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उपस्थित सभी देशवासियों,

मैं अपनी बात शुरू करने से पहले आज मिले एक दुखद समाचार कि जर्मनी के मूर्धन्य साहित्‍यकार और Nobel prize विजेता श्रीमान गुंटर ग्रास का 87 वर्ष की आयु में आज स्‍वर्गवास हुआ, नोबेल पुरस्‍कार जिनको प्राप्‍त हो, साहित्‍य की जिन्‍होंने सेवा की हो, उनका चिंतन, मनन, हर शब्‍द पीढि़यों तक समाज के लिए शक्ति बनता है। उनकी विदाई के समय मैं सभी भारतवासियों की तरफ से उनको आदरपूर्वक श्रृद्धाजंलि समर्पित करता हूं और उनका जो साहित्‍य है वो आने वाली पीढि़यों को भी प्रेरणा देता रहेगा। हमारे यहां शब्‍दों को मृत्‍युंजय माना जाता है। शब्‍द कभी मरता नहीं और इसलिए जो साहित्‍य की साधना करते हैं, वे एक प्रकार से अमरत्‍व को प्राप्‍त करते है। मुझे विश्‍वास है कि उनकी जीवनभर की ये तपस्‍या, ये साधना, ये शब्‍द सरिता आने वाले युगों तक न सिर्फ जर्मनी को लेकिन मानवीय मूल्‍यों की चिंता करने वाले हर किसी को प्रे‍रणा देती रहेगी। मैं फिर एक बार उनके प्रति अपना आदर व्‍यक्‍त करता हूं।

मैं कल हेनोवर में था। भारत इस बार हेनोवर fair का partner है। भारत से करीब 400 कम्‍पनियां यहां आई हुई हैं। अब चारों तरफ लोगों को लगता है कि देश विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। इस प्रकार के अवसर भारत को showcase करने के लिए तो काम आते ही आते हैं लेकिन हमें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलता है। कभी-कभार हम अपने मोहल्‍ले में तो Hercules होते है, लेकिन जरा बाहर निकले तो पता चलता है कि हम कहां खड़े हैं। और इसलिए इस प्रकार के कार्यक्रमों में आने से हमें भी भीतर से एक challenge स्‍वीकार करने का मन बनता है। हमारे भीतर का जज्‍बा जगता है कि भई! क्‍या बात है वो तो आगे निकल रहे हैं, हम क्‍यों नहीं निकल रहे चलों हम भी कुछ करेंगे तो एक प्रकार से ये अंतर्राष्‍ट्रीय कसौटी है, अंतर्राष्‍ट्रीय मानदंडों में हम आगे बढ़ रहे है कि नहीं बढ़ रहे हैं।

मुझे विश्‍वास है कि भारत से जो लोग आए है वे यहां से बहुत कुछ देख करके, सीख करके, समझ करके जाएगें और उसका लाभ भी मिलता है, हमारा लाभ उनको भी मिलता है। मैं आज Madam Chancellor के साथ हेनोवर फेयर में अलग-अलग stalls की मुलाकात कर रहा था तो एक कम्‍पनी ने अपना आधुनिक Technology से screening करने की technology दिखाई कि कार कोई पुर्जा-वुर्जा खराब हुआ हो, तो उनको screen में पता चलता है, तो मैंने पूछा उनको कि ये कार का पुर्जा-वुर्जा तो देख लेते हैं लेकिन क्‍या इस technology का इस्‍तेमाल security के लिए उपयोग हो सकता है क्‍या? तो चौंक गए बोले ये तो हमने सोचा नहीं, बोले हम तुरंत करेंगे। मैंने उनको कहा कि मैं ideas की royalty नहीं लेता हूं। कहने का तात्‍पर्य है कि जब देखते हैं तो पता चलता है कि एक ही चीज अलग दृष्टिकोण से कितनी काम में आती है। वही technology, वही काम वह अलग रूप में किस प्रकार काम में आता है।

और मैं मानता हूं इस विषय में भारत के लोगों की बड़ी expertise है वो बड़ी आसानी से इन चीजों को, अब आप देखिए हमारे तो यहां माताएं-बहनें खाना पकाने में कितना बढि़या प्रयोग करती हैं। अब वो घर में भले ही उसका भारतीयकरण कर दिया होगा, लेकिन वो Chinese dish भी बनाती होगी और pizza भी बनती होगी और Mexican dish भी बनाती होगी। तो हमारे लोगों की एक विशेषता है, वो है चीजों को अपने ढंग से ढालने की। लेकिन ऐसे अवसर पर जाते है तो एक प्रकार से हमारी कसौटी होती है। हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती है सामने वालों को भी ध्‍यान में आता है कि हम सोचते थे वैसा भारत नहीं है, भारत में तो कुछ, बहुत कुछ है ये काम भारत में हो रहा है तो उनको भी लगता है कि चलो भई हम भी अपना उस क्षेत्र में जाए, हम भी अपना विस्‍तार करें, विकास करें, एक प्रकार से ये भिन्न-भिन्न situation वाला मामला होता है और मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में भारत की जो विकास यात्रा है उस विकास यात्रा में manufacturing hub भारत बनें।

ये समय की बहुत बड़ी मांग है और अगर हमने ये समय खो दिया तो भारत का बहुत लम्‍बे अरसे तक नुकसान होगा। जब दुनिया में औद्योगिक क्रांति हुई थी उस समय भारत गुलाम था। हमारे पास talent थे, हमारे पास हर प्रकार की क्षमता थी, ढ़ाका का मलमल कितना अगूंठी से पूरा निकलता था। ये चर्चा हम पढ़े हैं, सुने हैं कि सामर्थ्‍य था लेकिन जब Industrial revolution हुआ तब हम गुलाम थे और गुलाम होने के कारण ही हम उस परिस्थिति का लाभ नहीं ले पाए। ऊपर से हमारा जो talent था, हमारे पास जो सामर्थ्‍य था या तो उसको दबोच दिया गया, या तो उसे चोरी करके ले जाया गया और हम वही के वही रह गए। Second revolution आया Communication का, IT revolution आया, IT Revolution में हम आजाद भारत के होने के कारण हमारे 20, 22, 24 साल के नौजवानों ने Computer पर उगलियां घुमाते-घुमाते दुनिया को हिन्‍दुस्‍तान की पहचान करा दी, विश्‍व को भारत का लौहा मानना पड़ा।

IT Revolution ने हमारे देश के नौजवानों की ताकत से दुनिया को अचंभित कर दिया, दुनिया को आश्‍चर्य हुआ। जब अमेरिका के President Clinton हिन्‍दुस्‍तान आए थे, तो उनकी itinerary में राजस्‍थान के गांव थे और घूंगट ओड़ करके बैठी हुई महिलाएं computer पर अपने Cooperative का काम कर रही थीं, वो देख करके परेशान हो गए, उनको आश्‍चर्य हुआ और तब जा करके, वहीं का चुने हुए एक पंच ने उनको पूछा, अब वो बेचारा अपनी भाषा में बोल रहा था और वो लुढ़क करके Security के इधर-उधर करके उसके पास गया होगा कोई क्‍योंकि वो पंचायत का member था, पंचायत का सदस्‍य था और दलित समाज से था वो लुढ़क करके President Clinton के पास पहुंच गया, उस दिन जिन्‍होंने वो Live Telecast देखा होगा उन्‍होंने देखा होगा वो। वो लुढ़के उनके पास पहुंच गया तो गांव वालों को सबको लगने लगा कि यार ये क्‍या आदमी है, उधर क्‍या बात करेगा, उससे उसको कुछ बोलना-वोलना तो आता नहीं है। किसी को लगा कि नहीं वो शायद Visa मांगेगा, किसी को लगा कि नहीं यार अपने बेटे के लिए नौकरी मांगेगा और ताज्‍जुब की बात है वो अनपढ़ इंसान, दलित परिवार का बेटा, जो कि इस गांव की पंचायत का सदस्‍य था वो Clinton से Height में भी बहुत छोटा था, यूं देखता था उसे और आंख में आंख मिला करके उसने पूछा था कि क्‍या आप आज भी हिन्‍दुस्‍तान को पिछड़ा मानते हैं क्‍या, ये पूछा था उसने और Clinton ने जबाव दिया था कि नहीं मैं दुनिया में जहां जाऊंगा, वहां मैं हिन्‍दुस्‍तान की शक्ति के विषय में बताऊंगा और आप देखिए उन्‍होंने फिर हर बार जहां गए इस बात का उल्‍लेख किया और लोगों को कहा कि भारत विषय में जो आप सोचते हैं, अपनी उस सोच बदलिए, वो बोल रहे थे।

कहने का तात्‍पर्य ये है कि हमारे नौजवानों ने ये जो Second Revolution आया, IT Revolution इसमें बहुत कुछ किया। दुनिया में अपनी ताकत का परिचय दिया, लेकिन होता कहां है Silicon valley में जाइएं। वहां 60-70% CEO, IT sector में भारतीय मूल के हैं, लेकिन Google का जन्‍म भारत की गोद में नहीं होता है। किसी और की गोद में होता है और तब सवाल उठता है कि गूगल मेरे यहां क्‍यों पैदा नहीं हुआ। scientist वही थे, साफ्टवेयर इंजीनियर वहीं है, भारत में वो सबसे बड़ी चुनौती है कि हम उस माहौल को तैयार करें जिस माहौल में हमारे पास जो ये Talent है, हमारे जो Brain हैं जो दुनिया में जा करके तो अपना करतब दिखाते है वो हिन्‍दुस्‍तान की धरती में भी अपना करतब दिखाएं।

जर्मनी में भी कितनी बड़ी मात्रा में हमारे Engineering Field के Students हैं, नौजवान हैं, professionals हैं और यहां की कई कम्‍पनियों में उनका बहुत बड़ा Contribution है, बहुत कुछ सीख रहे है, आपके पास Basic knowledge है, आपके पास Experience है, आपके पास innovations के लिए आवश्‍यक Infrastructure मिला हुआ है आप और हम अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य का उपयोग कर रहे है। क्‍या अब आपको ये जो मिला है, आपके अपने प्रयासों से मिला है किसी के कारण मिला है ऐसा मैं नहीं कहता हूं आपके अंदर वो जज्‍बा है, वो क्षमता है, वो अवसर मिला है। क्‍या आप भारत के साथ एक सेतु बन सकते है? क्‍या जर्मनी में काम करने वाले हमारे Professionals, खास करके Manufacturing sector में जिनके पास ताकत है, वे हिन्‍दुस्‍तान और जर्मनी के बीच Bridge बन सकते हैं? और Bridge दो देशों का नहीं, Bridge आज जहां है, वहां से आगे पहुंचने का, जो Destination है उस बीच का Bridge बनाना है।

आपके पास देश को बहुत अपेक्षाएं है और हमारी जिम्‍मेवारी भी है, ये हमारा दायित्‍व है। आज हम जहां भी पहुंचे है हमारे देश के किसी न किसी गरीब ने हमारे लिए कुछ तो किया होगा तब जा करके पहुचे होंगे। हर चीज कोई अपने आप बलबूते पर नहीं होती है। अगर ये सामर्थ्‍य है, उस सामर्थ्‍य का उपयोग कैसे हो।

मैं बहुत साल पहले ओलंपिक देखने के लिए अमेरिका गया था। मैं कोई खिलाड़ी-विलाड़ी नहीं हूं, और बाद में दूसरे ही खेल में पड़ गया। लेकिन मुझे इतने बड़े Event का Management क्‍या होता है? वो जरा देखने की मेरी इच्‍छा थी कैसे करते है कैसे Organise करते है? मैं सीखना चाहता था।

बहुत साल पहले की बात है तो अटलांटा की university के कुछ student के साथ मेरा मिलना हुआ। उसमें भारतीय student के साथ भी तो काफी देर बातें हुई। लेकिन बाद में एक कार्यक्रम ऐसा हुआ जिसमें अमेरिका से बाहर से आए हुए कई समाजों के students थे, तो मैंने ऐसे ही पूछा आगे क्‍या सोच रहे हो? और मैं हैरान था कि Chinese student बहुत clear थे। अपने दिमाग में बहूत clear थे। मैंने उनको पूछा आप....आप क्‍या, कैसा, आगे का क्‍या सोच रहे है, आप पढ़ाई के बाद? उन्‍होंने स्‍पष्‍ट कहा कि 10 साल यहां पर किसी न किसी बड़ी कम्‍पनी में काम करेंगे। और फिर बिस्‍तरा-बोरियां गोल करके देश चले जाएंगे।

मैंने कहा क्‍यों ? तो बोले university में पढ़ रहे है, इतना experience नहीं है, लेकिन किसी कम्‍पनी में जब काम करेंगे तब चीजें सीखेंगे और जो भी सीखेंगे वो सब ले करके जाएंगे वापिस और फिर China और हम मिल करके आगे बढ़ेंगे। अब देखिए यानी विद्यार्थी अवस्‍था में भी....! ये मेरी चर्चा अटलांटा university के Chinese student के साथ कभी हुई थी।

कहने का तात्‍पर्य ये है कि हर देश में ये मिज़ाज होता है, ये मिज़ाज है जो इनको आगे ले जाता है। आप लोग खास करके जिनको जर्मनी में ये अवसर मिला है और ज्‍यादातर जर्मनी की पहचान manufacturing sector के साथ जुड़ी हुई है। भारत का भविष्‍य, भारत की पहचान बनाने में IT Revolution ने बहुत बड़ा role अदा किया है। भारत को एक पिछड़ा, अबूत देश मानने वाले को IT Revolution के बाद अपनी सोच बदलनी पड़ी है। लेकिन भारत की सफलता का आधार भारत को हमें manufacturing hub बना करके ही, हम सेकेंड पारी पर पहुंच सकते हैं।

और देश के विकास के लिए मेरे दिमाग में बहुत साफ है कि हमें एक Balanced growth करना पड़ेगा, भारत एक ऐसा देश है कि और इतना बड़ा विशाल देश है कि यहां की कोई चीज़ वहां के मतलब की हो, वो हिसाब बैठता ही नहीं। जब मैं यहां किसी को कहता हूं कि मुझे 2020 तक 50 मिलियन Affordable houses बनाने हैं तो उनके दिमाग में बैठता ही नहीं। उनको लगता है कि एक पूरा नया देश बनाना पड़ेगा। 50 मिलियन houses एक नया देश बनाना पड़ेगा! वो scale उनके दिमाग में बैठता ही नहीं है। लेकिन हमें मालूम है हमारी इतनी बड़ी आवश्‍यकता है और उस अर्थ में हम सोचे तो भारत को विकास के लिए तीन प्रमुख बातों को balance करके ही चलना पड़ेगा, हम एक तरफ लुढ़क नहीं सकते, One third agriculture sector, one third manufacturing sector, one third service sector. तीनों को balance करके आगे बढ़ना है। agriculture sector में भी सिर्फ खेत में कुछ उत्‍पादन करके अटक-सटक नहीं सकते। हमें agriculture sector को आगे बढ़ाना है, तो हमारे लिए आवश्‍यक है कि हम agro-processing को बल दें, agriculture sector में हम technology को आगे लाएं।

आज मैं हेनोवर फेयर में एक उन्‍होंने computer chip का मैंने development देखा। वो चावल को, अच्‍छे चावल - बुरे चावल को अलग करने का काम करता है। अब आने वाले दिनों में यही होने वाला है। अब ये हमें भी हमारे देश के agriculture sector को इन बातों पर पहला, एक प्रति हेक्‍टेयर हमारी productivity कैसे बढ़े, प्रति हेक्‍टेयर productivity बढ़ानी है, तो कौन सी technology, कौन से प्रयोग कैसे काम में आएगे, परम्‍परागत चीजें कैसे काम में आएगी? लेकिन हमारे किसान को affordable हो, हमारा agriculture sector वो तब होगा जब value addition हो।

और हम अच्‍छी तरह जानते है कि कोई किसान बेचारा आम बेचता है तो income कम होती है लेकिन आम में से अगर आचार बना देता है तो आचार के पैसे ज्‍यादा मिलते हैं। आचार भी अगर बढ़िया से बोतल में pack करें तो और ज्‍यादा पैसे मिलते है और pack किया हुआ आचार भी कोई नटी ले करके खड़ी हो जाए तो और ज्‍यादा पैसा मिलता है। An actress , नटी यानी actress वो खड़ी हो जाए तो और ज्‍यादा पैसे मिलते है कि भई ये advertising हो रहा है ये अगर खाती है, तो हम भी खाएं, अब वो खाती है कि नहीं खाती पता नहीं! लेकिन कहने का तात्‍पर्य ये है कि हमारे agro products का value addition. Value addition जितना ज्‍यादा हम कर सकते है अब उसमें technology लगती है, उसमें नई-नई खोज की आवश्‍यकता होती है। global requirement के अनुसार हमको उसको करना पड़ेगा और आज दुनिया में “ready to eat” packaging का मामला चल रहा है। दुनिया के किसी देश में कहां सब्‍जी पैदा हुई है, कहीं कटिंग हुआ होगा, कहीं पकी होगी, कहां पैक हुई होगी और पता नहीं दुनिया के किस देश में जा करके वो खाई जाती होगी। दुनिया काफी बदल चुकी है। हमने हमारे agriculture sector को विश्‍व की ये जो चीजे है इसके साथ जोड़ना है।

चाय में हमने वो सफलता पाई, हम जानते है कि चाय में हमें जो सफलता मिली उसकी बाद दो मूलभूत बातें रही है कि चाय ने व्‍यक्ति के जीवन में एक नई पहचान बनाई है, social relation का वो आधार बन गई, सामाजिक संबंधों के लिए वो एक बड़ा बहुत बड़ा liquidity वाला फोर्स बन गया है। एक प्रकार से और दूसरा उसकी सरलता, उसका पैकेजिंग और कभी किसी ने उससे क्‍या नुकसान होता है इसकी ज्‍यादा चर्चा नहीं की। वो accept हो गया दुनिया में। चाय के बागानों में खेती करने वाले लोग बड़ी-बड़ी कम्‍पनियां बन गई, लेकिन जो बेचारे मजदूर थे वो वहीं रह गए। क्‍योंकि अग्रेजों के जमाने में वो सारे rules and regulation बने थे, उसमें बदलाव आ रहा है, अब। मेरा कहने का तात्‍पर्य है कि हमारे पास इतनी सारी चीजें है हम हमारे agriculture sector में productivity बढ़ाने से ले करके value addition, value addition के साथ-साथ forward linkage , global market कैसे मिले?

भारत में एक छोटा सा राज्‍य है, सिक्किम 6-7 लाख population है, लेकिन वहां 10 लाख टूरिस्‍ट आते हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि हिन्‍दुस्‍तान के किस कोने में क्‍या ताकत पड़ी है? हिमालय की गोद में है, उस तरफ चीन है। उन्‍होने एक initiative लिया छोटा-सा राज्‍य है, organic farming का और उसने global सारे standard पार कर दिए है और आज सिक्किम हिन्‍दुस्‍तान का पहला organic farming का state बन चुका है। अब उनके लिए उनके जो product है उसका global market के लिए दरवाजे खुल गए है। हम कोशिश करना चाहते है कि उनको global market मिले, उनका रुपया डॉलर लेकर आना चाहिए, ये ताकत होनी चाहिए। organic farming में तो ये ही है। जिसमें रुपये में हिन्‍दुस्‍तान से जो माल जाता है, वो दुनिया के बाजार में डॉलर में जाना चाहिए और उस दिशा में काम करने का हमारी कोशिश है। सिक्किम ही नहीं पूरे देश में पूरा नॉर्थ ईस्‍ट नागालैंड, मिजोरम, मेघालय सारे प्रदेश ऐसे है कि जहां पर परम्‍परागत रूप से chemical fertilizers की आदत बहुत कम है। हम उसको organic state के रूप में, organic region के रूप में develop करना चाहते है। तो चीजों को उस प्रकार से हम बल देना चाहते है जिसके कारण उस क्षेत्र में बढ़ा चले।

दूसरा है service sector भारत के पास दुनिया को देने के लिए क्‍या नहीं है। tourism , hospitality, अतिथि देवो: भव: हमारे blood में है। लेकिन विश्‍व में हम tourism..जो कि दुनिया में सबसे तेज गति से, किसी एक व्‍यवसाय का विकास हो रहा है, तो वो टूरिज्‍म है। 3 Trillion dollar का वो बिजनेस है, बहुत बड़ा, लेकिन उसका share हिन्‍दुस्‍तान को कम से कम मिलता है। हमारे भारतीय लोग जो विदेशों में रहते है उनके मन में भी देश के लिए कुछ न कुछ करने का मन करता है क्‍योंकि मुझे कई पूछते है, कई वर्षों से पूछते है कि हम देश के लिए क्‍या कर सकते है। अब तुम्‍हें भगत सिंह बनने की जरूरत नहीं भाई! अब हो गया वो हमारे नसीब में नहीं था। जो भगत सिंह के नसीब में था। देश के लिए मरना हमारे नसीब में नहीं है, हम देश के लिए जी तो सकते हैं। देश के लिए मरने का सौभाग्‍य मिले या न मिले देश के लिए जीने का सौभाग्‍य तो मिलता ही है और इसलिए हमने कहा कि भई कम से कम भारतीय परिवार जो विदेशों में रहते है जहां आप काम करते हैं वहां आप विदेशी लोगों के बीच में है। दुकान चलाते होंगे तो आपके विदेशी ग्राहक होते होंगे, पढ़ते होंगे तो विदेशी टीचर्स होंगे। क्‍या साल में 5 गैर-भारतीय, Non-Indians ऐसे family को हिन्‍दुस्‍तान देखने के लिए आप प्रेरित नहीं कर सकते क्‍या? यहां छोटा-सा काम है। उनको समझाओं कि हमारा देश देखने जैसा है चलो, निकल पड़ो। हमारी जर्मनी में मान लीजिए कि एक लाख लोग रहते है, मान लीजिए 50 हजार परिवार रहते है। अगर हर वर्ष वो पांच परिवार को धक्‍का लगा दे, हिन्‍दुस्‍तान के टूरिज्‍म को कितना आगे बढ़ेगा फिर मुझे Incredible India के advertisement का खर्चा करना पड़ेगा क्‍या? आपसे बढ़ करके Incredible India की पहचान क्‍या हो सकती है? मुझे बताइएं? आप ही तो है Incredible India और क्‍या है? क्‍या उन पत्‍थरों और मूर्तियों में Incredible इंडिया है? उस विरासत के प्रतिनिधि आप है, आप ही Incredible India है। ये मिज़ाज क्‍यों नहीं होना चाहिए?

अगर ये मिज़ाज है, कहने का तात्‍पर्य मेरा है कि Service sector आज पूरी दुनिया में processing work इतना costly हो गया है कि हर कोई outsource कर रहा है। outsource के लिए हिन्‍दुस्‍तान में बहुत संभावनाएं है। आप यहां कई कम्‍पनियां है जो आउटसोर्स करने के लिए चाहती है, उनको जगह दिखा दें , address दे दीजिए भई! ये जगह है, करवा लीजिए।

सर्विस के क्षेत्र में हमारे देश में बहुत संभावनाएं पड़ी है। पूरे विश्‍व को आ‍कर्षित करने की हमारी ताकत है और हमें दुनिया को...हमारी सबसे बड़ी गलती क्‍या हुई है, जो चीज उसको अमेरिका में मिलती है, पेरिस में मिलती है, वो हम हिन्‍दुस्‍तान में परोसने जाते हैं, नहीं करना चाहिए। हमने हमें वो ही परोसना चाहिए जो हमारा है। तभी तो दुनिया हमारे यहां आएगी। हमारी जो विशेषता है उसी से दुनिया को हमें जोड़ना चाहिए। लेकिन हमारी विशेषताओं को साथ हम तब जोड़ पाएंगे, जब हम अपनी विशेषताओं पर गर्व करें। हम नहीं करते, हमें लगता है यार, मुझे याद है मुझे मैं अमरीकन सरकार के एक निमंत्रण पर एक बार गया था, मैं उनको अपने itinerary में लिखा था। मैंने पूछा था सबसे पुरानी चीज मुझे देखनी है तो मुझे दिखाइये, तो उन्‍होंने मुझे क्‍या दिखाया। मुझे वे Pennsylvania ले गये और वहां वाशिंग्‍टन के जमाने का एक बेल है, वो घंटा दिखाया और मुझे बोले यह सबसे पुराना है। मेरे यहां आप आइये आप एजेंता-एलोरा देखिए, आप कोणार्क का सूर्य मंदिर देखिए हजारों साल पुरानी चीजें हैं। हमारे पास क्‍या नहीं है, दुनिया में?

मैं गुजरात में पैदा हुआ, गुजरात में रहा, वहां एक डॉक्‍टर हरि भाई गोदानी थे। स्‍वयं तो professionally doctor थे। लेकिन Archaeology में उनकी बड़ी रूचि थी। उनकी आयु भी बहुत हो गई थी, लेकिन वह कर रहे थे। उस जमाने में यह सारी गाडि़यां तो थीं नहीं, Fiat गाड़ी, और Ambassador, Ambassador सरकारी गाड़ी थी, Fiat नागरिकों की गाड़ी थी। पहचान हो गई थी कि अंबेसडर जा रही होती थी तो सरकार जा रही है, Fiat है तो कोई भला इंसान जा रहा है, तो उनके पास एक Fiat कार थी, वो मुझे कह रहे थे, मैं उनके पास कभी कभी जाया करता था कुछ सीखने को मिले समझने को मिलता था। वे बोले कि मैंने 20 Fiat गाडि़यां बर्बाद कीं Carriage-carrier में। जो भी कमाता था, तो बोले जंगलों में चला जाता था। कच्‍चे रास्‍तों पर चला जाता था और कहीं कोई मूर्ति हो, पत्‍थर हो, तो कोई पुराना पुरातत्‍व का कोई खंडहर हो तो वहां चला जाता था। एक व्यक्ति का Individual collection site किसी सरकार से बड़ा था।

उन्‍होंने मुझे एक दिन अपनी slide दिखाई और मैं हैरान था कि वो slide एक पत्‍थर मूर्ति की Slide थी। आठ सौ साल पुरानी वो मूर्ति थी । कार्बन रेटिंग हुआ था और उसमें एक गर्भवती महिला की एक मूर्ति थी और आधे part में उसके पेट को काट करके एक मूर्ति बनाई गई थी और पेट काट करके बच्‍चा पेट में किस रूप में है, चमड़ी के कितने layers हैं, वो सारा पत्‍थर पर अंकित था। आठ सौ साल पहले पत्‍थर तराशने वाले को पता था कि गर्भ के अन्‍दर बच्‍चा कैसे, किस Position में होता है। चमड़ी के layer कितने होते हैं। आप कल्‍पना कर सकते हो ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में हमारे पूर्वजों ने क्‍या कुछ नहीं किया होगा?

लेकिन इस बात को पहुंचाने के लिए, हम एक ऐसे गुलामी के कालखंड से जीवित रहे जैसे हमारा सब बेकार है, हमारा सब बेकार है, जब तक हम ये मानसिकता नहीं बदलेंगे हम हमारे Tourism को बढ़ावा नहीं दे सकते। हमारे पास है, उसके प्रति हमारा गर्व होना चाहिए, अभिमान होना चाहिए। एक बार यह होगा, तो फिर चीजें चलेंगी।

अब आप देखिये, मैं गुजरात का हूं, इसलिए वहां की बात याद आना स्‍वाभाविक है। लोथल, लोथल अहमदाबाद से 80 किलोमीटर एक जगह है। लोथल आपने शायद पढ़ा होगा, याद होगा थोड़ा बहुत आज जाकर के गूगल गुरु से पूछ लीजिए वो बता देगा। पांच हजार साल पुराना Port और Archaeology excavation में सारी चीजें निकलेंगी और वो कहते हैं 84 Countries उसके झंडे वहां लहराते थे। मतलब 84 Countries के साथ, पांच हजार साल पहले उसका व्‍यापार था और दूसरी विशेषता देखिए कि नालंदा, तक्षशिला यूनिवर्सिटी की चर्चा हम जो करते हैं, उसी कालखंड में इतिहास में एक वल्लभी यूनिवर्सिटी की चर्चा होती है। वो वल्लभी यूनिवर्सिटी लोथल से 50 किलोमीटर दूरी पर थी, तात्‍पर्य ये था कि हमारे पूर्वजों को पता था विश्‍व के बच्‍चों को पढ़ने-लिखने के लिए आना है। तो एक पोर्ट चाहिए लोथल और पोर्ट के नजदीक में ही यूनिवर्सिटी चाहिए और अनेक देशों के बच्‍चे वहां पढ़ते थे।

ये सारी बातें आप भी सुनते हैं आपका भी सीना तन जाता होगा कि वाह मैं उस देश का रहने वाला हूं। ये जो गर्व की अनुभूति होती है, वो हमारे सर्विस सेक्‍टर में बल दे सकती है और ये काम हिन्‍दुस्‍तान का नागरिक जितना करेगा उससे ज्‍यादा हिन्‍दुस्‍तान से बाहर गया हुआ करेगा। लेकिन बाहर जाने के बाद, छोड़ो यार! ये तो देश ही है ऐसा। हम ही अपनी मजाक उड़ाएंगे, तो अपने देश का गर्व कभी बढ़ता नहीं है। ये भाव हमारे में पैदा हो तो मुझे विश्‍वास है।

और तीसरा जिस पर मैं बल देना चाहता हूं Manufacturing sector. भारत के पास Manufacturing hub बनने के लिए सब कुछ है। दुनिया में सबसे युवा देश है भारत। विश्‍व का सबसे नौजवान देश। 35 से नीचे भारत की 65 percent population है। और सारी दुनिया बुढ़ापे की आगे बढ़ रही है। ageing बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत जवान होता चला जा रहा है। आने वाले दिनों में average और बढ़ने वाली है। 25 से नीचे की संख्‍या बढ़ने वाली है। अब कभी हमें ये संकट लगता था आज वो सामर्थ्‍य बन गया है। अगर इन नौजवानों के हाथ में हुनर हो, skill हो, manufacturing के लिए बहुत बड़ा अवसर होगा और भारत एक ऐसा manufacturing hub बनें जहां Low cost manufacturing हो।

“Zero Defect-Zero effect” manufacturing हो। “Zero Defect-Zero effect” manufacturing मैं इसलिए कह रहा हूं क्योकि अगर globally competitive होना है तो आपकी हर चीज “zero defect” की होनी चाहिए और सिर्फ product नहीं packaging भी। अगर आपने लिखा है कि 220gm है, तो it must be 220gm. आखिकर credibility है, जो दुनिया में ताकत देती है और इसलिए zero defect के साथ हम manufacturing के sector में globally Competitive अपने आपको कैसे बनाएं और “zero effect”, environment पर इसका कोई असर न हो। उस प्रकार के process को हमें स्‍वीकार करना होगा। क्‍योंकि global warming, climate change ये जो सारी दुनिया चिंता कर रही है। उस समस्‍या से निकलने का रास्‍ता हिन्‍दुस्‍तान ही दिखा सकता है। हमारा काम है कि हम ये जो demographic dividend हमारे पास है, हम skill development करें, manufacturing hub बनें और आज हम दुनिया की कंपनियों को हम आ‍कर्षित करें और ये हम मान के चलें कि low cost manufacturing की ताकत हम लोगों की जितनी है शायद दुनिया में किसी की नहीं है।

Hollywood की फिल्‍म का बनाने का जितना खर्चा होता है, उससे कम खर्चें में हिन्‍दुस्‍तान के नौजवान Mars Mission को पार कर लेते हैं। मंगलयान! अब मुंबई हो, पुणे हो, अहमदाबाद हो, दिल्‍ली हो, लखनऊ हो, एक किलोमीटर का ऑटो रिक्‍शा जाना है तो खर्चा दस रूपये लगता है। हमें mars पर मंगलायन में एक किलोमीटर का सात रूपये खर्चा लगा है। कहने का तात्‍पर्य है कि ये ताकत हमारे देश के talent में है। हम दुनिया को समझा सकते हैं कि low cost manufacturing के लिए India is the best destination और इसलिए हम foreign direct investment चाहते हैं, manufacturing के sector में चाहते हैं। डिफेंस manufacturing, यहां इतने नौजवान हैं कई कंपनियों में काम कर रहे हैं, आपके पास सब कुछ है।

आज भी भारत को रोने के लिए विदेशों पर depend रहना पड़ता है। जब आंदोलन होते हैं, agitation जो tear gas छोड़ा जाता है वो tear gas बाहर से आता है। मैं घर में बैठकर बात कर रहा हूं, ऐसा नहीं कि हमारे पास ताकत नहीं है, अब आता तो है लेकिन कौन मेहनत करें। जी अब आता है, तो कौन मेहनत करे! इस मिजाज को मुझे बदलना है। हम खुद क्‍यों न बनाएं और इसलिए मेरे लिए manufacturing hub बनाना ये सिर्फ आर्थिक कार्यक्रम नहीं है, यह एक स्‍वाभिमान का आंदोलन भी है। आप मुझे बताइये आप अपने पड़ोसी से बार-बार कोई चीज लानी पड़े, तो आप कैसा महसूस कैसा feel करते हो। अपने यहां पुराने जमाने में गांव में रहते हैं तो कभी मेहमान आ गये, तो चीनी लानी है, तो पड़ोसी के घर से एक कटोरी में चीनी ले आते हैं। लेकिन कैसे लाते हैं, साड़ी के नीचे रखकर ले आते हैं इसलिए कि कहीं कोई देख न ले, क्‍यों स्‍वाभिमा!। मन में एक रहता है ठीक है कि चीनी नहीं है मेहमान अचानक आ गये तो चीनी लानी पड़ी। पड़ोस वाला कोई किसी को कहता नहीं था कि देखो मेहमान उसके यहां आते हैं और चीनी मेरे यहां से ले जाते हैं। ऐसा कोई नहीं करता है। कोई नहीं करता, लेकिन स्‍वाभिमान की चिंता रहती है कि ऐसे करके साड़ी में लपेट करके ले आएंगे। भारत भी बाहर से लाते समय, हमारे एक स्‍वाभिमान का issue होना चाहिए। अब मेरा देश दुनिया को देने वाला देश बनेगा, लेने वाला नहीं रहेगा ये दिमाग। और भारत के नौजवानों में ये ताकत है। हमें उन्‍हें अवसर देना है।

अब विकास की तीन चीज जो मैंने आपके सामने रखीं, सरकार के उस दिशा में कदम उठाए। दस महीने के भीतर-भीतर ढ़ेर सारे कदम उठाएं हैं। तेज गति से देश आगे बढ़ रहा है। पिछले दस साल, मैं एक थोड़ा सैम्‍पल देता हूं, दस साल का average था प्रति यानि per day 2km road बन रहा था। दस महीने का average है, per day 11 किलोमीटर road बनता है। काम करने वाली सरकार का क्‍या मतलब होता है? ये होता है।

हर चीज में, अब रेलवे आप कल्‍पना कर सकते हैं रेलवे के विकास की कितनी बड़ी संभावना है। अब लोगों को लगता होगा कि मोदी जर्मनी गये तो क्या करते होंगे? मुझे मालूम नहीं है कि दुनिया के लोग मुझसे क्‍या अपेक्षा करते होंगे? हिन्‍दुस्‍तान में हमारे मीडिया वालों की अलग अपेक्षा रहती है। मैं कल Berlin का रेलवे स्‍टेशन देखने जाने वाला हूं, खैर कोई हिन्‍दुस्‍तान का कोई ऐसा आदमी आया होगा जो स्‍टेशन देखने जाए, मैं आया हूं इसलिए कि मेरे मन में है हिन्‍दुस्‍तान में रेलवे स्‍टेशन की शक्‍ल बदलनी है। आज हमारे शहरों में heart of the city में railway station हैं। आप दिल्‍ली जाइए, लखनऊ जाइये कानपुर जाइये नागपुर जाइये कहीं पर जाइये। और महंगा land लैंड है और भारत में रेलवे प्‍लेटफार्म ही रेलवे स्‍टेशन नहीं होता है और गांव में 20 किलोमीटर रेल चलती है और सोई पड़ी हैं। दिन में दो बार ट्रेन जाती है। बाकी क्‍यों नहीं। क्‍या ऊपर बहुत बड़ा एक नया 20 किलोमीटर लंबा रेल की पटरियों पर शहर खड़ा नहीं हो सकता है क्‍या? स्‍टेशन आधुनिक नहीं बन सकते हैं क्‍या? दस मंजिला रेलवे स्‍टेशन नहीं हो सकते हैं क्‍या? नीचे ट्रेन चलती रहे और ऊपर 50 काम हो सकते हैं जी! विकास कैसे करना है इंफ्रास्‍टक्‍चर कैसे बदलाव करना है। रेलवे पूरा, हमारे दो शहरो को जोड़ने वाली जो ट्रेन है उसकी स्‍पीड को क्‍यों न बढ़ाया जाए। अगर अहमदाबाद से आये, अगर दिल्‍ली से अमृतसर जाना है, तो दिल्‍ली से चंडीगढ़ जाना है, दिल्‍ली से आगरा जाना है, High speed rail बन सकती है। ठीक हैं आज हम दुनिया में जो 300 किलोमीटर speed है वो नहीं होगी। लेकिन अगर हम 60 पर चलते हैं तो 120 तो हो सकते हैं जी। मेरी कोशिश यह है कि अनेक संभावनाओं को आगे बढ़ाना है और जितना हम आगे बढ़ाएंगे । देश नई ऊंचाईयों के द्वारा उससे हमें परिणाम मिलने वाला है।

पूरी दुनिया global warming के लिए चिंता करती है। अब यहां बैठ गये होंगे तो इस बात करने का बड़ा मजा आता होगा। तो मैं आज आपका खास क्‍लास लेना चाहता हूं ताकि अब आप दुनिया को समझा सको हम कौन लोग हैं। पता नहीं सारी दुनिया climate के संबंध में हमें गालियां देती रहती है। बर्बाद करने वाले लोग हमारा जवाब मांग रहे हैं। अगर प्रकृति की सबसे ज्‍यादा सेवा किसी ने की है तो भारतीय समाज ने की है। हम वो लोग है जो नदी को भी मां कहते हैं। पौधे को परमात्‍मा कहते हैं। छोड़ में रण छोड़ ये हम कहते हैं। और हमें ये दुनिया समझा रही है कि ये करो वो न करो भारत ने अपनी भूमिका स्‍पष्‍ट करनी चाहिए। दुनिया के सामने आज विश्‍व जिस संकट से गुजर रहा है। उस समस्‍या का समाधान हमारे सांस्‍कृतिक मूल्‍यों में है। हमारे जीवन के आदर्शों में जुड़ा हुआ है। ये विश्‍वास के साथ जाना चाहिए और ये भारतीय समाज से सर्वाधिक अपेक्षा है।

हमारे यहां महिलाएं जितना व्रत करतीं हैं, हिन्‍दुस्‍तान में सारे व्रत देख लीजिए प्रकृति की पूजा होती है वो। प्रकृति का सम्‍मान करना ये हमारे यहां संस्‍कार में होता है। हमारे यहां बच्‍चा बालक बिस्तर से नीचे उतरता है तो मां उसको सिखाती है कि पहले पृथ्‍वी माता से क्षमा मांगो। अपना पैर रखने से पहले, मैं मां तुझे दुखी कर रहा हूं मैं अपना पैर रख रहा हूं मां पहले पृथ्‍वी माता को प्रणाम करो फिर पैर रखो। ये हमारे संस्‍कृति और संस्‍कार में है। जिस समाज ने इसे संजोया हुआ है, आज विश्‍व को हिसाब देना पड़ रहा है। सूर्य के सात घोड़ों के रथ की कल्‍पना, सूर्य को शक्ति रूप में मानना हमारे यहां माना गया है।

जगदीश चन्‍द्र ने वनस्‍पति में जीवन होता है। ये कहा उसके बाद वनस्‍पति में जीवन आया ये नहीं है हम हजारों साल से पौधे में परमात्‍मा है, ये हम देखने वाले लोग हैं। कहने का तात्‍पर्य है इस विषय में हमारी अपनी mastery है हमारा सामर्थ्‍य है। हम दुनिया के जवाबदेह लोग नहीं है। दुनिया का जवाब हमने मांगना चाहिए कि आप हैं जिन्‍होंने प्रकृति को तबाह किया है। हम वो लोग हैं जो Milking of nature को मानते हैं, exploitation of nature उसे हम crime मानते हैं और इसलिए दुनिया जिन संकटों से गुजर रही है। उसके सामने हमारा तात्विक ताकत है खड़े रहने की, लेकिन जो समस्‍या है उसका समाधान भी ढूंढना पड़ेगा।

भारत ने एक बहुत बड़ा initiative लिया है Renewable energy का। जर्मनी आज इसमें एक model है। खासकर करके solar energy में। भारत ने 175 MW renewable energy का target तय किया है। भारत में giga-watt शब्‍द पहली बार आया है। हम मेगावॉट के ऊपर सोच नहीं पाते थे। पहली बार दस महीने में मेगावॉट से गीगावॉट सोचना तो शुरू कर दिया है। इतना काम तो कर लिया है। 175 गीगावॉट, उसमें से 100 giga-watt सोलर एनर्जी और 75 wind energy तथा biomass energy.....इन चीजों पर बल देना चाहिए। क्‍यों न जर्मनी की कम्‍पनियों को जो कि इस field में हैं, हमारे साथ आयें, manufacturing sector में हमारे लोग क्‍यों न आए? इतना बड़ा scope है वहां बिजनेस का, हम solar panel manufacturing की दिशा में क्‍यों न जाए? हम solar को और cheap करने के लिए innovation कैसे लाए? यहां जर्मनी में रहने वाले लोगों को इसका experience है। आप अपने-अपने experience को हिन्‍दुस्‍तान के साथ साझा कीजिए और स्‍पष्‍ट एरिया है काम करने के लिए कोई बाहर से ढूंढने जाना पड़े ऐसा नहीं है हम इसका फायदा कैसे उठाए?

मैं समझता हूं कि ग्‍लोबल वार्मिंग की समस्या से भी हम लड़ सकते हैं...आजकल हम सुनते है reuse and recycling. मैं समझता हूं कि हमारे यहां हमारे DNA में reuse and recycling , हमारे DNA में है लेकिन दुनिया हमको पढ़ा रही है, आपने देखा होगा अपने यहां गांव में घर में दादी मां रहती है, कपड़े पुराने हो जाएं तो उसमें से ओढ़ने के लिए रजाई बना लेती थी, वो reuse हुआ कि नहीं हुआ? अच्‍छा वो भी फट जाएं तो फिर उसमें से कपड़ों को खोल करके झाडू–पोचा करने के लिए उपयोग करती थी। हुआ कि नहीं हुआ? यानी एक चीज़ का कितना उपयोग करना वो हमारे लोगों की बड़ी expertise थी अब आज reuse and recycling शब्‍द ये हमको बाहर से सुनने पड़ रहे है।

आप देखिए हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में परम्‍परागत रूप से reuse and recycling ये हमारी सहज प्रकृति थी। मां भी जब बच्‍चा बड़ा होता था, 12-13 साल का होता था, कपड़े ठीक नहीं होते, वो कपड़े संभाल करके रख देती थी, क्‍यों दूसरे वाले के काम आएंगे और इसके लिए अखबारों में कोई article नहीं छपा था कोई 24 घंटे के टीवी चैनल पर कार्यक्रम नहीं आया था कि ऐसा करो-वैसा करो। किसी ने सिखाया नहीं था ये सहज प्रकृति थी।

लेकिन मैं हैरान हूं हमने अपनी बात दुनिया के सामने सीना तान करके रखी नहीं और विश्‍व हमको डांटता रहा कि carbon emission कम करो, carbon emission कम करो जबकि पूरे विश्‍व में per capita देखा जाए तो हम lowest हैं। फिर भी जवाब हम से मांगा जा रहा है। हम विश्‍वास के साथ खड़े हो जाएं तो climate , global warming इन सारे विषयों को हम दुनिया को रास्‍ता दिखा सके उस ताकत के साथ हम आगे बढ़ना चाहते है।

CoP -21 की मीटिंग अक्‍तूबर में फ्रांस में होने वाली है, सारी दुनिया का ध्‍यान है लेकिन हम उसका एजेंडा set करेंगे। मैं आपको विश्‍वास दिलाने आया हूं भारत एजेंडा set करेगा। और हमारे मूल्‍यों के निशान पर करेंगे हमने दुनिया को दिया है। हम दुनिया से लेने वाले लोग नहीं हैं, हम, ''सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।, इन आदर्शों से पैदा हुयीसंस्कृति हैं।

Eat-Drink and Remarry ये परम्‍परा हमारी नहीं है। हमारी परम्‍परा है

''सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः। सत्येन वायवो वान्ति सर्व सत्ये प्रतिष्ठितम्॥“

जिस परम्‍परा से हम लोग निकले हुए है हम दुनिया को देने के लिए पैदा हुए है हमारे हजारों साल का इतिहास रहा है। इस विश्‍वास के साथ भारत एक नई ऊंचाईयों को पार करें।

और मैं मानता हूं जर्मनी एक ऐसा देश है जिसने भारत को सही स्‍वरूप में विश्‍व के सामने प्रस्‍तुत करने का अभिरत प्रयास किया है और इसके लिए हमें जर्मनी का रिण स्‍वीकार करना चाहिए उनका पब्लिकली थैंक्‍स कहना चाहिए। Maxmuller से ले करके कितने ही महापुरूष देखें है.....एक जमाना था यहां पर रेडियो न्‍यूज संस्‍कृत में हुआ करते थे, जबकि भारत में नहीं होते थे क्‍योंकि वहां पता नहीं वो secularism का ऐसा तूफान खड़ा हुआ है कि उनको संस्‍कृति सुनने में भी secularism खतरे में पड़ जाता है। भारत का सेक्‍युलिजम इतना कच्‍चा नहीं है कि कोई भाषा के कारण वो हिल जाए। गहरी चट्टानों पर खड़ा हुआ हमारा सर्वपंथ-सर्वभाव का,

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्।

इस महान आदर्शों को ले करके हम चले हुए लोग हैं वो इसे हिलने वाले लोग नहीं है। हमारा आत्‍मविश्‍वास हिला हुआ नहीं होना चाहिए, उसमें हमें दम होना चाहिए मैं इसी विश्‍वास के साथ आधार पर कहता हूं सवा सौ करोड़ का देश 1/6 population of the world. हम अच्‍छा करेंगे दुनिया का अपने आप अच्‍छा हो जाएगा।

इसी एक भावना के साथ भारत आगे बढ़े, उस दिशा में प्रयास आगे चल रहा है। आप सबसे मिलने का अवसर मिला मुझे खुशी हुई मेरी आप सबको बहुत शुभकामनाएं है आप बहुत प्रगति करें भारत का नाम आप जहां भी हो रोशन करें और मैं आपको एक विश्‍वास दिलाता हूं आपका पासपोर्ट का रंग शायद बदल गया होगा, लेकिन पासपोर्ट के रंग बदलने से हमारे रिश्‍तों के ताने-बाने को कोई असर नहीं होता है। ये आप विश्‍वास कीजिए। हिन्‍दुस्‍तान हमेशा-हमेशा आपका है, आपके लिए है और हो सकता है कि आपके आने वाले योजनाओं के तहत वो आपके बदोलत भी बन जाए।

मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद।

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পি.এম.না গুজরাত্তা প্রধান মন্ত্রী গরীব কল্যান অন্ন য়োজনাগী বেনিফিসিয়রীশিংগা লোইননা ৱারী শাখিবগী ৱারোল
August 03, 2021
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মমাংদা, অহোংবা রাসন স্কীমশিংগী স্কোপ অমসুং বজেৎ হেনগৎহনবা লৈখ্রে অদুবু চাং অদুদা চরা হেনবা অমসুং চিঞ্জাক ফংদবগী অৱাবদি হন্থবা লৈখিদে: পি.এম.
প্রধান মন্ত্রী গরীব কল্যান অন্না য়োজনা হৌদোক্লবা মতুংদদি বেনিফিসরীশিংনা মমাংদা ফংখিবা রাসনগী চাংদগী শরুক অনি হেন্না ফংলি: পি.এম.
লায়চৎ মনুংদা চাদিং লুপা কোতি লাখ ২ হেনবনা মীওই কোতি ৮০ হেন্না লেম্না রাসন ফংহনখি: পি.এম.
লৈবাক অসিদা খ্বায়দগী চাউবা অৱা-অনা নংবা নত্তনা নাগরীক অমত্তনা চরা হল্লোই: পি.এম.
লায়রবদা শক্তি পীবা অসিনা ঙসিদি খ্বায়দগী মকোক্তা থম্লি: পি.এম.
ঐখোয়গী শান্নরোইশিংগী অনৌবা থাজবা অসিনা অনৌবা ভারতকী খুদম অমা ওইরক্লি: পি.এম.
লৈবাক অসিনা য়াম্না থুনা ভেক্সিনেসন্দা চংশিন্দুনা কোতি ৫০গী মফম অমা য়ৌরে: পি.এম.
অজাদী কা অমৃত মহোৎসবতা জাতি শেমগৎনবগীদমক অনৌবা ইনোৎ পীনবা ঐখোয়না শেংলবা ৱাশক লৌরসি: পি.এম.

খুরুমজরি! গুজরাতকী মুখ্য মন্ত্রী শ‌্রী ভিজয় রুপানিজী, উপ মুখ্য মন্ত্রী শ্রী নিতিনভাই পতেল, পার্লিয়ামেন্তগী ঐহাক্কী মরূপশিং অমসুং গুজরাতকী বি.জে.পি.গী প্রসিদেন্ত শ্রী সি.আর, পতিলজী, পি.এম. গরীব কল্যান অন্ন য়োজনাগী বেনিফিসিয়রী পুম্নমক অমসুং ইচিল-ইনাওশিং!

গুজরাতনা হৌখিবা চহিশিংদা লেপ্পা লৈতনা শেমগৎলকখিবা চাউখৎ-থৌরাং অমসুং থাজবা অসিনা ঙসি রাজ্য অসি অনৌবা মাইকৈদা পুররে। গুজরাত সরকারনা ঐখোয়গী ইচে-ইচলশিং, ঐখোয়গী লৌমীশিং, ঐখোয়গী লায়রবা ইমুং-মনুংশিংগী শেবা তৌনবগীদমক স্কীম খুদিংমক পাইখৎখি। ঙসো পি.এম. গরীব কল্যান অন্ন য়োজনাগী মখাদা গুজরাত্তা ইমুং-মনুং লাখ কয়াদা লেম্না রাসন য়েন্থোক্লি। মালেমগী ওইবা লাইচৎ অসিগী মতমদা লেম্না রাসন ফংহনবা অসিনা লায়রবশিংগী অৱাবা হন্থহল্লি, মখোয়গী থাজবা হেনগৎহল্লি। স্কীম অসি ঙসিতা হৌবা নত্তে, স্কীম অসিদি লৈবাক অসিদা লায়রবা অমত্তনা চরা হেল্লগা তুমবা তৌদনবা চহি অমরোমদগী চত্থদুনা লাক্লি।

ঐহাক্কী নুংশিরবা ইচিল-ইনাওশিং,

মসিনা লায়রবশিংগী ৱাখলদা থাজবা অমসু পোকহল্লি। মখোয়না শীংনবনা ফনা চাউরবসু লৈবাক অসিনা মখোয়গীদমক লেপ্পি হায়না ফাওবনা মরম ওইরগা থাজবা অসি পোক্লিবনি। মীকুপ খরগী মমাংদা ঐহাক্না বেনিফিসিয়রী খরগা ৱারী শাবগী খুদোংচাবা ফংজখি, ৱারী শানবা অদুদা মখোয়দা অনৌবা থাজবা অমনা থল্লি হায়না ঐহাক্নসু ফাওখি।

মরূপশিং,

নীং তম্লবা মতুংদা সরকার খুদিংমক্না লায়রবশিংদা চেং-চাক অহোংবা মমলদা পীননবগী ৱাফম হৌদোক্নখি। অহোংবা মমলদা চেং-চাক পীনবগী থৌরাংনা কোনশিনগদবা চাং অমসুং বজেদ চহি খুদিংগী চাউথোক্লি, অদুবু মদুগী কান্নবদি ইহেন হেনগত্তবগুম তৌরি। লৈবাকসিগী চীঞ্জাক পৈশিনবদি হেনগৎলক্লি অদুবু চরা হেনবা অমদি মচি ওইবা চীঞ্জাক ফংদবগী চাংদি হন্থবা লৈত্রি। মসিগী মরুওইবা মরম অমদি – মতিক চাবা দেলিভরীগী মওং মতৌ লৈতবনি অমসুং সিস্তেমদা অশোইবা খরসু লৈখি, কত তৌখ্রবা কম্পনীশিং চংলকপা, পুকচেল শেংদবগী ইলিমেন্তসু চংলকখি। ফীভম অসি অহোংবা পুরক্নবগীদমক ইং ২০১৪গী মতুংদা অনৌবা খোঙথাঙ অমগা লোয়ননা থবক হৌরকখিবনি। অনৌবা তেক্নোলোজীনা অহোংবা অসিগী মীদিয়ম ওইহনখি। সিস্তেমদগী শাশিন্নবা বেনিফিসিয়রী করোর কয়া লৌথোকখি। সরকারগী রাসনগী দুকানশিংদা রাসন কার্দশিংগা আধার অমসুং দিজিতেল তেক্নোলোজীগা লিঙ্ক তৌনবা থৌগৎখি। ঙসি মসিগী মহৈ ঐখোয়গী মাংদা উবা ফংলে।

ইচিল-ইনাওশিং,

চহি চামদা থোকপা খ্বাইদগী চাউবা খুদোংথিবা অসি মালেম পুম্বতা নত্তনা ভারত্তসু লাকখি, মসি মীওইবা জাতিদা অপুনবদা লাকখি। হিংনবগী লম্বীদা খুদোংথিবা অমা ওইখি, কোরোনাগী লোকদাউন্না মরম ওইদুনা লালোন-ইতিক তৌবা লেপখি। অদুবু লৈবাক অসিনা মহাক্কী প্রজাশিংবু চারা হেনহল্লগা তুমহনবদি তৌখিদ। লাইবকথিবদি লাইনা অসিগা লোইননা মালেমগী লৈবাক কয়াগী মীওইশিংনা চারা হেনবগী অচৌবা খুদোংচাদবা অমা মায়োক্নখি। অদুবু লাইচৎ অসিগী অহৌবা নুমিৎতগী ভারতনা খুদোংথিবা অসি মশক খঙদোক্তুনা মসিদা থবক পাইখৎপা হৌখি। মরম অসিনা প্রধান মন্ত্রী গরীব কল্যান অন্ন য়োজনা অসি মালেম পুম্বদগী থাগৎনরক্লি। ভারতনা লাইচৎ মনুংদা মহাক্কী প্রজা করোর ৮০ হেনবদা লেম্না চেং-চাক পীরি হায়না অচৌবা এক্সপর্তশিংনা থাগৎনরক্লি। লৈবাক অসিনা মসিগীদমক লুপা করোর লাখ ২ হেন্না চাদিং তৌরি। মসিগী মরু ওইবা পান্দমদি – ভারতকী ইচিল-ইনাওশিং, ভারত মচা অমত্তনা চরা হেল্লগা তুমদনবনি। ঙসি গেহুনা কিলোদা লুপা ২, চেঙনা কিলোদা লুপা ৩গী চাঙদা কান্নবা ফংলিবা মীপুম খুদিংমক্না থাদা গেহু নৎত্রগা চেঙ কিলো ৫গী চাংদা ফংলি। হায়বদি থৌরাং অসি চৎনদ্রিঙৈগী মমাঙদা কান্নবা বেনিফিসিয়রীশিংনা ফংলম্বা চাংগী শরুক অনি ফংলি। থৌরাং অসি দিৱালী ফাওবা চৎনগদৌরিবনি, দিৱালী ফাওবা লায়রবা অমত্তনা মখোয়গী মপুক থলহন্নবা মখোয়গী ফুরিৎ খাউদগী শেল শৎপা মথৌ তাহল্লরোই। গুজরাত্তসু ঙসি লেম্না রাসন ফংবগী কান্নবা অসি বেনিফিসিয়রী করোর ৩.৫রোমনা লৌরি। ঐহাক্না গুজারত সরকারনা লৈবাক অসিগী অতৈ শরুকশিংদগী থবক শুনবা লাক্লিবা শিন্মীশীংদা খুদোংচাবা অসি পীবীবগীদমক ঐহাক্না থাগৎপা ফোঙদোকচনীংই। কোরোনাগী লোকদাউন্না মরম ওইদুনা শোকহল্লবা শিন্মী লাখ কয়ানা স্কীম অসিগী কান্নবা ফংলি। রাসন কার্দ পাইদবা নত্ত্রগা মখোয়গী রাসন কার্দ অদু অতোপ্পা রাজ্যগী ওইবা অসিগুম্বা মরূপ কয়া লৈ। গুজরাত অসি ৱন নেসন, ৱন রাসন কার্দকী স্কীম চৎনহনবা অহানবা রাজ্যশিংগী মনুংদা অমা ওইরি।  গুজরাত্তা লৈয়া শিন্মী লাখ কয়ানা ৱন নেসন, ৱন রাসন কার্দকী কান্নবা ফংলি।

ইচিল-ইনাওশিং,

লৈবাক অসিগী চাউখৎ-থৌরাং অসি অচৌবা শহরশিংগীতা ওইরম্বা মতম অমা লৈরমখি। মফমশিং অদুদসু চাউখৎপা হায়বা অসি অখন্নবা মফমশিংদা অচৌবা ইকংথোংশিং শাবা, লম্বীশিং শেম্বা, মেত্রোশিং চেলহনবা অসি খক্তা ওইরমখি! হায়বদি খুঙ্গংশিং অমসুং শহর মচাশিং, ঐখোয়গী য়ুমগী মপান্দা তৌরিবা থবক, মীচম প্রজাশিংগী কান্নবগা মরী লৈনদবা থবক অসি চাউখৎ-থৌরাংনি হায়না খনখি। হৌখিবা চহি খরা অসিদা লৈবাক অসিনা মসিগী ৱাখল্লোন অসিদা অহোংবা পুরকখি। ঙসি লৈবাক অসিনা মাইকৈ অনিমক্তা থবক তৌবা পাম্লি, লম্বী অনিদা চৎপা পাম্লি। লৈবাক অসিনা অনৌবা ইনফ্রাস্ত্রকচরসু মথৌ তাই। ইনফ্রাস্ত্রকচরগীদমক লুপা লাখ করোর কয়া চাদিং তৌরি, মীয়ামসু থবক ফংলে অদুবু মসিগা লোইননা মীচম প্রজাগী পুন্সি মহিং ফগৎহন্নবা ইজ ওফ লিবিংগী অনৌবা কাংলোনশিংসু শেম্লি। ঙসি লায়রবশিংদা শক্তি পীবা হায়বা অসিদা মরু ওইবা মীৎয়েং চংলি। লায়রবা ইমুং-মনুং করোর ২দা য়ুমশিং পীখ্রে, মসিনা তাকপদি মখোয়না হৌজিক অইংবা, অশাবা, নোংজুগী অকীবা অদু থাদোক্লগা হৌজিক হিংবা ঙম্লগনি মসিতা নত্তনা মখোয়না মশাগী ময়ুম অমা লৈজবা মতমদা মশাদা মইশানা মশাবু ইকাই খুম্নবা ফাওগনি। ফীরেপশিং অসি মঙফাওনবা ঙম্নবা লায়রবা ইমুং-মনুংগা লোইননা অয়ুক নুমিদাং খাক্তনা অনৌবা ফীরেপশীংগা লোইননা মাংদা চংশিল্লসি। ইমুং-মনুং করোর ১০না দিফিকেৎ তৌরক্তবা হায়বা অসি মখোয়গী হিংবগী মওং-মতৌ অদু ফগৎলবনি। মহাক্না নুংঙাই-য়াইফবা ইমুং-মনুংশিংদি মখোয়গী ময়ুমশিংদা অমাংশঙ লৈ হায়না খনখি হৌজিক্তি মখোয় মশাগী য়ুমশিংদা অমাংশঙশিং লৈরে। লায়রবশিংনা মমথরকপা ঙাইদুনা লমহাংদা চৎলম্মি অদুবু হৌজিক্তি লায়রবশিংগীসু অমাংশঙ অমা লৈরে, মহাকসু ইনাক-কাইরক খুনবগা চাং মান্নরক্লে, মখোয়দা অনৌবা আশা অমা পোক্লে। মসিগা মান্ননা লৈবাক অসিগী লায়রবশিং অসি জন ধন একাউন্তশিংগী খুত্থাংদা বেঙ্কিং সিস্তেমগা কন্নেক্ত তৌবা মতমদা, লায়রবশিংগী খুত্তা মোবাইল বেঙ্কিং লৈরবা মতমদা মদুনা মহাক্কী পাঙ্গল ওইগনি, মহাক্না অনৌবা খুদোংচাবশিং ফংগনি। ঐখোয়গীসিদা হায়নবা লৈ -

সামর্থ্য মূলম
সুখমেব লোকে!

হায়বদি, ঐখোয়গী পাঙ্গলগী হৌরকফম অসি ঐখোয়গী পুন্সিদা হরাও-নুংঙাইবা ফংবা অসিনা ওইরি। শম্না হায়রবদা ঐহাক্না নুংঙাইবা তানরগা নুংঙাইবা ফংগদবা নত্তে, অদুবু ঐখোয়না থবক ওইনা পাঙথোকপা তাই, করিগুম্বা খরা ফংনবা হোৎনবা তাই। মসিগা মান্ননা, শক্তি পীবা হায়বা অসি হকশেল, এজুকেসন, খুদোংচাবা অমসুং ইজৎ হেনগৎলকবা মতমদা ঙমগনি। করোর কয়ানা আয়ুশ্মান য়োজনাগী খুত্থাংদা লেম্না লায়েং ফংবা মতমদা মখোয় হকশেলনা শক্তি পীরবনি। শোত্থরবা কাংলুপশিংগীদমক রিজর্বেসন থম্বা মতমদা এজুকেসনগী খুত্থাংদা কাংলুপশিং অসিদা শক্তি পীরিবনি। খুঙ্গংশিংগী লম্বীনা শহরশিংগা শম্নবা মতমদা, লায়রবা ইমুং-মনুংশিংনা লেম্না চাকথোং গ্যাস ফংবদা, লেম্না মৈগী কন্নেক্সন ফংবদা খুদোংচাবশিং অসিনা মখোয়বু শক্তি পী। মীওই অমনা হকশেল, এজুকেসন অমসুং অতৈ খুদোংচাবশিং ফংবা মতমদা মহাক্না মহাক্কী চাউখৎপগী মরমদা খল্লি, লৈবাক অসিগী চাউখৎপগী মরমদা খল্লি। মঙলানশিং অসি মঙফাওনবা ঙমহন্নবা ঙসি লৈবাক অসিদা মুদ্রা স্কীম, স্বনিধি স্কীম লৈরে। ভারত্তা অসিগুম্বা স্কীম কয়ানা লায়রবশিংনা ইজৎ লৈনা হিংনবগী লম্বী পীরি, মসিনা ইকাই খুম্নবগা লোইননা শক্তি পীনবা লম্বেল অমা ওইরি।

ইচিল-ইনাওশিং,

মীচম প্রজাগী মঙাল অসি মঙফাওনবা ঙম্নবা খুদোংচাবশিং ফংবা মতমদা, মখোয়গী ময়ুমশিংদা মশা মথন্তা লম্বী লাকপা হৌরবা মতমদা পুন্সিদা করম্না অহোংবশিং লাকই হায়বা গুজরাতনা য়াম্না মুন্না খংই। গুজরাতকী চাউরবা শরুক অমদা মীয়াম, ইমা-ইবেলশিং অমসুং ইচে-ইচলশিংনা মতম অমদা ঈশিংগীদমক কিলোমিতর কয়া শাংনা চৎপা মথৌ তারমখি। ঐখোয়গী ইমা-ইবেলশিং অমসুং ইচে-ইচলশিংনা মসিগী মীৎনা উহৌবা শাখিনি। রাজকোত্তা ঈশিংগীদমক ত্রেন অমা থাবা মথৌ তাখি। রাজকোত্তগী ঈশিং লৌগে হায়রবদি য়ুমগী মমাংদা কোম অমা তৌদুনা পাইপতগী ঈশিং অদু বালতিন্দা য়াদুনা থলহনবা তারমখি। অদুবু ঙসিদি সরদার সরোভর দাম, সৌনি য়োজনাগী খুত্থাংদা, কেনেলশিংগী নেৎৱর্ক্কী খুত্থাংদা নর্মদা ইমাগী ঈশিং অসি কচ্ছতা ফাওবা য়ৌহনবা ঙম্লে, কনা অমত্তনা মসি ওইথোক্কনি খলমদে অমসুং ঐখোয়গী লমদমদদি ইমা নর্মদাগী মমিংদা নীংশিংবদা ঐখোয়না কান্নবা ফংলি। ঙসি ইমা নর্মদা মশামক গুজরাতকী খুঙ্গং-খুঙ্গংদা চেল্লি, ইমা নর্মদা মশামক য়ুম-য়ুমদা য়ৌবা ঙম্লে, ইমা নর্মদা মশামক ঐখোয়গী থোংজিলদা লাক্তুনা ঐখোয়ু থৌজানবীরি। হোৎনখিবশিং অসিগী ফল ওইনা ঙসি গুজারত অসি চাদা ১০০ তোতি ঈশিং পীবা ঙম্বগী পান্দম অদু য়ৌগদবা খজিক্তং ঙাইরে। মীচম প্রজাগী পুন্সিদা পুরক্লিবা অহোংবা অসিগী খোঙজেল অসি লৈবাক পুম্বদা তপ্না-তপ্না য়ৌরক্লি। নীংখা তম্লবা মতুংদ চহি কয়া লৈরবা ফাইবা লৈবাক অসিগী খুঙ্গংগী য়ুমথোং করোর ৩০তমক তোতি ঈশিং ফংলি। অদুবু ঙসিদি জল জীবন মিসন অভিয়ানগী মখাদা শুপ্নগী চহি অনিদা ইমং করোর ৪.৫ হেনবদা তোতি ঈশিং য়ৌহনখ্রে মরম অসিনা ঐহাক্কী ইমাশিং অমসুং ইচে-ইচলশিংনা থৌজাল কয়া পীবীরি।

ইচিল-ইনাওশিং,

গুজরাতনা দবল ইঞ্জিন গভর্নমেন্তগী কান্নবশিং লেপ্তনা উবা ফংলি। ঙসি সরদার সরোভর দামদগী অনৌবা চাউখৎ থৌরাংগী ইচেল অমা চেনবতা নত্তনা ঙসি গুজরাত্তা স্তেচ্যু ওফ য়ুনিতীগী মওংদা মালেমগী অনৌবা এত্রেক্সন অমসু লৈরে। কচ্ছতা লিংখৎখিবা রিন্যুএবল ইনর্জী পার্ক অসিনা গুজরাতপু মালেম পুম্বগী রিন্যুএবল ইনর্জী মেপতা হাপ্লগনি। গুজরাত্তা রেল অমসুং এয়র কন্নেক্তিবিতীগী মতমগা চুনবা অমসুং অচৌবা ইনফ্রাস্ত্রকচর প্রোজেক্তশিং শেমগৎলি। গুজরাতজী অহমদাবাদ অমসুং সুরৎগুম্বা সহরশিংদা মেত্রো কন্নেক্তিবিতী অসি চাউথোরক্লি। গুজরাত্তা হেল্থকিয়র অমসুং মেদিকেল এজুকেসনগী লমদা শীংথানীংঙাই ওইবা থবক তৌরি। গুজরাত্তা হেন্না ফবা মেদিকেল ইনফ্রাস্ত্রকচর শেম শাখিবা অসিনা চহি ১০০দা থোক্লিবা খ্বাইদগী চাউবা মেদিকেল ইমর্জেন্সী অসি লাকশিনবদা অচৌবা থৌদাং অমা লৌখি।

মরূপশিং,

গুজরাত য়াওনা লৈবাক পুম্বদা লৈবাক মীয়ামগী, মফম খুদিংমক্কী মশানা মশাদা থাজবগী চাং হেনগৎহনগদবা থবক কয়া পাইখৎলি। মশানা মশাবু থাজবা হায়বসিনা শিংনবা পুম্নমকপু লান্থোক্নবা, মঙলান খুদিং মঙফাওনহন্নবা য়াম্না চাউবা পাম্বৈ অমা ওইরিবনি। হন্দক্তি ওলিম্পক্সতা ভারতকী শান্নরোয় মশিং খ্বায়দগী য়াম্না ক্বালিফাই ওইরি। মসি চহি ১০০সিদা খ্বাইদগী শাথিবা লাংফম অমা থেংনরিঙৈ মরক্তনি হায়বসি নীংশিংবিয়ু। ঐখোয়না অহানবা ওইনা ক্বালিফাই ওইবা মশান্না কয়া অমসু য়াওরি। ক্বালিফাই ওইবতা নত্তনা অকনবা মওংদা লম্বা তৌরিবনি। ঐখোয়গী শান্নরোইশিংনা গেম খুদিংমক্তা মখোয়না অঙম্বা থাক্তা শান্নরি। ওলিম্পিক্স অসিদা অনৌবা ভারতকী থাজবা অসি গেম খুদিংমক্তা উবা ফংলি। ওলিম্পিক্সতা শরুক য়ারিবা ঐখোয়গী শান্নরোইশিং অসিনা মখোয়দগী, মখোয়গী তীমশিংদগী রেঙ্ক ৱাংনা লৈরিবা শান্নরোইশিং অদুগা লম্বা তৌনরি। ভারতকী শান্নরোয়শিংগী থৌনা, ইহুল অমদি ইনোৎ অথোইবা থাক্তা লৈরি। অসুম্না মশাদা থাজবা অসি হৈশিংবশিংবু খঙদোক্তুনা মখোয়বু য়োকখৎপিবদগী লাক্লিবনি। অসুম্না মশাদা থাজবা অসি অওনবা, লৌথুপ লৌকোয় লৈতবা ফীভম পুরক্লবা মতমদা লাক্লিবনি। নৌনা মশাদা থাজবা থম্লক্লিবসি অনৌবা ভারতকী শক্লোন্নি। ঙসি থাজবা অসি লৈবাক অসিগী মফম খুদিংদগী, অপীকপা অমসুং অচৌবা খুঙ্গং, তাউন, ভারতকী কাচিন-কোয়াদা লৈরিবা লায়রবা, মিদল ক্লাসকী নহারোলশিংদগী লাকপনি।

মরূপশিং,

থাজবা অসি কোরোনাগী মায়োক্তা লান্থেংনবদা অমসুং ঐখোয়গী ভেক্সিনেসন কেম্পেন্দা লৈবা তাই। মালেমগী লাইচৎকী ওইরিবা ফীভম অসিদা ঐখোয়না মখা তানা চেকশিনবা মথৌ তাই। লৈবাক অসিনা ঙসি মীওই করোর ৫০ ভেক্সিনেসন তৌনবা খোঙজেল য়াংনা চংশিল্লি, গুজরাতনা ভেক্সিন দোজ করোর ৩০গী মাইলস্তনসু য়ৌগদৌরে। ঐখোয়না ভেক্সিন কাপথোকপা, মাস্ক উপ্পা অমসুং য়ারিবা মখৈ মীয়াম তিনদবা অসি ঙাক্না চৎপা তাই। ঐখোয়না উরে মদুদি মালেমগী মফম খরদা মাস্ক লৌথোকপা য়ারে লাউথোকখিবা অদু অমুক হন্না উপ্নবা খঙহনখ্রে। ঐখোয়না মখা তানা চেকশিনবা তাই।

মরূপশিং,

ঙসি ঐখোয়না প্রধান মন্ত্রী গরীব কল্যান অন্ন য়োজনাগী অসিগুম্বা অচৌবা প্রোগ্রাম অমা পাঙথোকপা মতম অসিদা ঐহাক্না ইরৈবাকচাশিংদা ফীরেপ অমা লৌহন্নীংই। ফীরেপ অসি লৈবাক শেমগৎনবা অনৌবা ইনোৎ য়কাইহনবা অদুনি। নীংতমখিবগী চহি ৭৫শুরকপদা, আজাদী কা অমৃত মহোৎসবতা ঐখোয়না শেংলবা ফীরেপ অসি লৌরসি। ফীরেপ অসি লৌনবা কেম্পেন অসিদা লায়রবা-ইনাক খুনবা, নুপী-নুপা, দলিত-শোত্থরবা পুম্নমক চপ মান্নৈ। গুজরাতনা তুংদা লাক্কদবা চহিশিংদা ঐখোয়গী ফীরেপ অসি থুংহনবা ওইরসনু, মালেমদা শক্তাকপা ঙম্নবা পাঙ্গল হাপ্লসনু, য়াইফ-পাউজেল অসিগী লোইননা ঐহাক্না অন্ন য়োজনাগী বেনিফিসিরীশিংবু অমুক হন্না নুংঙাইবা ফোঙদোকচরি!!! ময়াম্বা হন্না-হন্না থাগৎচরি!!!