाओं की घोषणा करते हैं, जिसमें ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार हो सके। आप महाराष्ट्र में इन लोगों को ये सारा पाप करने देंगे क्या? करने देंगे क्या? ये धोखेबाजी महाराष्ट्र की जनता के बीच चलेगी क्या?

साथियों,

पूरे देश ने कांग्रेस की हरकतों के कारण उसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस अब ऑल इंडिया कांग्रेस नहीं बची! कांग्रेस अब परजीवी कांग्रेस बन चुकी है। ये कांग्रेस पार्टी अब केवल बैसाखियों पर ही जिंदा है। महाराष्ट्र हो, उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, झारखंड हो, ज़्यादातर राज्यों में कांग्रेस दूसरी पार्टियों के सहारे ही चुनाव लड़ने की हालत में है। वो अपने पैरों पर खड़ी नहीं रह सकती। इसलिए साथियों, कांग्रेस ने राजनीति में खुद को बचाने के लिए अपना सबसे बड़ा हथियार चला है- ये हथियार है- ST-SC-OBC समाज की एकता तोड़ो और राज छीनो! कांग्रेस के लोग जनजातीय समूह, हमारे आदिवासी, ST को बांटना चाहते हैं। कांग्रेस के लोग हमारे गरीब भाई-बहन SC को बांटना चाहते हैं। कांग्रेस के लोग OBC को बांटना चाहते हैं।

साथियों,

कांग्रेस के रहते OBC कभी इतना एकजुट नहीं हो पाया। OBC को आरक्षण भी तभी मिला जब कांग्रेस सरकार से हटी। नेहरू जी के समय में कांग्रेस ने OBC को अलग-अलग जातियों में बांटकर रखा। फिर, इन्दिरा गांधी जी का भी वही रवैया था। बाद में राजीव गांधी जी आए, इन लोगों ने कभी OBC को एकजुट नहीं होने दिया। और 90 के दशक में जैसे ही OBC एकजुट हुआ, OBC एक ताकत बना। OBC अपने हकों के लिए जागरूक बना। OBC देश की भलाई के लिए कुछ करने के लिए आगे आया। और इसका पहला नतीजा क्या आया। जैसे OBC ताकतवर बना, भारत में उसके बाद कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बननी बंद हो गई। उनका शटर गिर गया। और इसीलिए कांग्रेस का ऐसा गुस्सा है कि ये OBC, OBC, OBC आया और हमारी दुकान बंद होती गई। इसलिए कांग्रेस चाहती है, OBC समाज को कमजोर कर दो, उनकी एकजुटता को समाप्त कर दो। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि OBC कमजोर होगा, तभी कांग्रेस के लिए सत्ता का रास्ता खुलेगा। इसलिए कांग्रेस OBC को बांटकर उनमें दरारे पैदा करना चाहती हैं। यहां नासिक और इस क्षेत्र में कितनी ही OBC जातियां हैं। कुणबी, माली, वाणी, गुजर, कुंभार, न्हावी, सुतार, सोनार, देवडिगा, धाँगर, धनगरी, गवांडी, शेटवाल, माली, मालीस, नामदेव, अहीर, तंबोली, धावड , जाटगार, धाकड़ बैरागी, सैगर कितने सारे। कांग्रेस इन सारी जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है। कांग्रेस चाहती है कि कुणबी जाति माली से लड़े, वाणी जाति गुजर से लड़े, कुंभार साथी न्हावी से लड़े। कांग्रेस चाहती है कि सुतार, सोनार से भिड़ जाए। कांग्रेस OBC के तौर पर आपको एकजुट नहीं होने देना चाहती। इसलिए वो चाहती है कि देवडिगा धाँगर से लड़े, धनगरी गवांडी से टकराए, नामदेव अहीर से उलझे। कांग्रेस का इरादा है, तंबोली धावड से झगड़ा करे, जाटगार सैगर से लड़ाई करे, आपकी एकजुटता को तबाह करने के लिए कांग्रेस मैदान में उतरी है। आपकी एकजुटता से, आपकी मजबूती से कांग्रेस को सबसे ज्यादा तकलीफ है। इसलिए वो चाहती है कि OBC अपनी एकजुटता खो दें और कांग्रेस के लिए सत्ता का रास्ता खुल जाए! मैं आपसे पूछता हूं, जब OBC अलग-अलग जातियों में बटेंगे तो कमजोर होंगे या नहीं होंगे? आपकी ताकत घटेगी या नहीं घटेगी? इसीलिए, आपको याद रखना है। मेरा तो एक ही मंत्र है, हम एक हैं, तो सेफ हैं। सच्चाई यही है कि कांग्रेस, OBC से नफरत करती है। आज OBC समाज का एक व्यक्ति लगातार 140 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद लेकर तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बना है, कांग्रेस को हजम नहीं हो रहा है। OBC, वो भी इतनी छोटी जाति का, वो कैसे प्रधानमंत्री बन गया। और 60 साल के बाद तीसरी बार बन गया। उनको नींद नहीं आ रही है। इसलिए गुस्सा OBC समाज पर निकाल रहे हैं।

साथियों,

यहां हमें आशीर्वाद देने के लिए इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें-बेटियां आई हैं। आपको याद रखना है, ये महाअघाड़ी वाले, महाराष्ट्र की महिलाओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आप जानते हैं, आज पूरे देश में महाराष्ट्र की एक योजना की बहुत चर्चा हो रही है, हरेक जुबान पर वो चर्चा है- माझी लाडकी बहिण योजना! हमारी बहन-बेटियों को इस योजना का लाभ हो रहा है। लेकिन, ये जो कांग्रेस और अघाड़ी वाले हैं, इन्हें इस योजना से बहुत तकलीफ हो रही है। इस योजना को बंद कराने के लिए ये लोग कोर्ट तक चले गए हैं।

भाइयों-बहनों,

बीजेपी और महायुति महिलाओं के सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित है। केंद्र सरकार की नीतियों से आज महिलाएं सशक्त और समर्थ बन रही हैं। हम 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बना रहे हैं। महिलाएं आज ड्रोन दीदी बन रही हैं, देश की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आज हम गरीबों को प्रधानमंत्री आवास दे रहे हैं, तो वो भी घर की महिलाओं के ही नाम पर दिये जा रहे हैं। अभी केंद्र में नई सरकार बनने के 100 दिन के भीतर ही हमने 3 करोड़ नए घरों की भी मंजूरी दी है। अच्छा मेरा एक काम करोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताइए, मेरा एक काम करोगे? पक्का करोगे? देखिए, चुनाव में आपलोग घर-घर जाने वाले हो, हर गांव जाएंगे, मोहल्ले में जाएंगे, लोगों से मिलेंगे। अगर आपको कहीं पर भी कोई परिवार अगर कच्चे घर में रह रहा है, कोई परिवार झोपड़पट्टी में रह रहा है तो उसको जाके कहना कि मोदी जी ने मुझे भेजा है। अब तेरा घर पक्का बन के रहेगा। ये कहेंगे? कहेंगे? और उसका नाम-पता लिखकर मुझे भेज देना। देखिए, आप ही मेरे लिए मोदी हैं। आप जाकर के वादा कर देना। मैंने ठान के रखा है, मैं गरीब के पक्के घर बनाऊंगा। हमने महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा पहुंचाने के लिए नारी वंदन अधिनियम भी पास कराया है। यानि, जिन बहन बेटियों को कांग्रेस ने इतने दशकों तक शौचालय और सुरक्षा तक से वंचित रखा, अब वही विकसित भारत का चेहरा बनेंगी।

साथियों,

ये चुनाव एक ओर महाराष्ट्र के भविष्य का चुनाव है। साथ ही, ये महाराष्ट्र के सम्मान का, और स्वाभिमान का चुनाव भी है। एक ओर बीजेपी और महायुति है, जिसके लिए मराठी संस्कृति और इतिहास ये हमारी आस्था के केंद्र हैं। हमारी केंद्र सरकार ने मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिया है। हमने मराठी को वो पहचान दी, ये महान भाषा जिसकी पहले हकदार है। हमने छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों की बात की, उनके सम्मान को आगे बढ़ाया। बीजेपी गर्व से कहती है कि वीर सावरकर हमारे प्रेरणास्रोत हैं। वीर सावरकर महाराष्ट्र और राष्ट्र के गौरव हैं। लेकिन दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके पीछे लगे महाअघाड़ी के लोग, आप इनकी सोच और मानसिकता देखिए, कांग्रेस ने कभी मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा नहीं मिलने दिया। कांग्रेस के लोग घूम-घूमकर वीर सावरकर को गाली देते हैं, कांग्रेस के नेता गाली देते थे। महाराष्ट्र की धरती पर आकर वीर सावरकर का अपमान करते हैं! और मैंने सुना है कि महाराष्ट्र के अघाड़ी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस के युवराज को बिठाया, उसको कहा भाई महाराष्ट्र में चुनाव जीतना है तुम वीर सावरकर को गाली देना अभी कुछ दिन बंद करो। उसके मुंह पे ताला लगाया, गाली देना बंद करो। और ये देखिए अघाड़ी वाले, सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि सावरकर की विरासत का दम भरने वाले कांग्रेस के साथ खड़े हैं। मैं कांग्रेस के महाअघाड़ी वाले साथियों को चुनौती देता हूं। ये चुनौती महाअघाड़ी वालों को है, ये पार्टियां, कांग्रेस के युवराज के मुंह से, कांग्रेस के नेताओं के मुंह से वीर सावरकर के 10 त्याग बलिदान के कम से कम 15 मिनट रोज अपने भाषण में जरा प्रशंसा करके दिखा दें। ये युवराज कभी भी वीर सावरकर की प्रशंसा करने की हिम्मत नहीं करेगा। वीर सावरकर के कालेपानी के वो दिन, काल कोठरी में बिताए उनका वो कठितम समय और देश की आजादी के लिए किया हुआ प्रण। कांग्रेस सब कुछ खारिज करती है। महाअघाड़ी वाले दल, कांग्रेस से वीर सावरकर के कालेपानी वाले दिनों की प्रशंसा करवाकर दिखाएं। आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर ने कितने ही क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी थी। महाअघाड़ी वाले दल...कांग्रेस से ऐसे प्रेरणादायी वीर सावरकर की तारीफ करवाकर दिखाएं।

साथियों,

देश और महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे का योगदान अतुलनीय है। लेकिन कांग्रेस के नेताओं के मुंह से बाला साहेब की प्रशंसा में भी एक शब्द नहीं निकलता। मैं महाअघाड़ी में कांग्रेस के दोस्तों को ये भी चुनौती देता हूं, वो कांग्रेस के नेताओं से, युवराज के मुंह से बाला साहब ठाकरे की, उनकी विचारधारा की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करके दिखाएं। आज 8 नवम्बर है। मैं दिन गिनूंगा, और महाअघाड़ी वालों से जवाब का इंतज़ार करूंगा कि वो वीर सावरकर जी की प्रशंसा करते हैं कि नहीं करते हैं, बालासाहेब ठाकरे के तप की प्रशंसा करते हैं कि नहीं करते हैं। महाराष्ट्र भी देखेगा और हम गिनेंगे, आप भी गिनना।

साथियों,

इस चुनाव में आपको बीजेपी और महायुति के उम्मीदवारों को विजयी बनाना है। मैं आपसे आशीर्वाद मांगने आया हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, महाराष्ट्र में आने वाली सरकार बड़े फैसलों के लिए काम करेगी। आज प्रभु श्रीराम की तपोभूमि नासिक से हमारे चुनाव अभियान की ये शुरुआत ये प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से जरूर सफल होगी। हम सब मिलकर विकसित महाराष्ट्र का सपना पूरा करेंगे। आप यहां आए, इसके लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार प्रकट करता हूं।
(जो चुनाव लड़ रहे हैं, सभी उम्मीदवारों से आग्रह कि वे जरा आगे आ जाएं। जो चुनाव लड़ रहे हैं। आठवले जी आपको मेरे साथ रहना है वहां, यहां वापस नहीं आना है।)

मेरे साथ बोलिए,

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।