শক্নাইরবশিং,

খুরুমজরি!

২শুবা ভোইস ওফ গ্লোবেল সাউথ মীফম লোইশিনবা থৌরমদা তরাম্না ওকচরি।

নুমিৎ চুপ্পা অমা পাংথোক্লিবা মীফম অসিদা লেতিন অমেরিকা, কেরিব্বিয়ান, অফ্রিকা, এসিয়া অমসুং পেসিফিক ইথৎশিংদগী লৈবাক ১৩০ রোম শরুক য়াবা অসিদা ঐ হরাওবা ফোঙদোক্লি।

চহি অমগী মনুংদা গ্লোবেল সাউথকী মীফম অনি পাংথোক্তুনা ময়াম পুম্নমক মশিং য়াম্না শরুক য়াবা অসি মালেমদা পীবা অচৌবা পাউজেল অমা পীরে।

গ্লোবেল সাউনা পাম্লিবা পাউজেলদি মসিগী ওতোনোমি অসিনি।

গ্লোবেল সাউথকী পাউজেলদি মালেমগী লৈঙাক্লোন্দা মসিগী খোল্লাউ তাবনি।

গ্লোবেল সাউথকী পাউজেলদি মালেমগী থবক-থৌরমশিংদা হেন্না থৌদাং লৌনবা থৌরাং তৌবনি।

শক্নাইরবশিং,

ঐখোয়গী মান্নবা অনিংবশিং অমসুং অপাম্বশিং খন্ন-নৈন্নবগী খুদোংচাবা অমা ঙসিগী মীফম অসিনা ঐখোয়দা অমুক হন্না পীরে।

জি-২০গুম্বা মরুওইবা ফোরম অমদা গ্লোবেল সাউথকী খোল্লাউ তানবা খুদোংচাবা পীবা অসিদা ভারতনা চাউথোকচবা অমা ফাওই।

মসি অদোম্না মপুংফানা শৌগৎপা অমসুং অদোম্না ভারত্তা চেৎনবা থাজবদগী ওইহনবনি। মসিগীদমক, ঐনা অদোম ঐগী থম্মোয়দগী থাগৎপা ফোঙদোকচরি।

জি-২০ মীফমদা ৱাফম কয়া পুখৎপা অসিনা মতম মতমগী মতুংইন্না মালেমগী লৈবাকশিংনা অমনা অমগী খোল্লাউ তাগনি হায়না ঐনা থাজবা থম্লি।

শক্নাইরবশিং,

অহানবা ভোইস ওফ গ্লোবেল সাউথ মীফমদা ঐনা থাজবা কয়া পীখ্রে।

থাজবা পীখিবশিং অদু থবক ওইনা পাংথোকপা হৌরকপা অসিদা ঐ হরাওবা ফোঙদোক্লি।

ঙসি অয়ুক “দাক্ষিন” কৌবা গ্লোবেল সাউথ সেন্তর ফোর এক্সলেন্স হাঙদোক্লে। সেন্তর অসিনা চাউখৎলক্লিবা লৈবাকশিংনা চাউখৎ-থৌরাংগী লমদা থেংনরিবা ৱাফমশিং থিজিনবগী থবক তৌগনি।

হায়রিবা থবক অসিনা গ্লোবেল সাউথকী খুদোংচাদবশিং কোকহন্নবা পাম্বৈশিংসু থিগনি।

অরোগ্যা মাইত্রিগী মখাদা, ভারতনা হিদাক-লাংথকশিং অমসুং তঙাইফদবা পোৎলমশিং ফংহল্লে।

হৌখিবা থাদা, ঐখোয়না পেলেস্তাইন্দা তন ৭গী হিদাক-লাংথকশিং অমসুং মেদিকেলগী পোৎলমশিং পীখ্রে।

নবেম্বর ৩দা নেপালদা য়ুহা হাখ্রবা মতুংদা, ভারতনা নেপালদা তন ৩গী হিদাক-লাংথকশিং থাখ্রে।

গ্লোবেল সাউথকী লৈবাকশিংদা ভারতনা দিজিতেল হেল্থ সর্বিস ফংহনবদা লৈবাক অসিনা হরাওবা ফোঙদোক্লি।

গ্লোবেল-সাউথ সাইন্স অমসুং তেক্নোলোজি ইনিসিয়েতিপকী খুৎথাংদা, কেপাসিতি বিল্দিং অমসুং রিছার্সকী লমদা গ্লোবেল সাউথ মতেং পাংনবা ঐখোয়না থাজবা থম্লি।

“জি-২০ সেতিল্লাইত মিসন ফোর ইনভাইরোনমেন্ত এন্দ ক্লাইমেত ওবজর্বেসন”না গ্লোবেল সাউথকী লৈবাকশিংদা ক্লাইমেত অমসুং ৱেদের দেতা শরুক য়ামিন্নগনি।

গ্লোবেল সাউথ স্কোলারশিপ প্রোগ্রাম হৌদোকপদা ঐ হরাওই। হৌজিক গ্লোবেল সাউথকী লৈবাকশিং ভারত্তা অৱাংবা থাক্কী মহৈ-মশিং তম্বগী খুদোংচাবশিং ফংলগনি।

চহি অসিদা তাঞ্জানিয়াদা ভারতকী অহানবা ইন্দিয়ান ইন্সতিতুৎ ওফ তেক্নোলোজি কেম্পস হাংদোক্লে। মসিগী অনৌবা থবক অসিনা গ্লোবেল সাউথতা কেপাসিতি বিল্দিং শেমগৎপদা মতেং পাংলগনি।

ঐখোয়গী নহা ওইরিবা দিপ্লোমেতশিংগীদমক, জনুৱারিদা গ্লোবেল-সাউথ য়ুং দিপ্লোমেতস ফোরম পাংথোক্নবা ঐনা ৱাফম হৌদোক্লে। মসি হৌদোকপগী ইদিসন অসিদা ঐখোয়গী লৈবাক্কী নহা ওইরিবা দিপ্লোমেতশিং শরুক য়াগনি।

শক্নাইরবশিং,

মথং চহিদগী ভারত্তা চহিগী ওইবা মালেমগী মীফম অমা পাংথোকপা হৌনবা ৱাফম ঐখোয়না হৌদোক্লে। মসিদা গ্লোবেল সাউথকী চাউখৎ-থৌরাংগী থবকশিংদা মরুওইবা মীৎয়েং থমগনি।

মীফম অদু গ্লোবেল সাউথকী রিছার্স সেন্তরশিং অমসুং থিঙ্ক-তেঙ্কশিংগা পুন্না পাংথোকমিন্নগদবনি।

মীফম অসিগী মরুওইবা পান্দমদি গ্লোবেল সাউথকী চাউখৎ-থৌরাংগা মরী লৈনবা খুদোংচাদবশিং কোকহন্নবা পাম্বৈশিং মশক খঙদোকপনি।

শক্নাইরবশিং,

মালেমগী শান্তি অমসুং তুংদু-লৈতাবদা ঐখোয়গী মান্নবা অপাম্বশিং লৈরি।

নোংচুপ এসিয়াগী অরুবা ফিবমগী মতাংদা ঙসি অয়ুক ঐগী ওইবা ৱাখল্লোনশিং ফোঙদোকখ্রে।

হায়রিবা মুক্নবশিং অসিনা গ্লোবেল সাউথতা অচৌবা চৈথেং অমা পীরে।

অপুনবা থবকশিং, অমতা ওইবা খোল্লাউদা হায়রিবা খুদোংচাদবশিং কোকহন্নবা পাম্বৈ অমা থিবা হায়বসি য়াম্না মরুওই।

শক্নাইরবশিং,

ঐখোয়গী ইরক্তা মথংগী জি-২০গী প্রসিদেন্ত ওইগদৌরিবা ব্রাজিলগী প্রসিদেন্ত, ঐগী মরুপ, ব্রাজিলগী প্রসিদেন্ত লুলা শরুক য়ারি।

ব্রাজিলনা জি-২০গী প্রসিদেন্ত ওইবগী মখাদা, গ্লোবেল সাউথকী মরুওইবা থবকশিং মখা তানা পায়খৎকনি হায়না ঐনা থাজবা থম্লি।

ত্রোইকাগী মেম্বর অমা ওইনা ভারতনা ব্রাজিল মপুংফানা শৌগৎকনি। মহাক্কী ৱাখল্লোনশিং ফোঙদোক্নবা ঐনা ঐগী মরুপ প্রসিদেন্ত লুলাদা হায়জরি।

অদোম থাগৎচরি!

 

Explore More
প্রধান মন্ত্রীনা শ্রী রাম জন্মভুমি মন্দির দ্বাজরোহন উৎসবতা পীখিবা ৱারোলগী মৈতৈলোন্দা হন্দোকপা

Popular Speeches

প্রধান মন্ত্রীনা শ্রী রাম জন্মভুমি মন্দির দ্বাজরোহন উৎসবতা পীখিবা ৱারোলগী মৈতৈলোন্দা হন্দোকপা
Net direct tax collection grows 23% to over ₹8.11 trillion till August 10

Media Coverage

Net direct tax collection grows 23% to over ₹8.11 trillion till August 10
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Shri Ram Nath Kovind’s autobiography will become a treasure for Indian democracy and Indian society: PM Modi
August 12, 2026


हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय ओम बिरला जी, श्रीमती सविता कोविंद जी, सभाग्रह में सभी वरिष्ठ जन बैठे हैं, सबका उल्लेख नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मेरे लिए बहुत आनंद है कि एक पारिवारिक कार्यक्रम लग रहा है।

भाइयों-बहनों,

आज हमें श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है, उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और इस सबके साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह, उनकी आत्मीयता, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है। मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफ़ी अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी। कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र के लिए उनका योगदान, ऐसा कितना कुछ है जिसके बारे में मैं विस्तार से बात कर सकता हूं, लेकिन बुक रिलीज़ में केवल ‘कर्टन रेज़र’ ही होना चाहिए। आप सब किताब का पूरा लाभ पढ़कर ही लें, तो ही ज्यादा अच्छा है।

साथियों,

कोविंद जी की जीवन यात्रा को आप उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी को, उनके अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मैं रामनाथ कोविंद जी को इस आत्मकथा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी इस पुस्तक को बहुत ही सटीक नाम दिया है- “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” कहने का भाव ये कि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है।

साथियों,

हम सब अक्सर अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है, लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं और जीवन की मुश्किलों के लिए, कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हों, तब व्यक्ति समाज की कमियाँ निकालने में समय नहीं गँवाता, वो उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। आप उनका जीवन देखिए, एक बेहद सामान्य परिवार में, कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अभी भी कुछ वर्णन किया और अपनी किताब में भी लिखा है, कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी माँ अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं। आखिर, एक सामान्य परिवार में, माँ के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में, आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, माँ को इस तरह खो देना, ये कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।

साथियों,

उनके जीवन का एक ऐसा दर्दनाक ये घटनाक्रम था, कोई भी इससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों ने मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की। इससे उन्होंने समाज की एकता और सौहार्द की ताकत को समझा। इस घटना के बाद कोविंद जी के जीवन में उनके पिता की भूमिका और बड़ी हो गई और जिस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, बच्चों को संस्कार दिये, इसीलिए, कोविंद जी अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।

साथियों,

बचपन के इन संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, उन्होंने संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। और, एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी। वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने।

साथियों,

इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व, उनकी सादगी ऐसे ही कायम रही। मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने वहाँ अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। पूरे देश ने वो भावुक दृश्य देखा था। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कुछ खोया था। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुँचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुद का जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न को, उस विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं। हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।

साथियों,

ऐसे युवाशक्ति के निर्माण के लिए जो प्रेरणा चाहिए, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी जीवनी में मोरारजी भाई देसाई के साथ अनुभवों के बारे में भी इसमें विस्तार से बताया है। कोविंद जी के भीतर देशसेवा की जो भावना थी, मोरारजी भाई के साथ काम करके उन्हें जो सीखने को मिला, जो रास्ता मिला। कोविंद जी ने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया। वो अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे। सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में भी हमें उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहाँ तक कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। देश को जगा रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूँ, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुये ऑटोबायोग्राफ़ी के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। कोविंद जी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं। कैसे एक साधारण परिवार मुश्किल हालातों में भी जीवन की शुचिता और ईमानदारी से समझौता नहीं करता, कैसे वही आदर्श आगे चलकर हमारे जीवन का आधार बनते हैं, हमारे कठिन समय के मूल्य किस तरह जीवनभर हमें रोशनी देते हैं, कैसे इस पवित्रता से हमें राष्ट्र सेवा की शक्ति मिलती है। अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।

साथियों,

मुझे विश्वास है, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी, इसमें उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियाँ सुरक्षित होंगी। मैं एक बार फिर उन्हें उनकी आत्मकथा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। और मैं खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करूंगा, रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड की इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। इतिहास से काफी निकट होता है वो कालखंड बायोग्राफी का और इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि कोविंद जी की जो मेहनत है, वो आने वाली पीढ़ियों को काम आए, युवा पीढ़ी को विशेष रूप से काम आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।