कांग्रेस और इसके साथियों को न बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान की परवाह है, ना ही देश की भावना की: नासिक, महाराष्ट्र में पीएम मोदी
कांग्रेस और अघाड़ी वाले लोग देश को कमजोर करने का कोई मौका नहीं छोड़ते: नासिक, महाराष्ट्र में पीएम मोदी
परजीवी बन चुकी कांग्रेस, अब ज्यादातर राज्यों में दूसरी पार्टियों की बैसाखियों पर ही जिंदा है: नासिक, महाराष्ट्र में पीएम मोदी

भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

जय भवानी ! जय भवानी !

प्रभु श्रीराम चा //पदस्पर्शाने // पवित्र //नाशिक नगरीला // माझा नमस्कार//

मैं भगवान त्रयंबकेश्वर और माता रेणुका को नमन करता हूं। आज महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के पहले दिन मुझे नासिक की पुण्य भूमि पर आने का सौभाग्य मिला है। जब अयोध्या में राममंदिर की 500 साल की प्रतीक्षा पूरी हुई। जब प्रभु श्रीराम एक बार फिर वापस आए तो अयोध्या में प्राणप्रतिष्ठा से पहले 11 दिनों के मेरे व्रत अनुष्ठान की शुरुआत भी यहीं नासिक से हुई थी। मुझे कालाराम मंदिर में सफाई और सेवा का अवसर भी मिला था। आज एक बार फिर मैं विकसित महाराष्ट्र के लिए, विकसित भारत के लिए नासिक का आशीर्वाद लेने आया हूं। मैं देख रहा हूं, नासिक में जनता जनार्दन का ये विशाल जनसमूह। महाराष्ट्र का जन-जन कह रहा है- भाजपा-महायुति //आहे// तर गति आहे// महाराष्ट्राची //प्रगति आहे//

साथियों,

आज महाराष्ट्र के प्रख्यात साहित्यकार और कला जगत के मजबूत स्तंभ रहे पी एल देशपांडे जी की जन्मजयंती है। मैं उनका पुण्य स्मरण करता हूं, उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज हमारा महाराष्ट्र विकास कर रहा है, हमारा देश नए रिकॉर्ड बना रहा है, क्योंकि आज देश में गरीबों की चिंता करने वाली सरकार है। जब गरीब आगे बढ़ता है, तभी देश आगे बढ़ता है। इतने दशकों तक देश में कांग्रेस और उसके साथियों ने गरीबी हटाओ का नारा दिया! फिर भी गरीब रोटी, कपड़ा, मकान के लिए मोहताज रहा! लेकिन अब केवल 10 वर्षों के भीतर-भीतर, देश के 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। ये कैसे हुआ? ये इसलिए हुआ, क्योंकि मोदी की नीयत सही है, मोदी गरीब का सेवक बनकर काम करता है। आपका सेवक बनकर काम करता है। ये इसलिए हुआ, क्योंकि गरीबी के खिलाफ ये लड़ाई केवल मोदी ने नहीं, देश के गरीब ने भी लड़ी, आप सबने लड़ी। आज महाराष्ट्र में 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। जल जीवन मिशन के तहत राज्य के सवा करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल की सुविधा मिलने लगी है। आज महाराष्ट्र के लगभग 7 करोड़ जरूरतमंदों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। राज्य के 26 लाख से ज्यादा गरीबों को पीएम आवास योजना का लाभ मिला है, उन्हें पक्के मकान दिए गए हैं। गरीबों के लिए ऐसे काम लगातार होते रहें, इसके लिए महाराष्ट्र में महायुति सरकार फिर से बननी जरूरी है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार में विकास की गति डबल होती है, साथ ही योजनाओं का लाभ भी डबल हो जाता है। महाराष्ट्र के किसान आज इसका अनुभव कर रहे हैं। यहां किसानों को एक ओर पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। साथ ही, नमो शेतकरी महा सम्मान निधि भी मिल रही है। यानी, सालाना 12 हजार रुपए की आर्थिक मदद! और मैं मेरे किसान साथियों को बताना चाहता हूं। जब महाराष्ट्र में फिर हमारी सरकार बनेगी, तो ये 12 हजार रुपए की मदद बढ़कर 15 हजार रुपए हो जाएगी। महाराष्ट्र के लाखों किसान परिवारों को इसका बहुत बड़ा लाभ मिलेगा।

साथियों,

यहां सोयाबीन, कपास, धान और दूध उत्पादकों को भी आर्थिक मदद दी गई है। पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेडिंग बढ़ने से गन्ना किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। 10 वर्षों में करीब 80 हजार करोड़ रुपए इथेनॉल की खरीद में किसानों को मिले हैं। देश का जो रुपया पेट्रोल खरीदने में विदेश चला जाता था, वो पैसा अब मेरे देश के किसानों को मिल रहा है, उनके पास जा रहा है।

साथियों,

मैं यहां के प्याज किसानों की भावनाएं भी समझता हूं। इसलिए प्याज के निर्यात में सहूलियत के लिए नीतियों में बदलाव किया गया है।

साथियों,

भारत की प्रगति के लिए महाराष्ट्र का तेजी से आगे बढ़ना बहुत जरूरी है। महाराष्ट्र आगे बढ़ेगा, तभी भारत विकसित बनेगा। महाराष्ट्र किस स्पीड से आगे बढ़ सकता है, पिछले ढाई वर्ष में महायुति सरकार ने दिखाया है। आज देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स में महाराष्ट्र बहुत आगे है। यहां हाइवेज़ और एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं। आधुनिक टेक्नालजी से जुड़े क्षेत्रों में महाराष्ट्र में निवेश हो रहा है। लेकिन आप मुझे बताइये, अगर कोई सरकार ये काम रोक दे तो क्या महाराष्ट्र आगे बढ़ पाएगा? हाथ तो हिला रहे हो, मुंह से भी तो बोलो। क्या महाराष्ट्र आगे बढ़ पाएगा? महाराष्ट्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल पाएंगे क्या? अगर ये काम रुके तो महाराष्ट्र काफी पीछे छूट जाएगा। कांग्रेस और उसके साथी यही चाहते हैं। उनका यही एजेंडा है। महाराष्ट्र में कोई भी बड़ा काम होता है, ये लोग उसका विरोध करने के लिए आ जाते हैं। इन्होंने अटल सेतु का विरोध किया। इन्होंने वाढवण पोर्ट पर भी रोक लगाने की कोशिश की। इन्होंने मेट्रो परियोजनाओं को लटकाया! अघाड़ी वालों ने समृद्धि महामार्ग का काम ठप्प करने का प्रयास किया। पिछले 5 वर्षों में शुरुआती ढाई साल महाअघाड़ी के महा-भ्रष्टाचार और लटकाने-अटकाने की भेंट चढ़ गए। इसलिए महाराष्ट्र के विकास की खातिर आपको अघाड़ी वालों को घुसने ही नहीं देना है। उनको सरकार से दूर रखना है।

साथियों,

महायुति सरकार के विकास के एजेंडे में नासिक को भी उतना ही महत्व मिल रहा है। आज आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर नासिक की तस्वीर को बदल रहा है। आज यहां जो हाईवे बन रहे हैं, ट्रांसपोर्ट के साधन तैयार हो रहे हैं, उनका बहुत बड़ा फायदा, 2026 के कुंभ में भी मिलेगा। नासिक का आईटी पार्क बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करेगा।

साथियों,

आज हमारा नासिक डिफेंस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का बहुत बड़ा केंद्र भी बन रहा है। नासिक में लड़ाकू विमान और सुरक्षा उपकरण बनाए जा रहे हैं। आज नासिक के हर व्यक्ति को इस बात का गर्व भी है कि उनका ये शहर सशक्त भारत में इतनी अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन साथियों, दूसरी तरफ ये कांग्रेस और अघाड़ी वाले लोग भी हैं! ये देश को पीछे करने का, देश को कमजोर करने का कोई कोई मौका नहीं छोड़ते। इन लोगों ने डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग में देश को पीछे करने के लिए क्या कुछ नहीं किया! इन्होंने HAL को लेकर तरह-तरह के झूठ फैलाए, विवाद खड़े करने की कोशिश की। इन्होंने फैक्टरियों के बाहर धरना-प्रदर्शन करवाए, कर्मचारियों को भड़काने की कोशिश की, लेकिन आज वही HAL रिकॉर्ड मुनाफे वाली कंपनी बनकर उभरी है। जब नीतियां स्पष्ट होती हैं, नीयत साफ होती है तो अच्छे परिणाम भी नासिक के मेरे भाई-बहन देख रहे हैं। डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत की ताकत बन रही है।

साथियों,

कांग्रेस और इसके साथियों को न बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान की परवाह है, ना कोर्ट की और ना ही देश की भावना की। ये सिर्फ दिखावे के लिए जेब में खाली पन्नों वाले संविधान की किताब लेकर घूमते हैं। आपने देखा होगा, उनकी पोल खुल गई। जब संविधान की रक्षा की बात आती है, जब संविधान के सम्मान की बात आती है, तो ये उल्टा ही काम करते हैं। ये कांग्रेस वाले ऐसे हैं, 75 साल तक जम्मू-कश्मीर में बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान को लागू नहीं होने दिया। 75 साल तक देश में एक संविधान नहीं था। जम्मू-कश्मीर संविधान अलग था। वो बाबा साहेब आंबेडकर वाला नहीं था। और ये पाप कांग्रेस का था। कांग्रेस ने आर्टिकल-370 की ऐसी दीवार बना दी थी कि बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान वहां घुस ही नहीं सकता था। भाजपा-NDA ने आर्टिकल-370 को हटाया और एक देश एक संविधान लागू किया। और मेरी बाबासाहेब आंबेडकर को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर में लागू हुआ पूरा देश झूम उठा था, नाच उठा था। मैं जरा मेरे नासिक के लोगों से पूछना चाहता हूं। नासिक के लोग बताइए, आर्टिकल 370 हटने से आपको खुशी हुई या नहीं हुई? जरा जोर से बताइए, खुशी हुई कि नहीं हुई? ये कांग्रेस वालों के कान फट जाएं, ऐसे बोलिए खुशी हुई कि नहीं हुई? आपको खुशी हुई लेकिन कांग्रेस और उसके साथियों के पेट में दर्द हो गया। आपने टीवी पर देखा होगा, 2-3 दिन पहले जम्मू कश्मीर की विधानसभा में कांग्रेस और इसके साथियों ने 370 फिर से लागू करने के लिए हंगामा किया। ये लोग फिर चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर से बाबासाहेब का संविधान हट जाए। ये लोग फिर चाहते हैं, कि वहां दलितों को, वाल्मीकि समाज को जो आरक्षण 75 साल बाद मिला है, उसे छीन लिया जाए। संविधान के विरुध, दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों के विरुद्ध इस साजिश में जितनी गुनहगार कांग्रेस है, उतने ही अघाड़ी के बाकी दल भी हैं।

साथियों,

चुनाव के समय पार्टियां अपने कामकाज का हिसाब देकर जनता के बीच जाती हैं। बीजेपी और महायुति भी लगातार अपने काम का हिसाब दे रही है। लेकिन बीजेपी का मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस के पास एक ही तरीका है। कांग्रेस और उसके साथियों की झूठ की दुकान! यही दुकान इन दिनों कांग्रेस और उसके चेलों ने महाराष्ट्र में लगाई है। कांग्रेस ने कर्नाटका, तेंलगाना और हिमाचल में भी यही दुकान सजाई थी। वहां क्या हाल हुआ? चुनाव खत्म हुए, दुकान का शटर गिर गया! वादे पूरा करना तो दूर कांग्रेस शासित राज्यों में हाल ये है कि सरकार चलाने के पैसे इनके पास नहीं हैं, तनख्वाह देने के पैसे नहीं हैं। खर्चों के लिए, और अपनी जेबें भरने के लिए जनता पर टैक्स बढ़ाया जा रहा है। जनता से वसूली हो रही है। जनता भी इनकी असलियत जान गई है। महाराष्ट्र की जनता भी देख रही है कि एक तरफ महायुति का घोषणापत्र है वहीं दूसरी तरफ महाअघाड़ी का घोटालापत्र है। क्योंकि, ये पक्का है जहां कांग्रेस और उसके साथी होंगे, वहां घोटाला होगा ही होगा। ये लोग ऐसी योजनाओं की घोषणा करते हैं, जिसमें ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार हो सके। आप महाराष्ट्र में इन लोगों को ये सारा पाप करने देंगे क्या? करने देंगे क्या? ये धोखेबाजी महाराष्ट्र की जनता के बीच चलेगी क्या?

साथियों,

पूरे देश ने कांग्रेस की हरकतों के कारण उसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस अब ऑल इंडिया कांग्रेस नहीं बची! कांग्रेस अब परजीवी कांग्रेस बन चुकी है। ये कांग्रेस पार्टी अब केवल बैसाखियों पर ही जिंदा है। महाराष्ट्र हो, उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, झारखंड हो, ज़्यादातर राज्यों में कांग्रेस दूसरी पार्टियों के सहारे ही चुनाव लड़ने की हालत में है। वो अपने पैरों पर खड़ी नहीं रह सकती। इसलिए साथियों, कांग्रेस ने राजनीति में खुद को बचाने के लिए अपना सबसे बड़ा हथियार चला है- ये हथियार है- ST-SC-OBC समाज की एकता तोड़ो और राज छीनो! कांग्रेस के लोग जनजातीय समूह, हमारे आदिवासी, ST को बांटना चाहते हैं। कांग्रेस के लोग हमारे गरीब भाई-बहन SC को बांटना चाहते हैं। कांग्रेस के लोग OBC को बांटना चाहते हैं।

साथियों,

कांग्रेस के रहते OBC कभी इतना एकजुट नहीं हो पाया। OBC को आरक्षण भी तभी मिला जब कांग्रेस सरकार से हटी। नेहरू जी के समय में कांग्रेस ने OBC को अलग-अलग जातियों में बांटकर रखा। फिर, इन्दिरा गांधी जी का भी वही रवैया था। बाद में राजीव गांधी जी आए, इन लोगों ने कभी OBC को एकजुट नहीं होने दिया। और 90 के दशक में जैसे ही OBC एकजुट हुआ, OBC एक ताकत बना। OBC अपने हकों के लिए जागरूक बना। OBC देश की भलाई के लिए कुछ करने के लिए आगे आया। और इसका पहला नतीजा क्या आया। जैसे OBC ताकतवर बना, भारत में उसके बाद कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बननी बंद हो गई। उनका शटर गिर गया। और इसीलिए कांग्रेस का ऐसा गुस्सा है कि ये OBC, OBC, OBC आया और हमारी दुकान बंद होती गई। इसलिए कांग्रेस चाहती है, OBC समाज को कमजोर कर दो, उनकी एकजुटता को समाप्त कर दो। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि OBC कमजोर होगा, तभी कांग्रेस के लिए सत्ता का रास्ता खुलेगा। इसलिए कांग्रेस OBC को बांटकर उनमें दरारे पैदा करना चाहती हैं। यहां नासिक और इस क्षेत्र में कितनी ही OBC जातियां हैं। कुणबी, माली, वाणी, गुजर, कुंभार, न्हावी, सुतार, सोनार, देवडिगा, धाँगर, धनगरी, गवांडी, शेटवाल, माली, मालीस, नामदेव, अहीर, तंबोली, धावड , जाटगार, धाकड़ बैरागी, सैगर कितने सारे। कांग्रेस इन सारी जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है। कांग्रेस चाहती है कि कुणबी जाति माली से लड़े, वाणी जाति गुजर से लड़े, कुंभार साथी न्हावी से लड़े। कांग्रेस चाहती है कि सुतार, सोनार से भिड़ जाए। कांग्रेस OBC के तौर पर आपको एकजुट नहीं होने देना चाहती। इसलिए वो चाहती है कि देवडिगा धाँगर से लड़े, धनगरी गवांडी से टकराए, नामदेव अहीर से उलझे। कांग्रेस का इरादा है, तंबोली धावड से झगड़ा करे, जाटगार सैगर से लड़ाई करे, आपकी एकजुटता को तबाह करने के लिए कांग्रेस मैदान में उतरी है। आपकी एकजुटता से, आपकी मजबूती से कांग्रेस को सबसे ज्यादा तकलीफ है। इसलिए वो चाहती है कि OBC अपनी एकजुटता खो दें और कांग्रेस के लिए सत्ता का रास्ता खुल जाए! मैं आपसे पूछता हूं, जब OBC अलग-अलग जातियों में बटेंगे तो कमजोर होंगे या नहीं होंगे? आपकी ताकत घटेगी या नहीं घटेगी? इसीलिए, आपको याद रखना है। मेरा तो एक ही मंत्र है, हम एक हैं, तो सेफ हैं। सच्चाई यही है कि कांग्रेस, OBC से नफरत करती है। आज OBC समाज का एक व्यक्ति लगातार 140 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद लेकर तीसरी बार देश का प्रधानमंत्री बना है, कांग्रेस को हजम नहीं हो रहा है। OBC, वो भी इतनी छोटी जाति का, वो कैसे प्रधानमंत्री बन गया। और 60 साल के बाद तीसरी बार बन गया। उनको नींद नहीं आ रही है। इसलिए गुस्सा OBC समाज पर निकाल रहे हैं।

साथियों,

यहां हमें आशीर्वाद देने के लिए इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें-बेटियां आई हैं। आपको याद रखना है, ये महाअघाड़ी वाले, महाराष्ट्र की महिलाओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आप जानते हैं, आज पूरे देश में महाराष्ट्र की एक योजना की बहुत चर्चा हो रही है, हरेक जुबान पर वो चर्चा है- माझी लाडकी बहिण योजना! हमारी बहन-बेटियों को इस योजना का लाभ हो रहा है। लेकिन, ये जो कांग्रेस और अघाड़ी वाले हैं, इन्हें इस योजना से बहुत तकलीफ हो रही है। इस योजना को बंद कराने के लिए ये लोग कोर्ट तक चले गए हैं।

भाइयों-बहनों,

बीजेपी और महायुति महिलाओं के सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित है। केंद्र सरकार की नीतियों से आज महिलाएं सशक्त और समर्थ बन रही हैं। हम 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बना रहे हैं। महिलाएं आज ड्रोन दीदी बन रही हैं, देश की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आज हम गरीबों को प्रधानमंत्री आवास दे रहे हैं, तो वो भी घर की महिलाओं के ही नाम पर दिये जा रहे हैं। अभी केंद्र में नई सरकार बनने के 100 दिन के भीतर ही हमने 3 करोड़ नए घरों की भी मंजूरी दी है। अच्छा मेरा एक काम करोगे? जरा हाथ ऊपर करके बताइए, मेरा एक काम करोगे? पक्का करोगे? देखिए, चुनाव में आपलोग घर-घर जाने वाले हो, हर गांव जाएंगे, मोहल्ले में जाएंगे, लोगों से मिलेंगे। अगर आपको कहीं पर भी कोई परिवार अगर कच्चे घर में रह रहा है, कोई परिवार झोपड़पट्टी में रह रहा है तो उसको जाके कहना कि मोदी जी ने मुझे भेजा है। अब तेरा घर पक्का बन के रहेगा। ये कहेंगे? कहेंगे? और उसका नाम-पता लिखकर मुझे भेज देना। देखिए, आप ही मेरे लिए मोदी हैं। आप जाकर के वादा कर देना। मैंने ठान के रखा है, मैं गरीब के पक्के घर बनाऊंगा। हमने महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा पहुंचाने के लिए नारी वंदन अधिनियम भी पास कराया है। यानि, जिन बहन बेटियों को कांग्रेस ने इतने दशकों तक शौचालय और सुरक्षा तक से वंचित रखा, अब वही विकसित भारत का चेहरा बनेंगी।

साथियों,

ये चुनाव एक ओर महाराष्ट्र के भविष्य का चुनाव है। साथ ही, ये महाराष्ट्र के सम्मान का, और स्वाभिमान का चुनाव भी है। एक ओर बीजेपी और महायुति है, जिसके लिए मराठी संस्कृति और इतिहास ये हमारी आस्था के केंद्र हैं। हमारी केंद्र सरकार ने मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिया है। हमने मराठी को वो पहचान दी, ये महान भाषा जिसकी पहले हकदार है। हमने छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों की बात की, उनके सम्मान को आगे बढ़ाया। बीजेपी गर्व से कहती है कि वीर सावरकर हमारे प्रेरणास्रोत हैं। वीर सावरकर महाराष्ट्र और राष्ट्र के गौरव हैं। लेकिन दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके पीछे लगे महाअघाड़ी के लोग, आप इनकी सोच और मानसिकता देखिए, कांग्रेस ने कभी मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा नहीं मिलने दिया। कांग्रेस के लोग घूम-घूमकर वीर सावरकर को गाली देते हैं, कांग्रेस के नेता गाली देते थे। महाराष्ट्र की धरती पर आकर वीर सावरकर का अपमान करते हैं! और मैंने सुना है कि महाराष्ट्र के अघाड़ी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस के युवराज को बिठाया, उसको कहा भाई महाराष्ट्र में चुनाव जीतना है तुम वीर सावरकर को गाली देना अभी कुछ दिन बंद करो। उसके मुंह पे ताला लगाया, गाली देना बंद करो। और ये देखिए अघाड़ी वाले, सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है कि सावरकर की विरासत का दम भरने वाले कांग्रेस के साथ खड़े हैं। मैं कांग्रेस के महाअघाड़ी वाले साथियों को चुनौती देता हूं। ये चुनौती महाअघाड़ी वालों को है, ये पार्टियां, कांग्रेस के युवराज के मुंह से, कांग्रेस के नेताओं के मुंह से वीर सावरकर के 10 त्याग बलिदान के कम से कम 15 मिनट रोज अपने भाषण में जरा प्रशंसा करके दिखा दें। ये युवराज कभी भी वीर सावरकर की प्रशंसा करने की हिम्मत नहीं करेगा। वीर सावरकर के कालेपानी के वो दिन, काल कोठरी में बिताए उनका वो कठितम समय और देश की आजादी के लिए किया हुआ प्रण। कांग्रेस सब कुछ खारिज करती है। महाअघाड़ी वाले दल, कांग्रेस से वीर सावरकर के कालेपानी वाले दिनों की प्रशंसा करवाकर दिखाएं। आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर ने कितने ही क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी थी। महाअघाड़ी वाले दल...कांग्रेस से ऐसे प्रेरणादायी वीर सावरकर की तारीफ करवाकर दिखाएं।

साथियों,

देश और महाराष्ट्र की राजनीति में बाला साहेब ठाकरे का योगदान अतुलनीय है। लेकिन कांग्रेस के नेताओं के मुंह से बाला साहेब की प्रशंसा में भी एक शब्द नहीं निकलता। मैं महाअघाड़ी में कांग्रेस के दोस्तों को ये भी चुनौती देता हूं, वो कांग्रेस के नेताओं से, युवराज के मुंह से बाला साहब ठाकरे की, उनकी विचारधारा की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करके दिखाएं। आज 8 नवम्बर है। मैं दिन गिनूंगा, और महाअघाड़ी वालों से जवाब का इंतज़ार करूंगा कि वो वीर सावरकर जी की प्रशंसा करते हैं कि नहीं करते हैं, बालासाहेब ठाकरे के तप की प्रशंसा करते हैं कि नहीं करते हैं। महाराष्ट्र भी देखेगा और हम गिनेंगे, आप भी गिनना।

साथियों,

इस चुनाव में आपको बीजेपी और महायुति के उम्मीदवारों को विजयी बनाना है। मैं आपसे आशीर्वाद मांगने आया हूं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, महाराष्ट्र में आने वाली सरकार बड़े फैसलों के लिए काम करेगी। आज प्रभु श्रीराम की तपोभूमि नासिक से हमारे चुनाव अभियान की ये शुरुआत ये प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से जरूर सफल होगी। हम सब मिलकर विकसित महाराष्ट्र का सपना पूरा करेंगे। आप यहां आए, इसके लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार प्रकट करता हूं।
(जो चुनाव लड़ रहे हैं, सभी उम्मीदवारों से आग्रह कि वे जरा आगे आ जाएं। जो चुनाव लड़ रहे हैं। आठवले जी आपको मेरे साथ रहना है वहां, यहां वापस नहीं आना है।)

मेरे साथ बोलिए,

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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भारत - जर्मनी जॉइंट स्टेटमेंट
January 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी गणराज्य के संघीय चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज़ ने 12-13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा की। चांसलर के साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और उद्योगपतियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था।

चांसलर श्री मर्ज़ की भारत की यह पहली आधिकारिक यात्रा थी और संघीय चांसलर के रूप में एशिया की यह उनकी पहली यात्रा थी, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत को जर्मनी द्वारा दिए जाने वाले उच्च प्राथमिकता को दर्शाती है। यह दौरा 25 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में आयोजित सफल 7वें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के बाद हुआ है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। 2025 में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं और 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों नेताओं ने सरकार, व्यापार, नागरिक समाज और शिक्षा जगत में द्विपक्षीय सहयोग में आई नई गति की सराहना की, जिसने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद में चांसलर श्री मर्ज़ का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रसिद्ध पतंग महोत्सव में भाग लिया। दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी सीईओ फोरम को भी संबोधित किया। चांसलर श्री मर्ज़ भारत और जर्मनी के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित कार्यक्रमों के लिए बेंगलुरु का भी दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता और सामरिक साझेदारी के आधारभूत पारस्परिक सम्मान की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की।


रक्षा एवं सुरक्षा


दोनों नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित उच्च रक्षा समिति की बैठक के परिणामों का स्वागत किया, जिसमें संस्थागत सेवा स्टाफ वार्ता और सेना प्रमुखों के दौरों सहित द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। नेताओं ने संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और वरिष्ठ अधिकारियों के आदान-प्रदान के माध्यम से सैन्य सहयोग को गहरा करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का समर्थन किया और दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों द्वारा नियमित रूप से एक-दूसरे के बंदरगाहों पर आने-जाने पर संतोष व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच न्यू ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद की स्थापना का स्वागत किया।


प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नौसेना अभ्यास मिलान और फरवरी 2026 में होने वाले 9वें हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के प्रमुख सम्मेलन, सितंबर 2026 में होने वाले वायु युद्ध अभ्यास तरंग शक्ति में जर्मनी की भागीदारी की मंशा का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने इंफोर्मेशन फ्यूजन सेंटर -हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) में संपर्क अधिकारी की तैनाती के जर्मनी के निर्णय की भी सराहना की। दोनों पक्षों ने यूरोड्रोन एमएएलई यूएवी कार्यक्रम के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और संयुक्त शस्त्र सहयोग संगठन (ओसीसीएआर) के बीच जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। इस कार्यक्रम से भारत को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी में सहयोग करने और उसका लाभ उठाने में मदद मिलेगी, जिससे यूरोप के साथ उसके रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत होंगे।

दोनों नेताओं ने दीर्घकालिक उद्योग-स्तरीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने हेतु संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस रोडमैप में प्रौद्योगिकी साझेदारी, रक्षा प्लेटफार्मों और उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन शामिल हैं। भारत ने रक्षा उपकरणों के शीघ्र निर्यात मंजूरी में सहायता के लिए जर्मनी के प्रयासों का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने बर्लिन और नई दिल्ली में आयोजित रक्षा गोलमेज सम्मेलनों/सम्मेलनों के माध्यम से भारतीय और जर्मन रक्षा व्यवसायों के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की और इस क्षेत्र में नियमित आदान-प्रदान का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों के लिए बाधा निवारण प्रणाली और मानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) में निरंतर सहयोग की प्रशंसा की और साझा लक्ष्यों तथा शक्ति की पूरकता, अर्थात् भारत से कुशल कार्यबल और प्रतिस्पर्धी लागत तथा जर्मनी से उच्च प्रौद्योगिकी और निवेश के आधार पर गहन संबंध बनाकर रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की
उम्मीद जताई।

प्रशिक्षण और आदान-प्रदान के संदर्भ में सहयोग के संदर्भ में, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के संस्थानों के बीच शांतिरक्षा प्रशिक्षण पर समझौता ज्ञापन (एमओयू), सशस्त्र बलों के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते और रक्षा रक्षा विभाग (डीआरडीओ) तथा संघीय रक्षा उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाकालीन सहायता कार्यालय (बीएएएनबीडब्ल्यू) के बीच नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान पर प्रगति का स्वागत किया।


दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित चरमवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों सहित अन्य संगठनों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने के साथ-साथ आतंकवादी नेटवर्क और वित्तपोषण को बाधित करने की दिशा में काम जारी रखने का भी आह्वान किया। नेताओं ने पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के अनुसमर्थन का स्वागत किया और आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह के तहत हुई प्रगति पर ध्यान दिया।

व्यापार और अर्थव्यवस्था:


दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में निरंतर वृद्धि का स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय व्यापार 2024 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और यह सकारात्मक रुझान 2025 में भी जारी रहा। भारत-जर्मनी के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार का 25 प्रतिशत से अधिक है। दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के बीच मजबूत द्विपक्षीय निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण में ऐसे निवेशों के सकारात्मक प्रभावों पर ध्यान दिया। उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार-संचालित उद्यमों सहित अप्रयुक्त आर्थिक क्षमता को पूरी तरह से साकार करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश करने/व्यवसाय का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया ताकि वे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, व्यापार-अनुकूल वातावरण, विशाल उच्च-कुशल कार्यबल और परिचालन को बढ़ाने के अपार अवसरों का लाभ उठा सकें। चांसलर श्री मर्ज़ ने भारतीय कंपनियों द्वारा निवेश के लिए जर्मनी को एक आकर्षक स्थान के रूप में अनुशंसित किया।


प्रधानमंत्री श्री मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने आगामी यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन के एक प्रमुख परिणाम के रूप में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के समापन के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, जिससे व्यापार प्रवाह सुगम होगा और जर्मन-भारतीय आर्थिक संबंधों को और गति मिलेगी।

दोनों नेताओं ने जर्मन-भारतीय सीईओ फोरम के माध्यम से द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे भारत में जर्मन व्यवसायों और जर्मनी में भारतीय व्यवसायों की दीर्घकालिक उपस्थिति के समर्थन से व्यापार और उद्योग सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा।


प्रधानमंत्री श्री मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने सीईओ फोरम के आयोजन का स्वागत किया और प्रौद्योगिकी, ऑटोमोटिव, रक्षा, जहाज निर्माण, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, रसायन, जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक उपकरण इंजीनियरिंग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अधिक व्यावसायिक सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दोनों पक्षों के प्रमुख सीईओ और उद्योगपतियों के साथ बातचीत की।


प्रौद्योगिकी, नवाचार, विज्ञान और अनुसंधान


दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, दूरसंचार, स्वास्थ्य और जैव अर्थव्यवस्था सहित महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की प्रगति का स्वागत किया जो नवाचार और प्रौद्योगिकी साझेदारी रोडमैप को मजबूत करता है।


उन्होंने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पार्टनरशिप पर एक नई संयुक्त घोषणा के माध्यम से सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में संस्थागत संवाद स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों की मजबूत इच्छा का स्वागत किया। उन्होंने भारतीय और जर्मन सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के बीच संस्थागत अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पिछले वर्ष मार्च में जर्मन प्रौद्योगिकी उद्यम इन्फिनियन द्वारा गिफ्ट सिटी में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के उद्घाटन का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया, जिसके लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त आशय घोषणा (जेडीओआई) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों पक्षों का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, अनुसंधान एवं विकास, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग के माध्यम से मूल्यवर्धन, साथ ही दोनों देशों और तीसरे देशों में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण और विकास के क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाना है।


भारत-जर्मन डिजिटल संवाद के संबंध में, दोनों नेताओं ने 2026-27 के लिए इसकी कार्य योजना को अंतिम रूप दिए जाने पर ध्यान दिया और इंटरनेट एवं डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और उद्योग 4.0 तथा उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग के महत्व पर जोर दिया। नेताओं ने दूरसंचार के क्षेत्र में सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाने को स्वीकार किया।


दोनों नेताओं ने भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) के कार्यकाल के विस्तार पर ध्यान दिया और उन्नत विनिर्माण, चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, सतत उत्पादन, जैव अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट से धन सृजन पहलों और स्थिरता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में द्विपक्षीय उद्योग-अकादमिक रणनीतिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में आईजीएसटीसी की अग्रणी भूमिका पर संतोष व्यक्त किया। नेताओं ने आईजीएसटीसी के अंतर्गत आने वाले कार्यक्रमों जैसे (2+2) उद्योग-अकादमिक परियोजनाओं और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी (डब्ल्यूआईएसईआर) के योगदान को स्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने डिजिटल कन्वर्जेंस, बैटरी प्रौद्योगिकी, हरित परिवहन और किफायती स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित भारत-जर्मन उत्कृष्टता नवाचार केंद्रों (आईजी-सीओई) की स्थापना में हुई प्रगति का स्वागत किया। नेताओं ने जीनोमिक्स, 3D बायोप्रिंटिंग और बायोमैन्युफैक्चरिंग में परिवर्तनकारी परिणाम देने के लिए जैव अर्थव्यवस्था पर द्विपक्षीय सहयोग की शुरुआत की सराहना की। नेताओं ने एंटीप्रोटॉन और आयन अनुसंधान सुविधा (एफएआईआर) और ड्यूश इलेक्ट्रोनन सिंक्रोट्रॉन (डीईएसवाई) में प्रमुख विज्ञान सुविधाओं में भारत की उच्च स्तरीय भागीदारी की भी प्रशंसा की और पीईटीआरए-III और डीईएसवाई में मुक्त-इलेक्ट्रॉन लेजर सुविधाओं में निरंतर सहयोग पर विश्वास व्यक्त किया।


दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी (डीएलआर) के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़े हुए संवाद पर ध्यान दिया और दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग को और बढ़ाने की संभावना का स्वागत किया। दोनों पक्ष अंतरिक्ष उद्योग स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने किफायती स्वास्थ्य सेवा के लिए साक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और जर्मनी के चैरिटे विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।


हरित एवं सतत विकास साझेदारी/नवीकरणीय ऊर्जा


दोनों नेताओं ने उल्लेख किया कि 2026 हरित एवं सतत विकास साझेदारी (जीएसडीपी) की प्रतिबद्धता अवधि का आधा समय पूरा होने का प्रतीक है और भारत तथा जर्मनी के बीच इस प्रमुख पहल के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया। इसने सतत विकास और जलवायु कार्रवाई पर द्विपक्षीय सहयोग को तीव्र किया है और सतत विकास लक्ष्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और पेरिस समझौते के कार्यान्वयन को मजबूत किया है। जर्मन सरकार की 2030 तक की कुल 10 बिलियन यूरो की प्रतिबद्धता में से, जो अधिकतर रियायती ऋणों के रूप में है, लगभग 5 बिलियन यूरो 2022 से जलवायु शमन और अनुकूलन, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत शहरी विकास, हरित शहरी गतिशीलता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वानिकी, जैव विविधता, कृषि इकोसिस्टम, चक्रीय अर्थव्यवस्था और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए पहले ही उपयोग किए जा चुके हैं या आवंटित किए जा चुके हैं। इस तरह, जीएसडीपी के तहत भारत-जर्मन सहयोग ने भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों और परियोजनाओं जैसे पीएम ई-बस सेवा, सोलर रूफटॉप कार्यक्रम, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, अहमदाबाद, सूरत और बैंगलोर मेट्रो रेल परियोजनाएं, जल विजन 2047 के साथ-साथ तमिलनाडु में जलवायु-लचीले शहरी बुनियादी ढांचे, पश्चिम बंगाल में बैटरी भंडारण परियोजना, कृषि-फोटोवोल्टिक के क्षेत्र में नए भारत-जर्मन सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के वित्तपोषण में योगदान दिया है।


दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा के लिए वित्त और निवेश जुटाने के महत्व को दोहराया और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए भारत-जर्मनी मंच के तहत किए जा रहे संयुक्त प्रयासों जैसे कि अक्टूबर 2025 में सौर ऊर्जा उत्पादन और पवन ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूहों का शुभारंभ, साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधानों पर नवगठित संयुक्त कार्य समूह का स्वागत किया। ये संयुक्त कार्य समूह नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रौद्योगिकी, मानकों, विनियमन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करेंगे और भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच आदान-प्रदान और निवेश को बढ़ावा देंगे।


दोनों नेताओं ने भारत-जर्मन ऊर्जा मंच के भीतर संयुक्त रोडमैप के तहत किए जा रहे कार्यों सहित हरित हाइड्रोजन पर चल रहे सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और गहन तकनीकी, वाणिज्यिक और नियामक सहयोग के साथ-साथ मजबूत व्यापार-से-व्यापार संबंधों के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और जर्मनी की राष्ट्रीय हाइड्रोजन रणनीति को संयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत में हाइड्रोजन नियमों और मानकों के विकास में सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए, दोनों नेताओं ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) और जर्मन तकनीकी और वैज्ञानिक गैस एवं जल उद्योग संघ (डीवीजीडब्ल्यू) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत सबसे बड़े ऑफटेक समझौतों में से एक, एएम ग्रीन से यूनिपर ग्लोबल कमोडिटीज को हरित अमोनिया की आपूर्ति के लिए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने निजी क्षेत्र के प्रतिबद्ध हितधारकों द्वारा अब तक की गई प्रगति, विशेष रूप से हाल ही में भारतीय उत्पादित हरित अमोनिया के लिए हस्ताक्षरित बाध्यकारी व्यापक स्तर पर ऑफटेक समझौते- का स्वागत किया।


दोनों नेताओं ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में त्रिकोणीय विकास सहयोग (टीडीसी) परियोजनाओं के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया और तीसरे देशों में सतत और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए पूरक शक्तियों और क्षमताओं को जुटाने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने घाना, कैमरून और मलावी में टीडीसी परियोजनाओं को बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया।

भारत-प्रशांत, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दे


दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, संयुक्त राष्ट्र समुद्री समझौता समिति (यूएनसीएलओएस) सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर बल दिया और एक नए द्विपक्षीय भारत-प्रशांत परामर्श तंत्र की घोषणा की। भारत ने इस क्षेत्र में जर्मनी की निरंतर और बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया, जिसमें भारत और जर्मनी के संयुक्त नेतृत्व वाली इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) के क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण स्तंभ के अंतर्गत गतिविधियां शामिल हैं।


भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के प्रति अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि करते हुए, दोनों नेताओं ने वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया रूप देने और बढ़ावा देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। इस संदर्भ में, वे इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने हेतु पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


भारत और जर्मनी ने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए स्थायी और अस्थायी सदस्यता श्रेणियों के विस्तार के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। इस संबंध में, दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईजीएन) में लिखित वार्ता शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।


दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर अपनी चिंता दोहराई, जो भारी जन पीड़ा और वैश्विक स्तर पर नकारात्मक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों के लिए समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने गाजा शांति योजना का स्वागत किया और गाजा संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में 17 नवंबर 2025 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2803 को अपनाने का उल्लेख किया। उन्होंने सभी पक्षों को इस संकल्प को पूर्णतः लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध और व्यापक वितरण के साथ-साथ मानवीय संगठनों की निर्बाध पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने न्यायसंगत और स्थायी शांति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करने की अपनी तत्परता की पुष्टि की और मध्य पूर्व में संघर्ष के न्यायसंगत, स्थायी और व्यापक समाधान के लिए वार्ता के माध्यम से द्विराज्य समाधान की अपनी अपील को दोहराया।

दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्रवाई में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र वित्तीय परिषद (यूएनएफसीसीसी) प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने पेरिस समझौते के महत्व और बेलेम में सीओपी 30 की पुनः पुष्टि तथा हाल के वर्षों में इसके अंतर्गत लिए गए निर्णयों, विशेष रूप से न्यायसंगत संक्रमण तंत्र और प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम के निर्माण और वैश्विक स्टॉकटेक की प्रतीक्षा पर प्रकाश डाला। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के अनुकूलन और हरित एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं की ओर न्यायसंगत परिवर्तन में विकासशील देशों का समर्थन करने के लिए जलवायु कार्रवाई को अत्‍यधिक बढ़ाने तथा जलवायु वित्त एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्रों में प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए सुनियोजित जलवायु कार्रवाई की क्षमता और राष्ट्रीय एवं सीमा पार मूल्य श्रृंखलाओं के साथ परिवर्तन को आकार देने और गति प्रदान करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा जलवायु वित्त को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और भीषण मौसम की घटनाओं से उत्पन्न खतरों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण क्षरण और जैव विविधता के नुकसान से सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को भी पहचाना।


उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें महामारी को लेकर तैयारी और प्रतिक्रिया, रोगाणुरोधी प्रतिरोध से लड़ना और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल और दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।


शिक्षा, कौशल विकास, गतिशीलता और संस्कृति


दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत परस्‍पर संबंध रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और छात्रों, शोधकर्ताओं, कुशल पेशेवरों, कलाकारों और पर्यटकों के बढ़ते आदान-प्रदान का स्वागत किया। उन्होंने जर्मनी की अर्थव्यवस्था, नवाचार और सांस्कृतिक जीवन में भारतीय समुदाय के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा, अनुसंधान, व्यावसायिक प्रशिक्षण, संस्कृति और युवा आदान-प्रदान में विस्तारित सहयोग के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी से होकर गुजरने के लिए वीजा-मुक्त पारगमन सुविधा की घोषणा के लिए चांसलर श्री मर्ज़ को धन्यवाद दिया, जिससे न केवल भारतीय नागरिकों की यात्रा सुगम होगी, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच परस्‍पर संबंध और भी मजबूत होंगे। दोनों पक्षों ने प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते (एमएमपीए) के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करके कानूनी गतिशीलता को और मजबूत करने तथा देश छोड़ने के लिए बाध्य व्यक्तियों की वापसी और अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेज़ एवं वीजा धोखाधड़ी के विरुद्ध लड़ाई में सहयोग को मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।


दोनों नेताओं ने जर्मनी में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उच्च शिक्षा में संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों, सहयोगात्मक अनुसंधान और संस्थागत साझेदारियों के विस्तारित नेटवर्क पर भी ध्यान दिया। बढ़ते आदान-प्रदान जर्मनी में भारतीय छात्रों और स्नातकों के रोजगार बाजार में एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई परियोजनाओं में भी परिलक्षित होते हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और जर्मनी के तकनीकी विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत संबंधों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थागत संबंधों को और मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा पर भारत-जर्मन व्यापक रोडमैप के निर्माण का भी स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए जर्मनी के प्रमुख विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया।

दोनों नेताओं ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते के तहत कुशल प्रवासन में जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। इस प्रतिबद्धता और जर्मनी की कुशल श्रम रणनीति के अनुरूप, दोनों देशों का उद्देश्य कुशल श्रमिकों की गतिशीलता को इस तरह सुगम बनाना है जिससे सभी पक्षों को लाभ हो, साथ ही शोषण से बचाव हो और अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित हो। नेताओं ने वैश्विक कौशल साझेदारी पर संयुक्त उद्यम समझौते (जेडीआई) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो कुशल गतिशीलता,विशेष रूप से जर्मनी में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक नैतिक और टिकाऊ ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है। साथ ही, श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना भी इसका उद्देश्य है। दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा में कौशल विकास के लिए भारत-जर्मन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु संयुक्त उद्यम समझौते (जेडीआई) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया, जो भारतीय और जर्मन रोजगार बाजार के लिए पाठ्यक्रम विकास, जर्मन और भारतीय उद्योग के साथ सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण में सहयोग को मजबूत करेगा। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष भारत में जर्मन भाषा के शिक्षण का विस्तार करने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिसमें माध्यमिक विद्यालय, विश्वविद्यालय और व्यावसायिक शिक्षा केंद्र शामिल हैं।


भारत और जर्मनी के बीच मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों नेताओं ने ब्रेमरहेवन स्थित जर्मन समुद्री संग्रहालय - लाइबनिज़ समुद्री इतिहास संस्थान (डीएसएम) और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। इससे समुद्री विरासत पर सहयोग और गहरा होगा और समुद्री इतिहास के साझा पहलुओं को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इस संदर्भ में, संग्रहालयों के बीच सहयोग में नए सिरे से रुचि देखी जा रही है। दोनों नेताओं ने खेल में सहयोग पर संयुक्त अंतर-सरकारी परामर्श समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का भी स्वागत किया, जिससे एथलीट प्रशिक्षण, खेल प्रशासन, निष्पक्षता और एथलीटों के अधिकारों के साथ-साथ खेल विज्ञान में अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा।


चांसलर श्री मर्ज़ ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को उनके और उनके प्रतिनिधिमंडल के प्रति दिखाए गए सौहार्दपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि अगली भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श बैठक 2026 के अंत में जर्मनी में आयोजित की जाएगी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।